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  • खेल महोत्सव युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम- अन्नपूर्णा देवी

    सांसद खेल महोत्सव–2025 का समापन

    परवेज़ आलम. द न्यूज़ पोस्ट4यू

    गिरिडीह: कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में आयोजित सांसद खेल महोत्सव–2025 का समापन आज खेल, संस्कृति और युवा ऊर्जा के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। +2 उच्च विद्यालय, पलौंजिया (बिरनी) का मैदान तालियों की गूंज, खिलाड़ियों के उत्साह और विजेताओं की मुस्कान से सराबोर नजर आया। समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह पूरी तरह उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत छऊ नृत्य ने समूचे माहौल को झारखंड की सांस्कृतिक चेतना से भर दिया। वीरता, अनुशासन और परंपरा की त्रिवेणी बने इस नृत्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    इस महोत्सव ने संख्या ही नहीं, संभावनाओं का भी रिकॉर्ड बनाया। सांसद खेल महोत्सव–2025 के अंतर्गत कुल 8603 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 6285 खिलाड़ियों ने मैदान में उतरकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
    महोत्सव में 13 खेल विधाओं का आयोजन किया गया, जिनमें साइक्लोथॉन, एथलेटिक्स, शॉट पुट, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, जैवलिन थ्रो, शतरंज, टेबल टेनिस, कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल और पारंपरिक खेल लगोरी (सेवन स्टोन्स) शामिल रहे।

    प्रतियोगिताओं के समापन पर 363 विजेता और 363 उपविजेता खिलाड़ियों को मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह क्षण न केवल पुरस्कार का था, बल्कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सपनों की पहचान का भी था।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खेल युवाओं को अनुशासन, संघर्ष और नेतृत्व की सीख देता है। ऐसे आयोजन युवाओं को नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखकर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड की धरती खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है और सही मंच मिलने पर यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं।

    सांसद सह केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि खेल महोत्सव युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। खेल न केवल शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच को भी विकसित करता है। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन “फिट युवा – विकसित भारत” के संकल्प को मजबूती प्रदान करते हैं।

    वहीं सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि सांसद खेल महोत्सव ने हजारों युवाओं को एक साझा मंच दिया है, जहां खेल के माध्यम से भाईचारा, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ है। उन्होंने भविष्य में और भी व्यापक स्तर पर ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कार्यक्रम में सांसद काली चरण सिंह, विधायक जनार्दन पासवान, उज्ज्वल दास, प्रदीप प्रसाद, प्रदेश उपाध्यक्ष विकास प्रीतम, जिला अध्यक्ष अनूप जोशी एवं महादेव दुबे, जिला प्रभारी रोहित लाल सिंह, प्रदेश मंत्री दिलीप वर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक उपाध्यक्ष, विनय शर्मा, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश यादव, मुख्य समन्वयक मुकेश जालान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संगठन पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

    खिलाड़ियों और विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े मंच पर खेलना, हजारों खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करना और सम्मान प्राप्त करना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। कई खिलाड़ियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।

  • विकास की हकीकत: गर्भवती महिला फिर खाट पर ढोई गई अस्पताल

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड से एक बार फिर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क और एंबुलेंस सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को गर्भवती महिला को खाट पर डालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिसरी तक पहुंचाना पड़ा।

    यह घटना सप्ताह भर में दूसरी बार हुई है। इससे पहले सलगी सोरेन को खाट पर टांगकर अस्पताल पहुंचाया गया था और अब तालको मरांडी को भी उसी स्थिति का सामना करना पड़ा। दोनों ही मामलों में ग्रामीणों ने खाट को स्ट्रेचर और अपने कंधों को एंबुलेंस का पहिया बनाकर महिला को कई किलोमीटर तक ढोया।

    सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था.
    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में न तो सड़कें ठीक हैं और न ही एंबुलेंस समय पर मिलती है। मजबूरी में खाट पर मरीजों को ले जाना पड़ता है। लोग कटाक्ष करते हुए कह रहे हैं कि अब “खटिया ही एंबुलेंस” बन चुकी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई किरकिरी.
    इधर, सोशल मीडिया पर एंबुलेंस से “रील्स” बनाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मरीजों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो रील्स बनाने के लिए एंबुलेंस कैसे उपलब्ध हो जाती है?

    राजनीतिक प्रतिक्रिया.
    नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस वायरल वीडियो को साझा कर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य बताता है कि स्वास्थ्य सेवाएँ कितनी लचर हो चुकी हैं। जब मरीजों के लिए एंबुलेंस नहीं है और उन्हें खाट पर लादकर अस्पताल ले जाया जा रहा है, तब “विकास” का असली चेहरा साफ दिखाई देता है।

  • झारखंड: डीजीपी अनुराग गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम राहत

    बाबूलाल मारंडी की याचिका खारिज.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    नई दिल्ली/रांची : झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

    बाबूलाल मरांडी की याचिका.

    भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक अवमानना याचिका दायर कर गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती दी थी। मरांडी का तर्क था कि यह नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुप्ता को पद देने के लिए UPSC द्वारा सुझाए गए पैनल में शामिल अधिकारी को अनुचित तरीके से हटा दिया गया।

    राज्य सरकार का पक्ष.

    राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि डीजीपी की नियुक्ति राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है और अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार का उल्लंघन या अवमानना नहीं हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला.

    सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मरांडी की अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि गुप्ता की नियुक्ति में अवमानना जैसी कोई स्थिति नहीं बनी है। इस निर्णय से अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली और उनकी नियुक्ति को अदालत की वैधानिक मान्यता प्राप्त हो गई।

    नियुक्ति पर उठे सवाल.

    अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल को 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाले थे। राज्य सरकार ने उनकी सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन सूत्रों के अनुसार केंद्र ने इसे ठुकरा दिया। इसके बावजूद झारखंड सरकार ने उन्हें डीजीपी नियुक्त कर दिया। इससे पहले भी उनकी “एड-हॉक नियुक्ति” को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी.

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत की “अवमानना याचिका” और “जनहित याचिका (PIL)” का इस्तेमाल राजनीतिक संघर्ष सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा:
    “राजनीतिक लड़ाइयाँ जनता के सामने लड़ी जानी चाहिए। अगर किसी नियुक्ति पर आपत्ति है, तो इसके लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का दरवाज़ा खटखटाइए। लेकिन अदालत की अवमानना का सहारा लेकर राजनीतिक स्कोर सेटल करना उचित नहीं है।”

    PIL पर कोर्ट का रुख

    कोर्ट ने साफ कहा कि—
    “PIL का उद्देश्य यह है कि लोकहित में कोई भी नागरिक अदालत तक पहुँच सके, लेकिन इसे व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों को साधने का औज़ार नहीं बनाया जा सकता।”

  • सूर्या हांसदा मामले पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला

    यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है,सीबीआई जांच की मांग.

    The News Post4u.

    रांची : झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। गोड्डा में आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की मौत के मामले ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को रांची में प्रेस वार्ता कर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    अपराधियों को संरक्षण, निर्दोषों पर अत्याचार” – मरांडी.

    मरांडी ने कहा कि मौजूदा सरकार में कुछ पुलिसकर्मी अपराधियों को शरण और संरक्षण दे रहे हैं, जबकि निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
    उन्होंने आरोप लगाया –

    “चाहे किसी आदिवासी नेता को अपराधी साबित करना हो, या शक के आधार पर आवाज दबाने के लिए एनकाउंटर करना हो… झारखंड पुलिस के भीतर के कुछ अपराधी मानसिकता वाले लोग इन कामों को अंजाम दे रहे हैं। माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, और जमीन कब्जाने जैसे मामलों में भी इनकी भूमिका संदिग्ध है।”

    विपक्ष और सत्ता दोनों पर खतरा.

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस स्थिति से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एवं उनके सहयोगी भी सुरक्षित नहीं हैं।
    मरांडी के शब्दों में –

    “संघर्ष करते-करते रास्ता भटकने वालों को देश की न्याय व्यवस्था ने हमेशा मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है, लेकिन आज एक आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।”

    यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है”

    मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत को सीधा-सीधा हत्या करार दिया।

    “यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है। वह भी अपराधियों द्वारा नहीं, बल्कि वर्दी में छिपे कुछ कायर और बुजदिलों द्वारा किया गया। उन्हें डर था कि आदिवासियों की आवाज उनके कानों का पर्दा न हिला दे, डर था कि आदिवासी अपने हक और अधिकार के लिए न खड़े हो जाएं।”

    उन्होंने कहा कि झूठे केस, फर्जी मुकदमे और लगातार मानसिक दबाव बनाना – यही आज के समय में विरोध की आवाज को दबाने का सरकारी तरीका बन गया है।

    परिजनों की सीबीआई जांच की मांग.

    मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा की पत्नी और मां लगातार पुलिस पर जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगा रही हैं। उनकी एक ही मांग है – इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो।

    “अगर मुख्यमंत्री को सीबीआई से डर लगता है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कराई जाए। इस घटना को जनता पचा नहीं पा रही, और पुलिस की भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में है।”

    राजनीतिक माहौल में बढ़ी गरमी.

    सूर्या हांसदा की मौत पर भाजपा का यह हमला झारखंड की सियासत में नई बहस छेड़ सकता है। एक तरफ सरकार और पुलिस पर आरोपों की बौछार हो रही है, तो दूसरी ओर आदिवासी समुदाय के भीतर भी इस घटना को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

  • झारखंड सरकार ने गठित की TAC, CM हेमंत बने अध्यक्ष; चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी को मिली सदस्यता

    झारखंड जनजाति सलाहकार परिषद का गठन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बने अध्यक्ष

    राज्य सरकार ने झारखंड जनजाति सलाहकार परिषद का गठन कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी की गई है। परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे, जबकि चमरा लिंडा को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

    परिषद में कुल 19 सदस्य शामिल हैं, जिनमें बीजेपी नेता चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी को भी स्थान दिया गया है। इसके अलावा, प्रो. स्टीफन मरांडी, आलोक कुमार सोरेन, लुईस मरांडी और संजीव सरदार जैसे प्रमुख नेताओं को भी परिषद में शामिल किया गया है।

    इस बार परिषद में दो मनोनीत सदस्यों, जोसाई मार्डी और नारायण उरांव को भी जगह दी गई है। परिषद की पूरी सूची जारी कर दी गई है।

  • बाबूलाल मरांडी ने CMको लिखा पत्र, आदिवासी समाज पर दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

     

    रांची – भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र सौंपते हुए गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र में आदिवासी समाज के खिलाफ दर्ज एक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में “मरांग बुरू सांवता सुसार बैसी” संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का हवाला दिया।

    पत्र में पारसनाथ शिखर क्षेत्र में स्थित आदिवासी समाज के पारंपरिक पूजा स्थल “मरांगबुरू जुग-जाहेरथान” की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है। बाबूलाल मरांडी ने उल्लेख किया कि पारसनाथ पहाड़ पर सदियों से आदिवासी समाज अपनी धार्मिक परंपराओं, सोहराय और अन्य अनुष्ठानों का पालन करता आ रहा है। विशेष रूप से “जुग जाहेर थान” और “दिशोम मांझीथान” जैसे स्थल उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहां पारंपरिक बलि प्रथा के तहत पूजा की जाती है।

    पत्र में यह भी बताया गया है कि 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी और समर्थकों के साथ पारसनाथ शिखर क्षेत्र में पूजा-अर्चना की थी। इस दौरान कुछ समर्थकों द्वारा बकरों की बलि दी गई, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद पांच निर्दोष आदिवासी नागरिकों—बुधन हेम्ब्रोम, साहेबराम मुर्मू, फागू मरांडी, सिकंदर हेम्ब्रोम और अर्जुन हेम्ब्रोम—को आरोपी बना दिया गया। पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय पुलिस ने जानबूझकर आदिवासी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया, जबकि असली दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    बाबूलाल मरांडी ने पत्र में इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पारसनाथ शिखर क्षेत्र में जैन समाज और आदिवासी समाज के बीच पूजा स्थलों और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर विवाद बढ़ रहा है, जिससे इलाके में तनाव बना हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने, निर्दोष आदिवासियों को न्याय दिलाने और दोनों समुदायों के बीच विवाद का स्थायी समाधान निकालने की अपील की।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस पवित्र शिखर क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सार्थक पहल करें, जिससे देश-विदेश से आने वाले जैन तीर्थयात्रियों और आदिवासी धर्मावलंबियों को एक सुखद और शांतिपूर्ण अनुभव मिल सके।

  • मंत्री सोनू ने किया मृतक दामोदर के परिवार को आर्थिक मदद

    गिरिडीह : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलगा गांव में बीते दिनों हुई चाकूबाजी की घटना में मारे गए दामोदर यादव के परिवार को नगर विकास और पर्यटन मंत्री सुदिब्य कुमार सोनू ने तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। मंत्री सोनू ने पीड़ित परिवार से मिलकर पहुंचे और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया । इसके अलावा मंत्री के निर्देश पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ₹50,000 और सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) की ओर से ₹2.5 लाख की भी मदद पीड़ित परिवार को दी गयी । मंत्री ने अम्बेडकर आवास योजना के तहत घर, बेटी की शिक्षा का खर्च और बेटे को नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया।

    बता दें कि अपराधियों द्वारा चाकूबाजी की घटना में घायल दामोदर यादव का इलाज के दौरान बीते दिनों निधन हो गया था। यह घटना पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का कारण बनी थी और विरोधी दल इसपर राजनीति भी शुरू कर दिया था पर मंत्री और स्थानीय विधायक सोनू की इस पहल ने विरोधियों की मंशा को फुस्स कर दिया ।
    मंत्री जी के दौरे के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौजूद थे । परिवार ने सरकारी मदद और मंत्री के आश्वासनों पर आभार व्यक्त किया। वहीं, ग्रामीणों ने भी मंत्री को धन्यवाद देते हुए अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    यह पहल पीड़ित परिवार को राहत देने के साथ ही सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।

     

  • ‘मांझी थान और जाहेर थान सिर्फ पूजा स्थल नहीं हैं, यह पहचान हैं-मराण्डी

    गिरिडीह : झारखंड की मिट्टी में बसे एक ऐसे सांस्कृतिक विरासत की बात बताते हैं , जो सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक पूरे समाज की पहचान है। संथाल समाज की आत्मा, उनकी परंपरा, और उनकी जड़ों का प्रतीक—मांझी थान और जाहेर थान।  और इस चर्चा के केंद्र में हैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी।”

    आज बाबूलाल मरांडी अपने गांव कोदईबांक में पहुंचे। गांव के मुहाने पर मांझीथान के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। यह महज एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस समाज के प्रति एक संवेदनशील दृष्टिकोण था, जो अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए संघर्षरत है।

    “बाबूलाल मरांडी ने कहा,। अगर ये समाप्त हो गए, तो समझिए, हमारी पहचान भी समाप्त हो जाएगी।’”

    संथाल समाज की परंपरा में मांझी थान और जाहेर थान का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं है। यह उनके इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। मांझी थान उस धरती से जुड़ाव का प्रतीक है, जहां यह समाज अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ बसता है।

    “बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कहा, ‘हम तभी तक संथाल हैं, जब तक जाहेर थान और मांझी थान की पूजा करते हैं। यह हमारी पहचान है, हमारी जड़ें हैं।’”

    बाबूलाल मरांडी ने अपने इस कदम से एक बड़ी बात कही। यह केवल आस्था का सवाल नहीं, बल्कि एक समुदाय की सांस्कृतिक आत्मा को बचाने की पहल है।

     

  • झारखंड में बीजेपी की हार: क्या संघ की पकड़ ढीली हो गई है ?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए किसी झटके से कम नहीं हैं। 28 आदिवासी सीटों में से सिर्फ़ एक सीट पर जीत, यह आंकड़ा पार्टी की सियासी जमीन खिसकने की कहानी खुद ब खुद कहता है। आदिवासी इलाकों में पार्टी की पकड़ कमजोर हो चुकी है। दिल्ली से लेकर रांची तक मंथन का दौर जारी है, लेकिन क्या बीजेपी उस दर्द की सही नब्ज़ पकड़ पाएगी जिसने उसे इस हार की कगार पर ला दिया ?

    आदिवासी वोटर और बीजेपी का बिखरता समीकरण
    झारखंड में बीजेपी की हार के पीछे आदिवासी वोटरों की नाराज़गी साफ झलकती है। पार्टी ने आरएसएस के जरिए आदिवासियों को जोड़ने की हर कोशिश की, लेकिन ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम समुदाय का गठजोड़, बीजेपी की कोशिशों पर भारी पड़ा। आदिवासी इलाकों में ईसाई मिशनरियों का बढ़ता प्रभाव, सरना आदिवासियों की घटती संख्या और संघ की कमजोर होती पकड़ ने बीजेपी की सियासी पकड़ को ढीला कर दिया।

    गुमला, लोहरदगा, बिशुनपुर और सिसई जैसे इलाकों में कभी संघ का मजबूत नेटवर्क हुआ करता था। वनवासी कल्याण केंद्र, एकल विद्यालय, और सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संगठन आदिवासी समुदाय में संघ का प्रभाव बढ़ाते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में इन संगठनों की गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। संघ से जुड़े सूत्र मानते हैं कि आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी से संघ की शाखाएं कमजोर पड़ी हैं।

    दिल्ली में होगा निर्णायक मंथन
    रांची में हार की समीक्षा के बाद अब दिल्ली में 3 दिसंबर को बीजेपी के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी। जेपी नड्डा, अमित शाह, और अन्य वरिष्ठ नेता इस हार के कारणों पर मंथन करेंगे। सवाल यह है कि क्या यह बैठक सिर्फ हार के कारणों को तलाशेगी या जमीनी स्तर पर कुछ ठोस बदलाव भी होंगे?

    गुमला से लेकर बिशुनपुर तक: बीजेपी का टूटता किला
    गुमला जिले में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली है। कभी इन इलाकों में वनवासी कल्याण केंद्र और विकास भारती जैसे संगठनों का बड़ा प्रभाव था। बिशुनपुर में अशोक भगत की पकड़ इतनी मजबूत थी कि टिकट का फैसला वही करते थे। लेकिन आज वहां झामुमो और चमरा लिंडा का दबदबा है।

    क्या बीजेपी आत्मनिरीक्षण करेगी?
    2019 के चुनाव में 25 सीटें जीतने वाली बीजेपी आज सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई है। आदिवासियों का झुकाव झामुमो और कांग्रेस की ओर बढ़ता जा रहा है। संघ की कमजोर होती भूमिका, बूथ मैनेजमेंट की खामियां और निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह खत्म होना, ये सब पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।

    बीजेपी के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। जमीनी स्तर पर काम शुरू करना होगा, नए चेहरे लाने होंगे और पुराने, चूके हुए नेताओं से किनारा करना होगा। झारखंड कभी बीजेपी का गढ़ हुआ करता था, लेकिन अब यह पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बन गया है।

    क्या बीजेपी समय रहते सबक लेगी या यह हार उसकी झोली में आने वाले और बड़े झटकों का ट्रेलर मात्र है? झारखंड की सियासत के इस बदलते परिदृश्य में बीजेपी का भविष्य सवालों के घेरे में है।

  • बंगाल सरकार द्वारा झारखंड में आलू रोक पर बाबूलाल ने मुख्यमंत्री से हल निकालने को कहा!

    पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा झारखंड में आलू के ट्रकों को आने से रोकने पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है। उन्होंने हेमंत सोरेन से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर इस समस्या को तुरंत हल करने का अनुरोध किया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के इस फैसले से महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। बंगाल से झारखंड आ रहे सैकड़ों ट्रकों को वापस लौटा दिया गया है, जिससे सब्जी मंडियों में केवल कुछ दिनों का ही स्टॉक बचा है। कम आपूर्ति के कारण आलू की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, और यह आम लोगों की रसोई से गायब हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि हेमंत सोरेन ममता बनर्जी से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालें और झारखंड में आलू की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें, ताकि राज्य के लोगों को महंगाई से राहत मिल सके।