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  • नगर निकाय चुनाव पार्टी आधारित कराए जाए-भाजपा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी के खिलाफ मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने सड़कों पर उतरकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर की सड़कों पर पैदल मार्च निकालते हुए जिला समाहरणालय तक जोरदार प्रदर्शन किया। उपायुक्त कार्यालय के समक्ष कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जल्द से जल्द नगर निकाय चुनाव कराने की मांग की।

    इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। पूर्व सांसद रविंदर राय, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष विकास प्रीतम, पूर्व  महापौर सुनील पासवान, जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, विनय सिंह और नगर अध्यक्ष हरविंदर सिंह बग्गा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में पार्टी का झंडा लेकर सड़कों पर उतरे। “लोकतंत्र बचाओ”, “चुनाव कराओ” जैसे नारों से शहर का माहौल गूंज उठा।

    प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। नेताओं ने कहा कि सरकार जानबूझकर नगर निकाय चुनाव को टाल रही है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। लंबे समय से नगर निकाय संस्थाएं भंग पड़ी हैं, जिसका सीधा असर शहरी विकास कार्यों पर पड़ रहा है। सड़क, नाली, साफ-सफाई और नागरिक सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हैं, लेकिन सरकार को जनता की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है।

    भाजपा नेताओं ने स्पष्ट मांग की कि नगर निकाय चुनाव अविलंब, पारदर्शी और पार्टी आधारित कराए जाएं। साथ ही मतदान प्रक्रिया में ईवीएम के प्रयोग की भी मांग की गई। नेताओं का कहना था कि पार्टी आधारित चुनाव से जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सीधे जवाब मांग सकेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

    प्रदर्शन के अंत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही नगर निकाय चुनाव की घोषणा नहीं की गई तो भाजपा चरणबद्ध तरीके से व्यापक जन आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता की आवाज को सड़क से लेकर सदन तक बुलंद करती रहेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

     

  • पूर्व सांसद रविंद्र राय ने सूर्या हासदा मौत मामले पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :गिरिडीह-कोडरमा के पूर्व सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र राय ने रविवार को नया परिषदन भवन में प्रेसवार्ता आयोजित की। इस मौके पर जिलाध्यक्ष महादेव दुबे, नगर अध्यक्ष हरमिंदर सिंह बग्गा, भाजपा नेता संजीत सिंह पप्पु, सुभाष चंद्र सिन्हा और जिला मीडिया प्रभारी कामेश्वर पासवान भी उपस्थित रहे।

    सूर्या हासदा की मौत पर गंभीर आरोप

    प्रेसवार्ता में रविंद्र राय ने हाल ही में हुई सूर्या हासदा की मौत को फर्जी एनकाउंटर करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक सूर्या हासदा पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था, लेकिन बाद में उसे कुख्यात अपराधी बताकर गोली मार दी गई। राय ने कहा कि भाजपा की जांच टीम ने घटनास्थल पर जाकर तथ्यों की पुष्टि की है, जिससे साफ होता है कि एनकाउंटर पूरी तरह संदिग्ध है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार अपनी साख बचाना चाहती है, तो इस मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए

    जीएसटी सुधारों की सराहना

    वहीं, जीएसटी मुद्दे पर बोलते हुए रविंद्र राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “मोदी जी ने जब से GST स्लैब में कटौती की है, तब से विपक्ष की बोलती बंद हो गई है। यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है और आम लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।”

    उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से कैंसर समेत 33 जीवन रक्षक दवाओं को जीएसटी से बाहर कर दिया है। इसके अलावा बीमा सेवाओं और कई खाद्य पदार्थों को भी जीएसटी के दायरे से मुक्त किया गया है। राय का कहना था कि इन फैसलों से समाज के हर तबके को फायदा मिलेगा और जनता की जेब पर बोझ कम होगा।

    भाजपा की रणनीति का संकेत

    प्रेसवार्ता के दौरान रविंद्र राय ने स्पष्ट किया कि भाजपा जनता की आवाज को मजबूती से उठाएगी और हेमंत सरकार की नाकामी को बेनकाब करती रहेगी। सूर्या हासदा प्रकरण को लेकर पार्टी आंदोलन की तैयारी भी कर सकती है।

     

  • एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।

    सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.

    बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.

    जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।

    अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.

    बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

    सुरक्षा और धमकी का मुद्दा

    बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
    आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।

    बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.

    इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।

    एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।

     

  • गिरिडीह: ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की

    The News Post4u.

    गिरिडीह: आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में चलाए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मंगलवार को भाजपा झारखंड प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेश साव ने गिरिडीह के शास्त्री नगर स्थित अपने आवास पर तिरंगा फहराकर अभियान का शुभारंभ किया।

    इस मौके पर श्री साव ने कहा कि तिरंगा हमारी शान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने घरों पर तिरंगा अवश्य लगाएं। यह पहल न केवल राष्ट्र की एकजुटता को दर्शाती है, बल्कि एक सशक्त भारत की पहचान भी है।

    उन्होंने कहा, “हमारा राष्ट्रीय ध्वज केवल स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारी एकता, अखंडता और सांस्कृतिक धरोहर की अमर पहचान है। इस गौरवपूर्ण अभियान में शामिल होकर अपने घर, कार्यालय और दुकानों पर तिरंगा फहराएं, और राष्ट्र के प्रति सम्मान को दृढ़ संकल्प के साथ व्यक्त करें।”

    श्री साव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को भारत की विविधताओं में निहित सुंदरता, अनेकता में एकता और 140 करोड़ देशवासियों की अटूट देशभक्ति का अद्भुत प्रतीक बताया।

  • राज्य में बदहाल व्यवस्था पर बीजेपी का हेमंत सरकार पर हमला, गिरिडीह सहित राज्य भर मे प्रदर्शन

    By The News Post4u.

    झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हल्ला बोल दिया है। गिरिडीह सहित राज्य भर के प्रखण्ड मुख्यालयों मे पार्टी ने मंगलवार को प्रदर्शन किया । पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल  मरंडी,कार्यकारी अध्यक्ष रवीन्द्र राय, विधायक मंजु देवी, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, ज़िला अध्यक्ष महादेव दुबे,वरिष्ठ नेता सुरेश साव, राजेश जैसवाल, बिनय सिंह व चुन्नुकांत सहित कई दर्जनो नेता और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन मे शामिल हुये।

    पार्टी का आरोप है कि पूरे राज्य में शासन व्यवस्था चरमराई हुई है। जनता अपराध, भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के बोझ से कराह रही है, लेकिन सरकार अपने पुराने रवैये से बाहर आने को तैयार नहीं है।

    बीजेपी का कहना है कि प्रदेश में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, महिलाओं के खिलाफ अपराध आम हो गए हैं। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। पार्टी ने दावा किया कि पहले कार्यकाल में खनिज संपदाओं की लूट को जिस तरह सरकारी संरक्षण मिला, वही लूट अब और संगठित हो गई है। पंचायत से लेकर सचिवालय तक भ्रष्टाचार का तंत्र मजबूत हुआ है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर सवाल.

    भाजपा ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का घोर अभाव है, ऑक्सीजन और एम्बुलेंस की किल्लत से गरीब दम तोड़ रहे हैं। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और आधारभूत संरचना जर्जर हो चुकी है।

    आयुष्मान भारत योजना भी लगभग ठप पड़ी है, बकाया भुगतान न मिलने के कारण कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे अस्पतालों की स्थिति और भी दयनीय हो चुकी है।

    पेंशन, किसानों और योजनाओं में अव्यवस्था.

    बीजेपी ने आरोप लगाया कि वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाएं महीनों से बंद हैं, जिससे लाभार्थी दर-दर भटक रहे हैं। मातृत्व सम्मान राशि की राशि भी हजारों महिलाओं को नहीं मिली, और किसानों को धान की बिक्री के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। खाद और बीज की खरीद में कालाबाजारी चरम पर है।

    भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में खानापूर्ति चल रही है, पोषण सामग्री की सप्लाई बाधित है, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाएं पूरी तरह ठप हैं।

    भ्रष्टाचार और बिचौलियों का बोलबाला.

    भाजपा का कहना है कि राज्य में अब बिना बिचौलिए के कोई भी सरकारी कार्य संभव नहीं है। चाहे जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो, राशन कार्ड या भूमि से संबंधित कार्य – हर जगह रिश्वत और दलाली का बोलबाला है। ग्रामीण सड़कों की हालत इतनी खराब हो गई है कि आवागमन कठिन हो गया है।

    स्थानीय नीति, भाषा और चुनावों पर भ्रम की स्थिति.

    हेमंत सरकार पर आरोप है कि वह स्थानीय नीति, नियोजन नीति और भाषा विवाद में राज्य को उलझा कर मूल समस्याओं से ध्यान भटका रही है। नगर निकाय चुनाव अब तक नहीं कराए गए हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में जनता का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है और प्रशासनिक अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं।

    भाजपा की मांग.

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के समक्ष 14 प्रमुख मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाना है। प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

    • कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाए और अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता मिले।
    • थाना प्रभारियों को उनके क्षेत्र में अपराधों के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
    • किसानों को धान बिक्री का भुगतान शीघ्र मिले और खाद-बीज की कालाबाजारी रोकी जाए
    • प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
    • पेसा अधिनियम लागू किया जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
    • पेंशन योजनाएं पुनः शुरू की जाएं (वृद्धा, विधवा, दिव्यांग)।
    • शिक्षकों व चिकित्सकों के रिक्त पद भरे जाएं और +2 विद्यालयों में भाषावार शिक्षक नियुक्त हों।
    • सरकारी अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं (दवा, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस, टीका) सुनिश्चित हों।
    • ग्रामीण अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए।
    • जर्जर सड़कों व भवनों की मरम्मत कराई जाए।
    • बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर निकाला जाए।

    भाजपा का ऐलान – “जनता के लिए सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रहेगी”

    भाजपा ने ऐलान किया है कि एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए वह राज्य में जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक सरकार को घेरती रहेगी। हेमंत सरकार को चेतावनी दी जाती है कि वह अपनी कार्यसंस्कृति में सुधार लाए, जनता से किए गए वादों को निभाए और राज्य को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करे।”

    इस तरह, भाजपा ने हेमंत सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया।

     

  • झारखंड भाजपा में नेतृत्व की हलचल: रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की मुलाकात से सियासी सरगर्मी तेज

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    परवेज़ आलम.  for The News Post4U.  

    झारखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल है। रविवार को दुमका में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से हुई। पहली नज़र में यह मुलाकात सामान्य प्रतीत हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता दुमका परिसदन में ठहरे हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतरखाने में इसे एक राजनीतिक ‘प्रयोग’ माना जा रहा है — एक ऐसी पहल, जो आने वाले महीनों में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व को नई दिशा दे सकती है।

    शाह से मुलाकात और रघुवर की सक्रियता: कोई संयोग नहीं ?

    बताया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले जब बाबूलाल मरांडी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे, उसी दिन रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में आदिवासी परंपराओं को सम्मान देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग कर डाली। रघुवर की इस पहल को राजनीतिक गलियारों में ‘सक्रिय वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने भी पेसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को निर्देश दिया है कि वे रघुवर दास की सक्रियता को संगठन से जोड़ें।

    नेतृत्व संकट और संगठन की जरूरत.

    2024 के लोकसभा चुनाव में हार और प्रमुख नेताओं की पराजय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने नेतृत्व का संकट है। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे नेता सौम्य और शांत राजनीति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो आक्रामक तेवर के साथ पार्टी की बात जनता तक पहुंचा सके — और यही भूमिका रघुवर दास निभा सकते हैं।

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची आने वाले हैं। वे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे और झारखंड भाजपा के नेताओं से मिलकर पार्टी की झारखंड मे  रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान पार्टी की आदिवासी, ओबीसी और सामान्य वर्गों के बीच आउटरीच कार्यक्रम का ब्लूप्रिंट भी पेश किया जाएगा।

    इसी समय के आसपास झारखंड भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिलने की संभावना है। ऐसे में रघुवर दास की बढ़ती सक्रियता और बाबूलाल मरांडी की रणनीतिक भूमिका को लेकर शाह का नजरिया महत्वपूर्ण होगा।

    अध्यक्ष पद की रेस: कौन किससे आगे?

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

    • रघुवर दास – पूर्व मुख्यमंत्री, वे ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर सक्रिये राजनीति मे लौटे हैं और लगातार झारखंड के जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनता से संवाद कर रहे हैं। शिकायतों पर अफसरों को फोन करना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उनकी सक्रियता को दिखा रहे हैं।
    • अर्जुन मुंडा – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी आदिवासी नेता। लेकिन खूंटी से चुनाव हारने के बाद वे फिलहाल जमशेदपुर स्थित अपने आवास में सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित हैं।
    • चंपाई सोरेन – पूर्व मुख्यमंत्री, जो अब भाजपा में हैं और लगातार कोल्हान व संताल परगना में दौरे कर रहे हैं। संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
    • ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेता – इस सूची में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रविंद्र राय के नाम प्रमुख हैं।

     भाजपा की रणनीति किस मोड़ पर ?

    रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की दुमका में मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं       थी, बल्कि भाजपा के आने वाले फैसलों की बुनियाद मानी जा रही है। अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प   होगा कि भाजपा झारखंड में नेतृत्व के लिए किसे चुनती है — अनुभव, सामाजिक समीकरण या सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी?

     

  • राहुल गांधी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट

    2018 के मानहानि का है मामला

    परवेज़ आलम.

    रांची/चाईबासा:  लोकसभा मे विपक्ष के नेता  और काँग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। झारखंड के चाईबासा कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर दर्ज मानहानि मामले में की गई है।

    चाईबासा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने राहुल गांधी को 26 जून 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वारंट को रद्द करने की मांग की है

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला 28 मार्च 2018 का है, जब कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा और उस समय के अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा नेता प्रताप कुमार ने जुलाई 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चाईबासा CJM कोर्ट में दायर किया था।

    कोर्ट में अनुपस्थिति बनी विवाद का कारण.

    मामले की सुनवाई के दौरान चाईबासा कोर्ट ने राहुल गांधी को कई बार समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन वे शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने पहले समन, फिर बेलबिल वारंट भेजा, लेकिन अनुपस्थिति जारी रहने पर आखिरकार 24 मई 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

    हाईकोर्ट में पहले से लंबित है एक याचिका.

    राहुल गांधी के वकीलों ने इस मामले में पहले ही झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है, जिसमें शारीरिक उपस्थिति से छूट की मांग की गई है। यह याचिका फिलहाल लंबित है। इसी बीच चाईबासा कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए जाने के बाद, अब उन्होंने एक और याचिका दायर कर इस वारंट को कानूनी रूप से निरस्त करने की अपील की है।

    ग्रीष्मकालीन अवकाश बना बाधा.

    राहुल गांधी की याचिका झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है, लेकिन फिलहाल अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश पर है। ऐसे में इस पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं है। यदि कोई विशेष पीठ गठित न की गई, तो यह मामला अवकाश के बाद ही सूचीबद्ध किया जा सकता है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित असर.

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस राज्य में विपक्ष को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी पर जारी यह वारंट न सिर्फ उनके खिलाफ कानूनी दबाव बढ़ाता है, बल्कि कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी करता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

    राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में राहत की उम्मीद की जा रही है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही अवकाश के कारण स्थगित है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, और क्या राहुल गांधी को 26 जून को चाईबासा कोर्ट में पेश होना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलती है।

  • हेमंत सरकार मुझे निशाना बनाने की  साजिश रच रही है – बाबूलाल मरांडी

    By The News Post4u.

    गिरिडीह : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगते हुये कहा है कि  राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार, अपराधियों के माध्यम से उन्हें, उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों को निशाना बनाने की साजिश रच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को “सुपारी” तक दी जा रही है।

    सोमवार को गिरिडीह में मीडिया से बात करते हुये  मरांडी ने कहा, “मुझे विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से जुड़े कुछ अत्यधिक भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति वाले अधिकारी मेरे खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं। वे न केवल मेरे ऊपर हमले की योजना बना रहे हैं, बल्कि मेरे परिजनों, निकट सहयोगियों को भी झूठे मामलों में फंसाने, चरित्र हनन करने और फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी प्रयास उन्हें डराने और उनकी आवाज को दबाने के लिए हैं, क्योंकि उन्होंने लगातार राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों का पर्दाफाश किया है।

    कई घोटालों को उजागर करने का दावा.
    मरांडी ने कहा कि उन्होंने झारखंड में चल रहे शराब घोटाले, बालू और पत्थर के अवैध खनन, जमीन और कोयले की तस्करी जैसे संगठित अपराधों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन खुलासों से बौखला गई है और अब उन्हें चुप कराने की कोशिश में जुट गई है।

    पुरानी साजिशों का भी किया उल्लेख.
    मरांडी ने याद दिलाया कि पूर्व में भी उन पर शिकारीपाड़ा क्षेत्र में उग्रवादी हमला करवाने की साजिश रची गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुत्र के निधन के बाद भी वे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं।

    डराएंगे नहीं, झुकाएंगे नहीं”
    बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम उन लाखों लोगों की आवाज हैं जो भ्रष्टाचार, दमन और भय की राजनीति से पीड़ित हैं। हम डरने वाले नहीं हैं, और न ही झुकेंगे। सरकार चाहे जितना भी षड्यंत्र कर ले, सच को दबाया नहीं जा सकता।”

    बाबू लाल मरंडी के इस गमम्भीर आरोप ने झारखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देते हैं।

  • कांग्रेस ने सीपी सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की, कहा- “मानसिक कुंठा के शिकार हैं विधायक”

    रांची ब्यूरो।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीपी सिंह के मुसलमानों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने झारखंड की सियासत में तूफान ला दिया है। कांग्रेस ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल समाज को बांटने वाला बल्कि राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सीपी सिंह की विधान सभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

    प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, सीपी सिंह मानसिक कुंठा के शिकार हो गए हैं। भाजपा में वे न तो प्रदेश अध्यक्ष बन पाए, न ही विधायक दल के नेता। यही कारण है कि वे निराशा में ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जो समाज को गहरे तक बांट सकती है।”

    शहजादा अनवर ने भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, क्या भाजपा अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं जैसे शहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, जफर इस्लाम और यहां तक कि बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान को भी ‘जिहादी’ समझती है? जो मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाई, क्या वे भी भाजपा की नजर में जिहादी थे?”

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पाल मुजनी, प्रवक्ता सोन शांति, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एम तौसीफ और गजेंद्र सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस बीच कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर सीपी सिंह के बयान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह बयान सत्य पाए जाते हैं, तो विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाए। शमशेर आलम ने कहा, एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होकर सीपी सिंह ने समाज को उस दिशा में धकेलने का काम किया है, जहां न केवल सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरे देश की एकता भी खतरे में पड़ सकती है।”

    कांग्रेस का कहना है कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों को सख्त संदेश दिया जा सके।

  • मंत्री हफीजुल हसन ने दी सफाई , भाजपा बर्खास्तगी की मांग पर अड़ी  

    झारखंड की सियासी फिजा इन दिनों एक बयान से राजनीति गरमाई हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन का एक कथित बयान— “शरीयत संविधान से ऊपर है” — राजनीतिक हलकों में बीते चार दिनों से हलचल मचा रखा  है। विपक्षी दल भाजपा ने इस बयान को लेकर मंत्री पर सीधा हमला बोला है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।

    लेकिन क्या मंत्री ने सचमुच ऐसा कहा था? या फिर बयान को संदर्भ से काट कर, अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार परोसा गया? राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं, लेकिन जब बात संविधान और धार्मिक मूल्यों की हो, तो सावधानी और संवेदनशीलता दोनों की जरूरत होती है।

    भाजपा का हमला: ‘संविधान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कथन को भारतीय संविधान का अपमान बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि हसन का यह बयान सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा है और झारखंड जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह की सोच की कोई जगह नहीं हो सकती। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से साफ शब्दों में मांग की कि हसन को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

    मंत्री की सफाई: ‘बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’

    इस पूरे विवाद के बीच मंत्री हफीजुल हसन ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी और कहा कि उनका बयान गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “मैं बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान को सर्वोपरि मानता हूं। मेरी राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, समावेशिता और बराबरी के सिद्धांतों पर आधारित रही है। मैं ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करता जो देश के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध हो।”

    हसन ने आगे जोड़ा, “संविधान ही हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मेरा विश्वास उसी संविधान पर है, जिसने हमें यह आजादी और अधिकार दिए हैं।”

    भाजपा नेताओं पर पलटवार: ‘नफरत की राजनीति बंद हो’

    हसन ने अपनी सफाई में भाजपा नेताओं पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “देश के कई केंद्रीय मंत्री मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ बातें करते आए हैं— किसी ने ‘गोली मारो’ के नारे लगवाए, तो किसी ने देश छोड़ने की धमकी दी। क्या वह संविधान की रक्षा है या संविधान से खिलवाड़?”

    उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म को लेकर प्रेम होना स्वाभाविक है, लेकिन यह प्रेम दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं बन जाना चाहिए। “हम सबको अपने-अपने धर्म से लगाव हो सकता है, लेकिन उस लगाव में दूसरों के धर्म का अपमान न हो, यही संविधान की आत्मा है,” उन्होंने कहा।

    संवैधानिक मूल्यों से नहीं हटूंगा”: हसन का संकल्प.

    बयान के अंत में हसन ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेंगे। “मैं झारखंड के हर समुदाय के लिए न्याय, समानता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। संविधान मेरी राजनीति की धुरी है और वही मेरी सोच की दिशा तय करता है।”

    यह विवाद केवल एक बयान का नहीं है। यह एक बड़े विमर्श का हिस्सा है—धर्म और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का। जब राजनीतिक दल इस संतुलन को अपने-अपने नजरिए से तोड़ते-मरोड़ते हैं, तो सवाल उठता है: क्या वाकई चिंता संविधान की है या उसका इस्तेमाल सियासी लाभ के लिए हो रहा है?