Category: Jharkhand

  • कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……

    झारखंड की सियासत में इस वक्त हलचलें तेज़ हैं। मंत्रिमंडल के गठन की कवायद के बीच विधायकों की दौड़-भाग अपने चरम पर है। दिल्ली से रांची तक सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    दिल्ली की तरफ़ रुख़ करें तो कांग्रेस के विधायक पहले ही पोजिशनिंग में जुट गए हैं। दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, कुमार जयमंगल और बंधु तिर्की जैसे नाम आलाकमान के दरवाज़े खटखटा रहे हैं। झारखंड में 28 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है, लेकिन उससे पहले यह राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। कांग्रेस, झामुमो और राजद—तीनों ही अपने-अपने विधायकों को संतुलन में लाने की जद्दोजहद में हैं।

    दिल्ली और रांची के बीच सियासी लाइनें खिंच चुकी हैं
    कांग्रेस के चार मंत्री बनना तय है, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय समीकरण की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं। अनुसूचित जाति से राधाकृष्ण किशोर या सुरेश बैठा, अल्पसंख्यक कोटे से इरफान अंसारी, और ओबीसी से ममता देवी या प्रदीप यादव मंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, दीपिका पांडेय सिंह और रामेश्वर उरांव भी अहम दावेदार माने जा रहे हैं।

    झामुमो की बात करें तो संताल-कोल्हान से ज़्यादा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की तैयारी है। दीपक बिरुवा, रामदास सोरेन और महिला कोटे से लुईस मरांडी या सविता महतो की चर्चा जोरों पर है। पिछली सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर की जगह इस बार अनंत प्रताप देव को मौका मिल सकता है।

    राजद और माले के विधायकों की भूमिका पर सस्पेंस बरकरार
    राजद के चार विधायकों में से एक को मंत्री बनने का मौका मिलेगा। सुरेश पासवान और संजय सिंह यादव इस रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, माले से अरूप चटर्जी के मंत्री बनने की संभावना पर भी चर्चाएं हो रही हैं।

    मोरहाबादी मैदान पर तैयारी जोरों पर
    शपथ ग्रहण समारोह को लेकर मोरहाबादी मैदान में तैयारियां ज़ोरों पर हैं। डीसी वरुण रंजन की अगुवाई में अधिकारी समारोह स्थल का जायज़ा ले रहे हैं। सुरक्षा से लेकर वीवीआईपी मेहमानों की आवभगत और ट्रैफिक प्रबंधन तक, हर पहलू पर काम किया जा रहा है।

    लेकिन बड़ा सवाल वही है—ये लामबंदी और जोड़तोड़ का खेल सत्ता के कौन-कौन से दरवाज़े खोलता है? झारखंड की सियासत में यह तय है कि हर सीट और हर मंत्री पद के पीछे की रणनीति, 28 नवंबर के बाद नए समीकरणों की इबारत लिखेगी। अब सबकी नज़रें मोरहाबादी पर टिकी हैं।”*

  • भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ हो -केजरीवाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    दिल्ली का सियासी मौसम अचानक से बदलता हुआ नज़र आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद ककेजरीवाल के  आवास पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पहुंचे। दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया, और इस दौरान जो बातें सामने आईं, उसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।

    केजरीवाल ने सोरेन की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा, ‘हेमंत सोरेन ने जिस मजबूती के साथ जेल के तमाम दबावों के बावजूद चुनाव लड़ा और उसमें जीत हासिल की, वह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। मैं उनका और उनकी पत्नी का अपने आवास पर स्वागत करता हूं। 28 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा और उसमें हम सब शामिल होंगे।’

    लेकिन इस बातचीत में सबसे दिलचस्प बात वह भावनात्मक अपील थी, जब केजरीवाल ने कहा, ‘भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ रहें और विकास का जो रास्ता आपने बनाया है, वह और मजबूत हो।’

    दूसरी तरफ, हेमंत सोरेन ने भी इस मौके पर अपने अंदाज में बात की। उन्होंने कहा, ‘झारखंड में नई सरकार का गठन होना है, और इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। दिल्ली आने का मकसद यही था कि हमारे साथियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित कर सकूं। हमने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी इस समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।’

    यह न सिर्फ एक औपचारिक बैठक थी, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक संदेश भी, जिसने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के भविष्य की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। अब सबकी निगाहें 28 नवंबर पर हैं, जहां यह देखना होगा कि इस शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल होता है और इससे क्या संकेत निकलते हैं।*

  • कैसे एक चिट्ठी ने AJSU का चुनावी माहौल खराब कर दिया, जानिए पूरी कहानी

    HAZARIBAGH :जब झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, तो हर पार्टी अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी थी। आजसू पार्टी भी पूरे दमखम से अपने वोट बैंक को साधने की कोशिशों में लगी थी। लेकिन इसी बीच एक चिट्ठी ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया। ये चिट्ठी कहां से आई, किसने लिखी, कोई नहीं जानता। लेकिन इसके असर से झारखंड की सियासत में भूचाल आ गया।

    इस चिट्ठी में कुरमी समाज के भीतर सालों से सुलग रही नाराजगी को शब्द दिए गए थे। हेडलाइन थी— “आखिर कुरमी समाज आजसू को वोट क्यों दे?” और जब नतीजे आए, तो साफ हो गया कि ये चिट्ठी आजसू पार्टी के लिए कितनी घातक साबित हुई। पार्टी महज एक सीट पर सिमट गई, और कुरमी समाज ने अपना नया नेता जयराम महतो को चुन लिया।

    क्यों नाराज हुआ कुरमी समाज?

    चिट्ठी ने आजसू पर सीधे-सीधे आरोप लगाए।

    • निर्मल महतो के परिवार का अपमान: शहीद निर्मल महतो के छोटे भाई सुधीर महतो की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सबिता महतो को चुनाव हराने के लिए आजसू ने पूरी ताकत झोंक दी। चिट्ठी का दावा है कि अगर आजसू वास्तव में निर्मल महतो का सम्मान करती, तो उनकी विधवा के खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं उतारती।
    • दुख में दूर, सियासत में पास: जब शहीद सुनील महतो की बेटी का आकस्मिक निधन हुआ, तो आजसू का कोई नेता उनसे मिलने तक नहीं गया। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी इस मुश्किल घड़ी में साथ दिया।

    कुरमी नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप

    इस चिट्ठी में आजसू पर अपने ही समाज के नेताओं को खत्म करने का आरोप लगाया गया।

    • जगरनाथ महतो के निधन के बाद डुमरी उपचुनाव में आजसू ने पूरा जोर लगाया, लेकिन जयराम महतो ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
    • दामोदर महतो की पत्नी यशोदा देवी का टिकट काटने की कोशिश की गई, ताकि दुर्योधन महतो को मौका दिया जा सके।
    • तीन कुरमी विधायकों—योगेंद्र महतो, अमित महतो, और ममता देवी—को झूठे मामलों में जेल भिजवाने का आरोप लगाया गया। खासतौर पर ममता देवी को अपने दूधमुंहे बच्चे को छोड़कर जेल जाना पड़ा।

    आरोप: आजसू पूंजीपतियों की पार्टी बन गई है

    चिट्ठी ने सुदेश महतो और चंद्रप्रकाश चौधरी पर भी सीधा निशाना साधा।

    • सुदेश महतो पर आरोप है कि अपने भाई को डीएसपी बनवाने के लिए उन्होंने JPSC में पैरवी की, लेकिन गरीब कुरमी युवाओं के लिए कुछ नहीं किया।
    • आजसू को एक ऐसी पार्टी बताया गया, जो अब पूंजीपतियों और गैर-झारखंडी लोगों की समर्थक बन चुकी है।

    जयराम महतो की नई राजनीति

    चिट्ठी का सबसे बड़ा निशाना ये था कि जब कुरमी समाज का एक नया युवा नेता, जयराम महतो, उभर रहा है, तो आजसू उसे कुचलने की साजिश कर रही है। पार्टी के सोशल मीडिया वर्कर्स उस पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। लेकिन जनता ने अपना फैसला सुना दिया।

    क्या है इस हार का संदेश?

    आजसू के लिए ये नतीजे महज हार नहीं हैं, बल्कि कुरमी समाज की एक चेतावनी हैं। चिट्ठी ने उस दर्द को आवाज दी, जिसे समाज ने सालों से महसूस किया। अब सवाल ये है कि झारखंड की राजनीति इस नए समीकरण को कैसे संभालती है।

    तो क्या आजसू अपनी रणनीति पर फिर से विचार करेगी? क्या जयराम महतो के उभार के बाद कुरमी राजनीति का नया अध्याय शुरू हो चुका है? झारखंड के सियासी अखाड़े में ये सवाल अब गूंज रहे हैं।

  • मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर से 2500 रुपए

    RANCHI : महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर से 2500 रुपएकी राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बात करते हुए बताया कि योजना की तैयारी पूरी हो चुकी है।

    सचिव ने कहा कि नवंबर तक जिन महिलाओं के आवेदन स्वीकृत हो चुके थे, उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया जा चुका है। दिसंबर में नए आवेदनों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है। बीडीओ और सीओ स्तर पर आवेदनों की स्वीकृति का कार्य जारी है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने इस योजना के तहत 2500 रुपए की सहायता राशि देने का फैसला लिया था।

    पेंशन योजनाओं का भुगतान भी जारी
    मनोज कुमार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी पेंशन योजनाओं का भुगतान नवंबर तक कर दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पेंशन योजनाएं भी शामिल हैं। वहीं, केंद्र प्रायोजित योजनाएं, जैसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, के तहत सितंबर तक का भुगतान हो चुका है।

    हालांकि, अक्टूबर और नवंबर की राशि केंद्र सरकार से अभी तक नहीं मिली है, जिसके कारण इन महीनों का भुगतान रुका हुआ है। इस मुद्दे को हल करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से संपर्क कर रही है। सचिव ने कहा कि दिसंबर से मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना और अन्य योजनाओं का लाभ लाभुकों को समय पर मिले, इसके लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय है।

  • बाबूलाल मरांडी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश

    RANCHI: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार से आहतने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मरांडी ने चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व को भेजने की बात कही है।

    चुनाव परिणामों के मुताबिक, भाजपा राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई, जो पिछले चुनाव में हासिल 25 सीटों से भी कम हैं। एनडीए गठबंधन कुल मिलाकर केवल 24 सीटें जीत पाया।

    इस घटनाक्रम पर बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ को आदिवासी समाज की सभ्यता, संस्कृति और अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने लिखा कि चुनाव के नतीजे चाहे जैसे भी हों, लेकिन भाजपा अपने लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

    मरांडी ने आगे कहा कि वह अब अपना पूरा समय और ऊर्जा लोगों को जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने में लगाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उनकी जल, जंगल और जमीन पर बुरी नजर न डाल सके।

  • जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    डुमरी विधायक जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे ! चौक गए न  । हेमंत सोरेन सरकार में जयराम महतो का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसा क्यों? क्योंकि उनकी पार्टी जेएलकेएम ने झारखंड चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। 15 से ज़्यादा सीटों पर एनडीए का खेल बिगाड़ने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को हर राजनीतिक दल ने सराहा है। अब सवाल यह है कि हेमंत सोरेन इस फैसले के पीछे क्या रणनीति रख रहे हैं?
    दरअसल, जयराम महतो 15% कुर्मी वोटों के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। अगर वह सरकार में शामिल होते हैं, तो इसका फायदा इंडिया गठबंधन को कुर्मी समुदाय के वोटों के रूप में मिल सकता है।
    चलिए अब झारखंड मंत्रिमंडल की संभावित तस्वीर पर बात करते हैं।
    आपको बता दें, झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। झामुमो के खाते से 5 से 6 मंत्री, कांग्रेस के 3 से  4 मंत्री, और राजद – माले से 1- 1 मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
    झामुमो से किनके नाम  हैं?
    दीपक बिरुवा, हफीजुल हसन, और रामदास सोरेन का नाम चल रहा है। महिला कोटा से कल्पना सोरेन को मंत्री बनाने का दबाव झामुमो पर है। अभी पार्टी के अंदर इस बात का मंथन चल रहा है की कल्पना मुर्मू सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए या नहीं। ज्यादातर विधायकों का दबाव है की कल्पना सोरेन को मंत्रिमंडल में स्थान मिलना चाहिए क्योंकि उनके जबरदस्त परफॉर्मेंस की वजह से ही विधायक बड़ी संख्या में जीत कर आए हैं तो अब सवाल यह है की कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल होती है या नहीं अभी इंतजार करना होगा और अगर कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्री नहीं बनती है तो महिला कोटे से जामा से जीत कर आई लुईस मरांडी और इचागढ़ से जीती सविता महतो में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है

    इधर कांग्रेस से इरफान अंसारी और दीपिका सिंह पांडे का  नाम मंत्री के लिए चल  रहा है। वहीं, प्रदीप यादव, ममता देवी, और जयमंगल सिंह भी रेस में हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर जयराम महतो को जगह मिलती है, तो कांग्रेस को तीन मंत्री और  एक भारी-भरकम मंत्रालय देकर संतुलन साधा जा सकता है ।
    राजद की स्थिति क्या है?
    राजद से सिर्फ 1 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इस दौड़ में सुरेश पासवान और संजय यादव के नाम हैं। लेकिन फाइनल फैसला तेजस्वी यादव करेंगे।
    सीपीआई(माले) का क्या होगा?
    पिछली बार समर्थन देने के बावजूद माले सरकार में शामिल नहीं हुआ था। इस बार, अरुप चटर्जी को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    हेमंत मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन को साधने की भी पूरी कोशिश हो रही है साथ ही प्रमंडलीय स्तर पर भी प्रतिनिधित्व मिले इसके भी कोशिश हो  रही है लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्री में जयराम महतो की क्या भूमिका होगी क्या इंडिया ब्लॉक जयराम महतो को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर सहमत है या सिर्फ हेमंत सोरेन ही चाहते हैं कि जयराम महतो मंत्रिमंडल में शामिल हो । क्या होगा मामला यह अभी देखना दिलचस्प होगा।

  • झारखंड: विधानसभा में एंग्लो इंडियन प्रतिनिधित्व का अंत

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …..
    झारखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। राज्य की विधानसभा में सदस्यों की संख्या अब 82 से घटकर 81 हो गई है। वजह? एंग्लो इंडियन समुदाय को मिलने वाला विशेष प्रतिनिधित्व, जो 1952 से झारखंड ही नहीं, पूरे देश में एक पहचान बना रहा था, अब संवैधानिक रूप से समाप्त कर दिया गया है।

    ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन: आखिरी एंग्लो इंडियन विधायक
    2019 में झारखंड की पांचवीं विधानसभा का गठन हुआ था। उस दौरान मैकलुस्कीगंज के रहने वाले ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन को एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधि चुना गया था। वो विधानसभा के 82वें सदस्य बने। लेकिन, जैसे ही इस विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होगा, उनकी यह भूमिका भी खत्म हो जाएगी। खुद गॉलस्टेन कहते हैं, “दुख है कि अब हमारा समुदाय झारखंड विधानसभा में नहीं दिखेगा। ये एक परंपरा थी, जो अब खत्म हो गई।”

    संविधान में 1952 से लिखी गई थी ये व्यवस्था
    संविधान के अनुच्छेद 333 और 334बी ने एंग्लो इंडियन समुदाय को एक खास पहचान दी थी। अनुच्छेद 334बी के तहत, लोकसभा में दो एंग्लो इंडियन सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामांकित किया जा सकता था। वहीं, अनुच्छेद 333 के तहत, राज्यपाल को एक सदस्य को विधानसभा में नामांकित करने का अधिकार दिया गया था।

    126वें संविधान संशोधन ने किया इस व्यवस्था का अंत
    जनवरी 2020 में संसद में पारित 126वें संविधान संशोधन ने देशभर में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। झारखंड सहित 13 राज्यों की विधानसभाओं और संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व खत्म कर दिया गया।

    पिता-पुत्र की विरासत
    झारखंड के एंग्लो इंडियन समुदाय की राजनीतिक कहानी दिलचस्प रही है। 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद, जोसेफ पंचोली ग्लेस्टिन 2005 और 2009 में एंग्लो इंडियन विधायक बने। फिर, 2014 और 2019 में उनके बेटे ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन ने यह विरासत संभाली। अब, इस समुदाय की राजनीतिक उपस्थिति सिर्फ इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगी।

     

  • 28 नवंबर: झारखंड की राजनीति में रचने वाला है नया अध्याय!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..
    28 नवंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने जा रहा है एक भव्य आयोजन। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। आइए जानते हैं इस बड़े सियासी आयोजन से जुड़ी हर अहम बात।
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    हेमंत सोरेन: फिर करेंगे नई पारी की शुरुआत
    हेमंत सोरेन, जो झारखंड की राजनीति में एक मजबूत पहचान बना चुके हैं, चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
    • उन्होंने बरहेट विधानसभा सीट से भाजपा के गमालियल हेम्ब्रम को 39,791 वोटों के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की।
    • झारखंड की जनता ने एक बार फिर से झामुमो के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
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    भव्य शपथ ग्रहण समारोह में जुटेंगे ‘इंडिया’ के दिग्गज नेता
    28 नवंबर को झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में शपथ ग्रहण का आयोजन होगा।
    इंडिया गठबंधन के तमाम शीर्ष नेताओं को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।
    संभावित बड़े नाम:
    1. राहुल गांधी (लोकसभा में विपक्ष के नेता)
    2. ममता बनर्जी (टीएमसी सुप्रीमो)
    3. तेजस्वी यादव (राजद नेता)
    यह शपथ ग्रहण केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि।

  • झारखंड में अपराधी विधायकों की बढ़ती संख्या पर बड़ा सवाल !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    झारखंड विधानसभा में अपराधियों का जलवा!
    आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन झारखंड की राजनीति का चेहरा एक बार फिर दागदार हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में, 81 में से 43 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट चीख-चीख कर ये सच बयान कर रही है।

    महिलाओं के खिलाफ अपराध – शर्मनाक आंकड़े
    चौंकाने वाला तथ्य ये है कि पांच विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले हैं। और हद तो तब हो गई, जब एक विधायक ने खुद बलात्कार के मामले (IPC 376) को अपने हलफनामे में स्वीकार किया।

    हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप – खून-खराबे की राजनीति?
    हत्या के मामले: दो विधायकों ने IPC 302 के तहत हत्या के मामले घोषित किए।
    हत्या के प्रयास: 19 विधायकों ने IPC 307 के तहत हत्या के प्रयास के मामले कबूले हैं।
    पार्टीवार अपराधीकरण का आंकड़ा – कौन है सबसे आगे?
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM):
    34 विजयी उम्मीदवारों में से 12 (35%) पर आपराधिक मामले।
    9 (26%) पर गंभीर अपराध।
    भारतीय जनता पार्टी (BJP):
    21 विजयी उम्मीदवारों में से 13 (62%) पर आपराधिक मामले।
    11 (52%) पर गंभीर अपराध।
    कांग्रेस (INC):
    15 में से 8 (53%) पर आपराधिक मामले।
    6 (40%) पर गंभीर अपराध।
    राष्ट्रीय जनता दल (RJD):
    4 में से 4 (100%) पर आपराधिक मामले।
    तो क्या ऐसे होंगे जनता के प्रतिनिधि?
    ADR की ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, एक आईना है जो दिखाता है कि राजनीति का अपराधीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। सवाल ये उठता है कि ऐसे ‘माननीय’ क्या जनता के हितों की रक्षा करेंगे या अपने ‘आपराधिक करियर’ को आगे बढ़ाएंगे?

  • झारखंड: 89% नवनिर्वाचित विधायक धनकुबेर !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….
    झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है। क्या आप जानते हैं कि इस बार झारखंड में 89% नवनिर्वाचित विधायक ‘करोड़पति’ हैं? चलिए आपको समझाते हैं इस रिपोर्ट का हर पहलू।
    झारखंड इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने  चुनाव जीतने वाले 81 विधायकों में से 80 ने अपने हलफनामों का विश्लेषण किया है  और क्या मिला? कुल 71 विधायक करोड़पति निकले !
    2019 के मुकाबले बड़ा इजाफा
    याद कीजिए, 2019 में ऐसे विधायकों की संख्या 56 थी। और 2014 में सिर्फ 41! यानी करोड़पति विधायकों का ग्राफ ऊपर ही जा रहा है। इस बार तो 20% ज्यादा करोड़पति विधायक चुनकर आए हैं।
    किसकी पार्टी में कितने करोड़पति?
    सबसे ज्यादा करोड़पति विधायकों का रिकॉर्ड झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास है।
    • JMM: 28
    • भाजपा: 20
    • कांग्रेस: 14
    • राजद: 4
    • भाकपा (माले): 2
    • लोजपा (रामविलास), जद (यू), आजसू पार्टी: 1-1
    सबसे अमीर विधायक कौन?
    यहां सबसे बड़ी सुर्खी हैं कांग्रेस के लोहरदगा विधायक रामेश्वर उरांव, जिनकी कुल संपत्ति 42.20 करोड़ रुपये है।
    औसत संपत्ति भी बढ़ी!
    चुनाव जीतने वाले हर विधायक की औसत संपत्ति 6.90 करोड़ रुपये निकली। 2019 में यह 3.87 करोड़ रुपये थी। यानी झारखंड की राजनीति में धनकुबेरों का दबदबा साफ दिख रहा है।
    तो सवाल उठता है…
    क्या राजनीति में धन कुबेर बनना ज़रूरी हो गया है ? या ये महज संयोग है? क्या करोड़ों की संपत्ति विकास का प्रतिबिंब है या राजनीति में बढ़ते खर्च का परिणाम?
    झारखंड की राजनीति के इन दिलचस्प पहलुओं पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।