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  • झारखंड में राशन व्यवस्था पर ओटीपी की नई शर्त: तकनीक के जाल में उलझे भूख से जूझते लोग

    By The News Post4U

    चाईबासा/लातेहार – झारखंड के ग्रामीण इलाकों में राशन जैसी बुनियादी जरूरत को हासिल करना अब सिर्फ पात्रता या ज़रूरत की बात नहीं रही। अब इसके लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और उस पर आने वाला ओटीपी यानी ‘वन टाइम पासवर्ड’ जरूरी हो गया है। यह सुनने में एक तकनीकी प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन ज़मीन पर इसके नतीजे भूख, अपमान और असहायता के रूप में सामने आ रहे हैं।

    लातेहार जिले की हमीदा बीबी (39) की कहानी इस व्यवस्था की जमीनी सच्चाई बयां करती है। हमीदा जुलाई 2024 में अपने दो नाबालिग बेटों का नाम राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए जन सेवा केंद्र गई थीं। लेकिन वहां ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी दर्ज करना होगा। हमीदा ने फोन चेक किया, लेकिन कोई संदेश नहीं आया। कुछ देर बाद पता चला – उनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक ही नहीं है।

    बदलते नियम, बिना सूचना.

    यह समस्या अकेली हमीदा की नहीं है। झारखंड की नई पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) गाइडलाइन के तहत अब राशन कार्ड में किसी भी तरह का बदलाव — जैसे सदस्य जोड़ना या हटाना, नाम या उम्र में सुधार — बिना ओटीपी के नहीं हो सकता। पहले तक केवल मुखिया का आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर काफी था, लेकिन अब ओटीपी के बिना सिस्टम आगे नहीं बढ़ता।

    राज्य के अधिकारी दावा करते हैं कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन गांव की महिलाओं और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह बदलाव एक नई दीवार बनकर खड़ा हो गया है।

    “मुखिया हैं, पर मोबाइल नहीं तो कुछ नहीं कर सकते”

    झारखंड के कई हिस्सों में महिलाएं ही घर की मुखिया हैं — यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की एक प्रगतिशील पहल का हिस्सा है। लेकिन जब आधार से जुड़ा मोबाइल ही नहीं है, तो ये महिलाएं सिस्टम में अदृश्य हो जाती हैं।

    सरयू ब्लॉक के चोरहा पंचायत की एक महिला ने बताया कि वह अपनी सास की मृत्यु के बाद घर की मुखिया बनीं, लेकिन महीनों की कोशिश के बाद भी राशन कार्ड में अपना नाम नहीं जुड़वा सकीं। “कई बार प्रखंड और जिला मुख्यालय गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला,” उन्होंने कहा, “अब तो हार मान ली है।”

    तकनीक बनी बाधा, ना कि समाधान.

    आधार और मोबाइल से जुड़ी यह नई अनिवार्यता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक ऐसी तकनीकी बाधा बन गई है, जिसे पार करना कई बार असंभव होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार झारखंड में 10% घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। और जिनके पास मोबाइल है भी, वहां अक्सर नंबर निष्क्रिय होते हैं, या किसी पुरुष रिश्तेदार के नाम पर होते हैं।

    2023 में NSSO के सर्वे के अनुसार, देश में 10 में से 7 गैर-मोबाइल उपयोगकर्ता महिलाएं हैं। ऐसे में ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण की बाध्यता महिलाओं को अपने ही अधिकारों से वंचित कर रही है।

    बिचौलियों का खेल, बढ़ती जेब पर चोट.

    जहां सिस्टम जटिल है, वहां बिचौलियों की आमद तय मानी जाती है। बरहेट जैसे इलाकों में लोगों से आधार या राशन अपडेट कराने के लिए ₹500 से लेकर ₹1,600 तक वसूले गए। यह वे सेवाएं हैं जो सामान्यतः मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए थीं।

    कई लोगों को अपने दस्तावेज अपडेट कराने के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता है, जिससे ना सिर्फ परिवहन खर्च बढ़ता है, बल्कि उस दिन की मजदूरी भी चली जाती है।

    क्या राज्य अपने हकदारों को पहचानता है?

    राशन, सब्सिडी और जन-कल्याण की योजनाएं कोई उपकार नहीं हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ये नागरिकों का कानूनी अधिकार हैं — और इसमें सबसे अहम पात्र हैं महिलाएं और गरीब। लेकिन आधार-ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे तकनीकी बदलावों ने इन हकदारों को सिस्टम से दूर धकेलना शुरू कर दिया है।

    संवेदनशील समाधान की ज़रूरत.

    डिजिटलीकरण अपने आप में समस्या नहीं है — समस्या है उसका एकमुश्त और बिना तैयारी के लागू किया जाना। झारखंड सरकार को चाहिए कि वो:

    • वैकल्पिक प्रक्रिया लागू करे जहां ओटीपी की अनिवार्यता न हो।
    • मोबाइल-आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाए।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आधार केंद्र स्थापित करे।
    • जन-जागरूकता के माध्यम से पात्र लोगों को बदलावों की जानकारी दे।
    • और सबसे जरूरी, महिलाओं की डिजिटल पहुंच को प्राथमिकता के साथ मजबूत किया जाए।

    जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि तकनीकी बदलावों का लाभ समाज के सबसे वंचित हिस्से तक पहुंचे — तब तक डिजिटलीकरण भूख, अपमान और असमानता का दूसरा नाम ही बना रहेगा।

    *लेखक लिबटेक इंडिया से जुड़े हैं, जो कोलेबरेटिव रिसर्च एंड डिसेमिनेशन (CORD) का एक केंद्र है।

  • झारखंड में सादा पान मसाला पर लगेगा प्रतिबंध, स्वास्थ्य मंत्री ने की सख्त घोषणा

    रांची: झारखंड में अब सादा पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के राज्यस्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम में यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि गुटखा के नाम पर बिक रहे सादा पान मसाला पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी और नशीली दवाओं की बढ़ती बिक्री पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

    ‘सादा पान मसाला के नाम पर हो रही है गुटखा की बिक्री’

    मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि झारखंड में गुटखा और तंबाकू उत्पादों के सेवन से युवा शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा—
    “हमारी सरकार किसी भी सूरत में यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि राज्य का युवा नशे की गिरफ्त में जाए।”

    उन्होंने अधिकारियों को दवा दुकानों की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि कई मेडिकल स्टोर्स में नशीले सिरप और स्टेरॉयड खुलेआम बेचे जा रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही है।

    सिविल सर्जनों और ड्रग इंस्पेक्टरों को सख्त चेतावनी!

    स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों और ड्रग इंस्पेक्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा—
    “अगर आपके इलाके में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री पाई गई, तो सिर्फ दुकानदार नहीं, बल्कि आप भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे!”

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी मेडिकल स्टोर में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पाई जाती है, तो तत्काल दुकान को सील कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

    ‘स्वस्थ झारखंड, नशामुक्त झारखंड’ का लक्ष्य.

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार पूरे राज्य में इस अभियान को लागू करेगी और किसी भी हालत में गुटखा, नशीले पदार्थों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को नशे से बचाने के लिए और भी सख्त कदम उठाने जा रही है ताकि स्वस्थ झारखंड, नशामुक्त झारखंड का सपना साकार हो सके।

    ‘मैं खुद डॉक्टर हूं, सही-गलत अच्छी तरह जानता हूं’

    बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कहा—
    “मैं खुद डॉक्टर हूं, सही-गलत अच्छी तरह जानता हूं। मेरी जिम्मेदारी है कि झारखंड में ऐसे अवैध कार्यों को जड़ से खत्म करूं।”

    उन्होंने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने जिलों में मेडिकल स्टोर्स की जांच कर नशीली दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाएं।

    अब देखना यह होगा कि क्या यह फैसला केवल घोषणा बनकर रह जाएगा, या झारखंड में सच में नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे?

  • झारखंड : HMPV वायरस से निपटने की तैयारी तेज़, एयरपोर्ट-स्टेशन पर स्क्रीनिंग शुरू

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………

    बात हो रही है एक ऐसे वायरस की, जो धीरे-धीरे सुर्खियां बना रहा है। नाम है ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV)। चीन से होते हुए यह वायरस भारत तक आ पहुंचा है और झारखंड भी इससे सतर्क हो गया है। आइए जानते हैं कि झारखंड सरकार ने क्या कदम उठाए हैं

    स्वास्थ्य मंत्री का ऐलान:

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने ऐलान किया है कि राज्य में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों पर स्क्रीनिंग शुरू होगी। उन्होंने कहा, “हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कोविड के समय अपनाए गए उपायों को दोहराया जाएगा।”

    क्या कहा स्वास्थ्य विभाग ने?

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए और उनके सैंपल को रांची के RIMS और जमशेदपुर के MGM लैब भेजा जाए। साथ ही जांच किट का ऑर्डर भी दे दिया गया है।

    चीन का HMPV वायरस: भारत में दस्तक।

    चीन और दूसरे देशों में वायरल बुखार और निमोनिया के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में बेंगलुरु, नागपुर, तमिलनाडु और अहमदाबाद में HMPV के मामले सामने आए हैं। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री का भरोसा:

    डॉ. इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर लिखा,

    “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। फिलहाल कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है, लेकिन अतिरिक्त सावधानी ज़रूरी है।

    एहतियात बरतें:

    भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

    5 साल से छोटे बच्चों और 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।

    अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है

    झारखंड तैयार है!

    सरकार ने कहा है, “हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। कृपया पैनिक न करें। बस सावधानी बरतें।”

    सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

     

  • HMPV Virus: झारखंड में हाई अलर्ट! स्वास्थ्य मंत्री ने जारी किया संदेश, जानें क्या है सरकार की तैयारी

    Human Metapneumovirus (एचएमपीवी) चीन के बाद अब भारत में भी फैल रहा है। बेंगलुरु, नागपुर, तमिलनाडु में दो-दो और अहमदाबाद में एक मामला सामने आया है। चीन और अन्य देश इस समय वायरल बुखार और निमोनिया जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसी बीच, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने एचएमपीवी वायरस को लेकर एक संदेश जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी वायरस से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की है।

    स्वास्थ्य विभाग ने जांच किट का ऑर्डर दिया

    स्वास्थ्य विभाग ने इस वायरस से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। गाइडलाइन जारी करने के साथ ही जांच किट का ऑर्डर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि यह वायरस नया नहीं है और सर्दियों में ऐसे मामले पहले भी देखे गए हैं। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    चीन का खतरनाक एचएमपीवी वायरस भारत में

    स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए तैयार है। वर्तमान में एचएमपीवी वायरस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है, क्योंकि यह व्यापक जनसंख्या के लिए खतरा नहीं है। राज्य सरकार ने किसी भी संभावित स्वास्थ्य चुनौती का सामना करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां और व्यवस्थाएं की हैं।”

    केंद्र से अभी कोई चेतावनी नहीं मिली

    स्वास्थ्य मंत्री ने आगे लिखा, “डॉक्टर होने के नाते, मैं हर संभव माध्यम से स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए हूं। फिलहाल, केंद्र से कोई औपचारिक चेतावनी नहीं मिली है। मैंने राज्य के सिविल सर्जनों के साथ तैयारियों की समीक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव को बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।”

    चिंता की जरूरत नहीं, सभी व्यवस्थाएं मौजूद

    स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया, “जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है। हमारे पास सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। हालांकि, सर्दियों के इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है। खासकर 5 वर्ष से कम और 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग अधिक संवेदनशील होते हैं। हम सभी से अपील करते हैं कि स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करें और अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। राज्य सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी नई स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठाती रहेगी।”

  • हेमंत सोरेन ने दिया झारखंड की महिलाओं को नए साल का तोहफा

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………………

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। ‘मंईयां सम्मान योजना‘ के तहत 56.61 लाख महिला लाभार्थियों के खातों में ₹1415.44 करोड़ की धनराशि ट्रांसफर की गई। यह समारोह रांची के नामकुम स्थित खोजाटोली के ट्रेनिंग ग्राउंड में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर यह राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी।

    जैसे ही राशि ट्रांसफर की गई, वहां उपस्थित महिलाओं के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने इस योजना को झारखंड की महिलाओं के सपनों को पंख देने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा, “हमारे राज्य की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में सक्षम हैं। हमने वादा किया था कि राज्य की आधी आबादी को उनका हक दिलाएंगे, और आज हमने उस वादे को निभाया है।” मुख्यमंत्री ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “आप अपने सपनों को साकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह राशि न केवल आपकी जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आपके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मददगार साबित होगी। अब आप बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतों और अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकती हैं।”

    महिला सशक्तिकरण की नई दिशा।

    ‘मंईयां सम्मान योजना’ की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। पहले इस योजना के तहत 18-50 वर्ष की महिलाओं को ₹1000 मासिक मानदेय दिया जा रहा था, जिसे दिसंबर 2024 से ₹2500 कर दिया गया। यह योजना झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए महिलाओं के बीच गहरी पैठ बनाने का एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    महिला और पुरुष: एक हल के दो बैल।

    मुख्यमंत्री ने अपनी बात को सरल लेकिन गहरे संदेश के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “महिला और पुरुष एक हल के दो बैल हैं। जब तक दोनों साथ नहीं चलेंगे, राज्य और देश का विकास संभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं अपनी क्षमता और बुद्धिमत्ता से राज्य को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    चुनावी राजनीति पर तीखा कटाक्ष।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा, “जब हमने महिलाओं के लिए ₹1000 की घोषणा की, तो विपक्ष ने मजाक उड़ाया। जब ₹2500 की बात की, तो वे इसे अव्यावहारिक बताने लगे। लेकिन हमने साबित कर दिया कि झारखंड में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता वास्तविक है।”

    महिलाओं को मिली नई ऊर्जा।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। समारोह के दौरान महिलाओं ने तख्तियां लहराकर और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मुख्यमंत्री का स्वागत किया। हेमंत सोरेन ने भी महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं।

    अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाएंगी महिलाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के जरिए हम झारखंड की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाने जा रहे हैं। महिलाओं को अब अपने फैसले खुद लेने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने का अवसर मिलेगा।” उन्होंने यह भी चेताया कि इस धनराशि का गलत इस्तेमाल न हो।

    झारखंड की तस्वीर बदलेगी।

    मुख्यमंत्री ने इस योजना को झारखंड की गरीबी और पिछड़ेपन के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान झारखंड की आधी आबादी को न केवल सशक्त बनाएगा, बल्कि राज्य को नई दिशा में ले जाने का माध्यम भी बनेगा। झारखंड की महिलाएं अब नई उम्मीदों और सपनों के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं। यह योजना उनके जीवन को बदलने का एक मजबूत आधार बन सकती है।

     

  • झारखंड 2024: सीएम को हुई जेल और भाजपा हुई फ़ेल!

    परवेज़ आलम की खास रपट ……………..

    2024  झारखंड के लिए केवल एक चुनावी साल नहीं था, बल्कि सियासत का ऐसा रंगमंच था, जहां हर दिन एक नया ट्विस्ट देखने को मिला। जनवरी से शुरू हुई उथल-पुथल नवंबर में जाकर शांत हुई, लेकिन इस दौरान झारखंड ने इतिहास भी बनाया और राजनीति के सबसे दिलचस्प पल भी देखे।

    हेमंत सोरेनकी गिरफ्तारी ।

    31 जनवरी 2024, झारखंड की राजनीति और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दर्ज हो गया। पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। ईडी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर सात घंटे पूछताछ की और फिर रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले 29 जनवरी को ईडी ने दिल्ली में शांति निकेतन स्थित उनके आवास, झारखंड भवन और उनके पिता शिबू सोरेन के घर पर छापेमारी की थी। लेकिन हेमंत सोरेन को ढूंढ नहीं पाई । 30 जनवरी को वे अचानक इंडिया गठबंधन के विधायकों के साथ रांची में बैठक करते दिखे।

    चंपाई सोरेन का मुख्यमंत्री बनना।

    31 जनवरी की रात हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी के बाद गठबंधन ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री चुना। पांच महीने तक राज्य की कमान चंपाई सोरेन के हाथ में रही

    5 महीने बाद जेल रिहाई और हेमंत की वापसी।

    28 जून 2024 को झारखंड हाई कोर्ट से हेमंत सोरेन को जमानत मिली। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपने नए लुक से सबको चौंका दिया। लंबे बाल और दाढ़ी में वे अपने पिता शिबू सोरेन की झलक दे रहे थे। उनकी रिहाई के साथ ही गठबंधन में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गईं। और आखिरकार, 4 जुलाई को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

    चुनाव और गठबंधन की जीत।

    2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी और सीपीआई-एमएल के साथ मिलकर गठबंधन ने 81 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की। 28 नवंबर को हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

    बीजेपी के लिए निराशाजनक रहा साल।

    2024 बीजेपी की हार का साल भी साबित हुआ। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को झटका लगा, और विधानसभा चुनाव में उनकी हार ने झारखंड में उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

    झारखंड की राजनीति में 2024 का साल दिखाता है कि लोकतंत्र में एक दिन भी कितना निर्णायक हो सकता है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर उनकी वापसी तक, सत्ता के हर पहलू में सस्पेंस, ड्रामा और नई उम्मीदें देखने को मिलीं।

    झारखंड की राजनीति को समझने के लिए इस साल को हमेशा याद किया जाएगा।
    तो दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी ? कमेंट में अपनी राय जरूर दीजिएगा।

  • बेटियों के लिए प्रशासन का सख्त रुख, PC & PNDT ACT पर उपायुक्त की सख्ती

    गिरिडीह जिले में PC & PNDT ACT से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर की स्थिति, पिछले निर्णयों का अनुपालन, नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन, और लाइसेंस रिन्यूअल पर चर्चा की गई।
    उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने छापेमारी दल का गठन कर गहन जांच अभियान चलाने का आदेश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि अवैध क्लीनिक बंद हों और लिंग परीक्षण पर पूरी तरह रोक लगे।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूती.
    उपायुक्त ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” मुहिम के तहत लिंग अनुपात सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि PC & PNDT ACT, 1994 का उद्देश्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन और लिंग आधारित गर्भपात पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इसके तहत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    सार्वजनिक जागरूकता पर जोर.
    उपायुक्त ने प्रखंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
    विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ विचार-विमर्श.
    बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, आईएमए शाखा के अध्यक्ष, और नामित नोडल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, समाजसेवी, चिकित्सक, और अधिवक्ता भी उपस्थित थे। सभी ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के सुझाव दिए।
    लिंग अनुपात सुधारने के लिए ठोस कदम.
    इस बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि सभी नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन उचित जांच के बाद ही स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने यह भी तय किया कि अवैध गतिविधियों पर नजर रखते हुए जिला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
    गिरिडीह प्रशासन का यह प्रयास लिंग अनुपात सुधारने और बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

  • कांग्रेस की हार की पड़ताल: भितरघातियों पर गिरेगी गाज?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………
    झारखंड में हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए संतोषजनक रहे, लेकिन 14 सीटों पर मिली हार ने पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गठबंधन के तहत 30 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन हार के कारणों की समीक्षा ने अंदरूनी कलह और रणनीतिक चूकों की पोल खोल दी है। 21 दिसंबर को रांची मे आयोजित बैठक मे पार्टी ने हार की समीक्षा की ।

    हार की असली वजहें:
    कांग्रेस की समीक्षा में स्पष्ट हुआ है कि कई सीटों पर पार्टी के ही नेताओं ने भितरघात कर प्रत्याशियों को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्थानीय संगठनों और उम्मीदवारों के बीच समन्वय की कमी भी हार का बड़ा कारण बनी।

    जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र:
    यहां पूर्व मंत्री बादल को भाजपा की मजबूत रणनीति और हरिनारायण राय की भाजपा से करीबी के कारण हार का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक मंत्री रहने के दौरान उनके खिलाफ उपजा असंतोष भी उनकी हार की वजह बना।

    जमशेदपुर पश्चिम सीट:
    तत्कालीन मंत्री बन्ना गुप्ता वायरल वीडियो से उपजे विवाद के चलते प्रचार युद्ध में टिक नहीं पाए। जदयू के सरयू राय ने उनका पराजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    झरिया और धनबाद:
    इन क्षेत्रों में संगठनात्मक तालमेल की कमी और स्थानीय इकाई का असहयोग हार का कारण बना। झरिया में कांग्रेस को सिटिंग सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा।

    जमशेदपुर पूर्वी सीट:
    यहां डॉ. अजय कुमार पार्टी के प्रत्याशी थे, लेकिन स्थानीय संगठन ने उनका साथ नहीं दिया। कई नेता अंदरूनी भितरघात में लगे रहे, जिससे पार्टी की संभावना धूमिल हो गई।

    भविष्य की राह:
    समीक्षा बैठक के बाद तैयार की गई रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को भेजी जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने संकेत दिए हैं कि भितरघातियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

    चुनाव परिणाम:
    कांग्रेस ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा और 16 पर जीत हासिल की। पार्टी का मानना है कि बेहतर रणनीतिक तालमेल और आंतरिक समन्वय से सीटों की संख्या और बढ़ाई जा सकती थी।

    संघर्ष जारी:
    कांग्रेस ने यह भी स्वीकार किया है कि कमियों को सुधारने के बाद भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। अब सबकी नजरें आलाकमान के फैसलों और भितरघातियों पर गिरने वाली गाज पर टिकी हैं।

  • स्वास्थ्य को व्यवसाय समझने वालों की जगह जेल मे होगी- डॉ. इरफान

    धनबाद: झारखंड के नव-नियुक्त स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। रविवार को धनबाद के गोविंदपुर के फकीरडीह में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी अस्पतालों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    बिल भुगतान के नाम पर शव रोकने पर रोक.
    डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि अगर किसी मरीज की अस्पताल में मौत होती है, तो अस्पताल प्रबंधन शव को परिजनों को तुरंत सौंपेगा। बिल भुगतान के नाम पर शव रोकने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन को कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य को व्यवसाय समझने वालों की जगह अब जेल होगी।”

    आयुष्मान योजना में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई।
    स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पताल जो फर्जी तरीके से आयुष्मान की मान्यता लेकर गरीबों को लूट रहे हैं, उनकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। “अगर कोई अस्पताल मापदंड पूरे नहीं करता, तो उसे सील कर दिया जाएगा और मालिक को जेल होगी,” उन्होंने कहा।

    स्वास्थ्य सेवाओं को दिल्ली मॉडल पर विकसित करने का वादा।
    डॉ. अंसारी ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ करते हुए कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी उसी तर्ज पर सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा, “दिल्ली में सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी है, जिससे वहां का मॉडल देश के लिए उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री से बात कर झारखंड में भी इसी तरह की सेवाएं लाने की कोशिश होगी।”

    फर्जी डिग्री वालों और बेरोजगारों के लिए योजना।
    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि फर्जी डिग्री के आधार पर काम कर रहे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। उनकी डिग्री की जांच कराई जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय बेरोजगार युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में रोजगार के मौके दिए जाएंगे।

    सरकारी अस्पतालों में सुधार पर जोर
    डॉ. अंसारी ने वादा किया कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर मरीज को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।डॉ. इरफान अंसारी के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए अब सख्त कदम उठाए जाएंगे। जनता को बेहतर सुविधाएं और न्याय दिलाने के लिए उन्होंने प्रतिबद्धता जाहिर की है।