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  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सरकारी आवास बनेगा स्मृति संग्रहालय

    गुरु जी की स्मृतियों को संजोने की ऐतिहासिक पहल.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विरासत को संरक्षित और नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मोरहाबादी स्थित गुरुजी का सरकारी आवास अब “गुरुजी स्मृति संग्रहालय” के रूप में विकसित किया जाएगा। यह फैसला मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा। डॉ. अंसारी ने कहा, “गुरुजी का आवास सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह झारखंड आंदोलन और राज्य की आत्मा का केंद्र है। यहां की हर वस्तु, हर दस्तावेज, हर स्मृति हमें उनके संघर्ष और बलिदान की याद दिलाती है। इसलिए इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी विचारधारा और जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सकें।”

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इसे झारखंड की अस्मिता को सहेजने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का योगदान अमिट है और उनकी स्मृतियां हमेशा अमर रहेंगी। यह संग्रहालय झारखंड की लड़ाई, उसकी सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक संघर्ष की गाथा को जीवित रखेगा।

    सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों मंत्रियों ने गुरुजी की जन्मभूमि जामताड़ा के चिरुडीह गांव में भी एक भव्य पार्क और विशाल प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। चिरुडीह वही पवित्र भूमि है, जहां से शिबू सोरेन ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई की शुरुआत की थी।

    राज्य सरकार का यह निर्णय न सिर्फ शिबू सोरेन के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि झारखंड की संघर्ष यात्रा को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने का भी संकल्प है।

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया

    शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की  गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।

    इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।

    • जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।

    • आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।

    • जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।

    • प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।

    सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष का बयान.

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।

    अनुपूरक बजट पेश.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।

    गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

    श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.

    सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में विसर्जित किया गया

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली परंपरा के अनुरूप सभी अनुष्ठान पूरा किया.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रामगढ़, झारखंड :  रविवार का दिन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए बेहद भावुक क्षणों का गवाह बना। मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के साथ रामगढ़ के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपने पिता तथा झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में संथाली परंपरा के अनुरूप विसर्जित किया।

    अस्थि विसर्जन का यह क्षण मुख्यमंत्री के लिए पीड़ा और श्रद्धा दोनों का संगम था। घाट पर उपस्थित लोग साफ देख रहे थे कि पिता की स्मृति से भरे इस मौके पर मुख्यमंत्री की आंखें नम थीं।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से अस्थि कलश लेकर पहुंचे। घाट पर परंपरागत संथाली पाहनों (पुजारियों) की मौजूदगी में मंत्रोच्चार और रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के छोटे भाई व विधायक बसंत सोरेन, परिवार की महिलाएं और अन्य रिश्तेदार भी उपस्थित रहे।

    विसर्जन के बाद हेमंत सोरेन ने मां छिन्नमस्तिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से अनुष्ठान सम्पन्न कराया। पूजा के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद गरीब और असहाय लोगों के बीच कपड़े व खाद्य सामग्री का वितरण किया। उन्होंने इस सेवा को अपने पिता के आदर्शों से प्रेरित सामाजिक उत्तरदायित्व का हिस्सा बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री पुनः नेमरा लौट गए।

    तीन लाख लोगों ने ग्रहण किया संस्कार भोज का प्रसाद.

    नेमरा में आयोजित संस्कार भोज में जनसैलाब उमड़ पड़ा था  अनुमानित तीन लाख लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर दिशोम गुरु को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भोज ने यह प्रमाणित किया कि शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि जनता के हृदय में बसे एक परिवार के सदस्य थे।

    कार्यक्रम में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेता व गणमान्य अतिथि उपस्थित हुए। इनमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, योगगुरु बाबा रामदेव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, बिहार के सांसद पप्पू यादव, विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो, राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक शामिल थे। झारखंड के वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारी तथा पड़ोसी राज्यों से आए लोग भी इस अवसर के साक्षी बने।

    4 अगस्त को बुझा एक युग का दीप.

    गौरतलब है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद हुआ था। 5 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। तब से लेकर अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गांव में रहकर पिता के श्राद्धकर्म और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन कर रहे हैं।

    झारखंड आंदोलन के अमर नायक.

    शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के आदिवासी जननायक और संथाल समाज के सांस्कृतिक प्रतीक थे। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि जनता ने उनके संघर्ष और समर्पण के कारण दी थी। उन्होंने जीवनभर आदिवासी समाज के अधिकार, जमीन-जंगल-जमीन की रक्षा और अलग राज्य की पहचान के लिए संघर्ष किया।

    रविवार को संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य में जीवित है।

  • अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद नेमरा पहुँचकर दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

    The News Post4u.

    रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।

    अखिलेश यादव का भावुक पल.
    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
    मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।

    चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
    इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
    श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता।
    आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
    इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है।
    राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।

    गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
    नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

  • झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा ने दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

     

    गिरिडीह: झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा, गिरिडीह ने पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष उमाचरण प्रसाद साहू ने की, जबकि संचालन धर्म प्रकाश ने संभाला। सभा में गिरिडीह जिला तैलिक साहू सभा के अध्यक्ष बालगोविंद साहू, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज गिरिडीह के अध्यक्ष राहुल बर्मन, रेडक्रॉस के चेयरमैन अरविंद कुमार , समाज के उपाध्यक्ष संजय कुमार साहू और हरगौरी साहू, झारखंड स्टेट बार एसोसिएशन के सदस्य परमेश्वर मंडल, महेंद्र मंडल, दशरथ प्रसाद और अन्य अधिवक्ता गण उपस्थित थे।

    वक्ताओं ने अपने संबोधन में गुरुजी के सामाजिक, राजनीतिक और आंदोलनकारी योगदान को विस्तार से याद किया। वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन हमेशा आदिवासी, वंचित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे और झारखंड के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

    सभा के दौरान 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

    इस अवसर पर सत्य प्रकाश साहा, प्रदीप कुमार साव, राहुल कुमार, सुबोध गुप्ता, सीताराम साहू, चंद्रकांत मंडल, चनो मंडल, प्रमोद अग्रवाल, रवि साव सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।

  • शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रामगढ़, झारखंड: झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’  शिबू सोरेन को उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। झमाझम बारिश और गम के माहौल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसी के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

    अंतिम यात्रा: पहाड़ों की गोद में उमड़ा जनसैलाब.

    नेमरा गांव, जो पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत और साधारण गांव है, मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ से भर गया। आम जनता से लेकर झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही, झामुमो कार्यकर्ता, राजनेता, नौकरशाह,पत्रकार और परिजन—हर कोई ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

    गांव की गलियों में नारे गूंजते रहे—“शिबू सोरेन अमर रहें”, “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी तेरा नाम रहेगा”।

    बारिश की फुहारों के बीच शाम 6:45 बजे उनका अग्नि संस्कार किया गया। लोग छातों के नीचे भींगते हुए अंतिम विदाई में शामिल होते रहे। मानो आसमान भी इस विदाई में रो रहा हो।

    “गुरुजी को अंतिम जोहार”, “विनम्र श्रद्धांजलि”—ऐसे शब्दों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स रांची से रामगढ़ तक पूरे रास्ते भर लोगों की आंखें नम करते रहे।

    विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई और फिर पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, और परिवार के अन्य सदस्य पार्थिव शरीर के साथ यात्रा में शामिल रहे।

    सादगी में श्रद्धा: संथाली परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार.

    नेमरा गांव पहुंचने के बाद शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार संथाली रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार किया गया। वहीं, उनका दाह संस्कार उसी बड़का नाला श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पूर्वजों की भी अंत्येष्टि होती रही है।

    मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी पुत्र हेमंत सोरेन ने निभाई। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गांव के हर कोने से नारे उठे—“शिबू सोरेन अमर रहें”। बारिश की बूंदें उस वक्त भी थमी नहीं थीं, लेकिन लोगों की श्रद्धा के आगे मौसम भी झुक गया।

    राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति.

    झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के निधन पर 6 अगस्त तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी दफ्तर बंद रखे गए।

    राजकीय सम्मान के तहत उनकी चिता के पास झंडा फहराया गया, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, और शोक ध्वनि के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

    इस दौरान कई राष्ट्रीय नेता नेमरा पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी,तेजस्वी यादव (राजद),संजय सिंह (आप), शताब्दी रॉय (टीएमसी), पप्पू यादव ( सांसद पूर्णिया )

    भारी बारिश के कारण कई नेता हेलिकॉप्टर से नहीं आ सके, और उन्होंने सड़क मार्ग से ही नेमरा गांव पहुंचकर ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम सलामी दी।

    प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था.

    गुरुजी की अंतिम यात्रा के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, तथा कई जिलों के डीसी और एसपी सहित उच्चस्तरीय प्रशासनिक अमला मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन सादगी और अनुशासन के साथ श्रद्धा का वातावरण भी बना रहा।

    आमजन का जुड़ाव.

    गांव की गलियों में, पहाड़ों के बीच, बारिश से भीगते छतरियों के नीचे खड़े आम लोग—हर आंख नम थी। हर दिल गमगीन। लोगों ने बताया—“गुरुजी सिर्फ नेता नहीं थे, वो आंदोलन थे, वो आवाज थे हमारे हक की”। दुकानें, बाजार, स्कूल—हर जगह मातम पसरा रहा। कुछ विद्यालयों में दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

    शिबू सोरेन का जाना, सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है। यह उस संघर्ष का अंत है, जिसने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया।

    उनकी अंतिम यात्रा सिर्फ एक शारीरिक विदाई नहीं थी, बल्कि झारखंड के इतिहास में लिखी गई एक अविस्मरणीय घटना थी। उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की मिसाल था।

    गुरुजी चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा, उनकी आवाज, उनकी पहचान—हमेशा जीवित रहेगी।
    “दिशोम गुरु अमर रहें!”

  • गंगाराम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन का हालचाल लेने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

    परवेज़ आलम.By The News Post4u.

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 81 वर्षीय सोरेन लंबे समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इस बार उनकी हालत कुछ ज्यादा गंभीर हो गई है। फिलहाल उन्हें अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ए.के. भल्ला की निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं कही जा सकती

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, जताई चिंता.

    जैसे ही शिबू सोरेन के अस्वस्थ होने की खबर सामने आई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद सर गंगाराम अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन से मुलाकात की और उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें देश की एक अमूल्य धरोहर बताया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहे।

    राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी जाना हाल.

    इससे पहले झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी दिल्ली पहुंचे और अस्पताल जाकर शिबू सोरेन से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की स्थिति पर बातचीत की और सोशल मीडिया पर ट्वीट कर लिखा कि दिशोम गुरु की हालत को लेकर वे चिंतित हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

    झारखंड की राजनीति के स्तंभ हैं शिबू सोरेन.

    शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। आदिवासी अधिकारों की लड़ाई से लेकर झारखंड को बिहार से अलग राज्य के रूप में स्थापित करने तक, उन्होंने हमेशा संघर्ष का रास्ता अपनाया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एक बार केंद्रीय कोयला मंत्री भी बने थे। आदिवासी समाज में उन्हें सम्मान से ‘दिशोम गुरु’ यानी ‘देश का गुरु’ कहा जाता है।

    परिवार और जनता की दुआएं.

    अस्पताल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन लगातार शिबू सोरेन की देखरेख कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील की है कि वे उनके पिता के लिए दुआ करें। सोशल मीडिया से लेकर गांव-शहरों तक, लोग दिशोम गुरु की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।

    उम्मीद की जा रही है कि झारखंड के इस पुरोधा नेता की तबीयत जल्द सुधरे और वे एक बार फिर स्वस्थ होकर अपने राज्यवासियों के बीच लौटें।

  • शिबू सोरेन की तबीयत में सुधार, गंगाराम अस्पताल में चल रहा है इलाज – सीएम और राज्यपाल ने अस्पताल पहुँचकर लिया हाल

    नई दिल्ली/रांची: By The News Post4u
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है। वर्तमान में वे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। बुधवार सुबह उनकी तबीयत अचानक कुछ ज्यादा खराब हो गई थी, जिससे पार्टी में चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि गुरुजी (शिबू सोरेन) की तबीयत में अब सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि वह खुद भी आज दिल्ली रवाना हो रहे हैं, ताकि गुरुजी से मिलकर उनका हालचाल जान सकें।

    बताया गया कि शिबू सोरेन नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल में उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया गया।

    इधर, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी बुधवार को सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे और शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से बात की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी दिल्ली पहुंचे थे और अस्पताल जाकर गुरुजी का हाल जाना। मुख्यमंत्री की पत्नी और शिबू सोरेन की बहू कल्पा सोरेन पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं और लगातार उनके साथ हैं।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं में भी गुरुजी की तबीयत को लेकर चिंता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल किसी गंभीर खतरे से इनकार किया है।

  • दिल्ली रवाना हुए सीएम हेमंत सोरेन, गंगा राम अस्पताल में भर्ती पिता शिबू सोरेन से मिलेंगे

    By The News Poat4

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके दिल्ली दौरे की वजह उनके पिता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता, राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की तबीयत है। फिलहाल शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन परिजन और पार्टी की ओर से अभी तक स्वास्थ्य को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता का हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले दो दिन पहले ही उनकी पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन भी दिल्ली पहुंची थीं। लगातार दिल्ली से हो रही हलचलों के बीच यह साफ है कि सोरेन परिवार शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर सजग है, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनकी तबीयत कितनी गंभीर है।

    सूत्रों की मानें तो शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली लाया गया था। उम्रजनित बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि, अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय या पार्टी की ओर से कोई अधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।

  • हेमंत सोरेन बने झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष, शिबू सोरेन ने सौंपी विरासत

    परवेज़ आलम.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। 2025 में हुए पार्टी के 13वें महाधिवेशन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सर्वसम्मति से झामुमो का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह निर्णय पार्टी के लिए एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, जहां 38 वर्षों तक अध्यक्ष रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने पुत्र को पार्टी की बागडोर सौंपी।

    महाधिवेशन का आयोजन रांची के खेलगांव में हुआ, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और प्रतिनिधि मौजूद थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता नलिन सोरेन ने शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक के रूप में प्रस्तावित किया, जिसका समर्थन मथुरा महतो ने किया। इसके बाद शिबू सोरेन ने मंच से हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष घोषित किया। घोषणा के तुरंत बाद, मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियों और नारों से नए अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।

    पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की घोषणा. 

    महाधिवेशन में झामुमो की नई केंद्रीय समिति की भी घोषणा की गई, जिसमें कुल 284 सदस्य शामिल किए गए। जिलावार रूप से साहिबगंज, दुमका और रांची सहित विभिन्न जिलों से सदस्यों को चुना गया। प्रमुख नामों में खुद हेमंत सोरेन, पंकज मिश्रा, शिबू सोरेन, नलिन सोरेन, बसंत सोरेन, मधु मंसूरी और महुआ माजी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

    हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा. 

    हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्ष, धैर्य और रणनीतिक दूरदर्शिता से भरा रहा है। 2003 में छात्र मोर्चा से शुरुआत करने वाले हेमंत पहली बार 2009 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष दुमका से विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज की। 2010 में वे उपमुख्यमंत्री बने और 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने पार्टी को शानदार सफलता दिलाई, जिसके कारण वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री बने।

    हालांकि उनका सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2024 में उन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया, जिससे उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वे फिर से चुनावी मैदान में उतरे और झामुमो के नेतृत्व में INDIA गठबंधन को रिकॉर्ड 56 सीटें दिलाकर सत्ता में वापसी की।

    कल्पना सोरेन की भूमिका. 

    इस कठिन दौर में हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब हेमंत जेल में थे, तब कल्पना ने पार्टी के लिए स्टार प्रचारक के रूप में प्रचार किया। उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं को संगठित किया, बल्कि महिला मतदाताओं में भी झामुमो के लिए समर्थन जुटाया। उनके समर्पण और संगठन क्षमता ने हेमंत को जेल से बाहर आने के बाद एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने में मदद की।

    झामुमो का भविष्य: राष्ट्रीय विस्तार की योजना. 

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत सोरेन ने पार्टी के विस्तार की योजनाओं की घोषणा की। उनका लक्ष्य झारखंड के बाहर, विशेषकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में झामुमो को मजबूत करना है। उनका मानना है कि झामुमो सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जिसे राष्ट्रीय मंच पर ले जाने की जिम्मेदारी अब उनकी है।

    नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव. 

    शिबू सोरेन ने 1972 में झामुमो की स्थापना की थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और झारखंड राज्य की मांग को लेकर ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। अब यह विरासत हेमंत सोरेन के हाथों में है, जो इसे आधुनिक दौर की राजनीति में नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    हेमंत सोरेन का नेतृत्व केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि वैचारिक रूप से भी पार्टी को नई दिशा देगा। उन्होंने अपने पहले दो कार्यकालों में जनहितकारी योजनाएं लागू की, जैसे “अबुआ आवास योजना”, महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और आरक्षण नीति में बदलाव। इन पहलों ने उन्हें जनता के बीच एक जननेता के रूप में स्थापित किया।

    हेमंत सोरेन का केंद्रीय अध्यक्ष बनना न केवल झामुमो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि झारखंड की राजनीति में स्थिरता और निरंतरता का संकेत भी है। शिबू सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हेमंत एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—पार्टी की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर झामुमो को मजबूती प्रदान करना।