Author: The News Post4u

  • महिलाओं के खातों में 2500 रुपये । तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर !

    RANCHI: “हेमंत सोरेन सरकार के ‘मंईयां सम्मान योजना’ की पांचवीं किस्त पर नज़र डालिए। वो जो बदलाव की धारा बहती है, वो अब महिलाओं के खातों में 1000 नहीं, पूरे 2500 रुपये लेकर आ रही है। झारखंड के गांव-गांव, शहर-शहर से एक ही आवाज़ गूंज रही है – ‘मंईयां का सम्मान बढ़ा है, हर घर में खुशियां छाई हैं।’”

    झारखंड की सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक:
    57 लाख महिलाओं के खातों में 2500 रुपये पहुंचने को हैं तैयार। तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर! कल्याण विभाग पसीना बहा रहा है ताकि हर बहन के चेहरे पर मुस्कान आए। सोचिए, अब तक चार किस्तों में जो 1000 रुपये भेजे गए थे, उनकी जगह 2500 रुपये मिलेंगे।

    चुनावी राजनीति का सियासी खेल:
    विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘गोगो दीदी योजना’ में 2100 रुपये का वादा किया। लेकिन हेमंत सोरेन, जो अपने वादों पर अडिग रहते हैं, उन्होंने सीधे 2500 का दांव खेला। और चुनावी नतीजों ने दिखा दिया कि ये दांव सफल रहा। इंडिया गठबंधन ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की, और मंईयां सम्मान योजना इसमें एक बड़ा कारण बनी।

    झारखंड के घरों की चूल्हे की बातें:
    “अब चूल्हे पर सिर्फ खाना नहीं, सपने भी पकेंगे,” कह रही हैं मरियम बीबी , जो इस योजना से बेहद खुश हैं। ग्रामीण झारखंड में ये योजना एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

    रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते

    झारखंड में मंईयां योजना को चालू रखने के लिए राज्य सरकार को संसाधनों की कमी होने के आसार अभी तक नहीं है। वित्त विभाग के अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में झारखंड ने कहीं से कर्ज नहीं लिया है और सरप्लस बजट भी रहा है।
    ऐसे में कर्ज लेकर रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते। सरकार एक बार फिर इस योजना के लिए कोई कर्ज नहीं लेगी। ऐसे में यह तय होता दिख रहा है कि कर्ज लिए बगैर भी मंईयां योजना को जारी रखा जा सकता है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार इस उपलब्धि के पीछे पिछले चार-पांच वर्षों से चले आ रहे वित्तीय सुधारों का व्यापक असर है।
    हेमंत सरकार की ये योजना न सिर्फ आर्थिक मदद, बल्कि सामाजिक बदलाव की कहानी भी लिख रही है। ये सिर्फ 2500 रुपये नहीं, ये महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक है।

     

  • पुलिस ने 6 मवेशी लदे पिकअप गाड़ियों को पकड़ा

    GIRIDIH: गिरिडीह पुलिस ने पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 6 मवेशी लदे पिकअप गाड़ियों को पकड़ा है। इन गाड़ियों में मवेशियों को अमानवीय तरीके से ठूंसा गया था।

    छापेमारी कहां और कैसे हुई?
    रविवार को, गिरिडीह पुलिस ने एक खास छापेमारी अभियान चलाया। यह कार्रवाई खरगडीहा-खिजुरी मुख्य मार्ग पर, देवरी थाना क्षेत्र के चितरोकुरहा गांव के पास हुई। पुलिस की टीम का नेतृत्व खोरीमहुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेन्द्र प्रसाद ने किया। उनके साथ गावां अंचल के इंस्पेक्टर पास्कल टोप्पो, देवरी के थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

    तस्करी की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय!
    गिरिडीह में पशु तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले महीने  बगोदर पुलिस ने 60 मवेशियों से भरे तीन ट्रक पकड़े थे। इससे पहले डुमरी पुलिस ने 11 पिकअप गाड़ियों को जब्त किया था।

    पुलिस क्या कर रही है?
    गिरिडीह पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है। पकड़े गए मवेशियों को हजारीबाग के गौशाला भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये मवेशी कहां से लाए गए थे और इन्हें कहां ले जाया जा रहा था।

     

  • झारखंड की नई पहल: दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों के सपनों को पंख!

    रांची की सुबह आज नई उम्मीदों से रोशन हुई है। झारखंड सरकार ने दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से, राज्य सरकार इन बच्चों की उच्च और तकनीकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी।

    क्या है योजना?
    सरकार 10 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस खुद वहन करेगी और हर महीने छात्रों को 4,000 रुपये भत्ता भी दिया जाएगा। छात्रों के लिए एक “ऑनलाइन पोर्टल” तैयार किया जा रहा है, जहां वे इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे।

    किसे मिलेगा लाभ?
    सरकार की नई “वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना” का उद्देश्य हर साल 12,000 स्नातक और परास्नातक छात्रों और 1,200 व्यावसायिक कोर्स करने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचना है। लेकिन ये संख्या आखिरी नहीं है। राज्य के किसी भी संस्थान में नामांकन लेने वाले छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। अन्य राज्यों के छात्रों के लिए यह सुविधा केवल टॉप श्रेणी के संस्थानों में पढ़ाई करने वालों तक सीमित रहेगी।

    शर्तें क्या हैं?

    लाभुक को झारखंड का स्थानीय निवासी होना चाहिए।
    डिप्लोमा के लिए दसवीं और डिग्री कोर्स के लिए दसवीं व बारहवीं झारखंड के स्कूलों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
    क्यों है ये कदम ऐतिहासिक?
    दिव्यांग और अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब न केवल आसान होगी, बल्कि यह उनके सपनों को साकार करने का एक बड़ा माध्यम बनेगी। 99.66 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह योजना, न केवल आर्थिक बाधाओं को हटाएगी, बल्कि समाज में समावेशिता और समानता का एक नया अध्याय भी लिखेगी।

    सरकार की सोच और तैयारी
    इस योजना की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी, जिसमें उच्च शिक्षा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा निदेशक और तकनीकी शिक्षा निदेशक जैसे विभागीय पदाधिकारी शामिल होंगे। सरकार ने इसे जनवरी-फरवरी 2025 में लांच करने का लक्ष्य तय किया है।

    “ये कदम सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की बुनियाद है, जो अब उड़ान भरने को तैयार हैं।” झारखंड सरकार की यह पहल एक मिसाल है, जो पूरे देश को दिखाती है कि शिक्षा का हक हर बच्चे का है।

    आइए, इस बदलाव का हिस्सा बनें, जहां हर बच्चा पढ़ेगा, बढ़ेगा और सपनों को हकीकत में बदलेगा!

  • झारखंड और असम: राजनीति के चाय बागानों में नई बयार!

    रांची से पवन हवाओं के संग आई एक नई खबर, झारखंड की मिट्टी से लेकर असम के चाय बागानों तक सियासी सुगंध फैल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी नई पारी की पहली ही कैबिनेट बैठक में चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए असम में एक सर्वदलीय टीम भेजने का ऐलान किया। ये फैसला जितना सरल दिखता है, उतना ही गहरा संदेश देता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि झारखंड के कुछ इलाकों का अध्ययन करने के लिए उनकी सरकार भी दो प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। “हम देखेंगे कि आखिर झारखंड में ऐसी कौन-सी ‘विशेष चीजें’ हैं जो ध्यान खींच रही हैं।”

    पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान झामुमो और भाजपा के बीच घुसपैठ और आदिवासियों की स्थिति पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। अब लगता है कि इस राजनीतिक मंथन का ‘अध्ययन यात्रा’ के रूप में नया अध्याय शुरू हो गया है।

    हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान भी दिलचस्प है कि उनकी सरकार 5 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर और निर्णय लेगी। लेकिन सवाल उठता है कि यह अध्ययन असल में ज़मीन पर आदिवासियों की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश है, या फिर राजनीति के चाय बागानों में सियासी चाय की मिठास बढ़ाने की कवायद?

    हेमंत सोरेन की यह पहल उनके नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में पहले कदमों को निर्णायक बनाने की कोशिश है। लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा का पलटवार संकेत देता है कि सियासत की इस चाय में खौलने वाले मुद्दे सिर्फ झारखंड या असम तक सीमित नहीं रहने वाले।

    आखिरकार, राजनीति भी तो उसी चाय की तरह है, जिसकी मिठास उसकी कड़वाहट के सही संतुलन से तय होती है। सवाल ये है कि इस बार इस चाय के प्याले में किसकी चीनी कम या ज्यादा पड़ेगी?

  • एनएसजी और झारखंड पुलिस का नक्सल विरोधी ऑपरेशन

    रांची। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने 27 से 30 नवंबर के बीच रांची और इसके बाहरी नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी जंगल अभ्यास “अभ्यास थंडरबोल्ट” का सफल आयोजन किया। इस हाई-प्रोफाइल अभ्यास का उद्देश्य नक्सली खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को यथार्थवादी अनुभव प्रदान करना और उनकी तैयारियों को मजबूती देना था।

    नक्सल रणनीतियों का सटीक अनुकरण .. 
    इस अभ्यास में नक्सलियों की नवीनतम कार्यप्रणालियों और खतरनाक परिदृश्यों का अनुकरण किया गया। झारखंड पुलिस के विशेष बल झारखंड जगुआर, आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि एनएसजी ने अंतिम प्रतिक्रिया बल के रूप में मोर्चा संभाला।

    मुख्य उद्देश्य और प्राथमिकताएं . 
    इस अभ्यास का मकसद संभावित नक्सली खतरों की पहचान करना और संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा ग्रिड को सक्रिय करना था। बंधकों को छुड़ाने, आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का पता लगाने, और जंगल अभियानों की योजना और क्रियान्वयन पर विशेष फोकस रहा।

    इंटर-एजेंसी तालमेल और हथियार प्रदर्शन . 
    अभ्यास से पहले, एनएसजी ने एसपी (एटीएस) कार्यालय में नक्सल विरोधी अभियानों में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों का प्रदर्शन किया। इस दौरान, झारखंड जगुआर और एटीएस जैसी एजेंसियों ने अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।

    आपसी तालमेल पर जोर . 
    एनएसजी ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाते हैं और संकट के समय त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने में मददगार होते हैं।

    जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता . 
    “अभ्यास थंडरबोल्ट” ने एनएसजी और स्थानीय बलों की नक्सल विरोधी क्षमता को एक नई ऊंचाई दी। इस अभ्यास से नक्सलियों द्वारा उत्पन्न आपात स्थितियों का बेहतर और प्रभावी ढंग से जवाब देने की उम्मीद है। संकट के समय जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

    सुरक्षा बलों के लिए नई दिशा .
    इस अभूतपूर्व अभ्यास ने रांची और झारखंड के अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को एकीकृत रणनीति अपनाने और बेहतर तैयारी का एक मजबूत आधार प्रदान किया। “अभ्यास थंडरबोल्ट” न केवल एक ऑपरेशन था, बल्कि नक्सल विरोधी अभियानों की नई गाथा लिखने की शुरुआत भी।

  • माले को मंत्री पद का प्रस्ताव नहीं, सरकार को समर्थन जारी रहेगा: दीपंकर भट्टाचार्य

    रांची। भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने झारखंड में सरकार से मंत्री पद को लेकर कोई प्रस्ताव मिलने की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “हमारे पास सदन में सिर्फ दो विधायक हैं। ऐसे में हम सरकार पर दबाव बनाने के बजाय हर कदम पर उसका समर्थन करेंगे।”

    सात गारंटी पर फोकस और समन्वय समिति की मांग
    भट्टाचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इंडिया ब्लॉक ने जनता से सात गारंटी का वादा किया है, जिसे पूरा करने के लिए एक समन्वय समिति बननी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर चुनाव में भाकपा (माले) को अधिक सीटें दी जातीं, तो नतीजे और बेहतर हो सकते थे।

    झारखंड का जनादेश देश के लिए संदेश
    दीपंकर भट्टाचार्य ने झारखंड के जनादेश को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, “चुनाव के दौरान मैंने ऐसा जहरीला माहौल कभी नहीं देखा था, लेकिन झारखंड की जनता ने एकजुट होकर ऐसी ताकतों को करारा जवाब दिया। केंद्र सरकार को इस जनादेश का सम्मान करना चाहिए और झारखंड को अस्थिर करने की कोशिशें बंद करनी चाहिए।”

    बगोदर की हार का दुख, लेकिन संघर्ष जारी
    भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि धनबाद की दो सीटें जीतने के बावजूद उनकी पार्टी बगोदर में हार गई। उन्होंने कहा, “हमारे दो विधायक सदन के अंदर और बाहर झारखंड की जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे।”

    भाजपा की विचारधारा को हराना प्राथमिकता
    भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी भाजपा की विचारधारा को हराने पर फोकस करेगी और झारखंड में पार्टी के संगठन का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2025 में महेंद्र सिंह की 20वीं बरसी और झारखंड के 25वें साल को एक बड़े अवसर के रूप में लिया जाएगा।

    संविधान के आदर्शों को लेकर देशव्यापी मार्च
    26 नवंबर से 26 जनवरी तक भाकपा (माले) संविधान के आदर्शों को लेकर देशभर में मार्च आयोजित करेगी। भट्टाचार्य ने कहा, “देश में सांप्रदायिक ताकतों के जरिए लोकतंत्र को पीछे ले जाने की कोशिश हो रही है। लोगों को ऐसे झांसे में नहीं आना चाहिए।”

    अडानी पर निशाना, झारखंड में ‘अडानी राज’ का आरोप
    भट्टाचार्य ने भाजपा पर झारखंड में अडानी राज थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अमेरिका में अडानी समूह के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, लेकिन भारत में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बिजली के दाम बढ़ रहे हैं और अडानी समूह के शेयर गिरने से छोटे निवेशक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।”           भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी झारखंड में सक्रिय भूमिका निभाएगी और राज्य की जनता के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने झारखंड को देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला राज्य करार दिया।

  • हेमंत सोरेन के कैबिनेट विस्तार की डेट तय, नए चेहरों को मिलेगी जगह !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……
    झारखंड में हेमंत सोरेन की नई सरकार के गठन के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें खत्म होती दिख रही हैं। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कैबिनेट शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले तैयार हो जाएगा। कांग्रेस कोटे से मंत्रियों के नाम तय करने का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

    मंगलवार तक फाइनल होंगे नाम । 
    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार तक मंत्रियों के नाम फाइनल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार नए चेहरों को तरजीह देने के मूड में हैं। ऐसे में कुछ अनुभवी विधायकों के साथ नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। राजद से केवल एक मंत्री बनाया जाएगा, जिसके नाम पर अंतिम निर्णय लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव करेंगे।

    महिला मंत्री के नाम पर चर्चा । 
    कांग्रेस कोटे से दीपिका पांडेय सिंह का नाम महिला मंत्री के रूप में सबसे आगे चल रहा है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से लुइस मरांडी का नाम भी चर्चा में है। अनुसूचित जाति के मंत्री के लिए कांग्रेस से राधाकृष्ण किशोर और सुरेश बैठा, जबकि राजद से सुरेश पासवान के नाम की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

    कांग्रेस नेताओं की दिल्ली दौड़ । 
    शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश नई दिल्ली रवाना हो गए। वहां वे केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के नाम फाइनल करेंगे। इस दौरान केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात में अंतिम नामों पर मुहर लगाई जाएगी।

    शीतकालीन सत्र से पहले होगा विस्तार । 
    कैबिनेट विस्तार शीतकालीन सत्र से पहले किया जाएगा। सभी नए मंत्रियों को एक साथ शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि नई कैबिनेट झारखंड के विकास को नई दिशा देगी।

    जनता का अपार समर्थन, विकास प्राथमिकता । 
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा, “झारखंड की जनता ने महागठबंधन को भारी बहुमत देकर यह साफ कर दिया है कि यहां विकास राजनीति की प्राथमिकता है। बांटने की राजनीति का समय अब खत्म हो चुका है।”

    सीएम हाउस में बधाई का दौर । 
    गुरुवार को चौथी बार मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन को शनिवार को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने बधाई दी। कांग्रेस के रवींद्र सिंह, जलेश्वर महतो, सतीश पाल मुंजनी और रियाज अहमद भी इस मौके पर मौजूद रहे।

    क्या झारखंड में दिखेगा नई राजनीति का चेहरा !
    कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। नए चेहरे और गठबंधन के संतुलन को साधने की कवायद के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत सोरेन की नई टीम झारखंड को किस तरह आगे बढ़ाती है। विकास पर जनता का भरोसा बनाए रखना इस कैबिनेट की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

  • झारखंड : बालिका गृह में यौन शोषण का शर्मनाक मामला, संचालक और कर्मी गिरफ्तार

    RANCHI: झारखंड के पलामू जिले के सुदना इलाके में स्थित एक बालिका गृह में यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। दो बच्चियों ने बालिका गृह के संचालक और एक महिला कर्मी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब शुक्रवार को कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता बालिका गृह का दौरा करने पहुंचे।

    आपबीती सुनाते हुए रो पड़ीं बच्चियां
    28 बच्चियों वाले इस बालिका गृह में रह रहीं दो लड़कियों ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के सामने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि संचालक ने उनके साथ घिनौनी हरकत की और महिला कर्मी ने इस गुनाह में उसका साथ दिया। एक बच्ची ने कहा कि यह घटना दीपावली और छठ के दौरान हुई, जब उन्हें संचालक के घर ले जाया गया। दूसरी बच्ची ने भी ऐसे ही शोषण के प्रयास का खुलासा किया।

    पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
    इस मामले में पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चियों के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल, दोनों आरोपियों—बालिका गृह के संचालक और महिला कर्मी—को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट की गईं बच्चियां
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी 28 बच्चियों को बालिका गृह से निकालकर सखी वन स्टॉप सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चियों को एक सुरक्षित माहौल में रखा जाए।

    मुजफ्फरपुर कांड की यादें ताजा
    यह मामला बिहार के कुख्यात मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता संध्या सिन्हा ने इस घटना को बाल सुरक्षा व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, “यह घटना बताती है कि बालिका गृहों की निगरानी और जांच की प्रक्रिया में अब भी गंभीर खामियां हैं।”

    प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
    इस घटना ने न केवल प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है। यह जरूरी है कि ऐसे संवेदनशील संस्थानों की नियमित जांच की जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    क्या बाल सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं?
    पलामू का यह मामला एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा के नाम पर चलने वाले इन संस्थानों की जवाबदेही कब तय होगी। दोषियों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन यह तब क्यों नहीं रोका गया, जब ये बच्चियां पहली बार पीड़ित हुईं?

     

  • माओवादी संगठन की बड़ी रणनीतिक बदलाव, क्या यह अस्तित्व की आखिरी लड़ाई है?

    GIRDIH: प्रतिबंधित माओवादी संगठन भाकपा (माओवादी) ने अपनी सभी केंद्रीय, क्षेत्रीय, और जोनल कमेटियों को भंग कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि माओवादी नेतृत्व ने अपने कमांडरों को भूमिगत होने और गुप्त स्थानों पर सुरक्षित रहने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, पीपुल्स लिबरेशन ऑफ गोरिल्ला आर्मी (PLGA) को छोटे-छोटे समूहों में बांट दिया गया है और केवल बड़े हमलों के लिए इकट्ठा होने की रणनीति अपनाई गई है।

    नई रणनीति: शहरी इलाकों पर फोकस
    माओवादियों ने छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, बिहार और झारखंड में अपने सभी स्तरों की कमेटियों को समाप्त कर दिया है। अब संगठन शहरी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया को विकेंद्रित करने की योजना बना रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
    इस बदलाव की भनक लगने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और झारखंड में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। खासतौर पर झारखंड के सारंडा क्षेत्र में, जिसे माओवादियों का पूर्वी क्षेत्रीय मुख्यालय माना जाता है, अतिरिक्त निगरानी लगाई गई है।

    क्या माओवादी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं?
    हाल के वर्षों में माओवादियों को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में बड़े नुकसान झेलने पड़े हैं। छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड जैसे इलाकों में उनकी पकड़ कमजोर पड़ चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि माओवादी अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

    2 दिसंबर से माओवादी पीपुल्स लिबरेशन ऑफ गोरिल्ला आर्मी का स्थापना सप्ताह मनाने वाले हैं। लेकिन इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में कमेटियों को भंग करना चौंकाने वाला कदम है। नक्सल मामलों के विशेषज्ञ सुरेंद्र कुमार का कहना है, “यह पहली बार है जब माओवादी इतनी व्यापक स्तर पर खुद को पुनर्गठित कर रहे हैं। उनकी ताकत और प्रभाव देशभर में काफी घट चुका है।”

    जनता का बदलता नजरिया
    माओवादियों की छवि अब “विकास विरोधी” के रूप में देखी जा रही है। जनता उनके विचारधारा और कार्यों को खारिज कर रही है। यह संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, जिससे निपटने के लिए उन्हें अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव करने पड़े हैं।

     

  • झारखंड में विधान सभा सत्र का ऐलान : नये अध्यक्ष का चुनाव

    RANCHI: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की पहली परीक्षा तय हो गई है। 9 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय विधानसभा सत्र ने सियासी हलचल को गरमा दिया है।

    पहला दिन: नव निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण।
    दूसरा दिन:चुना जाएगा।
    तीसरा दिन: राज्यपाल का अभिभाषण, और फिर सरकार पेश करेगी वित्तीय वर्ष 2024-25 का दूसरा अनुपूरक बजट।
    आखिरी दिन: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस।

    अब सवाल यह है कि चार दिन में हेमंत सरकार कितना कुछ साध पाएगी?

    बजट से बड़ी उम्मीदें .
    इस सत्र में सरकार न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश करेगी, बल्कि मंईयां सम्मान योजना समेत कई जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनुदान की मांग भी रखेगी। लेकिन क्या सिर्फ योजनाओं का ऐलान, ज़मीन पर क्रियान्वयन के भरोसे में तब्दील हो पाएगा?

    कैबिनेट विस्तार की अटकलें जारी
    इधर, हेमंत सोरेन सरकार के विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज़ है। मुख्यमंत्री दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, और कैबिनेट बंटवारे पर घटक दलों से बातचीत जारी है।

    राज्यपाल की सहमति और विपक्ष का सवाल
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 9 से 12 दिसंबर तक सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन विपक्ष इस छोटे सत्र को लेकर सवाल उठा सकता है। चार दिन का सत्र—क्या यह जनता की समस्याओं को उठाने और समाधान खोजने के लिए पर्याप्त होगा?

    तो, सत्र शुरू होने वाला है। अब देखना यह है कि यह सत्र जनता के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह भी महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।