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रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।
अखिलेश यादव का भावुक पल.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।
चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता।
आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है।
राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।
गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।







