बजट सत्र: दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन कल तक के लिए स्थगित

 

झारखंड विधानसभा में दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि, शोक प्रस्ताव पारित

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हाल ही में दिवंगत हुई कई प्रतिष्ठित हस्तियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान सदन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को स्वीकार किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य और देश ने कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों को खो दिया है, जिनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके दुख में सहभागी है। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस क्षति को अपूरणीय बताया और कहा कि हम सभी उनकी यादों को संजोकर आगे बढ़ेंगे।

इस अवसर पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

इन हस्तियों को किया गया याद

विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई प्रमुख हस्तियों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा, वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, वरिष्ठ राजनेता ओम प्रकाश चौटाला, एस.एम. कृष्णा, कुंवर नटवर सिंह, सधनु भगत, बच्चा सिंह, छत्रुराम महतो, बैरागी उरांव, गुलाब सिंह मुंडा, मनोरमा सिंह, डॉ. कृष्णानंद झा, विश्वनाथ सिंह, गणेश पासवान, प्रीतिश नंदी, जनरल पदमनाभन, शारदा सिन्हा, उस्ताद जाकिर हुसैन और श्याम बेनेगल आदि शामिल हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। वर्ष 2004 से 2014 तक देश की बागडोर संभालने वाले सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें पद्म विभूषण, एशिया मनी अवॉर्ड और यूरो मनी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को निधन हुआ। वे भारतीय उद्योग जगत की अग्रणी शख्सियतों में से एक थे और उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उनका निधन औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

वामपंथी आंदोलन के प्रमुख नेता सीताराम येचुरी का 12 सितंबर 2024 को निधन हो गया। वे 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे और भारतीय राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

शोक प्रस्ताव पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही 25 फरवरी को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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