प्रकृति और रोजगार का होगा संगम।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “इको टूरिज्म को इस तरह से विकसित किया जाए कि न केवल झारखंड की प्राकृतिक धरोहर संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।” मुख्यमंत्री ने वन पर्यावरण और पर्यटन विभाग को आपसी समन्वय के साथ एक ठोस कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश और दुनिया के सामने लाने का यह बेहतरीन मौका है।
अन्य राज्यों और देशों के मॉडल से सीखने पर जोर।
मुख्यमंत्री सोरेन ने अधिकारियों से यह भी कहा कि देश के उन राज्यों या विदेशों का अध्ययन करें, जहां इको टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य हुआ है। उन्होंने उदाहरणों से सीखकर झारखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का इको टूरिज्म विकसित करने की बात कही।
वैश्विक मानचित्र पर झारखंड की पहचान।
मुख्यमंत्री का कहना था कि राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने से झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को एक वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने वन विभाग और पर्यटन विभाग से प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य करने को कहा।
झारखंड, जहां प्राकृतिक संसाधनों और विविधता की कोई कमी नहीं है, अब इको टूरिज्म के जरिए न केवल अपनी धरोहर को संरक्षित करने बल्कि उसे दुनिया के सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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