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  • झारखंड : नए साल मे कैसा रहेगा ठंड का तेवर,जानिए पूरी खबर

    परवेज़ आलम  खास रिपोर्ट……………

    झारखंड  में  एक बार फिर ठंड ने तेवर दिखाना  शुरू कर दिया है। सुबह-शाम चल रही ठंडी हवाओं ने लोगों की रजाइयों की गहराई बढ़ा दी है। मौसम विभाग की माने, तो 1 जनवरी की सुबह कोहरे की चादर ओढ़ेगी, और दिन चढ़ते ही आसमान साफ हो जाएगा। लेकिन, राज्य के उत्तरी इलाकों में घना कोहरा और ठिठुरन की संभावना है।

    तापमान में गिरावट। 
    रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने साफ कर दिया है—अगले 1-2 दिन न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। राजधानी रांची समेत कई जिलों का तापमान 10 डिग्री के नीचे जा सकता है। सोमवार को रांची, जमशेदपुर और डालटनगंज में पारा सामान्य से 7 डिग्री तक कम रहा।

    बदल सकता है मौसम का मिजाज। 
    पश्चिमी विक्षोभ के झोंके झारखंड में दस्तक दे रहे हैं। 5 जनवरी के बाद से मौसम का मिजाज फिर पलट सकता है। आसमान पर बादलों की हलचल और सुबह-शाम घने कोहरे की धुंध संभावना को और बढ़ा रही है।

    मौसम वैज्ञानिकों की राय:
    वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया, “उत्तर की ओर बर्फबारी के कारण ठंडी हवाएं झारखंड का तापमान गिरा रही हैं। अगले 2 दिन तक न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी रहेगी।”

    नए साल के जश्न पर असर। 
    ठंडी हवाएं और कोहरे का कहर नया साल मनाने वालों के उत्साह पर पानी फेर सकता है। पिकनिक के प्लान में ठिठुरन का खलल तय है। लोगों को सलाह दी गई है कि वाहन चलाते वक्त सावधानी बरतें।

    तो दोस्तों, जैकेट, मफलर, और स्वेटर की तैयारी कर लो। ठंडी हवाओं का झारखंड में अब दबदबा है। और याद रखें , कोहरे के साए में सड़कों पर धीरे चलो, क्योंकि सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं!

     

  • बेटियों के लिए प्रशासन का सख्त रुख, PC & PNDT ACT पर उपायुक्त की सख्ती

    गिरिडीह जिले में PC & PNDT ACT से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर की स्थिति, पिछले निर्णयों का अनुपालन, नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन, और लाइसेंस रिन्यूअल पर चर्चा की गई।
    उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने छापेमारी दल का गठन कर गहन जांच अभियान चलाने का आदेश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि अवैध क्लीनिक बंद हों और लिंग परीक्षण पर पूरी तरह रोक लगे।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूती.
    उपायुक्त ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” मुहिम के तहत लिंग अनुपात सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि PC & PNDT ACT, 1994 का उद्देश्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन और लिंग आधारित गर्भपात पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इसके तहत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    सार्वजनिक जागरूकता पर जोर.
    उपायुक्त ने प्रखंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
    विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ विचार-विमर्श.
    बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, आईएमए शाखा के अध्यक्ष, और नामित नोडल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, समाजसेवी, चिकित्सक, और अधिवक्ता भी उपस्थित थे। सभी ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के सुझाव दिए।
    लिंग अनुपात सुधारने के लिए ठोस कदम.
    इस बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि सभी नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन उचित जांच के बाद ही स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने यह भी तय किया कि अवैध गतिविधियों पर नजर रखते हुए जिला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
    गिरिडीह प्रशासन का यह प्रयास लिंग अनुपात सुधारने और बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

  • झारखंड: नए साल मे हॉकी इंडिया लीग रहेगी धूम

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………………

    अगर बात भारत की राष्ट्रीय खेल हॉकी की करें, तो झारखंड का नाम गर्व से लिया जाता है। यह राज्य न सिर्फ अपने खनिज, जल-जंगल-जमीन के लिए मशहूर है, बल्कि हॉकी की नर्सरी के रूप में भी जाना जाता है। झारखंड ने देश को ओलंपियन माइक किंडो, सिल्वानुस डुंगडुंग, सुमराई टेटे, और अंसुता लकड़ा जैसे अनगिनत खिलाड़ियों से नवाजा है।  7 साल के लंबे इंतजार के बाद, हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) की धूम झारखंड में फिर से गूंजने वाली है। महिला एचआईएल का आयोजन 12 जनवरी 2025 से रांची के मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में होने जा रहा है।

    झारखंड की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक रहीं

    झारखंड की बेटियां सलीमा टेटे, संगीता कुमारी, निक्की प्रधान और ब्यूटी डुंगडुंग पहले ही अपने प्रदर्शन से देश का नाम रौशन कर चुकी हैं। इस बार एचआईएल में भी झारखंड की 6 महिला खिलाड़ी अपनी चमक बिखेरेंगी।

    • सुरमा हॉकी क्लब: सलीमा टेटे और निक्की प्रधान
    • दिल्ली एसजी पाइपर्स: संगीता कुमारी और दीपिका सोरेंग
    • बंगाल टाइगर: ब्यूटी डुंगडुंग और बिनीमा धान

    महिला और पुरुष दोनों की हिस्सेदारी

    इस लीग में न केवल महिला खिलाड़ियों का जलवा दिखेगा, बल्कि 18, 22, और 24 जनवरी को पुरुषों के एचआईएल के भी मुकाबले रांची में आयोजित होंगे।

    तैयारियां जोरों पर

    खेल विभाग और हॉकी झारखंड की टीमों ने महिला खिलाड़ियों के स्वागत और स्टेडियम को तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मैदान का रंग-रोगन हो रहा है, एलईडी लाइट्स की ट्रायल चल रही है, और दर्शकों की दीवानगी को ध्यान में रखते हुए टिकटें पूरी तरह से मुफ्त रखी गई हैं।

    क्यों खास है यह आयोजन?

    • पहली बार महिला एचआईएल का आयोजन रांची में।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ स्टेडियम का रखरखाव।
    • झारखंड की जनता के लिए अपने नायकों को देखने का सुनहरा मौका।

    12 जनवरी से शुरू होने वाले इस हॉकी उत्सव के लिए झारखंड तैयार है।
    रांची की धरती एक बार फिर साबित करने जा रही है कि हॉकी का असली दिल झारखंड में धड़कता है।

     

  • झारखंड में इको टूरिज्म सीएम हेमंत सोरेन ने दिए अहम निर्देश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………
    झारखंड, जो अपनी घनी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, अब इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में एक अहम बैठक की, जिसमें इको टूरिज्म के विकास पर विस्तृत चर्चा हुई।  मुख्य सचिव अलका तिवारी, वन पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, और पर्यटन विभाग के सचिव मनोज कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने झारखंड में इको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में ऐसे स्थलों की पहचान करें जहां इको टूरिज्म को विकसित किया जा सके।

    प्रकृति और रोजगार का होगा संगम। 
    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “इको टूरिज्म को इस तरह से विकसित किया जाए कि न केवल झारखंड की प्राकृतिक धरोहर संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।” मुख्यमंत्री ने वन पर्यावरण और पर्यटन विभाग को आपसी समन्वय के साथ एक ठोस कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश और दुनिया के सामने लाने का यह बेहतरीन मौका है।

    अन्य राज्यों और देशों के मॉडल से सीखने पर जोर। 
    मुख्यमंत्री सोरेन ने अधिकारियों से यह भी कहा कि देश के उन राज्यों या विदेशों का अध्ययन करें, जहां इको टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य हुआ है। उन्होंने उदाहरणों से सीखकर झारखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का इको टूरिज्म विकसित करने की बात कही।

    वैश्विक मानचित्र पर झारखंड की पहचान। 
    मुख्यमंत्री का कहना था कि राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने से झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को एक वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने वन विभाग और पर्यटन विभाग से प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य करने को कहा।

    झारखंड, जहां प्राकृतिक संसाधनों और विविधता की कोई कमी नहीं है, अब इको टूरिज्म के जरिए न केवल अपनी धरोहर को संरक्षित करने बल्कि उसे दुनिया के सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • ‘जीनत’ का रोमांचक सफर खत्म, पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ी गई

    ओडिशा के टाइगर रिजर्व  की बाघिन ‘जीनत’, जो बीते कई दिनों से  सुर्खियों में थी, आखिरकार रविवार को पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ ली गई। 21 दिनों तक तीन राज्यों—ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल—में लगभग 300 किलोमीटर की यात्रा कर, जीनत ने वन विभाग की नींद उड़ा दी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बड़ी खबर को साझा करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया। माना जा रहा है कि बाघिन को कुछ समय निगरानी में रखा जाएगा और फिर उसे वापस ओडिशा के टाइगर रिजर्व भेजा जाएगा।

    कैसे पकड़ी गई जीनत?
    जीनत के पकड़े जाने का ऑपरेशन किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था। मुख्य वन संरक्षक देबल रॉय ने बताया कि शनिवार रात तक जीनत गोपालपुर के जंगल में थी। उसे धीरे-धीरे जालों से घेरा गया। रविवार तड़के 1:20 बजे उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन वह पूरी तरह बेहोश नहीं हुई। अंततः रविवार शाम 4:09 बजे एक और डार्ट शॉट ने अपना काम कर दिखाया। रॉय ने कहा, “जीनत काफी उत्तेजित थी, इसलिए उसे बेहोश करने में बार-बार परेशानी हो रही थी। फिलहाल उसे आराम दिया गया है, और तीन पशु चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं।”

     ‘मेहमान’ से जंगल की ‘राहगीर’
    ज़ीनत  को कुछ ही समय पहले महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (टीएटीआर) सेओडिशा के सिमिलिपाल लाया गया था। लेकिन ऐसा लगता है कि सिमिलिपाल का जंगल उसे भा नहीं पाया। वहां से निकलकर जीनत ने झारखंड और फिर पश्चिम बंगाल के घने जंगलों का रुख किया।जीनत ने 27 दिसंबर को बंदवान से मनबाजार ब्लॉक के जंगलों तक का 15 किलोमीटर का सफर तय किया। वन विभाग ने उसके हर कदम पर नजर रखी, लेकिन उसे पकड़ने में पसीने छूट गए।

    अब क्या होगा जीनत का?
    वन्यजीव अधिकारियों के मुताबिक, जीनत को फिलहाल अस्थायी आवास में रखा जाएगा। उसकी स्वास्थ्य जांच के बाद उसे वापस सिमिलिपाल भेजने का निर्णय लिया जाएगा।

    जंगल की इस ‘राहगीर’ का सफर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उसकी कहानी ने हमें यह जरूर सिखाया कि जंगल के जानवरों की अपनी दुनिया, अपनी चुनौतियां होती हैं।

  • झारखंड  शिक्षकों के ट्रांसफर नियमों में होगा सुधार-मंत्री

    झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन कहा है कि  शिक्षक ट्रांसफर नियमों में सुधार  किया जाएगा और  जनजातीय भाषाओं में शिक्षकों की बहाली की जाएगी ।

    शिक्षकों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव। 

    शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में शिक्षकों के ट्रांसफर से जुड़े नियमों में बदलाव किया जाएगा। यह कदम शिक्षकों की गृह जिले में तैनाती को सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने कहा, “वर्तमान नियमों की वजह से म्यूचुअल ट्रांसफर और अन्य स्थानांतरण प्रक्रियाएं अटक गई हैं। शिक्षकों से लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए नियमों की समीक्षा की जा रही है।”

    2022 के नियमों में क्या थे बदलाव?

    वर्ष 2022 में अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए उम्र, तैनाती क्षेत्र और प्राथमिकता के आधार पर अंक तय किए गए थे। लेकिन अब इन प्रावधानों को और अधिक व्यावहारिक बनाने की तैयारी है। विशेष रूप से महिला शिक्षकों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों के लिए प्राथमिकताओं को बदला जाएगा।

    सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में सुरक्षा और रखरखाव।

    शिक्षा मंत्री ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने पाया कि स्कूलों में सुरक्षाकर्मी और माली की कमी है। हर स्कूल में दो सिक्योरिटी गार्ड और एक माली की बहाली की जाएगी। यह प्रक्रिया आउटसोर्सिंग के माध्यम से जल्द शुरू होगी।

    गांव से शहर तक ‘प्रतिनियोजन’ की राजनीति

    गांव के स्कूलों में तैनात कई शिक्षकों ने सेटिंग-गेटिंग के जरिए शहरों में प्रतिनियोजन करा लिया है। मंत्री ने इसे शिक्षा तंत्र के साथ धोखा बताते हुए कहा, “ऐसे शिक्षकों की सूची बनाकर उनका प्रतिनियोजन रद्द किया जाएगा।”

    10,000 शिक्षकों की होगी नियुक्ति: जनजातीय भाषाओं में नई पहल

    झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। नौ जनजातीय और छह क्षेत्रीय भाषाओं में 10,000 शिक्षक बहाल होंगे।

    झारखंड की शिक्षा का भविष्य: उम्मीद या सवाल?

    रामदास सोरेन की इन घोषणाओं से झारखंड के शिक्षा तंत्र में सुधार की उम्मीद जगी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सुधार केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे, या फिर यह वाकई झारखंड के शिक्षा तंत्र में बदलाव लाने में सफल होंगे?

  • झारखंड : बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………….

    बंगला देशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है । केंद्रीय गृह मंत्रालय  ने एक RTI  के जबाब में  साफ कहा कि उनके पास अवैध रूप से रह रहे बंगला  नागरिकों का कोई भी आंकड़ा मौजूद नहीं है। ये जानकारी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों या ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के पास हो सकती है।

    सवालों की फेहरिस्त और मंत्रालय का जवाब। 
    झारखंड जनाधिकार महासभा से जुड़े सिरज दत्ता ने आरटीआई के जरिए गृह मंत्रालय से कई सवाल पूछे थे। इनमें हर राज्य में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या, ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मामलों की जानकारी, और इन पर उठाए गए प्रशासनिक कदमों के बारे में पूछा गया था। जवाब में मंत्रालय ने कहा कि विदेशी अधिनियम 1939 और नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत यह मामला आता है। लेकिन इस पर कोई केंद्रीय डाटा मौजूद नहीं है।

    राजनीतिक गलियारे में भूचाल। 
    इस खुलासे के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ को जोरदार तरीके से उठाया था। पार्टी ने राज्य सरकार पर इसे रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, जबकि झामुमो और उसके सहयोगियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब भाजपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन की धमकी दी है, जबकि झामुमो ने इसे समाज में नफरत फैलाने की साजिश बताया।

    हाईकोर्ट का आदेश और सरकार का रुख। 
    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि झारखंड सीमावर्ती राज्य नहीं है और हाईकोर्ट का आदेश राज्य सरकार की स्वायत्तता में दखल है।

    राजनीतिक बयानबाजी या सुलझती गुत्थी?
    दानियल दानिश की जनहित याचिका से शुरू हुए इस विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। गृह मंत्रालय के जवाब ने बांग्लादेशी घुसपैठ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना होगा कि यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या सच्चाई सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

    नफरत की राजनीति और आंकड़ों की चुप्पी।
    क्या बांग्लादेशी घुसपैठ वाकई एक बड़ी समस्या है या सिर्फ चुनावी भाषणों का मसाला? आंकड़ों की गैर-मौजूदगी और मंत्रालय का जवाब एक बार फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक एजेंडे की परतें खोलता है। लेकिन जवाबदेही किसकी है? आने वाले समय में यह सवाल झारखंड और देश की राजनीति के केंद्र में रहेगा।

  • 2024 :कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में हुई धमाकेदार एंट्री हमेशा याद रखा जाएगा

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक  रिपोर्ट …………..

    झारखंड की राजनीति में वर्ष 2024 ने एक नया अध्याय लिखा। बदलाव की ऐसी बयार चली जिसने सत्ता समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगा, लेकिन असली कहानी विधानसभा चुनाव के दौरान लिखी गई। इंडिया गठबंधन की ओर से कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाला और इतिहास रच दिया।

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और कल्पना का उदय. 

    झारखंड की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया जब 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उस रात की कहानी कल्पना सोरेन बार-बार बताती हैं—”सोचा था, बस पूछताछ होगी, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ पूरा परिदृश्य बदल चुका था।”

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद जेएमएम के सामने सवाल खड़ा था—कौन नेतृत्व करेगा? गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कल्पना सोरेन से कहा, “भाभी, भैया नहीं हैं, अब आपको ही जिम्मेदारी उठानी होगी।”

    राजनीति में कदम रखने की दास्तान। 


    कल्पना सोरेन, जो अब तक सामाजिक कार्यों और परिवार तक सीमित थीं, अचानक राजनीति के केंद्र में आ गईं। 4 मार्च 2024 को गिरिडीह में जेएमएम के स्थापना दिवस पर उन्होंने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया। पहली ही रैली में उनकी आंखों से आंसू छलके, लेकिन हाथ में झंडा थामे उन्होंने पार्टी को भरोसा दिलाया—“हम लड़ेगें और जीतेंगे।”

    लोकसभा चुनाव: कल्पना का असर। 

    हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में कल्पना सोरेन ने इंडिया गठबंधन की कमान संभाली। धुर्वा के प्रभात तारा मैदान में उनकी रैली ने यह साफ कर दिया कि झारखंड की जनता उनके साथ है। नतीजों में इंडिया गठबंधन ने 14 में से 4 सीटें जीतीं। ये प्रदर्शन 2019 के मुकाबले दोगुना था और इसका श्रेय कल्पना की मेहनत को गया।

    गांडेय उपचुनाव: पहली जीत और बढ़ता प्रभाव। 

    लोकसभा चुनाव के साथ हुए गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना सोरेन ने बाजी मारी। 4 जून 2024 को आए नतीजों में उन्होंने बीजेपी के दिलीप वर्मा को 27,149 वोटों से हराया। ये जीत न सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा थी, बल्कि झारखंड में उनकी बढ़ती सियासी ताकत का सबूत भी थी।

    विधानसभा चुनाव: मैदान पर कल्पना और हेमंत की जोड़ी। 

    झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की रिहाई के बावजूद कल्पना सोरेन गठबंधन की स्टार प्रचारक बनीं रहीं। उन्होंने 100 से अधिक सभाएं कीं और हर सभा में जनता से सीधा संवाद किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और भावुकता ने जनता को अपने साथ जोड़ लिया।

    झारखंड की “नई शक्ति”

    कल्पना सोरेन के सियासी सफर की शुरुआत भले ही अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई हो, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि झारखंड में बदलाव की बागडोर अब उनके हाथ में है।

    2006 से 2024 तक: कल्पना का सफर।

    ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली कल्पना, झारखंड के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बहू बनकर आईं थीं। एक आम महिला से एक सशक्त नेता तक का उनका सफर, झारखंड की जनता के लिए प्रेरणा है।

    तो सवाल यह है कि क्या झारखंड में यह नई नारी शक्ति राज्य को एक नई दिशा दे पाएगी? जवाब वक्त देगा, लेकिन एक बात तय है—कल्पना सोरेन की कहानी झारखंड की राजनीति का वह मोड़ है, जो शायद हमेशा याद रखा जाएगा।

  • झारखंड: अब सड़क सुरक्षा होगी और भी मजबूत !

    RANCHI: अब सड़क सुरक्षा होगी और भी मजबूत! झारखंड में चार पहिया, सार्वजनिक सेवा वाहन और व्यावसायिक वाहनों में ट्रैफिकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा, बल्कि आपराधिक घटनाओं पर भी नज़र रखी जा सकेगी।

    क्या है खास:
    ट्रैफिकिंग डिवाइस और पैनिक बटन का एक्सेस सीधे परिवहन, ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा अधिकारियों के पास रहेगा। इसका मतलब है कि किसी भी आपात स्थिति में वाहन की लाइव जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

    नियम की खास बातें:

    • 1 जनवरी 2019 से पहले बने पुराने वाहनों में भी ये डिवाइस लगवाना अनिवार्य होगा।
    • वाहन निर्माता कंपनियां अब इन उपकरणों को फिट करके ही अपने वाहन बेचेंगी।

    सरकार ने उठाए ठोस कदम:
    सड़क सुरक्षा की लीड एजेंसियां वाहन निर्माता कंपनियों से सीधा संवाद करेंगी, ताकि इस नए नियम को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। परिवहन विभाग ने इस पर अधिसूचना जारी कर दी है और अगले आदेश के बाद इसे लागू किया जाएगा।

    वाहन मालिकों की जिम्मेदारी:
    वाहन मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके चालक ट्रैफिकिंग डिवाइस और पैनिक बटन का सही उपयोग जानें। छेड़छाड़ करने पर सख्त कार्रवाई होगी। अगर डिवाइस में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो उसे ठीक कराना अनिवार्य होगा।

    स्कूल बसों में पहले से मौजूद ट्रैकिंग सिस्टम:
    वर्तमान में स्कूल बसों में ट्रैफिकिंग डिवाइस पहले से ही लगाया गया है, जिससे उनकी निगरानी की जा रही है। यह कदम बाकी वाहनों के लिए भी सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाएगा।

    झारखंड सरकार का यह कदम सड़क सुरक्षा को एक नई दिशा देगा।

  • हजारीबाग: एसडीओ की पत्नी अनिता की मौत,FIR

    हजारीबाग : हजारीबाग सदर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अशोक कुमार की पत्नी अनिता कुमारी की मौत हो गई है। अनिता करीब 65% तक जल चुकी थीं, और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दर्दनाक घटना ने परिवार और प्रशासन, दोनों को हिला कर रख दिया है।

    एफआईआर में एसडीओ समेत परिवार के चार लोग नामजद. 
    अनिता के भाई राजू कुमार गुप्ता ने लोहसिंघना थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। एफआईआर में एसडीओ अशोक कुमार, उनके पिता दुर्योधन साव, छोटे भाई शिवनंदन कुमार, और उनकी पत्नी रिंकू देवी को आरोपी बनाया गया है।

    राजू का आरोप है कि उनकी बहन अनिता ने कई बार कहा था कि उनके पति का किसी और महिला से अवैध संबंध है। यही वजह दोनों के बीच लगातार विवाद का कारण बनती थी। एक बार दोनों परिवारों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई थी। उस वक्त एसडीओ ने कथित तौर पर कहा था, “आगे से शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।”

    ‘कहां जाना है जाओ, मैं एसडीओ हूं!’
    राजू के मुताबिक, इस घटना से पहले भी एसडीओ और उनके परिवार की ओर से धमकियां दी गई थीं। अशोक कुमार ने कथित तौर पर कहा था, “जहां जाना है जाओ, कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं अनुमंडल पदाधिकारी हूं। तुम सबको बर्बाद कर दूंगा।”

    सुबह की घटना, भाई ने फोन पर दी सूचना. 
    राजू ने बताया कि 26 दिसंबर की सुबह 8:45 बजे एसडीओ के भाई शिवनंदन का फोन आया। उन्होंने केवल इतना कहा कि अनिता जल गई है और फोन काट दिया। इसके बाद राजू ने दोबारा कॉल किया, तो पता चला कि अनिता को हजारीबाग के अस्पताल से बोकारो के बीजीएच रेफर किया जा रहा है। घटना कब और कैसे हुई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।जब परिवार बोकारो पहुंचा, तो अनिता को बुरी तरह झुलसा हुआ पाया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल भेजा गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    एसडीओ का पक्ष: ‘खुद पर तेल डालकर लगाई आग. ‘
    एसडीओ अशोक कुमार ने इस पूरे मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा, “गुरुवार की सुबह मेरी पत्नी मॉर्निंग वॉक के लिए तैयार हो रही थीं। घर में रंग-रोगन का काम चल रहा है। मैंने उन्हें बाहर जाने से रोका, तो वह नाराज हो गईं। फिर गुस्से में खुद पर तेल डालकर आग लगा ली।”एसडीओ का दावा है कि उन्हें बचाने की कोशिश में उनके हाथ भी जल गए।

    मौत पर उठ रहे सवाल.
    इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह वास्तव में आत्महत्या का मामला है, जैसा कि एसडीओ दावा कर रहे हैं? या फिर यह घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का परिणाम है? पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

    हजारीबाग की यह घटना बताती है कि परिवार और समाज के बीच अधिकार और जिम्मेदारी का संतुलन कितना अहम है।