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  • जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू

    जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू

     उपराष्ट्रपति के लिए  राम नाथ ठाकुर रेस में सबसे आगे.

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    नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट केके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिनकी जांच के लिए संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

    इंडियन एक्सप्रेस  की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। सूत्रों के अनुसार, संसद भवन में पहले ओम बिरला और हरिवंश ने आपसी बातचीत की, जिसके बाद अमित शाह उनसे मिले। यह बैठक इस पूरे मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को दर्शाती है।

    अब आगे क्या प्रक्रिया होगी?

    संविधान के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष एक वैधानिक समिति का गठन करेंगे, जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगी। यह समिति तीन सदस्यों की होगी, जिसमें होंगे:

    • सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायाधीश
    • किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
    • एक प्रख्यात न्यायविद या कानून विशेषज्ञ

    इस समिति को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

    जस्टिस वर्मा ने की जांच रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती.

    इस बीच, जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ की गई इन-हाउस जांच रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    अगर दोषी पाए गए तो क्या होगा?

    यदि समिति जस्टिस वर्मा को दोषी पाती है, तो उसकी रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी। इसके बाद:

    • लोकसभा और राज्यसभा में इस रिपोर्ट पर बहस होगी।
    • फिर दोनों सदनों में मतदान कराया जाएगा।
    • जज को हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करना जरूरी होगा।

    धनखड़ के इस्तीफे का कारण अभी भी रहस्य.

    इस बीच, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं, नए उपराष्ट्रपति के लिए नामों की चर्चा शुरू हो गई है। समाजवादी विचारक कर्पूरी ठाकुर के बेटे राम नाथ ठाकुर को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

    इन घटनाओं की कड़ी—एक उच्च संवैधानिक पद से इस्तीफा, न्यायपालिका में महाभियोग की प्रक्रिया और संभावित राजनीतिक फेरबदल—देश की संवैधानिक व्यवस्था के लिए एक अहम मोड़ की ओर संकेत कर रही है।