Author: The News Post4u

  • जामताड़ा में तालाब से 5 साल की बच्ची का शव बरामद, घटना स्थल पर पहुंचे विधायक इरफान अंसारी।

    जामताड़ा जिले के मिहिजाम थाना क्षेत्र में सोमवार को एक तालाब से 5 साल की बच्ची का शव बरामद हुआ। ग्रामीणों और परिजनों ने शव की पहचान की। इस घटना से पूरे गांव में हड़कंप मच गया, और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। सूचना मिलते ही जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जानकारी पुलिस को दी। विधायक के निर्देश पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को तालाब से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। इरफान अंसारी ने पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करने के आदेश दिए।

    पुलिस जांच में जुटी

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्ची तालाब में कैसे पहुंची और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। इस घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा। अभी सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

  • प्रति यूनिट बिजली दर को 6.65 रुपये से बढ़ाकर 9.25 रुपये करने का प्रस्ताव

    रिपोर्ट: रांची से …….

    झारखंड में बिजली वितरण निगम ने सोमवार को ऐसा प्रस्ताव पेश किया, जिसने आम उपभोक्ताओं के लिए  चिंता और जेबों में झटका पैदा कर दिया। राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष नई टैरिफ याचिका मेंसुझाव दिया गया है। यानी, बिजली की कीमत में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव।

    निगम का गणित: घाटा या बहाना?
    बिजली वितरण निगम का दावा है कि इस वृद्धि का कारण 13,000 करोड़ रुपये का वार्षिक रिसोर्स गैप है। यानी, बिजली की खरीद में खर्च और वसूले गए राजस्व के बीच इतना बड़ा अंतर। लेकिन सवाल है कि इस अंतर का भार हर बार उपभोक्ताओं पर ही क्यों डाल दिया जाता है?

    महाप्रबंधक (वाणिज्य) संजय सिंह का कहना है कि “रिसोर्स गैप की भरपाई के लिए दरों में संशोधन जरूरी है।”

    क्या है उपभोक्ताओं की स्थिति?
    राज्य में करीब 54 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। निगम का प्रस्ताव कहता है कि 200 यूनिट मासिक खपत तक फ्री बिजली और 200-400 यूनिट पर सब्सिडी जारी रहेगी। लेकिन यह राहत कितने लोगों को मिल पाएगी, यह देखना होगा।
    गिरिडीह  के एक छोटे दुकानदार, च्नदन साव , का कहना है, “बिजली दर पहले ही हमारे मुनाफे को खत्म कर रही है। अब इतनी बढ़ोतरी हुई तो बिजनेस चलाना मुश्किल हो जाएगा।”

    नियामक आयोग: क्या जनता की सुनेगा?
    विद्युत नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर फैसला लेने से पहले प्रमंडलवार जनसुनवाई करने की बात कही है। धनबाद, देवघर, डालटनगंज, और रांची में उपभोक्ताओं के विचार सुने जाएंगे। लेकिन सितंबर में जब निगम का 30.89 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज हुआ था, तब आयोग ने साफ कहा था कि “दर बढ़ाने का कोई कारण नहीं है।” तो सवाल है कि क्या अब अचानक हालात इतने बदल गए हैं कि दर में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी जरूरी हो गई?

    बढ़ोतरी का असर: आम आदमी से लेकर उद्योग तक
    बिजली दर में वृद्धि न केवल आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगी, बल्कि उद्योगों और व्यापारियों को भी मुश्किल में डालेगी। राज्य के छोटे और मझोले उद्योगों के लिए यह झटका भारी साबित हो सकता है।

    बड़ा सवाल: समाधान क्या है?
    क्या निगम अपनी वित्तीय खामियों को सुधारने की कोशिश करेगा?
    क्या जनता को बिना आर्थिक दबाव डाले घाटे की भरपाई का कोई विकल्प ढूंढा जाएगा?
    बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव केवल एक आंकड़ा नहीं है, यह आम आदमी के लिए रोजमर्रा की जरूरत पर सीधा प्रहार है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नियामक आयोग जनसुनवाई के बाद जनता के पक्ष में खड़ा होता है या निगम के घाटे को जनता की जेब से भरने की छूट देता है।

    (झारखंड में बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव और उससे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित रिपोर्ट।)

  • राजस्व संग्रहण का एक्शन प्लान बनाएं-CM

    रिपोर्ट: रांची से …….

    झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक में कहा, “राजस्व संग्रहण का एक्शन प्लान बनाएं।” उन्होंने यह भी समझाया कि विभागों के बीच समन्वय की कमी से राजस्व का पहिया थम जाता है। यह तो सही बात है, लेकिन क्या सचमुच विभागों के बीच तालमेल की कमी ही अकेली समस्या है?

    बोर्ड, निगम और एजेंसियां: नया बिजनेस मॉडल?
    मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य की एजेंसियों और बोर्ड को “बिजनेस मॉडल” में बदला जाए।

    सीएसआर पर नजर: कंपनियों से क्या उम्मीदें?
    बैठक में कहा गया कि राज्य में कार्यरत कंपनियों और उद्योगों की सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पूछा कि कंपनियां सीएसआर में कितना खर्च करती हैं और उसका उपयोग कहां होता है, इसकी जानकारी सरकार को क्यों नहीं है?
    राजस्व का सच: कौन करेगा खर्च की निगरानी?
    राजस्व की बर्बादी रोकने और स्थापना व्यय को नियंत्रित करने की बात हुई। यह अच्छा है कि सरकार को राजस्व प्रबंधन की चिंता है। लेकिन क्या यह चिंता तभी उभरती है जब खजाना खाली होता है?
    राज्य में पहले भी राजस्व उगाही के नाम पर आम जनता पर नए कर लगाए गए हैं। सवाल यह है कि इस बार सरकार का एक्शन प्लान जनता की सहूलियत के लिए बनेगा या उन पर नई आर्थिक मार के रूप में सामने आएगा?

    दिखेगी समन्वय की तस्वीर?
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समन्वय बनाने की सलाह दी। लेकिन सच यह है कि जब तक राजनीति और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होगा, विकास की रफ्तार थमी रहेगी। सवाल सिर्फ समन्वय का नहीं है, बल्कि इरादे का भी है।

    राज्य की जनता इस बैठक से निकलने वाले एक्शन प्लान पर नजरें गड़ाए बैठी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्व बढ़ाने की यह कवायद जनता की भलाई के लिए होगी, या फिर मुनाफे की नई स्क्रिप्ट का हिस्सा।

    (झारखंड के राजस्व संकट और उसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री की बैठक पर आधारित रिपोर्ट।)

  • गिरिडीह के घने जंगल में ड्रोन छापेमारी

    GIRIDIH: झारखंड और बिहार की संयुक्त उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की टीम ने गिरिडीह के थानसिंहडीह ओपी क्षेत्र के कारीपहाड़ी के जंगलों में अवैध शराब के खिलाफ ड्रोन की मदद से बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में 8,600 किलो जावा महुआ और 350 लीटर अवैध शराब जब्त की गई।

    ड्रोन की आंखों से छिप न सका जंगल का ‘मदहोश’ कारोबार. 
    कारीपहाड़ी के घने जंगलों में ड्रोन स्कैनिंग के जरिए अवैध शराब के ठिकानों को चिन्हित किया गया। झारखंड और बिहार के उत्पाद विभाग ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से इस छापेमारी को अंजाम दिया। गिरिडीह के उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षक रवि रंजन के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में शराब बनाने के उपकरण, जावा महुआ, और भट्टियां नष्ट कर दी गईं।

    संयुक्त कार्रवाई का नेतृत्व: ‘मिशन नशामुक्ति’ की नई पहल. 
    इस छापेमारी अभियान में बिहार के नवादा जिले के उत्पाद विभाग के निरीक्षक राजेश कुमार पटेल, थानसिंहडीह थाना प्रभारी नीरज कुमार, और लोकायनयनपुर थाना प्रभारी अमित कुमार चौधरी के साथ ड्रोन टीम और सशस्त्र बलों का सहयोग था।

    “ड्रोन ने घने जंगल की हर परत को खंगाल डाला। जंगल में बसी अवैध शराब की भट्टियां अब सिर्फ राख हैं,” अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने बताया।

    ‘अवैध कारोबारी फरार’: जंगल की कहानियों में छुपे साजिश के सिरों की तलाश
    जब्त किए गए सामानों के साथ अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ फरार अभियोग दर्ज किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से ‘असली चेहरे’ हैं?

    ड्रोन से लेकर दस्ते तक: तकनीक और ताकत का मेल. 
    यह छापेमारी दिखाती है कि मद्य निषेध के अभियान में तकनीक का इस्तेमाल किस तरह के परिणाम दे सकता है। ड्रोन के जरिए न केवल जंगल की छानबीन की गई, बल्कि पुलिस और उत्पाद विभाग ने सटीक लोकेशन पर कार्रवाई कर एक बड़ा जखीरा पकड़ा।

    क्या यह ‘मदहोश कारोबार’ खत्म होगा?. 
    झारखंड और बिहार की इस संयुक्त कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि अवैध शराब माफिया जंगलों में जितना भी गहरा छिपे, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। लेकिन क्या यह कार्रवाई नशा और अवैध कारोबार के खिलाफ एक स्थायी समाधान की शुरुआत है, या फिर यह महज एक अस्थायी सफलता बनकर रह जाएगी?

  • झारखंड: मंत्रिमंडल विस्तार पर ‘इंडिया’ में मंथन

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    झारखंड सरकार के नए मंत्रिमंडल गठन को लेकर इंडिया गठबंधन के भीतर सियासी सरगर्मी चरम पर है। झामुमो, कांग्रेस, और राजद के बीच ‘छह-चार-एक’ का फॉर्मूला तो तय हो चुका है, लेकिन असली दांवपेंच अभी बाकी हैं। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में कौन-कौन जगह पाएगा, इसका खुलासा फिलहाल टलता दिख रहा है।

    जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद

    मंत्रिमंडल विस्तार के लिए हर दल जातीय और प्रमंडलीय समीकरणों को साधने में जुटा है। झामुमो, कांग्रेस और राजद यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि पूरे राज्य को समेटते हुए हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो। साथ ही, पार्टी के भीतर असंतोष को भी थामे रखा जाए।

    “हर प्रमंडल और हर जाति का प्रतिनिधित्व हो, यह मंत्रिमंडल का लक्ष्य है,” पार्टी सूत्रों का कहना है।

    कांग्रेस का दिल्ली दरबार

    कांग्रेस के विधायक मंत्री पद की दावेदारी को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। अनुभव, क्षेत्र, जाति और सामाजिक समीकरणों को आधार बनाकर अपनी दावेदारी पेश करने का दौर जारी है। इस बार कांग्रेस चार मंत्री पद और विधायक दल के नेता-उपनेता की भूमिका को अलग-अलग करना चाहती है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और अन्य नेता आलाकमान से मंत्रियों के नाम तय करने में जुटे हैं।

    झामुमो का पुराना फॉर्मूला बरकरार?

    झामुमो की ओर से संकेत मिले हैं कि इस बार का फॉर्मूला पिछली सरकार की तर्ज पर रहेगा। कोल्हान प्रमंडल से रामदास सोरेन, दीपक बिरुआ और सविता महतो जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं, संताल से एमटी राजा और पलामू से अनंत प्रताप देव के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।

    इंडिया गठबंधन की चुनौती: तालमेल और नाराजगी

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन ने जहां राज्य की राजनीतिक धारा को नया आकार दिया, वहीं मंत्रिमंडल गठन में संतुलन साधना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। गठबंधन की कोशिश है कि हर प्रमंडल, जाति और समुदाय को बराबरी से शामिल किया जाए।

    पिछली सरकार में पलामू और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल को कांग्रेस से प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, लेकिन इस बार इन क्षेत्रों को जगह मिलने की संभावना है।

    विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार?

    माना जा रहा है कि नौ दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह विस्तार पार्टी के भीतर के असंतोष को शांत कर पाएगा?

    सियासी समीकरणों का इम्तिहान

    झारखंड का मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, यह सियासी संतुलन का इम्तिहान है। झामुमो, कांग्रेस और राजद की साझेदारी को स्थानीय बनाम बाहरी, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय असंतोष की धाराओं के बीच तालमेल बिठाना होगा।

     

  • बांग्लादेश घुसपैठ पर निशिकांत का ‘सियासी ब्यान ‘: खतियान 1932, घुसपैठिए बाहर !

    रांची :    गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने तीखे बयान से सियासी तापमान बढ़ा दिया है। बांग्लादेशी घुसपैठ पर भाजपा का रुख साफ करते हुए उन्होंने एनआरसी लागू करने और 1932 के खतियान के आधार पर लोगों को चिह्नित करने की बात कही है। दुबे का कहना है कि जिनके पास खतियान नहीं होगा, उन्हें बोरे में पैक कर बांग्लादेश भेजा जाएगा।

    ‘मुद्दों से समझौता नहीं’: दुबे का एलान

    डॉ. दुबे का दावा है कि भाजपा की सियासत चुनावी हार-जीत के ऊपर है। उनका कहना है, “घुसपैठ और आदिवासी जनसंख्या घटने का मुद्दा जमीनी है। भाजपा और संघ परिवार इसे सदन से सड़क तक उठाता रहेगा।” विधानसभा चुनाव के बाद संथाल परगना में हुई घटनाओं को दुबे ने बांग्लादेशी घुसपैठ का ‘सबूत’ बताया।

    ‘संथाल परगना में जनसांख्यिकी संकट’

    सांसद ने आदिवासी जनसंख्या घटने के मुद्दे को भी जोरशोर से उठाया। घुसपैठियों के कारण संथाल परगना के जनसांख्यिकी स्वरूप में बदलाव हो रहा है, और यह भाजपा के लिए एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। दुबे ने कहा, “घुसपैठ और आदिवासियों के हक के खिलाफ जो भी ताकतें काम कर रही हैं, उन्हें बेनकाब किया जाएगा।”

    ‘खतियान 1932’: भाजपा की नई रणनीति?

    सांसद ने एनआरसी को 1932 के खतियान से जोड़ते हुए इसे भाजपा की प्रतिबद्धता बताया। यह प्रस्ताव झारखंड में नया राजनीतिक भूचाल ला सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे भाजपा की “आदिवासी पहचान और बाहरी बनाम स्थानीय” के मुद्दे पर नई रणनीति मान रहे हैं।

    क्या यह रणनीति कारगर होगी?

    राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा की यह सख्त भाषा चुनावी हार के झटके से उबरने की कोशिश है, या यह झारखंड में पार्टी के ‘कट्टरवाद बनाम समावेशिता’ के एजेंडे का हिस्सा है?

    डॉ. दुबे के बयानों में राजनीतिक तल्खी जितनी ज्यादा है, जमीनी क्रियान्वयन उतना ही चुनौतीपूर्ण दिखता है। क्या 1932 के खतियान को एनआरसी का आधार बनाना व्यावहारिक होगा? और क्या घुसपैठ का मुद्दा झारखंड के चुनावी परिदृश्य में भाजपा को फायदा पहुंचाएगा?

    झारखंड में भाजपा की सियासी राह मुश्किल दिख रही है। डॉ. निशिकांत दुबे का यह बयान हार से उपजी हताशा है या नई रणनीति का आगाज? जवाब वक्त देगा। लेकिन इतना तय है कि भाजपा झारखंड की राजनीति को ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ और ‘आदिवासी बनाम घुसपैठिया’ के फ्रेम में बांधने की तैयारी में है।

  • झारखंड में बीजेपी की हार: क्या संघ की पकड़ ढीली हो गई है ?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए किसी झटके से कम नहीं हैं। 28 आदिवासी सीटों में से सिर्फ़ एक सीट पर जीत, यह आंकड़ा पार्टी की सियासी जमीन खिसकने की कहानी खुद ब खुद कहता है। आदिवासी इलाकों में पार्टी की पकड़ कमजोर हो चुकी है। दिल्ली से लेकर रांची तक मंथन का दौर जारी है, लेकिन क्या बीजेपी उस दर्द की सही नब्ज़ पकड़ पाएगी जिसने उसे इस हार की कगार पर ला दिया ?

    आदिवासी वोटर और बीजेपी का बिखरता समीकरण
    झारखंड में बीजेपी की हार के पीछे आदिवासी वोटरों की नाराज़गी साफ झलकती है। पार्टी ने आरएसएस के जरिए आदिवासियों को जोड़ने की हर कोशिश की, लेकिन ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम समुदाय का गठजोड़, बीजेपी की कोशिशों पर भारी पड़ा। आदिवासी इलाकों में ईसाई मिशनरियों का बढ़ता प्रभाव, सरना आदिवासियों की घटती संख्या और संघ की कमजोर होती पकड़ ने बीजेपी की सियासी पकड़ को ढीला कर दिया।

    गुमला, लोहरदगा, बिशुनपुर और सिसई जैसे इलाकों में कभी संघ का मजबूत नेटवर्क हुआ करता था। वनवासी कल्याण केंद्र, एकल विद्यालय, और सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संगठन आदिवासी समुदाय में संघ का प्रभाव बढ़ाते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में इन संगठनों की गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। संघ से जुड़े सूत्र मानते हैं कि आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी से संघ की शाखाएं कमजोर पड़ी हैं।

    दिल्ली में होगा निर्णायक मंथन
    रांची में हार की समीक्षा के बाद अब दिल्ली में 3 दिसंबर को बीजेपी के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी। जेपी नड्डा, अमित शाह, और अन्य वरिष्ठ नेता इस हार के कारणों पर मंथन करेंगे। सवाल यह है कि क्या यह बैठक सिर्फ हार के कारणों को तलाशेगी या जमीनी स्तर पर कुछ ठोस बदलाव भी होंगे?

    गुमला से लेकर बिशुनपुर तक: बीजेपी का टूटता किला
    गुमला जिले में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली है। कभी इन इलाकों में वनवासी कल्याण केंद्र और विकास भारती जैसे संगठनों का बड़ा प्रभाव था। बिशुनपुर में अशोक भगत की पकड़ इतनी मजबूत थी कि टिकट का फैसला वही करते थे। लेकिन आज वहां झामुमो और चमरा लिंडा का दबदबा है।

    क्या बीजेपी आत्मनिरीक्षण करेगी?
    2019 के चुनाव में 25 सीटें जीतने वाली बीजेपी आज सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई है। आदिवासियों का झुकाव झामुमो और कांग्रेस की ओर बढ़ता जा रहा है। संघ की कमजोर होती भूमिका, बूथ मैनेजमेंट की खामियां और निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह खत्म होना, ये सब पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।

    बीजेपी के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। जमीनी स्तर पर काम शुरू करना होगा, नए चेहरे लाने होंगे और पुराने, चूके हुए नेताओं से किनारा करना होगा। झारखंड कभी बीजेपी का गढ़ हुआ करता था, लेकिन अब यह पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बन गया है।

    क्या बीजेपी समय रहते सबक लेगी या यह हार उसकी झोली में आने वाले और बड़े झटकों का ट्रेलर मात्र है? झारखंड की सियासत के इस बदलते परिदृश्य में बीजेपी का भविष्य सवालों के घेरे में है।

  • CM हेमंत सोरेन ने DC को दिए निर्देश, अवैध बालू पर लगाएं रोक

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बालू और लॉटरी के अवैध कारोबार पर तुरंत रोक लगाने का निर्देश उपायुक्तों को दिया है। बोकारो में ट्रैक्टर से बालू की अवैध ढुलाई की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया। उन्होंने अन्य जिलों के उपायुक्तों को भी इस पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है।

    दूसरी ओर, दुमका में लॉटरी के अवैध धंधे पर मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक खबर में बताया गया है कि दुमका में युवा रातों-रात अमीर बनने के लालच में अपना समय और मेहनत बर्बाद कर रहे हैं। प्रतिबंधित लॉटरी के कारण उनकी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

  • झारखंड में मौसम ने करवट ली, सुबह से ही आसमान पर बादलों का डेरा

    झारखंड में रांची सहित राज्य के कई हिस्सों में फेंगल चक्रवात का असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते सुबह से ही आसमान में धुंध और हल्के बादल छाए हैं। इस बीच शहर में बूंदाबांदी भी देखने को मिल सकती है। वहीं, अब दोपहर में भी ठंड लोगों को सताएगी।’फेंगल’ के कारण बदला हवा का रुख
    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने ‘फेंगल’ तूफान के कारण हवा का रुख बदल चुका है। वहीं, दक्षिण से आ रही हवा के कारण राज्य में बादल छाए हुए हैं। इसके बाद राज्य में ठंड भी बढ़ेगी।

  • राज्य सरकार की ओर से छात्रों के लिए सौगात, गुरुजी क्रेडिट कार्ड में हुए बदलाव; मिलेगा ये फायदा।

    झारखंड सरकार ने छात्रों के लिए शुरू की गई गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना  में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को काफी राहत मिलेगी। अब वे छात्र, जिन्होंने पहले बैंकों से शिक्षा लोन लिया है,  इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके तहत छात्र अपने बैंक लोन को बंद कर, गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ ले सकते हैं।

    गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना में नया बदलाव

    गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना झारखंड की हेमंत सरकार द्वारा उन छात्रों के लिए शुरू की गई है जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण ऐसा नहीं कर पाते। योजना के तहत गरीब परिवारों के छात्रों को 15 लाख रुपये तक का लोन कम ब्याज दर (4%) पर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, 4 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी ब्याज के भी दिया जाएगा।
    पहले, इस योजना का लाभ वे छात्र नहीं ले सकते थे, जिनका कोई अन्य शिक्षा लोन पहले से चल रहा हो। लेकिन प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, अब सरकार ने इसमें संशोधन किया है। नए नियमों के अनुसार, जो छात्र पहले से लोन लिए हुए हैं, वे भी योजना का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते वे बैंक से अपना लोन बंद कर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त करें। साथ ही, अब राज्य के स्थायी निवासी और डिप्लोमा धारक भी इस योजना के तहत लोन ले सकते हैं।

    योजना के फायदे

    • जो छात्र आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाते, उन्हें इस योजना से पढ़ाई का खर्च वहन करने में मदद मिलेगी।
    • छात्रों को लोन चुकाने के लिए 15 साल का समय दिया जाएगा।
    • इस योजना के तहत संपत्ति को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं है, जो बैंक लोन के मामले में जरूरी होता है।

    आवेदन कैसे करें?

    इस योजना का लाभ केवल झारखंड के मूल निवासियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को मिलेगा। आवेदन करने के लिए गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना की आधिकारिक वेबसाइट (gscc.jharkhand.gov.in) पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। वेबसाइट पर सभी आवश्यक जानकारी भरने के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

    यह योजना उन छात्रों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, जो अपनी उच्च शिक्षा के सपने को साकार करना चाहते हैं।