Blog

  • सुदेश महतो को खाली करना होगा सरकारी घर, बनेगा हेमंत सोरेन का नया ठिकाना 

    RANCHI: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवासीय कार्यालय को अस्थायी रूप से कांके रोड के आवास संख्या-05 में शिफ्ट किया जा रहा है। ये वही आवास है, जिसमें पिछले कई सालों से आजसू प्रमुख सुदेश महतो रह रहे थे। अब उन्हें यह घर खाली करना होगा।

    क्यों हो रहा है बदलाव?
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वर्तमान आवासीय परिसर की मरम्मत का काम होना है। जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक सीएम का आवासीय कार्यालय कांके रोड स्थित इस सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाएगा। भवन निर्माण विभाग की ओर से इस फैसले को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। आदेश में कहा गया है कि आवास संख्या-05, जो पहले पूर्व मुख्य सचिव का घर था, अब मुख्यमंत्री का नया अस्थायी आवासीय कार्यालय होगा।
    साल 2009 में यह आवास आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को आवंटित किया गया था। इस घर से आजसू पार्टी के सारे कामकाज होते थे, और सुदेश महतो खुद भी यहीं रहते थे। लेकिन अब यह घर सीएम हेमंत सोरेन को सौंपा जाएगा।

  • हेमंत सोरेन कैबिनेट की तीसरी बैठक 24 को

    RANCHI : हेमंत सोरेन सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 24 दिसंबर को प्रोजेक्ट भवन, धुर्वा में होगी।  मंत्रिमंडल सचिवालय ने इस बारे में पत्र जारी किया है। बैठक दोपहर 4 बजे से शुरू होगी और ये हेमंत सोरेन सरकार बनने के बाद तीसरी कैबिनेट बैठक होगी।  शपथ ग्रहण के बाद 6 दिसंबर को सरकार बनने के बाद पहली बैठक हुई थी। अब देखना होगा कि इस बार क्या नए फैसले लिए जाते हैं।

  • रॉयल्टी के 1.36 लाख करोड़ के मामले पर बाबूलाल मरांडी का जवाबी हमला, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछे ये सवाल।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1.36 लाख करोड़ के मामले में एक बार फिर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट साझा किया है। साथ ही उन्होंने मुख्मंत्री हेमंत सोरेन से कुछ सवाल भी किए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के 1.36 लाख करोड़ रुपये कोयला रॉयल्टी के दावे पर जनता को सच्चाई जानने का हक़ है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ये सवाल पूछे हैं

    1. यह बकाया किस-किस साल का है और किस किस योजना/परियोजना का है?
    2. 1.36 लाख करोड़ रुपये की राशि का आधार क्या है?
    3. यूपीए शासनकाल और शिबू सोरेन के कोयला मंत्री रहते हुए कितनी राशि वसूली गई थी?

    सलाव पूछते हुए आगे उन्होंने कहा कि पारदर्शिता क्यों नहीं? झारखंड के भ्रष्टाचार से भरे इतिहास को देखते हुए, जनता सबकुछ जानना चाहती है। सही दस्तावेज़ और तथ्यों को पारदर्शिता के साथ सामने रखें तब बात करें। बीजेपी झारखंड और झारखंडियों के हर अधिकार के लिए खड़ी है, जहां भी ज़रूरत होगी हम आपके साथ खड़े होंगे। लेकिन झूठे आंकड़े और फर्जी दावे बर्दाश्त नहीं होंगे। सच्चाई पर चलिएगा तो हम हमेशा सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बकाया-बकाया का हौव्वा खड़ा कर कहीं आप जानबूझकर आगे मंईयां सम्मान योजना की राशि देने में विफलता के दोषारोपण की भूमिका तो तैयार नहीं कर रहे? झूठी राजनीति छोड़िए, झारखंड के असली मुद्दों पर ध्यान दीजिए।

  • गिरिडीह: नगर निगम की टोल टैक्स वसूली पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। यह मामला मोंगिया स्टील द्वारा कोर्ट में दायर किया गया था।

    झारखंड हाईकोर्ट ने गिरिडीह नगर निगम द्वारा टोल टैक्स वसूली पर रोक लगा दी है। यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस दीपक रौशन की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने गिरिडीह नगर निगम को निर्देश दिया है कि इस आदेश को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही, आदेश की प्रति नगर विकास विभाग के मुख्य सचिव, गिरिडीह जिले के उपायुक्त (DC), गिरिडीह नगर निगम के आयुक्त और गिरिडीह के एसडीएम को भेजने का निर्देश दिया गया है।

    गिरिडीह नगर निगम की इस टोल टैक्स वसूली के खिलाफ मोंगिया स्टील ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मोंगिया स्टील की ओर से वकील सुमित गाड़ोदिया और शिल्पी सांडिल्य ने अपनी दलीलों में कहा कि गिरिडीह नगर निगम को टोल टैक्स वसूलने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बावजूद निगम ने टैक्स वसूली शुरू की, जिसके चलते मोंगिया स्टील को अदालत का रुख करना पड़ा।

  • राज्य की महिलाओं के लिए अच्छी खबर, इस तारीख को मिल सकती है मंईयां सम्मान योजना की धनराशि।

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को दूसरे अनुपूरक बजट को मंजूरी दे दी। इसके बाद विधि विभाग ने अधिसूचना जारी की, और वित्त विभाग ने भी आदेश पारित कर दिया। महिला, बाल एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इस योजना के स्वीकृति आदेश के लिए मुख्यमंत्री को फाइल भेजी है। चूंकि मुख्यमंत्री स्वयं इस विभाग के मंत्री हैं, संभावना है कि जल्द ही महिलाओं के खातों में मंइयां सम्मान योजना की धनराशि पहुंचनी शुरू हो जाएगी।

    मुख्यमंत्री के आदेश के बाद राज्य की लगभग 55 लाख महिलाओं को इस योजना के तहत धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। नोडल विभाग (महिला एवं बाल विकास) ने मुख्यमंत्री से तारीख तय करने का अनुरोध किया है। सूत्रों का कहना है कि क्रिसमस से पहले लाभार्थियों के खातों में पैसे जमा कर दिए जाएंगे।

    महिला एवं बाल विकास विभाग को बजट में सबसे अधिक राशि
    हाल ही में आयोजित विधानसभा सत्र में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 11,697 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए सबसे अधिक 6,390 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अन्य विभागों को भी राशि आवंटित की गई है।

  • Giridih: बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर को 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एसीबी ने किया गिरफ्तार

    गिरिडीह: जिले के राजधनवार क्षेत्र में बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर दुर्गेश नंदन सहाय को 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने रंगेहाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए इंजीनियर को एसीबी की टीम धनबाद लेकर गई है।

    सूत्रों के अनुसार, दुर्गेश नंदन सहाय ने एक उपभोक्ता से बिजली बिल माफ करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। बुधवार को उन्होंने उपभोक्ता से 8 हजार रुपये की रिश्वत ली। इसी दौरान, एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया।

    गिरफ्तारी के बाद, एसीबी ने धनवार थाने में सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी इंजीनियर को धनबाद ले जाया गया।

  • BPSC अभ्यर्थियों का ‘शिक्षा सत्याग्रह’: परीक्षा पारदर्शिता पर उठे सवाल

    70वीं बीपीएससी परीक्षा के अभ्यर्थियों ने बुधवार शाम भागलपुर  सैंडिस कंपाउंड में कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस मार्च को ‘शिक्षा सत्याग्रह’ का नाम दिया गया, जिसमें अभ्यर्थियों ने “प्रोटेस्ट नहीं – रिक्वेस्ट, विवाद नहीं – संवाद, व्यवधान नहीं – समाधान” के नारों के साथ अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी रही।

    परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप। 
    अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि BPSC ने कदाचार मुक्त और धांधली मुक्त परीक्षा का दावा किया था, लेकिन इसके विपरीत कई जिलों से गड़बड़ियों की खबरें सामने आईं। बापू सभागार में आयोजित परीक्षा के दौरान अनियमितताओं की पुष्टि हुई, जिससे 12,000 परीक्षार्थियों की परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में परीक्षा स्थगन से पूरे रिजल्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    फिर से परीक्षा कराने की मांग। 
    अभ्यर्थियों ने BPSC से परीक्षा दोबारा कराने की मांग की। उनका कहना है कि सभी छात्रों को समान अवसर और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई छात्रों को 200-300 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जिससे उनकी तैयारी और प्रदर्शन प्रभावित हुआ। इस दूरी का औचित्य समझ से परे है।

    आंदोलन की अगली रणनीति।
    कैंडल मार्च के बाद अभ्यर्थियों ने बैठकर अपनी आगे की रणनीति बनाई। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे पटना जाकर अपनी बात रखेंगे।

    अभ्यर्थियों की अपील।
    BPSC अभ्यर्थियों ने इस प्रदर्शन को प्रोटेस्ट नहीं, बल्कि एक शांतिपूर्ण अपील के रूप में रखा है। उनका कहना है कि यह आंदोलन विवाद से ज्यादा समाधान की ओर ध्यान केंद्रित करता है। उनकी एकमात्र मांग है कि सभी छात्रों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार हो।

    इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की जरूरत को रेखांकित किया है।

  • गिरिडीह में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम: गुड गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम

    गिरिडीह। बुधवार को गिरिडीह पुलिस ने नगर भवन में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया। यह पहल झारखंड पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में आयोजित हो रही है। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तरी छोटानागपुर हजारीबाग क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक सुनील भास्कर, एसपी डॉ. विमल, एसडीपीओ जितवाहन उरांव और डीएसपी  नीरज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    समस्याओं के समाधान का प्रयास. 
    डीआईजी सुनील भास्कर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “गुड गवर्नेंस की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक की शिकायत का त्वरित और ऑन-द-स्पॉट समाधान हो।” उन्होंने बताया कि गिरिडीह के सभी अनुमंडल क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

    एसपी डॉ. विमल कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार शिकायतों की संख्या में कमी आई है। अब तक 108 मामलों का समाधान किया गया है, जिनमें से अधिकतर घरेलू और जमीन विवाद से जुड़े हैं। एसपी ने यह भी बताया कि साइबर अपराध जिले में तेजी से बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए पुलिस गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों को लेकर अधिक सतर्क और जागरूक होने की अपील की।

    विशेष निर्देश और समाधान.
    कार्यक्रम के दौरान नगर और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र से जुड़े कई मामलों का समाधान किया गया। डीआईजी ने पारिवारिक विवादों को महिला थाना में निपटाने के निर्देश दिए। जमीन विवाद के मामलों में अंचल अधिकारी के साथ बैठक कर समाधान की बात कही। एक वृद्ध महिला ने पेंशन से संबंधित शिकायत दर्ज कराई, जिसे प्रखंड कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए।

    पुलिस और प्रशासन की समन्वय
    कार्यक्रम में डीएसपी कौसर अली, सदर और बेंगाबाद अंचल अधिकारी, नगर थाना प्रभारी शैलेश प्रसाद, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतोसहित अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद थे।

    यह कार्यक्रम पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण पेश करता है और नागरिकों को राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

  • हेमंत सोरेन: “हम अपना हक लेकर रहेंगे

    परवेज़ आलम की विशेष रिपोर्ट……..

    हेमंत सोरेन का अंदाज़ वही, जो झारखंड की मिट्टी को रास आता है – साफ, सीधा और बिंदास। झारखंड के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और भाजपा के नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल दागा है, “कब मिलेगा 1.36 लाख करोड़?” यह केवल एक सवाल नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा का आक्रोश है।

    “यह हमारी मेहनत का पैसा है”
    सोरेन ने कहा, “हम झारखंडी हवा में बात नहीं करते। ये हमारी मेहनत का पैसा है। हर झारखंडी का हक है और इसे लेकर रहेंगे। भाजपा नेताओं को चाहिए था कि वो हमारी आवाज़ में आवाज़ मिलाते, लेकिन वो तो विरोध में खड़े हो गए। दुखद है, पर लड़ाई हम जीतेंगे।”

    झारखंड का चुनावी सुपरहिट मुद्दा. 
    कोयला रॉयल्टी का 1.36 लाख करोड़ बकाया हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द बना। सोरेन ने इसे झारखंड के हर घर तक पहुंचा दिया। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी इस मोर्चे पर आक्रामक रहीं।

    चुनावी माहौल में इस मुद्दे ने सियासी तापमान बढ़ा दिया। अब जब केंद्र सरकार कह रही है कि “झारखंड का कोई बकाया नहीं”, तो राजनीति और गरमा गई है। झामुमो ने साफ कह दिया है कि बकाया नहीं मिला तो “झारखंड से एक ढेला कोयला भी बाहर नहीं जाएगा।”

    कानूनी लड़ाई का बिगुल बजा.
    सोरेन सरकार ने केंद्र के इंकार के बाद कानूनी रास्ता अख्तियार करने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने वरीय अधिवक्ताओं का पैनल तैयार कर लिया है। मामला अब अदालत तक जाएगा।

    क्या होगा कोयले का भविष्य?
    झारखंड सरकार ने खनन कंपनियों को अल्टीमेटम दे दिया है। भूमि सुधार विभाग ने सभी कंपनियों से जवाब मांगा है। स्थिति साफ नहीं हुई तो खनन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

    हेमंत का संदेश: “झारखंड चुप नहीं बैठेगा”
    सोरेन के शब्द झारखंडियों की धड़कन बन गए हैं। “हम लड़ेंगे, क्योंकि ये लड़ाई झारखंड के भविष्य की है। ये लड़ाई हमारी मिट्टी के सम्मान की है। ये 1.36 लाख करोड़ का सवाल नहीं, ये झारखंड की आत्मा का सवाल है।”

    देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की यह गूंज दिल्ली के गलियारों में कितनी दूर तक सुनाई देती है।

  • वन नेशन-वन इलेक्शन: जेपीसी और कांग्रेस

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट………

    “एक देश-एक चुनाव”—एक ऐसा विचार जो सियासत की गहराइयों में हलचल मचा रहा है, अब संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की चौखट पर दस्तक दे चुका है। ये वो मंच होगा जहां सत्ता और विपक्ष के बीच का ‘महाभारत’ अपनी नयी गाथा लिखेगा।
    कांग्रेस ने अपने योद्धाओं की टोली तैयार कर ली है। प्रियंका गांधी, रणदीप सुरजेवाला, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत—चारों नाम फाइनल कर स्पीकर के पास भेज दिए गए हैं। इन चारों नेताओं के कंधों पर अब कांग्रेस का पक्ष रखने का भार होगा।
    जेपीसी: एक और ‘कुश्ती का अखाड़ा’। 
    जेपीसी, यानी संयुक्त संसदीय समिति, एक ऐसा मंच जहां संसद के दोनों सदनों के सदस्य मिलकर किसी भी मुद्दे या बिल की गहन समीक्षा करते हैं। लेकिन यह सिर्फ समीक्षा नहीं, राजनीतिक तराजू पर नीतियों और विचारधाराओं को तौलने का एक मौका भी है।
    कांग्रेस के योद्धा:
    • प्रियंका गांधी: कांग्रेस का युवा और महिला चेहरा, जो इस लड़ाई को एक नई धार दे सकती हैं।
    • रणदीप सुरजेवाला और मनीष तिवारी: दोनों कानूनी दांवपेंचों में माहिर, शब्दों के योद्धा।
    • सुखदेव भगत: आदिवासी नेतृत्व का प्रतीक, जिनकी बातों में ज़मीन की गूंज सुनाई देती है।
    क्या होगा जेपीसी का दायरा?
    लोकसभा स्पीकर इस समिति का स्वरूप तय करेंगे। अमूमन लोकसभा के सदस्य राज्यसभा की तुलना में दुगुने होते हैं। यह समिति अपने अध्ययन के आधार पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जो आगे संशोधित बिल का आधार बनेगी।
    वन नेशन-वन इलेक्शन:
    यह सिर्फ एक संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक समर है। इसे अमल में लाने के लिए सरकार को विशेष बहुमत चाहिए। यही वजह है कि सरकार आम सहमति बनाने के लिए जेपीसी का सहारा ले रही है।
    सवालों की परछाई में ‘आम सहमति’
    क्या कांग्रेस के ये चार नाम सत्ता पक्ष के ‘एक देश-एक चुनाव’ के सपने को चुनौती दे पाएंगे? या फिर यह समिति महज एक और औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
    राजनीतिक पंडितों की नज़रें इस सवाल पर टिकी हैं।
    क्योंकि यह फैसला सिर्फ चुनावी प्रणाली को नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को हिला सकता है।
    अगले कुछ दिनों में देश के सियासी मंच पर यह देखना दिलचस्प होगा कि

    Deputy Speaker of Lok Sabha

    की यह गाड़ी कितनी दूर तक दौड़ती है और कौन इसे रोकने की ताकत रखता है।