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  • झारखंड कांग्रेस को राहुल गांधी की सख्त हिदायत, जनहित पर मुखर रहें

    –कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, गठबंधन में सामंजस्य बनाए रखें

    परवेज आलम

    For The News Post4u.

    RANCHI : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी को झारखंड में नई दिशा देने के मकसद से नई  दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की , जिसमें झारखंड के सभी कांग्रेस विधायक और सभी  मंत्री  शामिल हुये ।  इस बैठक को कांग्रेस की राज्य इकाई में संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन सरकार में प्रभावशाली भूमिका सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता, भाजपा को मौका न देने की सलाह.

    बैठक की शुरुआत में राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि झारखंड के कांग्रेसी नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक और सक्रिय रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून, ओबीसी आरक्षण और सरना धर्म कोड जैसे संवेदनशील मसलों पर कांग्रेस को स्पष्ट और मज़बूत रुख दिखाना होगा, ताकि भाजपा को जनता के बीच जगह बनाने का कोई मौका न मिले।

    उन्होंने यह भी चेताया कि अगर कांग्रेस जनहित से जुड़ी आवाजें नहीं उठाएगी, तो भाजपा इन मुद्दों को हथियाने की कोशिश करेगी, जो पार्टी की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

    विधायकों को विधानसभा में सक्रियता और जनता से जुड़ाव का निर्देश.

    राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि विधायक पहले जनता के प्रतिनिधि हैं, फिर मंत्री। इसलिए उन्हें अपनी विधानसभा में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे विधानसभा में मजबूती से अपनी बात रखें और सरकार की योजनाओं को सही तरीके से जनता तक पहुंचाएं।

    गठबंधन धर्म का पालन और झामुमो के साथ समन्वय पर जोर.

    बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नेताओं से कहा कि कांग्रेस को गठबंधन धर्म का सम्मान करते हुए झामुमो के साथ किसी भी प्रकार की टकराव या टकराहट से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच संयुक्त सरकार की सकारात्मक छवि बनती है।

    संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया केंद्रीय बिंदु.

    राहुल गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी के स्थानीय संगठनों को सक्रिय और सशक्त किया जाए। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, नियमित संवाद रखें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने कहा, “कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ होते हैं। यदि कार्यकर्ता उत्साहित और संलग्न रहेंगे तो चुनावी सफलता भी सुनिश्चित होगी।” उन्होंने आगामी निकाय चुनावों की तैयारी में कार्यकर्ताओं की भूमिका को केंद्रीय बताया।

    भाजपा की आलोचना और कांग्रेस की वैकल्पिक भूमिका पर बल.

    राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा आमजन से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन कांग्रेस को चाहिए कि वह इन मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता के बीच खुद को उनका सच्चा प्रतिनिधि साबित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को झारखंड में एक प्रभावशाली और जनहितैषी की भूमिका निभानी होगी, भले ही वह सत्ता का हिस्सा हो।

    प्रदेश अध्यक्ष से असंतोष पर राहुल की समझदारी भरी सलाह.

    बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अपनी असहमति भी जाहिर की, जिस पर राहुल गांधी ने नेताओं से सुलह और सामंजस्य की नीति अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेद संगठन की एकता को प्रभावित न करें।

    रणनीतिक संदेश और भविष्य की तैयारी.

    इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने झारखंड में पार्टी की वर्तमान स्थिति और गठबंधन सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा की।

    बैठक मे  राहुल गांधी ने सभी विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे एकजुटता, प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि यही समय है जब कांग्रेस को झारखंड में अपनी ताकत को फिर से स्थापित करना है ।

    राहुल गांधी की यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए एक नई रणनीतिक दिशा, संगठनात्मक पुनर्गठन और गठबंधन धर्म के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। यह पहल आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर कांग्रेस के लिए एक फोकस्ड रोडमैप की तरह काम करेगी।

     

  • हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान होंगे झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

    –देशभर के कई हाईकोर्टों में हुआ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल.

    For The News Post4u.

    रांची: भारत के न्यायिक ढांचे में एक अहम बदलाव करते हुए राष्ट्रपति ने देश के कई उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के तबादले और नई नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। इस क्रम में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान को झारखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    अब तक झारखंड हाईकोर्ट की कमान संभाल रहे मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव को स्थानांतरित कर त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    इस बदलाव के साथ-साथ पटना हाईकोर्ट में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।

    • जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली, जो अब तक पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे, उन्हें अब मुख्य न्यायाधीश के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • वहीं, अब तक पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस आशुतोष कुमार को गुवाहाटी हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई नियुक्तियां.
    इन सभी नियुक्तियों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह फेरबदल देश में न्यायिक प्रक्रिया की सुचारूता, न्यायपालिका में संतुलन बनाए रखने और अनुभवों के विविध आदान-प्रदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

    न्यायिक सेवाओं के अनुभवी चेहरे.

    • जस्टिस तारलोक सिंह चौहान, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अपने न्यायिक निर्णयों से विशेष पहचान बनाई है, अब झारखंड में अपनी भूमिका निभाएंगे।
    • जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव को एक सुलझे हुए और अनुशासित न्यायिक अधिकारी के तौर पर जाना जाता है, और अब वे त्रिपुरा हाईकोर्ट का नेतृत्व करेंगे।
    • जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस आशुतोष कुमार दोनों ने पटना हाईकोर्ट में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं, और अब वे नए राज्यों में न्याय व्यवस्था को दिशा देने का कार्य करेंगे।

    यह न्यायिक पुनर्संरचना न केवल विभिन्न राज्यों के न्यायिक तंत्र को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी, बल्कि नीतिगत स्थिरता और दक्ष न्यायिक कार्यप्रणाली को भी बढ़ावा देगी।

  • सावन की पहली सोमवारी: भोलेनाथ की भक्ति में डूबा गिरिडीह

    – शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

    बिनोद कुमार

    Edited by: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह : सावन के पावन महीने की पहली सोमवारी को गिरिडीह जिले में शिवभक्ति की एक अद्भुत छवि देखने को मिली। शहर की फिजा “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी। जिले के विभिन्न शिवालयों में सुबह होते ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए घंटों से इंतज़ार कर रहे थे।

    शिवभक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु.
    सुबह से ही श्रद्धालु अपने परिवार व मित्रों के साथ शिव मंदिरों का रुख करने लगे। पूरे जिले में शिवालयों की घंटियां बज रही थीं और भक्तों की भीड़ भक्तिभाव के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, गंगाजल और फूल चढ़ा रही थी। विशेष रूप से सदर प्रखंड के उदनाबाद स्थित प्रसिद्ध दुःखहरणनाथ मंदिर में अपार भीड़ उमड़ी। यहां की मान्यता है कि सावन में जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ का पूजन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    पुजारी ने बताया सावन सोमवारी का महत्व.
    दुःखहरणनाथ मंदिर के पुजारी सर्वेश पांडेय ने बताया कि सावन मास शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना जाता है। खासकर सोमवारी के दिन बेलपत्र, गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त दोष समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पावन दिन पर यदि श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें, तो जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद.
    सोमवारी को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई थी। मंदिरों के बाहर पुलिस बल तैनात किए गए थे ताकि भीड़ में कोई अव्यवस्था न हो। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई और जल की व्यवस्था भी की गई थी।

    भक्ति, आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम.
    सावन की पहली सोमवारी ने गिरिडीह में भक्ति, आस्था और अनुशासन का ऐसा अद्भुत संगम दिखाया, जो वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में रहेगा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर शिवभक्ति की चमक और मन में विश्वास का उजाला साफ नजर आ रहा था।

    यह दिन शिवभक्तों के लिए केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और प्रभु से जुड़ाव का भी पर्व बन गया।

  • जन्मदिन पर दिखे ‘कैप्टन कूल’: फैंस को दिया माही ने खास तोहफा, फार्म हाउस से निकलकर लहराया हाथ

    Edited by – परवेज़ आलम.
    For – The News Post4u.

    भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते सितारे और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी  ने 7 जुलाई को अपने जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा पल रच दिया जिसे रांची कभी नहीं भूलेगा। सोमवार की सुबह, जब रांची हल्की बारिश और बादलों की चादर में लिपटी थी, धोनी अपने सिमलिया स्थित फार्म हाउस से बाहर निकले और अपने चाहने वालों को अपनी झलक देकर जन्मदिन को यादगार बना दिया।

    धोनी इस मौके पर अपनी नई चमचमाती कार में सवार थे। जैसे ही उन्होंने फार्म हाउस का गेट पार किया, वहां पहले से मौजूद सैकड़ों प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। “धोनी-धोनी!”  के नारों से इलाका गूंज उठा। माही ने भी अपने खास शांत और सादगीपूर्ण अंदाज़ में कार की स्पीड धीमी की और हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया।

    भीड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपनी आंखों से ‘कैप्टन कूल’ की एक झलक पाने को आतुर था। कुछ लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था – “हैप्पी बर्थडे माही, झारखंड की शान, भारत की जान”। वहीं कुछ युवा अपने मोबाइल कैमरों से उस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने में लगे थे।

    सुबह से जुटने लगी थी भीड़, बारिश भी नहीं रोक सकी जोश.

    धोनी के फैंस सुबह से ही उनके फार्म हाउस के बाहर जमा होने लगे थे। किसी ने केक साथ लाया था, तो कोई धोनी के पोस्टर लेकर खड़ा था। फैन क्लब्स ने वहीं सड़क किनारे छोटा-सा मंच बना रखा था जहां संगीत, उत्सव और जोश का माहौल था। बारिश रुक-रुक कर हो रही थी लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

    सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मना जश्न.

    रांची ही नहीं, पूरे देश में माही का जन्मदिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #HappyBirthdayDhoni ट्रेंड करता रहा। फैंस ने जगह-जगह केक काटकर जश्न मनाया और अपने-अपने अंदाज में धोनी के प्रति अपना प्यार जताया।

    एक नजर धोनी की उपलब्धियों पर.
    महेंद्र सिंह धोनी न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तानों में से हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में भारत ने जो इतिहास रचा, वो कभी नहीं मिटाया जा सकता।

    • 2007 में टी20 वर्ल्ड कप.
    • 2011 में वनडे वर्ल्ड कप.
    • 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी.

    इसके अलावा उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को भी नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। आईपीएल में भी धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके नेतृत्व में 5 बार खिताब जीता है, और आज CSK को सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी में गिना जाता है.

    जन्मदिन पर धोनी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनका एक इशारा – भीड़ को देखकर मुस्कुराना, हाथ हिलाना और कार की स्पीड धीमी करना – यही संदेश दे गया कि वह आज भी अपने फैंस को सबसे पहले रखते हैं। उनके लिए यह छोटा-सा लम्हा शायद एक दिन का किस्सा हो, लेकिन उनके फैंस के लिए यह यादगार बन गया।

  • मोहर्रम और ताजिया की परंपरा: शहादत का प्रतीक, गम और श्रद्धा की मिसाल

    परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    इस्लाम धर्म में मोहर्रम  का महीना एक खास स्थान रखता है। यह इस्लामिक कैलेंडर  का पहला महीना होता है, लेकिन इस महीने की शुरुआत किसी जश्न से नहीं, बल्कि गम और मातम  से होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन  की कर्बला की जंग   में हुई शहादत, जिसे मुस्लिम समुदाय आज भी गहरे दुख के साथ याद करता है।

    मोहर्रम और अशूरा का महत्व.

    मोहर्रम की दसवीं तारीख  को अशूरा कहा जाता है, जो इस महीने का सबसे अहम दिन होता है। इस साल अशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जा रहा है। इसी दिन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों ने यज़ीद की सेना से मुकाबला करते हुए शहादत  दी थी। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए थी। इसलिए मोहर्रम को त्याग और बलिदान का प्रतीक  माना जाता है।

    इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी-ब्याह  या अन्य उत्सव नहीं किए जाते। इसकी जगह मातम, रोजा और दुआ का आयोजन होता है।

    क्या है ताजिया और क्यों निकलता है इसका जुलूस ?

    मोहर्रम के महीने में देशभर में ताजिया का जुलूस  निकाला जाता है, जो अक्सर प्रतीकात्मक रूप से “कर्बला” में जाकर समाप्त होता है। ताजिया  दरअसल एक कलात्मक ढांचा  होता है, जिसे इमाम हुसैन की कब्र (रौज़ा-ए-मुबारक)  का प्रतीक माना जाता है। यह ढांचा बांस, लकड़ी, कागज, स्टील, रंगीन शीशे और कई बार चांदी-सोने की सजावट  से तैयार किया जाता है। इसे घरों, मोहल्लों और इमामबाड़ों में बनाया जाता है, और 10 मोहर्रम को मातमी धुनों और नारे ‘या हुसैन‘ के साथ जुलूस के रूप में निकाला जाता है।

    ताजिया की शुरुआत भारत में कैसे और कब हुई ?

    बहुत कम लोगों को यह पता है कि ताजिया निकालने की परंपरा की शुरुआत भारत  से ही हुई थी। इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं सदी  में बादशाह तैमूरलंग  के समय (801 हिजरी, लगभग 1399 ई.) में भारत में पहला ताजिया तैयार किया गया था। तैमूर शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था और हर साल इमाम हुसैन की कब्र की जियारत (यात्रा) के लिए कर्बला, इराक जाया करता था। लेकिन एक समय वह हृदय रोग से पीड़ित हो गया और लंबी यात्रा करने में असमर्थ हो गया।

    अपने शोक और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए, दरबारियों ने उनके सामने बांस और रंग-बिरंगे कागज  से इमाम हुसैन की मजार की प्रतिकृति  बनाकर पेश की। इस कलाकृति को देख बादशाह बेहद भावुक हो गया और यह परंपरा बन गई। तब से हर साल ताजिया बनाए जाने लगे और यह परंपरा भारत से होते हुए दुनिया भर के शिया मुसलमानों में फैल गई।

    आज ताजिया सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावना है.

    वक्त के साथ ताजिया सिर्फ एक कलात्मक प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और इंसाफ की लड़ाई  की मिसाल बन गया है। रांची ,लखनऊ , भोपाल या कोलकाता—हर शहर में ताजिए का अपना अनूठा स्वरूप होता है, लेकिन भावनाएं एक जैसी होती हैं: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

    मोहर्रम और ताजिए की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, बलिदान और निष्ठा की एक जीवंत कहानी है जो हर साल दुनिया को यह याद दिलाती है कि हक़ के लिए लड़ना और ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, यही इमाम हुसैन की सीख है।

  • गिरिडीह: ‘मन की बात’ की 123वीं कड़ी का आयोजन, जनभागीदारी और राष्ट्र भावना का दिखा उत्साह

    By The News Post4u

    गिरिडीह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणास्पद मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’  की 123वीं कड़ी का सीधा प्रसारण रविवार को गिरिडीह में बेहद उत्साह, गरिमा और राष्ट्र भावना के साथ आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम में जिले के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवा कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और गर्व का क्षण तब आया जब गिरिडीह सीधे पूरे देश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा। यह गिरिडीहवासियों के लिए न सिर्फ एक विशेष अवसर था, बल्कि यह क्षण उन्हें राष्ट्र के साथ जुड़ने का गौरव भी प्रदान कर गया।  इस अवसर ने गिरिडीह में लोकतांत्रिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के प्रति जनजागरूकता को नई ऊर्जा दी। आयोजन सिर्फ एक रेडियो प्रसारण भर नहीं था, बल्कि यह एक प्रेरणादायक सामाजिक मिलन बन गया जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर प्रधानमंत्री के विचारों को सुना और आत्मसात किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, बिनय सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, उद्योगपति अमरजीत सिंह सलूजा,चैम्बर ऑफ कॉमर्स के निर्मल झुनझुनवाला, मुकेश जालान, विकास खेतान,निर्मल स्लामपुरिया,संजीव कुमार व साहिल शर्मा उपस्थित थे ।

  • दुबई में फंसे झारखंड के 15 मजदूरों ने भेजा भावुक संदेश, भारत वापसी की लगाई गुहार

    भोजन के लाले, बीमारियां बढ़ीं, ठेकेदार ने झाड़ा पल्ला, अब सरकार ही आखिरी उम्मीद

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    झारखंड के गिरिडीह, धनबाद और हजारीबाग जिलों से दुबई में काम की तलाश में गए 15 मजदूर इन दिनों बेहद मुश्किल हालात में जी रहे हैं। दुबई की “मसाई कांट्रैक्टिंग एलएलसी” नामक कंपनी में काम करने गए इन मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से मदद की भावुक अपील की है। मजदूरों का कहना है कि बीते तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिस कारण भुखमरी की नौबत आ गई है।

    वीडियो में मजदूरों ने रोते हुए बताया कि अब उनके पास दो वक्त की रोटी तक का इंतजाम नहीं है। कुछ मजदूर बीमार भी हैं लेकिन उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वहां उन्हें न खाना सही मिल रहा है, न रहने की उचित व्यवस्था है। जिन उम्मीदों के साथ वे विदेश गए थे, अब वही उम्मीदें दम तोड़ रही हैं।

    ठेकेदार ने भी छोड़ा साथ.
    मजदूरों ने बताया कि वे एक ठेकेदार के भरोसे दुबई पहुंचे थे। शुरुआत में ठेकेदार ने उन्हें अच्छे वेतन और सुविधाओं का आश्वासन दिया था, लेकिन अब ठेकेदार ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया है। कंपनी ने पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं दी और काम के बदले बस इंतजार थमा दिया है।

    इन मजदूरों की सूची में शामिल हैं:

    • हजारीबाग जिले से: चुरामन महतो, चंद्रिका महतो, कैलाश महतो, विष्णु महतो, जगन्नाथ सिंह, लाखन सिंह, सुखदेव सिंह, अर्जुन महतो, त्रिलोकी महतो, बालेश्वर महतो
    • गिरिडीह जिले से: बैजनाथ महतो, महेंद्र महतो, सीताराम महतो, मूरत महतो
    • धनबाद जिले से: संजय कुमार महतो

    भूख से मौत की आशंका, सरकार से सीधी अपील.

    वीडियो में मजदूरों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा अनुरोध करते हुए कहा, “अब बस एक ही आस बची है—कृपया हमें जल्द से जल्द अपने देश वापस लाने का इंतजाम करें। यहां हर दिन हमारी हालत बद से बदतर होती जा रही है। अगर अब भी देरी हुई, तो कुछ मजदूर भूख से दम तोड़ देंगे।”

    नाइजर में गिरिडीह के 5 मजदूर पहले से अगवा.
    इस बीच, गिरिडीह जिले के बगोदर इलाके से अफ्रीकी देश नाइजर में पहले से ही 5 मजदूर अगवा हैं और अब दुबई में यह नया संकट सामने आया है। ऐसे में राज्य में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

    परिवारों की बढ़ती चिंता, प्रशासन अब तक मौन.
    इन मजदूरों के परिजन झारखंड में बेहद चिंतित हैं। रोजाना कोई न कोई रिश्तेदार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पहल सामने नहीं आई है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि सरकार इन मजलूम मजदूरों की पुकार को कब तक अनसुना करती है और क्या कोई ठोस कदम जल्द उठाया जाएगा या नहीं। मजदूरों की जिंदगी अब सरकार की संवेदनशीलता पर टिकी है।

     

  • राज्य में बदहाल व्यवस्था पर बीजेपी का हेमंत सरकार पर हमला, गिरिडीह सहित राज्य भर मे प्रदर्शन

    By The News Post4u.

    झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हल्ला बोल दिया है। गिरिडीह सहित राज्य भर के प्रखण्ड मुख्यालयों मे पार्टी ने मंगलवार को प्रदर्शन किया । पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल  मरंडी,कार्यकारी अध्यक्ष रवीन्द्र राय, विधायक मंजु देवी, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, ज़िला अध्यक्ष महादेव दुबे,वरिष्ठ नेता सुरेश साव, राजेश जैसवाल, बिनय सिंह व चुन्नुकांत सहित कई दर्जनो नेता और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन मे शामिल हुये।

    पार्टी का आरोप है कि पूरे राज्य में शासन व्यवस्था चरमराई हुई है। जनता अपराध, भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के बोझ से कराह रही है, लेकिन सरकार अपने पुराने रवैये से बाहर आने को तैयार नहीं है।

    बीजेपी का कहना है कि प्रदेश में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, महिलाओं के खिलाफ अपराध आम हो गए हैं। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। पार्टी ने दावा किया कि पहले कार्यकाल में खनिज संपदाओं की लूट को जिस तरह सरकारी संरक्षण मिला, वही लूट अब और संगठित हो गई है। पंचायत से लेकर सचिवालय तक भ्रष्टाचार का तंत्र मजबूत हुआ है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर सवाल.

    भाजपा ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का घोर अभाव है, ऑक्सीजन और एम्बुलेंस की किल्लत से गरीब दम तोड़ रहे हैं। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और आधारभूत संरचना जर्जर हो चुकी है।

    आयुष्मान भारत योजना भी लगभग ठप पड़ी है, बकाया भुगतान न मिलने के कारण कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे अस्पतालों की स्थिति और भी दयनीय हो चुकी है।

    पेंशन, किसानों और योजनाओं में अव्यवस्था.

    बीजेपी ने आरोप लगाया कि वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाएं महीनों से बंद हैं, जिससे लाभार्थी दर-दर भटक रहे हैं। मातृत्व सम्मान राशि की राशि भी हजारों महिलाओं को नहीं मिली, और किसानों को धान की बिक्री के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। खाद और बीज की खरीद में कालाबाजारी चरम पर है।

    भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में खानापूर्ति चल रही है, पोषण सामग्री की सप्लाई बाधित है, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाएं पूरी तरह ठप हैं।

    भ्रष्टाचार और बिचौलियों का बोलबाला.

    भाजपा का कहना है कि राज्य में अब बिना बिचौलिए के कोई भी सरकारी कार्य संभव नहीं है। चाहे जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो, राशन कार्ड या भूमि से संबंधित कार्य – हर जगह रिश्वत और दलाली का बोलबाला है। ग्रामीण सड़कों की हालत इतनी खराब हो गई है कि आवागमन कठिन हो गया है।

    स्थानीय नीति, भाषा और चुनावों पर भ्रम की स्थिति.

    हेमंत सरकार पर आरोप है कि वह स्थानीय नीति, नियोजन नीति और भाषा विवाद में राज्य को उलझा कर मूल समस्याओं से ध्यान भटका रही है। नगर निकाय चुनाव अब तक नहीं कराए गए हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में जनता का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है और प्रशासनिक अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं।

    भाजपा की मांग.

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के समक्ष 14 प्रमुख मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाना है। प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

    • कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाए और अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता मिले।
    • थाना प्रभारियों को उनके क्षेत्र में अपराधों के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
    • किसानों को धान बिक्री का भुगतान शीघ्र मिले और खाद-बीज की कालाबाजारी रोकी जाए।
    • प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
    • पेसा अधिनियम लागू किया जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
    • पेंशन योजनाएं पुनः शुरू की जाएं (वृद्धा, विधवा, दिव्यांग)।
    • शिक्षकों व चिकित्सकों के रिक्त पद भरे जाएं और +2 विद्यालयों में भाषावार शिक्षक नियुक्त हों।
    • सरकारी अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं (दवा, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस, टीका) सुनिश्चित हों।
    • ग्रामीण अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए।
    • जर्जर सड़कों व भवनों की मरम्मत कराई जाए।
    • बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर निकाला जाए।

    भाजपा का ऐलान – “जनता के लिए सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रहेगी”

    भाजपा ने ऐलान किया है कि एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए वह राज्य में जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक सरकार को घेरती रहेगी। “हेमंत सरकार को चेतावनी दी जाती है कि वह अपनी कार्यसंस्कृति में सुधार लाए, जनता से किए गए वादों को निभाए और राज्य को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करे।”

    इस तरह, भाजपा ने हेमंत सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया।

     

  • बिहार में लगेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट, ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन  मे शामिल हुये मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा मंगलवार को पटना में हुई, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु बिजली घर) स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। यह घोषणा पूर्वी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई। इस  सम्मेलन में बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार के ऊर्जा मंत्री उपस्थित रहे। बिहार से इसका प्रतिनिधित्व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया जबकि झारखंड से  नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इसमे शामिल हुये ।

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सम्मेलन के बाद फोन पर The News Post4u को बताया कि  बैठक में राज्यों में संचालित विद्युत परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा सेवा प्रदायगी में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, निर्बाध और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
    देश के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए यह सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

    बिहार को मिलेगा ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट.

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार की ओर से राज्य में परमाणु ऊर्जा आधारित पावर प्लांट की मांग रखी गई थी। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।

    साथ ही बिहार में अगले 6 महीनों के भीतर अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करने का भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक और ग्रामीण जरूरतों को मजबूत आधार मिलेगा।

     केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि:

    • ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है।
    • 2035 तक का राष्ट्रीय ऊर्जा विजन तैयार किया गया है, जिसमें हर राज्य में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
    • बिहार में अब तक 80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसे उन्होंने “रिकॉर्ड” बताया।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि “बिहार को कभी पिछड़ा समझा जाता था, लेकिन अब वह बिजली क्षेत्र में कई राज्यों से आगे निकल गया है।”

    बिजली स्टोरेज की भी मांग॰

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 1000 मेगावाट की बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने की मांग भी रखी। इस पर भी केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक हरसंभव मदद दी जाएगी।

    भारत अब बिजली निर्यातक देश.

    मंत्री खट्टर ने कहा कि कभी “पावर डिफिसिट” (बिजली की कमी वाला) देश माने जाने वाला भारत, आज भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल को बिजली निर्यात कर रहा है। देश के भीतर जरूरत के हिसाब से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    इस सम्मेलन से स्पष्ट है कि बिहार अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर विकसित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना राज्य के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय खोल सकती है।

     

  • झारखंड भाजपा में नेतृत्व की हलचल: रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की मुलाकात से सियासी सरगर्मी तेज

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    परवेज़ आलम.  for The News Post4U.  

    झारखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल है। रविवार को दुमका में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से हुई। पहली नज़र में यह मुलाकात सामान्य प्रतीत हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता दुमका परिसदन में ठहरे हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतरखाने में इसे एक राजनीतिक ‘प्रयोग’ माना जा रहा है — एक ऐसी पहल, जो आने वाले महीनों में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व को नई दिशा दे सकती है।

    शाह से मुलाकात और रघुवर की सक्रियता: कोई संयोग नहीं ?

    बताया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले जब बाबूलाल मरांडी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे, उसी दिन रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में आदिवासी परंपराओं को सम्मान देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग कर डाली। रघुवर की इस पहल को राजनीतिक गलियारों में ‘सक्रिय वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने भी पेसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को निर्देश दिया है कि वे रघुवर दास की सक्रियता को संगठन से जोड़ें।

    नेतृत्व संकट और संगठन की जरूरत.

    2024 के लोकसभा चुनाव में हार और प्रमुख नेताओं की पराजय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने नेतृत्व का संकट है। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे नेता सौम्य और शांत राजनीति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो आक्रामक तेवर के साथ पार्टी की बात जनता तक पहुंचा सके — और यही भूमिका रघुवर दास निभा सकते हैं।

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची आने वाले हैं। वे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे और झारखंड भाजपा के नेताओं से मिलकर पार्टी की झारखंड मे  रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान पार्टी की आदिवासी, ओबीसी और सामान्य वर्गों के बीच आउटरीच कार्यक्रम का ब्लूप्रिंट भी पेश किया जाएगा।

    इसी समय के आसपास झारखंड भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिलने की संभावना है। ऐसे में रघुवर दास की बढ़ती सक्रियता और बाबूलाल मरांडी की रणनीतिक भूमिका को लेकर शाह का नजरिया महत्वपूर्ण होगा।

    अध्यक्ष पद की रेस: कौन किससे आगे?

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

    • रघुवर दास – पूर्व मुख्यमंत्री, वे ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर सक्रिये राजनीति मे लौटे हैं और लगातार झारखंड के जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनता से संवाद कर रहे हैं। शिकायतों पर अफसरों को फोन करना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उनकी सक्रियता को दिखा रहे हैं।
    • अर्जुन मुंडा – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी आदिवासी नेता। लेकिन खूंटी से चुनाव हारने के बाद वे फिलहाल जमशेदपुर स्थित अपने आवास में सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित हैं।
    • चंपाई सोरेन – पूर्व मुख्यमंत्री, जो अब भाजपा में हैं और लगातार कोल्हान व संताल परगना में दौरे कर रहे हैं। संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
    • ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेता – इस सूची में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रविंद्र राय के नाम प्रमुख हैं।

     भाजपा की रणनीति किस मोड़ पर ?

    रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की दुमका में मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं       थी, बल्कि भाजपा के आने वाले फैसलों की बुनियाद मानी जा रही है। अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प   होगा कि भाजपा झारखंड में नेतृत्व के लिए किसे चुनती है — अनुभव, सामाजिक समीकरण या सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी?