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  • हेमंत सोरेन 2.0 सरकार का पहला बजट पेश , हेमंत सोरेन अपने आत्मबल से लबरेज दिखे

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

    झारखंड विधानसभा में जब वित्त मंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, तो कागज़ पर यह एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज़ लगा। लेकिन जब इस बजट की तह में उतरते हैं, तो सवाल उठते हैं कि क्या यह वास्तव में झारखंड की जनता के सपनों और उम्मीदों का बजट है या फिर आंकड़ों की बाजीगरी मात्र?

    बजट का आकार बड़ा, लेकिन क्या प्रभाव भी बड़ा?

    झारखंड सरकार ने इस बार का बजट 1,45,400 करोड़ रुपये का रखा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% अधिक है। सरकार ने यह भी दावा किया कि राजस्व व्यय में 20.48% की वृद्धि हुई है और पूंजीगत व्यय में 7.81% की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन असली सवाल यह है कि इस बढ़े हुए बजट का लाभ किसे मिलेगा?

    सरकार ने दावा किया कि सामाजिक क्षेत्र के लिए 62,840 करोड़ रुपये और आर्थिक क्षेत्र के लिए 44,675 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लेकिन यह पैसा किन योजनाओं में और किस तरह खर्च होगा, इसकी ठोस रूपरेखा बजट भाषण में नदारद रही।

    क्या बजट सिर्फ सरकारी आश्वासन है?

    राज्य की अर्थव्यवस्था को 2030 तक 10 ट्रिलियन रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इसके लिए ठोस रणनीति क्या होगी? बजट में इसका जवाब नहीं मिलता।

    मंईयां सम्मान योजना के तहत 18 से 50 साल की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया गया है। इसके लिए 13,363 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। लेकिन दो महीने तक राशि रुकी रही, और अब सरकार होली के पहले एकमुश्त 7500 रुपये देने का वादा कर रही है। सवाल यह है कि अगर बजट में धनराशि पहले से आवंटित थी, तो यह देरी क्यों हुई?

    मंईयां सम्मान योजना

    झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार की सत्ता में वापसी के बाद पेश पहले बजट में मंईयां सम्मान का असर दिखा. मंईयां सम्मान देने वाले विभाग का बजट एक झटके में लगभग डबल हो गया. 11 से अधिक विभागों के बजट में कटौती करते हुए सरकार ने एक विभाग का बजट 95 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शिक्षा और कल्याण विभाग को छोड़ सभी विभागों के बजट पर कैंची चला दी है. वर्ष 2025-26 के बजट में सबसे बड़ा फायदा कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग को हुआ है. इस मद में सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में कुल बजट की राशि का 8.96 फीसदी का प्रावधान किया था. वर्ष 2025-26 के बजट में इसमें बंपर बढ़ोतरी करते हुए 17.47 प्रतिशत कर दिया है. यह पिछले बजट की तुलना में करीब 95 प्रतिशत अधिक है. शिक्षा विभाग के बजट में 0.69 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है. ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने की वजह से सरकार ने पेंशन मद में बजट में 0.22 प्रतिशत की वृद्धि की गयी

    रोजगार और आर्थिक विकास: सिर्फ़ दावे या कोई ठोस योजना?

    झारखंड में बेरोजगारी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस बजट में युवाओं के लिए कितनी नौकरियां सृजित होंगी? इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने यह तो बताया कि आर्थिक विकास दर 7.5% रहेगी, लेकिन इस विकास दर का आम जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया।

    कृषि क्षेत्र और छोटे व्यापारियों के लिए बजट में क्या ठोस योजनाएं हैं? राज्य में लाखों किसान सूखे और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके लिए सिर्फ़ कर्ज़माफी के दावे हैं, स्थायी समाधान नहीं।

    बजट में कर्ज़ और घाटे का गणित

    सरकार ने दावा किया कि राजकोषीय घाटा 1.1% तक सीमित रखा गया है और ऋण-जीडीपी अनुपात को 27.3% पर लाने का लक्ष्य है। लेकिन यह आंकड़े तब तक बेकार हैं जब तक कि राज्य के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए कोई ठोस रणनीति न बने। सरकार का अनुमान है कि 2025-26 में 61,056 करोड़ रुपये राजस्व आएगा, लेकिन यह कैसे आएगा, इसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया।

    क्या यह जनता का बजट है?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार का यह पहला बजट कई मायनों में प्रतीकात्मक है। यह बजट राज्य की राजनीतिक मजबूरियों को दर्शाता है। इसमें विकास के दावे हैं, लेकिन योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठते हैं।

    झारखंड जैसे राज्य, जहां के संसाधनों का बड़ा हिस्सा बाहरी कंपनियों और राज्यों को जाता है, वहाँ यह बजट आत्मनिर्भरता का संदेश नहीं देता। रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और राज्य की जनता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में कोई ठोस पहल नहीं दिखती।

    क्या यह बजट जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप है?

    झारखंड का यह बजट आंकड़ों और दावों से भरा पड़ा है, लेकिन जब हम इसकी गहराई में जाते हैं, तो यह कहीं न कहीं खोखला नज़र आता है। बजट भाषण में ‘स्वाभिमान’, ‘स्वावलंबन’ और ‘विकास’ जैसे शब्दों की भरमार थी, लेकिन क्या यह सिर्फ़ भाषण तक सीमित रह जाएगा, या ज़मीनी हकीकत में भी बदलाव लाएगा? यह देखना अभी बाकी है।

  • झारखंड: 4 जिले जहां अभी तक नहीं पहुंची है ट्रेन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ……….

     देश जब विकास के नए आयाम छूते हुए अंतरिक्ष तक अपनी छाप छोड़ रहा है, वहीं झारखंड जैसे खनिज संपदा से भरपूर राज्य के चार जिले ऐसे भी हैं, जहां आज़ादी के 75 साल बाद भी रेलवे लाइन नहीं पहुंच सकी है। ये जिले हैं खूंटी, सिमडेगा, गुमला और चतरा। लेकिन अब इस दिशा में पहल की गई है। रेलवे ने इन जिलों को जोड़ने के लिए 120 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना बनाई है, जो रांची डिवीजन के अंतर्गत आएगी।

    रेल कनेक्टिविटी: अब खत्म होगी दूरी.

    झारखंड के इन जिलों में रेल कनेक्टिविटी का सपना आखिरकार हकीकत बनने जा रहा है। ‘देर आए, दुरुस्त आए’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए भारतीय रेलवे ने इन इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इन जिलों को जोड़ने वाली परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पूरी कर ली गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) रेलवे बोर्ड को सौंप दी गई है।

    कौन-कौन से जिले होंगे शामिल?

    रांची-लोहरदगा रेल लाइन से खूंटी, गुमला और सिमडेगा को जोड़ा जाएगा। वहीं, रांची-हजारीबाग रेल लाइन से चतरा जिला जोड़ा जाएगा। रेलवे ने झारखंड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेआरआईडीसीएल) के माध्यम से इस परियोजना का सर्वेक्षण कार्य पहले ही पूरा कर लिया है।

    कहां-कहां बिछेगी रेल लाइन?

    परियोजना के तहत लोहरदगा से गुमला 55 किलोमीटर, गुमला से सिमडेगा 43 किलोमीटर, हटिया से खूंटी 20 किलोमीटर और हजारीबाग से चतरा तक 42 किलोमीटर की रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। यानी कुल मिलाकर 120 किलोमीटर की रेल लाइन इन इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी।

    सरकार की मंजूरी और बजट.

    अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लागत से चार राज्यों—उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल—के सात जिलों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। झारखंड के इन चार जिलों में रेल नेटवर्क बिछने से न केवल स्थानीय लोगों को फायदा होगा बल्कि राज्य के खनिज संपदा का परिवहन और तेज़ व आसान हो जाएगा।

    विकास का नया अध्याय.

    झारखंड के खूंटी, सिमडेगा, गुमला और चतरा जिलों के लिए यह परियोजना सिर्फ रेलवे कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि विकास की नई गाथा लिखने जैसा है। ये जिले अब न सिर्फ देश के बाकी हिस्सों से जुड़ेंगे, बल्कि इन इलाकों में उद्योग, रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    अब इंतजार है उस दिन का, जब झारखंड के ये जिले रेल के सफर से जुड़कर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेंगे।

     

  • गुजरात में झारखंड की मासूम पर हैवानियत,मौत : क्या इंसाफ सिर्फ नारों में सिमट गया है?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट …..

    गुजरात से लेकर झारखंड तक दिल दहला देने वाली कहानी:
    गुजरात के भरूच में 10 साल की मासूम बच्ची के साथ जो हुआ, वह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक विफलता का प्रमाण है। झारखंड से मजदूरी के लिए गए परिवार की इस बच्ची ने वडोदरा के अस्पताल में सात दिनों तक संघर्ष किया। लेकिन जब सिस्टम ने जवाब दे दिया, तो मासूम की सांसे भी थम गईं।  डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित किया, तो यह मौत केवल उसके शरीर की नहीं थी, बल्कि इंसानियत और न्याय की भी मौत थी।
    झारखंड सरकार की कोशिशें:
    रांची में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस घटना पर दुःख जताया। उन्होंने कहा, “यह समय मुश्किल है, लेकिन राज्य सरकार बच्ची के परिवार के साथ खड़ी है। हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय मिले।”
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बच्ची के इलाज के लिए हर संभव मदद की बात कही थी, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
    कैसे हुआ यह अपराध?
    भरूच के झगड़िया इलाके में 36 साल के एक मजदूर ने इस मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची के निजी अंगों को लोहे की रॉड से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। माता-पिता जब काम पर गए थे, तब यह घिनौना कृत्य हुआ। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
    न्याय का वादा, लेकिन देरी क्यों?
    दीपिका पांडेय सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह प्रक्रिया तेज होगी या फिर यह मामला भी लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहेगा?
    गुजरात में गरमाई राजनीति:
    इस घटना ने राजनीति को भी हवा दे दी है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर निशाना साधा है। सवाल उठ रहे हैं कि बंगाल की घटनाओं पर आवाज उठाने वाली भाजपा, गुजरात में हुई इस बर्बरता पर चुप क्यों है? कांग्रेस नेता अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने इसे मानवीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि गुजरात कांग्रेस के प्रतिनिधि और झारखंड सरकार की ओर से पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुख साझा करना चाहते हैं, आर्थिक सहायता देना चाहते हैं और बच्ची का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना चाहते हैं। मैं गुजरात सरकार और प्रशासन से अपील करती हूं कि वे हमारे प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने दें। तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रमुख इसुदान गढ़वी ने सीएम से पूछा है कि क्या वे गुजरात की निर्भया के लिए धरने पर बैठेंगे। कोलकाता रेप में लेडी डॉक्टर को इंसाफ दिलाने के लिए भूपेंद्र पटेल अहमदाबाद में धरने पर बैठे थे।
    क्या सिस्टम से भरोसा टूट रहा है?
    मामला सिर्फ इस बच्ची का नहीं है। यह सवाल उठता है कि मजदूर परिवारों की बेटियां, जो अपने सपनों के साथ बड़े शहरों की चौखट तक पहुंचती हैं, क्या उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं है?
    पुलिस की कार्यवाही और समाज की जिम्मेदारी:
    आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन क्या यह गिरफ्तारी इस बच्ची के लिए इंसाफ का रास्ता साफ करेगी? या फिर यह घटना भी आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएगी?
    मेरा सवाल:
    क्या आज हम अपनी बेटियों से यह कह सकते हैं कि वे सुरक्षित हैं? और अगर नहीं, तो क्यों?

    क्योंकि जब तक हमारी बेटियां डर के साये में जीती रहेंगी, तब तक विकास और प्रगति के दावे खोखले ही रहेंगे।

  • झारखंड सरकार का कर्मचारियों के लिए नए साल का तोहफा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए नई सौगात का ऐलान किया गया। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। अब यह भत्ता 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू होगी।

    पेंशनभोगियों को भी राहत। 
    केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में भी तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार का यह कदम महंगाई के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में राहत भरा है।

    मेरू योजना के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय को मिला 99.56 करोड़। 
    बैठक में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के लिए 99.56 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस राशि का उपयोग मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (MERU) योजना के तहत किया जाएगा।

    कैग रिपोर्ट और अन्य अहम फैसले। 
    कैबिनेट ने आगामी विधानसभा सत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को पेश करने की स्वीकृति दी। यह रिपोर्ट राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रबंधन स्थिति पर केंद्रित होगी।

    डॉ. तुलसी महतो को प्रोन्नति। 
    झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में रिम्स के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. तुलसी महतो को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने का निर्णय भी लिया गया।

    अन्य प्रमुख फैसले:

    1. झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के सत्रावसान को मंजूरी।
    2. राज्यपाल के अभिभाषण को घटनोत्तर स्वीकृति।
    3. खनन पदाधिकारियों को सेवा शर्तों में छूट।
    4. कैग की वित्तीय वर्ष 2023-24 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने की अनुमति।

    तीसरी कैबिनेट बैठक, दस अहम फैसले। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी सरकार की यह तीसरी कैबिनेट बैठक थी, जिसमें कुलपर सहमति दी गई। राज्य सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र को राहत और प्रगति दोनों मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का यह कदम विकास और जनकल्याण की दिशा में एक और बड़ा प्रयास माना जा रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेनने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुये सभी झारखंडवासियों कोनए साल की बधाई भी दी । 

  • खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाएगा -उद्योग मंत्री संजय यादव

    1. रांची: झारखंड के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में उद्योग विभाग की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों को गति देने के लिए विभाग में खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की और कहा कि झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

    रिक्त पदों पर बहाली को प्राथमिकता. 

    समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि रिक्त पदों की सूची तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विचार-विमर्श कर इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का सपना है कि झारखंड एक औद्योगिक हब बने, और हम इसे साकार करेंगे।”

    निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं . 

    मंत्री यादव ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योगों के विकास में बिचौलियों से सतर्क रहने पर भी जोर दिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उद्योगों के विस्तार और निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    समीक्षा बैठक में शामिल अधिकारी. 

    इस समीक्षा बैठक में उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह, अपर सचिव, उद्योग निदेशक सुशांत गौरव, और हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय की निदेशक आकांक्षा रंजन सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान जियाडा, ज़िडको, झारक्राफ्ट, झारखंड माटीकला बोर्ड, और मुख्यमंत्री लघु, कुटीर एवं उद्यम विकास बोर्ड समेत अन्य संस्थानों के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान. 

    मंत्री ने बैठक में कहा कि का उद्देश्य झारखंड को एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है। राज्य में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हों और झारखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुए, यही सरकार का लक्ष्य है।

    संजय प्रसाद यादव के इन निर्देशों से यह स्पष्ट है कि झारखंड सरकार विकास कार्यों में तेजी लाने और राज्य को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     

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  • गजराज के कहर से खौफजदा ग्रामीण, मंत्री ने दिया मदद

    गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर बार की तरह इस बार भी गजराज ने अपने रास्ते में आने वाले हर चीज को बर्बाद कर दिया। शनिवार देर रात जंगली हाथियों का झुंड पीरटांड़ के पालगंज पंचायत के सुगवाटांड़ टोला में घुस आया।
    हाथियों ने गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
    हाथियों ने घर में रखा धान, अनाज और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला।
    हाथियों के झुंड की यह हरकत गांव के लोगों के लिए डर और परेशानी का कारण बन ई।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले, हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग नजर बनाए हुए था, लेकिन देर रात ये झुंड जंगल के रास्ते सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    मंत्री का दौरा:
    घटना की सूचना मिलते ही झारखंड सरकार के मंत्री व गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात  हाथियों द्वारा क्षतिग्रस्त किये गए तीन घरों के परिवार को दस दस हजार का चेक और एक एक पेटी चावल दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग ने कहा है कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञ टीम बुलाई जा रही है। यह पहली घटना नहीं है। बदगांव पंचायत के बसगदवा टोला में हाथियों ने दो घरों को क्षतिग्रस्त किया था।
    32 हाथियों का झुंड लेड़वा, मंझलाडीह और पथलघटिया में कई किसानों के खलिहान पहुंचकर धान चट कर गया। पीड़ित किसानों और स्थानीय मुखिया ने वन विभाग से क्षतिपूर्ति मुआवजे की मांग की है।
    सुरक्षा की गुहार:
    जंगल और पहाड़ों के नजदीक बसे गांवों के लोग हाथियों के डर से अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
    क्न विभाग को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए? जो अभी तक हो नहीं पाया है ।

     

  • मंईयां सम्मान योजना के अयोग्य लाभुकों पर गिरी गाज,जानिए कब मिलेगा 2500 रुपए

    RANCHI: झारखंड की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का बढ़ा हुआ लाभ क्रिसमस से पहले उनके खातों में पहुंचने वाला है। लेकिन हर किसी को यह राहत नहीं मिलेगी। सामाजिक सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अयोग्य लाभुकों की पहचान कर उनके खातों में यह राशि रोक दी जाएगी।

    स्क्रीनिंग शुरू, अयोग्य लाभुकों पर शिकंजा। 

    राज्यभर में मंईयां सम्मान योजना के तहत 50 लाख से अधिक महिलाओं को 2500 रुपये की सहायता राशि मिलनी है। लेकिन कई महिलाएं जो इस योजना के दायरे में नहीं आतीं, फिर भी इसका लाभ ले रही थीं। ऐसे मामलों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।

    सामाजिक सुरक्षा विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश देते हुए कहा है कि:

    1. गलत तरीके से लाभ लेने वालों से वसूली की जाएगी।
    2. जिन्हें पहले से किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिल रहा है, उन्हें इस योजना से बाहर किया जाएगा।
    3. अयोग्य लाभुकों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    किन्हें नहीं मिलेगा मंईयां सम्मान योजना का लाभ?

    निम्नलिखित श्रेणियों की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा:

    • आयकर दाता महिलाएं।
    • सरकारी कर्मी या रिटायर सरकारी कर्मियों के परिवार की महिलाएं।
    • ईपीएफओ धारक या उनके परिवार के सदस्य।
    • झारखंड से बाहर की निवासी महिलाएं।
    • एक से अधिक जिलों में लाभ लेने वाले लाभुक।

    कैबिनेट की मुहर और योजना का विस्तार। 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने का ऐलान किया था। कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद अब इसे लागू किया जा रहा है।

    सख्ती से हो रही जांच। 

    विभाग ने सभी जिलों में स्क्रीनिंग प्रक्रिया तेज कर दी है। यदि जांच के दौरान कोई अयोग्य लाभुक पाया गया, तो उसकी राशि वापस ली जाएगी और उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    महिलाओं को मिलेगा सीधा लाभ। 

    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत योग्य लाभुक महिलाओं के खातों में यह राशि जल्द ही ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद एक कार्यक्रम के दौरान इस राशि को जारी करेंगे।

  • पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हमला, विरोध में पत्रकारों की एकजुटता

    गिरिडीह: गिरिडीह में शुक्रवार को नगर निगम के अजीडीह टॉल वसूली केंद्र पर पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ शनिवार को नया परिषद भवन में पत्रकारों की बैठक हुई। बैठक में गिरिडीह के पत्रकार समुदाय ने एकजुट होकर हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    बैठक के बाद पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गिरिडीह उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने उपायुक्त को याद दिलाया कि माननीय उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर को नगर निगम क्षेत्र में टॉल वसूली पर रोक लगाने का आदेश दिया था, बावजूद इसके अजीडीह केंद्र पर अवैध वसूली जारी थी। इसी मुद्दे को उजागर करने पर पत्रकार अमरनाथ पर हमला हुआ।

    इस बैठक में कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए, जिनमें राकेश सिन्हा ,अरविंद कुमार, प्रवीण कुमार राय, लक्ष्मी अग्रवाल, रमेश प्रभाकर, सुनील मंथन शर्मा, आलोक रंजन, सूरज सिन्हा,मीरा कुमारी, शाहिद रजा, प्रकाश श्रीवास्तव, नफीस अजहर, एजाज अहमद, कैफ जद्दी, दानिश अहमद, मृणाल सिन्हा और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    घटना के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पपरवाटांड स्थित अमरनाथ सिन्हा के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने चौथे स्तंभ पर इस हमले की निंदा करते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    इसी बीच धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने भी समाहरणालय पहुंचकर अमरनाथ सिन्हा से मुलाकात की और घटना की निंदा की। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।