Category: RANCHI

  • रांची एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला: पायलट की सूझबूझ से 175 यात्रियों की जान बची

    By The News Post4u.

    रांची: सोमवार को रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब पटना से आ रहा इंडिगो का एक विमान लैंडिंग से ठीक पहले पक्षी से टकरा गया। विमान में सवार सभी 175 यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं, और पायलट की सूझबूझ से विमान की आपात लैंडिंग कराई गई।

    एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1:14 बजे घटी, जब एयरबस A320 विमान रांची एयरस्पेस में प्रवेश कर रहा था। उस समय विमान जमीन से लगभग 3000 से 4000 फीट की ऊंचाई पर, रनवे से करीब 10-12 नॉटिकल मील दूर था। अचानक एक गिद्ध से टक्कर हो गई, जिससे विमान की बाहरी संरचना को नुकसान पहुंचा।

    40 मिनट तक हवा में बनाए रखा नियंत्रण.
    पक्षी से टकराने के तुरंत बाद पायलट ने विमान को नियंत्रित रखा और आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत विमान को करीब 40 मिनट तक हवा में मंडराते हुए सुरक्षित स्थिति में लाया। इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से सतत संपर्क बना रहा। आखिरकार पायलट ने अत्यंत सावधानीपूर्वक विमान की आपात लैंडिंग कराई।

    सिर्फ विमान को हुआ नुकसान, यात्री पूरी तरह सुरक्षित.
    विमानन अधिकारियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, विमान के एक हिस्से में डेंट पाया गया है, जिसकी जांच एयरलाइंस के इंजीनियर कर रहे हैं। एयरपोर्ट निदेशक आर.आर. मौर्य ने बताया, “यह गनीमत रही कि केवल विमान को हल्का नुकसान हुआ, सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।”

    विमान की तकनीकी जांच जारी.
    फिलहाल विमान को तकनीकी जांच के लिए रनवे से हटा लिया गया है। विमानन विशेषज्ञ यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्षति कितनी गंभीर है और विमान को दोबारा उड़ान के लिए कब तक तैयार किया जा सकता है।

    बर्ड हिट की घटनाओं पर बढ़ती चिंता.
    यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि हवाई अड्डों के आसपास पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी विमानों की सुरक्षा के लिए कितनी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेष रूप से बड़े पक्षी, जैसे गिद्ध, विमान के इंजन या संरचना को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। इससे पहले भी कई बार बर्ड हिट की घटनाएं देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर सामने आ चुकी हैं।
    इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना यह याद दिलाती है कि हवाई सुरक्षा में पायलटों की सतर्कता और तकनीकी कुशलता कितनी अहम होती है। साथ ही यह भी ज़रूरी है कि एयरपोर्ट्स के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव नियंत्रण और निगरानी को और प्रभावी बनाया जाए।

  • हेमंत सरकार मुझे निशाना बनाने की  साजिश रच रही है – बाबूलाल मरांडी

    By The News Post4u.

    गिरिडीह : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगते हुये कहा है कि  राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार, अपराधियों के माध्यम से उन्हें, उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों को निशाना बनाने की साजिश रच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को “सुपारी” तक दी जा रही है।

    सोमवार को गिरिडीह में मीडिया से बात करते हुये  मरांडी ने कहा, “मुझे विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से जुड़े कुछ अत्यधिक भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति वाले अधिकारी मेरे खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं। वे न केवल मेरे ऊपर हमले की योजना बना रहे हैं, बल्कि मेरे परिजनों, निकट सहयोगियों को भी झूठे मामलों में फंसाने, चरित्र हनन करने और फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी प्रयास उन्हें डराने और उनकी आवाज को दबाने के लिए हैं, क्योंकि उन्होंने लगातार राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों का पर्दाफाश किया है।

    कई घोटालों को उजागर करने का दावा.
    मरांडी ने कहा कि उन्होंने झारखंड में चल रहे शराब घोटाले, बालू और पत्थर के अवैध खनन, जमीन और कोयले की तस्करी जैसे संगठित अपराधों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन खुलासों से बौखला गई है और अब उन्हें चुप कराने की कोशिश में जुट गई है।

    पुरानी साजिशों का भी किया उल्लेख.
    मरांडी ने याद दिलाया कि पूर्व में भी उन पर शिकारीपाड़ा क्षेत्र में उग्रवादी हमला करवाने की साजिश रची गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुत्र के निधन के बाद भी वे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं।

    “डराएंगे नहीं, झुकाएंगे नहीं”
    बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम उन लाखों लोगों की आवाज हैं जो भ्रष्टाचार, दमन और भय की राजनीति से पीड़ित हैं। हम डरने वाले नहीं हैं, और न ही झुकेंगे। सरकार चाहे जितना भी षड्यंत्र कर ले, सच को दबाया नहीं जा सकता।”

    बाबू लाल मरंडी के इस गमम्भीर आरोप ने झारखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देते हैं।

  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना नया अपडेट:  जल्द मिलेंगे बकाया भुगतान

    परवेज़ आलम.

    रांची : झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत जनवरी से अब तक भुगतान से वंचित 20,100 से अधिक लाभुकों के लिए राहत की खबर है। महीनों से अटके उनके बकाया भुगतान का रास्ता अब साफ हो गया है, और संभावना है कि अगले एक-दो दिनों में यह राशि उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी।

    77 हजार लाभुकों की सूची थी होल्ड में.

    गौरतलब है कि मार्च माह में राज्य सरकार ने योजना के अंतर्गत दो लाख से अधिक लाभुकों को 7500-7500 रुपये की राशि एकमुश्त दी थी, जो तीन महीनों (जनवरी से मार्च) का भुगतान था। लेकिन तकनीकी कारणों से करीब 77 हजार लाभुकों का भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

    राज्य की सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से लगातार सत्यापन प्रक्रिया चलती रही। अब उस सूची से 20,100 लाभुकों को वैध पाया गया, यानी उनका सत्यापन सफल रहा और उन्हें भुगतान देने की मंजूरी मिल गई है।

    तकनीकी गड़बड़ियों से अटका था भुगतान.

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन लाभुकों का भुगतान रोका गया था, उनमें अधिकतर मामलों में आधार संख्या बैंक खाते से लिंक नहीं थी। कई जगह एक ही बैंक खाता कई लाभुकों के नाम से जुड़ा मिला, जो DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) नियमों के विरुद्ध है। कुछ के आधार या खाता संख्या में त्रुटियां थीं। अब इन त्रुटियों को सुधार लिया गया है।

    अब मिल सकता है एकमुश्त चार महीने का भुगतान.

    जिन लाभुकों को दिसंबर में योजना की पहली किस्त (₹2500) मिली थी लेकिन जनवरी से अब तक कोई राशि नहीं मिली, उन्हें इस बार ₹10,000 तक मिलने की संभावना है। यह राशि चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) की एकमुश्त भुगतान के रूप में मिल सकती है।

    अप्रैल और मई की राशि भी बकाया, आदेश का इंतजार.

    सामाजिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि अप्रैल माह की सम्मान राशि के भुगतान की भी पूरी तैयारी कर ली गई है, लेकिन राज्य मुख्यालय से औपचारिक आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वजह से लाभुकों के खाते में अब तक अप्रैल-मई की राशि नहीं भेजी जा सकी है।

    हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना में धन की कोई कमी नहीं है। सरकार की ओर से इस मद में 550 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को आवंटित किए जा चुके हैं।

    यदि दो दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो जून की राशि भी बकाया में जुड़ जाएगी। ऐसे में सरकार को एक साथ तीन महीनों का भुगतान फिर से करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक दबाव और बढ़ सकता है।
    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत पात्र लाभुकों को प्रति माह ₹2500 की राशि दी जाती है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

     

  • झारखंड: एनआईए ने तीन नक्सलियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    वसूली और जबरन भर्ती की साजिश में थे शामिल.

    By The News Post4u

    रांची :झारखंड में नक्सली गतिविधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वसूली, धमकी और नक्सली संगठन में जबरन भर्ती कराने जैसे गंभीर आरोपों में तीन माओवादियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र (Supplementary Chargesheet) दाखिल किया है। यह चार्जशीट रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पेश की गई।

    चार्जशीट के अनुसार, आरोपितों में कृष्णा हांसदा उर्फ सौरव दा उर्फ अविनाश दा, अभिजीत कोरा उर्फ मतला कोरा उर्फ सुनील कोरा, और रामदयाल महतो उर्फ नीलेश दा उर्फ बच्चन दा शामिल हैं। ये सभी वर्ष 2023 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से रची गई आतंकवादी साजिश में शामिल थे।

    आरोपितों की भूमिका:

    • कृष्णा हांसदा — भाकपा (माओवादी) की क्षेत्रीय समिति का सदस्य था।
    • अभिजीत कोरा — संगठन के सशस्त्र कैडर में शामिल था और बिहार का निवासी है।
    • रामदयाल महतो — विशेष क्षेत्रीय समिति का सदस्य था और झारखंड का निवासी है।

    एनआईए की जांच में सामने आया कि तीनों अभियुक्त गिरिडीह जिले के पारसनाथ इलाके में संगठन की ओर से चल रही अवैध वसूली, धमकी और युवाओं को जबरन माओवादी संगठन में भर्ती करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। यह इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है।

    गिरफ्तारी और जब्ती:

    जनवरी 2023 में गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत लुसियो जंगल से कृष्णा हांसदा की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने उसके पास से जबरन वसूली से संबंधित नकदी, 7.65 मिमी की एक पिस्तौल और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए थे। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत स्थानीय पुलिस ने हांसदा, कोरा, महतो और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    एनआईए की जांच:

    इस मामले को जून 2023 में एनआईए ने अपने हाथ में लेते हुए पुनः पंजीकृत किया और विस्तृत जांच शुरू की। अब तक की जांच में तीनों अभियुक्तों की भूमिकाओं को पुख्ता मानते हुए यह पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

    एनआईए के अनुसार, यह केस सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि एक संगठित और सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य में भय और अस्थिरता फैलाना था।

  • राज्य मे जल्द निकाय चुनाव नहीं हुये तो झारखंड को 1500 करोड़ का हो सकता है नुकसान?

    वित्त आयोग की चेतावनी, चुनाव न कराने पर अटक सकती है केंद्र से झारखंड को मिलने वाली सहायता राशि !

    विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज वित्त आयोग के दायरे में नहीं ।

    परवेज़ आलम.

    रांची:  झारखंड सरकार के लिए एक बड़ा अलर्ट आया है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक नगर निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराती है, तो केंद्र से मिलने वाली बकाया वित्तीय सहायता की राशि लैप्स हो सकती है। यह रकम कोई मामूली राशि नहीं, बल्कि लगभग 1500 करोड़ रुपये है।

    रांची के होटल रेडिसन ब्लू में मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुये  डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि चुनावों की गैर-हाजिरी में केंद्र से राशि जारी नहीं हो सकती, क्योंकि इसका वितरण संविधान और आयोग की गाइडलाइन से बंधा है। यदि तय समय-सीमा के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव करवा दिए जाते हैं, तो झारखंड को पिछला बकाया भी मिल सकता है।

    विशेष राज्य का दर्जा नहीं देगा आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर.  

    डॉ. पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देना वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने यह बात ऐसे समय पर कही, जब झारखंड सरकार की ओर से यह मांग की जा रही है कि राज्य को उसकी अनूठी परिस्थितियों और समस्याओं को देखते हुए अतिरिक्त सहायता दी जाए।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान की जो राशि मांगी जाती है, वह केंद्रीय बजट के जरिए सशर्त मिलती है, और इसके भुगतान में होने वाली देरी पर वित्त आयोग का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति पर चिंता, पर सराहना भी.

    डॉ. पनगढ़िया ने झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना तो की, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि राज्य अभी भी कई सामाजिक-आर्थिक मानकों पर पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे सबसे निचले पायदान पर है, जहां उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर हैं।

    जीएसटी लागू होने से राजस्व में हुए नुकसान को झारखंड ने आयोग के समक्ष एक नई मांग के रूप में रखा है। राज्य सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय फॉर्मूले में बदलाव की अपील की है, जिसे आयोग ने केवल ‘प्रस्ताव‘ के रूप में नोट किया है। कोई भी निर्णय आयोग के निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर ही लिया जाएगा।

    झारखंड ने रखी 3.03 लाख करोड़ की मांग, राज्य का पक्ष मजबूत.

    राज्य सरकार ने वित्त आयोग के सामने 2026 से 2031 तक के लिए 3,03,527.44 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यह मांग राज्य के 23 विभागों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को 41% से बढ़ाकर 55% करने की भी अपील की गई है।

    राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद होने से झारखंड को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2025-30 के बीच राजस्व में लगभग 61,677 करोड़ रुपये की हानि का अनुमान है।

    वित्त मंत्री ने पूर्ववर्ती 15वें वित्त आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि तब झारखंड ने 1.5 लाख करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सिर्फ 12,398 करोड़ रुपये ही मिले थे, जिससे विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ा।

    प्राकृतिक संसाधनों वाला राज्य, लेकिन सड़कें नहीं.

    राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के आधार पर होने वाले राजस्व वितरण फार्मूले में संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि खुले वनों को भी सघन वनों की तरह गणना में लाया जाए। साथ ही झारखंड में 14.19 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता विकसित करने के लिए भी अतिरिक्त सहायता मांगी गई है।

    राज्य के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। राष्ट्रीय औसत जहां 500 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी है, वहीं झारखंड में यह मात्र 186 किमी है। खनिज संपदा से भरपूर राज्य होने के बावजूद खनिज ढुलाई के लिए पर्याप्त सड़क नेटवर्क नहीं है।

    बकाया राशि नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित.

    राज्य सरकार ने केंद्र से कुछ प्रमुख मदों में बकाया राशि की ओर भी ध्यान दिलाया:

    • कोयला कंपनियों से: ₹1.36 लाख करोड़
    • जल जीवन मिशन में: ₹5,235 करोड़
    • मनरेगा में: ₹1,300 करोड़

    राज्य सरकार का कहना है कि इन बकाया राशि के अभाव में कई विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं।

    ‘भेदभाव नहीं हो‘, स्थानीय निकायों के लिए राशि जारी हो: नगर विकास मंत्री.

    नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने आयोग से आग्रह किया कि स्थानीय निकायों की राशि को रोका न जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 20-25% राशि रोककर शेष राशि जारी की जा सकती है, ताकि स्थानीय विकास कार्य बाधित न हों।

    उन्होंने झारखंड की वास्तविक चुनौतियों — जैसे कि प्रदूषण, उग्रवाद, बेरोजगारी और विस्थापन — की ओर भी आयोग का ध्यान खींचा।

    31 अक्टूबर तक सौंप दी जाएगी अंतिम रिपोर्ट.

    वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी। इस बीच आयोग ने झारखंड के पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSUs) की वर्षों से लंबित ऑडिट रिपोर्टों पर भी चिंता जताई है। डॉ. पनगढ़िया ने इसे वित्तीय पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया और राज्य सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी।

    इस दौरे के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत ज्ञापन के जरिए आयोग के समक्ष झारखंड की जरूरतें और अपेक्षाएं रखीं।

    वित्त आयोग से अनुदान की मांग.

    बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से तीन लाख तीन हजार करोड़ की मांग से संबंधित प्रतिवेदन सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा एवं आधारभूत संरचना जो राज्य सरकार की प्राथमिकता में है उसको लेकर वित्त आयोग से अनुदान की मांग की गई है.

    सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार की यह संवैधानिक संस्था केंद्र सरकार के समक्ष सकारात्मक सोच के साथ हमारी मांग को पहुंचाने में मदद करेगा. उत्पादक राज्य होने के कारण झारखंड को होने वाले घाटे को भी वित्त आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा गया है और जो मांगे रखी गई है उसे आप विशेष पैकेज माने या अनुदान की राशि राज्य सरकार ने बड़े ही तर्कपूर्ण ढंग के साथ इसे रखा है. वित्त आयोग ने भी हमें भरोसा दिया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार होगा.

  • हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ?

    महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से संतुष्ट नहीं है JMM.

    बिहार चुनाव: टकराव की दिशा में बढ़ रही है सियासत।

    परवेज़ आलम.

    हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ? क्या कैबिनेट से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा ? क्या जेएमएम बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन से अलग हो जाएगा ? दरअसल झारखंड की सियासत में इन दिनों यह सवाल लगातार उछाले जा  रहें हैं । खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि JMM की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से वह संतुष्ट नहीं है, और स्थिति नहीं संभली तो राजद कोटे से मंत्री संजय यादव की झारखंड कैबिनेट से छुट्टी हो जाएगी ।

    दरअसल, हाल ही में JMM ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह साफ कर दिया है कि वह बिहार में राजद के रवैये से बेहद नाराज है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में “सम्मानजनक भागीदारी” नहीं दी गई, तो वह 12 से 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अकेले चुनाव लड़ेगी।

    JMM महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि महागठबंधन की किसी बैठक में पार्टी को शामिल नहीं किया गया है, यहां तक कि गठित की गई 21 सदस्यीय समन्वय समिति में भी JMM को कोई स्थान नहीं मिला। इससे पार्टी खुद को “उपेक्षित और तिरस्कृत” महसूस कर रही है।

    पार्टी ने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनावों की याद दिलाई, जब सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद JMM ने राजद को मंत्री पद दिया था। लेकिन अब बिहार में JMM की अनदेखी की जा रही है, जो पार्टी को मंजूर नहीं है।

    बॉर्डर बेल्ट पर JMM की नजर

    JMM ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि वह बिहार-झारखंड सीमावर्ती इलाकों — जैसे चकाई, झाझा, तारापुर, कटोरिया, बांका, मनिहारी, रूपौली, बनमनखी, जमालपुर और धमदाहा — में चुनाव लड़ना चाहती है। इन क्षेत्रों में झारखंडी संस्कृति, भाषा और आदिवासी पहचान की मजबूत मौजूदगी है, जिसका राजनीतिक लाभ JMM उठाना चाहती है।

    पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, JMM का असली मकसद 4-5 सीटों की सम्मानजनक साझेदारी है, लेकिन ज्यादा सीटों की मांग कर वो राजनीतिक दबाव बना रही है। अगर बातचीत नहीं बनी, तो पार्टी सीमावर्ती सीटों पर राजद को सीधी चुनौती दे सकती है, और इसके झारखंड सरकार में भी असर दिख सकता है — खासकर संजय यादव की कैबिनेट में मौजूदगी पर।

    JMM का राष्ट्रीय विस्तार का एजेंडा

    झामुमो सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहना चाहता। हाल ही में संपन्न पार्टी के केंद्रीय अधिवेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि JMM अब राष्ट्रीय पहचान बनाना चाहता है। इसके तहत पार्टी बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और छत्तीसगढ़ में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

    गौरतलब है कि अतीत में JMM का ओडिशा में छह विधायक, बिहार में एक विधायक और एक सांसद भी रह चुका है। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि सीमावर्ती इलाकों में उसकी पैठ उसे क्षेत्रीय से राष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकती है।

    राजद और JMM की पुरानी साझेदारी

    JMM ने यह भी याद दिलाया कि 2024 में तेजस्वी यादव और राजद सांसद मनोज झा ने रांची आकर कई दिनों

     तक रणनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया था। तब महागठबंधन के तहत राजद को छह सीटें मिली थीं और मंत्री पद भी। JMM को उम्मीद है कि बिहार में भी उसे उसी स्तर की हिस्सेदारी दी जाएगी।

    क्या बदलेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण?

    JMM की सक्रियता और खुले तेवरों ने बिहार की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां JMM की प्रभावशाली पकड़ है, वहां उसका अकेले उतरना राजद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में सीटों के तालमेल को लेकर JMM और राजद के बीच कोई सहमति बनती है या फिर टकराव की दिशा में सियासत आगे बढ़ती है।

     

  • झारखंड बोर्ड का मैट्रिक रिजल्ट घोषित, 91.71% छात्र सफल, बेटियों ने मारी बाज़ी

    झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने 27 मई 2025 को राज्य भर के छात्रों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। मंगलवार को कक्षा 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस वर्ष कुल 91.71% छात्र पास हुए हैं, जो कि 2024 की तुलना में 1.31% अधिक है। इससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में हो रहे सुधार का संकेत मिलता है

    📈 परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:

    • कुल पंजीकृत छात्र: 4,33,944
    • परीक्षा में सम्मिलित छात्र: 4,31,488
    • उत्तीर्ण छात्र: 3,95,755jcc
    • लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 92.38%
    • लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 90.96%

    इस बार भी लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा है, जो राज्य में बढ़ती लैंगिक समानता की ओर सकारात्मक संकेत है।

    🏆 टॉपर्स की सूची (JAC 10th Topper List 2025):

    रैंक छात्र का नाम स्कूल अंक प्रतिशत
    1 गीतांजलि इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 493 98.60%
    2 ऋतु कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 अमृता गुप्ता इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 पूजा कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 491 98.20%
    2 अमर कुमार प्रॉप वी हाई स्कूल, तिलैया रंगाटांड़ 491 98.20%
    3 शिवानी कुमारी इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग 489 97.80%
    3 विकास प्रामाणिक प्रॉप हाई स्कूल, बाघमारा बालीपुर 489 97.80%

    विशेष बात: टॉप-10 में से 15 स्थानों पर लड़कियाँ हैं, जिनमें 12 छात्राएं सिर्फ इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग से हैं। यह स्कूल राज्य में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है.

    🏅 डिवीजन वाइज परिणाम:

    • प्रथम श्रेणी: 2,21,040 छात्र
    • द्वितीय श्रेणी: 1,57,194 छात्र
    • तृतीय श्रेणी: 17,521 छात्र

    🗺️ जिलावार प्रदर्शन:

    जिला पास प्रतिशत
    कोडरमा 98.1% (राज्य में सर्वोच्च)
    पाकुड़ 96.83%
    जामताड़ा 96.33%
    लातेहार 96.23%
    साहिबगंज 96.22%
    रांची 87.32%
    पश्चिमी सिंहभूम 80.41% (राज्य में न्यूनतम)

    📝 आगे की प्रक्रिया:

    • छात्र अपनी मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट अपने-अपने स्कूलों से प्राप्त कर सकते हैं।
    • जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
    • जिन छात्रों को पासिंग मार्क्स नहीं मिल पाए हैं, वे कंपार्टमेंट परीक्षा में भाग ले सकते हैं।

    झारखंड बोर्ड 10वीं का यह रिजल्ट राज्य के लिए उत्साहजनक है। न केवल पास प्रतिशत में सुधार हुआ है, बल्कि लड़कियों का बेहतरीन प्रदर्शन यह दिखाता है कि बेटियाँ शिक्षा में नए आयाम गढ़ रही हैं। सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर अगर यही प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में झारखंड शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाएगा।

  • झारखंड में सरना धर्म कोड को लेकर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस-झामुमो का केंद्र सरकार पर दबाव

    परवेज़ आलम.

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों सरना धर्म कोड एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। राज्य की सत्ता में साझेदार झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस, दोनों दल इस मुद्दे को लेकर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उनका उद्देश्य आदिवासी समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संविधानिक मान्यता दिलवाना है.

    कांग्रेस का राजभवन के समक्ष प्रदर्शन.

    सोमवार को रांची में कांग्रेस ने राजभवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पार्टी के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी श्रीबेला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश समेत कई वरिष्ठ नेता, विधायक और मंत्री शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार से जनगणना में अलग ‘सरना धर्म कोड‘ की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान के. राजू ने कहा कि,

    “आदिवासियों का यह मौलिक अधिकार है कि उन्हें उनके धर्म और पहचान के आधार पर एक अलग धर्म कोड मिले, ठीक वैसे ही जैसे अन्य राज्यों में कुछ आदिवासी समूहों को मिला है।

    झामुमो का 27 मई को राज्यव्यापी प्रदर्शन.

    झामुमो भी इस मुद्दे को लेकर पीछे नहीं है। पार्टी ने 27 मई को राज्यभर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इस अभियान का प्रमुख नारा है:
    “सरना कोड नहीं तो जनगणना नहीं”।

    यह आंदोलन आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी विधानसभा चुनावों में झामुमो और कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा है.

    आदिवासी वोट बैंक पर सीधा फोकस.

    झारखंड की लगभग 26% आबादी आदिवासी है, और राज्य की 28 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2019 और 2024 में इन सीटों पर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस पृष्ठभूमि में सरना धर्म कोड पर मुखर रुख इस वोट बैंक को और मज़बूत करने की रणनीति मानी जा रही है.

    भाजपा का अस्पष्ट रवैया और राजनीतिक नुकसान.

    वहीं, भाजपा इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना पाई है। उसने सरना और ईसाई आदिवासियों के बीच एक अंतर पैदा करने की कोशिश की, यह कहते हुए कि ईसाई आदिवासी आरक्षण का अनुचित लाभ ले रहे हैं। लेकिन यह रणनीति 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नाकाम रही।

    • विधानसभा चुनावों में भाजपा सिर्फ एक आदिवासी आरक्षित सीट जीत सकी।
    • लोकसभा चुनावों में वह एक भी आदिवासी सुरक्षित सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई

    गठबंधन की जमीनी रणनीति.

    झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने स्थानीय और सांस्कृतिक मुद्दों को प्राथमिकता दी है — जैसे कि:

    • सरना धर्म कोड
    • 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति
    • मंइयां सम्मान योजना

    इन मुद्दों ने आदिवासी और स्थानीय गैर-आदिवासी समुदायों के बीच गठबंधन की स्थिति को मजबूत किया है। इसके उलट, भाजपा की “रोटी, बेटी और माटी” जैसी भावनात्मक रणनीतियां और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे जनता से कनेक्ट नहीं कर पाए.

    केंद्र की भूमिका होगी निर्णायक.

    सरना धर्म कोड के मुद्दे पर राज्य सरकार की आक्रामकता एक रणनीतिक कदम है, जिससे केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

    झारखंड में सरना धर्म कोड अब केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विषय नहीं रहा, यह सीधे तौर पर राजनीतिक,रणनीति और जनाधार की लड़ाई का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखा जाना बाकी है कि केंद्र की प्रतिक्रिया, इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाती है या संवैधानिक समाधान की ओर ले जाती है।

  • झारखंड : मौसम ने ली करवट,गर्मी से राहत, बारिश और तेज हवाओं से मौसम हुआ सुहाना

    By The News Post4u

    RANCHI: झारखंड में मई के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक रुख बदल लिया है। लंबे समय से झुलसाती गर्मी से परेशान लोगों को अब राहत मिल रही है। राज्य के कई हिस्सों में बादल गरज रहे हैं और ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह सुहावना मौसम 31 मई तक बना रहेगा।

    कई जिलों में तापमान 30 डिग्री से नीचे.

    झारखंड के चार जिलों—रांची, बोकारो, धनबाद और लोहरदगा—का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। खासकर लातेहार में तो तापमान गिरकर 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अन्य जिलों में भी तापमान 40 डिग्री के नीचे दर्ज किया गया। यह स्थिति मई महीने में कई वर्षों बाद देखी गई है।

    येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी.

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सोमवार से राज्य में तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। इसके साथ ही बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कोल्हान क्षेत्र में तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट भी घोषित किया गया है।

    प्री-मॉनसून की बारिश से बदला तापमान.

    राज्य में हो रही यह बारिश दरअसल प्री-मॉनसून की गतिविधियों का नतीजा है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। इसी कारण रांची समेत कई इलाकों का तापमान सामान्य से 7-8 डिग्री नीचे पहुंच गया है।

    रांची में बीते 24 घंटे के भीतर 11 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सबसे ज्यादा बारिश पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में 64.4 मिमी हुई। वहीं, डालटनगंज मे सबसे अधिक तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री लातेहार में रिकॉर्ड किया गया।

    31 मई तक राहत की उम्मीद.

    मौसम विभाग के अनुसार, 28 से 31 मई तक राज्यभर में मौसम इसी तरह ठंडा और सुहावना बना रहेगा। इस दौरान बादल, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में लोग फिलहाल गर्मी से राहत की सांस ले सकते हैं।

  • झारखंड में कोरोना की वापसी: लाल विजय शाहदेव संक्रमित, स्वास्थ्य मंत्री की जनता से अपील.

    By The News Post4u

    रांची :  झारखंड में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। राज्य में कोविड के नए मामलों के बीच झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य और चर्चित फिल्ममेकर लाल विजय शाहदेव के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आई है। झारखंड से लेकर मुंबई तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शाहदेव ने खुद इस जानकारी को साझा करते हुए सतर्कता की अपील की है।

    फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत, रांची पहुंचने पर मिले पॉजिटिव.

    लाल विजय शाहदेव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि वह हाल ही में मुंबई से रांची लौट रहे थे। इसी दौरान 22 मई को फ्लाइट में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। बाद में जांच कराए जाने पर उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने लिखा, “भारत में अब तक कुल 257 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अब मैं भी उनमें शामिल हूं। मैं फिलहाल रांची के एक अस्पताल में भर्ती हूं और पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।”

    फिल्मी काम रुका, अपील जारी.

    शाहदेव ने यह भी बताया कि उन्हें झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सदस्य होने के नाते कुछ फिल्मों का प्रिव्यू करना था, लेकिन बीमारी के चलते वह यह कार्य नहीं कर सके। उन्होंने अपील की है कि जो भी लोग हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए हैं और सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं, वे तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं।

    स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, मंत्री ने कहा – “घबराने की जरूरत नहीं”

    इधर देशभर में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर दो नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के सामने आने के बाद। इस बीच बेंगलुरु में एक वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मौत की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।

    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्यभर के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड में डाल दिया है। उन्होंने कहा, “यह सामान्य स्थिति है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हम पूरी तरह सतर्क हैं और सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।”

    मंत्री अंसारी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोगों को कोविड से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जा सकें और अफवाहों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना अब भी एक जरूरी एहतियात है, जो अन्य संक्रमणों से भी बचाता है.

    नई गाइडलाइंस का इंतजार, डॉक्टर की अपील – “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”

    स्वास्थ्य मंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा, “एक डॉक्टर के रूप में मेरी आपसे यही गुज़ारिश है – लापरवाही न करें। कोविड को हल्के में न लें। हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।”

    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी होने वाली नई गाइडलाइंस का इंतजार कर रही है। जैसे ही दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, राज्य सरकार तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    बेंगलुरु में जिस वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मृत्यु हुई, उनकी उम्र लगभग 85 वर्ष थी और उन्हें पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मंत्री अंसारी ने इस मामले को लेकर लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्कता बनाए रखें

    सरकार तैयार, जनता से अपील – “हम साथ हैं, हम तैयार हैं”

    राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मंत्री ने आश्वासन दिया, “हम साथ हैं, हम तैयार हैं। कोविड को पहले की तरह इस बार भी हराएंगे।”