Tag: Shibu Soren Tribute

  • शिबू सोरेन का दशकर्म संस्कार भोज, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गज हुए शामिल

    दशकर्म संस्कार लाखों की भीड़.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रामगढ़/नेमरा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झामुमो के संस्थापक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के दशकर्म संस्कार भोज में शनिवार को भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुरुजी की स्मृति में आयोजित इस भव्य आयोजन में आम जनता से लेकर देश के कई दिग्गज नेताओं और संत-विद्वानों ने शिरकत की।

    दिग्गज नेताओं की मौजूदगी और श्रद्धांजलि.

    • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशेष रूप से नेमरा पहुंचे। उन्होंने गुरुजी को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ, सांसद पप्पू यादव, योग गुरु बाबा रामदेव और पूर्व राज्यसभा सांसद आर.के. आनंद भी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    भोजन और पंडाल की व्यवस्था.

    भोज के लिए  तीन विशाल पंडाल बनाए गए हैं। एक पंडाल में एक बार में 2500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, यानी करीब 8000 लोग एक साथ भोजन कर सकते हैं। भोजन में दाल, चावल, पूड़ी, आलू-परवल की सब्जी, मिक्स वेज, मछली फ्राई, मटन, दही, पापड़, सलाद, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, बुंदिया जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं। विशेष रूप से गुरुजी की पसंदीदा पकौड़ी भी भोज का हिस्सा है। अनुमान है कि करीब तीन लाख लोगों के भोजन का इंतजाम किया गया है। मिठाई में  रसगुल्ला और गुलाब जामुन तैयार किए गए हैं।

    जनसैलाब और यातायात व्यवस्था.

    शनिवार दोपहर 2 बजे तक नेमरा में 10 हजार से अधिक वाहनों से लोग पहुंचे, जिसके चलते दुधमटिया से नेमरा तक लंबा जाम लग गया। भीड़ प्रबंधन के लिए एक ओर से प्रवेश और दूसरी ओर से निकासी का मार्ग बनाया गया है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑटो और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।

    सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व.

    आयोजन को देखते हुए 5000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। वर्दीधारी पुलिस से लेकर सादे लिबास में खुफिया अधिकारी तक हर जगह मौजूद हैं। विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाए गए हैं।

    श्रद्धांजलि और स्मृति दीर्घा.

    भोज के साथ-साथ नेमरा में एक विशेष प्रदर्शनी और स्मृति दीर्घा भी लगाई गई है। इसमें शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन, आदिवासी समाज के लिए उनके संघर्ष और जनसेवा को दर्शाने वाली दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं। आगंतुक यहां गुरुजी के जीवन संघर्ष को करीब से समझ पा रहे हैं।

         दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त को नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में  हुआ था। 5 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में हुआ था, जहां      मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता को मुखाग्नि दी। तब से हेमंत सोरेन परिवार के साथ  यहीं ठहरे हुए हैं और लगातार श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की देखरेख कर रहे हैं। दिशोम गुरु  सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि एक युग थे। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण की मिसाल है। वे झारखंड की आत्मा और पहचान के प्रतीक बनकर हमेशा याद किए जाएंगे।

  • शिबू सोरेन के संस्कार भोज की तैयारियां पूरी, देशभर से लाखों लोगों और दिग्गज नेताओं की होगी मौजूदगी

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रामगढ़/नेमरा: झारखंड की राजनीति के आधारस्तंभ, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में आज आयोजित होने वाले संस्कार भोज की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गुरुजी की स्मृति में होने वाले इस आयोजन को ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसमें देशभर से चार से पाँच लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है।बाबा रामदेव, सांसद पप्पू यादव श्राद्ध भोज में शामिल होने उनके नेमरा गांव पहुंच चुके हैं।

    विशाल स्तर की तैयारियां.

    • आयोजन स्थल तक आसान पहुँच के लिए गोला चौक से नेमरा तक 25 किलोमीटर लंबी नई सड़क का निर्माण कराया गया है।
    • इस मार्ग के दोनों ओर गुरुजी के बड़े-बड़े कटआउट और पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे पूरा इलाका श्रद्धा और सम्मान के माहौल से भर गया है।
    • सड़क किनारे 4000 स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और बिजली बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए 200 से अधिक जनरेटर लगाए गए हैं।
    • कार्यक्रम स्थल के लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघर तैयार किए गए हैं। हर पंडाल में हजारों लोग एक साथ बैठकर भोजन कर सकेंगे।

    भोजन और व्यंजन व्यवस्था.

    श्राद्ध भोज को लेकर भोजन की भी भव्य तैयारी की गई है।

    • 300 से अधिक चूल्हों पर 12 से अधिक प्रकार के व्यंजन पकाए जाएंगे।
    • पंडालों को शिबू सोरेन की तस्वीरों से सजाया गया है, ताकि लोग भोजन के साथ-साथ गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
    • प्रत्येक पंडाल में एसी और कूलर की व्यवस्था है ताकि गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिले।
    • विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा।

    वीआईपी और सुरक्षा व्यवस्था.

    इस बड़े आयोजन में कई राष्ट्रीय नेता, केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    • चार हेलीपैड बनाए गए हैं, जिनमें से तीन गुरुजी के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर है।
    • विशेष अतिथियों और वीआईपी मेहमानों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था की गई है।
    • आम श्रद्धालुओं के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडालों तक पहुंचाएंगे।
    • शिबू सोरेन के आवास के 300 मीटर के दायरे को प्रशासन ने बैरिकेड कर दिया है। यहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

    सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व.

    नेमरा को आयोजन के दौरान छावनी में तब्दील किया जाएगा।

    • सुरक्षा की जिम्मेदारी 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और
    • 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक संभालेंगे।
    • पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी किए हैं।

    कौन होंगे विशेष अतिथि?

    संस्कार भोज में कई बड़े नेताओं की उपस्थिति लगभग तय है।

    • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
    • योगगुरु बाबा रामदेव
    • तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी
    • वरिष्ठ नेता आर.के. आनंद
    • रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ
    • उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय कुमार गोंड
    • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
    • पश्चिम बंगाल और पंजाब के मुख्यमंत्री अथवा उनके प्रतिनिधि

    इसके अलावा देशभर से तमाम दिग्गज नेताओं, मंत्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

  • अगले दस सालों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा बेहद मजबूत होगी –पीएम मोदी

    रांची में परंपरा टूटी—राज्यपाल ने किया ध्वजारोहण.

    गिरिडीह में भी जोश और गर्व के साथ उत्सव. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

     परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    गिरिडीह / रांची / नई दिल्ली – 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में देशभक्ति का माहौल गूंज उठा। दिल्ली के लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए न केवल स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद किया, बल्कि देश के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती की ओर भी ध्यान आकर्षित किया—घुसपैठ और इसके कारण बदलती डेमोग्राफी। इस मौके पर उन्होंने ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन‘ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने करीब 103 मिनट के लंबे भाषण में कई ऐलान किए. उन्होंने इस संबोधन में सुदर्शन चक्र को लॉन्च करने की बात कही. पीएम मोदी ने कहा कि यह देश का महत्वाकांक्षी सुदर्शन चक्र मिशन है, जिसका उद्देश्य अगले दस सालों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. उन्होंने आत्मनिर्भरता पर भी काफी जोर दिया.

    घुसपैठ और डेमोग्राफी बदलाव पर पीएम मोदी का संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा—

    “मैं आज देशवासियों को एक गंभीर साजिश से आगाह करना चाहता हूं। सुनियोजित तरीके से देश की डेमोग्राफी बदली जा रही है। ये घुसपैठिए हमारे नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं, हमारी बहन-बेटियों को निशाना बना रहे हैं, और भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित कर उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। यह देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।”

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह का डेमोग्राफिक बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और सामाजिक तनाव को जन्म देता है।
    प्रधानमंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह स्वतंत्र भारत के लिए किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    “हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से यह आजादी हासिल की है। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने देश को घुसपैठियों के हवाले न होने दें।”

    इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ तय समय सीमा में इस संकट से निपटने के लिए रणनीतिक और सख्त कदम उठाएगा।

    नक्सलवाद पर प्रहार: 125 से घटकर 20 जिले.

    प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा—

    “एक समय था जब 125 जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़ें जमा चुका था, खासकर हमारे आदिवासी क्षेत्रों में। आज वह संख्या घटकर केवल 20 जिलों तक रह गई है। हमने उन जनजातीय समाजों को माओवाद के चंगुल से निकालकर विकास की राह पर अग्रसर किया है।”

    उन्होंने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि जो इलाका कभी बारूद और गोलियों की आवाज से गूंजता था, आज वहां के युवा खेलों में हिस्सा लेकर ओलंपिक के सपने देख रहे हैं।
    रेड कॉरिडोर से ग्रीन कॉरिडोर बनने तक की इस यात्रा को उन्होंने विकास, संविधान और कानून की जीत बताया।

    रांची में परंपरा टूटी—राज्यपाल ने किया ध्वजारोहण.

    राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 79वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का ऐतिहासिक पल देखने को मिला। इस बार यह सम्मान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को मिला।
    आमतौर पर यहां ध्वजारोहण मुख्यमंत्री करते आए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म में व्यस्त होने के कारण शामिल नहीं हो सके।

    ध्वजारोहण के तुरंत बाद राष्ट्रगान की धुन से पूरा मैदान देशभक्ति के रंग में रंग गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में शहीदों को नमन किया और शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    गिरिडीह में भी जोश और गर्व के साथ तिरंगे का उत्सव.

    गिरिडीह के ऐतिहासिक झंडा मैदान में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड का निरीक्षण किया।
    इस मौके पर डीसी रमनिवास यादव, एसपी डॉ. बिमल कुमार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

    अपने संबोधन में मंत्री ने कहा—“यह दिन केवल गर्व का क्षण नहीं, बल्कि उन ज्ञात और अज्ञात शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से हमें यह स्वतंत्रता दिलाई। उनका बलिदान हमें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

    उन्होंने जिले और राज्य में चल रही विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए सभी को देश की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए कार्य करने की शपथ दिलाई। साथ ही शिबू सोरेन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

     

  • शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी

    वीआईपी के लिए बने चार हेलीपैड, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

    परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रामगढ़, नेमरा :  झारखंड की राजनीति के पुरोधा और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु  शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज की तैयारियां इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में करीब चार से पांच लाख लोग शामिल होंगे, जिसके लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघरों की व्यवस्था की गई है।

    वीआईपी के लिए विशेष इंतज़ाम.

    देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और विशिष्ट मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। वीआईपी आवागमन को ध्यान में रखते हुए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं — जिनमें से तीन शिबू सोरेन के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर बनाया गया है। 16 अगस्त को होने वाले संस्कार भोज के दिन, विशेष अतिथियों के लिए अलग पार्किंग की सुविधा भी होगी।

    स्थानीय आमंत्रण झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटियों के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शिबू सोरेन के पैतृक आवास के 300 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

    ग्रामीणों और मेहमानों के लिए व्यवस्था.

    श्राद्ध भोज के लिए तैयार पांच पंडालों में बैठकर भोजन करने की सुविधा होगी। सभी पंडालों के पास ही बड़े-बड़े रसोई घर बनाए गए हैं। विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा। कार्यक्रम स्थल तक केवल वीआईपी वाहन ही पहुंचेंगे; आम लोगों के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडाल तक लाएंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम.

    कार्यक्रम के दौरान नेमरा को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी कर दिए हैं।

    गांव में आम आदमी की तरह सीएम सोरेन.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे पिता के श्राद्ध कर्म में एक आम ग्रामीण की तरह हिस्सा ले रहे हैं। संथाल समाज और गांव के लोगों के साथ बैठकों में वे हर विधि-विधान की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, साथ ही भोज के मेन्यू से लेकर मेहमानों की सेवा तक पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।

    पिता की विरासत को जीते हुए हेमंत सोरेन गांव की गलियों और खेत-खलिहानों में घूमते हैं, किसानों से बात करते हैं और जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा पर चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा और अधिकारों की रक्षा का संकल्प है — एक सीख जो उन्हें सीधे पिता से मिली है।

    जल, जंगल और ज़मीन: पहचान और संकल्प

    सीएम ने स्पष्ट कहा कि जल, जंगल और ज़मीन झारखंड की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वे मानते हैं कि यह केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा, समृद्ध झारखंड देने का वादा है।

    विरासत का विस्तार.

    गांव की मिट्टी, उसकी खुशबू और हरियाली की ठंडक में हेमंत सोरेन आज भी अपने पिता की परछाईं की तरह दिखते हैं। जनसेवा, सादगी और संघर्ष की वही परंपरा, जिसे दिशोम गुरु ने दशकों तक निभाया, अब मुख्यमंत्री अपने कामों के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं।

  • गिरिडीह में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दी गई श्रद्धांजलि

    चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के कार्यालय में शोक सभा का हुआ आयोजन.

    The News Post4u.

    गिरिडीह : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक “दिशोम गुरु” शिबू सोरेन के निधन के बाद राज्यभर में शोक की लहर है। उनकी स्मृति में गिरिडीह के बरगंडा स्थित चैंबर ऑफ कॉमर्स कार्यालय में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जहां अलग-अलग व्यापारिक और पेशेवर संगठनों ने मिलकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

     संयुक्त रूप से हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम.

    इस शोकसभा का आयोजन चैंबर ऑफ कॉमर्स, वस्त्र व्यवसायी संघ, माईका एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन और सीए एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में सभी संगठनों ने एक सुर में कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आंदोलन की मिसाल थे। उन्होंने अपने जीवन की प्रत्येक सांस को झारखंड के हक, हकूक और अस्मिता के लिए समर्पित कर दिया।

    चित्र पर पुष्पांजलि, याद किए गए योगदान.

    कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद सभा में वक्ताओं ने झारखंड राज्य के गठन में शिबू सोरेन के ऐतिहासिक योगदान, आदिवासियों, पिछड़ों, शोषितों और वंचितों के लिए उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा “उन्होंने सिर्फ नारे नहीं दिए, बल्कि आंदोलन खड़ा किया। शोषितों की आवाज बने और झारखंडियों के अधिकारों के लिए पूरी जिंदगी लड़ते रहे। उन्हें यूं ही नहीं दिशोम गुरु कहा गया।”

    दिशोम गुरु का जाना – एक अपूरणीय क्षति.

    सभा में उपस्थित सभी लोगों ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि शिबू सोरेन का निधन केवल झारखंड नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके विचार, उनका साहस और उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे। “आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब यह खालीपन हर उस व्यक्ति को महसूस हो रहा है जो न्याय, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई से जुड़ा रहा है।”

    इस अवसर पर गिरिडीह के व्यापार और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें शामिल रहे. माइका स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अशोक पांड्या, राजेंद्र बगेड़िया, संजय भूदोलिया, अरविंद राजगढ़िया, लख्खी गोरीसरिया, राजेंद्र भारतीया,चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव प्रमोद कुमार, सीए एसोसिएशन के विकाश खेतान, सुनील मोदी, दिनेश खेतान, संजय जैन, अंकित बगेड़िया, श्रवण केडिया, विकास बगेड़िया, वस्त्र व्यवसायी संघ के राजेश सुराना, नीलकमल भारतीया व दीपक मोदी।  सभी ने  शिबू सोरेन के विचारों को जीवित रखने और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।