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  • शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी

    वीआईपी के लिए बने चार हेलीपैड, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

    परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रामगढ़, नेमरा :  झारखंड की राजनीति के पुरोधा और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु  शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज की तैयारियां इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में करीब चार से पांच लाख लोग शामिल होंगे, जिसके लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघरों की व्यवस्था की गई है।

    वीआईपी के लिए विशेष इंतज़ाम.

    देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और विशिष्ट मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। वीआईपी आवागमन को ध्यान में रखते हुए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं — जिनमें से तीन शिबू सोरेन के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर बनाया गया है। 16 अगस्त को होने वाले संस्कार भोज के दिन, विशेष अतिथियों के लिए अलग पार्किंग की सुविधा भी होगी।

    स्थानीय आमंत्रण झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटियों के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शिबू सोरेन के पैतृक आवास के 300 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

    ग्रामीणों और मेहमानों के लिए व्यवस्था.

    श्राद्ध भोज के लिए तैयार पांच पंडालों में बैठकर भोजन करने की सुविधा होगी। सभी पंडालों के पास ही बड़े-बड़े रसोई घर बनाए गए हैं। विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा। कार्यक्रम स्थल तक केवल वीआईपी वाहन ही पहुंचेंगे; आम लोगों के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडाल तक लाएंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम.

    कार्यक्रम के दौरान नेमरा को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी कर दिए हैं।

    गांव में आम आदमी की तरह सीएम सोरेन.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे पिता के श्राद्ध कर्म में एक आम ग्रामीण की तरह हिस्सा ले रहे हैं। संथाल समाज और गांव के लोगों के साथ बैठकों में वे हर विधि-विधान की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, साथ ही भोज के मेन्यू से लेकर मेहमानों की सेवा तक पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।

    पिता की विरासत को जीते हुए हेमंत सोरेन गांव की गलियों और खेत-खलिहानों में घूमते हैं, किसानों से बात करते हैं और जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा पर चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा और अधिकारों की रक्षा का संकल्प है — एक सीख जो उन्हें सीधे पिता से मिली है।

    जल, जंगल और ज़मीन: पहचान और संकल्प

    सीएम ने स्पष्ट कहा कि जल, जंगल और ज़मीन झारखंड की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वे मानते हैं कि यह केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा, समृद्ध झारखंड देने का वादा है।

    विरासत का विस्तार.

    गांव की मिट्टी, उसकी खुशबू और हरियाली की ठंडक में हेमंत सोरेन आज भी अपने पिता की परछाईं की तरह दिखते हैं। जनसेवा, सादगी और संघर्ष की वही परंपरा, जिसे दिशोम गुरु ने दशकों तक निभाया, अब मुख्यमंत्री अपने कामों के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं।

  • गिरिडीह : सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस ने रचा कीर्तिमान-कल्पना सोरेन

    पर्यावरण दिवस पर भी दिया गया जागरूकता का संदेश

    By The News Post4u.

    गिरिडीह: सर जेसी बोस मुख्यमंत्री बालिका उत्कृष्ट विद्यालय, गिरिडीह में बुधवार को दोहरा उत्सव देखने को मिला। एक ओर जहां विद्यालय के छात्रों ने सीबीएसई 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर जिले का मान बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर हरित संदेश दिया गया।

    इस विशेष कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, जिनका स्वागत विद्यालय की बाल संसद की छात्राओं ने पारंपरिक तरीके से तिलक और पुष्प वर्षा कर किया। इस मौके पर जिले के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, जेएमएम नेता संजय सिंह, पूर्व विधायक केदार हाजरा सहित अन्य लोग उपस्थित थे ।

    सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस : एक सपने की उड़ान

    समारोह की मुख्य अतिथि कल्पना सोरेन ने विद्यालय के तीन छात्राओं के राज्य टॉपर्स में शामिल होने पर स्कूल के प्राचार्य, शिक्षकों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में से सिर्फ एक विद्यालय से तीन टॉपर्स का आना इस स्कूल की मेहनत और ईमानदारी का परिचायक है। इससे पूरे गिरिडीह का नाम रोशन हुआ है।”

    उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, “आपका भविष्य एक पौधे की तरह है। सिर्फ रोपने से वह नहीं बढ़ता, उसे पानी, देखभाल और ध्यान चाहिए। वैसे ही आप पढ़ाई और अनुशासन से अपने जीवन को बड़ा बना सकते हैं।”

    पर्यावरण संरक्षण की शपथ.

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी अतिथियों ने वृक्षारोपण किया और एक स्वर में कहा – पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ।” यह संदेश न केवल विद्यालय परिसर के लिए था, बल्कि पूरे समाज को हरियाली और स्वच्छता की दिशा में प्रेरित करने वाला था।

    प्राचार्य मुन्ना प्रसाद कुशवाहा ने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया । इस मौके पर जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं और विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

    मारवाड़ी युवा मंच प्रेरणा शाखा का पौधारोपण अभियान.

    इसी क्रम में, मारवाड़ी युवा मंच – प्रेरणा शाखा, गिरिडीह ने भी विश्व पर्यावरण दिवस पर समाज को हरियाली का संदेश दिया। संगठन ने 51 पौधों का रोपण कर यह संकल्प लिया कि वे आने वाली पीढ़ियों को एक हरा-भरा भविष्य देंगे।

    इस अभियान में रिया अग्रवाल और  बरखा बालासिया का योगदान सरहनीय  रहा। दोनों ने न केवल कार्यक्रम की रूपरेखा तय की, बल्कि स्वयं सक्रिय रहकर उसे सफल बनाया।

    मारवाड़ी युवा मंच प्रेरणा शाखा सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर लगातार कार्य कर रहा है। यह कार्यक्रम भी उसी श्रृंखला की एक मजबूत कड़ी है, जिसमें उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया।

  • झारखंड सरकार का यूरोपीय दौरा: प्रवासी भारतीयों से संवाद

    विशेष संवाददाता.

    झारखंड में निवेश को लेकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के दो प्रमुख देशों——के दौरे पर है। इस कूटनीतिक और आर्थिक यात्रा का मकसद है: झारखंड को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाना।

    इस यात्रा के दौरान न केवल राज्य की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया, बल्कि कुछ अहम समझौते और प्रस्तावों की नींव भी रखी गई।

    खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: फुटबॉल कोचिंग के लिए RCD Espanyol का प्रस्ताव.

    स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, विश्वप्रसिद्ध RCD Espanyol फुटबॉल क्लब ने झारखंड सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया। क्लब ने झारखंड में खेल—विशेषकर फुटबॉल—के विकास के लिए सहयोग की इच्छा जताई है। इसमें खासकर फुटबॉल कोचों के प्रशिक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की पेशकश की गई है।

    यह प्रस्ताव बार्सिलोना के विकसित खेल पारिस्थितिकी तंत्र और झारखंड में युवाओं की खेल प्रतिभा को जोड़ने का सेतु बन सकता है। आने वाले समय में यह साझेदारी झारखंड को भारतीय खेल मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।

    व्यापक क्षेत्रों में चर्चा: स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, बायो-फार्मा और अधिक.

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा में कई विविध क्षेत्रों पर संवाद हुआ। इसमें स्टार्टअप मेंटरशिप, क्लीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता, सप्लाई चेन, बायो-फार्मास्यूटिकल्स, खेल विपणन, क्रिकेट टीम ओनरशिप, डीप-टेक बी2बी मार्केटिंग, लीगल, डेंटल साइंस और मेडटेक जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।

    प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में नवाचार आधारित एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने हेतु वैश्विक विशेषज्ञों और कंपनियों से मार्गदर्शन और निवेश का अनुरोध किया ।

    झारखंड में गीगा फैक्ट्री? टेसला ग्रुप A.S. से CM की महत्वपूर्ण बैठक.

    इस यूरोपीय दौरे का सबसे आकर्षक पड़ाव रहा टेसला ग्रुप A.S. (चेकोस्लोवाकिया) के CEO और सह-संस्थापक डुशान लिचार्डस के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात। बातचीत के दौरान टेसला ग्रुप ने झारखंड में एक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए बैटरी भंडारण उत्पादों के असेंबली पर केंद्रित होगी।

    यह प्रस्ताव न केवल झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है, बल्कि इससे राज्य के तकनीकी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।

    प्रवासी भारतीयों से संवाद: संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास.

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने बार्सिलोना में बसे प्रवासी भारतीय व्यवसायियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस संवाद का उद्देश्य था—झारखंड की विकास गाथा से उन्हें जोड़ना और विदेशी धरती पर बसे भारतीय मस्तिष्क को अपनी धरती से जोड़ना।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्पेनिश कंपनियों और निवेशकों के साथ सतत संवाद और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस कड़ी में भविष्य में और बैठकें तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड सरकार की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेश और विकास की ओर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यूरोपीय धरती पर झारखंड की आवाज़ अब सुनाई देने लगी है—चाहे वह खेल हो, तकनीक हो, या उद्योग। आने वाला समय बताएगा कि इन बैठकों का परिणाम धरातल पर किस तरह उतरता है, लेकिन शुरुआत आशाजनक है।

     

  • हेमंत सोरेन का स्पेन-स्वीडन दौरा: झारखंड में निवेश लाने की तैयारी

    रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 अप्रैल से 27 अप्रैल तक एक 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्पेन और स्वीडन के दौरे पर रवाना होंगे। इस विदेश यात्रा का मकसद स्पष्ट है — वैश्विक निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करना और राज्य को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना। इस यात्रा के लिए मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार से राजनीतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

    निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत दौरा.

    मुख्यमंत्री की यह यात्रा राज्य के उद्योग विभाग के नेतृत्व में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा “झारखंड में औद्योगिक निवेश के नए रास्ते खोलने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल स्पेन के मैड्रिड, बार्सिलोना और स्वीडन के गोथेनबर्ग जैसे प्रमुख शहरों में उद्यमियों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों से मिलेगा।

    मुख्य ठिकाने और कार्यक्रम:

    • 19 अप्रैल: प्रतिनिधिमंडल मैड्रिड पहुंचेगा
    • 21 अप्रैल: प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
    • 22 अप्रैल:
      • मैड्रिड में खनन और इस्पात क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठक
      • बार्सिलोना में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से संवाद
    • 25 अप्रैल: गोथेनबर्ग (स्वीडन) में क्लीन एनर्जी कंपनियों से मुलाकात
    • 26 अप्रैल: वन-टू-वन बैठकें, संभावित निवेशकों से सीधी बातचीत
    • 27 अप्रैल: भारत वापसी

    दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी सेंटर (Spain) भी जाएगा, जो सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी रिसर्च केंद्र है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की पहचान बनाने की कोशिश.

    मुख्यमंत्री के इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य झारखंड की ब्रांडिंग भी है। राज्य सरकार “हरित ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास” को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मंचों पर झारखंड की छवि को उभारना चाहती है। इस दौरे से निवेशकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे आगामी परियोजनाओं में साझेदारी की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन होंगे शामिल?

    मुख्यमंत्री के साथ जो टीम विदेश यात्रा पर जा रही है, उसमें प्रशासनिक, तकनीकी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन दिखता है। टीम में शामिल हैं:

    • कल्पना सोरेन (विधायक)
    • अलका तिवारी (मुख्य सचिव)
    • अविनाश कुमार (सीएम के अपर मुख्य सचिव)
    • ए.के. रस्तोगी (सेवानिवृत्त आईएफएस)
    • अरवा राजकमल (उद्योग सचिव)
    • राहुल कुमार सिन्हा (एमडी, जेएसएमडीसी)
    • सुशांत गौरव (उद्योग निदेशक)
    • वरुण रंजन (एमडी, जेआईआईडीसीओ)
    • प्रणव कुमार पाल (संयुक्त निदेशक, उद्योग)
    • अजय कुमार सिंह (सीएम के निजी सुरक्षा अधिकारी)

    क्या कहती है यह यात्रा झारखंड की दिशा के बारे में?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह दौरा उस बदले हुए दृष्टिकोण का संकेत है जिसमें राज्य सरकार सिर्फ खनन पर निर्भरता छोड़कर हरित ऊर्जा, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी नवाचार की ओर कदम बढ़ा रही है। यह यात्रा न केवल आर्थिक निवेश की राह खोलेगी, बल्कि झारखंड को वैश्विक मंचों पर एक प्रगतिशील और निवेश-मैत्रीपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।

     

  • जेल की सलाख़ें से निकल कर हेमंत सोरेन मज़बूत नेता बन कर उभरे

    हेमंत सोरेन के जीवन पर एक नज़र.

    परवेज़ आलम

    रांची, झारखंड : “क्या एक नेता का जेल जाना, उसकी छवि को तोड़ता है या निखारता है? क्या संघर्ष की आग में तपकर ही असली नेता बनता है? और क्या झारखंड अब एक नए नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, या पुराने नामों का ही नया संस्करण देख रहा है?”

    ये सवाल तब ज़्यादा ज़रूरी हो जाते हैं, जब एक नेता जेल से बाहर आते ही न सिर्फ़ फिर से मुख्यमंत्री बनता है, बल्कि अब पूरे संगठन की कमान भी संभाल लेता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हेमंत सोरेन की, जो अब झारखंड मुक्ति मोर्चा के नए केंद्रीय अध्यक्ष हैं। एक दौर में छात्र मोर्चा से राजनीति की शुरुआत करने वाला नौजवान, आज पार्टी का सर्वोच्च चेहरा बन चुका है।

    हेमंत नहीं रुके, थमे नहीं, झुके नहीं…”

    जेल गए, लेकिन लड़ाई नहीं छोड़ी। 5 महीने के राजनीतिक वनवास के बाद जब हेमंत बाहर आए, तो सिर्फ़ एक नेता नहीं, एक प्रतीक बनकर उभरे — सत्ता के दमन के ख़िलाफ़, अपने अधिकारों के लिए लड़ते झारखंडी स्वाभिमान के प्रतीक।

    हेमंत सोरेन की कहानी कोई सामान्य राजनीतिक यात्रा नहीं है। यह कहानी है नेमरा के एक किसान परिवार से उठे उस बेटे की, जिसने राजनीतिक विरोधियों से लेकर सत्ता तक, सबका सामना किया।

    और अब, 2025 की गर्मियों में — शिबू सोरेन के 38 साल लंबे अध्यक्षीय कार्यकाल का अंत कर, बेटे हेमंत ने वह कुर्सी संभाल ली है, जो कभी उनके पिता के लिए भी संघर्षों की तपिश में गढ़ी गई थी।

    जनता का सवाल — “जेल से नेतृत्व तक, क्या यही लोकतंत्र की परिभाषा है?”

    झारखंड की जनता जानना चाहती है — क्या खनन घोटाले में जेल जाना, राजनीतिक साज़िश थी या सच्चाई?

    लेकिन सच्चाई ये है कि हेमंत जब जेल से बाहर आए, तो पार्टी और ज़्यादा संगठित दिखी। कल्पना सोरेन, उनकी पत्नी, सामने आईं — एक नेता के रूप में, एक रणनीतिकार के रूप में। ये कोई साधारण वापसी नहीं थी, ये एक जोड़ी की ताक़त थी — जिसने सत्ता को फिर से अपनी मुट्ठी में किया।

    संघर्ष की जड़ें — नेमरा से बरहेट तक का रास्ता आसान नहीं था

    नेमरा गांव का एक बच्चा, जो सरकारी स्कूल में पढ़ा, पटना में इंटर तक पहुंचा, और बीआईटी मेसरा जैसे संस्थान में दाखिला लेकर भी राजनीति की पुकार पर पढ़ाई छोड़ दी — आज उसी का नाम झारखंड की हर पंचायत में गूंज रहा है।

    2005 में जब पहली बार चुनाव लड़े, तो हार मिली। खुद के ही दल के सीनियर नेता ने हराया। लेकिन यही वो समय था जब हेमंत ने सीखा — राजनीति में सबसे ज़रूरी चीज़ क्या है? धैर्य।

    2009 में भाई दुर्गा सोरेन की मौत ने हेमंत को परिवार और राजनीति — दोनों का उत्तराधिकारी बना दिया।

    सियासत का सवाल — “क्या JMM अब हेमंत की पार्टी है?”

    जब दिशोम गुरु यानी शिबू सोरेन ने हेमंत के नाम का प्रस्ताव रखा, तो हज़ारों कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया — हेमंत ही भविष्य है!”

    JMM की केंद्रीय समिति में अब 289 सदस्य हैं। लेकिन सवाल ये भी है — क्या ये सिर्फ़ एक खानदान की विरासत है, या जनआंदोलन की नई शक्ल?

    झारखंड की जनता का सवाल — “कितना बदलेगा हेमंत का झारखंड?”

    2019 में उन्होंने भाजपा को सत्ता से बेदखल किया, 2024 में जेल से आकर फिर मुख्यमंत्री बने। अब पार्टी की कमान भी उन्हीं के हाथ में है। लेकिन क्या इससे झारखंड की ज़मीन पर बदलाव आएगा?

    क्या आदिवासियों की ज़मीन बचेगी? क्या युवाओं को रोज़गार मिलेगा? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नई नीति बनेगी?

    या फिर, ये भी वही राजनीति निकलेगी — चेहरे बदलते रहेंगे, हालात वही रहेंगे?

     

  • हेमंत सोरेन बने झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष, शिबू सोरेन ने सौंपी विरासत

    परवेज़ आलम.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। 2025 में हुए पार्टी के 13वें महाधिवेशन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सर्वसम्मति से झामुमो का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह निर्णय पार्टी के लिए एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, जहां 38 वर्षों तक अध्यक्ष रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने पुत्र को पार्टी की बागडोर सौंपी।

    महाधिवेशन का आयोजन रांची के खेलगांव में हुआ, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और प्रतिनिधि मौजूद थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता नलिन सोरेन ने शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक के रूप में प्रस्तावित किया, जिसका समर्थन मथुरा महतो ने किया। इसके बाद शिबू सोरेन ने मंच से हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष घोषित किया। घोषणा के तुरंत बाद, मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियों और नारों से नए अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।

    पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की घोषणा. 

    महाधिवेशन में झामुमो की नई केंद्रीय समिति की भी घोषणा की गई, जिसमें कुल 284 सदस्य शामिल किए गए। जिलावार रूप से साहिबगंज, दुमका और रांची सहित विभिन्न जिलों से सदस्यों को चुना गया। प्रमुख नामों में खुद हेमंत सोरेन, पंकज मिश्रा, शिबू सोरेन, नलिन सोरेन, बसंत सोरेन, मधु मंसूरी और महुआ माजी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

    हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा. 

    हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्ष, धैर्य और रणनीतिक दूरदर्शिता से भरा रहा है। 2003 में छात्र मोर्चा से शुरुआत करने वाले हेमंत पहली बार 2009 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष दुमका से विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज की। 2010 में वे उपमुख्यमंत्री बने और 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने पार्टी को शानदार सफलता दिलाई, जिसके कारण वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री बने।

    हालांकि उनका सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2024 में उन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया, जिससे उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वे फिर से चुनावी मैदान में उतरे और झामुमो के नेतृत्व में INDIA गठबंधन को रिकॉर्ड 56 सीटें दिलाकर सत्ता में वापसी की।

    कल्पना सोरेन की भूमिका. 

    इस कठिन दौर में हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब हेमंत जेल में थे, तब कल्पना ने पार्टी के लिए स्टार प्रचारक के रूप में प्रचार किया। उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं को संगठित किया, बल्कि महिला मतदाताओं में भी झामुमो के लिए समर्थन जुटाया। उनके समर्पण और संगठन क्षमता ने हेमंत को जेल से बाहर आने के बाद एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने में मदद की।

    झामुमो का भविष्य: राष्ट्रीय विस्तार की योजना. 

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत सोरेन ने पार्टी के विस्तार की योजनाओं की घोषणा की। उनका लक्ष्य झारखंड के बाहर, विशेषकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में झामुमो को मजबूत करना है। उनका मानना है कि झामुमो सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जिसे राष्ट्रीय मंच पर ले जाने की जिम्मेदारी अब उनकी है।

    नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव. 

    शिबू सोरेन ने 1972 में झामुमो की स्थापना की थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और झारखंड राज्य की मांग को लेकर ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। अब यह विरासत हेमंत सोरेन के हाथों में है, जो इसे आधुनिक दौर की राजनीति में नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    हेमंत सोरेन का नेतृत्व केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि वैचारिक रूप से भी पार्टी को नई दिशा देगा। उन्होंने अपने पहले दो कार्यकालों में जनहितकारी योजनाएं लागू की, जैसे “अबुआ आवास योजना”, महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और आरक्षण नीति में बदलाव। इन पहलों ने उन्हें जनता के बीच एक जननेता के रूप में स्थापित किया।

    हेमंत सोरेन का केंद्रीय अध्यक्ष बनना न केवल झामुमो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि झारखंड की राजनीति में स्थिरता और निरंतरता का संकेत भी है। शिबू सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हेमंत एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—पार्टी की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर झामुमो को मजबूती प्रदान करना।

  • कल्पना मुर्मू सोरेन होगी JMM की नई कार्यकारी अध्यक्ष !

    झारखंड की राजनीति में नया अध्याय

    झामुमो के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन का उद्घाटन सत्र

    परवेज़ आलम

    झारखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गांडेय से विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नई कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा। यह जानकारी झामुमो के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन के दौरान सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को होगी ।

    झामुमो के महाधिवेशन का दृश्य भावुक करने वाला रहा.

    रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय महाधिवेशन का उद्घाटन 14 अप्रैल को हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन, जो अब 81 वर्ष के हो चुके हैं, व्हीलचेयर पर बैठकर मंच पर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी रूपी सोरेन भी थीं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद अपने माता-पिता को उनके आवास से महाधिवेशन स्थल तक पहुंचाया। इस क्षण की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें हेमंत सोरेन अपने पिता की व्हीलचेयर को संभालते नजर आए।

    एक नई विरासत की शुरुआत.

    .झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन अब सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे पीछे हट रहे हैं। ऐसे में पार्टी की बागडोर अगली पीढ़ी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कल्पना सोरेन का कार्यकारी अध्यक्ष बनना न सिर्फ परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि महिला नेतृत्व को भी एक नई पहचान देने वाला बदलाव माना जा रहा है।

    हेमंत सोरेन का भावनात्मक संदेश.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महाधिवेशन के अवसर पर सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा:

    झारखंड ही नहीं, पूरे देश-दुनिया के लोग आदरणीय दिशोम गुरुजी को आदर-सम्मान की नजरों से देखते हैं। उनके नेतृत्व और असंख्य क्रांतिकारियों के संघर्ष के बाद हमें अलग राज्य मिला। अब हमें उस आंदोलन की जड़ों को और सींचना है, उसे जन-जन तक पहुंचाना है।”

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भविष्य की दिशा.

    महाधिवेशन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य का गठन असंख्य बलिदानों के बाद हुआ है। उन्होंने याद किया कि कैसे शिबू सोरेन के नेतृत्व में हजारों लोग आंदोलन में शामिल हुए और अपनी जान गंवाई। उन्होंने यह भी कहा कि अलग राज्य बनने के बाद राज्य के विकास पर बहुत कम चर्चा हुई और इसकी कमान ऐसे हाथों में गई जो यहां के लोगों के प्रतिनिधि नहीं थे।

    संगठनात्मक प्रस्ताव और भविष्य की रणनीति.

    इस महाधिवेशन में पूर्व उपमुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी ने पार्टी का राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें जातिगत जनगणना, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, 1932 की स्थानीय नीति और परिसीमन के विरोध को प्रमुखता दी गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अपने संगठन का विस्तार करेगी।

    भाजपा पर निशाना.

    स्टीफन मरांडी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हेमंत सोरेन के खिलाफ साजिशें रचीं, केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया और उन्हें गलत आरोपों में जेल भेजा गया। इसे उन्होंने लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताया।

    वक्फ अधिनियम और आदिवासी अधिकार.

    महाधिवेशन में वक्फ अधिनियम संशोधन के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित किया गया। झामुमो ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया और कहा कि इस कानून को झारखंड में लागू नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, पार्टी ने जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों और मूलवासियों के हक की बात दोहराई।

    लोकसभा चुनाव की तैयारी.

    महाधिवेशन में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि पार्टी अब पंचायत से लेकर लोकसभा तक भाजपा की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। महाधिवेशन के दौरान झामुमो की सांगठनिक रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखा गया।
    कल्पना मुर्मू सोरेन को JMM की कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर झारखंड की राजनीति में एक नई दिशा और नई उम्मीद के तौर पर देखी जा रही है। इससे एक ओर जहां पार्टी की आंतरिक संरचना मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर राज्य की जनता में यह संदेश जाएगा कि झामुमो परिवार संघर्ष की विरासत को अब नई पीढ़ी के नेतृत्व में आगे बढ़ाने को तैयार है।

     

  • गांडेय की तस्वीर बदलने की पहल — विधायक कल्पना सोरेन ने किया विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    गिरिडीह (गांडेय) : गांडेय विधानसभा क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत करते हुए स्थानीय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने बुधवार को कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में चलंत चिकित्सा वाहन सेवा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का सशक्तिकरण और पेयजल आपूर्ति की नई परियोजनाएं शामिल हैं। ये सभी योजनाएं जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं और इनका उद्देश्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर विधायक का स्वागत स्थानीय जनता और झामुमो पार्टी के नेताओं द्वारा गर्मजोशी से किया गया। फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ के साथ उनका अभिनंदन हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे।

    जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने कहा,

    गांव-गांव तक विकास पहुँचाना और जनसेवा को मजबूती देना ही मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
    उन्होंने आगे कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना ही उनके कार्यकाल का मुख्य उद्देश्य है।

    निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का भी उद्घाटन

    इसी दिन गांडेय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विजय शंकर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का उद्घाटन भी विधायक कल्पना सोरेन ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर इस शिविर का शुभारंभ किया।शंकर नेत्रालय एवं ओल्ड जेवरियंस एलुमनाई ट्रस्ट के सहयोग से 9 दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी शिविर की शुरुआत की गई, जहां हज़ारों ज़रूरतमंदों को मिलेगा मुफ़्त जाँच और ऑपरेशन का लाभ

    विधायक ने कहा:

    गांडेय में पहली बार इस प्रकार का शिविर आयोजित किया गया है। इससे आम लोगों, विशेषकर गरीब और वंचित तबके को काफी लाभ मिलेगा।
    उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और ज्यादा से ज्यादा लोग इस चिकित्सा सुविधा से जुड़ें।

    इस अवसर पर डीडीसी स्मृति कुमारी, सिविल सर्जन एस.पी. मिश्रा, बैरिस्टर फरदीन अहमद, , पूर्व विधायक केदार हाजरा, झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ,सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • झारखंड: गिरिडीह को मिलेगा मेडिकल कॉलेज !

    रांची :  झारखंड सरकार के आगामी बजट की तैयारियां अब अपने अंतिम दौर में हैं। तीन मार्च को पेश होने वाले इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर रहेगा। रांची, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए बजट में विशेष राशि का प्रावधान किया जाना तय है।

    स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में नए मेडिकल कॉलेज और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस दिशा में बड़े फैसले ले चुके हैं और स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश दिए हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के विस्तार के लिए भी बजट में खास व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही इसके लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दे चुके हैं।

    सरकार का मानना है कि नए मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना से झारखंड के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार आएगा। अब देखना यह होगा कि बजट में इन योजनाओं के लिए कितना बड़ा प्रावधान किया जाता है।

     

  • झारखंड में लागू नहीं होंगे UCC, CAA और NRC- हेमंत सोरेन

    झारखंड दिवस के रूप में मना समारोह.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के प्रमुख एजेंडों को सीधे नकारते हुए साफ कर दिया है कि झारखंड में समान नागरिक संहिता (UCC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू नहीं किया जाएगा।  दुमका में आयोजित पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में पार्टी ने 50 सूत्री प्रस्ताव पारित करते हुए यह बड़ा ऐलान किया। झामुमो का स्थापना दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। पार्टी का पूरा कुनबा इस खास मौके पर दुमका में मौजूद रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पार्टी का झंडा फहराकर 46वें स्थापना दिवस समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

    झामुमो का केंद्र से दो-दो हाथ का मूड!

    झामुमो ने सिर्फ CAA-NRC-UCC पर ही नहीं, बल्कि कोयला रॉयल्टी मद के 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने साफ कर दिया कि इस रकम को लेकर सदन से सड़क तक संघर्ष जारी रहेगा और कानूनी मोर्चे पर भी केंद्र से लड़ाई लड़ी जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सत्ता में वापसी के बाद झामुमो अपने कोर एजेंडे पर कायम रहेगा। पार्टी ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने, संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT एक्ट) और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT एक्ट) को और मजबूती देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    झारखंड में होनी चाहिए PSU कंपनियों का मुख्यालय।

    झामुमो ने झारखंड में काम कर रही कंपनियों के मुख्यालय को राज्य में लाने की मांग को फिर से दोहराया। पार्टी का कहना है कि कोल इंडिया और दामोदर घाटी निगम (DVC) जैसी कंपनियां झारखंड से संसाधन निकालकर मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनका मुख्यालय यहां नहीं है। झामुमो का मानना है कि इन कंपनियों के मुख्यालय झारखंड में लाने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा। झामुमो ने अपने पारंपरिक गढ़ संताल परगना को बचाने और भाजपा की सेंधमारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया है।

    स्थापना दिवस समारोह झारखंड दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें हजारों की संख्या में पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस मौके  पर झारखंड सरकार के कई मंत्री, सांसद और विधायक उपस्थित रहे। इनमें मंत्री सुदिव्य सोनू, हफीजुल हसन, दुमका सांसद नलिन सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, विधायक कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन ,मथुरा महतो, स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, आलोक कुमार सोरेन, लुईस मरांडी और उदय शंकर सिंह जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं ।

     छह जिलों से उमड़ी भीड़, सुरक्षा रही चाक-चौबंद।
    इस मेगा इवेंट में संथाल परगना के सभी छह जिलों—दुमका, देवघर, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा से भारी संख्या में कार्यकर्ता और जनता शामिल हुई। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। दुमका जिला पुलिस बल के अलावा अन्य जिलों से भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। गांधी मैदान में करीब 400 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था , जिनमें कांस्टेबल से लेकर डीएसपी स्तर तक के अधिकारी शामिल थे।

    चार्टर प्लेन से पहुंचे मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चार्टर प्लेन से दुमका पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया और प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री सीधे अपने खिजुरिया स्थित आवास पहुंचे, जहां कुछ समय विश्राम करने के बाद वे गांधी मैदान पहुंचे और समारोह की शुरुआत की।

    भाजपा को बड़ा झटका, दिनेश चौधरी झामुमो में शामिल।

    झामुमो को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब भाजपा के ओबीसी मोर्चा के पूर्व जिला पदाधिकारी और अनगड़ा निवासी दिनेश कुमार चौधरी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

    झामुमो के इस ऐतिहासिक स्थापना दिवस ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि झारखंड की सियासत में भी एक मजबूत संदेश दिया कि पार्टी की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है!