Category: Dhanbad

  • प्रसिद्ध यूट्यूबर मनोज डे की कार ने ऑटो को मारी टक्कर, ऑटो चालक की स्थिति गंभीर

    प्रसिद्ध यूट्यूबर मनोज डे की कार ने ऑटो को मारी टक्कर, ऑटो चालक की स्थिति गंभीर

    चर्चित यूट्यूबर मनोज डे की फॉर्च्यूनर कार का एक सड़क हादसा हो गया है। यह घटना तिसरा थाना क्षेत्र के जयरामपुर मोड़ के पास हुई, जहां उनकी कार ने एक ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में ऑटो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के समय मनोज डे स्वयं कार में मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि कोई अन्य व्यक्ति उनकी गाड़ी चला रहा था।

    हादसे की तस्वीरों से साफ है कि मनोज डे की कार को भी काफी नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि मनोज डे एक लोकप्रिय यूट्यूबर हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर लाखों फॉलोअर्स हैं। हाल ही में, योग गुरु रामदेव बाबा ने उन्हें अपने आश्रम में बुलाकर सम्मानित भी किया था।

  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।

  • देश-विदेश से जुटे हजारों किन्नर,खास मन्नत से प्रेरित है आयोजन

    देश-विदेश से जुटे हजारों किन्नर,खास मन्नत से प्रेरित है आयोजन

    धनबाद से खास रिपोर्ट……..

    धनबाद में अखिल भारतीय किन्नर समाज का महाधिवेशन पूरे वैभव और उल्लास के साथ चल रहा है। इस महाधिवेशन के दूसरे दिन एक अनोखी और परंपरागत रस्म निभाई गई—खिचड़ी तौलने की। पीले वस्त्रों में सजी-धजी किन्नरों की टोली ने पांच प्रकार के अनाज से खिचड़ी तौलकर रेशमा मां को समर्पित किया। रस्म के दौरान खुशी के इजहार में रुपयों की बौछार भी की गई, जिसने माहौल को और भी जीवंत कर दिया।

    शुभ शुरुआत और भव्य स्वागत।
    कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष छमछम देवी के आगमन पर भव्य स्वागत के साथ हुआ। विशेष रूप से सजाए गए मंडप में किन्नरों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया। किन्नरों के लिए यह रस्म शादी-ब्याह के उत्सव जितनी पवित्र और शुभ मानी जाती है।

    देश-विदेश से जुटे हजारों किन्नर
    झारखंड में पहली बार हो रहे इस अधिवेशन में देश-विदेश से करीब 5000 किन्नर धनबाद पहुंचे हैं। सिलीगुड़ी से आई अलाविया नायक ने कहा, “यह सम्मेलन हमारे समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।” गोरखपुर की प्रिया, नेपाल की टीना राय, बोकारो की बबीता नायक सहित कई राज्यों और देशों से आई किन्नर समाज की प्रमुख हस्तियां इस कार्यक्रम का हिस्सा बनीं।

    मटकुरिया से शक्ति मंदिर तक शोभायात्रा।
    अधिवेशन के उत्साह को और भी बढ़ाने के लिए 7 जनवरी को मटकुरिया से शक्ति मंदिर तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान किन्नर समाज माता रानी के दरबार में 21 किलो का घंटा चढ़ाएगा और यजमानों के परिवारों की खुशहाली के लिए प्रार्थना करेगा।

    खास मन्नत से प्रेरित आयोजन।
    कोरोना महामारी के कठिन दौर में किन्नर समाज ने मन्नत मांगी थी कि यदि देश इस त्रासदी से उबरता है, तो वे भव्य आयोजन करेंगे। यह अधिवेशन उसी मन्नत को पूरा करने का प्रतीक है। पूजा-पाठ और विशेष चर्चा के साथ इस आयोजन का उद्देश्य किन्नर समाज के यजमानों और उनके परिवारों को आशीर्वाद देना है।

    धनबाद की मेहमाननवाजी का जश्न।
    विशाल पंडाल और भव्य सजावट ने इस आयोजन को खास बना दिया है। धनबाद शहर और यहां के लोगों की तारीफ करते हुए किन्नरों ने कहा कि इस शहर ने उन्हें अपनाया है। कार्यक्रम स्थल पर ठहरने और खाने-पीने की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे हर प्रतिभागी को घर जैसा महसूस हो।

    खुशियों का उत्सव, संस्कृति का सम्मान।
    धनबाद में पहली बार हो रहे इस विशाल अधिवेशन ने किन्नर समाज की परंपराओं और संस्कृति को एक नया आयाम दिया है। यह आयोजन केवल रस्मों का उत्सव नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, समर्पण और सहिष्णुता का संदेश भी है।