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  • झारखंड में लागू नहीं होंगे UCC, CAA और NRC- हेमंत सोरेन

    झारखंड दिवस के रूप में मना समारोह.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के प्रमुख एजेंडों को सीधे नकारते हुए साफ कर दिया है कि झारखंड में समान नागरिक संहिता (UCC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू नहीं किया जाएगा।  दुमका में आयोजित पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में पार्टी ने 50 सूत्री प्रस्ताव पारित करते हुए यह बड़ा ऐलान किया। झामुमो का स्थापना दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। पार्टी का पूरा कुनबा इस खास मौके पर दुमका में मौजूद रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पार्टी का झंडा फहराकर 46वें स्थापना दिवस समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

    झामुमो का केंद्र से दो-दो हाथ का मूड!

    झामुमो ने सिर्फ CAA-NRC-UCC पर ही नहीं, बल्कि कोयला रॉयल्टी मद के 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने साफ कर दिया कि इस रकम को लेकर सदन से सड़क तक संघर्ष जारी रहेगा और कानूनी मोर्चे पर भी केंद्र से लड़ाई लड़ी जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सत्ता में वापसी के बाद झामुमो अपने कोर एजेंडे पर कायम रहेगा। पार्टी ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने, संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT एक्ट) और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT एक्ट) को और मजबूती देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    झारखंड में होनी चाहिए PSU कंपनियों का मुख्यालय।

    झामुमो ने झारखंड में काम कर रही कंपनियों के मुख्यालय को राज्य में लाने की मांग को फिर से दोहराया। पार्टी का कहना है कि कोल इंडिया और दामोदर घाटी निगम (DVC) जैसी कंपनियां झारखंड से संसाधन निकालकर मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनका मुख्यालय यहां नहीं है। झामुमो का मानना है कि इन कंपनियों के मुख्यालय झारखंड में लाने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा। झामुमो ने अपने पारंपरिक गढ़ संताल परगना को बचाने और भाजपा की सेंधमारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया है।

    स्थापना दिवस समारोह झारखंड दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें हजारों की संख्या में पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस मौके  पर झारखंड सरकार के कई मंत्री, सांसद और विधायक उपस्थित रहे। इनमें मंत्री सुदिव्य सोनू, हफीजुल हसन, दुमका सांसद नलिन सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, विधायक कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन ,मथुरा महतो, स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, आलोक कुमार सोरेन, लुईस मरांडी और उदय शंकर सिंह जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं ।

     छह जिलों से उमड़ी भीड़, सुरक्षा रही चाक-चौबंद।
    इस मेगा इवेंट में संथाल परगना के सभी छह जिलों—दुमका, देवघर, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा से भारी संख्या में कार्यकर्ता और जनता शामिल हुई। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। दुमका जिला पुलिस बल के अलावा अन्य जिलों से भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। गांधी मैदान में करीब 400 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था , जिनमें कांस्टेबल से लेकर डीएसपी स्तर तक के अधिकारी शामिल थे।

    चार्टर प्लेन से पहुंचे मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चार्टर प्लेन से दुमका पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया और प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री सीधे अपने खिजुरिया स्थित आवास पहुंचे, जहां कुछ समय विश्राम करने के बाद वे गांधी मैदान पहुंचे और समारोह की शुरुआत की।

    भाजपा को बड़ा झटका, दिनेश चौधरी झामुमो में शामिल।

    झामुमो को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब भाजपा के ओबीसी मोर्चा के पूर्व जिला पदाधिकारी और अनगड़ा निवासी दिनेश कुमार चौधरी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

    झामुमो के इस ऐतिहासिक स्थापना दिवस ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि झारखंड की सियासत में भी एक मजबूत संदेश दिया कि पार्टी की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है!

  • क्या सीता सोरेन की JMM में वापसी होगी ? सियासी गलियारों में चर्चा तेज

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट………………….

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों सीता सोरेन की घरवापसी की चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा नेता और शिबू सोरेन की बड़ी पुत्र वधू  सीता सोरेन एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक घराने में लौटने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस राह में सबसे बड़ी चुनौती उनके ही परिवार से आ रही है।

    राजनीतिक भविष्य को लेकर बढ़ी बेचैनी।

    लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सीता सोरेन की स्थिति डगमगाने लगी है। उन्हें लगने लगा है कि भाजपा में रहकर संथाल परगना में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करना मुश्किल है, क्योंकि यहां जेएमएम का जनाधार काफी मजबूत है। यही वजह है कि अब  वे  वापसी का रास्ता तलाश रही हैं। इस फैसले के पीछे सिर्फ उनकी सियासत ही नहीं, बल्कि अपनी बेटियों का राजनीतिक भविष्य भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है।

    हेमंत और कल्पना की सहमति का इंतजार।

    हालांकि, जेएमएम में वापसी इतनी आसान नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन इस पर सहमत नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, भाजपा में शामिल होते वक्त सीता सोरेन ने हेमंत और कल्पना पर गंभीर आरोप लगाए थे। दिवंगत दुर्गा सोरेन को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भी परिवार को झकझोर दिया था। यही कारण है कि हेमंत-कल्पना उन्हें वापस लेने के मूड में नहीं हैं।

    शिबू सोरेन चाहते हैं परिवार एक हो।

    जेएमएम के संरक्षक और दिग्गज नेता शिबू सोरेन हमेशा से अपने परिवार को एकजुट देखना चाहते हैं। 11 जनवरी को सीता सोरेन जब शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई देने उनके घर पहुंचीं, तो इस चर्चा को और बल मिल गया कि वो जेएमएम में वापसी की कोशिशों में जुटी हैं

    परिवार के भीतर ही सियासी संघर्ष!

    अब सवाल यह उठता है कि क्या हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पारिवारिक दबाव में झुकेंगे? परिवार के सदस्य और जेएमएम के कुछ नेता हेमंत और कल्पना को मनाने में लगे हैं, ताकि सीता की वापसी की राह आसान हो सके। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि हेमंत और कल्पना को यह डर भी है कि पुराने विवाद कहीं दोबारा ना उठ खड़े हों।

    भाजपा से मोहभंग, जेएमएम में फायदा!

    भाजपा में रहते हुए सीता सोरेन को दो बड़े चुनावों में हार का सामना करना पड़ा—दुमका लोकसभा और जामताड़ा विधानसभा। इस हार ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे में, जब जेएमएम सत्ता में है, तो पार्टी में वापसी से उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    अब आगे क्या?

    अब सबकी निगाहें हेमंत और कल्पना सोरेन के फैसले पर टिकी हैं। अगर उन्होंने सीता सोरेन की वापसी को मंजूरी दे दी, तो झारखंड की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर विरोध जारी रहा, तो सीता को एक नए राजनीतिक रास्ते की तलाश करनी होगी।