Category: Jharkhand

  • हेमंत सरकार का बड़ा ऐक्शन: प्रशासनिक उलटफेर से सियासी संदेश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    राजनीति में वापसी के साथ ही हेमंत सोरेन ने एक बार फिर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उनके फैसलों ने यह दिखा दिया कि यह केवल शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि सत्ता पर उनकी मजबूत पकड़ का ऐलान है।

    मंजूनाथ भजंत्री, जिन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर रांची डीसी के पद से हटाया गया था, अब फिर से रांची के उपायुक्त बनाए गए हैं। यह फैसला न केवल प्रशासनिक महत्व रखता है, बल्कि इसके पीछे छिपे सियासी संदेश को समझना भी जरूरी है।

    भजंत्री की वापसी: एक रणनीतिक चाल
    भजंत्री, जिनकी पहचान एक सख्त और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में होती है, को वापस लाने का मतलब है कि सोरेन सरकार पुराने भरोसेमंद सिपाहियों के सहारे नई पारी खेलना चाहती है। इस बदलाव के साथ ही वरुण रंजन को रांची डीसी से हटाकर जुडको का डायरेक्टर बनाया गया है।

    डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार: अनुराग गुप्ता को फिर मिली जिम्मेदारी
    अनुराग गुप्ता, जो एसीबी के डीजी के रूप में अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं, को झारखंड डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मौजूदा डीजीपी अजय कुमार को पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का एमडी बनाकर एक अलग जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव दिखाता है कि हेमंत सरकार हर मोर्चे पर नई ऊर्जा और नए नेतृत्व को तरजीह दे रही है।

    वरुण रंजन को दिया नया रोल
    वरुण रंजन, जिनकी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर पहले भी चर्चाएं रही हैं, अब झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (JIIDCO) के एमडी बनाए गए हैं। उनके इस नई भूमिका में जाने का मतलब है कि सरकार विकास योजनाओं को प्राथमिकता देना चाहती है।

    शपथ के बाद ऐक्शन में सरकार
    हेमंत सोरेन की सरकार के गठन के बाद यह बड़े फैसले केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं हैं। ये उस बड़े खेल की शुरुआत हैं, जो विधानसभा चुनाव 2024 के पहले से ही तय दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मंजूनाथ की ताजपोशी और चुनावी संदेश
    सवाल यह है कि मंजूनाथ भजंत्री को दोबारा रांची का डीसी बनाकर क्या हेमंत सोरेन ने विरोधियों को यह संदेश दिया है कि वह अपने लोगों पर भरोसा करते हैं और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं?

    इस सियासी और प्रशासनिक दांव का असर झारखंड केप्रशासनिक संतुलन पर क्या पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, हेमंत सोरेन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उनके फैसले तेज हैं, रणनीति सटीक है, और इरादे मजबूत।

  • हेमंत कैबिनेट की आज पहली बैठक,होंगे कई अहम फैसले

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    RANCHI : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण के बाद आज यानि गुरुवार को कैबिनेट की पहली बैठक होगी । इस बैठक में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जा सकता है ताकि विश्वास मत हासिल किया जा सके। हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं  और अब उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस बैठक से कई बड़े फैसले निकलने की उम्मीद है, जो न सिर्फ गठबंधन के चुनावी वादों को हकीकत में बदलने का काम करेंगे, बल्कि झारखंड की जनता को राहत का संदेश भी देंगे।
    भगवान बिरसा और सिदो-कान्हू के नाम पर बड़ा फैसला ?
    झारखंड के सबसे बड़े पुरस्कार का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा-भगवान सिदो-कान्हू पुरस्कार करने का प्रस्ताव आज कैबिनेट में पेश हो सकता है। यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
    रसोई गैस सिलेंडर @450 रुपये: जनता को राहत का तोहफा?
    बैठक में झारखंड के हर जरूरतमंद परिवार को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी मिल सकती है। गठबंधन के चुनावी घोषणापत्र में इसे सात गारंटी में शामिल किया गया था, और अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी हो रही है।
    मंईयां सम्मान योजना में पहले ही बढ़ाई गई राशि
    शपथ ग्रहण से पहले हुई अंतिम कैबिनेट बैठक में मंईयां सम्मान योजना की राशि बढ़ाकर 2500 रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसे दिसंबर से लागू किया जाएगा। नई सरकार इस योजना को और विस्तार देने पर विचार कर रही है।
    1932 के खतियान और सरना कोड पर चर्चा
    कैबिनेट की प्राथमिकता में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद है। इससे राज्य की स्थानीय पहचान और संस्कृति को मजबूती मिलने की संभावना है।
    सात गारंटी: जनता से वादों की दिशा में पहला कदम—
    1. स्थानीयता की गारंटी: 1932 खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लागू करने का वादा।
    2. मंईयां सम्मान की गारंटी: दिसंबर 2024 से 2500 रुपये की सम्मान राशि।
    3. सामाजिक न्याय की गारंटी: एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं।
    4. खाद्य सुरक्षा की गारंटी: गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर और 7 किलो राशन।
    5. रोजगार और स्वास्थ्य की गारंटी: 10 लाख युवाओं को नौकरी और 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा।
    6. शिक्षा की गारंटी: हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज और 500 एकड़ में औद्योगिक पार्क।
    7. किसान कल्याण की गारंटी: धान का एमएसपी 3200 रुपये और लघु वनोपज पर समर्थन मूल्य में 50% वृद्धि।

    झारखंड के लोग इस कैबिनेट बैठक से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं। हेमंत सरकार अगर इन वादों को पूरा करती है, तो यह न सिर्फ जनता का विश्वास जीतने में सफल होगी, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नई इबारत लिखेगी।

  • हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

    परवेज आलम की रिपोर्ट…..

    झारखंड की राजनीति ने रच दिया इतिहास। 2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोरहाबादी के मैदान में ऐसा नज़ारा था, जो शायद दशकों तक याद किया जाएगा।

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शाम चार बजे हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हेमंत अब झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री हैं। तीन बार पहले भी इस कुर्सी पर विराजमान हो चुके अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन के बाद, हेमंत का यह चौथा कार्यकाल एक नई कहानी लिखने को तैयार है।

    इंडिया गठबंधन की चमक और शपथ का मंच—

    जिस तरह से मोरहाबादी के मंच पर इंडिया गठबंधन के नेता जुटे, वो किसी शक्ति प्रदर्शन से कम नहीं था। राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, और यहां तक कि तमिलनाडु से उदयनिधि स्टालिन तक… हर किसी की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया। शिबू सोरेन, जो खुद दिशोम गुरु कहे जाते हैं, अपने बेटे की इस चौथी पारी के गवाह बने।

    नतीजों का संदेश—

    2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर साबित कर दिया कि झारखंड की जनता का भरोसा उनके साथ है। झामुमो ने 34 सीटों पर कब्जा जमाया, जो इसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। कांग्रेस को 16, आरजेडी को 4, और भाकपा-माले को 2 सीटें मिलीं।

    सुरक्षा और उत्सव—

    मोरहाबादी मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन माहौल में जोश और जश्न का संगम दिखा। हजारों समर्थकों ने अपने नेता का स्वागत किया। झारखंड का भविष्य नई उम्मीदों से भर चुका है, और इंडिया गठबंधन के लिए यह एक बड़ी जीत का प्रतीक है।

    मोरहाबादी के मंच से झारखंड के हर कोने तक एक संदेश गया—यह जीत सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि झारखंड के सपनों को नई दिशा देने की शुरुआत है। हेमंत सोरेन की चौथी पारी कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस शपथ ग्रहण ने झारखंड की राजनीति को एक नई उड़ान जरूर दी है।

  • झारखंड की राजनीति में नया पेंच: कांग्रेस की ‘चार विधायकों पर एक मंत्री’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड की सत्ता की गोटियां बिछ रही हैं और कांग्रेस ने पुराना पत्ता फेंका है—चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला। 2019 में इस फॉर्मूले ने कांग्रेस को चार मंत्री पद दिलवाए थे, जब उसके पास 16 विधायक थे। हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में तब जेएमएम के 30 विधायक थे, और पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत सात मंत्री पद अपने हिस्से किए थे। आरजेडी को एक मंत्री पद मिला था।

    अब क्या बदला?
    इस बार कांग्रेस के पास फिर से 16 विधायक हैं, लेकिन पेंच यह है कि इंडिया ब्लॉक के कुल विधायकों की संख्या 56 है। कांग्रेस के फॉर्मूले से 14 मंत्रियों की गुंजाइश बनती है, लेकिन कानून कहता है कि झारखंड विधानसभा (81 सीटें) में मंत्रियों की संख्या 12 से अधिक नहीं हो सकती। इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

    फिर क्यों कर रही है कांग्रेस ये डिमांड?
    साफ है, बार्गेनिंग पावर कमजोर हुई है। 2019 में जेएमएम को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के 11 विधायकों की जरूरत थी। इस बार जेएमएम को केवल सात विधायकों का सहारा चाहिए। ऐसे में कांग्रेस का पुराना फॉर्मूला प्रैक्टिकल तो नहीं, लेकिन दांवपेंच का हिस्सा जरूर है।

    लेफ्ट का खेल और आरजेडी की चुनौती
    इस बार लेफ्ट भी गठबंधन का हिस्सा है। कोयलांचल और संथाल में लेफ्ट का जनाधार मजबूत है, और लोकसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने उसे साथ लाने की पहल की थी। ऐसे में लेफ्ट को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। आरजेडी भी एक मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठा है।

    नंबर गेम और गठबंधन की सियासत
    जेएमएम की स्थिति मजबूत है। कांग्रेस को दरकिनार कर भी गठबंधन 40 के आंकड़े पर पहुंच रहा है, जो बहुमत से महज एक कम है। ऐसे में कांग्रेस का दबाव बनाना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार उसकी बात कितनी सुनी जाएगी, यह कहना मुश्किल है।

    क्या होगा आगे?
    हेमंत सोरेन की सरकार के लिए मंत्रीमंडल का संतुलन साधना बड़ी चुनौती है। क्या कांग्रेस अपने फॉर्मूले पर अड़ी रहेगी? क्या लेफ्ट को मंत्री पद मिलेगा? और आरजेडी कहां खड़ा होगा? जवाब आने वाले दिनों में झारखंड की सियासत तय करेगी।

     

  • झारखंड : कौन होगा विपक्ष का नया महारथी ?

    परवेज़ आलम कि रिपोर्ट …….

    झारखंड की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। गुरुवार को सीएम हेमंत सोरेन चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। नई सरकार के गठन के साथ ही विधानसभा का सत्र प्रारंभ होगा, लेकिन असली दिलचस्पी है विपक्ष की तरफ से कौन होगा नया चेहरा?

    भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा

    भाजपा, जिसके पास 21 विधायकों की टीम है, इस बार नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर माथापच्ची में जुटी है। प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का नाम सबसे आगे है। मरांडी ने इस बार भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की है, लेकिन उनके सामने चंपई सोरेन भी चुनौती बनकर खड़े हैं।

    चंपई सोरेन, जो झामुमो छोड़ भाजपा में आए, एक आदिवासी चेहरा हैं। उनकी पहचान सिर्फ विधायक तक सीमित नहीं है, बल्कि वो बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों पर मुखर रहे हैं। भाजपा इस बार हेमंत सोरेन सरकार को उन्हीं के अंदाज में घेरने के लिए आदिवासी नेता को आगे करने की सोच सकती है।

    अनुभव बनाम नयापन

    दूसरी तरफ, सदन में भाजपा के कई बड़े चेहरे नदारद रहेंगे। अमर कुमार बाउरी, बिरंची नारायण, अनंत ओझा जैसे दिग्गज चुनाव हार चुके हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसे में भाजपा अपने नए विधायकों पर कितनी निर्भर हो पाएगी?

    सीपी सिंह, जो लंबे समय से चुनाव जीतते आ रहे हैं और सदन में अपनी मुखरता के लिए जाने जाते हैं, सामान्य जाति के मजबूत उम्मीदवार हैं। वहीं, अगर ओबीसी और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान दिया गया, तो नीरा यादव भी इस दौड़ में आ सकती हैं।

    विपक्ष की नई रणनीति

    भाजपा को अब नए चेहरे और नए तेवर की जरूरत है। सत्येंद्र तिवारी और प्रकाश राम को इस बार सरकार पर हमला बोलने की बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। साथ ही, जमुआ से जीतकर आईं मंजू देवी, जो उच्च शिक्षित हैं, विपक्ष की आवाज को धार देने का काम कर सकती हैं।

    आखिरी सवाल:

    भाजपा किसे चुनेगी—अनुभव का तजुर्बा, आदिवासी पहचान, या फिर महिला सशक्तिकरण? यह तय करेगा झारखंड की राजनीति का अगला अध्याय।

  • झारखंड में नक्सली आतंक का अंत: छोटू खरवार की हत्या से वर्चस्व की जंग का पर्दाफाश !

    RANCHI: छोटू खरवार की मौत झारखंड के लिए एक नए युग की शुरुआत है। यह सिर्फ एक नक्सली कमांडर का खात्मा नहीं, बल्कि वर्चस्व की राजनीति में छिड़ी अंदरूनी जंग का खुलासा है। झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने जहां इसे बड़ी जीत माना है, वहीं नक्सली संगठनों के लिए यह चेतावनी है कि आतंक और अपराध का अंत तय है। लातेहार की धरती एक बार फिर खून से लाल हो गई, लेकिन इस बार कहानी उलट है। 15 लाख के इनामी नक्सली कमांडर छोटू खरवार, जो कभी दहशत का दूसरा नाम था, मंगलवार रात वर्चस्व की जंग में मारा गया। पुलिस ने उसके शव को बरामद कर लिया है। छोटू खरवार, जिसे नक्सली संगठनों में “सुजीत जी” के नाम से भी जाना जाता था, झारखंड के लातेहार, पलामू, गढ़वा, और गुमला जैसे जिलों में 100 से ज्यादा संगीन मामलों में वांछित था।

    कौन था छोटू खरवार?

    छोटू, भाकपा (माओवादी) संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और आतंक, रंगदारी और हिंसा का एक ऐसा अध्याय था, जिसे झारखंड कभी भूल नहीं सकता। पुलिस और एनआईए ने उसके सिर पर इनाम रखा था—15 लाख झारखंड पुलिस की ओर से और 3 लाख एनआईए की ओर से।

    2018 में एनआईए ने छोटू के खिलाफ मामला टेकओवर किया था। उसकी पत्नी ललिता देवी तक को पुलिस ने 2019 में गिरफ्तार किया था, जब छोटू के पैसे को निवेश कराने के दस्तावेज मिले। छोटू ने सहारा इंडिया के जरिए लाखों का लेनदेन किया था, जिससे पुलिस को उसके आर्थिक नेटवर्क का अंदाजा हुआ।

    कैसे मारा गया छोटू?

    मंगलवार रात, लातेहार के नावाडीह इलाके में नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में छोटू मारा गया। झारखंड पुलिस ने उसके शव को बरामद कर लिया है। ऑपरेशन ऑक्टोपस के दौरान बूढ़ापहाड़ से भाग निकले नक्सलियों में छोटू भी शामिल था। इसके बाद वह कोयल-शंख जोन में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ये कोशिशें अब खत्म हो गई हैं।

    आतंक से तस्करी तक: छोटू की कहानी

    छोटू ने हत्या, विस्फोट, आगजनी, पुलिस पर हमले जैसे अनगिनत अपराध किए। उसने हाल ही में लातेहार के छिपादोहर इलाके में एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की हत्या की थी। 2016 में, पुलिस ने उसकी संपत्तियों और लेवी वसूली के सबूत जुटाए थे।

     

    2016: लातेहार में सहारा इंडिया के मैनेजर से 3 लाख की बरामदगी।
    2018: एनआईए ने छोटू के खिलाफ केस संभाला।
    2019: पत्नी की गिरफ्तारी, आर्थिक नेटवर्क का खुलासा।
    2023: ऑपरेशन ऑक्टोपस के बाद से भूमिगत।
    2024: वर्चस्व की लड़ाई में मौत।

    झारखंड के जंगलों में अब नक्सली ताकत की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। छोटू का खात्मा यही संदेश देता है—बंदूक का अंत हमेशा खून से लिखा जाता है।

  • हेमंत सोरेन: नेमरा की मिट्टी, कल्पवृक्ष की छांव और बचपन की यादें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो 28 नवंबर को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। नेमरा, जो न सिर्फ उनके बचपन का गवाह है, बल्कि उनकी जड़ों और संघर्ष की कहानियों को भी समेटे हुए है। पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव में हेमंत सोरेन के कदम पड़ते ही पुरानी यादें जैसे ताजा हो उठीं।

    गांव का बदलता चेहरा, पर यादों का वही अक्स
    नेमरा में स्थित उनका खपरैल मकान, अब आंशिक रूप से दो मंजिला हो गया है। आंगन में लगा कल्पतरु का वृक्ष पहले से अधिक घना हो चुका है, लेकिन खेतों की पगडंडियां और गांव के गलियारे हेमंत सोरेन के लिए वही बचपन की कहानियां सुनाने लगे। वे बिना चप्पल दौड़ने, गुल्ली-डंडा, फुटबॉल, और बैडमिंटन खेलने की यादों में खो गए।

    गांव में रोशनी, पर सुविधाओं की दरकार
    नेमरा, जहां अब 150 संताल परिवारों के घर हैं, सौर ऊर्जा से जलने वाली स्ट्रीट लाइटों से रोशन है। रामगढ़ ज़िले के गोला प्रखंड मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर यह गांव अब पक्की सड़कों से जुड़ चुका है। हालांकि, गांव में अब भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाला एक स्कूल, डॉक्टरों की कमी वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, और कमजोर मोबाइल कनेक्टिविटी यहां की वास्तविकता को बयां करते हैं।

    शहीद सोबरन सोरेन को श्रद्धांजलि
    हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ शहीद सोबरन सोरेन के 67वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “दादा की शहादत इसी पहाड़ की तराई में हुई थी। वह हमारे दिलों में आज भी जिंदा हैं।”

    गांववालों को दिया शपथ ग्रहण का न्योता
    नेमरा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान हेमंत सोरेन ने गांव के लोगों का धन्यवाद किया और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा, “सरकार का गठन हो रहा है। इस बार जब नेमरा आया हूं, तो फिलहाल परिसंपत्तियों का वितरण या योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि आप सभी से संवाद के लिए आया हूं।”

    संदेश: मिट्टी से जुड़े रहना ही असली पहचान
    हेमंत सोरेन का यह दौरा न केवल उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि चाहे इंसान कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसकी जड़ें हमेशा उसकी ताकत होती हैं।

     

  • हेमंत के शपथ मे जुटेंगे देश के सियासी सूरमा: रांची में ‘राजनीति का महाकुंभ’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    रांची के आसमान पर सियासी सितारों की जगमगाहट, क्योंकि 28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का शपथ ग्रहण समारोह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीति का महाकुंभ बनने जा रहा है।

    कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने रांची पहुंचेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह विपक्षी एकता का मंच भी बनेगा, जिसमें कई अन्य बड़े नेता अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

    राजनीति के सितारे करेंगे शिरकत
    समारोह में माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंता रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की संभावना है।

    सभी मेहमान बनेंगे राजकीय अतिथि
    शपथ ग्रहण में आने वाले इन नेताओं को राज्य सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। मंत्रिमंडल समन्वय विभाग ने इसके लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अतिथि 28 नवंबर को रांची पहुंचेंगे और उसी दिन कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट जाएंगे।

    दिल्ली से रांची तक न्योते की गूंज
    हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया है। हालांकि, उनकी उपस्थिति को लेकर अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    ‘नई राजनीति’ की झलक का दावा
    रांची में होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सत्ता के हस्तांतरण का मंच नहीं, बल्कि विपक्षी एकता और सियासी रणनीतियों के प्रदर्शन का एक ऐतिहासिक अवसर बन सकता है। क्या झारखंड की धरती से देश की राजनीति को कोई नया संदेश मिलेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

     

  • झारखंड में 5000 सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, जिसमें दौड़ से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाएंगे।

    झारखंड में 5000 सिपाहियों की बहाली की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में दौड़ के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 10 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों के लिए 5 किलोमीटर की दौड़ की सीमा घटाई जा सकती है, लेकिन समय बढ़ाया जा सकता है। सेना की तर्ज पर 1600 मीटर दौड़, लंबी और ऊंची कूद को भी शामिल करने पर विचार हो रहा है।

    पहले झारखंड पुलिस के 4919 रिक्त पदों के लिए शारीरिक जांच परीक्षा अगस्त 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन एजेंसी के चयन में देरी और विधानसभा चुनावों के कारण आचार संहिता लागू होने से प्रक्रिया रुक गई थी। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने जनवरी 2024 में आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। लाखों लोगों ने आवेदन किया, लेकिन स्क्रूटनी के बाद करीब 1,44,308 आवेदन रद्द कर दिए गए। अब प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

    रिक्त पदों का विवरण
    झारखंड के विभिन्न जिलों में बैकलॉग और नियमित रिक्तियों के लिए पदों की संख्या इस प्रकार है:

    रांची: 76 पद
    देवघर: 343 पद
    हजारीबाग: 358 पद
    गिरिडीह: 452 पद
    धनबाद: 337 पद
    पलामू: 192 पद
    दुमका: 164 पद
    पू. सिंहभूम: 288 पद
    साहेबगंज: 131 पद
    रामगढ़: 200 पद
    जल्द ही शारीरिक दक्षता परीक्षा के बाद लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।

  • झारखंड के लिए गौरव का क्षण! गिरिडीह जिले का निमियाघाट थाना !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….
    अब पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे वर्ष 2024 के तीन सर्वश्रेष्ठ थानों में शामिल किया है। और यह सम्मान तब और खास बन जाता है, जब खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 नवंबर को भुवनेश्वर में आयोजित एक भव्य समारोह में निमियाघाट के थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर को ट्रॉफी देकर सम्मानित करेंगे।

    थाने का चयन कैसे हुआ?
    हर साल केंद्रीय गृह मंत्रालय देश के थानों का निरीक्षण करता है। लेकिन यहां महज़ इमारत की हालत नहीं देखी जाती, बल्कि पुलिस का जनता के प्रति व्यवहार, थाना परिसर की साफ-सफाई, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, फायर सेफ्टी, और यहां तक कि पुलिसकर्मियों के लिए फिटनेस की व्यवस्था तक हर पहलू पर बारीकी से जांच की जाती है।

    गिरिडीह के थाने का राष्ट्रीय स्तर पर नाम!
    निमियाघाट का यह सफर साधारण नहीं है। इस थाने को अपनी पेंट्री, अनुसंधान अधिकारियों के लिए अलग कमरे, सीसीटीवी जैसी सुविधाओं और पुलिसकर्मियों के अनुकरणीय व्यवहार की बदौलत यह उपलब्धि हासिल हुई है। आम जनता से पुलिस का सहज और सम्मानजनक संवाद, जो अक्सर बड़े शहरों में भी दुर्लभ होता है, यहां एक मानक बन चुका है।

    राणा जंगबहादुर—इस सफलता के नायक!
    इस थाने की उत्कृष्टता के पीछे तत्कालीन थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर का नाम है, जिनके कार्यकाल में यह निरीक्षण हुआ। अब यह देखना दिलचस्प होगा जब 29 नवंबर को अमित शाह के हाथों ट्रॉफी ग्रहण कर राणा न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश को यह संदेश देंगे कि छोटे कस्बों और गांवों की पुलिसिंग भी राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन सकती है।

    क्या झारखंड पुलिस ने एक नया मानक स्थापित किया है?
    ऐसे समय में जब पुलिसिंग को लेकर आलोचनाएं आम हैं, निमियाघाट थाना यह साबित करता है कि सही दिशा और नेतृत्व में पुलिस प्रणाली जनता की भरोसेमंद साथी बन सकती है।

    तो सवाल यह है—क्या यह सिर्फ एक ट्रॉफी तक सीमित रहेगा, या झारखंड की पुलिसिंग इस उपलब्धि को पूरे राज्य में दोहराने की दिशा में काम करेगी? भुवनेश्वर में गूंजेगा निमियाघाट का नाम, लेकिन इसकी असली परीक्षा झारखंड की बाकी थानों में सुधार की यात्रा में छिपी होगी।