Author: The News Post4u

  • कांग्रेस की बैठक में नेताओं ने मंथन किया, कार्यकर्ताओं ने जताई उपेक्षा की पीड़ा

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह : कांग्रेस पार्टी झारखंड में अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी के झारखंड प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने गिरिडीह जिले के मधुबन स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर में ‘संगठन सृजन’ नामक बैठक की। यह बैठक मधुबन गेस्ट हाउस में आयोजित की गई, जहां जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष धनंजय राम, कार्यकारी जिलाध्यक्ष सतीश केडिया, वरिष्ठ कोंग्रेस  नेता अजय सिन्हा  मंटू सभी प्रखंड, मंडल और बूथ स्तर के अध्यक्ष मौजूद रहे।

    बैठक का उद्देश्य और चिंता:

    बैठक को “संगठन सृजन” का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसका मूल उद्देश्य गिरिडीह सहित पूरे झारखंड में कांग्रेस संगठन को फिर से मजबूत बनाना था। इस दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर विशेष चिंता जताई गई कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में गिरिडीह जैसे राजनीतिक रूप से अहम जिले में कांग्रेस ने एक भी प्रत्याशी नहीं उतारा। यह निर्णय पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है, खासकर तब जब कुछ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पास मजबूत आधार रहा है और वहां उम्मीदवार खड़े किए जा सकते थे।

    कार्यकर्ताओं की नाराजगी:

    बैठक के दौरान कई बूथ अध्यक्षों और प्रखंड प्रतिनिधियों ने संगठन के भीतर हो रही अनदेखी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं मिल रही है, और प्रशासनिक अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते।

    हालांकि, समय की कमी के कारण आधे घंटे तक चली इस बैठक में कई कार्यकर्ता अपनी बात नहीं रख सके, जिससे उनमें असंतोष देखने को मिला

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में के.राजू ने कहा,

    “कार्यकर्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना गया है। कांग्रेस पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। सभी सुझावों को पार्टी के रणनीतिकारों तक पहुंचाया जाएगा।”

    जब मीडिया ने उनसे नीति आयोग की उस रिपोर्ट पर सवाल पूछा जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कही गई है, तो के. राजू ने जवाब देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि उन्होंने अभी तक उस खबर को देखा नहीं है।

     

  • झारखंड बोर्ड का मैट्रिक रिजल्ट घोषित, 91.71% छात्र सफल, बेटियों ने मारी बाज़ी

    झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने 27 मई 2025 को राज्य भर के छात्रों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। मंगलवार को कक्षा 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस वर्ष कुल 91.71% छात्र पास हुए हैं, जो कि 2024 की तुलना में 1.31% अधिक है। इससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में हो रहे सुधार का संकेत मिलता है

    📈 परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:

    • कुल पंजीकृत छात्र: 4,33,944
    • परीक्षा में सम्मिलित छात्र: 4,31,488
    • उत्तीर्ण छात्र: 3,95,755jcc
    • लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 92.38%
    • लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 90.96%

    इस बार भी लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा है, जो राज्य में बढ़ती लैंगिक समानता की ओर सकारात्मक संकेत है।

    🏆 टॉपर्स की सूची (JAC 10th Topper List 2025):

    रैंक छात्र का नाम स्कूल अंक प्रतिशत
    1 गीतांजलि इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 493 98.60%
    2 ऋतु कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 अमृता गुप्ता इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 पूजा कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 अमर कुमार प्रॉप वी हाई स्कूल, तिलैया रंगाटांड़ 491 98.20%
    3 शिवानी कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 489 97.80%
    3 विकास प्रामाणिक प्रॉप हाई स्कूल, बाघमारा बालीपुर 489 97.80%

    विशेष बात: टॉप-10 में से 15 स्थानों पर लड़कियाँ हैं, जिनमें 12 छात्राएं सिर्फ इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग से हैं। यह स्कूल राज्य में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है.

    🏅 डिवीजन वाइज परिणाम:

    • प्रथम श्रेणी: 2,21,040 छात्र
    • द्वितीय श्रेणी: 1,57,194 छात्र
    • तृतीय श्रेणी: 17,521 छात्र

    🗺️ जिलावार प्रदर्शन:

    जिला पास प्रतिशत
    कोडरमा 98.1% (राज्य में सर्वोच्च)
    पाकुड़ 96.83%
    जामताड़ा 96.33%
    लातेहार 96.23%
    साहिबगंज 96.22%
    रांची 87.32%
    पश्चिमी सिंहभूम 80.41% (राज्य में न्यूनतम)

    📝 आगे की प्रक्रिया:

    • छात्र अपनी मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट अपने-अपने स्कूलों से प्राप्त कर सकते हैं।
    • जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
    • जिन छात्रों को पासिंग मार्क्स नहीं मिल पाए हैं, वे कंपार्टमेंट परीक्षा में भाग ले सकते हैं।

    झारखंड बोर्ड 10वीं का यह रिजल्ट राज्य के लिए उत्साहजनक है। न केवल पास प्रतिशत में सुधार हुआ है, बल्कि लड़कियों का बेहतरीन प्रदर्शन यह दिखाता है कि बेटियाँ शिक्षा में नए आयाम गढ़ रही हैं। सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर अगर यही प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में झारखंड शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाएगा।

  • जब तक सरना धर्म कोड को मान्यता नहीं मिलती, तब तक “नो सेंसस”-मंत्री सुदिव्य कुमार

    GIRIDIH: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 27 मई 2025 को राज्यभर में सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। गिरिडीह जिले में यह प्रदर्शन टावर चौक के निकट आयोजित किया गया, जिसमें राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सहित दर्जनों पार्टी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष शहनवाज अंसारी ने की, जबकि संचालन अजीत कुमार पप्पु और कोलेश्वर सोरेन ने किया।

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने 1972 में झारखंड को अलग राज्य बनाने की बात कही थी और वह सपना 15 नवंबर 2000 को साकार हुआ, उसी तरह अब उन्होंने देश के 12 करोड़ आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड की मान्यता की बात कही है, और यह भी पूरा होकर रहेगा।

    गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा ने 11 नवंबर 2020 को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड विधेयक पारित किया था और इसे राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा गया था। हालांकि, लगभग पांच वर्षों के बाद भी केंद्र सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है, जिससे आदिवासी समुदाय में गहरा असंतोष है।

    सारना धर्म, जिसे “पवित्र वन का धर्म” भी कहा जाता है, आदिवासी समुदायों द्वारा प्रकृति पूजा पर आधारित एक धार्मिक विश्वास है, जो झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ में प्रचलित है। इस धर्म के अनुयायी जल, जंगल और जमीन की पूजा करते हैं और इसे अपनी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

    कार्यक्रम में केदार हाजरा, प्रणव वर्मा, दिलीप रजक, दिलीप मंडल, बबली मरांडी, प्रमिला मेहरा, ज्योति सोरेन, नुनुराम किस्कु, कोलेश्वर सोरेन, प्रधान मुर्मू, हरिलाल मरांडी, बिरजु मरांडी, राकेश सिंह रॉकी, अभय सिंह, योगेन्द्र सिंह, राकेश सिंह टुन्ना, शिवम आजाद, सुमित कुमार, अशोक राम, मेहताब मिर्जा, कृष्ण मुरारी, अनिल राम, महावीर मुर्मू, प्रदोष कुमार, भरत यादव, नूर अहमद, हसनैन अली, मो. जाकीर, छक्कु साव, विजय सिंह, सन्नी रईन, नरेश यादव, पप्पु रजक, हरि मोहन कंधवे, अमित चंद्रवंशी सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    JMM ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरना धर्म कोड को मान्यता नहीं मिलती, तब तक “नो सेंसस” के नारे के साथ चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

     

  • झारखंड में सरना धर्म कोड को लेकर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस-झामुमो का केंद्र सरकार पर दबाव

    परवेज़ आलम.

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों सरना धर्म कोड एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। राज्य की सत्ता में साझेदार झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस, दोनों दल इस मुद्दे को लेकर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उनका उद्देश्य आदिवासी समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संविधानिक मान्यता दिलवाना है.

    कांग्रेस का राजभवन के समक्ष प्रदर्शन.

    सोमवार को रांची में कांग्रेस ने राजभवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पार्टी के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी श्रीबेला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश समेत कई वरिष्ठ नेता, विधायक और मंत्री शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार से जनगणना में अलग ‘सरना धर्म कोड‘ की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान के. राजू ने कहा कि,

    “आदिवासियों का यह मौलिक अधिकार है कि उन्हें उनके धर्म और पहचान के आधार पर एक अलग धर्म कोड मिले, ठीक वैसे ही जैसे अन्य राज्यों में कुछ आदिवासी समूहों को मिला है।

    झामुमो का 27 मई को राज्यव्यापी प्रदर्शन.

    झामुमो भी इस मुद्दे को लेकर पीछे नहीं है। पार्टी ने 27 मई को राज्यभर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इस अभियान का प्रमुख नारा है:
    “सरना कोड नहीं तो जनगणना नहीं”।

    यह आंदोलन आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी विधानसभा चुनावों में झामुमो और कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा है.

    आदिवासी वोट बैंक पर सीधा फोकस.

    झारखंड की लगभग 26% आबादी आदिवासी है, और राज्य की 28 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2019 और 2024 में इन सीटों पर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस पृष्ठभूमि में सरना धर्म कोड पर मुखर रुख इस वोट बैंक को और मज़बूत करने की रणनीति मानी जा रही है.

    भाजपा का अस्पष्ट रवैया और राजनीतिक नुकसान.

    वहीं, भाजपा इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना पाई है। उसने सरना और ईसाई आदिवासियों के बीच एक अंतर पैदा करने की कोशिश की, यह कहते हुए कि ईसाई आदिवासी आरक्षण का अनुचित लाभ ले रहे हैं। लेकिन यह रणनीति 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नाकाम रही।

    • विधानसभा चुनावों में भाजपा सिर्फ एक आदिवासी आरक्षित सीट जीत सकी।
    • लोकसभा चुनावों में वह एक भी आदिवासी सुरक्षित सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई

    गठबंधन की जमीनी रणनीति.

    झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने स्थानीय और सांस्कृतिक मुद्दों को प्राथमिकता दी है — जैसे कि:

    • सरना धर्म कोड
    • 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति
    • मंइयां सम्मान योजना

    इन मुद्दों ने आदिवासी और स्थानीय गैर-आदिवासी समुदायों के बीच गठबंधन की स्थिति को मजबूत किया है। इसके उलट, भाजपा की “रोटी, बेटी और माटी” जैसी भावनात्मक रणनीतियां और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे जनता से कनेक्ट नहीं कर पाए.

    केंद्र की भूमिका होगी निर्णायक.

    सरना धर्म कोड के मुद्दे पर राज्य सरकार की आक्रामकता एक रणनीतिक कदम है, जिससे केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

    झारखंड में सरना धर्म कोड अब केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विषय नहीं रहा, यह सीधे तौर पर राजनीतिक,रणनीति और जनाधार की लड़ाई का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखा जाना बाकी है कि केंद्र की प्रतिक्रिया, इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाती है या संवैधानिक समाधान की ओर ले जाती है।

  • झारखंड : मौसम ने ली करवट,गर्मी से राहत, बारिश और तेज हवाओं से मौसम हुआ सुहाना

    By The News Post4u

    RANCHI: झारखंड में मई के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक रुख बदल लिया है। लंबे समय से झुलसाती गर्मी से परेशान लोगों को अब राहत मिल रही है। राज्य के कई हिस्सों में बादल गरज रहे हैं और ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह सुहावना मौसम 31 मई तक बना रहेगा।

    कई जिलों में तापमान 30 डिग्री से नीचे.

    झारखंड के चार जिलों—रांची, बोकारो, धनबाद और लोहरदगा—का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। खासकर लातेहार में तो तापमान गिरकर 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अन्य जिलों में भी तापमान 40 डिग्री के नीचे दर्ज किया गया। यह स्थिति मई महीने में कई वर्षों बाद देखी गई है।

    येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी.

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सोमवार से राज्य में तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। इसके साथ ही बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कोल्हान क्षेत्र में तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट भी घोषित किया गया है।

    प्री-मॉनसून की बारिश से बदला तापमान.

    राज्य में हो रही यह बारिश दरअसल प्री-मॉनसून की गतिविधियों का नतीजा है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। इसी कारण रांची समेत कई इलाकों का तापमान सामान्य से 7-8 डिग्री नीचे पहुंच गया है।

    रांची में बीते 24 घंटे के भीतर 11 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सबसे ज्यादा बारिश पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में 64.4 मिमी हुई। वहीं, डालटनगंज मे सबसे अधिक तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री लातेहार में रिकॉर्ड किया गया।

    31 मई तक राहत की उम्मीद.

    मौसम विभाग के अनुसार, 28 से 31 मई तक राज्यभर में मौसम इसी तरह ठंडा और सुहावना बना रहेगा। इस दौरान बादल, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में लोग फिलहाल गर्मी से राहत की सांस ले सकते हैं।

  • झारखंड में कोरोना की वापसी: लाल विजय शाहदेव संक्रमित, स्वास्थ्य मंत्री की जनता से अपील.

    By The News Post4u

    रांची :  झारखंड में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। राज्य में कोविड के नए मामलों के बीच झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य और चर्चित फिल्ममेकर लाल विजय शाहदेव के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आई है। झारखंड से लेकर मुंबई तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शाहदेव ने खुद इस जानकारी को साझा करते हुए सतर्कता की अपील की है।

    फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत, रांची पहुंचने पर मिले पॉजिटिव.

    लाल विजय शाहदेव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि वह हाल ही में मुंबई से रांची लौट रहे थे। इसी दौरान 22 मई को फ्लाइट में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। बाद में जांच कराए जाने पर उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने लिखा, “भारत में अब तक कुल 257 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अब मैं भी उनमें शामिल हूं। मैं फिलहाल रांची के एक अस्पताल में भर्ती हूं और पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।”

    फिल्मी काम रुका, अपील जारी.

    शाहदेव ने यह भी बताया कि उन्हें झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सदस्य होने के नाते कुछ फिल्मों का प्रिव्यू करना था, लेकिन बीमारी के चलते वह यह कार्य नहीं कर सके। उन्होंने अपील की है कि जो भी लोग हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए हैं और सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं, वे तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं।

    स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, मंत्री ने कहा – “घबराने की जरूरत नहीं”

    इधर देशभर में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर दो नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के सामने आने के बाद। इस बीच बेंगलुरु में एक वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मौत की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।

    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्यभर के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड में डाल दिया है। उन्होंने कहा, “यह सामान्य स्थिति है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हम पूरी तरह सतर्क हैं और सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।”

    मंत्री अंसारी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोगों को कोविड से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जा सकें और अफवाहों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना अब भी एक जरूरी एहतियात है, जो अन्य संक्रमणों से भी बचाता है.

    नई गाइडलाइंस का इंतजार, डॉक्टर की अपील – “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”

    स्वास्थ्य मंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा, “एक डॉक्टर के रूप में मेरी आपसे यही गुज़ारिश है – लापरवाही न करें। कोविड को हल्के में न लें। हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।”

    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी होने वाली नई गाइडलाइंस का इंतजार कर रही है। जैसे ही दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, राज्य सरकार तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    बेंगलुरु में जिस वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मृत्यु हुई, उनकी उम्र लगभग 85 वर्ष थी और उन्हें पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मंत्री अंसारी ने इस मामले को लेकर लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्कता बनाए रखें

    सरकार तैयार, जनता से अपील – “हम साथ हैं, हम तैयार हैं”

    राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मंत्री ने आश्वासन दिया, “हम साथ हैं, हम तैयार हैं। कोविड को पहले की तरह इस बार भी हराएंगे।”

  • तेज प्रताप यादव RJD और परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित

    लालू प्रसाद यादव का बड़ा फैसला, बिहार की राजनीति में मचा हलचल

    परवेज़ आलम.

    बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को न केवल पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया, बल्कि उन्हें परिवार से भी अलग कर देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ यादव परिवार में दरार की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आरजेडी के भीतर आंतरिक कलह और सियासी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लालू यादव ने इस विषय पर ट्वीट करते  हुए लिखा “”निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमज़ोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतएव उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।

    तेज प्रताप के निष्कासन की वजह मानी जा रही है हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो जिसमें वह अनुष्का यादव के साथ नजर आ रहे हैं। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप ने इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से अनुष्का से प्रेम करते थे और अब उन्होंने उनसे विवाह कर लिया है

    तेज प्रताप की छवि: रंगीन, धार्मिक और विवादास्पद.

    तेज प्रताप यादव हमेशा से ही बिहार की राजनीति में अपनी अनोखी शैली, धार्मिक रूप और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चा में रहे हैं। कभी भगवान शिव, तो कभी श्रीकृष्ण के रूप में दिखाई देना, होली पर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आयोजन करना—तेज प्रताप ने हमेशा खुद को अलग दिखाने की कोशिश की।

    राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2015 में महुआ सीट से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। फिर 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए और दूसरी बार नीतीश सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनकी कार्यशैली और विवादास्पद बयान अक्सर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहे।

    निजी जीवन में भी विवादों से घिरे रहे तेज प्रताप.

    तेज प्रताप का निजी जीवन भी सुर्खियों से अछूता नहीं रहा है। 2018 में उन्होंने बिहार के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से शादी की थी। यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और तलाक की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है। अब अनुष्का यादव के साथ उनकी नई शुरुआत ने राजनीतिक और पारिवारिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

    पप्पू यादव ने तेज प्रताप का किया समर्थन, लालू के फैसले पर उठाए सवाल.

    तेज प्रताप यादव के निष्कासन के बाद जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने तेज प्रताप को “ईमानदार प्रेमी” बताते हुए लालू प्रसाद यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    “तेज प्रताप ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने समाज के सामने सच स्वीकार किया। ऐसे में उन्हें सजा देना कहां तक उचित है?” – पप्पू यादव

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश की राजनीति में ऐसे कई नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि तेज प्रताप को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने प्रेम को स्वीकार किया

    राजनीतिक असर: RJD को फायदा या विरोधियों को मिलेगा मुद्दा?

    तेज प्रताप के निष्कासन से RJD को अनुशासन का संदेश देने का मौका मिला है, लेकिन साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा विरोधी दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं, तेज प्रताप यादव के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेज प्रताप कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे, क्या वे बगावती रुख अपनाएंगे, या फिर यह पारिवारिक कलह समय के साथ शांत हो जाएगा ।

  • देश की सेनाओं के शौर्य पर गर्व: ओम बिरला ने ऑपरेशन सिंदूर को बताया आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई नीति का प्रतीक

    रांची : झारखंड दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि देश को अपनी सेनाओं के शौर्य और पराक्रम पर गर्व है। उन्होंने कहा कि भारत की सेनाएं न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में भी नई नीति और स्पष्ट रणनीति के साथ अग्रसर हैं।

    वे जमशेदपुर स्थित लोयोला स्कूल के फैजी ऑडिटोरियम में आयोजित सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्लेटिनम जुबली समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नीति नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

    “यदि कोई देश भारत में आतंकवाद फैलाने की कोशिश करेगा, तो उसका परिणाम ऑपरेशन सिंदूर से भी अधिक कठोर होगा,” ओम बिरला ने स्पष्ट चेतावनी दी।

    झारखंड पहुंचते ही बिरसा मुंडा को किया नमन.

    रविवार को दोपहर 12:41 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रांची से हवाई मार्ग द्वारा जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से वे सीधे लोयोला स्कूल पहुंचे, जहां पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया।

    इससे पहले, रांची में उनके आगमन पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो और रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने एयरपोर्ट पर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद वे बिरसा चौक पहुँचे, जहाँ उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    “भगवान बिरसा मुंडा ने न केवल आदिवासियों के अधिकारों, बल्कि उनकी संस्कृति, जंगल और ज़मीन के लिए भी संघर्ष किया। उनकी प्रेरणा आज भी देश के लिए पथप्रदर्शक है,” ओम बिरला ने कहा।

    आदिवासी समाज से जुड़ाव और सम्मान की भावना.

    ओम बिरला के दौरे को झारखंड में विशेष महत्व दिया जा रहा है, खासकर आदिवासी समुदाय के बीच। बिरसा मुंडा की धरती पर आकर उन्होंने अपने संबोधन में इस क्षेत्र की ऐतिहासिक चेतना और संस्कृति को सम्मान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता और गौरवशाली परंपराएं देश की ताकत हैं।

    कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, राजभवन में रात्रि विश्राम.

    लोकसभा अध्यक्ष की यात्रा को लेकर प्रशासन ने रांची और जमशेदपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। उनके कार्यक्रमों की श्रृंखला में शामिल होकर वे रविवार रात्रि को राजभवन में विश्राम करेंगे।

    ओम बिरला के दौरे का उद्देश्य न केवल राजनीतिक और प्रशासनिक संवाद है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पहलों को भी बल देना है। वे रांची में कई अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे, जहाँ वे व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज के विविध वर्गों से संवाद करेंगे।

  • मइयां सम्मान योजना : किस्तों के इंतजार में लाखों महिलाएं, सवालों के घेरे में प्रशासनिक प्रक्रिया

    परवेज़ आलम.

    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। अप्रैल और मई माह की किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाएं अब यह जानने को बेताब हैं कि आखिर उनके खातों में सम्मान राशि ट्रांसफर क्यों नहीं हो रही। जबकि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने 13 मई को ही राज्यभर के जिलों को 9,609 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं।

    तो फिर पैसा लाभुकों के खाते में क्यों नहीं  ?

    सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, हर माह की 15 तारीख तक लाभुकों के बैंक खातों में सम्मान राशि भेज दी जानी चाहिए। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि जब राशि का आवंटन समय पर हो चुका है, तो ट्रांसफर में देरी क्यों हो रही है ? जानकारी के अनुसार, अधिकांश जिलों ने 15 मई से पहले ही तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली थी।

    हालांकि विभाग की ओर से निर्देश जारी किया गया है कि राशि केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाए, जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इसीलिए आधार सीडिंग और खातों का सत्यापन (cross verification) तेजी से किया जा रहा है। जिला कोषांगों का कहना है कि उन्हें राज्य मुख्यालय से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने की देर है, उसके बाद राशि तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    एक साथ दो किस्त या सिर्फ एक ? बनी हुई है अनिश्चितता.

    13 मई को राशि आवंटन के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि अप्रैल और मई – दोनों महीनों की संयुक्त किस्त (5,000 रु.) लाभुकों को दी जाएगी। मगर अब सूत्रों के मुताबिक, केवल अप्रैल माह की किस्त दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं जारी किया गया है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम और भी गहरा गया है।

    सबसे ज्यादा लाभुक कहां   ?

    योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक लाभुक गिरिडीह जिले से हैं, इसके बाद रांची, धनबाद, बोकारो और पलामू क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। हालांकि विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बार कितने लाभार्थियों को सम्मान राशि दी जाएगी।

    एक अनुमान के अनुसार, करीब 43 लाख महिलाएं इस बार सम्मान राशि पाने वाली हैं। यह संख्या पहले जारी 56.61 लाख लाभुकों की सूची से काफी कम है। जनवरी में जब पहली बार राशि ट्रांसफर की गई थी, तो बड़ी संख्या में अपात्र लाभुकों की पहचान हुई थी। इसके बाद ही लाभुकों के आधार से लिंक खातों की अनिवार्यता तय की गई।

    पहले भी हो चुकी है छंटनी और संशोधन.

    मार्च महीने में एक साथ जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्त 37.55 लाख महिलाओं को भेजी गई थी। उसके बाद, जब खातों की जांच-पड़ताल पूरी हुई, तो अप्रैल में 5.52 लाख अतिरिक्त लाभुकों को राशि दी गई थी। इसका मतलब है कि विभाग द्वारा अपात्र लाभुकों की छंटनी और नए पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

    आगे क्या?

    फिलहाल, जिला कोषांगों से लेकर लाभार्थियों तक — सबकी निगाहें राज्य मुख्यालय से मिलने वाले अंतिम निर्देश पर टिकी हैं। लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह ‘ग्रीन सिग्नल’ आखिर कब मिलेगा।

    इस योजना को लेकर सरकार की गंभीरता और पारदर्शिता की मंशा तो स्पष्ट है, लेकिन सूचना के अभाव और स्पष्ट संवाद की कमी ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
    मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से एक सराहनीय पहल है, लेकिन यदि इसके वितरण में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह योजना अपनी राजनीतिक और सामाजिक साख को कमजोर कर सकती है। लाभुकों का धैर्य जवाब न दे, इसके लिए ज़रूरी है कि सरकार समय रहते स्थिति स्पष्ट करे और भरोसे का माहौल बनाए रखे।

     

  • झारखंड: आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला ? भ्रष्टाचार के इस काले पन्ने पर आईएएस ऑफिसरों की फेरहिस्त बढती जा रही है  

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में जुटी है एसीबी की टीम.

    परवेज़ आलम.

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विनय कुमार चौबे, अब आरोपों के घेरे में हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों की सूची में चौबे का नाम छठे नंबर पर दर्ज हो गया है। खास बात यह है कि इन छह में से चार अधिकारी रांची के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के पैठ की पुष्टि होती है।

    भ्रष्टाचार की जद में रांची के पूर्व डीसी

    विनय कुमार चौबे, जो झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं, को 20 मई को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी जेल भेजा गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जीवाड़ा किया, जिससे राज्य को तकरीबन 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    जालसाजी की रकम एक अरब तक पहुंचने की आशंका

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घोटाला महज 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। यह आंकड़ा एक अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। यही नहीं, बाद में जिन एजेंसियों को अनुबंध दिया गया, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी हुई। संबंधित एजेंसियों की बैंक गारंटी तक जब्त की गई, लेकिन कार्रवाई अधूरी रही।

    कौन-कौन आईएएस घोटाले में गए जेल

    इससे पहले रांची के उपायुक्त रह चुके आईएएस सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था। फिर सीबीआई ने दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार को, और ईडी ने जमीन घोटाले में छवि रंजन को हिरासत में लिया। इसके अतिरिक्त पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा भी भ्रष्टाचार मामलों में जेल जा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं।

    चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक पांच आईएएस – सजल चक्रवर्ती, महेश प्रसाद, के. अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस – को दोषी ठहराया जा चुका है।

    एसीबी की सक्रियता, सीबीआई-ईडी को भी मिलेगा लाभ

    ACB की यह कार्रवाई अब केंद्रीय जांच एजेंसियों – CBI और ED – के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध करा सकती है। ED जल्दी ही इस प्राथमिकी को टेकओवर कर नया ECIR दर्ज कर सकती है। वहीं CBI पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    नेताओं की मांग: अब हो सीबीआई जांच

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2022 में ही इस घोटाले की आशंका जाहिर कर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। मरांडी का आरोप है कि यह घोटाला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तर्ज पर, योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    मरांडी ने सवाल उठाया, “क्या केवल एसीबी की जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी? ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।”

    आरोपियों की संपत्ति की जांच शुरू

    ACB अब गिरफ्तार अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच में जुट गई है। पिछले दस वर्षों के दौरान उनकी आय-व्यय की समीक्षा की जा रही है। उनके पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और घोषित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    स्वास्थ्य जांच में सामने आई हाई बीपी की समस्या

    गिरफ्तारी के बाद ACB कार्यालय में विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की स्वास्थ्य जांच की गई। दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई, हालांकि चौबे का ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों ने उन्हें नमक कम करने की सलाह दी है।

    आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला?

    झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटाले राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रांची जैसे प्रमुख जिले से बार-बार अधिकारियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि भ्रष्टाचार यहां संस्थागत रूप ले चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी से हालात सुधरेंगे या अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मिलकर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाएं?