Tag: jharkhand cmo

  • झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ की मदद

    HIV-एड्स फोरम का गठन, रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मंजूरी.

    By The News Post4u.

    रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और पुलिस पदक जैसे अनेक अहम विषय शामिल थे।

    हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना अनुदान.

    राज्य सरकार ने झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है। यह अनुदान धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों के संचालन के लिए दिया जाएगा।

    HIV-एड्स रोकथाम के लिए लेजिस्लेटिव फोरमका गठन.

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के निर्देशों पर राज्य सरकार ने झारखंड लेजिस्लेटिव फोरम ऑन एचआईवी-एड्स के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य HIV-एड्स के प्रति जनजागरूकता फैलाना, भेदभाव समाप्त करना और जिला स्तरीय तंत्र को मज़बूती देना है। इस फोरम के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री होंगे और स्पीकर द्वारा नामित पांच विधायक इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा विकास आयुक्त, विभागीय सचिव, परियोजना निदेशक जैसे अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।

    उच्च शिक्षा को बढ़ावा: दो नए कॉलेजों की मंजूरी.

    शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने दो बड़े निर्णय लिए हैं। खूंटी जिले में महिला कॉलेज की स्थापना के लिए 57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई, जबकि सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए 38.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

    फार्मेसी कॉलेजों के लिए नई नियुक्तियां.

    दुमका और पलामू में स्थित राजकीय फार्मेसी संस्थानों में 28-28 नए पदों के सृजन को कैबिनेट ने हरी झंडी दी है, जिससे इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और संचालन में सुधार होगा।

    पुलिस पदक की संख्या बढ़ी.

    झारखंड राज्यपाल पदक के तहत अब तक 11 पुलिस अधिकारियों-जवानों को सम्मानित किया जाता था, जिसे बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इसी प्रकार सराहनीय सेवा के लिए दी जाने वाली संख्या 31 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है। यह निर्णय राज्य के पुलिस बल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लिया गया है।

    JSSC को 31 करोड़ की स्वीकृति.

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के सफल आयोजन हेतु झारखंड अकस्मिता निधि से 31 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही यह भी तय किया गया कि यदि किसी स्नातक स्तरीय परीक्षा में 50 हजार से अधिक आवेदन आते हैं, तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों कराई जाएंगी, अन्यथा केवल एक स्तर की परीक्षा ली जाएगी।

    रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी.

    1. अरगोड़ा-रिंग रोड फोरलेन सड़क
      पथ निर्माण विभाग के एक प्रस्ताव के तहत रांची के अरगोड़ा से पुंदाग होते हुए रिंग रोड तक 6.17 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए 141 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसमें मुआवजा, पुनर्वास और पौधारोपण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
    2. साइकिल ट्रैक और सर्विस रोड निर्माण
      एक अन्य प्रमुख परियोजना के तहत विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक साइकिल ट्रैक, सर्विस रोड और फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना के लिए झारखंड राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को 301.12 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना पुराने विधानसभा भवन, हाईकोर्ट और विधानसभा सचिवालय को जोड़ते हुए नईसराय लिंक रोड तक फैली होगी।

    अन्य महत्वपूर्ण निर्णय.

    • राजकीय प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 को स्वीकृति मिली, जिससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
    • सिमडेगा-कुरडेग से छत्तीसगढ़ सीमा तक 63.2 किलोमीटर सड़क के सुधार कार्य के लिए 38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।

    इन निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने, सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। रांची की सड़क परियोजनाएं राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, वहीं HIV-एड्स जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की संजीदगी भी दिखाई देती है।

  • राज्य मे जल्द निकाय चुनाव नहीं हुये तो झारखंड को 1500 करोड़ का हो सकता है नुकसान?

    वित्त आयोग की चेतावनी, चुनाव न कराने पर अटक सकती है केंद्र से झारखंड को मिलने वाली सहायता राशि !

    विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज वित्त आयोग के दायरे में नहीं ।

    परवेज़ आलम.

    रांची:  झारखंड सरकार के लिए एक बड़ा अलर्ट आया है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक नगर निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराती है, तो केंद्र से मिलने वाली बकाया वित्तीय सहायता की राशि लैप्स हो सकती है। यह रकम कोई मामूली राशि नहीं, बल्कि लगभग 1500 करोड़ रुपये है।

    रांची के होटल रेडिसन ब्लू में मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुये  डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि चुनावों की गैर-हाजिरी में केंद्र से राशि जारी नहीं हो सकती, क्योंकि इसका वितरण संविधान और आयोग की गाइडलाइन से बंधा है। यदि तय समय-सीमा के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव करवा दिए जाते हैं, तो झारखंड को पिछला बकाया भी मिल सकता है।

    विशेष राज्य का दर्जा नहीं देगा आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर.  

    डॉ. पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देना वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने यह बात ऐसे समय पर कही, जब झारखंड सरकार की ओर से यह मांग की जा रही है कि राज्य को उसकी अनूठी परिस्थितियों और समस्याओं को देखते हुए अतिरिक्त सहायता दी जाए।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान की जो राशि मांगी जाती है, वह केंद्रीय बजट के जरिए सशर्त मिलती है, और इसके भुगतान में होने वाली देरी पर वित्त आयोग का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति पर चिंता, पर सराहना भी.

    डॉ. पनगढ़िया ने झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना तो की, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि राज्य अभी भी कई सामाजिक-आर्थिक मानकों पर पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे सबसे निचले पायदान पर है, जहां उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर हैं।

    जीएसटी लागू होने से राजस्व में हुए नुकसान को झारखंड ने आयोग के समक्ष एक नई मांग के रूप में रखा है। राज्य सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय फॉर्मूले में बदलाव की अपील की है, जिसे आयोग ने केवल प्रस्तावके रूप में नोट किया है। कोई भी निर्णय आयोग के निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर ही लिया जाएगा।

    झारखंड ने रखी 3.03 लाख करोड़ की मांग, राज्य का पक्ष मजबूत.

    राज्य सरकार ने वित्त आयोग के सामने 2026 से 2031 तक के लिए 3,03,527.44 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यह मांग राज्य के 23 विभागों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को 41% से बढ़ाकर 55% करने की भी अपील की गई है।

    राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद होने से झारखंड को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2025-30 के बीच राजस्व में लगभग 61,677 करोड़ रुपये की हानि का अनुमान है।

    वित्त मंत्री ने पूर्ववर्ती 15वें वित्त आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि तब झारखंड ने 1.5 लाख करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सिर्फ 12,398 करोड़ रुपये ही मिले थे, जिससे विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ा।

    प्राकृतिक संसाधनों वाला राज्य, लेकिन सड़कें नहीं.

    राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के आधार पर होने वाले राजस्व वितरण फार्मूले में संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि खुले वनों को भी सघन वनों की तरह गणना में लाया जाए। साथ ही झारखंड में 14.19 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता विकसित करने के लिए भी अतिरिक्त सहायता मांगी गई है।

    राज्य के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। राष्ट्रीय औसत जहां 500 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी है, वहीं झारखंड में यह मात्र 186 किमी है। खनिज संपदा से भरपूर राज्य होने के बावजूद खनिज ढुलाई के लिए पर्याप्त सड़क नेटवर्क नहीं है।

    बकाया राशि नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित.

    राज्य सरकार ने केंद्र से कुछ प्रमुख मदों में बकाया राशि की ओर भी ध्यान दिलाया:

    • कोयला कंपनियों से: ₹1.36 लाख करोड़
    • जल जीवन मिशन में: ₹5,235 करोड़
    • मनरेगा में: ₹1,300 करोड़

    राज्य सरकार का कहना है कि इन बकाया राशि के अभाव में कई विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं

    भेदभाव नहीं हो‘, स्थानीय निकायों के लिए राशि जारी हो: नगर विकास मंत्री.

    नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने आयोग से आग्रह किया कि स्थानीय निकायों की राशि को रोका न जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 20-25% राशि रोककर शेष राशि जारी की जा सकती है, ताकि स्थानीय विकास कार्य बाधित न हों।

    उन्होंने झारखंड की वास्तविक चुनौतियों — जैसे कि प्रदूषण, उग्रवाद, बेरोजगारी और विस्थापन — की ओर भी आयोग का ध्यान खींचा।

    31 अक्टूबर तक सौंप दी जाएगी अंतिम रिपोर्ट.

    वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी। इस बीच आयोग ने झारखंड के पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSUs) की वर्षों से लंबित ऑडिट रिपोर्टों पर भी चिंता जताई है। डॉ. पनगढ़िया ने इसे वित्तीय पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया और राज्य सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी।

    इस दौरे के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत ज्ञापन के जरिए आयोग के समक्ष झारखंड की जरूरतें और अपेक्षाएं रखीं।

    वित्त आयोग से अनुदान की मांग.

    बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से तीन लाख तीन हजार करोड़ की मांग से संबंधित प्रतिवेदन सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा एवं आधारभूत संरचना जो राज्य सरकार की प्राथमिकता में है उसको लेकर वित्त आयोग से अनुदान की मांग की गई है.

    सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार की यह संवैधानिक संस्था केंद्र सरकार के समक्ष सकारात्मक सोच के साथ हमारी मांग को पहुंचाने में मदद करेगा. उत्पादक राज्य होने के कारण झारखंड को होने वाले घाटे को भी वित्त आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा गया है और जो मांगे रखी गई है उसे आप विशेष पैकेज माने या अनुदान की राशि राज्य सरकार ने बड़े ही तर्कपूर्ण ढंग के साथ इसे रखा है. वित्त आयोग ने भी हमें भरोसा दिया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार होगा.

  • देवघर में आयोजित हुई उच्चस्तरीय बैठक, श्रावणी मेला 2025 की तैयारियों का खाका तैयार

    देवघर :  आगामी राजकीय श्रावणी मेला 2025 की भव्य और सुरक्षित आयोजन को लेकर मंगलवार को  देवघर परिसदन सभागार में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड सरकार में नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार  सोनू ने की।

    बैठक में पर्यटन सचिव, देवघर व दुमका के उपायुक्त, पर्यटन निदेशक, और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सभी विभागों की तैयारियों कीसमीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहजता प्रदान की जाए।

    श्रावणी मेला: केवल आयोजन नहीं, आस्था का उत्सव.

    बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “श्रावणी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है। हमारा लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक अनुभव मिले।” उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्यों की प्राथमिकता पर बल देते हुए निर्देशित किया।

    VIP दर्शन पर रोक: समानता को प्राथमिकता.

    एक बड़ा निर्णय यह लिया गया कि इस बार श्रावणी मेले में हर सोमवार को VIP और VVIP दर्शन की सुविधा पूर्णतः बंद रहेगी। इस कदम का उद्देश्य यह है कि किसी भी श्रद्धालु को विशेषाधिकार की वजह से पीछे न हटना पड़े और सभी को समान अवसर मिल सके।

    तकनीक का मेल से रिश्ता: स्मार्ट मेला 2025.

    इस वर्ष मेला क्षेत्र में तकनीकी हस्तक्षेप को बढ़ाते हुए डिजिटल और AI आधारित सुविधाओं को प्रमुखता दी जा रही है:

    • AI आधारित इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम
    • AI चैटबोट – श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन, फीडबैक और हेल्पलाइन सेवाएं
    • AI ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
    • QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम
    • लोकेशन बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम
    • डिजिटल पवेलियन – संस्कृति और पर्यटन को डिजिटल रूप में दिखाने की पहल

    श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं.

    श्रावणी मेला 2025 में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु इन विशेष व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया:

    • स्वास्थ्य केंद्र और सहायता केंद्र
    • टेंट सिटी, स्वच्छ स्नानगृह, शौचालय, कूड़ेदान
    • पेयजल व्यवस्था, मिस्ट कूलिंग (इंद्र वर्षा)
    • सजावट और स्वागत तोरण द्वारों की भव्य योजना

    सुरक्षा और विधि-व्यवस्था की व्यापक योजना.

    मंत्री ने साफ किया कि मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस हेतु:

    • थाना और ट्रैफिक नियंत्रण केंद्र की व्यवस्था
    • अपराध नियंत्रण, वाहन पार्किंग, रूटलाइनिंग की स्पष्ट रणनीति
    • CCTV निगरानी, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाबल और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल

    हर विभाग को मिला समयबद्ध कार्य का निर्देश.

    नगर विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, जनसंपर्क, बिजली, स्वास्थ्य, भवन निर्माण आदि विभागों को अपने-अपने कार्यों को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

    श्रावणी मेला 2025: श्रद्धा, व्यवस्था और तकनीक का संगम.

    11 जुलाई से 09 अगस्त 2025 तक चलने वाले इस राजकीय आयोजन को सफल बनाने के लिए झारखंड सरकार पूरी तरह संकल्पित है। इस बार का मेला केवल आस्था का नहीं, बल्कि सुनियोजित व्यवस्था और तकनीक के संगम का प्रतीक होगा।

  • झारखंड : HMPV वायरस से निपटने की तैयारी तेज़, एयरपोर्ट-स्टेशन पर स्क्रीनिंग शुरू

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………

    बात हो रही है एक ऐसे वायरस की, जो धीरे-धीरे सुर्खियां बना रहा है। नाम है ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV)। चीन से होते हुए यह वायरस भारत तक आ पहुंचा है और झारखंड भी इससे सतर्क हो गया है। आइए जानते हैं कि झारखंड सरकार ने क्या कदम उठाए हैं

    स्वास्थ्य मंत्री का ऐलान:

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने ऐलान किया है कि राज्य में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों पर स्क्रीनिंग शुरू होगी। उन्होंने कहा, “हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कोविड के समय अपनाए गए उपायों को दोहराया जाएगा।”

    क्या कहा स्वास्थ्य विभाग ने?

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए और उनके सैंपल को रांची के RIMS और जमशेदपुर के MGM लैब भेजा जाए। साथ ही जांच किट का ऑर्डर भी दे दिया गया है।

    चीन का HMPV वायरस: भारत में दस्तक।

    चीन और दूसरे देशों में वायरल बुखार और निमोनिया के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में बेंगलुरु, नागपुर, तमिलनाडु और अहमदाबाद में HMPV के मामले सामने आए हैं। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री का भरोसा:

    डॉ. इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर लिखा,

    “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। फिलहाल कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है, लेकिन अतिरिक्त सावधानी ज़रूरी है।

    एहतियात बरतें:

    भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

    5 साल से छोटे बच्चों और 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।

    अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है

    झारखंड तैयार है!

    सरकार ने कहा है, “हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। कृपया पैनिक न करें। बस सावधानी बरतें।”

    सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

     

  • झारखंड: मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

    रांची: सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड विधानसभा की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को निर्देश दिया है कि वह अपने किसी निर्वाचित सदस्य को इस चयन कमेटी के लिए नेता प्रतिपक्ष के रूप में नामित करे। यह प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश: नियुक्ति प्रक्रिया तेज करें.

    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने झारखंड में सूचना आयोग की नियुक्ति से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार तुरंत इस मामले में कदम उठाए और दो सप्ताह के भीतर नेता प्रतिपक्ष की नामित प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद चयन समिति मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करेगी।

    नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी बनी समस्या.

    राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया कि झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद फिलहाल खाली है। नेता प्रतिपक्ष चयन समिति का अहम हिस्सा होते हैं। इसी वजह से सूचना आयोग की नियुक्तियों में देरी हो रही है।

    सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि इस निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करें और इस पर शपथ पत्र दाखिल करें।

    2020 से निष्क्रिय है सूचना आयोग.

    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि झारखंड में वर्ष 2020 से राज्य सूचना आयोग पूरी तरह से निष्क्रिय है। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों सहित कई पद खाली हैं, जिसके कारण सूचना के अधिकार से संबंधित हजारों मामले लंबित हैं।

    विज्ञापन के बावजूद नियुक्ति क्यों रुकी?

    राज्य सरकार के मुताबिक, जून 2024 में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। लेकिन झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष की घोषणा नहीं हो पाई। इस कारण चयन समिति की बैठक नहीं हो सकी।

    पूर्व में क्या हुआ था?

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया था कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति चार सप्ताह में पूरी की जाए। अदालत ने मुख्य सचिव से इस मामले में प्रगति रिपोर्ट के लिए शपथ पत्र मांगा था।

    सूचना का अधिकार अधर में.

    जानकारों का मानना है कि सूचना आयोग में नियुक्तियों में देरी से राज्य में सूचना के अधिकार का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देगा, बल्कि जनता के अधिकारों को बहाल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

     

  • हेमंत सोरेन ने दिया झारखंड की महिलाओं को नए साल का तोहफा

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………………

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। मंईयां सम्मान योजना के तहत 56.61 लाख महिला लाभार्थियों के खातों में ₹1415.44 करोड़ की धनराशि ट्रांसफर की गई। यह समारोह रांची के नामकुम स्थित खोजाटोली के ट्रेनिंग ग्राउंड में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर यह राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी।

    जैसे ही राशि ट्रांसफर की गई, वहां उपस्थित महिलाओं के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने इस योजना को झारखंड की महिलाओं के सपनों को पंख देने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा, “हमारे राज्य की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में सक्षम हैं। हमने वादा किया था कि राज्य की आधी आबादी को उनका हक दिलाएंगे, और आज हमने उस वादे को निभाया है।” मुख्यमंत्री ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “आप अपने सपनों को साकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह राशि न केवल आपकी जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आपके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मददगार साबित होगी। अब आप बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतों और अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकती हैं।”

    महिला सशक्तिकरण की नई दिशा।

    ‘मंईयां सम्मान योजना’ की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। पहले इस योजना के तहत 18-50 वर्ष की महिलाओं को ₹1000 मासिक मानदेय दिया जा रहा था, जिसे दिसंबर 2024 से ₹2500 कर दिया गया। यह योजना झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए महिलाओं के बीच गहरी पैठ बनाने का एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    महिला और पुरुष: एक हल के दो बैल।

    मुख्यमंत्री ने अपनी बात को सरल लेकिन गहरे संदेश के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “महिला और पुरुष एक हल के दो बैल हैं। जब तक दोनों साथ नहीं चलेंगे, राज्य और देश का विकास संभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं अपनी क्षमता और बुद्धिमत्ता से राज्य को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    चुनावी राजनीति पर तीखा कटाक्ष।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा, “जब हमने महिलाओं के लिए ₹1000 की घोषणा की, तो विपक्ष ने मजाक उड़ाया। जब ₹2500 की बात की, तो वे इसे अव्यावहारिक बताने लगे। लेकिन हमने साबित कर दिया कि झारखंड में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता वास्तविक है।”

    महिलाओं को मिली नई ऊर्जा।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। समारोह के दौरान महिलाओं ने तख्तियां लहराकर और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मुख्यमंत्री का स्वागत किया। हेमंत सोरेन ने भी महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं।

    अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाएंगी महिलाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के जरिए हम झारखंड की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाने जा रहे हैं। महिलाओं को अब अपने फैसले खुद लेने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने का अवसर मिलेगा।” उन्होंने यह भी चेताया कि इस धनराशि का गलत इस्तेमाल न हो।

    झारखंड की तस्वीर बदलेगी।

    मुख्यमंत्री ने इस योजना को झारखंड की गरीबी और पिछड़ेपन के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान झारखंड की आधी आबादी को न केवल सशक्त बनाएगा, बल्कि राज्य को नई दिशा में ले जाने का माध्यम भी बनेगा। झारखंड की महिलाएं अब नई उम्मीदों और सपनों के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं। यह योजना उनके जीवन को बदलने का एक मजबूत आधार बन सकती है।

     

  • झारखंड : मंइयां सम्मान योजना का भव्य आगाज कल,तीन लाख महिलाएं होंगी सहभागी

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………

    सोमवार को राजधानी रांची के नामकुम में झारखंड सरकार मंइयां सम्मान योजना के तहत ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे, जिसमें लाभुक महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।

    महिलाओं के खाते में हर महीने ₹2500

    पहले इस योजना के तहत ₹1000 मासिक दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। प्रायोगिक तौर पर दिसंबर माह में कुछ लाभार्थी महिलाओं के खाते में यह राशि ट्रांसफर की गई थी। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।

    भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण का केंद्र।

    कार्यक्रम में झारखंड की लोक संस्कृति का भी जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। प्रसिद्ध नागपुरी गायक पवन राय, कुडुख गायक सुरेंद्र कुजूर और सादरी गायक इग्नेश कुमार अपनी सुरमयी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं पारंपरिक पाइका और छऊ नृत्य जैसे लोकनृत्यों के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

    तीन लाख महिलाओं की भागीदारी, पुख्ता सुरक्षा इंतजाम।

    इस राज्यस्तरीय समारोह में करीब तीन लाख महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। रैप की चार कंपनियां और प्रमुख चौक-चौराहों पर क्यूआरटी टीम को आंसू गैस दस्ते के साथ तैयार रखा गया है।

    सुविधाओं और यातायात का रखा गया विशेष ध्यान।

    लाभार्थियों के लिए भोजन, पानी, और बैठने की पुख्ता व्यवस्था की गई है। वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग स्थल पर खड़ा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यातायात सुचारू रखने के लिए शहर के कुछ मार्गों को वन-वे किया गया है और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

    प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में।

    रविवार को रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर ड्यूटी संभालने के निर्देश दिए। मौके पर डीडीसी दिनेश यादव, रांची एसडीओ उत्कर्ष कुमार, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल भी मौजूद थे।

    झारखंड की संस्कृति का संदेश।

    यह समारोह झारखंड की परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नए आयाम तक पहुंचाने का प्रयास है। मंइयां सम्मान योजना के जरिए सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का जो अवसर दिया है, वह झारखंड के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • CM ने लॉन्च किया ‘अबुआ बजट’ पोर्टल और ऐप, जनता से मांगे सुझाव

    रांची: वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट को जनभागीदारी के साथ तैयार करने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को अबुआ बजट’ पोर्टल और मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री सुदिव्य सोनू, मुख्य सचिव अलका तिवारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, जनता की राय और भागीदारी से ही हम झारखंड को सतत विकास के पथ पर आगे ले जा सकते हैं।” उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे पोर्टल और ऐप के माध्यम से अपने बहुमूल्य सुझाव देकर राज्य के आगामी बजट को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें।

    सोशल मीडिया के जरिए अपील.
    मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स’ पर जनता को संदेश देते हुए कहा कि झारखंड के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए ‘अबुआ बजट’ की प्रक्रिया में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे इस पहल में शामिल होकर राज्य के लिए अपने विचार साझा करें।

    जन सहभागिता की ओर कदम.
    यह पहल झारखंड सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें राज्य की नीतियों और योजनाओं में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। अबुआ बजट पोर्टल और ऐप जनता को अपनी राय सीधे सरकार तक पहुंचाने का मंच प्रदान करते हैं।

    कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रियों और अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया। अब देखना यह होगा कि जनता की भागीदारी से बजट निर्माण में कौन-कौन से नवाचार देखने को मिलते हैं।