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  • डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

    परवेज़ आलम  for The News Post4U.

    झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

    जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

    सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
    “हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

    और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

    झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

    साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

    जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

    अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
    यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

    कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

    इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

    • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
    • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
    • लालडूसंगा — मिजोरम से

    इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

    झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

    देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

    इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—“सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

    सरकारी सिस्टम की चुनौती.

    सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन ‘डिजिटल अपराधियों‘ के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

    फिर भी सवाल वही है…

    • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
    • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
    • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

    एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

    और जब अगली बार कोई कहे…

    “मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
    तो मुस्कराकर कहिए—
    “तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”

     

  • मुख्यमंत्री गणतंत्र दिवस दुमका मे करेंगे झंडोतोलन

    मसानजोर डैम पर इको कॉटेज का हुआ उद्घाटन

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गणतंत्र दिवस पर  सुबह 9 बजे पुलिस लाइन, दुमका मे झंडोत्तोलन करेंगे । दुमका पहुँचने पर शनिवार शाम एयरपोर्ट पर उन्हें गरिमामयी गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। मौके पर आयुक्त लालचंद डाडेल और उपायुक्त आंजनेयुलु दोड्डे ने उन्हें पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री रात में दुमका राजभवन में रात्रि विश्राम करेंगे ।

    मुख्यमंत्री दुमका पहुंचते ही उन्होंने मसानजोर डैम जाकर वहां बने इको कॉटेज का उद्घाटन किया।

    मसानजोर डैम में इको कॉटेज: पर्यटकों के लिए नई सौगात.
    पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा करीब 7 करोड़ की लागत से मसानजोर डैम के रमणीय स्थान पर इको रिसॉर्ट तैयार किया गया है। इको कॉटेज आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और पूरी तरह वातानुकूलित हैं। यहां पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हुए ठहरने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

    पश्चिम बंगाल से सबसे ज्यादा पर्यटक।
    मसानजोर डैम पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, जहां खासतौर पर पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में पर्यटक पिकनिक मनाने और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं। इको रिसॉर्ट के पश्चिम में डैम का पानी, पूर्व में हरियाली, उत्तर में यूथ होस्टल और दक्षिण में पहाड़ियां स्थित हैं।

    कैफेटेरिया और सुविधाओं का आकर्षण॰
    इको रिसॉर्ट मसानजोर से दुमका की ओर जाने वाली मुख्य सड़क से करीब आधा किलोमीटर अंदर स्थित है। यहां पर्यटकों के लिए कैफेटेरिया की सुविधा भी उपलब्ध है। इस नए रिसॉर्ट का उद्घाटन क्षेत्र में पर्यटन को एक नई दिशा देगा।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर खास है, बल्कि मसानजोर डैम में हुए विकास कार्यों ने क्षेत्र को नई पहचान दी है।

     

  • मंईयां सम्मान योजना: कब आएगी जनवरी माह की राशि?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    झारखंड में मुख्यमंत्री के लाभार्थी इस वक्त असमंजस और इंतजार की स्थिति में हैं। जनवरी माह की किस्त का पैसा अब तक लाभार्थी के अकाउंट  में ट्रांसफर नहीं हुआ है, जिससे 58 लाख से अधिक लाभार्थियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देरी की वजह क्या है।

    अगस्त से शुरू हुई है योजना।
    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। योजना के तहत अगस्त से नवंबर तक लाभार्थियों को हर माह ₹1,000 दिए गए। दिसंबर से इस राशि को बढ़ाकर ₹2,500 प्रति माह कर दिया गया।
    6 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नामकुम में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में ₹2,500 की पहली बढ़ी हुई राशि 56,61,791 लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की थी। मात्र दिसंबर माह में ₹1,415 करोड़ 44 लाख 77 हजार 500 रुपये का वितरण हुआ। इसके बाद से जनवरी की किस्त का इंतजार बढ़ता जा रहा है।

    कहां फंसा है पेंच?
    योजना के तहत हर माह की 15 तारीख तक राशि लाभार्थियों के खातों में क्रेडिट हो जानी चाहिए, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी हुई है।

    1. प्रखंड स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया
      हर महीने नए लाभार्थियों को जोड़ा जा रहा है और 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लाभार्थियों को सूची से हटाया जा रहा है। जनवरी में 10 लाख से अधिक नए आवेदन आए, जिनमें से डेढ़ लाख का सत्यापन पूरा हो चुका है।
    2. पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
      योजना का पोर्टल बार-बार तकनीकी खामियों का सामना कर रहा है। आवेदन अद्यतन और सत्यापन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसका सीधा असर राशि ट्रांसफर पर पड़ रहा है।

    क्या कह रहा है विभाग?
    जिला स्तर पर नोडल बैंकों और प्रखंड स्तर के अधिकारियों के सहयोग से सत्यापन प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    लाभार्थियों को संदेश।
    जनवरी माह की राशि में हो रही देरी के बावजूद सरकार ने मार्च तक की राशि पहले ही आवंटित कर दी है। विभागीय अधिकारी तकनीकी खामियों को दूर करने और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए काम कर रहे हैं।

  • झारखंड : 5 लाख का कैशलेस इलाज, 10 लाख गंभीर बीमारियों के लिए, जानिए किसको मिलेगा

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को  रांची में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य कर्मियों और पेंशनरों के लिए बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत, राज्य कर्मियों और उनके आश्रितों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।

    1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख पेंशनरों को होगा फायदा।
    कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बैठक के बाद बताया कि इस योजना के तहत राज्य के 1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ मिलेगा। योजना में शामिल होने वाले कर्मियों के वेतन से हर महीने 500 रुपये काटे जाएंगे, जबकि पेंशनभोगियों को सालाना 6,000 रुपये जमा करने होंगे। योजना का कवरेज इतना ही नहीं रुकता। इसमें अखिल भारतीय सेवाओं के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, विधानसभा के पूर्व सदस्य, और राज्य के विभिन्न बोर्ड-निगमों के कर्मी भी अपनी इच्छा से जुड़ सकते हैं।

    टाटा एआईजी से हुआ करार।
    इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ करार किया है। 150 करोड़ रुपये आकस्मिकता निधि से और 50 करोड़ रुपये बफर स्टॉक के रूप में आरोग्य सोसायटी के ट्रस्ट में रखे जाएंगे।

    हालांकि, यह योजना पिछले साल 31 जुलाई 2023 को घोषित की गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका। अब, संशोधन के बाद, यह योजना कर्मियों और पेंशनरों के लिए वरदान साबित होगी।

    दुमका से उड़ान सेवा का रास्ता साफ।
    कैबिनेट ने दुमका हवाई अड्डे से उड़ान सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंडियन एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ संचार, नेविगेशन और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सेवाओं के लिए एमओयू के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है। इसके बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ के तहत दुमका हवाई अड्डे से नियमित उड़ानें शुरू होंगी।

    हॉस्पिटलों में नए पद और शिक्षा क्षेत्र में सुधार।
    राज्य के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में सीनियर मैनेजर, फाइनेंस मैनेजर, और आईटी एग्जीक्यूटिव जैसे नए पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा, मिडिल स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा के लिए ज्ञानोदय योजना के तहत 94.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

    सरकार के कदमों से उम्मीदें बढ़ीं।
    झारखंड सरकार के ये निर्णय न केवल स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को मजबूत करेंगे बल्कि राज्य के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

  • गांडेय में विधायक कल्पना सोरेन का हुआ भव्य स्वागत, कल्पना ने जनता का जताया आभार

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नेत्री और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद मंगलवर को पहली बार अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। बरमसिया पंचायत में आयोजित “धन्यवाद सह आभार कार्यक्रम” में शामिल होकर उन्होंने क्षेत्रवासियों को उनके समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद दिया।

    कार्यक्रम में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, विधायकप्रतिनिधि बैरिस्टर फरदीन अहमद और झामुमो के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इससे पहले, विधायक ने जिला उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉ. विमल कुमार सहित ज़िले और प्रखंड के सभी अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। बैठक में उन्होंने विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया कि योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर उन्हें तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए झारखंड सरकार आवश्यक बजट उपलब्ध कराएगी।

    भव्य स्वागत और जन समर्थन का उत्सव।
    गांडेय पहुंचने पर विधायक सोरेन का जोरदार स्वागत हुआ। महिलाओं ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और बच्चों ने उनके साथ सेल्फी लेकर खुशी जताई। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। इस दौरान कल्पना सोरेन ने कहा, “यह आपकी सरकार है, अबुआ सरकार। झारखंड के हर व्यक्ति के मान-सम्मान और विकास को प्राथमिकता देना हमारी जिम्मेदारी है।”

    जन योजनाओं और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं।
    विधायक सोरेन ने अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी “माइयाँ सम्मान योजना” की चर्चा करते हुए बताया कि झारखंड सरकार महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2500 दे रही है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में गांडेय की तकदीर और तस्वीर बदलने का जो सपना उन्होंने देखा है, उसे साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

    भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख और जनता से अपील।
    कल्पना सोरेन ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को दफ्तरों में अनावश्यक परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा, “आपके दुख-दर्द को समझकर उन्हें राहत पहुंचाना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।”

    जनता और प्रतिनिधियों का सम्मान।
    बैरिस्टर फरदीन अहमद की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “एक विधायक प्रतिनिधि के तौर पर फरदीन अहमद का कार्य सराहनीय है। वे लगातार क्षेत्र की समस्याओं को हम तक पहुंचाते हैं, और हम उनका समाधान करने का हर संभव प्रयास करते हैं।”

    कार्यक्रम के बाद विधायक सोरेन रांची के लिए रवाना हो गईं, लेकिन उन्होंने गांडेय की जनता को यह भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही अन्य क्षेत्रों का भी दौरा करेंगी और क्षेत्र के विकास के लिए अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाएंगी।

  • सम्मेद शिखर: जंगल सफारी योजना का विरोध, जैन समाज नाराज

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    गिरिडीह:  सम्मेद शिखर में जंगल सफारी बनाने के झारखंड सरकार के फैसले से जैन समाज में गहरी नाराज़गी है। सम्मेद शिखर जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां 20 तीर्थंकरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन समुदाय का मानना है कि जंगल सफारी जैसी मनोरंजन गतिविधियों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और शांति भंग होगी।

    जैन समाज ने झारखंड सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया  है। जैन समाज के लोगों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही इस स्थल को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर चुकी हैं, और ऐसे में जंगल सफारी शुरू करना तीर्थस्थल का अपमान होगा।

    “पवित्रता से समझौता नामंज़ूर “
    जैन धर्म संगठनों का मानना है कि सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल पर मौज-मस्ती की कोई भी गतिविधि अनुचित है। जैन समाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जंगल सफारी की योजना को वापस नहीं लिया, तो  देशव्यापी आंदोलन होगा । यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान जो भी स्थिति बनेगी, उसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड और केंद्र सरकार की होगी।

    पर्यटन क्षेत्र को लेकर पहले भी हुआ था विवाद।
    यह पहली बार नहीं है जब पारसनाथ क्षेत्र को लेकर विवाद हुआ हो। दो साल पहले इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने की कोशिश की गई थी, जिसका भी जैन समाज ने पुरजोर विरोध किया था। समुदाय का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र बनने से मांस-मदिरा जैसे अनुचित कार्य शुरू हो सकते हैं, जिससे तीर्थस्थल की पवित्रता नष्ट होगी। हालांकि, सरकार ने इस क्षेत्र को पहले ही मांस-मदिरा निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है।
    बताया गया है कि 2018 में झारखंड सरकार ने पारसनाथ पर्वत को जैन समाज का पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया था, जबकि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2023 को इसे पुनः पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी थी।

    जैन समाज का संदेश साफ है—सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल की गरिमा और शांति बनाए रखना ही उनकी प्राथमिकता है। उनका यह आंदोलन उस विरासत और श्रद्धा को बचाने के लिए है, जो इस तीर्थस्थल के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

     

  • चार महीने में निकाय चुनाव होने चाहिए-झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नगर निकाय चुनाव चार महीने में कराने का सख्त आदेश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने यह निर्देश अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका रोशनी खलखो और अन्य की ओर से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सुनील कुमार कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।

    कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह अद्यतन मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदान करे ताकि चुनाव की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। साथ ही, मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित होने से छूट दे दी गई है।

    कई जिलों में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया लगभग पूरी.

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 2024 को दिए गए आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूछा कि अब तक चुनाव की तारीखें क्यों घोषित नहीं हुईं। इसके जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि नगर निकायों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया चल रही है, जो कई जिलों में पूरी हो चुकी है और कुछ में अंतिम चरण में है। इसके अलावा, भारत निर्वाचन आयोग से अब तक अद्यतन मतदाता सूची प्राप्त न होने को भी देरी का कारण बताया गया।

    क्या ट्रिपल टेस्ट के बिना भी हो सकते हैं चुनाव?

    याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार, ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव टालना गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार चुनाव कराने में रुचि नहीं रखती। इस आधार पर उन्होंने सरकार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने की मांग की।

    चुनाव में देरी पर कोर्ट नाराज.

    कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव न कराना अवमानना का स्पष्ट मामला है। हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी कहा था कि ओबीसी आरक्षण के नाम पर चुनाव टालना स्वीकार्य नहीं है।

    गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया था। नए कार्यकाल के लिए चुनाव 27 अप्रैल 2023 तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद राज्य सरकार पर चुनाव प्रक्रिया जल्द पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

     

  • झारखंड में होगा राज्य स्तरीय युवा महोत्सव- सुदिव्य कुमार सोनू

    RANCHI: झारखंड के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद व युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने घोषणा की है कि राज्य सरकार झारखंड में भी राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन करेगी। इसमें पूरे राज्य से युवा प्रतिभागी शामिल होंगे और अपनी प्रतिभा और विचारों से राज्य के विकास में योगदान देंगे।   मंत्री सोनू ने नई दिल्ली में 10 से 12 जनवरी 2025 तक आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेकर लौटे झारखंड के प्रतिभागियों का बुधवार को सम्मान समारोह आयोजित कर प्रतिभागियों को अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

    राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेने वाले युवाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “आपने न केवल झारखंड का नाम रोशन किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बने हैं। आपकी मेहनत और समर्पण ने यह साबित किया है कि झारखंड के युवा किसी से कम नहीं।”

    मंत्री ने कहा, “झारखंड के युवाओं में असीमित प्रतिभा है। उनके पास हर क्षेत्र में परचम लहराने की क्षमता है। जरूरत है केवल सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की। राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि युवाओं को उनके लक्ष्य तक पहुँचने में मदद मिले।”

    युवाओं को दी किताबों से दोस्ती करने की सलाह।

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने युवाओं को किताबों से दोस्ती करने की सलाह देते हुए कहा, “ज्ञान प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका किताबें हैं। ये न केवल हमारी सोच को व्यापक बनाती हैं, बल्कि हमें सही निर्णय लेने की क्षमता भी देती हैं। आज का युवा बहुत तेज है। उसे तर्क और सवाल करने की आदत विकसित करनी चाहिए। युवाओं का उत्साह और ऊर्जा राज्य और देश के विकास की नींव है।” उन्होंने यह भी कहा, “जब तक हमारे गांव, शहर और राज्य मजबूत नहीं होंगे, तब तक देश को मजबूती नहीं मिल सकती। राज्य के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना अधूरी है।”

    प्रतिभागियों ने बढ़ाया झारखंड का मान।

    इस महोत्सव में दुमका की स्वाति राज ने भाषण प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं, गुमला की शुभांगी क्षितिजा सौरभ और जमशेदपुर के ऋषित ने प्रधानमंत्री के समक्ष “विकास भी, विरासत भी” विषय पर प्रस्तुति दी। मंत्री ने इन प्रतिभागियों और उनकी टीम के लीडर्स को विशेष रूप से सम्मानित किया।

    मंत्री ने इन सभी युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां झारखंड के हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। “आपकी मेहनत और सफलता झारखंड की ताकत है। हम चाहते हैं कि आने वाले समय में और भी युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन करें।”

  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।