Category: Jharkhand

  • झारखंड में लाल खतरा: CM से विधायक तक सुरक्षा का कड़ा पहरा

    RANCHI:   झारखंड में विधानसभा सत्र के दौरान माहौल तनातनी का है। नक्सली खतरे के अलर्ट ने पुलिस और प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। CM हेमंत सोरेन से लेकर विधायकों तक, हर किसी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्पेशल ब्रांच (SB) की रिपोर्ट ने कई इलाकों को संवेदनशील घोषित किया है।

    “लाल इलाकों की पहचान, सुरक्षा का ब्लूप्रिंट तैयार”
    SB की रिपोर्ट में रांची से लेकर गिरिडीह और गुमला तक, कई इलाकों को खतरनाक बताया गया है। इन रास्तों पर नेताओं के आवागमन के दौरान सुरक्षा कड़ी रहेगी। तैमारा घाटी, चुटूपालू और टाटीझरिया जैसे इलाके लिस्ट में टॉप पर हैं। यहां पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी और लांग रेंज पेट्रोलिंग शुरू होगी।

    “सड़कों पर निगरानी, जंगलों पर नजर”
    सुरक्षा की योजना सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। रांची-लातेहार, खूंटी-चाईबासा, और गुमला-सिमडेगा जैसे जंगलों वाले रास्तों पर पुलिस की मुस्तैदी और बढ़ा दी गई है। बेतला, अमझारिया और महुआडांड़ घाटियों में पुलिस चौकसी बढ़ गई है। “हर घात को नाकाम करना हमारा लक्ष्य है,” पुलिस अधिकारियों का कहना है।

    “नेताओं पर मंडराता खतरा”
    SB का कहना है कि उग्रवादियों ने पहले भी विधानसभा सत्र के दौरान घटनाओं को अंजाम दिया है। इस बार संभावित हमलों के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। “सड़क से सदन तक, हर नेता सुरक्षित रहेगा,” प्रशासन ने दावा किया।

    “यहां है सबसे ज्यादा खतरा”
    तैमारा घाटी, चुटूपालू, टाटीझरिया से लेकर चंदवा और बड़कागांव तक, खतरे की लिस्ट लंबी है। इन इलाकों में पुलिस की 24×7 निगरानी रहेगी। गढ़वा, बोकारो और चाईबासा के जंगल भी सूची में शामिल हैं।

    “सरकार का वादा: कोई चूक नहीं”
    इस बार सरकार और प्रशासन नक्सली चुनौतियों को लेकर खासा सतर्क हैं। “हमारे नेता सुरक्षित हैं और रहेंगे,” मुख्यमंत्री कार्यालय का बयान आया है।

    सुरक्षा के इस पुख्ता इंतजाम के साथ झारखंड सरकार ने साफ कर दिया है कि नक्सली खतरों को जवाब देने के लिए वो हर कदम उठाने को तैयार है। अब देखना है कि सुरक्षा की यह दीवार कितनी मजबूत साबित होती है।

  • भाजपा की बैठक में चंपई सोरेन का नया रूप

    RANCHI: मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक झारखंड प्रदेश कार्यालय में सजी। माहौल गर्म, चर्चा तीखी, और नेतृत्व दमदार। इस बार मंच पर दिखा चंपई सोरेन का नया अवतार। प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और चंपई सोरेन ने विधायकों को संबोधित किया, लेकिन चर्चाओं का केंद्र रहे चंपई सोरेन।
    “जनादेश हमारा, विपक्ष मजबूत”
    दोनों नेताओं ने साफ-साफ कहा कि जनता ने भले सरकार बनाने का मौका नहीं दिया, लेकिन मजबूत विपक्ष का कंधा हमें सौंपा है। “हम सड़क पर भी लड़ेंगे और सदन में भी, सरकार की गलत नीतियों को उजागर करेंगे,” चंपई ने बुलंद आवाज में कहा।
    “अब वक्त है तैयार होने का”
    चंपई सोरेन ने बिना किसी घुमाव के विधायकों से दो टूक बात की, “चुनाव के नतीजों से बाहर निकलिए और आगे की रणनीति पर ध्यान दीजिए। विपक्ष का काम सिर्फ आलोचना करना नहीं है, बल्कि सकारात्मक कार्यों का समर्थन भी करना होगा। लेकिन जहां गलती होगी, वहां सरकार को घेरने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”
    मरांडी का निशाना: जेएसएससी और सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ियां
    प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। जेएसएससी और सीजीएल परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाते हुए मरांडी ने सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “एक क्रम में अभ्यर्थियों का पास होना, परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। छात्रों में बेचैनी है, सरकार को स्पष्ट करना होगा। भाजपा, छात्र हित में, सड़क से सदन तक आवाज बुलंद करेगी।”
    चंपई का चुनावी खेल
    इस चुनाव में भाजपा ने चंपई सोरेन और उनके बेटे बाबूलाल सोरेन दोनों को मैदान में उतारा। हालांकि, बाबूलाल घाटशिला से हार गए, लेकिन चंपई ने सरायकेला सीट से झामुमो प्रत्याशी गणेश महली को 20,447 वोटों से हराकर परचम लहराया।
    चंपई की जीत न केवल भाजपा के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह अपने क्षेत्र में अब भी अपराजेय हैं। कभी हेमंत सोरेन के खास माने जाने वाले चंपई, अब उनके लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

    झारखंड की राजनीति एक नए मोड़ पर है। चंपई के नेतृत्व में भाजपा ने विपक्ष के तौर पर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अब देखना है कि यह रणनीति सरकार पर कितना असर डालती है।

  • झारखंड विधानसभा के ऐतिहासिक पल और नई राहें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……

    झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन ने इतिहास रच दिया। राज्यपाल संतोष गंगवार के अभिभाषण ने झारखंड की राजनीति और विकास की दिशा को नई ऊर्जा दी। उनके शब्दों ने न केवल सरकार के वादों को पुख्ता किया, बल्कि झारखंड के भविष्य का एक रोडमैप भी सामने रखा।

    महिलाओं के लिए नई उम्मीद
    सबसे बड़ा ऐलान सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण का रहा। यह कदम झारखंड में महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाला है। चुनावी वादे को निभाते हुए, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं को रोजगार में बराबरी का हक मिले।

    सरना धर्म कोड और आरक्षण पर जोर
    राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बताया कि झारखंड सरकार ने सरना धर्म कोड बिल पास किया है, जो अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही आदिवासियों को 28%, ओबीसी को 27%, और एससी को 12% आरक्षण देने की बात दोहराई गई। यह झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

    किसानों और गरीबों के लिए राहत पैकेज
    किसानों को ज़ीरो ब्याज पर लोन देने का ऐलान झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। साथ ही, गरीबों के लिए 7 किलो चावल और 2 किलो दाल उपलब्ध कराने की योजना ने आम जनता की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी है।

    शिक्षा और खेल को मिलेगा बढ़ावा
    राज्यपाल ने घोषणा की कि झारखंड में 500 सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस और 4,500 पंचायत स्तरीय आदर्श विद्यालय खोले जाएंगे। इन स्कूलों में स्वास्थ्य और संगीत जैसे विषयों के शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना और खिलाड़ियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के जरिए खेल को भी एक नई पहचान देने का प्रयास किया गया है।

    गांव और शहर में संतुलित विकास
    अबुआ आवास योजना के तहत 25 लाख गरीब परिवारों को तीन कमरों के सुंदर घर मुहैया कराए जाएंगे। शहरी क्षेत्रों में पुराने मकानों के नक्शे का नियमितीकरण भी राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    वित्तीय मजबूती की ओर कदम
    राज्यपाल ने बताया कि झारखंड सरकार केंद्र और उसकी कंपनियों के बकाए ₹1.36 लाख करोड़ को कानूनी रास्ते से वसूलने का प्रयास करेगी। यह कदम राज्य की आर्थिक स्थिति को स्थिरता देगा।

    सहारा इंडिया के पीड़ित निवेशकों के लिए लड़ाई लड़ने से लेकर नई पेंशन योजना के तहत जमा धनराशि वापस लाने तक, राज्य सरकार ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।

    झारखंड विधानसभा के इस सत्र ने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि झारखंड के विकास की नई नींव भी रखी। राज्यपाल के शब्दों में उन्नत, समृद्ध, और सुखी झारखंड का सपना झलकता है। अब देखना यह होगा कि ये योजनाएं जमीन पर कैसे उतरती हैं।

  • छठी विधानसभा के पहले सत्र में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली रहेगी, जानिए इसका कारण।

    झारखंड की छठी विधानसभा के पहले सत्र में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं रहेगा। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने बताया कि पार्टी में अभी तक विधायक दल का नेता तय नहीं किया गया है। पार्टी जल्द ही विधायक दल का नेता तय करेगी। बता दें कि बीजेपी विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और उसके विधायक दल का नेता ही सदन में नेता प्रतिपक्ष बनेगा।

    जल्द होगा विधायक दल के नेता का चयन: बाबूलाल मरांडी
    बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पार्टी के विधायकों के साथ बैठक के बाद विधायक दल के नेता का नाम तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी पूरी ताकत के साथ सदन में विपक्ष की भूमिका निभाएगी। बीजेपी के पास कुल 21 विधायक हैं, जो सदन में उसे सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनाते हैं।

    9 से 12 दिसंबर तक चलेगा सत्र
    हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद विधानसभा सत्र सोमवार, 9 दिसंबर से शुरू हुआ। सत्र की समाप्ति 12 दिसंबर को होगी। पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाई गई, जिसकी अध्यक्षता प्रोटेम स्पीकर स्टीफन मरांडी ने की। मंगलवार को भी शपथ ग्रहण का सिलसिला जारी रहेगा और इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।

  • झारखंड में भाजपा का नंबर गेम कमजोर, राज्यसभा मे नहीं मिलेगी सीटें

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक  रपट …..

    झारखंड की सियासत में भाजपा के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की शानदार जीत के बाद, भाजपा के लिए राज्यसभा चुनाव में भी राहें कठिन नजर आ रही हैं। सिर्फ 21 विधायकों के साथ, भाजपा की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह राज्यसभा में अपने दम पर किसी भी उम्मीदवार को जीत दिला सके।

    नंबर गेम में पिछड़ती भाजपा.
    राज्यसभा चुनाव में जीतने के लिए 27 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। भाजपा के पास वर्तमान में सिर्फ 21 विधायक हैं। एनडीए के घटक दलों—आजसू, जदयू और लोजपा (रामविलास)—को मिलाकर यह संख्या 24 तक पहुंचती है। लेकिन यह आंकड़ा भी जीत के लिए नाकाफी है।

    भाजपा की परेशानी यहां खत्म नहीं होती। अगले पांच साल में राज्यसभा की चार सीटें रिक्त होंगी, जिनमें से दो फिलहाल भाजपा के पास हैं। लेकिन मौजूदा हालात में ये दोनों सीटें महागठबंधन की झोली में जाती दिख रही हैं।

    झामुमो का बढ़ता प्रभाव.
    वर्तमान में राज्यसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के तीन सदस्य और भाजपा के तीन सदस्य हैं। लेकिन अगर राजनीतिक समीकरण ऐसे ही बने रहे, तो झामुमो-कांग्रेस गठबंधन राज्यसभा में भी अपनी पकड़ मजबूत कर लेगा। यह भाजपा के लिए झारखंड में राजनीतिक हाशिये पर जाने का संकेत हो सकता है।

    समाप्त होती उम्मीदें.
    भाजपा के वर्तमान राज्यसभा सदस्यों में दीपक प्रकाश और आदित्य साहू का कार्यकाल क्रमश: 2026 और 2028 में समाप्त हो रहा है। अगर भाजपा की स्थिति विधानसभा में ऐसी ही रही, तो 2029 तक झारखंड से राज्यसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है।

    फिलवक्त , शिबू सोरेन, महुआ माजी और सरफराज अहमद झारखंड मुक्ति मोर्चा से और दीपक प्रकाश, आदित्य साहू एवं प्रदीप वर्मा भाजपा से राज्यसभा में सदस्य हैं।

    शिबू सोरेन       झामुमो 21 जून 2026 तक

    दीपक प्रकाश  भाजपा 21 जून 2026 तक

    आदित्य साहू    भाजपा 7 जुलाई 2028 तक

    महुआ माजी     झामुमो 7 जुलाई 2028

    प्रदीप वर्मा       भाजपा 3 मई 2030

    सरफराज अहमद  झामुमो 3 मई 2030

    झारखंड की सियासत का नया अध्याय। 
    झामुमो, कांग्रेस और राजद के गठबंधन ने झारखंड में सत्ता के साथ-साथ अब राज्यसभा पर भी अपनी नज़रें जमा ली हैं। शिबू सोरेन, महुआ माजी और डॉक्टर  सरफराज अहमद जैसे नेता इस स्थिति को मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा के पास अभी समय है, लेकिन सवाल है—क्या वहगठबंधन को चुनौती दे पाएगी?

    भाजपा के लिए अलार्म.
    झारखंड में भाजपा के लिए यह राजनीतिक अलार्म है। विधानसभा और राज्यसभा में कमजोर होती स्थिति पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है। क्या भाजपा इन हालातों से उबरने का रास्ता तलाश पाएगी, या फिर झारखंड की राजनीति में यह गठबंधन उसकी पकड़ को और कमजोर करेगा?

     

  • रांची स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बने आवास का सीएम ने निरीक्षण

    RANCHI: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज रांची स्मार्ट सिटी में राज्य सरकार के मंत्रियों के लिए बनाए जा रहे नवनिर्मित आवासीय परिसर का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 जनवरी 2025 तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि मंत्रियों को उनके आवास आवंटित किए जा सकें।

    क्लब हाउस से लेकर बच्चों के खेल स्थान तक सुविधाओं का जायजा. 
    मुख्यमंत्री ने आवासीय परिसर में बने क्लब हाउस, बैडमिंटन कोर्ट और पुलिस बैरक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों के खेलने के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने आवासीय परिसर की सभी सुविधाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    निरीक्षण के दौरान मौजूद विधायक और अधिकारी.
    इस मौके पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव अरवा राजकमल, स्मार्ट सिटी के सीईओ अमीत कुमार और जीएम राकेश नंदकुलियार समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    विधानसभा सत्र की शुरुआत.
    इसी बीच, झारखंड विधानसभा का चार दिवसीय सत्र आज से शुरू हो गया। पहले दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मुख्य सचिव अलका तिवारी और डीजीपी अनुराग गुप्ता समेत अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया। वहीं, डुमरी से विधायक जयराम महतो ने अनोखे अंदाज में नमन करते हुए विधानसभा में प्रवेश किया, जो चर्चा का विषय बना रहा।

    15 जनवरी की डेडलाइन पर टिकी नजरें.
    रांची स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बनाए जा रहे इस आवासीय परिसर को लेकर मुख्यमंत्री की सक्रियता और निर्देश यह संकेत देते हैं कि सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब सभी की निगाहें 15 जनवरी 2025 की डेडलाइन पर हैं।

  • झारखंड के पारा शिक्षकों को नये साल का तोहफा, जनवरी से मिलेगा बढ़ा हुआ मानदेय

    RANCHI:झारखंड के 59 हजार पारा शिक्षकों के लिए नये साल की शुरुआत खुशखबरी लेकर आई है। राज्य सरकार ने इन सहायक अध्यापकों के मानदेय में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। जनवरी 2025 से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी से पारा शिक्षकों को उनके श्रेणी और योग्यता के आधार पर अलग-अलग मानदेय मिलेगा।

    बढ़ा हुआ मानदेय: जानिए, किसे कितना मिलेगा
    कक्षा 6 से 8 तक (TET पास शिक्षक):
    अब तक: ₹24,300
    जनवरी 2025 से: ₹25,200
    कक्षा 1 से 5 तक (TET पास शिक्षक):
    अब तक: ₹22,680
    जनवरी 2025 से: ₹23,530
    प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 6 से 8 तक):
    अब तक: ₹19,656
    जनवरी 2025 से: ₹20,384
    आकलन परीक्षा पास शिक्षक (कक्षा 6 से 8 तक):
    अब तक: ₹21,008
    जनवरी 2025 से: ₹21,788
    प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 1 से 5 तक):
    अब तक: ₹18,144
    जनवरी 2025 से: ₹18,816
    आकलन परीक्षा पास शिक्षक (कक्षा 1 से 5 तक):
    अब तक: ₹19,392
    जनवरी 2025 से: ₹20,112
    आने वाले तीन साल का खाका तैयार
    स्कूली शिक्षा विभाग ने 2027 तक पारा शिक्षकों के लिए मानदेय वृद्धि की योजना तय कर दी है। इससे पारा शिक्षकों को भविष्य की स्पष्टता और आर्थिक स्थिरता मिलेगी।

    मानदेय की गणना: किस आधार पर हो रही है?
    पारा शिक्षकों के मासिक मानदेय की गणना आकलन परीक्षा के परिणाम (29 सितंबर 2023) के आधार पर की गई है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि मानदेय में पारदर्शिता बनी रहे।

    सरकार का यह कदम पारा शिक्षकों के योगदान को मान्यता देने और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पारा शिक्षकों ने इसे नए साल का शानदार तोहफा बताया है और अपने शिक्षण कार्य को और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का वादा किया है।

    झारखंड सरकार के इस निर्णय से राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

  • झारखंड: केंद्रीय संस्थानों से वसूले जाएंगे 200 करोड़ रुपये का बकाया होल्डिंग टैक्स

    रांची : झारखंड सरकार के गठन के साथ ही विकास की रूप रेखा अमल मे लाने की कवायद शुरू हो गयी है । झारखंड नगर विकास विभाग ने राज्य में बकाया होल्डिंग टैक्स की वसूली के लिए कमर कस ली है। प्रधान सचिव सुनील कुमार के निर्देशानुसार, CCL, BCCL, पोस्ट ऑफिस, सेल और रेलवे जैसे केंद्रीय संस्थानों से टैक्स की वसूली की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इन संस्थानों पर लगभग 200 करोड़ रुपये का होल्डिंग टैक्स बकाया है।

    वसूली की प्रक्रिया होगी तेज। 
    राज्य सरकार ने बकाया टैक्स वसूलने के लिए सभी संबंधित निकायों को विशेष निर्देश जारी करने की तैयारी की है। जल्द ही इन केंद्रीय संस्थानों को नोटिस भेजा जाएगा ताकि राजस्व संग्रहण में तेजी लाई जा सके।

    राज्य सरकार के विभाग भी घेरे में।
    केवल केंद्रीय संस्थान ही नहीं, बल्कि झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के उन भवनों से भी टैक्स वसूली शुरू की जाएगी, जहां अब तक होल्डिंग टैक्स का भुगतान नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, जमशेदपुर, जिसे औद्योगिक नगरी का दर्जा प्राप्त है, को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। हालांकि, राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और प्रतिष्ठानों से होल्डिंग टैक्स की वसूली अनिवार्य होगी।

    राजस्व वसूली से बढ़ेगा विकास।
    राज्य सरकार का मानना है कि बकाया होल्डिंग टैक्स की वसूली से राजस्व में वृद्धि होगी, जो शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक होगा।

    इस कदम से न केवल वित्तीय अनुशासन स्थापित होगा, बल्कि झारखंड के शहरी विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि यह प्रक्रिया कितनी तेजी से अमल में लाई जाती है।

  • झारखंड में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता हुआ आसान

    RANCHI: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को अधिसूचित कर दिया है, जिससे राज्य में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है। हालांकि, इसके लिए कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

    निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए नगर निगम क्षेत्र में कम से कम 5 एकड़ जमीन और नगर निगम सीमा से बाहर 15 एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। यह जमीन 30 साल के लीज पर होनी चाहिए, और इसका इस्तेमाल सिर्फ विश्वविद्यालय के उद्देश्य से किया जा सकेगा। इसके साथ ही इस जमीन को किसी भी अन्य कार्य के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकेगा।

    निधि का प्रावधान. 
    नगर निगम क्षेत्र में भूमि के लिए 10 करोड़ रुपये और नगर निगम सीमा के बाहर की भूमि के लिए 7 करोड़ रुपये की निधि रखना अनिवार्य होगा।

    भवन और बुनियादी ढांचे की जरूरत. 
    प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए पुस्तकालय, व्याख्यान कक्ष, सभागार, विद्यार्थी संसाधन केंद्र, खेल सुविधाएं और प्रयोगशालाएं जैसी सुविधाएं कम से कम 12,000 वर्गमीटर के निर्मित क्षेत्र में होनी चाहिए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

    निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के अनुसार की जाएगी। कुलपति और कुलसचिव की नियुक्ति में भी नियमानुसार प्रक्रिया अपनानी होगी।

    आवेदन प्रक्रिया और शुल्क.
    निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 5 लाख रुपये का आवेदन शुल्क जमा करना होगा। इसके साथ ही अनुसंधान और एकेडमिक उत्कृष्टता की दिशा में कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

    छात्रों के लिए विशेष प्रावधान.
    एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शुल्क में छूट देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही राज्य की औद्योगिक, स्टार्टअप, और ऊर्जा नीतियों के प्रति विश्वविद्यालय को जागरूक और प्रतिबद्ध रहना होगा।

    जांच समिति का प्रावधान.
    प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया की जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर एक जांच समिति भी नियुक्त की जाएगी।

    इस कदम से झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। नए विश्वविद्यालयों के जरिए न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर होगा, बल्कि राज्य में रोजगार और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • सहारा इंडिया के निवेशकों को ऑनलाइन मिलेगा बकाया पैसा !

    गिरिडीह: झारखंड और देशभर के सहारा इंडिया निवेशकों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने सहारा में फंसे पैसों की वापसी के लिए Sahara Refund Portal लॉन्च कर दिया है। इस पोर्टल के जरिए सहारा में निवेश करने वाले लोग आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर अपनी जमा राशि वापस पा सकते हैं। सरकार ने इस पहल के तहत 5,000 करोड़ रुपये की राशि रिफंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    झारखंड के हजारों निवेशकों को मिलेगा लाभ। 
    झारखंड में सहारा इंडिया में निवेश करने वाले हजारों लोगों का पैसा अटका हुआ है। हाल के विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना था। भाजपा और झामुमो (JMM) दोनों ने इसे अपने एजेंडे में प्रमुखता से उठाया था। अब इस पोर्टल की शुरुआत से निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण जगी है।

    क्या है सहारा विवाद?। 
    सहारा इंडिया वर्षों तक अपनी आकर्षक योजनाओं के तहत लोगों से धनराशि जमा करता रहा। लेकिन 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सेबी (SEBI) ने सहारा समूह पर कई प्रतिबंध लगाए। इसके बाद लाखों निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। अब केंद्र सरकार ने Sahara Refund Portal लॉन्च कर इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    कैसे करें रिफंड के लिए आवेदन?। 
    निवेशक Sahara Refund Portal पर जाकर कुछ आसान स्टेप्स में अपनी राशि वापस पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं:

    पंजीकरण करें:

    पोर्टल पर जाएं (https://mocrefund.crcs.gov.in) और साइन अप करें।
    आवेदन फॉर्म भरें:

    अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जमा राशि और अन्य आवश्यक विवरण भरें।
    दस्तावेज़ अपलोड करें:

    आधार कार्ड, पैन कार्ड (₹50,000 से अधिक राशि के लिए), निवेश की रसीद, और बैंक खाता विवरण अपलोड करें।
    आवेदन सबमिट करें:

    सभी विवरण सही भरने के बाद आवेदन सबमिट करें।
    रिफंड स्टेटस चेक करें:

    पोर्टल पर लॉगिन कर “रिफंड स्टेटस” लिंक पर जाकर अपने आवेदन का स्टेटस देखें।
    जरूरी दस्तावेज़
    आधार कार्ड: पहचान प्रमाण के लिए।
    पैन कार्ड: ₹50,000 से अधिक राशि के लिए अनिवार्य।
    निवेश प्रमाण (रसीद या डिपॉजिट प्रूफ): जमा की पुष्टि के लिए।
    बैंक खाता विवरण: राशि ट्रांसफर करने के लिए।
    रिफंड स्टेटस कैसे जांचें?
    पोर्टल पर लॉगिन करें।
    “रिफंड स्टेटस” पर क्लिक करें।
    अपनी आवेदन संख्या डालें और सबमिट करें।
    स्क्रीन पर आपका बकाया अमाउंट और प्रक्रिया की जानकारी दिखाई देगी।
    निवेशकों के लिए राहत का कदम।
    सहारा इंडिया के निवेशकों के लिए यह पहल बड़ी राहत है। वर्षों से अपने बकाया पैसों की वापसी का इंतजार कर रहे लोग अब इस पोर्टल के जरिए अपनी राशि वापस पा सकते हैं।