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  • एक आईपीएस अधिकारी समेत 17 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को राष्ट्रपति पदकों

    The News Post4u.

    झारखंड पुलिस के लिए इस स्वतंत्रता दिवस पर गर्व का अवसर आने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए राज्य के एक आईपीएस अधिकारी समेत 17 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को विभिन्न श्रेणियों में वीरता, राष्ट्रपति और सराहनीय सेवा पदकों से सम्मानित करने की घोषणा की है।

    इस सूची में शामिल अधिकारी और जवानों को 15 अगस्त के दिन औपचारिक रूप से सम्मान प्रदान किया जाएगा। सम्मानित किए जाने वालों में पांच पुलिस अधिकारी और कर्मी को वीरता पदक, एक को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक, जबकि 11 को सराहनीय सेवा पदक मिलेगा।

    वीरता पदक प्राप्त करने वाले

    इन पदकों को उन पुलिस कर्मियों को दिया जाता है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस और बहादुरी का प्रदर्शन किया। झारखंड से इस सम्मान के लिए चुने गए नाम हैं:

    • सब-इंस्पेक्टर विनय कुमार
    • हेड कॉन्टेबल प्रमोद राय
    • कांस्टेबल वेद प्रकाश महतो
    • कांस्टेबल रामचंद्र महतो
    • कांस्टेबल कृष्णा मुर्मू

    राष्ट्रपति पदक (विशिष्ट सेवा) प्राप्त करने वाले

    • हवलदार कैलाश कुमार श्रेष्ठा — जिन्होंने अपने लंबे कार्यकाल में उत्कृष्ट कार्य और अनुकरणीय सेवा से विभाग का मान बढ़ाया।

    सराहनीय सेवा पदक प्राप्त करने वाले

    ये पदक उन पुलिसकर्मियों को दिए जाते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अनुशासन, समर्पण और लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। इस श्रेणी में झारखंड पुलिस के 11 अधिकारी और कर्मी शामिल हैं:

    • आईपीएस अनुरंजन किस्पोट्टा
    • डीएसपी मनोज कुमार राय
    • इंस्पेक्टर असित मोदी
    • एसआई दीपक पुंज
    • एएसआई महेंद्र महतो
    • हवलदार विजय थापा
    • कांस्टेबल विदेशी मांझी
    • कांस्टेबल अजय कुमार दुबे
    • हवलदार रंजीता कुजूर
    • कांस्टेबल पुष्पा औरैया
    • कांस्टेबल दीपक कुमार सिंह

    झारखंड पुलिस के लिए यह सम्मान न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों का प्रमाण है, बल्कि उन जवानों के साहस और प्रतिबद्धता की भी पहचान है जो अपने कर्तव्य के प्रति हर परिस्थिति में समर्पित रहते हैं।

     

  • बांग्लादेश ने भारत से मांगा शेख हसीना का प्रत्यर्पण, कहा- ‘न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी’

    बांग्लादेश ने सोमवार को भारत को एक आधिकारिक नोट भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि हसीना को वापस लाकर देश में उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

    क्या कहा बांग्लादेश के अधिकारियों ने?

    बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तोहीद होसैन ने पुष्टि करते हुए कहा, “हमने भारत सरकार को औपचारिक नोट भेजा है। इसमें साफ कहा गया है कि शेख हसीना की उपस्थिति न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।”

    बांग्लादेश के घरेलू मामलों के सलाहकार, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधुरी, ने प्रत्यर्पण पर जोर देते हुए कहा, “हमारे पास भारत के साथ कैदी विनिमय समझौता है। यह प्रक्रिया उसी समझौते के तहत पूरी की जाएगी।”

    कैसे शुरू हुआ मामला?

    पिछले महीने, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार शेख हसीना का प्रत्यर्पण भारत से मांगेगी। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को शेख हसीना देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत भागकर  आ गई थीं। इन प्रदर्शनों के कारण उनके 15 साल लंबे शासन का अंत हुआ।

    युनुस का बड़ा कदम। 

    नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जो छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और जनहानि के लिए जिम्मेदार हैं।

    युनुस ने कहा, “हम शेख हसीना को भारत से वापस लाने की पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस मुद्दे पर उनकी बातचीत अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के मुख्य अभियोजक करीम खान से हुई है।

    क्यों है प्रत्यर्पण महत्वपूर्ण?

    युनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का कहना है कि जुलाई और अगस्त में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए कथित “मास हत्याओं” के लिए शेख हसीना को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। सरकार ने भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए इसे जल्द से जल्द अमल में लाने की बात कही।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नजरें टिकीं। 

    यह मामला केवल बांग्लादेश और भारत तक सीमित नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की सक्रियता और नोबेल विजेता युनुस की भूमिका के कारण यह मामला वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।या मामला अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाएगा? इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।