Category: Crime

  • हार्डकोर इनामी नक्सली नेमचंद महतो को 8 वर्ष की सजा, आर्म्स एक्ट मामले में अदालत का फैसला

    गिरिडीह: गिरिडीह के तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवलजीत चोपड़ा की अदालत ने हार्डकोर और इनामी नक्सली नेमचंद महतो को आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मामले में दोषी करार देते हुए 8 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत उस पर कुल 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

    यह मामला वर्ष 2018 में बेंगाबाद थाना क्षेत्र के केंदुआडीह में चलाए गए विशेष कांबिंग ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है। उस समय तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र झा के नेतृत्व में सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक सर्च अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान नेमचंद महतो सहित कई नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था तथा उनके पास से हथियार एवं अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने नेमचंद महतो को दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई।

    सरकारी वकील अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले में कई अन्य नक्सलियों के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें महिला नक्सली शीला दी और रामदयाल महतो समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश आरोपी वर्तमान में जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ न्यायालय में ट्रायल की प्रक्रिया जारी है।

    अदालत के इस फैसले को नक्सल गतिविधियों के विरुद्ध चल रही कानूनी कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • गिरिडीह में दो लूटकांड का खुलासा, एक आरोपी देवघर से गिरफ्तार

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर थाना क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग लूट की घटनाओं का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में न्यू चुड़ी मोहल्ला के 20 वर्षीय अफरोज शेख को देवघर से गिरफ्तार किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के बताए अनुसार लूटे गए सामान जैसे मोबाइल, नकद पैसे, पर्स, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में गांजा भी मिला है।

     दो अलग-अलग घटनाएं.

    पहली घटना 11-12 अप्रैल की रात करीब 1 बजे बस स्टैंड रोड स्थित न्यू परिसदन भवन के पास हुई थी, जहां राहगीरों से लूटपाट की गई। दूसरी घटना 16 अप्रैल की रात हुई, जिसमें अमित कुमार लकड़ा से बैग, कपड़े और 8500 रुपये छीन लिए गए थे।

     गुप्त सूचना पर गिरफ्तारी.

    एसपी डॉ. विमल कुमार के निर्देश पर पुलिस टीम बनाई गई थी। गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी को देवघर से पकड़ा गया। पूछताछ में उसने दोनों घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। 25 अप्रैल को पुलिस ने न्यू चुड़ी मोहल्ला में रवानी कुरैशी के घर छापेमारी की। वहां से

    • 1575 ग्राम गांजा
    • 50 नशीली गोलियां
    • 3000 रुपये नकद बरामद किए गए

    इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों आरोपी अभी फरार हैं।

    पहले से आपराधिक रिकॉर्ड.

    गिरफ्तार आरोपी पर पहले से कई मामले दर्ज हैं, यानी उसका आपराधिक इतिहास लंबा है।

    यह पूरी कार्रवाई एसडीपीओ सदर जीतवाहन उरांव के नेतृत्व में नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह और उनकी टीम ने की। पुलिस बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और मामले की जांच जारी है।

     

  • गिरिडीह में चुनावी हिंसा : शहर की सियासत में अपराधियों की  एंट्री, सवालों के घेरे में शिवम आज़ाद

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह:  झारखंड के कई जिलों की तरह गिरिडीह भी चुनावी तनाव और छिटपुट हिंसा का इतिहास देखता रहा है, लेकिन अब तक यह धारणा बनी हुई थी कि ऐसी घटनाएँ मुख्यतः नक्सल प्रभाव वाले ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहती थी । गिरिडीह शहर को अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित माना जाता था। लेकिन 2026 के नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 18 में हुई फायरिंग की घटना ने इस धारणा को तोड़ दिया है। मतदान के बीच चली गोलियों में दो लोग घायल हो गए। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शहरी राजनीति के बदलते चरित्र का संकेत बनकर उभरी है।

    विवादों के केंद्र में शिवम आज़ाद.

    इस पूरे घटनाक्रम में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है शिवम श्रीवास्तव उर्फ शिवम आज़ाद । वे गिरिडीह नगर निगम के पूर्व वार्ड पार्षद रह चुके हैं। उनकी मां सरिता श्रीवास्तव भी वार्ड 18 से पार्षद रह चुकी हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में थीं।

    स्थानीय स्तर पर शिवम का नाम लंबे समय से विवादों से जुड़ता रहा है। बस स्टैंड क्षेत्र में उनके कारोबार की चर्चा होती रही है। ठेकेदारी से लेकर अन्य गतिविधियों में उनकी सक्रियता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न हिंदी अखबारों में उनके खिलाफ शराब कारोबार में कथित संलिप्तता, तड़ीपार होने के बाद गिरफ्तारी और अन्य मामलों का जिक्र सामने आता रहा है। सूत्रों का कहना है कि उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हैं, जिनमें सीसी एक्ट और अंतरराज्यीय शराब तस्करी से जुड़े आरोप भी शामिल रहे हैं। हालांकि सभी मामले अदालतों मे लंबित हैं।

    राजनीतिक सफर: भाजपा से झामुमो तक.

    शिवम आज़ाद की राजनीतिक यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही। वे पहले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया।

    स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे विवादित चेहरों का सत्तारूढ़ या प्रभावशाली दलों से जुड़ाव प्रशासनिक सख्ती को प्रभावित करता रहा है। चुनाव के दौरान आमतौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर नजर रखी जाती है, हथियारों की जांच होती है और आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाती है। ऐसे में वार्ड 18 की घटना ने पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रशासन पर उठते सवाल.

    फायरिंग की घटना के बाद टाउन थाना प्रभारी ज्ञान रंजन  को निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलफ़ आरोप है है कि इनहोने शिवम आज़ाद को संरक्षण दे रखा था । लेकिन घटना के 24 घंटे बाद तक किसी की गिरफ्तारी न होने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन न केवल हिंसा को रोकने में विफल रहा, बल्कि कार्रवाई में भी तेज़ी नहीं दिख रही है। गौरतलब है कि गिरिडीह का शहरी इलाका अब तक चुनावी गोलीबारी से लगभग अछूता माना जाता था। ऐसे में यह घटना कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

    झामुमो की त्वरित कार्रवाई.

    घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तत्काल कदम उठाते हुए शिवम आज़ाद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। साथ ही केंद्रीय कमेटी को उनके निलंबन के लिए पत्र भेजा गया है। राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संदेश स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं। हालांकि अंतिम परीक्षा प्रशासनिक कार्रवाई की होगी।

    पहले भी रहे हैं विवाद.

    शिवम आज़ाद का नाम पूर्व में मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। दिसंबर माह में भी एक मारपीट प्रकरण में उनका नाम चर्चा में आया था।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से मामलों का सामना करने के बावजूद उनका प्रभाव बना रहना राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

    वीडियो में पलटवार.

    इसी बीच शिवम आज़ाद ने एक वीडियो जारी कर ट्रांसपोर्टर राजू खान पर चुनावी हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। अब यह सिर्फ गोलीबारी का मामला नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप की जंग बन चुका है।

    नजर जिला प्रशासन पर.

    अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर है।

    • क्या फायरिंग के आरोपियों की गिरफ्तारी होगी?
    • और क्या भविष्य में शहरी इलाकों में चुनावी हिंसा रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी?

    गिरिडीह, जिसे अब तक शहर के स्तर पर अपेक्षाकृत शांत माना जाता था, वहां हुई यह घटना आने वाले दिनों में न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि प्रशासन की साख को भी प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह है कि यह घटना एक अपवाद साबित होती है या फिर शहर की चुनावी राजनीति के नए और खतरनाक दौर की शुरुआत।

  • हत्या का आरोपी पुलिस को चकमा देकर भागा, आम लोगों की सूझबूझ से कुछ ही मिनटों में दबोचा गया

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :  सोमवार दोपहर गिरिडीह जिला कोर्ट परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब हत्या के एक आरोपी ने पुलिस की गिरफ्त से भाग निकलने की कोशिश कर दी।
    हथकड़ी पहने हुए आरोपी को भागते देख कुछ पलों के लिए पुलिस भी सन्न रह गई, लेकिन आम लोगों की हिम्मत और फुर्ती ने एक बड़ी घटना को टाल दिया

    हत्या के मामले में पेशी के लिए लाया गया था आरोपी.

    जानकारी के अनुसार, धनवार थाना क्षेत्र के गरडीह गांव निवासी बच्चू सिंह (25 वर्ष) को पुलिस सोमवार को अदालत में पेश करने लाई थी।
    बच्चू सिंह पर हाल ही में 55 वर्षीय रवींद्र सिंह की कुल्हाड़ी से हत्या करने का आरोप है।
    पुलिस उसे पेशी के लिए कोर्ट परिसर में लेकर आई थी, तभी अचानक उसने मौका पाकर भागने की कोशिश की.

    हथकड़ी लगी होने के बावजूद चकमा देकर भागा.

    बताया गया कि जैसे ही पुलिसकर्मी उसे कोर्ट के गेट की ओर लेकर जा रहे थे,
    बच्चू सिंह अचानक झटका देकर भागने लगा। हाथों में हथकड़ी लगी होने के बावजूद उसने तेज़ी से टॉवर चौक की ओर दौड़ लगा दी।अचानक हुए इस घटनाक्रम ने पुलिसकर्मियों के होश उड़ा दिए और कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
    राहगीर और वकील कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी सड़क की ओर निकल गया।

    आम लोगों ने दिखाई बहादुरी, अम्बेडकर चौक के पास पकड़ा गया.

    लेकिन भागते आरोपी की किस्मत ज़्यादा देर साथ नहीं दे सकी। अम्बेडकर चौक के पास पंच मंदिर के समीप मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने उसे रोकने का साहस दिखाया।
    लोगों ने मिलकर आरोपी को घेर लिया और हथकड़ी में ही उसे पकड़ लिया।
    सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और बच्चू सिंह को फिर से अपनी हिरासत में ले लिया।

     

    लोगों की सतर्कता से बची बड़ी घटना.

    स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित प्रतिक्रिया से पुलिस को बड़ी राहत मिली।
    यदि आरोपी भागने में सफल हो जाता, तो यह गिरिडीह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता था।
    घटना के बाद पूरे क्षेत्र में लोगों की बहादुरी और सजगता की सराहना की जा रही है

    पुलिस पर उठे सवाल, जांच शुरू

    घटना के बाद पुलिस विभाग भी सवालों के घेरे में आ गया है।
    कोर्ट जैसी संवेदनशील जगह पर हथकड़ी पहने आरोपी का भाग निकलना,
    सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी और लापरवाही दोनों को उजागर करता है।
    एसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार,
    इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।

    गिरिडीह के नागरिकों ने दिया मिसाल.

    इस घटना ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में गिरिडीह के लोग
    कानून-व्यवस्था की रक्षा के लिए आगे आने से नहीं हिचकते।
    जहां एक ओर पुलिस की चूक सामने आई,वहीं आम नागरिकों की सूझबूझ और साहस ने न केवल आरोपी को भागने से रोका, बल्कि एक संभावित बड़ी घटना को भी टाल दिया।

     

  • पुलिस की बड़ी सफलता:सीएससी सेंटर डकैती कांड का खुलासा, दो गिरफ्तार

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : भरकट्टा ओपी क्षेत्र के ग्राम चिताखारो में 8 अक्टूबर की रात हुई सीएससी सेंटर डकैती कांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में गिरिडीह पुलिस ने दो अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अन्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

    विशेष टीम का गठन और पुलिस की रणनीति.

    घटना के बाद गिरिडीह पुलिस अधीक्षक डॉक्टर बिमल कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बगोदर-सरिया SDPO के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया। टीम ने लगातार क्षेत्र में छापेमारी अभियान चलाया, संदिग्धों से पूछताछ की और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी क्रम में गुप्त सूचना के आधार पर 16 अक्टूबर को गांडेय थाना की पुलिस के सहयोग से ग्राम डहुआटांड में छापेमारी की गई। इस दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार अपराधियों की पहचान और खुलासे.

    पकड़े गए अपराधियों की पहचान कारू कुमार वर्मा और रितेश यादव के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान दोनों ने न केवल अपनी संलिप्तता स्वीकार की, बल्कि अपने अन्य साथियों के नाम भी उजागर किए। उनके बयान के अनुसार, मोहित मंडल और छोटू मंडल भी इस डकैती में शामिल थे।

    घटना की पूरी साजिश.

    अभियुक्तों ने खुलासा किया कि घटना से एक दिन पहले, यानी 7 अक्टूबर की शाम, तीन अपराधी अपाचे बाइक से चिताखारो पहुंचे थे और सीएससी सेंटर की बारीकी से रैकी (निरीक्षण) की थी। उन्हें जानकारी मिली थी कि सेंटर संचालक के पास करीब 10 लाख रुपये नकद रखे हुए हैं। इसके बाद, 8 अक्टूबर की रात छह अपराधी दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर सेंटर पहुंचे, पीछे की कुंडी तोड़ी और घर में घुस गए।

    डकैती की वारदात और बरामदगी.

    पिस्टल के बल पर अपराधियों ने सीएससी संचालक के परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट की। वे घर से एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, दो कैमरे, नगदी और कीमती आभूषण लेकर फरार हो गए थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सभी चोरी किए गए सामानों को बरामद कर लिया है।

    अभी भी फरार चार आरोपी.

    फिलहाल, चार आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीम लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। गिरिडीह पुलिस अधीक्षक डॉक्टर बिमल कुमार ने कहा है कि जल्द ही सभी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा और अपराध के इस नेटवर्क का पूरी तरह सफाया किया जाएगा।

     

  • गिरिडीह में राधा स्वामी संगठन पर सवाल, शमीम अख्तर की गिरफ्तारी से खुली पोल

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : जिले में राधा स्वामी संगठन का विवादित चेहरा सामने आने लगा है। बीती रात पचम्बा पुलिस ने संगठन से जुड़े शमीम अख्तर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शमीम अख्तर 2024 के विधानसभा चुनाव में जागरूक जनता पार्टी  के प्रत्याशी के रूप में गांडेय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, शमीम अख्तर लंबे समय से राधा स्वामी संगठन के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी कर रहा था। गाड़ी फाइनेंस कराने और 40 प्रतिशत तक छूट दिलाने का लालच देकर वह भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाता था। बताया जा रहा है कि उसने दर्जनों लोगों से लाखों रुपये ऐंठे।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शमीम अख्तर अपनी मीठी बातों और संगठन के प्रभावशाली नाम का इस्तेमाल कर विश्वास जीत लेता था। पर जब लोगों को वादे पूरे न होते दिखे, तब जाकर ठगी का पूरा खेल खुलकर सामने आया।

    अब राधा स्वामी संगठन शमीम अख्तर से दूरी बनाने की कोशिश कर रहा है। संगठन से जुड़े एक प्रतिनिधि ने बताया कि शमीम को संगठन से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर वह इतने समय से संगठन के नाम पर ठगी कर रहा था, तो संगठन की नज़र इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी?

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नागेश्वर मंडल ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मांग की है कि राधा स्वामी संगठन के क्रियाकलापों की उच्च स्तरीय जांच हो। नागेश्वर मंडल का आरोप है कि संगठन से जुड़े लोग आम जनता से ठगी कर रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

    अब निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर हैं कि यह पूरा घोटाला किस हद तक फैला हुआ है और इसमें और कौन-कौन शामिल है। लेकिन इतना तय है कि राधा स्वामी संगठन और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियां अब सवालों के घेरे में आ चुकी हैं।

  • सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

    नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

    विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

    स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

    फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

    21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

    धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

    हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

    आठ साल लंबी कानूनी जंग.

    इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

    • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
    • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
    • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
    • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
    • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
      आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

    फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

    जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

    • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
    • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
    • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

    • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
    • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
      इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।
  • जानिए पुलिस ने कैसे खोला हत्याकांड का राज, आरोपी गिरफ्तार

     द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में घटित कंचन देवी हत्याकांड का पुलिस ने मात्र 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। पुलिस ने मृतका के पति को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही, हत्या में इस्तेमाल किया गया धारदार हथियार (उस्तुरा) और खून से सने कपड़े भी जब्त कर लिए गए हैं। इस पूरे मामले की जानकारी प्रेस वार्ता कर पुलिस अधिकारियों ने दी।

    घटना की शुरुआत कैसे हुई.
    25 अगस्त को मुफ्फसिल थाना को सूचना मिली थी कि एक युवक ने अपनी पत्नी पर धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया है। घायल महिला की पहचान कंचन देवी के रूप में हुई, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मामला बेहद गंभीर होने के कारण गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार के निर्देश पर एसडीपीओ सदर जितवाहन उरांव के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया।

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई.
    जांच टीम में मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो सहित कई अधिकारी और पुलिस जवान शामिल थे। तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय खुफिया सूचना के आधार पर टीम ने तेजी से काम करते हुए आरोपी गोपी दास (26 वर्ष, पिता राजेंद्र दास उर्फ लोधा दास, निवासी – सात नंबर योगीटांड, थाना मुफ्फसिल) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त उस्तुरा और आरोपी के खून से सने कपड़े बरामद कर सबूत के रूप में अपने कब्जे में लिए।

    हत्या के पीछे का कारण.
    एसडीपीओ जितवाहन उरांव ने बताया कि जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। घटना से कुछ दिन पूर्व आरोपी ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी की शिकायत थाना में दर्ज कराई थी। पुलिस ने कंचन देवी को सुरक्षित ढूंढ निकाला और पति को सौंप दिया। लेकिन घर लौटने के दौरान ही अवैध संबंधों के शक के आधार पर पति ने पत्नी की हत्या कर दी।

    आरोपी की वर्तमान स्थिति.
    पुलिस का कहना है कि हत्या का मुख्य कारण अवैध संबंध का संदेह है। फिलहाल आरोपी पति को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • आज़रबैजान से प्रत्यर्पण के बाद कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह भारत लाया गया

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रांची एयरपोर्ट शनिवार को पुलिस के लिए ऐतिहासिक दिन का गवाह बना। कुख्यात गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को आज़रबैजान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया। झारखंड एटीएस (Anti-Terrorist Squad) के एसपी ऋषभ झा के नेतृत्व में एक विशेष टीम मयंक को लेकर रांची पहुंची। एयरपोर्ट से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बख़्तरबंद गाड़ी से सीधे रामगढ़ ले जाया गया।

    यह झारखंड पुलिस का पहला सफल प्रत्यर्पण है, और इस वजह से इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपराधों का लंबा इतिहास.

    पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मयंक सिंह पर हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे 45 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह कई सालों से फरार था और विदेश जाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था।

    सूत्रों का कहना है कि मयंक झारखंड, बंगाल और छत्तीसगढ़ में कोयला व परिवहन कारोबारियों से वसूली करता था। उसके इशारे पर हत्या और फायरिंग की घटनाएँ होती थीं।

    गैंग कनेक्शन.

    पुलिस के अनुसार, मयंक का सीधा संबंध लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू जैसे बड़े गैंगस्टरों से है। यही वजह थी कि उसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाता था।

    जांच में सामने आया कि सुनील मीणा पहले काम के सिलसिले में मलेशिया गया, जहां उसकी मुलाकात रोहित गोदारा, गोल्डी बरार और संपत नेहरा के ज़रिए लॉरेंस बिश्नोई से हुई। इसके बाद उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध की दुनिया में कदम रखा।

    लॉरेंस के कहने पर उसने राजस्थान और पंजाब में हत्या, रंगदारी और गोलीबारी जैसी वारदातें अंजाम दीं। वह तब चर्चा में आया जब उसने राजस्थान के तत्कालीन मंत्री व कांग्रेस विधायक गोविंद राम मेघवाल से रंगदारी मांगी थी। यही नहीं, उसने राजस्थान के एक पेट्रोल पंप मालिक से पांच करोड़ रुपये की वसूली की मांग की थी और पैसे न देने पर फायरिंग करवा दी थी।

    विदेश भागकर भी अपराध जारी.

    पासपोर्ट रद्द होने के बाद सुनील ने डंकी रूट के जरिए सिंगापुर, ईरान, मैक्सिको और फिर अमेरिका तक का सफर तय किया। वहीं से वह अमन साहू गिरोह के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में युवाओं को भर्ती करता रहा।

    इसी दौरान उसने मयंक सिंह के साथ मिलकर झारखंड व आसपास के राज्यों में कोयला और परिवहन कंपनियों से वसूली की योजना बनाई।

    प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया.

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल की मदद से पहले उसका लोकेशन ट्रैक किया गया। इसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सीबीआई की इंटरपोल शाखा के सहयोग से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। कई महीनों की मेहनत के बाद आखिरकार अक्टूबर 2024 में मयंक सिंह आज़रबैजान के दातू में गिरफ्तार हुआ और अब भारत लाया गया।

    रांची एयरपोर्ट पर पहुंचे एसपी ऋषभ झा ने कहा –
    “यह झारखंड पुलिस के इतिहास का पहला प्रत्यर्पण है। हमें उम्मीद है कि विदेश में छिपे बाकी अपराधियों को भी जल्द प्रत्यर्पण या निर्वासन के जरिए वापस लाया जाएगा। इस सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री और राज्य व केंद्र सरकार के सहयोग को जाता है।”

    पुलिस मयंक सिंह से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग से जुड़े रहस्यों की पड़ताल करेगी। उसे जल्द ही रामगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी हिरासत की मांग करेगी।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मयंक की गिरफ्तारी से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

     

  • पारसनाथ के जंगल से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलियों की बड़ी साजिश को विफल कर दिया है। दरअसल, गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की 154वीं बटालियन ने पारसनाथ पहाड़ी की तराई में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

    क्या मिला छापेमारी में?
    टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की और जमीन में दबाकर रखे गए 300 मीटर कोडेक्स वायर और 13 लीटर विस्फोटक केमिकल लिक्विड को बरामद किया। अधिकारियों के मुताबिक यह सामग्री नक्सलियों द्वारा किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जमा की गई थी।

    अभियान कैसे चला?
    गिरिडीह के एसपी डॉ. विमल कुमार ने मीडिया को बताया  कि इस अभियान का नेतृत्व सीआरपीएफ 154वीं बटालियन के कमांडेंट सुनील दत्त त्रिपाठी ने किया। वहीं, टीम में सीआरपीएफ के सेकंड कमांडेंट ओम प्रकाश सिंह, एएसपी अभियान सुरजीत कुमार और सहायक कमांडेंट तांबा शामिल थे। स्थानीय पुलिस, खुखरा थाना की टीम और डॉग स्क्वॉड की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    कहां से बरामद हुआ विस्फोटक?
    अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने बड़ी सतर्कता के साथ पारसनाथ की तराई स्थित जोकाईनाला इलाके की घेराबंदी की। तलाशी के दौरान नक्सलियों द्वारा जमीन के भीतर छुपाए गए विस्फोटक उपकरण और रसायन बरामद किए गए।

    नक्सलियों की साजिश पर रोक.
    पुलिस के मुताबिक, बरामद विस्फोटक का इस्तेमाल नक्सली आईईडी और अन्य बम तैयार करने में करते। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन सामग्रियों को किसी बड़ी हिंसक कार्रवाई के लिए एकत्रित किया गया था। गिरिडीह पुलिस ने इसे नक्सलियों के इरादों पर बड़ा प्रहार बताया है।  इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की एक अहम सफलता माना जा रहा है, क्योंकि पारसनाथ का इलाका नक्सलियों के लिए लंबे समय से सुरक्षित पनाहगाह रहा है।