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  • राजस्व संग्रहण का एक्शन प्लान बनाएं-CM

    रिपोर्ट: रांची से …….

    झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक में कहा, “राजस्व संग्रहण का एक्शन प्लान बनाएं।” उन्होंने यह भी समझाया कि विभागों के बीच समन्वय की कमी से राजस्व का पहिया थम जाता है। यह तो सही बात है, लेकिन क्या सचमुच विभागों के बीच तालमेल की कमी ही अकेली समस्या है?

    बोर्ड, निगम और एजेंसियां: नया बिजनेस मॉडल?
    मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य की एजेंसियों और बोर्ड को “बिजनेस मॉडल” में बदला जाए।

    सीएसआर पर नजर: कंपनियों से क्या उम्मीदें?
    बैठक में कहा गया कि राज्य में कार्यरत कंपनियों और उद्योगों की सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पूछा कि कंपनियां सीएसआर में कितना खर्च करती हैं और उसका उपयोग कहां होता है, इसकी जानकारी सरकार को क्यों नहीं है?
    राजस्व का सच: कौन करेगा खर्च की निगरानी?
    राजस्व की बर्बादी रोकने और स्थापना व्यय को नियंत्रित करने की बात हुई। यह अच्छा है कि सरकार को राजस्व प्रबंधन की चिंता है। लेकिन क्या यह चिंता तभी उभरती है जब खजाना खाली होता है?
    राज्य में पहले भी राजस्व उगाही के नाम पर आम जनता पर नए कर लगाए गए हैं। सवाल यह है कि इस बार सरकार का एक्शन प्लान जनता की सहूलियत के लिए बनेगा या उन पर नई आर्थिक मार के रूप में सामने आएगा?

    दिखेगी समन्वय की तस्वीर?
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समन्वय बनाने की सलाह दी। लेकिन सच यह है कि जब तक राजनीति और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होगा, विकास की रफ्तार थमी रहेगी। सवाल सिर्फ समन्वय का नहीं है, बल्कि इरादे का भी है।

    राज्य की जनता इस बैठक से निकलने वाले एक्शन प्लान पर नजरें गड़ाए बैठी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्व बढ़ाने की यह कवायद जनता की भलाई के लिए होगी, या फिर मुनाफे की नई स्क्रिप्ट का हिस्सा।

    (झारखंड के राजस्व संकट और उसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री की बैठक पर आधारित रिपोर्ट।)

  • महिलाओं के खातों में 2500 रुपये । तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर !

    RANCHI: “हेमंत सोरेन सरकार के ‘मंईयां सम्मान योजना’ की पांचवीं किस्त पर नज़र डालिए। वो जो बदलाव की धारा बहती है, वो अब महिलाओं के खातों में 1000 नहीं, पूरे 2500 रुपये लेकर आ रही है। झारखंड के गांव-गांव, शहर-शहर से एक ही आवाज़ गूंज रही है – ‘मंईयां का सम्मान बढ़ा है, हर घर में खुशियां छाई हैं।’”

    झारखंड की सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक:
    57 लाख महिलाओं के खातों में 2500 रुपये पहुंचने को हैं तैयार। तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर! कल्याण विभाग पसीना बहा रहा है ताकि हर बहन के चेहरे पर मुस्कान आए। सोचिए, अब तक चार किस्तों में जो 1000 रुपये भेजे गए थे, उनकी जगह 2500 रुपये मिलेंगे।

    चुनावी राजनीति का सियासी खेल:
    विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘गोगो दीदी योजना’ में 2100 रुपये का वादा किया। लेकिन हेमंत सोरेन, जो अपने वादों पर अडिग रहते हैं, उन्होंने सीधे 2500 का दांव खेला। और चुनावी नतीजों ने दिखा दिया कि ये दांव सफल रहा। इंडिया गठबंधन ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की, और मंईयां सम्मान योजना इसमें एक बड़ा कारण बनी।

    झारखंड के घरों की चूल्हे की बातें:
    “अब चूल्हे पर सिर्फ खाना नहीं, सपने भी पकेंगे,” कह रही हैं मरियम बीबी , जो इस योजना से बेहद खुश हैं। ग्रामीण झारखंड में ये योजना एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

    रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते

    झारखंड में मंईयां योजना को चालू रखने के लिए राज्य सरकार को संसाधनों की कमी होने के आसार अभी तक नहीं है। वित्त विभाग के अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में झारखंड ने कहीं से कर्ज नहीं लिया है और सरप्लस बजट भी रहा है।
    ऐसे में कर्ज लेकर रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते। सरकार एक बार फिर इस योजना के लिए कोई कर्ज नहीं लेगी। ऐसे में यह तय होता दिख रहा है कि कर्ज लिए बगैर भी मंईयां योजना को जारी रखा जा सकता है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार इस उपलब्धि के पीछे पिछले चार-पांच वर्षों से चले आ रहे वित्तीय सुधारों का व्यापक असर है।
    हेमंत सरकार की ये योजना न सिर्फ आर्थिक मदद, बल्कि सामाजिक बदलाव की कहानी भी लिख रही है। ये सिर्फ 2500 रुपये नहीं, ये महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक है।

     

  • झारखंड की नई पहल: दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों के सपनों को पंख!

    रांची की सुबह आज नई उम्मीदों से रोशन हुई है। झारखंड सरकार ने दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से, राज्य सरकार इन बच्चों की उच्च और तकनीकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी।

    क्या है योजना?
    सरकार 10 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस खुद वहन करेगी और हर महीने छात्रों को 4,000 रुपये भत्ता भी दिया जाएगा। छात्रों के लिए एक “ऑनलाइन पोर्टल” तैयार किया जा रहा है, जहां वे इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे।

    किसे मिलेगा लाभ?
    सरकार की नई “वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना” का उद्देश्य हर साल 12,000 स्नातक और परास्नातक छात्रों और 1,200 व्यावसायिक कोर्स करने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचना है। लेकिन ये संख्या आखिरी नहीं है। राज्य के किसी भी संस्थान में नामांकन लेने वाले छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। अन्य राज्यों के छात्रों के लिए यह सुविधा केवल टॉप श्रेणी के संस्थानों में पढ़ाई करने वालों तक सीमित रहेगी।

    शर्तें क्या हैं?

    लाभुक को झारखंड का स्थानीय निवासी होना चाहिए।
    डिप्लोमा के लिए दसवीं और डिग्री कोर्स के लिए दसवीं व बारहवीं झारखंड के स्कूलों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
    क्यों है ये कदम ऐतिहासिक?
    दिव्यांग और अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब न केवल आसान होगी, बल्कि यह उनके सपनों को साकार करने का एक बड़ा माध्यम बनेगी। 99.66 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह योजना, न केवल आर्थिक बाधाओं को हटाएगी, बल्कि समाज में समावेशिता और समानता का एक नया अध्याय भी लिखेगी।

    सरकार की सोच और तैयारी
    इस योजना की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी, जिसमें उच्च शिक्षा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा निदेशक और तकनीकी शिक्षा निदेशक जैसे विभागीय पदाधिकारी शामिल होंगे। सरकार ने इसे जनवरी-फरवरी 2025 में लांच करने का लक्ष्य तय किया है।

    “ये कदम सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की बुनियाद है, जो अब उड़ान भरने को तैयार हैं।” झारखंड सरकार की यह पहल एक मिसाल है, जो पूरे देश को दिखाती है कि शिक्षा का हक हर बच्चे का है।

    आइए, इस बदलाव का हिस्सा बनें, जहां हर बच्चा पढ़ेगा, बढ़ेगा और सपनों को हकीकत में बदलेगा!

  • झारखंड और असम: राजनीति के चाय बागानों में नई बयार!

    रांची से पवन हवाओं के संग आई एक नई खबर, झारखंड की मिट्टी से लेकर असम के चाय बागानों तक सियासी सुगंध फैल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी नई पारी की पहली ही कैबिनेट बैठक में चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए असम में एक सर्वदलीय टीम भेजने का ऐलान किया। ये फैसला जितना सरल दिखता है, उतना ही गहरा संदेश देता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि झारखंड के कुछ इलाकों का अध्ययन करने के लिए उनकी सरकार भी दो प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। “हम देखेंगे कि आखिर झारखंड में ऐसी कौन-सी ‘विशेष चीजें’ हैं जो ध्यान खींच रही हैं।”

    पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान झामुमो और भाजपा के बीच घुसपैठ और आदिवासियों की स्थिति पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। अब लगता है कि इस राजनीतिक मंथन का ‘अध्ययन यात्रा’ के रूप में नया अध्याय शुरू हो गया है।

    हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान भी दिलचस्प है कि उनकी सरकार 5 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर और निर्णय लेगी। लेकिन सवाल उठता है कि यह अध्ययन असल में ज़मीन पर आदिवासियों की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश है, या फिर राजनीति के चाय बागानों में सियासी चाय की मिठास बढ़ाने की कवायद?

    हेमंत सोरेन की यह पहल उनके नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में पहले कदमों को निर्णायक बनाने की कोशिश है। लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा का पलटवार संकेत देता है कि सियासत की इस चाय में खौलने वाले मुद्दे सिर्फ झारखंड या असम तक सीमित नहीं रहने वाले।

    आखिरकार, राजनीति भी तो उसी चाय की तरह है, जिसकी मिठास उसकी कड़वाहट के सही संतुलन से तय होती है। सवाल ये है कि इस बार इस चाय के प्याले में किसकी चीनी कम या ज्यादा पड़ेगी?

  • झारखंड : बालिका गृह में यौन शोषण का शर्मनाक मामला, संचालक और कर्मी गिरफ्तार

    RANCHI: झारखंड के पलामू जिले के सुदना इलाके में स्थित एक बालिका गृह में यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। दो बच्चियों ने बालिका गृह के संचालक और एक महिला कर्मी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब शुक्रवार को कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता बालिका गृह का दौरा करने पहुंचे।

    आपबीती सुनाते हुए रो पड़ीं बच्चियां
    28 बच्चियों वाले इस बालिका गृह में रह रहीं दो लड़कियों ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के सामने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि संचालक ने उनके साथ घिनौनी हरकत की और महिला कर्मी ने इस गुनाह में उसका साथ दिया। एक बच्ची ने कहा कि यह घटना दीपावली और छठ के दौरान हुई, जब उन्हें संचालक के घर ले जाया गया। दूसरी बच्ची ने भी ऐसे ही शोषण के प्रयास का खुलासा किया।

    पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
    इस मामले में पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चियों के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल, दोनों आरोपियों—बालिका गृह के संचालक और महिला कर्मी—को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट की गईं बच्चियां
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी 28 बच्चियों को बालिका गृह से निकालकर सखी वन स्टॉप सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चियों को एक सुरक्षित माहौल में रखा जाए।

    मुजफ्फरपुर कांड की यादें ताजा
    यह मामला बिहार के कुख्यात मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता संध्या सिन्हा ने इस घटना को बाल सुरक्षा व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, “यह घटना बताती है कि बालिका गृहों की निगरानी और जांच की प्रक्रिया में अब भी गंभीर खामियां हैं।”

    प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
    इस घटना ने न केवल प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है। यह जरूरी है कि ऐसे संवेदनशील संस्थानों की नियमित जांच की जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    क्या बाल सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं?
    पलामू का यह मामला एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा के नाम पर चलने वाले इन संस्थानों की जवाबदेही कब तय होगी। दोषियों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन यह तब क्यों नहीं रोका गया, जब ये बच्चियां पहली बार पीड़ित हुईं?

     

  • झारखंड में विधान सभा सत्र का ऐलान : नये अध्यक्ष का चुनाव

    RANCHI: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की पहली परीक्षा तय हो गई है। 9 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय विधानसभा सत्र ने सियासी हलचल को गरमा दिया है।

    पहला दिन: नव निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण।
    दूसरा दिन:चुना जाएगा।
    तीसरा दिन: राज्यपाल का अभिभाषण, और फिर सरकार पेश करेगी वित्तीय वर्ष 2024-25 का दूसरा अनुपूरक बजट।
    आखिरी दिन: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस।

    अब सवाल यह है कि चार दिन में हेमंत सरकार कितना कुछ साध पाएगी?

    बजट से बड़ी उम्मीदें .
    इस सत्र में सरकार न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश करेगी, बल्कि मंईयां सम्मान योजना समेत कई जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनुदान की मांग भी रखेगी। लेकिन क्या सिर्फ योजनाओं का ऐलान, ज़मीन पर क्रियान्वयन के भरोसे में तब्दील हो पाएगा?

    कैबिनेट विस्तार की अटकलें जारी
    इधर, हेमंत सोरेन सरकार के विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज़ है। मुख्यमंत्री दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, और कैबिनेट बंटवारे पर घटक दलों से बातचीत जारी है।

    राज्यपाल की सहमति और विपक्ष का सवाल
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 9 से 12 दिसंबर तक सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन विपक्ष इस छोटे सत्र को लेकर सवाल उठा सकता है। चार दिन का सत्र—क्या यह जनता की समस्याओं को उठाने और समाधान खोजने के लिए पर्याप्त होगा?

    तो, सत्र शुरू होने वाला है। अब देखना यह है कि यह सत्र जनता के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह भी महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

  • भगवान बिरसा मुंडा के वंशज को अंतिम विदाई: पीएम सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    रांची से रिपोर्ट …..

    भगवान बिरसा मुंडा के वंशज मंगल मुंडा के निधन की खबर ने झारखंड के आदिवासी समाज को गहरे शोक में डाल दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद रिम्स अस्पताल पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंगल मुंडा को श्रद्धांजलि दी।

    उलिहातू में शोक की लहर। 
    मंगल मुंडा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव उलिहातू पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बिरसा मुंडा के गांव में श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। मंगल मुंडा के पिता सुखराम मुंडा, मां लखिमनी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार को आदिवासी परंपराओं के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    दुर्घटना के बाद इलाज के लिए भेजा गया था रिम्स । 
    मंगल मुंडा 25 नवंबर को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें खूंटी से रांची के रिम्स अस्पताल लाया गया, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डॉक्टरों को उनके इलाज में कोई कसर न छोड़ने के निर्देश दिए। उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई थी।

    मुख्यमंत्री का रिम्स दौरा  ।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन खुद रिम्स पहुंचे और मंगल मुंडा के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के वंशज को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मिले।

    मंगल मुंडा का निधन । 
    सिर में गंभीर चोटों के कारण तमाम प्रयासों के बावजूद मंगल मुंडा को बचाया नहीं जा सका। 28 नवंबर की रात 12:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके छोटे भाई ने सोशल मीडिया पर इस दुखद समाचार को साझा किया, जिसके बाद से आदिवासी समाज में शोक की लहर है।

    भगवान बिरसा के वंशज को अंतिम विदाई । 
    45 वर्षीय मंगल मुंडा के निधन ने एक बार फिर भगवान बिरसा मुंडा की विरासत और आदिवासी समाज के संघर्ष को याद करने का मौका दिया है। झारखंड के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने उनके प्रति संवेदना व्यक्त की। लेकिन

  • झारखंड में सोरेन युग की नई शुरुआत : स्टीफन मरांडी होगें प्रोटेम स्पीकर

     परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    हेमंत सोरेन ने गुरुवार शाम शपथ ली और उसी वक्त से झारखंड को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। शपथ ग्रहण के बाद जब वे प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय पहुंचे, तो यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि नए इरादों का ऐलान था। डेढ़-दो घंटे की बैठक में फैसले ऐसे हुए, जो न केवल झारखंड के प्रशासन को नई दिशा देंगे, बल्कि सियासत के बदलते मिजाज का भी संकेत दे गए।

    स्टीफन मरांडी फिर बने प्रोटेम स्पीकर
    हेमंत सोरेन ने एलान किया कि झारखंड विधानसभा का पहला सत्र 9 से 12 दिसंबर के बीच आयोजित होगा। नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी को दी गई है। यह नाम केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि गठबंधन की परंपरा और पुराने भरोसे का प्रतीक है।

    मंईयां सम्मान योजना: महिलाओं के लिए बड़ी राहत
    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर महीने से ₹2500 देने का निर्देश दिया। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगस्त से नवंबर तक ₹1000-1000 ट्रांसफर किए गए थे, अब यह राशि बढ़ाकर ₹2500 कर दी गई है।

    केंद्र से ₹1.36 लाख करोड़ वसूली: कानूनी कार्यवाही शुरू
    हेमंत सोरेन का कहना है कि झारखंड का ₹1.36 लाख करोड़ केंद्रीय सरकारी उपक्रमों पर बकाया है। इस रकम की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की जाएगी। झारखंड जैसे राज्य के लिए यह पैसा केवल बकाया नहीं, बल्कि विकास की उम्मीद है।

    खनिज टैक्स की समीक्षा और आय के नए स्रोत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड, देश के सबसे पिछड़े राज्यों में है। राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए खनन क्षेत्र में टैक्स की समीक्षा की जाएगी। अदालत में लंबित टैक्स मामलों का समाधान भी प्राथमिकता में रहेगा।

    सिपाही भर्ती और परीक्षा कैलेंडर का एलान
    हेमंत सोरेन ने झारखंड के युवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया। सिपाही भर्ती प्रक्रिया को सुधारने के साथ ही उन्होंने सभी सरकारी रिक्तियों के लिए 1 जनवरी 2025 तक परीक्षा कैलेंडर प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

    असम के चाय बागान मजदूरों पर सर्वदलीय समिति
    राज्य के आदिवासी समुदाय की दशा-दिशा पर ध्यान देते हुए, असम के चाय बागानों में मजदूरी कर रहे झारखंड के मूलवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए सर्वदलीय समिति गठित करने की घोषणा की गई।

    हेमंत सोरेन का यह कार्यकाल झारखंड को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक नई शुरुआत है। शपथ से लेकर पहले दिन के फैसलों तक, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकार केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बदलाव के लिए आई है।

    सोरेन के इरादे साफ हैं। फैसले तेज हैं। अब देखना यह होगा कि इस नई दिशा को प्रशासन कितना अमलीजामा पहनाता है।

  • हेमंत सरकार का बड़ा ऐक्शन: प्रशासनिक उलटफेर से सियासी संदेश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    राजनीति में वापसी के साथ ही हेमंत सोरेन ने एक बार फिर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उनके फैसलों ने यह दिखा दिया कि यह केवल शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि सत्ता पर उनकी मजबूत पकड़ का ऐलान है।

    मंजूनाथ भजंत्री, जिन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर रांची डीसी के पद से हटाया गया था, अब फिर से रांची के उपायुक्त बनाए गए हैं। यह फैसला न केवल प्रशासनिक महत्व रखता है, बल्कि इसके पीछे छिपे सियासी संदेश को समझना भी जरूरी है।

    भजंत्री की वापसी: एक रणनीतिक चाल
    भजंत्री, जिनकी पहचान एक सख्त और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में होती है, को वापस लाने का मतलब है कि सोरेन सरकार पुराने भरोसेमंद सिपाहियों के सहारे नई पारी खेलना चाहती है। इस बदलाव के साथ ही वरुण रंजन को रांची डीसी से हटाकर जुडको का डायरेक्टर बनाया गया है।

    डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार: अनुराग गुप्ता को फिर मिली जिम्मेदारी
    अनुराग गुप्ता, जो एसीबी के डीजी के रूप में अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं, को झारखंड डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मौजूदा डीजीपी अजय कुमार को पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का एमडी बनाकर एक अलग जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव दिखाता है कि हेमंत सरकार हर मोर्चे पर नई ऊर्जा और नए नेतृत्व को तरजीह दे रही है।

    वरुण रंजन को दिया नया रोल
    वरुण रंजन, जिनकी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर पहले भी चर्चाएं रही हैं, अब झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (JIIDCO) के एमडी बनाए गए हैं। उनके इस नई भूमिका में जाने का मतलब है कि सरकार विकास योजनाओं को प्राथमिकता देना चाहती है।

    शपथ के बाद ऐक्शन में सरकार
    हेमंत सोरेन की सरकार के गठन के बाद यह बड़े फैसले केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं हैं। ये उस बड़े खेल की शुरुआत हैं, जो विधानसभा चुनाव 2024 के पहले से ही तय दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मंजूनाथ की ताजपोशी और चुनावी संदेश
    सवाल यह है कि मंजूनाथ भजंत्री को दोबारा रांची का डीसी बनाकर क्या हेमंत सोरेन ने विरोधियों को यह संदेश दिया है कि वह अपने लोगों पर भरोसा करते हैं और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं?

    इस सियासी और प्रशासनिक दांव का असर झारखंड केप्रशासनिक संतुलन पर क्या पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, हेमंत सोरेन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उनके फैसले तेज हैं, रणनीति सटीक है, और इरादे मजबूत।

  • हेमंत कैबिनेट की आज पहली बैठक,होंगे कई अहम फैसले

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    RANCHI : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण के बाद आज यानि गुरुवार को कैबिनेट की पहली बैठक होगी । इस बैठक में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जा सकता है ताकि विश्वास मत हासिल किया जा सके। हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं  और अब उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस बैठक से कई बड़े फैसले निकलने की उम्मीद है, जो न सिर्फ गठबंधन के चुनावी वादों को हकीकत में बदलने का काम करेंगे, बल्कि झारखंड की जनता को राहत का संदेश भी देंगे।
    भगवान बिरसा और सिदो-कान्हू के नाम पर बड़ा फैसला ?
    झारखंड के सबसे बड़े पुरस्कार का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा-भगवान सिदो-कान्हू पुरस्कार करने का प्रस्ताव आज कैबिनेट में पेश हो सकता है। यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
    रसोई गैस सिलेंडर @450 रुपये: जनता को राहत का तोहफा?
    बैठक में झारखंड के हर जरूरतमंद परिवार को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी मिल सकती है। गठबंधन के चुनावी घोषणापत्र में इसे सात गारंटी में शामिल किया गया था, और अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी हो रही है।
    मंईयां सम्मान योजना में पहले ही बढ़ाई गई राशि
    शपथ ग्रहण से पहले हुई अंतिम कैबिनेट बैठक में मंईयां सम्मान योजना की राशि बढ़ाकर 2500 रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसे दिसंबर से लागू किया जाएगा। नई सरकार इस योजना को और विस्तार देने पर विचार कर रही है।
    1932 के खतियान और सरना कोड पर चर्चा
    कैबिनेट की प्राथमिकता में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद है। इससे राज्य की स्थानीय पहचान और संस्कृति को मजबूती मिलने की संभावना है।
    सात गारंटी: जनता से वादों की दिशा में पहला कदम—
    1. स्थानीयता की गारंटी: 1932 खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लागू करने का वादा।
    2. मंईयां सम्मान की गारंटी: दिसंबर 2024 से 2500 रुपये की सम्मान राशि।
    3. सामाजिक न्याय की गारंटी: एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं।
    4. खाद्य सुरक्षा की गारंटी: गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर और 7 किलो राशन।
    5. रोजगार और स्वास्थ्य की गारंटी: 10 लाख युवाओं को नौकरी और 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा।
    6. शिक्षा की गारंटी: हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज और 500 एकड़ में औद्योगिक पार्क।
    7. किसान कल्याण की गारंटी: धान का एमएसपी 3200 रुपये और लघु वनोपज पर समर्थन मूल्य में 50% वृद्धि।

    झारखंड के लोग इस कैबिनेट बैठक से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं। हेमंत सरकार अगर इन वादों को पूरा करती है, तो यह न सिर्फ जनता का विश्वास जीतने में सफल होगी, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नई इबारत लिखेगी।