Author: The News Post4u

  • रांची स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बने आवास का सीएम ने निरीक्षण

    RANCHI: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज रांची स्मार्ट सिटी में राज्य सरकार के मंत्रियों के लिए बनाए जा रहे नवनिर्मित आवासीय परिसर का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 जनवरी 2025 तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि मंत्रियों को उनके आवास आवंटित किए जा सकें।

    क्लब हाउस से लेकर बच्चों के खेल स्थान तक सुविधाओं का जायजा. 
    मुख्यमंत्री ने आवासीय परिसर में बने क्लब हाउस, बैडमिंटन कोर्ट और पुलिस बैरक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों के खेलने के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने आवासीय परिसर की सभी सुविधाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    निरीक्षण के दौरान मौजूद विधायक और अधिकारी.
    इस मौके पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव अरवा राजकमल, स्मार्ट सिटी के सीईओ अमीत कुमार और जीएम राकेश नंदकुलियार समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    विधानसभा सत्र की शुरुआत.
    इसी बीच, झारखंड विधानसभा का चार दिवसीय सत्र आज से शुरू हो गया। पहले दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मुख्य सचिव अलका तिवारी और डीजीपी अनुराग गुप्ता समेत अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया। वहीं, डुमरी से विधायक जयराम महतो ने अनोखे अंदाज में नमन करते हुए विधानसभा में प्रवेश किया, जो चर्चा का विषय बना रहा।

    15 जनवरी की डेडलाइन पर टिकी नजरें.
    रांची स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बनाए जा रहे इस आवासीय परिसर को लेकर मुख्यमंत्री की सक्रियता और निर्देश यह संकेत देते हैं कि सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब सभी की निगाहें 15 जनवरी 2025 की डेडलाइन पर हैं।

  • झारखंड के पारा शिक्षकों को नये साल का तोहफा, जनवरी से मिलेगा बढ़ा हुआ मानदेय

    RANCHI:झारखंड के 59 हजार पारा शिक्षकों के लिए नये साल की शुरुआत खुशखबरी लेकर आई है। राज्य सरकार ने इन सहायक अध्यापकों के मानदेय में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। जनवरी 2025 से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी से पारा शिक्षकों को उनके श्रेणी और योग्यता के आधार पर अलग-अलग मानदेय मिलेगा।

    बढ़ा हुआ मानदेय: जानिए, किसे कितना मिलेगा
    कक्षा 6 से 8 तक (TET पास शिक्षक):
    अब तक: ₹24,300
    जनवरी 2025 से: ₹25,200
    कक्षा 1 से 5 तक (TET पास शिक्षक):
    अब तक: ₹22,680
    जनवरी 2025 से: ₹23,530
    प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 6 से 8 तक):
    अब तक: ₹19,656
    जनवरी 2025 से: ₹20,384
    आकलन परीक्षा पास शिक्षक (कक्षा 6 से 8 तक):
    अब तक: ₹21,008
    जनवरी 2025 से: ₹21,788
    प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 1 से 5 तक):
    अब तक: ₹18,144
    जनवरी 2025 से: ₹18,816
    आकलन परीक्षा पास शिक्षक (कक्षा 1 से 5 तक):
    अब तक: ₹19,392
    जनवरी 2025 से: ₹20,112
    आने वाले तीन साल का खाका तैयार
    स्कूली शिक्षा विभाग ने 2027 तक पारा शिक्षकों के लिए मानदेय वृद्धि की योजना तय कर दी है। इससे पारा शिक्षकों को भविष्य की स्पष्टता और आर्थिक स्थिरता मिलेगी।

    मानदेय की गणना: किस आधार पर हो रही है?
    पारा शिक्षकों के मासिक मानदेय की गणना आकलन परीक्षा के परिणाम (29 सितंबर 2023) के आधार पर की गई है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि मानदेय में पारदर्शिता बनी रहे।

    सरकार का यह कदम पारा शिक्षकों के योगदान को मान्यता देने और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पारा शिक्षकों ने इसे नए साल का शानदार तोहफा बताया है और अपने शिक्षण कार्य को और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का वादा किया है।

    झारखंड सरकार के इस निर्णय से राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

  • झारखंड: केंद्रीय संस्थानों से वसूले जाएंगे 200 करोड़ रुपये का बकाया होल्डिंग टैक्स

    रांची : झारखंड सरकार के गठन के साथ ही विकास की रूप रेखा अमल मे लाने की कवायद शुरू हो गयी है । झारखंड नगर विकास विभाग ने राज्य में बकाया होल्डिंग टैक्स की वसूली के लिए कमर कस ली है। प्रधान सचिव सुनील कुमार के निर्देशानुसार, CCL, BCCL, पोस्ट ऑफिस, सेल और रेलवे जैसे केंद्रीय संस्थानों से टैक्स की वसूली की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इन संस्थानों पर लगभग 200 करोड़ रुपये का होल्डिंग टैक्स बकाया है।

    वसूली की प्रक्रिया होगी तेज। 
    राज्य सरकार ने बकाया टैक्स वसूलने के लिए सभी संबंधित निकायों को विशेष निर्देश जारी करने की तैयारी की है। जल्द ही इन केंद्रीय संस्थानों को नोटिस भेजा जाएगा ताकि राजस्व संग्रहण में तेजी लाई जा सके।

    राज्य सरकार के विभाग भी घेरे में।
    केवल केंद्रीय संस्थान ही नहीं, बल्कि झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के उन भवनों से भी टैक्स वसूली शुरू की जाएगी, जहां अब तक होल्डिंग टैक्स का भुगतान नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, जमशेदपुर, जिसे औद्योगिक नगरी का दर्जा प्राप्त है, को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। हालांकि, राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और प्रतिष्ठानों से होल्डिंग टैक्स की वसूली अनिवार्य होगी।

    राजस्व वसूली से बढ़ेगा विकास।
    राज्य सरकार का मानना है कि बकाया होल्डिंग टैक्स की वसूली से राजस्व में वृद्धि होगी, जो शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक होगा।

    इस कदम से न केवल वित्तीय अनुशासन स्थापित होगा, बल्कि झारखंड के शहरी विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि यह प्रक्रिया कितनी तेजी से अमल में लाई जाती है।

  • झारखंड में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता हुआ आसान

    RANCHI: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को अधिसूचित कर दिया है, जिससे राज्य में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है। हालांकि, इसके लिए कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

    निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए नगर निगम क्षेत्र में कम से कम 5 एकड़ जमीन और नगर निगम सीमा से बाहर 15 एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। यह जमीन 30 साल के लीज पर होनी चाहिए, और इसका इस्तेमाल सिर्फ विश्वविद्यालय के उद्देश्य से किया जा सकेगा। इसके साथ ही इस जमीन को किसी भी अन्य कार्य के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकेगा।

    निधि का प्रावधान. 
    नगर निगम क्षेत्र में भूमि के लिए 10 करोड़ रुपये और नगर निगम सीमा के बाहर की भूमि के लिए 7 करोड़ रुपये की निधि रखना अनिवार्य होगा।

    भवन और बुनियादी ढांचे की जरूरत. 
    प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए पुस्तकालय, व्याख्यान कक्ष, सभागार, विद्यार्थी संसाधन केंद्र, खेल सुविधाएं और प्रयोगशालाएं जैसी सुविधाएं कम से कम 12,000 वर्गमीटर के निर्मित क्षेत्र में होनी चाहिए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

    निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के अनुसार की जाएगी। कुलपति और कुलसचिव की नियुक्ति में भी नियमानुसार प्रक्रिया अपनानी होगी।

    आवेदन प्रक्रिया और शुल्क.
    निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 5 लाख रुपये का आवेदन शुल्क जमा करना होगा। इसके साथ ही अनुसंधान और एकेडमिक उत्कृष्टता की दिशा में कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

    छात्रों के लिए विशेष प्रावधान.
    एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शुल्क में छूट देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही राज्य की औद्योगिक, स्टार्टअप, और ऊर्जा नीतियों के प्रति विश्वविद्यालय को जागरूक और प्रतिबद्ध रहना होगा।

    जांच समिति का प्रावधान.
    प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया की जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर एक जांच समिति भी नियुक्त की जाएगी।

    इस कदम से झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। नए विश्वविद्यालयों के जरिए न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर होगा, बल्कि राज्य में रोजगार और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • सहारा इंडिया के निवेशकों को ऑनलाइन मिलेगा बकाया पैसा !

    गिरिडीह: झारखंड और देशभर के सहारा इंडिया निवेशकों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने सहारा में फंसे पैसों की वापसी के लिए Sahara Refund Portal लॉन्च कर दिया है। इस पोर्टल के जरिए सहारा में निवेश करने वाले लोग आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर अपनी जमा राशि वापस पा सकते हैं। सरकार ने इस पहल के तहत 5,000 करोड़ रुपये की राशि रिफंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    झारखंड के हजारों निवेशकों को मिलेगा लाभ। 
    झारखंड में सहारा इंडिया में निवेश करने वाले हजारों लोगों का पैसा अटका हुआ है। हाल के विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना था। भाजपा और झामुमो (JMM) दोनों ने इसे अपने एजेंडे में प्रमुखता से उठाया था। अब इस पोर्टल की शुरुआत से निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण जगी है।

    क्या है सहारा विवाद?। 
    सहारा इंडिया वर्षों तक अपनी आकर्षक योजनाओं के तहत लोगों से धनराशि जमा करता रहा। लेकिन 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सेबी (SEBI) ने सहारा समूह पर कई प्रतिबंध लगाए। इसके बाद लाखों निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। अब केंद्र सरकार ने Sahara Refund Portal लॉन्च कर इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    कैसे करें रिफंड के लिए आवेदन?। 
    निवेशक Sahara Refund Portal पर जाकर कुछ आसान स्टेप्स में अपनी राशि वापस पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं:

    पंजीकरण करें:

    पोर्टल पर जाएं (https://mocrefund.crcs.gov.in) और साइन अप करें।
    आवेदन फॉर्म भरें:

    अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जमा राशि और अन्य आवश्यक विवरण भरें।
    दस्तावेज़ अपलोड करें:

    आधार कार्ड, पैन कार्ड (₹50,000 से अधिक राशि के लिए), निवेश की रसीद, और बैंक खाता विवरण अपलोड करें।
    आवेदन सबमिट करें:

    सभी विवरण सही भरने के बाद आवेदन सबमिट करें।
    रिफंड स्टेटस चेक करें:

    पोर्टल पर लॉगिन कर “रिफंड स्टेटस” लिंक पर जाकर अपने आवेदन का स्टेटस देखें।
    जरूरी दस्तावेज़
    आधार कार्ड: पहचान प्रमाण के लिए।
    पैन कार्ड: ₹50,000 से अधिक राशि के लिए अनिवार्य।
    निवेश प्रमाण (रसीद या डिपॉजिट प्रूफ): जमा की पुष्टि के लिए।
    बैंक खाता विवरण: राशि ट्रांसफर करने के लिए।
    रिफंड स्टेटस कैसे जांचें?
    पोर्टल पर लॉगिन करें।
    “रिफंड स्टेटस” पर क्लिक करें।
    अपनी आवेदन संख्या डालें और सबमिट करें।
    स्क्रीन पर आपका बकाया अमाउंट और प्रक्रिया की जानकारी दिखाई देगी।
    निवेशकों के लिए राहत का कदम।
    सहारा इंडिया के निवेशकों के लिए यह पहल बड़ी राहत है। वर्षों से अपने बकाया पैसों की वापसी का इंतजार कर रहे लोग अब इस पोर्टल के जरिए अपनी राशि वापस पा सकते हैं।

  • शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने वाला गिरफ्तार

    गिरिडीह:  गावां थाना क्षेत्र की एक युवती ने 27 वर्षीय मोहम्मद शाहनवाज आलम पर शादी का झांसा देकर पांच साल तक यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    शादी का वादा, फिर छलावा
    पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि पिछले पांच सालों से वह और आरोपी मोहम्मद शाहनवाज एक रिश्ते में थे। इस दौरान वे अक्सर एक-दूसरे से मिलते और साथ समय बिताते थे। लेकिन जब भी शादी की बात होती, शाहनवाज कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देता था। युवती का आरोप है कि इस दौरान उसने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

    समाज की बैठक में बना था शादी का फैसला। 
    पीड़िता ने यह भी खुलासा किया कि करीब पांच महीने पहले शाहनवाज ने उसे गावां बुलाया और गावां पुल के नीचे उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। जब इस घटना की जानकारी गांव के लोगों को हुई, तो समाज के प्रबुद्ध लोगों ने दोनों परिवारों के बीच बैठक कराई। बैठक में यह तय हुआ कि दोनों 2 नवंबर को कोर्ट मैरिज करेंगे। उस समय शाहनवाज और उसके परिवार ने इस पर सहमति दी थी।

    शादी से किया इनकार, कोर्ट भी नहीं पहुंचा । 
    लेकिन 2 नवंबर के दिन शाहनवाज ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और कोर्ट भी नहीं पहुंचा। युवती के लिए यह बड़ा धोखा था, जिसके बाद उसने गावां थाना में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस की कार्रवाई
    गावां थाना के एक अधिकारी  ने जानकारी दी कि युवती के आवेदन के आधार पर कांड संख्या 122/2024 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी मोहम्मद शाहनवाज आलम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

  • Jharkhand: राज्य में आज और कल बारिश होने की संभावना, बढ़ेगी ठंड

    बंगाल की खाड़ी में एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय हो रहा है, जिसका प्रभाव झारखंड पर दो दिनों तक देखा जा सकता है। इस विक्षोभ के कारण राज्य में दो दिन बारिश होने की संभावना है, जिसके बाद ठंड बढ़ जाएगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने यह जानकारी दी है।

    मौसम केंद्र के प्रभारी निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण 8 और 9 दिसंबर को झारखंड के सभी जिलों में बारिश हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान में गिरावट और न्यूनतम तापमान में वृद्धि की संभावना है।

    उन्होंने आगे बताया कि 10 दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। इसके बाद न्यूनतम तापमान में गिरावट और अधिकतम तापमान में मामूली वृद्धि होगी। झारखंड में इसका आंशिक प्रभाव रहेगा, जिससे हल्की बारिश हो सकती है।

    8 दिसंबर को राज्य के 11 जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि 9 दिसंबर को गढ़वा, पलामू और लातेहार को छोड़कर शेष 21 जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।

  • विधायक जयराम महतो नंगे पांव क्यों आए विधान सभा !

    परवेज़ आलम  की रिपोर्ट ………

    झारखंड विधान सभा का विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है।छठे विधान सभा के लिए चुनकर आए विधायकों को आज प्रोटेम स्पीकर शपथ दिलाएंगे। सभी  81 विधायक विधान सभा आयेंगे पर चर्चा विधायक जयराम महतो की शुरू हो गई है । आज वे नंगे पांव विधान सभा पहुंचे तो खबर की सुर्खियां  बन गई । मीडिया ने सवाल किया तो क्या कहा जयराम ने “आप मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा और गिरजाघर जाते हैं तो चप्पल पहनकर जाते हैं । नहीं न । तो विधानसभा भी लोकतंत्र का मंदिर है जिससे झारखंड के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है तो फिर….

    गरीब विधायक जयराम महतो : साधारण जीवनशैली बनी चर्चा का विषय. 

    झारखंड के डुमरी विधानसभा से विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता जयराम महतो ने अपने सादगी भरे अंदाज से सबका ध्यान खींचा। सोमवार को विधानसभा में प्रवेश करते वक्त जयराम महतो बिना चप्पल-जूते के नंगे पांव पहुंचे। सदन के प्रवेश द्वार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर मत्था टेककर उन्होंने सदन को ‘प्रमाण’ किया और फिर अंदर गए।

    संघर्षशील विधायक का खास अंदाज. 

    30 वर्षीय जयराम महतो को झारखंड का सबसे गरीब विधायक माना जाता है। सादगी और संघर्ष उनकी पहचान है। विधानसभा में प्रवेश के दौरान भी उनके पैरों में चप्पल नहीं थी, जो उनकी साधारण जीवनशैली को दर्शाता है। उन्होंने जिस अंदाज में सदन के प्रति सम्मान व्यक्त किया, वह उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

    युवाओं की आवाज उठाने का वादा . 

    जयराम महतो ने चुनाव प्रचार से लेकर विधायक बनने तक युवाओं और आम जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। उनकी आक्रामक भाषण शैली और गाड़ी के बोनट पर खड़े होकर जनता से संवाद करने का अंदाज उन्हें युवाओं में खासा लोकप्रिय बनाता है। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि वह रोजगार, स्थानीय नीति और झारखंड के विकास के मुद्दों को जोर-शोर से सदन में उठाएंगे।

    जेएलकेएम ने बिगाड़ा बीजेपी-आजसू का समीकरण. 

    विधानसभा चुनाव 2024 में जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम ने सिर्फ एक सीट जीती, लेकिन 71 सीटों पर चुनाव लड़कर करीब 12 लाख वोट हासिल किए। इनके कारण बीजेपी और आजसू पार्टी के कई उम्मीदवारों का सियासी गणित बिगड़ गया। जयराम महतो की पार्टी ने झारखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है।

    संघर्षों से भरी जिंदगी. 

    जयराम महतो की जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही है। खुद जयराम बताते हैं कि उनका जीवन मां के गर्भ से ही मुश्किलों में था। जन्म के तुरंत बाद अंधविश्वास के चलते उनकी नानी उन्हें अपने साथ ले गईं। गांव-घर के लोगों का मानना था कि उनके घर पर किसी बुरी शक्ति का साया है, जो बच्चों की मौत का कारण बनती है। जयराम अपनी मां का दूध तक नहीं पी सके।

    सादगी बनी प्रेरणा. 

    झारखंड में 81 विधायकों में जयराम महतो की संपत्ति सबसे कम है। उनका जीवन और संघर्ष आज भी उन्हें जमीन से जोड़े रखता है। विधानसभा में नंगे पांव पहुंचने का उनका यह अंदाज झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में नई प्रेरणा लेकर आया है।

     

  • झारखंड: 59 लाख लोगों का समर्थन पार्टी के पास-बाबू लाल मारंडी

    रांची: झारखंड में विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अपने संगठन महापर्व को 22 दिसंबर से विधिवत रूप से शुरू करने जा रही है। इस महापर्व के माध्यम से पार्टी ने राज्य के हर कोने तक अपनी पहुंच मजबूत करने का लक्ष्य तय किया है। संगठन के इस बड़े अभियान से पहले 15 और 16 दिसंबर को सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें प्रदेश नेतृत्व सक्रिय रूप से भाग लेगा। इसके बाद, 18 और 19 दिसंबर को सभी 515 मंडलों में कार्यशालाएं होंगी।

    अटल जयंती पर विशेष सदस्यता कार्यक्रम
    पार्टी ने झारखंड के निर्माता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती, 25 दिसंबर को, सदस्यता के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह पहल पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और उसकी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।

    “सदस्यता अभियान संगठन का महापर्व है”
    झारखंड सदस्यता अभियान की प्रभारी और आंध्र प्रदेश भाजपा की अध्यक्ष सांसद डी. पुरंदेश्वरी ने कार्यशाला में कहा कि भाजपा का सदस्यता अभियान महज एक आयोजन नहीं, बल्कि एक उत्सव है। उन्होंने इसे पार्टी के “महापर्व” का दर्जा देते हुए कहा, “2014 में जब सदस्यता अभियान शुरू हुआ था, तब हमने 9 करोड़ सदस्यों का लक्ष्य हासिल किया था। आज, देशभर में यह संख्या 11.35 करोड़ तक पहुंच गई है। झारखंड में इस अभियान को फिर से शुरू करने के बाद यह संख्या 14 करोड़ के करीब जा सकती है।”

    पुरंदेश्वरी ने यह भी बताया कि सदस्यता महापर्व का मुख्य उद्देश्य भाजपा को “सर्व स्पर्शी, सर्व व्यापी, और सर्व समावेशी” बनाना है।

    “जनता का आशीर्वाद बना हमारी ताकत”: बाबूलाल मरांडी
    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र के उत्सव के बाद अब संगठन महापर्व में जुट गई है। उन्होंने बताया कि भले ही विधानसभा चुनावों में संख्या बल में भाजपा पीछे रह गई हो, लेकिनहै।

    उन्होंने कहा, “चुनाव हमारे लिए एक पड़ाव है, लेकिन जनता के साथ हमारा संवाद निरंतर रहेगा। हमारी नीतियां और कार्यक्रम जनता तक बार-बार पहुंचेंगे।” उन्होंने संगठन महापर्व को भाजपा के विचार और दृष्टिकोण को मजबूत करने का सुनहरा अवसर बताया।

    कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रविंद्र राय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा की विचारधारा भारतीय संस्कृति और मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने इसे समाजवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद जैसे विदेशी विचारों से भिन्न बताते हुए पार्टी की जड़ों को और मजबूत करने की अपील की।

    सदस्यता महापर्व: संगठन की नई दिशा
    इस महापर्व के लिए पार्टी ने सभी स्तरों पर विस्तृत योजनाएं बनाई हैं। प्रदेश महामंत्री कर्मवीर सिंह ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से सदस्यता अभियान की रणनीतियों को विस्तार से समझाया।

    भाजपा की इस बड़ी पहल का उद्देश्य न केवल संगठन का विस्तार करना है, बल्कि झारखंड में अपने राजनीतिक प्रभाव को भी नई ऊर्जा देना है। यह स्पष्ट है कि भाजपा इस महापर्व को केवल एक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक संगठनात्मक आंदोलन के रूप में देख रही है।

     

  • आजसू की समीक्षा बैठक: हार की वजहें, संघर्ष का संकल्प

    रांची: झारखंड की राजनीति में हालिया विधानसभा चुनाव के परिणामों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों के जवाब तलाशने और आगे की रणनीति तय करने के लिए आजसू पार्टी ने अपने केंद्रीय कार्यालय, हरमू में समीक्षा बैठक की। पार्टी अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने स्पष्ट किया कि जनहित के सकारात्मक मुद्दों पर वे सरकार के साथ खड़े रहेंगे, लेकिन जहां भी जनविरोधी निर्णय होंगे, वहां विपक्ष की धारदार भूमिका निभाई जाएगी।

    “जातीय ध्रुवीकरण चुनाव का आधार”: सुदेश महतो
    सुदेश कुमार महतो ने इंडिया गठबंधन की जीत को जातीय ध्रुवीकरण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “यह चुनाव विकास के आधार पर नहीं, बल्कि जातीय ध्रुवीकरण के जरिए लड़ा गया। एनडीए के अंदर समन्वय की कमी भी अप्रत्याशित परिणाम का कारण बनी।”

    बैठक में संसदीय बोर्ड के सदस्य और चुनाव में उतरे प्रत्याशी शामिल हुए। प्रत्याशियों ने चुनावी चूक और स्थानीय स्तर पर कमजोरियों पर खुलकर चर्चा की।

    “जनादेश का सम्मान, संघर्ष जारी रहेगा”
    सुदेश महतो ने कहा कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन उनके संघर्ष की दिशा साफ है। “हम जनादेश का सम्मान करते हैं। लेकिन सरकार को यह याद रखना होगा कि जनता के हित में काम चुनावी वर्ष से नहीं, पहले दिन से शुरू होना चाहिए।”

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे झारखंडी, मूलवासी, पिछड़ों और बेरोजगारों के हक की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी इस राज्य की सबसे बड़ी समस्या है, और इसे सुलझाने में सरकार की गंभीरता पर नज़र रखी जाएगी।

    “जनता की भावनाओं को नहीं समझ पाए”: चंद्रप्रकाश चौधरी . 
    बैठक में सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने चुनाव परिणामों पर आत्ममंथन करते हुए कहा, “हम जनता की भावनाओं को समझने में चूक गए। स्थानीय मुद्दों का चुनावी बहस से गायब होना जनता को पसंद नहीं आया।”

    उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार की विफलताओं को जनता तक सही तरीके से पहुंचाने में भी पार्टी विफल रही। “अब हमारी प्राथमिकता जनता का विश्वास दोबारा जीतने की है, और इसके लिए हमारी रणनीति और मजबूत होगी।”

    नई शुरुआत की ओर आजसू . 
    आजसू पार्टी इस समीक्षा बैठक के जरिए चुनावी हार के कारणों को समझने और आने वाले समय में जनता के बीच फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की योजना बना रही है।