सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

आठ साल लंबी कानूनी जंग.

इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

  • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
  • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
  • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
  • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
  • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
    आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

  • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
  • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
  • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

  • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
  • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
    इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।

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