अगले दस सालों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा बेहद मजबूत होगी –पीएम मोदी

रांची में परंपरा टूटी—राज्यपाल ने किया ध्वजारोहण.

गिरिडीह में भी जोश और गर्व के साथ उत्सव. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

 परवेज़ आलम.

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गिरिडीह / रांची / नई दिल्ली – 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में देशभक्ति का माहौल गूंज उठा। दिल्ली के लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए न केवल स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद किया, बल्कि देश के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती की ओर भी ध्यान आकर्षित किया—घुसपैठ और इसके कारण बदलती डेमोग्राफी। इस मौके पर उन्होंने हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने करीब 103 मिनट के लंबे भाषण में कई ऐलान किए. उन्होंने इस संबोधन में सुदर्शन चक्र को लॉन्च करने की बात कही. पीएम मोदी ने कहा कि यह देश का महत्वाकांक्षी सुदर्शन चक्र मिशन है, जिसका उद्देश्य अगले दस सालों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. उन्होंने आत्मनिर्भरता पर भी काफी जोर दिया.

घुसपैठ और डेमोग्राफी बदलाव पर पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा—

“मैं आज देशवासियों को एक गंभीर साजिश से आगाह करना चाहता हूं। सुनियोजित तरीके से देश की डेमोग्राफी बदली जा रही है। ये घुसपैठिए हमारे नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं, हमारी बहन-बेटियों को निशाना बना रहे हैं, और भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित कर उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। यह देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।”

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह का डेमोग्राफिक बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और सामाजिक तनाव को जन्म देता है।
प्रधानमंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह स्वतंत्र भारत के लिए किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

“हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से यह आजादी हासिल की है। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने देश को घुसपैठियों के हवाले न होने दें।”

इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ तय समय सीमा में इस संकट से निपटने के लिए रणनीतिक और सख्त कदम उठाएगा।

नक्सलवाद पर प्रहार: 125 से घटकर 20 जिले.

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा—

“एक समय था जब 125 जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़ें जमा चुका था, खासकर हमारे आदिवासी क्षेत्रों में। आज वह संख्या घटकर केवल 20 जिलों तक रह गई है। हमने उन जनजातीय समाजों को माओवाद के चंगुल से निकालकर विकास की राह पर अग्रसर किया है।”

उन्होंने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि जो इलाका कभी बारूद और गोलियों की आवाज से गूंजता था, आज वहां के युवा खेलों में हिस्सा लेकर ओलंपिक के सपने देख रहे हैं।
रेड कॉरिडोर से ग्रीन कॉरिडोर बनने तक की इस यात्रा को उन्होंने विकास, संविधान और कानून की जीत बताया।

रांची में परंपरा टूटी—राज्यपाल ने किया ध्वजारोहण.

राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 79वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का ऐतिहासिक पल देखने को मिला। इस बार यह सम्मान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को मिला।
आमतौर पर यहां ध्वजारोहण मुख्यमंत्री करते आए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म में व्यस्त होने के कारण शामिल नहीं हो सके।

ध्वजारोहण के तुरंत बाद राष्ट्रगान की धुन से पूरा मैदान देशभक्ति के रंग में रंग गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में शहीदों को नमन किया और शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

गिरिडीह में भी जोश और गर्व के साथ तिरंगे का उत्सव.

गिरिडीह के ऐतिहासिक झंडा मैदान में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड का निरीक्षण किया।
इस मौके पर डीसी रमनिवास यादव, एसपी डॉ. बिमल कुमार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा—“यह दिन केवल गर्व का क्षण नहीं, बल्कि उन ज्ञात और अज्ञात शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से हमें यह स्वतंत्रता दिलाई। उनका बलिदान हमें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

उन्होंने जिले और राज्य में चल रही विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए सभी को देश की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए कार्य करने की शपथ दिलाई। साथ ही शिबू सोरेन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

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