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  • मानदेय और भ्रष्टाचार के खिलाफ जलसहियाओं का हुंकार

    मानदेय और भ्रष्टाचार के खिलाफ जलसहियाओं का हुंकार

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :  जिले में झारखंड राज्य महिला जलसहिया कर्मचारी संघ जिला शाखा की एक महत्वपूर्ण बैठक किरण पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष दिव्या देवी ने की, जिसमें जिले भर से  जलसहिया प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर हिस्सा लिया।

    बैठक को जिला मंत्री सरिता देवी, प्रदेश अध्यक्ष सितारा परवीन तथा राष्ट्रीय संगठन सचिव सह प्रदेश मुख्य संरक्षक अशोक कुमार सिंह ने संबोधित किया। वक्ताओं के भाषणों के दौरान पूरे सभागार में सरकार और विभाग के खिलाफ आक्रोश साफ झलकता रहा।

    बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा यह उठा कि आवंटन मिलने के बावजूद जलसहियाओं को मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जलसहियाओं ने एक स्वर में आरोप लगाया कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की योजनाओं में उन्हें अंधेरे में रखकर 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी चल रही है
    इतना ही नहीं, कई पुरानी योजनाओं में रंग-रोगन दिखाकर दोबारा राशि निकाले जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया। कई जलसहियाओं ने योजनाओं के नाम संगठन के समक्ष रखे और मांग की कि यदि निष्पक्ष जांच हो, तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी।

    जलसहियाओं ने सरकार से सवाल किया कि दिन-रात मेहनत कर विभाग की योजनाओं को धरातल पर उतारने वाली महिलाएं मात्र ₹2000 मासिक मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं, वह भी समय पर नहीं मिलता। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि श्रम का अपमान भी है।

    सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा—

    “जलसहिया ग्रामीण महिला है, जो मात्र ₹2000 मासिक मानदेय पर कार्यरत है और सरकार इस ओर आंख मूंदे बैठी है। यह कैसी विडंबना है कि बिना काम किए ‘मैया सम्मान योजना’ में ₹2500 दिए जा रहे हैं, जबकि काम करने वाली महिलाओं को उससे कम मानदेय मिलता है।”

    राज्यभर में लगभग 30 हजार जलसहिया बहनें कार्यरत हैं, जिन्हें कम से कम न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मानदेय दिया जाना चाहिए।

    प्रदेश अध्यक्ष सितारा परवीन ने चेतावनी दी कि—

    “यदि बकाया मानदेय और विभागीय गड़बड़ियों को जल्द नहीं सुधारा गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन हमारी मजबूरी होगी। जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।”

    वहीं जिला मंत्री सरिता देवी ने कहा कि अधिकार आंदोलन से ही मिलते हैं और जलसहियाएं अपने हक के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।

    बैठक में सूरज मुनि किसकु, जमीला बेगम, सुमति मरांडी, हेमंती देवी, सुनीता देवी, सीता देवी, नीतू देवी, सोनी हेंब्रम, पिंकी देवी, मीना देवी, गीता देवी, ललिता देवी, किरण देवी, प्रमिला देवी, निशा देवी, शबनम परवीन, शकुनवा देवी सहित कई जलसहियाओं ने अपने विचार रखे और समस्याओं को खुलकर सामने रखा।

    बैठक के दौरान गिरिडीह और पीरटांड़ क्षेत्र की जलसहियाओं के बीच 400 कंबलों का वितरण भी किया गया, जिससे आयोजन में सामाजिक सरोकार की झलक भी देखने को मिली।