Author: The News Post4u

  • पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं मंत्री हफीजुल हसन

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………

    आज हम बात करेंगे झारखंड की राजनीति के उस चेहरे की, जो अपने। मधुपुर की जनता के लिए यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। राजनीति में पिता के साये में पले-बढ़े हफीजुल ने जिस सफर की शुरुआत की, आज वह झारखंड की सत्ता का एक अहम चेहरा हैं।”

    हफीजुल हसन अंसारी, झामुमो के दिवंगत नेता हाजी हुसैन अंसारी के पुत्र हैं। पिता के निधन के बाद, उन्होंने सरकारी नौकरी को छोड़कर राजनीति की ओर रुख किया।

    “चलिए, थोड़ा पीछे चलते हैं। यह कहानी 2020 से शुरू होती है, जब कोरोना के संक्रमण ने झारखंड की सियासत से हाजी हुसैन अंसारी जैसे कद्दावर नेता को छीन लिया। हेमंत सोरेन की कैबिनेट में मंत्री रहे हाजी साहब का  जाना झारखंड के लिए एक बड़ी क्षति थी। लेकिन सवाल उठा कि उनकी खाली हुई जगह को कौन भरेगा?”

    2021 का उपचुनाव आया। मधुपुर विधानसभा की सीट पर झामुमो ने हफीजुल को मौका दिया और उन्होंने न सिर्फ जीत हासिल की, बल्कि यह दिखा दिया कि वे राजनीति में अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलने के लिए तैयार हैं।

    “लेकिन सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं था। सवाल था, क्या वे अपने पिता की तरह जनता के विश्वास पर खरे उतरेंगे? और यहीं से उनके सियासी सफर की असली शुरुआत होती है।”

    बीआईटी सिंदरी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले हफीजुल ने झारखंड राज्य खनिज निगम में बतौर सर्वेयर करियर शुरू किया। लेकिन राजनीति शायद उनके खून में थी। पिता के साथ 1995 से ही साये की तरह रहे हफीजुल ने राजनीति के गुर वहीं सीखे।

    “यह कहना आसान है कि राजनीति विरासत में मिली। लेकिन क्या यह विरासत इतनी आसान थी? हफीजुल ने अपने पिता के अभियान में शामिल होकर जमीनी राजनीति की वो हर बारीकी सीखी, जो सिर्फ किताबों में नहीं मिलती।”

    2021 से लेकर आज तक हफीजुल हसन अंसारी ने मंत्री पद संभाला। चाहे चंपाई सोरेन की कैबिनेट हो, या फिर हेमंत सोरेन की सत्ता वापसी, हर बार उन्होंने अपनी भूमिका निभाई। लेकिन सवाल यह है—क्या मधुपुर की जनता उन्हें सिर्फ अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में देखती है, या उनकी खुद की पहचान भी बन चुकी है?

    “चार भाइयों में सबसे बड़े हफीजुल हसन अंसारी की यह यात्रा सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि एक संघर्ष की है। लेकिन यह संघर्ष अब भी जारी है। राजनीति में जनता का विश्वास जितना कठिन है, उसे बनाए रखना उससे भी कठिन। और यही हफीजुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।”

    “तो क्या वे झारखंड की राजनीति में अपने पिता की तरह कद्दावर नेता बन पाएंगे? या फिर यह कहानी भी सियासत की भूल-भुलैया में खो जाएगी?”

  • मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन के भरोसेमंद ,आवाम के विश्वास पर खरा उतरना असली कसौटी

    गिरिडीह से परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….

    बात झारखंड की राजनीति में उभरते हुए उस चेहरे की, जिसे हेमंत सोरेन के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है—सुदिव्य कुमार सोनू । मंत्री पद की शपथ लेने वाले इस नेता का सफर राजनीति की ऊंचाइयों और संघर्षों का दिलचस्प दस्तावेज़ है।”

    गिरिडीह के इस विधायक ने झामुमो के टिकट पर पहली बार 2009 में चुनाव लड़ा। तब छठे स्थान पर रहे। आठ हजार वोट हासिल कर राजनीति में एक छोटे कदम से शुरुआत की। लेकिन यही कदम धीरे-धीरे उस शख्सियत को आकार देने लगे, जिसे आज गिरिडीह की जनता अपने ‘जनप्रतिनिधि’ के रूप में देखती है।

    “पर राजनीति में हर कदम आसान नहीं होता। 2014 में मोदी लहर के बीच वे बीजेपी के विधायक निर्भय कुमार शहबादी से हार गए। लेकिन हार का यह घाव उनकी जिजीविषा को और तीखा कर गया।”

    2019 का चुनाव आया। कहानी बदल गई। सुदिव्य कुमार सोनू ने वही सीट जीती, जहां से 2014 में हारकर लौटे थे। 15 हजार से ज्यादा वोटों से बीजेपी के उसी प्रत्याशी को हराया। यह जीत सिर्फ जीत नहीं थी। यह उस संघर्ष का नतीजा था, जो राजनीति में धैर्य और मेहनत से लिखा गया।

    “गौर करने वाली बात यह है कि सुदिव्य कुमार का ग्राफ हर चुनाव के साथ बढ़ता गया। 2009 में छठा स्थान। 2014 में दूसरे स्थान पर छलांग। और 2019 में विजय। यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस जमीनी राजनीति का सबूत है, जो धीरे-धीरे जनता के दिलों में जगह बनाती है।”

    हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बनने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का नाम उनकी मुखरता और सियासी सूझबूझ के लिए भी जाना जाता है। विधानसभा में उनकी आवाज़ झामुमो के लिए एक ताकत मानी जाती है। लेकिन राजनीति में सवाल सिर्फ पद का नहीं होता। सवाल यह है कि यह पद जनता के लिए कितना सार्थक साबित होता है।

    “तो क्या गिरिडीह के इस नेता का यह नया कद झारखंड की जनता के सपनों को पूरा करने का जरिया बनेगा? या फिर यह भी सिर्फ सत्ता की सियासत का एक और नाम होगा?”

    शपथ लेने के बाद अब नजरें उनके अगले कदमों पर हैं। गिरिडीह की जनता उनके साथ है। लेकिन राजनीति में जनता का विश्वास सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस पर खरा उतरना ही असली कसौटी है।

    “आप सवाल पूछते रहिए। क्योंकि लोकतंत्र की ताकत सवालों में ही है।”

  • देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री

    मुंबई से रिपोर्ट……
    मुंबई का आजाद मैदान। देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली । उनके साथ एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मैदान खचाखच भरा हुआ था। एक तरफ भीड़ थी, दूसरी तरफ चेहरे। चेहरे, जिनके पीछे चमकती कैमरों की रोशनी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सलमान खान और सचिन तेंदुलकर तक पहुंचे। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा, शिवसेना, और एनसीपी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोग भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने देवेंद्र फडणवीस को बधाई देते हुए उनके कार्यकाल को सफल होने की शुभकामनाएं दीं।
    देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने हैं।
    • पहली बार: 2014 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार के दौरान।
    • दूसरी बार: 2019 में मात्र 80 घंटे के लिए।
    • तीसरी बार: अब 2024 में।
    राजनीतिक सफर
    • 22 साल की उम्र: 1992 में नागपुर नगर पालिका के पार्षद बने।
    • 27 साल की उम्र: 1997 में नागपुर के मेयर बने।
    • 1999: पहली बार विधायक चुने गए।
    • 2014: महाराष्ट्र के दूसरे सबसे युवा मुख्यमंत्री बने।
    • 2019: मुख्यमंत्री पद पर वापसी, लेकिन केवल 80 घंटे के लिए।
    व्यक्तिगत जीवन और पढ़ाई
    • जन्म: 22 जुलाई 1970, नागपुर।
    • शिक्षा: लॉ में स्नातक, बिजनेस और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की पढ़ाई जर्मनी से।
    • परिवार: पिता गंगाधर राव संघ और जनसंघ से जुड़े थे।
    • पत्नी: अमृता फडणवीस।
    दिलचस्प बातें
    1. देवेंद्र फडणवीस ने इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी का विरोध करते हुए इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल से अपना नाम कटवा लिया था।
    2. उन्होंने 2006 में मॉडलिंग भी की थी, और अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें “मॉडल विधायक” कहकर बुलाते थे।
    3. फडणवीस ने बजट पर एक किताब भी लिखी है।
    राजनीति के इस रंगमंच पर सब कुछ लिखा हुआ है। हर संवाद तय है। हर तालियों की गूंज सुनियोजित। लेकिन जनता का क्या? जो हर बार इन वादों की पटकथा में कहीं खो जाती है।
    “तो सवाल यही है—क्या महाराष्ट्र के लिए देवेंद्र फडणवीस की यह नई पारी वाकई नई सुबह होगी? या फिर वही पुरानी कहानी, जहां नेता बड़े हो जाते हैं और जनता छोटी?”

  • कैबिनेट का विस्तार, जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी के 11 विधायकों ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    Ranchi:

    कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने मंत्री के रूप में शपथ ली। मांडर विधानसभा सीट से दूसरी बार चुनाव में जीत हासिल करने वाली शिल्पी नेहा तिर्की पहली बार मंत्री बनीं हैं। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की ने 2022 के उपचुनाव में पहली बार जीत हासिल की थी और इस बार भी मांडर सीट से उन्होंने दूसरी बार जीत हासिल की।
    01:23 PM, Dec 05 2024

    जेएमएम के सुदिव्य कुमार ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने मंत्री के रूप में शपथ ली। सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। वो पहली बार मंत्री बने हैं।
    01:20 PM, Dec 05 2024

    जेएमएम के योगेंद्र प्रसाद ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के योगेंद्र प्रसाद को 9वें मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। गोमिया विधानसभा सीट से दूसरी बार चुनाव में जीत हासिल करने वाले योगेंद्र प्रसाद पहली बार मंत्री बने हैं।
    01:17 PM, Dec 05 2024

    कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह ने शपथ ली

    कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली। महागामा विधानसभा सीट से दूसरी बार निर्वाचित दीपिका पांडेय सिंह इससे पहले भी हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। इस बार उन्होंने दूसरी बार मंत्री के रूप में शपथ ली।
    01:15 PM, Dec 05 2024

    हफीजुल हसन ने उर्दू में शपथ ली

    जेएमएम के हफीजुल हसन ने उर्दू में मंत्री के रूप में शपथ ली।
    01:13 PM, Dec 05 2024

    जेएमएम के हफीजुल हसन ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के हफीजुल हसन ने मंत्री के रूप में शपथ ली। हफीजुल हसन ने अपने पिता और मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद 2021 के उपचुनाव में पहली बार जीत हासिल की। इसके बाद वो हेमंत सोरेन और चंपाई सोरेन सरकार में भी मंत्री रहे और अब लगातार तीसरी बार उन्होंने मंत्री के रूप में शपथ ली।
    कांग्रेस के इरफान अंसारी ने मंत्री के रूप में शपथ ली
    01:10 PM, Dec 05 2024

    कांग्रेस के इरफान अंसारी ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    जामताड़ा के कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने मंत्री के रूप में शपथ ली। जामताड़ा विधानसभा सीट से तीसरी बार जीत हासिल करने वाले इरफान अंसारी पिछली बार भी आलमगीर आलम के जेल जाने के बाद मंत्री बने थे।
    01:08 PM, Dec 05 2024

    जेएमएम के रामदास सोरेन ने शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक रामदास सोरेन ने मंत्री के रूप में शपथ ली। रामदास सोरेन पिछली बार चंपाई सोरेन के त्यागपत्र देने के बाद मंत्री बने थे। घाटशिला से तीसरी बार चुनाव में जीत हासिल करने वाले रामदास सोरेन ने दूसरी बार मंत्री के रूप में शपथ ली।
    01:05 PM, Dec 05 2024

    आरजेडी के संजय प्रसाद यादव ने शपथ ली

    राष्ट्रीय जनता दल के विधायक संजय प्रसाद यादव ने मंत्री के रूप में शपथ ली। संजय प्रसाद यादव पहली बार मंत्री बने हैं। गोड्डा विधानसभा सीट से पहले भी चुनाव जीत चुके संजय प्रसाद यादव को पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है।
    01:03 PM, Dec 05 2024

    चमरा लिंडा ने मंत्री के रूप में शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक चमरा लिंडा ने दीपक बिरुवा के बाद मंत्री के रूप में शपथ ली। चमरा लिंडा ने जेएमएम टिकट पर बिशुनपुर विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। वो पहली बार मंत्री बने हैं।

    जेएमएम के दीपक बिरुवा ने शपथ ली

    झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक दीपक बिरुवा ने मंत्री के रूप में शपथ ली। दीपक बिरुवा चाईबासा सीट से लगातार चौथी बार चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं।
    01:00 PM, Dec 05 2024

    सीएम हेमंत सोरेन ने राधाकृष्ण किशोर को दी शुभकामनाएं

    कांग्रेस विधायक के रूप में मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले राधाकृष्ण किशोर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और अन्य मंत्रियों ने बधाई और शुभकामनाएं दी।
    12:57 PM, Dec 05 2024

    राधाकृष्ण किशोर ने सबसे पहले मंत्री के रूप में शपथ ली

    कांग्रेस विधायक राधाकृष्ण किशोर ने सबसे पहले मंत्री के रूप में शपथ ली। राधाकृष्ण किशोर ने इस बार छतरपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। इससे पहले भी वो चार बार कांग्रेस, जेडीयू और बीजेपी टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं।
    12:55 PM, Dec 05 2024

    स्टीफन मरांडी को सीएम ने दी शुभकामनाएं

    प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ लेने के बाद स्टीफन मरांडी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुभकामनाएं दी।
    12:52 PM, Dec 05 2024

    प्रोटेम स्पीकर के बाद मंत्रियों का शपथ ग्रहण

    प्रोटेम स्पीकर के रूप में स्टीफन मरांडी के शपथ लेने के बाद जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी कोटे से सरकार में शामिल विधायकों को मंत्री के रूप में शपथ दिलाई जा रही है।
    12:49 PM, Dec 05 2024

    स्टीफन मरांडी को प्रोटेम स्पीकर के रूप में दिलाई गई

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी को प्रोटेम स्पीकर को शपथ दिलाई गई।
    12:47 PM, Dec 05 2024

    राज्यपाल पहुंचे समारोह स्थल पर

    राज्यपाल संतोष गंगवार समारोह स्थल पर पहुंच गए हैं। राज्यपाल के पहुंचते ही राष्ट्र गान के साथ समारोह की शुरुआत
    12:44 PM, Dec 05 2024

    हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन एक साथ पहुंचे

    शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन एक साथ समारोह स्थल पर पहुंचे। हेमंत सोरेन ने सबसे पहले प्रोटेम स्पीकर स्टीफन मरांडी से आशीर्वाद लिया।
    12:39 PM, Dec 05 2024

    राज्यपाल के समारोह स्थल पर पहुंचने का इंतजार

    हेमंत सोरेन कैबिनेट विस्तार में सभी अतिथि शपथ पहुंच गए है। अब कुछ ही क्षण में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के समारोह स्थल पर पहुंचने की उम्मीद हैं। राज्यपाल सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
    12:33 PM, Dec 05 2024

    मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले विधायक आगे बैठे

    मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी विधायक मंच के नीचे सबसे आगे बैठे हुए हैं। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए उनके कई परिजन भी मौके पर पहुंचे हैं।
    12:32 PM, Dec 05 2024

    शपथ ग्रहण समारोह में इंडिया गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे

    शपथ ग्रहण समारोह में इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी के कई वरिष्ठ नेता राजभवन पहुंचे हैं। फिलहाल राज्यपाल के समारोह स्थल पर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।
    12:27 PM, Dec 05 2024

    जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी के 11 मंत्री लेंगे शपथ

    इंडिया गठबंधन में शामिल जेएमएम, आरजेडी और कांग्रेस के कुल 11 मंत्री शपथ लेंगे। इसमें जेएमएम से दीपक बिरुवा, रामदास सोरेन, सुदिव्य कुमार सोनू, हफीजुल हसन, योगेंद्र प्रसाद और चमरा लिंडा के नाम शामिल हैं।
    12:26 PM, Dec 05 2024

    कांग्रेस के 4 विधायक मंत्री के रूप में लेंगे शपथ

    कांग्रेस कोटे से चार विधायकों को मंत्री के रूप में शपथ दिलाए जाने की संभावना है। इसमें डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, राधाकृष्ण किशोर और शिल्पी नेहा तिर्की शामिल हैं।
    12:26 PM, Dec 05 2024

    आरजेडी के संजय प्रसाद यादव लेंगे शपथ

    आरजेडी कोटे से गोड्डा विधायक संजय प्रसाद यादव मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। पार्टी की ओर से देवघर विधायक सुरेश पासवान को विधायक दल का नेता बनाया गया है।
    12:26 PM, Dec 05 2024

    शपथ ग्रहण को लेकर विधायक राजभवन पहुंचे

    शपथ ग्रहण को लेकर पार्टी विधायक राजभवन पहुंच चुके हैं। कांग्रेस, जेएमएम-आरजेडी के कई विधायक और वरिष्ठ नेता राजभवन पहुचे हैं।
    12:26 PM, Dec 05 2024

    कांग्रेस-जेएमएम और आरजेडी के 5 विधायक पहली बार बनेंगे मंत्री

    कांग्रेस-जेएमएम और आरजेडी के पांच विधायक पहली बार मंत्री बनेंगे,जबकि छह अन्य चेहरे पुरानी सरकार में भी शामिल थे।
  • गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू बने मंत्रिमंडल का हिस्सा ।

    गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू बने मंत्रिमंडल का हिस्सा ।

  • संजय प्रसाद यादव होंगे RJD कोटे से मंत्री, हेमंत कैबिनेट में होंगे शामिल

    आरजेडी की ओर से अपने मंत्री का नाम तय कर दिया है। गोड्डा से विधायक संजय प्रसाद यादव आरजेडी कोटे से मंत्री बनाये जायेंगे। बता दें कि यादव ने बीजेपी के उम्मीदवार अमित मंडल को चुनाव में पराजित किया था। संजय प्रसाद यादव लालू यादव के करीबी माने जाते हैं। गौरतलब है कि कल 5 दिसंबर को हेमंत सोरेन सरकार की  मंत्रिमंडल का विस्तार होना है।

  • कांग्रेस कोटे से मंत्रियों के नाम तय हो गए हैं। राधाकृष्ण किशोर, इरफान, दीपिका, और शिल्पी नेहा को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा।

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नई कैबिनेट आज शपथ लेगी। शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12:30 बजे राजभवन में आयोजित होगा। बुधवार रात तक मंत्रियों की सूची राजभवन को नहीं भेजी गई थी, लेकिन गुरुवार सुबह इसे भेजने की योजना है। कांग्रेस कोटे से मंत्रियों के नाम सामने आ गए हैं। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कोटे से राधाकृष्ण किशोर, डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की को मंत्री बनाया जाएगा। इन नेताओं को देर रात इसकी सूचना दी गई। हालांकि, राजद के एक मंत्री के नाम को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और संशय बना हुआ है।

    संतुलन और समीकरण पर विशेष ध्यान

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इसमें तय किया गया कि कैबिनेट में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, जातीय और राजनीतिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश बुधवार रात दिल्ली से रांची लौटे। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद ही कांग्रेस के मंत्रियों के नाम तय किए गए। विधायक भी दिल्ली से लौटने के बाद रांची में अपनी नई जिम्मेदारियों को लेकर उत्सुक दिखे।

     

  • शपथ ग्रहण से पहले आई मंत्रियों की सूची

    झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कैबिनेट का विस्तार गुरुवार को दोपहर 12 बजे होने वाला है। राजभवन के बिरसा मंडप में हेमंत सोरेन के 11 मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ ग्रहण से पहले हेमंत सोरेन के मंत्रियों की सूची में कौन-कौन से विधायक शपथ ग्रहण करेंगे-

    संजय प्रसाद यादव (राजद )
    दीपिका पांडेय (कांग्रेस )
    शिल्पी नेहा तिर्की (कांग्रेस )
    इरफ़ान अंसारी (कांग्रेस )
    राधाकृष्ण किशोर (कांग्रेस)
    दीपक बिरुआ (झामुमो)
    रामदास सोरेन (झामुमो)
    सुदिव्य सोनू (झामुमो )
    चमरा लिंडा (झामुमो)
    योगेंद्र महतो (झामुमो )
    हफ़ीजुल हसन (झामुमो)

  • JSSC ने CGL परीक्षा का परिणाम जारी किया

    रांची से मिली खबर के मुताबिक…….

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) का परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया। इस परीक्षा के अंतर्गत कुल 2,025 पदों के लिए 2,231 अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए बुलाया गया है। आयोग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि प्रमाणपत्रों की जांच 16 से 20 दिसंबर 2024 के बीच नामकोम, रांची स्थित आयोग कार्यालय में होगी।

    प्रमाणपत्र जांच का समय और प्रक्रिया
    प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया रोजाना दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगी। अभ्यर्थियों को उनके क्रमांक के आधार पर जांच के लिए बुलाया गया है, जिसकी जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी निर्धारित तिथि से एक घंटा पहले जांच स्थल पर पहुंचना सुनिश्चित करें।

    प्रमाणपत्र जांच का मतलब अंतिम चयन नहीं
    आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बुलाया जाना, अंतिम चयन की पुष्टि नहीं करता है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य अभ्यर्थियों को भी जांच के लिए बुलाया जा सकता है। अभ्यर्थियों से अनुरोध किया गया है कि वे नियमित रूप से आयोग की वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें।

    परीक्षा के दौरान विवाद
    यह परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 6 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया था। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे। हालांकि, राजभवन के निर्देश पर हुई जांच में इन आरोपों के पुख्ता सबूत नहीं मिले। आयोग की समिति ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद परिणाम जारी करने का निर्णय लिया।अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट उनके नॉर्मलाइज्ड अंकों के आधार पर तैयार की गई है। चयनित उम्मीदवार jssc.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। साथ ही, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का पूरा शेड्यूल भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

    नोट: चयनित उम्मीदवारों से समय पर दस्तावेज़ सत्यापन के लिए उपस्थित होने का अनुरोध किया गया है, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

  • छठे दिन भी बंगाल से नहीं आया आलू

    रांची से रिपोर्ट ……..

    आज झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर आलू की लड़ाई से जुड़ी खबर लेकर आया हूं। जी हां, आलू, जिसे हर घर के रसोई में सबसे जरूरी चीज़ माना जाता है, वह इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक रस्साकशी में फंस गया है।

    डिबूडीह चेकपोस्ट पर सन्नाटा।
    पश्चिम बंगाल पुलिस ने लगातार छठे दिन आलू से लदे ट्रकों को झारखंड की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया। केवल एक-दो ट्रक ही पहुंचे, लेकिन उन्हें भी वापस गोदाम लौटा दिया गया। वजह? पश्चिम बंगाल सरकार का आदेश।

    आलू अब राजनीति का सबक बन गया है।
    कभी ऐसा सोचा था कि एक आलू, जो खाने की प्लेट में एक आम चीज़ है, वह राज्य सरकारों के बीच इतना बड़ा विवाद खड़ा कर देगा? पश्चिम बंगाल से आने वाला आलू झारखंड की रसोई का बड़ा हिस्सा पूरा करता था। लेकिन अब झारखंड को सहारा मिला है उत्तर प्रदेश से। यूपी की मंडियों से आलू की खेप लगातार रांची के पंडरा कृषि बाजार समिति में पहुंच रही है।

    लेकिन कीमतों का खेल अभी भी जारी है।
    रांची  के थोक विक्रेता सुनील साहू  ने बताया कि मांग और आपूर्ति के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। आलू के दाम, सिर्फ झारखंड में नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के बाजारों से भी प्रभावित होते हैं। पर राहत की बात है कि फिलहाल झारखंड में आलू की किल्लत नहीं है।

    झारखंड को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश।
    बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि झारखंड में आलू की फसल देर से तैयार होती है, इसलिए राज्य को दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। बीएयू अब जल्दी तैयार होने वाली ‘अगात’ आलू की किस्मों पर शोध करेगा। यह झारखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम होगा।

    आने वाले कल की तैयारी।
    डॉ. दुबे ने कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि फसल को भविष्य की जरूरतों के लिए संरक्षित किया जा सके। उन्होंने नई पीढ़ी को कृषि पाठ्यक्रम में आने का आह्वान किया, क्योंकि कृषि का विकास तभी होगा, जब इसमें नई सोच वाले लोग कदम रखेंगे।

    आलू का यह मसला सिर्फ खाने-पीने की चीज का सवाल नहीं है।
    यह सवाल है कि कैसे एक साधारण फसल प्रशासनिक फैसलों और राज्य की नीतियों का चेहरा बन जाती है। यह सवाल है कि आत्मनिर्भरता की बात करने वाला झारखंड, क्यों पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है।