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  • रघुवर दास की नई पारी: लौटेंगे सक्रिय राजनीति में

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास, अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। गुरुवार को दोपहर 3 बजे वे विशेष विमान से रांची पहुंचेंगे।  राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद वे पहली बार झारखंड आ रहे हैं ।

    शुक्रवार को रघुवर दास भारतीय जनता पार्टी  की सदस्यता ले सकते हैं। इसके बाद वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने  दिल्ली रवाना होंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता है।

    18 अक्टूबर 2023 को बने थे ओडिशा के राज्यपाल। 
    रघुवर दास ने 18 अक्टूबर 2023 को ओडिशा के राज्यपाल का पदभार संभाला था। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मिजोरम के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया और रघुवर दास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

    “भविष्य की भूमिका पार्टी तय करेगी”
    बुधवार को पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद रघुवर दास ने कहा, “मैंने भाजपा में बूथ अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक की यात्रा तय की है। पार्टी भविष्य में मेरी भूमिका पर फैसला करेगी। ओडिशा में मेरा अनुभव यादगार रहा। यहां के लोगों का जुनून मुझे हमेशा याद रहेगा।”

    44 वर्षों में दूसरी बार लेंगे सदस्यता।
    1980 में भाजपा की सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले रघुवर दास 44 वर्षों में दूसरी बार पार्टी की सदस्यता लेने जा रहे हैं। उन्होंने कभी पार्टी से अलग राह नहीं पकड़ी। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद राज्यपाल बनने के दौरान 14 महीने तक राजनीति से दूर रहे।

    ओडिशा के लिए डबल इंजन सरकार की तारीफ।
    रघुवर दास ने ओडिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सरकार गरीबों के विकास के लिए काम कर रही है और 2036 में ओडिशा के 100वें स्थापना वर्ष तक इसे विकसित राज्य के रूप में देखने की उम्मीद है।

    झारखंड और देश की राजनीति में रघुवर दास की यह वापसी कितनी असरदार होगी, यह समय ही बताएगा।

  • रघुवर दास ने ओडिशा के राज्यपाल पद से दिया इस्तीफा, फिर लौटेंगे बीजेपी में!

    RANCHI: झारखंड की राजनीति के दिग्गज और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रघुवर दास एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौट रहे हैं। ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर उन्होंने अपनी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, में वापसी के संकेत दे दिए हैं। रघुवर दास ने ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। उनके इस्तीफे के बाद, मिजोरम के राज्यपाल हरी बाबू कांभांपती को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

    रघुवर दास का सफरनामा:
    झारखंड के मुख्यमंत्री (2014-2019)
    पांच बार जमशेदपुर ईस्ट से विधायक
    बीजेपी के संस्थापक सदस्य
    रघुवर दास का नाम झारखंड की राजनीति में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। वह 1977 में जनता पार्टी से जुड़े और 1980 में बीजेपी के संस्थापक सदस्य बने। पार्टी के विभिन्न पदों पर काम करने के अलावा, उन्होंने 1995 से जमशेदपुर ईस्ट सीट का प्रतिनिधित्व किया।

    साल 2023 में उन्हें ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 31 अक्टूबर को भुवनेश्वर में आयोजित एक समारोह में उन्होंने शपथ ली थी। लेकिन अब, अपने इस्तीफे के साथ, वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं। रघुवर दास ने बीजेपी के लिए कई महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। उनके वापस पार्टी में शामिल होने से संगठन को मजबूती मिलेगी। (बीजेपी के वरिष्ठ नेता का बयान)

    सिर्फ यही नहीं, रघुवर दास के परिवार ने भी इस बार चुनावी मैदान में सफलता हासिल की। उनकी बहू पूर्णिमा साहू ने 2024 के विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर ईस्ट से जीत दर्ज की, जो उनकी परंपरागत सीट रही है। अब जब रघुवर दास फिर बीजेपी में लौटने को तैयार हैं, देखना होगा कि पार्टी में उनका क्या नया रोल होता है और वह झारखंड की राजनीति में क्या नया योगदान देंगे।

  • गुजरात में झारखंड की मासूम पर हैवानियत,मौत : क्या इंसाफ सिर्फ नारों में सिमट गया है?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट …..

    गुजरात से लेकर झारखंड तक दिल दहला देने वाली कहानी:
    गुजरात के भरूच में 10 साल की मासूम बच्ची के साथ जो हुआ, वह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक विफलता का प्रमाण है। झारखंड से मजदूरी के लिए गए परिवार की इस बच्ची ने वडोदरा के अस्पताल में सात दिनों तक संघर्ष किया। लेकिन जब सिस्टम ने जवाब दे दिया, तो मासूम की सांसे भी थम गईं।  डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित किया, तो यह मौत केवल उसके शरीर की नहीं थी, बल्कि इंसानियत और न्याय की भी मौत थी।
    झारखंड सरकार की कोशिशें:
    रांची में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस घटना पर दुःख जताया। उन्होंने कहा, “यह समय मुश्किल है, लेकिन राज्य सरकार बच्ची के परिवार के साथ खड़ी है। हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय मिले।”
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बच्ची के इलाज के लिए हर संभव मदद की बात कही थी, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
    कैसे हुआ यह अपराध?
    भरूच के झगड़िया इलाके में 36 साल के एक मजदूर ने इस मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची के निजी अंगों को लोहे की रॉड से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। माता-पिता जब काम पर गए थे, तब यह घिनौना कृत्य हुआ। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
    न्याय का वादा, लेकिन देरी क्यों?
    दीपिका पांडेय सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह प्रक्रिया तेज होगी या फिर यह मामला भी लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहेगा?
    गुजरात में गरमाई राजनीति:
    इस घटना ने राजनीति को भी हवा दे दी है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर निशाना साधा है। सवाल उठ रहे हैं कि बंगाल की घटनाओं पर आवाज उठाने वाली भाजपा, गुजरात में हुई इस बर्बरता पर चुप क्यों है? कांग्रेस नेता अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने इसे मानवीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि गुजरात कांग्रेस के प्रतिनिधि और झारखंड सरकार की ओर से पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुख साझा करना चाहते हैं, आर्थिक सहायता देना चाहते हैं और बच्ची का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना चाहते हैं। मैं गुजरात सरकार और प्रशासन से अपील करती हूं कि वे हमारे प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने दें। तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रमुख इसुदान गढ़वी ने सीएम से पूछा है कि क्या वे गुजरात की निर्भया के लिए धरने पर बैठेंगे। कोलकाता रेप में लेडी डॉक्टर को इंसाफ दिलाने के लिए भूपेंद्र पटेल अहमदाबाद में धरने पर बैठे थे।
    क्या सिस्टम से भरोसा टूट रहा है?
    मामला सिर्फ इस बच्ची का नहीं है। यह सवाल उठता है कि मजदूर परिवारों की बेटियां, जो अपने सपनों के साथ बड़े शहरों की चौखट तक पहुंचती हैं, क्या उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं है?
    पुलिस की कार्यवाही और समाज की जिम्मेदारी:
    आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन क्या यह गिरफ्तारी इस बच्ची के लिए इंसाफ का रास्ता साफ करेगी? या फिर यह घटना भी आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएगी?
    मेरा सवाल:
    क्या आज हम अपनी बेटियों से यह कह सकते हैं कि वे सुरक्षित हैं? और अगर नहीं, तो क्यों?

    क्योंकि जब तक हमारी बेटियां डर के साये में जीती रहेंगी, तब तक विकास और प्रगति के दावे खोखले ही रहेंगे।

  • बेटियां को समझाया गया कानून की बारीकियाँ

    गिरिडीह: नालसा नई दिल्ली और झालसा रांची के निर्देशानुसार चल रहे 90 दिवसीय जागरूकता एवं आउटरीच अभियान के तहत मंगलवार को सदर प्रखंड के SSSGDNF गर्ल्स हाई स्कूल, पचम्बा में विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लीगल लिटरेसी क्लब की छात्राओं को कानून से जुड़ी अहम जानकारियां दी गईं।

    बाल विवाह निषेध अधिनियम पर चर्चा। 
    कार्यक्रम का मुख्य विषय था बाल विवाह निषेध अधिनियम। पैनल अधिवक्ता बिपिन कुमार यादव ने बच्चियों को इस कानून के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चियों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करता है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका पर प्रकाश। 
    पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) कामेश्वर कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों और कार्यालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे यह संस्था समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने में मदद करती है।

    बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विशेष फोकस। 
    पीएलवी गुफरान आलम ने बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों को रेखांकित किया। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि बाल विवाह से उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर कैसे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी का योगदान। 
    कार्यक्रम में पीएलवी मुकेश कुमार का सहयोग विशेष रूप से सराहनीय रहा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशन में यह अभियान चलाया जा रहा है।

    छात्राओं ने दिखाई जागरूकता की उत्सुकता। 
    इस अवसर पर छात्राओं ने कानून से जुड़ी अपनी शंकाओं को पैनल के समक्ष रखा। विशेषज्ञों ने सरल और प्रभावी ढंग से उनके सवालों का जवाब दिया।

    समाज में बदलाव की ओर एक कदम।
    कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का यह आयोजन न केवल छात्राओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पचम्बा की बेटियां अब कानून की रोशनी से अपने अधिकारों को पहचानने और उनका उपयोग करने को तैयार हैं।

  • झारखंड सरकार का कर्मचारियों के लिए नए साल का तोहफा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए नई सौगात का ऐलान किया गया। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। अब यह भत्ता 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू होगी।

    पेंशनभोगियों को भी राहत। 
    केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में भी तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार का यह कदम महंगाई के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में राहत भरा है।

    मेरू योजना के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय को मिला 99.56 करोड़। 
    बैठक में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के लिए 99.56 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस राशि का उपयोग मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (MERU) योजना के तहत किया जाएगा।

    कैग रिपोर्ट और अन्य अहम फैसले। 
    कैबिनेट ने आगामी विधानसभा सत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को पेश करने की स्वीकृति दी। यह रिपोर्ट राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रबंधन स्थिति पर केंद्रित होगी।

    डॉ. तुलसी महतो को प्रोन्नति। 
    झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में रिम्स के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. तुलसी महतो को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने का निर्णय भी लिया गया।

    अन्य प्रमुख फैसले:

    1. झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के सत्रावसान को मंजूरी।
    2. राज्यपाल के अभिभाषण को घटनोत्तर स्वीकृति।
    3. खनन पदाधिकारियों को सेवा शर्तों में छूट।
    4. कैग की वित्तीय वर्ष 2023-24 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने की अनुमति।

    तीसरी कैबिनेट बैठक, दस अहम फैसले। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी सरकार की यह तीसरी कैबिनेट बैठक थी, जिसमें कुलपर सहमति दी गई। राज्य सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र को राहत और प्रगति दोनों मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का यह कदम विकास और जनकल्याण की दिशा में एक और बड़ा प्रयास माना जा रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेनने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुये सभी झारखंडवासियों कोनए साल की बधाई भी दी । 

  • सभी औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाना आवश्यक –डीसी

    गिरिडीह जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग और स्टोन माइंस के संचालन पर गहन जांच और कारखानों से निकलने लने वाले धुएं व दूषित जल के निष्पादन में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने दिया है । उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाने के निर्देश भी दिए। गिरिडीह के समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की बैठक अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यावरण समिति नमन प्रियेश लकड़ा ने की। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हुई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
    उसरी नदी के संरक्षण पर विशेष जोर।
    बैठक का एक मुख्य एजेंडा था उसरी नदी का संरक्षण। उपायुक्त ने इस नदी की सफाई और संरक्षण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फंड का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, नदी में गंदे नालों का पानी फिल्टर करने के बाद ही प्रवाहित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
    पर्यावरण संरक्षण और हरित उपायों पर फोकस।
    बैठक में औद्योगिक परिसरों में पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों, होटलों और रेस्तरां को भी प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स डिस्प्ले स्क्रीन लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नागरिकों को वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी मिल सके।
    प्रमुख अधिकारी थे मौजूद।
    बैठक में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण संवाद में सभी संबंधित विभागों के समन्वय पर जोर दिया गया।

  • भू-अर्जन में तेजी के लिए उपायुक्त ने दिया सख्त निर्देश

    गिरिडीह:  जिला मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में सोमवार कोनमन प्रियेश लकड़ा ने पथ निर्माण विभाग, झारखंड सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।
    बैठक का मुख्य उद्देश्य। 
    बैठक में उपायुक्त ने विकास परियोजनाओं में लंबित मामलों के निपटारे और परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। विशेष तौर पर एनएच-114 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें लंबित मामलों और मुआवजा वितरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई।
    एनएच-114: लंबित मामलों का जल्द निपटारा। 
    बैठक में एनएच-114 से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने जानकारी दी कि FRA (वन अधिकार अधिनियम) का निर्णय लिया जा चुका है।
    • छह मौजा के लिए अवार्ड तैयार कर रैयतों के बीच वितरित किया जा रहा है।
    • लाभुकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
    • रैयतों द्वारा भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व दस्तावेज जमा करने के बाद मुआवजा भुगतान प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी।
    भू-अर्जन में तेजी के लिए निर्देश। 
    उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को भू-अर्जन कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर कैंप आयोजित करने और लंबित एलपीसी (भूमि प्रबंधन प्रमाणपत्र) और वंशावली प्रमाणपत्र को शीघ्र निर्गत करने का निर्देश दिया।
    अधिकारियों को समन्वय पर जोर। 
    उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को तेज करना होगा। उन्होंने कहा, “विकास कार्यों में देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
    बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?
    इस महत्वपूर्ण बैठक में पथ निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, और भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी और समयबद्धता सुनिश्चित करने का वादा किया।
    प्रगति की ओर कदम।
    जिले में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर उपायुक्त के सख्त निर्देश और तेजी लाने की पहल यह दर्शाती है कि जिला प्रशासन विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब यह देखना अहम होगा कि परियोजनाओं की ये रफ्तार धरातल पर कैसे दिखती है।

  • नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म अब 5वीं और 8वीं में फेल होने पर नहीं होगा प्रमोशन, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। अब 5वीं और 8वीं कक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को बिना मेहनत के अगली कक्षा में भेजने का रास्ता बंद हो गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को सुधारना और उनकी बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है।

    क्या है नई नीति?

    पहले, 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत, वार्षिक परीक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर पुनः परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे इसमें भी फ़ेल रहते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोशन नहीं मिलेगा।

    हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी स्कूल 8वीं कक्षा तक किसी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं कर सकता।

    नीति का उद्देश्य। 

    शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कदम छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को सुधारने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को मजबूत करना और उनकी समझ को विकसित करना है। यह नीति छात्रों को मेहनत करने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने का मौका देगी।”

    फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका। 

    नई नीति के तहत, असफल छात्रों को अपनी कमजोरी सुधारने का अवसर दिया जाएगा। रिजल्ट के बाद दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। अगर छात्र दूसरी बार भी सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रहना होगा।

    शिक्षा प्रणाली में सुधार की ओर एक कदम। 

    सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता लाना है। यह नीति न केवल छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित भी करेगी।

    इस बदलाव से यह साफ है कि सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में के पुराने नियम को समाप्त कर, छात्रों की वास्तविक क्षमता को पहचानने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।

    क्या यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए सही साबित होगा? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की यह पहल एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है।

  • खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाएगा -उद्योग मंत्री संजय यादव

    1. रांची: झारखंड के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में उद्योग विभाग की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों को गति देने के लिए विभाग में खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की और कहा कि झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

    रिक्त पदों पर बहाली को प्राथमिकता. 

    समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि रिक्त पदों की सूची तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विचार-विमर्श कर इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का सपना है कि झारखंड एक औद्योगिक हब बने, और हम इसे साकार करेंगे।”

    निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं . 

    मंत्री यादव ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योगों के विकास में बिचौलियों से सतर्क रहने पर भी जोर दिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उद्योगों के विस्तार और निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    समीक्षा बैठक में शामिल अधिकारी. 

    इस समीक्षा बैठक में उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह, अपर सचिव, उद्योग निदेशक सुशांत गौरव, और हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय की निदेशक आकांक्षा रंजन सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान जियाडा, ज़िडको, झारक्राफ्ट, झारखंड माटीकला बोर्ड, और मुख्यमंत्री लघु, कुटीर एवं उद्यम विकास बोर्ड समेत अन्य संस्थानों के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान. 

    मंत्री ने बैठक में कहा कि का उद्देश्य झारखंड को एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है। राज्य में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हों और झारखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुए, यही सरकार का लक्ष्य है।

    संजय प्रसाद यादव के इन निर्देशों से यह स्पष्ट है कि झारखंड सरकार विकास कार्यों में तेजी लाने और राज्य को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     

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  • झारखंड: जंगली हाथियों का आतंक, डर के साए में जी रहे हैं ग्रामीण

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड के गिरिडीह जिले में जंगली हाथियों का कहर जारी है। बीती रात चार हाथियों के झुंड ने शिकरा हेम्ब्रम के घर को तोड़ डाला और उन्हें रौंदकर मौत के घाट उतार दिया। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक भयावह सचाई है।
    इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री बेबी देवी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया और तुरंत 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही उन्होंने कहा कि शेष 3,60,000 रुपये की राशि जल्द से जल्द दी जाएगी।
    बेबी देवी ने ट्वीट करते हुए कहा। 
    “आज प्रातः शिकरा हेम्ब्रम जी को हाथियों ने कुचलकर मार दिया। मैं घटनास्थल पर गई और उनके परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार को सहयोग प्रदान किया जाए। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”
    इससे पहले सनिवार को भी सुगवाटांड़ में हाथियों ने तीन घरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घर अब मलबे के ढेर में बदल चुके हैं।
    हाथियों ने घरों में रखा धान और अनाज चट कर दिया, और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला। यह घटना न केवल इन परिवारों के लिए आर्थिक झटका है, बल्कि पूरे गांव के लिए डर का कारण भी बन गई है।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए था, लेकिन रात के अंधेरे में ये झुंड सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    सरकार और वन विभाग का कदम। 
    गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को 10,000 रुपये का चेक और एक-एक पेटी चावल दिया।
    वन विभाग ने जानकारी दी कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञों की टीम बुलाई जा रही है।
    लेकिन सवाल यही है: क्या सिर्फ राहत राशि और चावल देकर इस समस्या का समाधान हो सकता है?
    ग्रामीणों की गुहार: हमें चाहिए सुरक्षा, सिर्फ वादे नहीं। 
    जंगल और पहाड़ों के पास बसे गांवों के लोग अब अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हर बार हाथियों का झुंड आता है, तबाही मचाता है, और प्रशासन केवल मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
    क्या वन विभाग और सरकार के पास इन घटनाओं से निपटने की कोई ठोस योजना है?
    कब तक लोग हाथियों के डर के साए में अपनी जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे?
    आप क्या सोचते हैं?
    क्या झारखंड सरकार और वन विभाग इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है?
    अपनी राय कमेंट में साझा करें।