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  • रांची में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का महाकुंभ, 17–18 जनवरी को गूंजेगा RanchiHacks’26

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : राजधानी रांची अब सिर्फ राजनीति और संस्कृति की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का नया हब बनने जा रही है। 17 और 18 जनवरी को रांची में होने जा रहा है RanchiHacks’26, जो तकनीकी प्रतिभाओं के लिए किसी महाकुंभ से कम नहीं है।

    यह 24 घंटे का ऑफलाइन हैकाथॉन राजधानी में नवाचार की नई लकीर खींचेगा। आयोजन का ग्रैंड फिनाले G. D. Birla Auditorium, Ranchi में होगा, जहाँ देशभर के युवा टेक्नोलॉजिस्ट अपनी प्रतिभा का दमखम दिखाएंगे।

    Google Developer Groups Ranchi द्वारा आयोजित इस हैकाथॉन को देश के हर कोने से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।
    500 से अधिक टीमों ने रजिस्ट्रेशन कराया,
    350 से ज्यादा इनोवेटिव प्रोजेक्ट सबमिट किए गए,
    और कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद टॉप 31 टीमों ने फाइनल राउंड में अपनी जगह बनाई है।

    RanchiHacks’26 की खास बात यह है कि इसे AI Impact Summit 2026 का आधिकारिक प्री-समिट इवेंट घोषित किया गया है। यह समिट भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है, जिससे इस आयोजन की राष्ट्रीय अहमियत और भी बढ़ जाती है।

    हैकाथॉन के दौरान प्रतिभागी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, IoT, रोबोटिक्स, Web3 और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में समाधान पेश करेंगे।

    प्रतिभागियों को Google, Infosys, HP, American Express और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों से जुड़े अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं देश-विदेश के विशेषज्ञों की जूरी फाइनल प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करेगी।

    कुल मिलाकर RanchiHacks’26 न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने जा रहा है — जहाँ से भविष्य की टेक्नोलॉजी की नई कहानी लिखी जाएगी।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर तैयारियां तेज

    मुख्य सचिव  ने दिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल पुख्ता करने के निर्देश.

    For The News Post4u.

    रांची : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के झारखंड के  दो दिवसीय दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने मंगलवार को देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। 31 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रपति झारखंड मे रहेंगी ।

    ADVT.

    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के झारखंड प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि देवघर में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ को बिना प्रभावित किए राष्ट्रपति के एयरपोर्ट से एम्स तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर लिया गया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू का पूर्व निर्धारित झारखंड दौरा 10-11 जून को अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया था। उस समय भी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के झारखंड दौरे को यादगार और गरिमामय” बनाने का निर्देश दिया था, जिसे इस बार भी दोहराया गया।

    कार्यक्रमों का ब्यौरा:

    • राष्ट्रपति देवघर में एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।
    • इसके बाद वे धनबाद स्थित IIT (ISM) के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी।
    • रांची में भी उनके कुछ निर्धारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की हर व्यवस्था के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की।

    • वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और आईजी अखिलेश कुमार झा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को पब्लिक एड्रेस सिस्टम और मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रमुख तैयारियों पर हुई चर्चा:

    • राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर मंच व्यवस्था, राष्ट्रीय गान, रेड कार्पेट और बुके, कारकेड और आउट राइडर्स,
    • फोटोग्राफरों के लिए खुले वाहन, बैगेज वैन, छाता, ध्वनि विस्तारक यंत्र,
    • प्रमुख अतिथियों की सूची, मंच से बोलने वालों की सूची,
    • देवघर एयरपोर्ट से एम्स तक की सुरक्षा व्यवस्था,
    • चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय, अग्निशमन व्यवस्था,
    • राष्ट्रपति के साथ आनेवाले अतिथियों के ठहराव और भोजन जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

    देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों ने भी अपने-अपने जिलों में राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास के लिए ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति के प्रत्येक कार्यक्रम प्रोटोकॉल के अनुरूप और शिष्टाचार पूर्ण वातावरण में संपन्न होंगे।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रपति का यह दौरा ना केवल सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी ऊंचाई दे सके।

  • रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

    हेमंत सरकार की बड़ी पहल.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025:
    झारखंड सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों – रांची, जमशेदपुर और धनबाद – में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा दिया है, जिससे झारखंड को आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था मिल सके।

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में रखा गया था एजेंडा.

    10 जुलाई को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद राज्य के  नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है।

    तीन शहरों में मेट्रो से होगी शुरुआत.

    फिलहाल परियोजना का दायरा रांची, जमशेदपुर और धनबाद तक सीमित है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दीर्घकालिक योजना है कि झारखंड के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि , “यह मेट्रो रेल परियोजना झारखंड की नई विकास गाथा की नींव रखेगी और राज्य को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ेगी।”

     पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना.

    JMM  प्रवक्ता  ने  पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि “झारखंड में पहले कभी ऐसी विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र के पास गंभीरता से प्रस्ताव नहीं भेजे जाते थे। देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की तरह झारखंड को भी अब आधारभूत संरचना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

    हेमंत सरकार ने पहली बार इस दिशा में ठोस पहल करते हुए मेट्रो जैसी परियोजना की विस्तृत योजना बनाई और केंद्र को सौंपा है।

    क्या है प्रस्ताव में खास?

    नगर विकास विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:

    1. मेट्रो परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (संभवता अध्ययन)
    2. सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
    3. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सहयोग

    इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार शीघ्र अनुमोदन दे ताकि इन शहरों में मेट्रो परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जा सके।

    झारखंड के लिए मेट्रो क्यों है जरूरी?

    रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा न केवल परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि यह शहरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को 21वीं सदी की बुनियादी संरचना से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

  • पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद के ठिकानों पर ईडी का शिकंजा कसता, कांग्रेस ने कहा- बदले की कार्रवाई

    Edited by: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    रांची/हजारीबाग/बड़कागांव:
    झारखंड की राजनीति एक बार फिर ईडी की दस्तक से गरमा गई है। शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और उनके करीबियों के रांची, हजारीबाग और बड़कागांव  सहित आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन से जुड़े एक पुराने मामले के सिलसिले में की जा रही है, जो कोल ट्रांसपोर्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर से जुड़ी एक विवादित कंपनी से संबंधित है।

    कई ठिकानों पर एक साथ दबिश.

    ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह रांची के किशोरगंज, बड़कागांव और हजारीबाग  में एक साथ कार्रवाई की। रांची में अम्बा प्रसाद के निजी सहायक संजीव कुमार के आवास पर जांच चल रही है। संजीव उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन ईडी की टीम ने जांच जारी रखी। दो वाहनों में पहुंचे अधिकारियों की टीम ने चार लोगों के साथ घर के भीतर तलाशी ली, जबकि छह सशस्त्र सुरक्षाकर्मी बाहर तैनात थे।

    बड़कागांव में पूर्व विधायक के भाई अंकित उर्फ सुमित, चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल, और कथित रूप से उनसे जुड़े बालू कारोबारियों के ठिकानों पर भी ईडी की कार्रवाई हुई। हजारीबाग में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। बड़कागांव में अम्बा प्रसाद के करीबी पंचम कुमार, मनोज दांगी और अन्य सहयोगियों के आवास भी निशाने पर रहे।

    पिछली कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज बने आधार.

    सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2024 में की गई छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम सुराग मिले थे। उस दौरान अम्बा प्रसाद, उनके पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, भाई अंकित राज  समेत कई सहयोगियों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी। उस छापेमारी में 35 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइसेज़, फर्जी बैंक टिकट, हाथ से लिखी रसीदें, और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। माना जा रहा है कि इस बार की कार्रवाई उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच के दायरे में 10 कंपनियां.

    ईडी सूत्रों के अनुसार, अम्बा प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े कम से कम 10 कंपनियां  जांच के दायरे में हैं। ये कंपनियां खनन, भूमि खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। ईडी की टीमें इन सभी संस्थाओं के वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं।

    कांग्रेस ने बताया राजनीति से प्रेरित कार्रवाई.

    ईडी की इस ताजा छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता किशोरनाथ शहदेव  ने इसे चुनावी साजिश करार देते हुए कहा कि अम्बा प्रसाद को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे बिहार चुनावों  में पार्टी की तरफ से प्रभारी (ऑब्जर्वर) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा की सरकार सीबीआई और ईडी को विपक्ष के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि ईडी द्वारा अब तक की गई सभी छापेमारियों में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी बार-बार कार्रवाई कर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है।

    राजनीतिक परिवार, पुराना प्रभाव.

    अम्बा प्रसाद झारखंड की बड़कागांव सीट से 2019 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक  चुनी गई थीं। उनके पिता योगेंद्र साव  और मां निर्मला देवी  भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इस परिवार की इलाके में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है, और अब उनके खिलाफ ईडी की बढ़ती कार्रवाई से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

    अम्बा प्रसाद और उनके परिवार पर प्रवर्तन निदेशालय की नजरें टिकी हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से ईडी ने अभी तक कोई प्रेस बयान नहीं दिया है, लेकिन लगातार हो रही छापेमारियों से संकेत साफ है कि जांच लंबी और गहन हो सकती है। कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रहा है .

  • डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

    परवेज़ आलम  for The News Post4U.

    झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

    जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

    सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
    हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

    और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

    झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

    साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

    जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

    अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
    यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

    कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

    इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

    • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
    • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
    • लालडूसंगा — मिजोरम से

    इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

    झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

    देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

    इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

    सरकारी सिस्टम की चुनौती.

    सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन डिजिटल अपराधियों के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

    फिर भी सवाल वही है…

    • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
    • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
    • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

    एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

    और जब अगली बार कोई कहे…

    मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
    तो मुस्कराकर कहिए—
    तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”

     

  • झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ की मदद

    HIV-एड्स फोरम का गठन, रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मंजूरी.

    By The News Post4u.

    रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और पुलिस पदक जैसे अनेक अहम विषय शामिल थे।

    हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना अनुदान.

    राज्य सरकार ने झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है। यह अनुदान धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों के संचालन के लिए दिया जाएगा।

    HIV-एड्स रोकथाम के लिए लेजिस्लेटिव फोरमका गठन.

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के निर्देशों पर राज्य सरकार ने झारखंड लेजिस्लेटिव फोरम ऑन एचआईवी-एड्स के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य HIV-एड्स के प्रति जनजागरूकता फैलाना, भेदभाव समाप्त करना और जिला स्तरीय तंत्र को मज़बूती देना है। इस फोरम के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री होंगे और स्पीकर द्वारा नामित पांच विधायक इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा विकास आयुक्त, विभागीय सचिव, परियोजना निदेशक जैसे अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।

    उच्च शिक्षा को बढ़ावा: दो नए कॉलेजों की मंजूरी.

    शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने दो बड़े निर्णय लिए हैं। खूंटी जिले में महिला कॉलेज की स्थापना के लिए 57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई, जबकि सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए 38.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

    फार्मेसी कॉलेजों के लिए नई नियुक्तियां.

    दुमका और पलामू में स्थित राजकीय फार्मेसी संस्थानों में 28-28 नए पदों के सृजन को कैबिनेट ने हरी झंडी दी है, जिससे इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और संचालन में सुधार होगा।

    पुलिस पदक की संख्या बढ़ी.

    झारखंड राज्यपाल पदक के तहत अब तक 11 पुलिस अधिकारियों-जवानों को सम्मानित किया जाता था, जिसे बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इसी प्रकार सराहनीय सेवा के लिए दी जाने वाली संख्या 31 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है। यह निर्णय राज्य के पुलिस बल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लिया गया है।

    JSSC को 31 करोड़ की स्वीकृति.

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के सफल आयोजन हेतु झारखंड अकस्मिता निधि से 31 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही यह भी तय किया गया कि यदि किसी स्नातक स्तरीय परीक्षा में 50 हजार से अधिक आवेदन आते हैं, तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों कराई जाएंगी, अन्यथा केवल एक स्तर की परीक्षा ली जाएगी।

    रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी.

    1. अरगोड़ा-रिंग रोड फोरलेन सड़क
      पथ निर्माण विभाग के एक प्रस्ताव के तहत रांची के अरगोड़ा से पुंदाग होते हुए रिंग रोड तक 6.17 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए 141 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसमें मुआवजा, पुनर्वास और पौधारोपण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
    2. साइकिल ट्रैक और सर्विस रोड निर्माण
      एक अन्य प्रमुख परियोजना के तहत विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक साइकिल ट्रैक, सर्विस रोड और फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना के लिए झारखंड राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को 301.12 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना पुराने विधानसभा भवन, हाईकोर्ट और विधानसभा सचिवालय को जोड़ते हुए नईसराय लिंक रोड तक फैली होगी।

    अन्य महत्वपूर्ण निर्णय.

    • राजकीय प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 को स्वीकृति मिली, जिससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
    • सिमडेगा-कुरडेग से छत्तीसगढ़ सीमा तक 63.2 किलोमीटर सड़क के सुधार कार्य के लिए 38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।

    इन निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने, सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। रांची की सड़क परियोजनाएं राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, वहीं HIV-एड्स जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की संजीदगी भी दिखाई देती है।

  • सीएम हेमंत ने सिरमटोली फ्लाईओवर का किया उद्घाटन , रांची को जाम से मिलेगी राहत

     – रैंप विवाद के कारण यह फ्लाईओवर रहा  सुर्खियों मे.   

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2.34 किलोमीटर लंबे सिरमटोली फ्लाईओवर का विधिवत उद्घाटन किया। चार लेन वाले इस आधुनिक फ्लाईओवर के चालू होते ही शहरवासियों को जाम की भीषण समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने इस फ्लाईओवर को आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव के नाम समर्पित करते हुए घोषणा की कि अब इसे कार्तिक उरांव पथ” के नाम से जाना जाएगा। उद्घाटन समारोह मेकॉन गोलचक्कर के निकट वन भवन परिसर में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया.

    क्या है इस फ्लाईओवर की खासियत ?

    • लंबाई: 2.34 किलोमीटर, डिज़ाइन: 132 मीटर लंबा एक्सट्रा-डोज्ड केबल-स्टे ब्रिज और 42 मीटर ऊंचे चार पायलन
    • तकनीकी विशेषताएं:
      • प्रीकास्ट पाइल कैप, प्रीकास्ट गर्डर का प्रयोग
      • माइक्रो पाइलिंग व बोरोपाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीक
      • रेलवे की सख्त मंजूरी और हाई कोर्ट केस के बीच सुरक्षित निर्माण
      • शून्य दुर्घटना रिकॉर्ड
    • यातायात समाधान:
      • राजेंद्र चौक और सुजाता चौक को जोड़ने से 40% ट्रैफिक डायवर्जन
      • पहले जहाँ सफर में आधे घंटे लगते थे, अब महज 5 मिनट में पूरा होगा सफर

    पर्यावरण और भावनात्मक संतुलन पर जोर.

    फ्लाईओवर उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस पर जनजागृति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “पर्यावरण संकट गंभीर होता जा रहा है, शहरों में स्थिति बेहद चिंताजनक है।” इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ जरूर बचाने की अपील भी की और कहा कि सरकार चाहे जितना कानून बनाए, असली परिवर्तन नागरिकों की जागरूकता से ही आएगा।

     रैंप विवाद और आदिवासी संगठनों का विरोध.

    इस परियोजना के रैंप का एक सिरा सरना धर्मस्थल के समीप होने के कारण बीते कई महीनों से विवाद में रहा। 4 जून को इसी को लेकर झारखंड बंद का आह्वान हुआ था। आदिवासी संगठनों का कहना था कि इससे धार्मिक स्थल की पवित्रता भंग होगी। सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए रैंप की ऊंचाई 124 फीट से घटाकर 84 फीट कर दी, और बैरिकेडिंग के लिए विशेष व्यवस्था की।

    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने मंच से दो टूक कहा, “किसी की भावना को ठेस पहुंचाना या किसी की पहचान की बलि देना हमारे एजेंडे में नहीं है। सरकार विकास और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने को प्रतिबद्ध है।”

    राजनीतिक और प्रशासनिक उपस्थिति.

    फ्लाईओवर उद्घाटन कार्यक्रम में राज्य के कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ,कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मंत्री संजय प्रसाद यादव,सहित अन्य प्रतिनिधि व अधिकारी शामिल थे।

    355.76 करोड़ की लागत से बनी शानदार उपलब्धि.

    करीब 355.76 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ यह फ्लाईओवर न सिर्फ रांची को यातायात की परेशानी से निजात दिलाएगा, बल्कि झारखंड में इंजीनियरिंग और निर्माण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

    यह फ्लाईओवर मुख्यमंत्री द्वारा 29 अगस्त 2022 को शिलान्यास किया गया था और तीन साल से कम समय में बनकर तैयार हो गया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में 2.24 किलोमीटर लंबे कांटाटोली फ्लाईओवर का भी उद्घाटन किया गया था।

    सिरमटोली फ्लाईओवर केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड की नई रफ्तार का प्रतीक बन चुका है। यह राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीक और सामाजिक संवेदनशीलता के संतुलन का एक सुंदर उदाहरण है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सफलता राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार दोहराई जा सकेगी या नहीं।

     

  • राहुल गांधी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट

    2018 के मानहानि का है मामला

    परवेज़ आलम.

    रांची/चाईबासा:  लोकसभा मे विपक्ष के नेता  और काँग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। झारखंड के चाईबासा कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर दर्ज मानहानि मामले में की गई है।

    चाईबासा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने राहुल गांधी को 26 जून 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वारंट को रद्द करने की मांग की है

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला 28 मार्च 2018 का है, जब कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा और उस समय के अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा नेता प्रताप कुमार ने जुलाई 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चाईबासा CJM कोर्ट में दायर किया था।

    कोर्ट में अनुपस्थिति बनी विवाद का कारण.

    मामले की सुनवाई के दौरान चाईबासा कोर्ट ने राहुल गांधी को कई बार समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन वे शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने पहले समन, फिर बेलबिल वारंट भेजा, लेकिन अनुपस्थिति जारी रहने पर आखिरकार 24 मई 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

    हाईकोर्ट में पहले से लंबित है एक याचिका.

    राहुल गांधी के वकीलों ने इस मामले में पहले ही झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है, जिसमें शारीरिक उपस्थिति से छूट की मांग की गई है। यह याचिका फिलहाल लंबित है। इसी बीच चाईबासा कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए जाने के बाद, अब उन्होंने एक और याचिका दायर कर इस वारंट को कानूनी रूप से निरस्त करने की अपील की है।

    ग्रीष्मकालीन अवकाश बना बाधा.

    राहुल गांधी की याचिका झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है, लेकिन फिलहाल अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश पर है। ऐसे में इस पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं है। यदि कोई विशेष पीठ गठित न की गई, तो यह मामला अवकाश के बाद ही सूचीबद्ध किया जा सकता है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित असर.

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस राज्य में विपक्ष को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी पर जारी यह वारंट न सिर्फ उनके खिलाफ कानूनी दबाव बढ़ाता है, बल्कि कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी करता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

    राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में राहत की उम्मीद की जा रही है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही अवकाश के कारण स्थगित है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, और क्या राहुल गांधी को 26 जून को चाईबासा कोर्ट में पेश होना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलती है।

  • सीमा पर तनाव के बीच में मॉक ड्रिल: युद्धकालीन हालात से निपटने की रणनीतिक तैयारी

    परवेज़ आलम.

    रांची : भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को देशभर के प्रमुख शहरों में मॉक ड्रिल (सुरक्षा अभ्यास) का आयोजन किया गया। झारखंड की राजधानी रांची,बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में में भी यह ड्रिल पूरे जोर-शोर से की गई, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों, प्रशासनिक अमले और राहत एजेंसियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।

    मॉक ड्रिल का संचालन: युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी.

    रांची के मेकॉन क्षेत्र में मुख्य मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जहां सायरन बजते ही सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। डोरंडा समेत आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही रोक दी गई, सड़कें बंद कर दी गईं और दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया। ड्रिल के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

    लाउडस्पीकर से दिशा-निर्देश, नागरिकों को जागरूक किया गया.

    प्रशासन ने पूरे अभ्यास के दौरान लाउडस्पीकर के माध्यम से मॉक ड्रिल में शामिल लोगों को दिशा-निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने पहले ही नागरिकों से अपील की थी कि सायरन बजने पर घबराएं नहीं, यह सिर्फ एक अभ्यास है।

    सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वय.

    ड्रिल में एनडीआरएफ ने मेकॉन भवन में आग लगने की स्थिति का अभ्यास किया, जहां फायर ब्रिगेड की मदद से आग बुझाने का प्रदर्शन हुआ और कर्मचारियों को सुरक्षित बसों से निकाला गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का मॉक अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की परीक्षा ली गई।

    बच्चों और आम नागरिकों को भी दिया गया प्रशिक्षण.

    सुरक्षा ड्रिल में स्कूलों के बच्चों को भी शामिल किया गया। उन्हें बताया गया कि सायरन बजते ही किस तरह अपनी सुरक्षा करनी है – जैसे बेंच-टेबल के नीचे छिपना, खिड़कियों से दूरी बनाना और घबराए बिना सतर्क रहना। कुछ स्कूलों में बच्चों ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के ज़रिए बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया।

    एनसीसी और एनएसएस की भूमिका.

    राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने भी इस अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने आम नागरिकों को राहत स्थल तक पहुंचाने और आपातकालीन स्थिति में आवश्यक सहयोग देने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    राज्य के 5 जिलों में चला व्यापक अभ्यास.

    रांची के अलावा झारखंड के बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में भी इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। कुल छह स्थलों पर एक साथ यह अभ्यास हुआ, जहां सायरन की आवाज के साथ यातायात रोका गया और लोगों को घरों की लाइटें बंद करने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

    ड्रिल का उद्देश्य: दहशत नहीं, तैयारी जरूरी.

    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आम जनता को युद्ध या आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियों में भयभीत होने से बचाना और उन्हें सटीक तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि सायरन की आवाज से लोगों को ऐसे हालात में शांत और संगठित रहने की आदत डालनी चाहिए।

    भविष्य में और क्षेत्रों में भी होगा आयोजन.

    प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल आगे भी समय-समय पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कराई जाएगी, ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में अफरा-तफरी से बचा जा सके और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


     

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?