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    आज़रबैजान से प्रत्यर्पण के बाद कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह भारत लाया गया

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रांची एयरपोर्ट शनिवार को पुलिस के लिए ऐतिहासिक दिन का गवाह बना। कुख्यात गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को आज़रबैजान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया। झारखंड एटीएस (Anti-Terrorist Squad) के एसपी ऋषभ झा के नेतृत्व में एक विशेष टीम मयंक को लेकर रांची पहुंची। एयरपोर्ट से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बख़्तरबंद गाड़ी से सीधे रामगढ़ ले जाया गया।

    यह झारखंड पुलिस का पहला सफल प्रत्यर्पण है, और इस वजह से इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपराधों का लंबा इतिहास.

    पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मयंक सिंह पर हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे 45 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह कई सालों से फरार था और विदेश जाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था।

    सूत्रों का कहना है कि मयंक झारखंड, बंगाल और छत्तीसगढ़ में कोयला व परिवहन कारोबारियों से वसूली करता था। उसके इशारे पर हत्या और फायरिंग की घटनाएँ होती थीं।

    गैंग कनेक्शन.

    पुलिस के अनुसार, मयंक का सीधा संबंध लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू जैसे बड़े गैंगस्टरों से है। यही वजह थी कि उसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाता था।

    जांच में सामने आया कि सुनील मीणा पहले काम के सिलसिले में मलेशिया गया, जहां उसकी मुलाकात रोहित गोदारा, गोल्डी बरार और संपत नेहरा के ज़रिए लॉरेंस बिश्नोई से हुई। इसके बाद उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध की दुनिया में कदम रखा।

    लॉरेंस के कहने पर उसने राजस्थान और पंजाब में हत्या, रंगदारी और गोलीबारी जैसी वारदातें अंजाम दीं। वह तब चर्चा में आया जब उसने राजस्थान के तत्कालीन मंत्री व कांग्रेस विधायक गोविंद राम मेघवाल से रंगदारी मांगी थी। यही नहीं, उसने राजस्थान के एक पेट्रोल पंप मालिक से पांच करोड़ रुपये की वसूली की मांग की थी और पैसे न देने पर फायरिंग करवा दी थी।

    विदेश भागकर भी अपराध जारी.

    पासपोर्ट रद्द होने के बाद सुनील ने डंकी रूट के जरिए सिंगापुर, ईरान, मैक्सिको और फिर अमेरिका तक का सफर तय किया। वहीं से वह अमन साहू गिरोह के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में युवाओं को भर्ती करता रहा।

    इसी दौरान उसने मयंक सिंह के साथ मिलकर झारखंड व आसपास के राज्यों में कोयला और परिवहन कंपनियों से वसूली की योजना बनाई।

    प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया.

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल की मदद से पहले उसका लोकेशन ट्रैक किया गया। इसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सीबीआई की इंटरपोल शाखा के सहयोग से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। कई महीनों की मेहनत के बाद आखिरकार अक्टूबर 2024 में मयंक सिंह आज़रबैजान के दातू में गिरफ्तार हुआ और अब भारत लाया गया।

    रांची एयरपोर्ट पर पहुंचे एसपी ऋषभ झा ने कहा –
    “यह झारखंड पुलिस के इतिहास का पहला प्रत्यर्पण है। हमें उम्मीद है कि विदेश में छिपे बाकी अपराधियों को भी जल्द प्रत्यर्पण या निर्वासन के जरिए वापस लाया जाएगा। इस सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री और राज्य व केंद्र सरकार के सहयोग को जाता है।”

    पुलिस मयंक सिंह से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग से जुड़े रहस्यों की पड़ताल करेगी। उसे जल्द ही रामगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी हिरासत की मांग करेगी।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मयंक की गिरफ्तारी से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।