Category: RANCHI

  • घाटशिला उपचुनाव की तैयारी तेज, 2 सितंबर को आएगा मतदाता सूची का ड्राफ्ट

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड के घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर तैयारी तेज हो गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मीडिया को बताया कि उपचुनाव के लिए मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चल रहा है। यह काम 1 जुलाई 2025 तक जिनकी उम्र 18 साल पूरी हो चुकी है, उनके आधार पर किया जाएगा।

    हर वोटर का नाम सही-सही जुड़ना जरूरी.

    रवि कुमार ने कहा कि कोशिश यही है कि कोई भी योग्य नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रह जाए और कोई भी गलत नाम इसमें शामिल न हो। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे हर मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करें। ये एजेंट घर-घर जाकर जांच करेंगे ताकि सही नाम सूची में जुड़ सके।

    2 सितंबर से शुरू होगा दावा और आपत्ति का मौका.

    • 2 सितंबर 2025 (मंगलवार) को मतदाता सूची का ड्राफ्ट (प्रारूप) प्रकाशित किया जाएगा।
    • 2 सितंबर से 17 सितंबर तक लोग अपना नाम जोड़ने, हटाने या सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
    • नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6, नाम हटाने के लिए फॉर्म-7, और सुधार के लिए फॉर्म-8 भरना होगा।
    • सब काम पूरा होने के बाद 29 सितंबर 2025 (सोमवार) को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।

    मतदान केंद्रों का युक्तिकरण.

    रवि कुमार ने बताया कि घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में जिन मतदान केंद्रों पर 1200 से ज्यादा वोटर हैं, वहां व्यवस्था सुधारने के लिए नए प्रबंध किए गए हैं ताकि चुनाव के दिन किसी को दिक्कत न हो।

    बैठक में कई अधिकारी और नेता शामिल.

    निर्वाचन सदन में हुई बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के साथ-साथ संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और अन्य चुनाव अधिकारी भी मौजूद थे।

     

  • झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर की चर्चा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पटना: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। यहाँ उन्होंने राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके हालचाल पूछे।

    मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन और लालू प्रसाद यादव के बीच देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, सामाजिक न्याय की चुनौतियों और आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इस दौरान राबड़ी देवी समेत परिवार के अन्य सदस्य और राजद के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

    लालू यादव को बताया संघर्ष और न्याय की राजनीति का प्रतीक.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुलाकात के बाद कहा कि लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति में संघर्ष और न्याय की राजनीति के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने हमेशा गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। सोरेन ने कहा कि लालू यादव जैसे नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मजबूती होती है।
    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड और बिहार के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से गहरे हैं। दोनों राज्य मिलकर काम करेंगे, तो विकास की गति और भी तेज होगी।

    वोटर अधिकार यात्रा में बोले सोरेन – “यह चुनाव देश का संकल्प होगा”

    इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पटना में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन अवसर पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्य की दिशा तय नहीं करेगा, बल्कि यह देश की दशा और दिशा का भी निर्धारण करेगा।
    उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा धनबल और बाहुबल के सहारे सत्ता में आने की कोशिश करती है। केंद्रीय एजेंसियों – सीबीआई और ईडी – का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे भी झूठे मामलों में जेल भेजा गया, लेकिन जेल जाने के बावजूद हमने झारखंड की जनता का हौसला टूटने नहीं दिया। अगर हम जेल में नहीं होते, तो झारखंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाती।

    भाजपा पर वोट चोरीका आरोप.

    हेमंत सोरेन ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि आज भाजपा सत्ता में ‘वोट चोरी’ के सहारे बनी हुई है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से भाजपा इस गोरखधंधे का सहारा लेती रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज इस खेल का पर्दाफाश सबके सामने हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुकाबला तभी संभव है जब विपक्ष और जनता एकजुट होकर इसका सामना करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – “जब हम सब मिलकर खड़े होंगे, तो कोई ताकत हमें रोक नहीं पाएगी।”

    वोटर सूची पुनरीक्षण पर उठाए सवाल.

    बिहार की ऐतिहासिक धरती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विशेष और गहन पुनरीक्षण को एक साथ जोड़कर जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह गलत है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

     

  • झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का समेत 10 दोषी, सात-सात साल की सजा

    परवेज़ आलम. द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    रांची: झारखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहे बहुचर्चित जमीन घोटाले मामले में बड़ा फैसला आया है। रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता (एलआरडीसी) कार्तिक कुमार प्रभात, तत्कालीन सीआई राजकिशोर सिंह, फिरोज अख्तर, अनिल कुमार, राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा, मणिलाल महतो और परशुराम को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई है। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है और यदि वे यह राशि नहीं चुकाते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त एक-एक साल की कैद भुगतनी होगी।

    कोर्ट का निर्णय और बचाव पक्ष की दलील.

    सजा पर बहस के बाद विशेष जज श्याम नंदन तिवारी की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। फैसले के तुरंत बाद सभी को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया।
    एनोस एक्का के वकील अनिल कंठ ने कहा कि इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

    15 साल पुराना जमीन घोटाला.

    यह मामला करीब 15 साल पुराना है। आरोप है कि मंत्री रहते हुए एनोस एक्का ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर फर्जी पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन खरीदी। जांच में सामने आया कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच उनकी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर रांची और आसपास कई जमीनें खरीदी गईं—

    • हिनू में 22 कट्ठा
    • ओरमांझी में 12 एकड़
    • नेवरी में 4 एकड़
    • चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल

    तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से इन सौदों को अंजाम दिया गया।

    सीबीआई जांच और चार्जशीट.

    हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अगस्त 2010 में एफआईआर दर्ज की थी।

    • 2012 में चार्जशीट दाखिल हुई।
    • नवंबर 2019 में आरोप तय हुए।
      आख़िरकार 29 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। हालांकि, साक्ष्य के अभाव में गोवर्धन बैठा को बरी कर दिया गया।

    एनोस एक्का की राजनीतिक यात्रा और विवाद.

    एनोस एक्का झारखंड की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं।

    • उन्होंने 2005, 2009 और 2014 में सिमडेगा के कोलेबिरा से लगातार चुनाव जीते।
    • मधु कोड़ा सरकार के दौरान वे सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते थे।
    • लेकिन आय से अधिक संपत्ति और पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या जैसे मामलों ने उनकी राजनीति पर काला साया डाल दिया।
      2014 में पारा शिक्षक हत्याकांड में गिरफ्तार हुए एनोस एक्का को 2018 में उम्रकैद की सजा मिली थी। फिलहाल वे जमानत पर थे, लेकिन अब इस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल भेज दिए गए।

    क्यों महत्वपूर्ण है सीएनटी एक्ट?

    छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (1908) ब्रिटिश शासनकाल में आदिवासियों की जमीन को बचाने के लिए लागू किया गया था। इस कानून के तहत—

    • आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी को बेचना, गिरवी रखना या ट्रांसफर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
    • यहां तक कि एक आदिवासी भी अपने थाना क्षेत्र से बाहर किसी अन्य आदिवासी को जमीन नहीं बेच सकता।

    कोर्ट ने माना कि एनोस एक्का और उनके सहयोगियों ने इस कानून का खुलेआम उल्लंघन किया और निजी लाभ के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया।

     

  • सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

    नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

    विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

    स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

    फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

    21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

    धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

    हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

    आठ साल लंबी कानूनी जंग.

    इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

    • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
    • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
    • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
    • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
    • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
      आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

    फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

    जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

    • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
    • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
    • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

    • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
    • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
      इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।
  • कोयला खनन के बाद जमीन रयैत को वापस हो- हेमंत सोरेन

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में कोयला खनन से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे पर्यावरणीय संतुलन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, खनन क्षेत्रों का सतत विकास और राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व पर गहन चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि कोयला खनन कार्य पूरा हो जाने के बाद जिस भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उसे केंद्र सरकार राज्य सरकार को लौटाए, ताकि उसे पुनः मूल रैयतों को दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी और स्थानीय समुदाय लंबे समय से अपनी भूमि खोने के कारण संकट झेल रहे हैं, इसलिए उनकी जमीन उन्हें लौटाना ही न्यायोचित होगा।

    इसके अलावा उन्होंने खनन प्रभावित इलाकों में लोगों के पुनर्वास, पर्यावरणीय सुरक्षा, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खनन परियोजनाओं से प्राप्त लाभ में झारखंड के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन सिर्फ केंद्र के हित तक सीमित न रहकर राज्य के विकास में भी सहायक बने।

    केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री की बातों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य और केंद्र मिलकर समस्याओं का समाधान खोजेंगे और झारखंड के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के विकास और यहां के लोगों की भलाई के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें मुख्य सचिव अलका तिवारी, खान सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल सिन्हा, सीएमपीडीआई के सीएमडी मनोज कुमार, बीसीसीएल के सीएमडी समीरन दत्ता, सीसीएल के सीएमडी नीलेंदु कुमार सिंह और बीसीसीएल के डीटी एम.के. अग्रवाल शामिल थे। उनकी मौजूदगी से यह स्पष्ट था कि बैठक सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस निर्णय की दिशा में एक कदम है।

  • आज़रबैजान से प्रत्यर्पण के बाद कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह भारत लाया गया

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रांची एयरपोर्ट शनिवार को पुलिस के लिए ऐतिहासिक दिन का गवाह बना। कुख्यात गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को आज़रबैजान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया। झारखंड एटीएस (Anti-Terrorist Squad) के एसपी ऋषभ झा के नेतृत्व में एक विशेष टीम मयंक को लेकर रांची पहुंची। एयरपोर्ट से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बख़्तरबंद गाड़ी से सीधे रामगढ़ ले जाया गया।

    यह झारखंड पुलिस का पहला सफल प्रत्यर्पण है, और इस वजह से इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपराधों का लंबा इतिहास.

    पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मयंक सिंह पर हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे 45 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह कई सालों से फरार था और विदेश जाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था।

    सूत्रों का कहना है कि मयंक झारखंड, बंगाल और छत्तीसगढ़ में कोयला व परिवहन कारोबारियों से वसूली करता था। उसके इशारे पर हत्या और फायरिंग की घटनाएँ होती थीं।

    गैंग कनेक्शन.

    पुलिस के अनुसार, मयंक का सीधा संबंध लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू जैसे बड़े गैंगस्टरों से है। यही वजह थी कि उसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाता था।

    जांच में सामने आया कि सुनील मीणा पहले काम के सिलसिले में मलेशिया गया, जहां उसकी मुलाकात रोहित गोदारा, गोल्डी बरार और संपत नेहरा के ज़रिए लॉरेंस बिश्नोई से हुई। इसके बाद उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध की दुनिया में कदम रखा।

    लॉरेंस के कहने पर उसने राजस्थान और पंजाब में हत्या, रंगदारी और गोलीबारी जैसी वारदातें अंजाम दीं। वह तब चर्चा में आया जब उसने राजस्थान के तत्कालीन मंत्री व कांग्रेस विधायक गोविंद राम मेघवाल से रंगदारी मांगी थी। यही नहीं, उसने राजस्थान के एक पेट्रोल पंप मालिक से पांच करोड़ रुपये की वसूली की मांग की थी और पैसे न देने पर फायरिंग करवा दी थी।

    विदेश भागकर भी अपराध जारी.

    पासपोर्ट रद्द होने के बाद सुनील ने डंकी रूट के जरिए सिंगापुर, ईरान, मैक्सिको और फिर अमेरिका तक का सफर तय किया। वहीं से वह अमन साहू गिरोह के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में युवाओं को भर्ती करता रहा।

    इसी दौरान उसने मयंक सिंह के साथ मिलकर झारखंड व आसपास के राज्यों में कोयला और परिवहन कंपनियों से वसूली की योजना बनाई।

    प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया.

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल की मदद से पहले उसका लोकेशन ट्रैक किया गया। इसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सीबीआई की इंटरपोल शाखा के सहयोग से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। कई महीनों की मेहनत के बाद आखिरकार अक्टूबर 2024 में मयंक सिंह आज़रबैजान के दातू में गिरफ्तार हुआ और अब भारत लाया गया।

    रांची एयरपोर्ट पर पहुंचे एसपी ऋषभ झा ने कहा –
    “यह झारखंड पुलिस के इतिहास का पहला प्रत्यर्पण है। हमें उम्मीद है कि विदेश में छिपे बाकी अपराधियों को भी जल्द प्रत्यर्पण या निर्वासन के जरिए वापस लाया जाएगा। इस सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री और राज्य व केंद्र सरकार के सहयोग को जाता है।”

    पुलिस मयंक सिंह से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग से जुड़े रहस्यों की पड़ताल करेगी। उसे जल्द ही रामगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी हिरासत की मांग करेगी।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मयंक की गिरफ्तारी से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

     

  • जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 51 कैदियों को झारखंड सरकार रिहा करेगी

    राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची:  राज्य की विभिन्न जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 51 कैदियों को झारखंड सरकार ने रिहा करने  का फैसला किया है । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद (State Sentence Review Board) की 35वीं बैठक में निर्णय लिया गया।

    103 मामलों की समीक्षा, 51 को मिली राहत.

    बैठक में कुल 103 कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इनमें से 37 मामले नए थे, जबकि 66 कैदियों के मामले पहले भी पर्षद की बैठक में गए थे लेकिन अस्वीकृत हो गए थे।
    सभी कैदियों की व्यक्तिगत फाइलों का गहन अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि 51 कैदियों को रिहाई की मंजूरी दी जाए।

    कई पहलुओं पर हुई जांच-पड़ताल.

    समीक्षा के दौरान कैदियों के अपराध की प्रकृति, न्यायालय की टिप्पणियां, जिलों के एसपी व जेल अधीक्षक की रिपोर्ट, प्रोबेशन अधिकारियों की राय और कैदियों के जेल में आचरण को ध्यान में रखा गया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन कैदियों की रिहाई हो रही है, उन्हें हर हाल में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि वे समाज में बेहतर जीवन जी सकें।

    14 वर्ष से अधिक कैद काट चुके और बुजुर्ग कैदी होंगे रिहा.

    सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य ऐसे कैदियों को अवसर देना है जिन्होंने जेल में 14 वर्ष या उससे अधिक समय बिताया है, उम्रदराज हैं और जेल में उनका आचरण अच्छा रहा है।
    इसके अलावा कुछ कैदी गंभीर बीमारी या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे मामलों में कैदियों को उचित चिकित्सा प्रदान कर, डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

    2019 से अब तक 619 कैदी रिहा.

    बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2019 से अब तक राज्य की विभिन्न जेलों से 619 कैदियों को रिहा किया गया है। इनमें से 558 कैदियों का भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 61 का सत्यापन अभी शेष है।

    रिहा हुए कैदियों में से 470 को सरकार ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे—

    • वृद्धावस्था पेंशन
    • विधवा पेंशन
    • राशन कार्ड
    • आयुष्मान कार्ड
    • प्रधानमंत्री आवास योजना
    • मनरेगा ई-श्रम कार्ड
      से जोड़ा है।
      जिन कैदियों को अब तक इन योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें भी जल्द शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

    इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव सह विधि परामर्शी (न्याय) नीरज कुमार श्रीवास्तव, कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा और प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।

    सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.

    बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.

    जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।

    अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.

    बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

    सुरक्षा और धमकी का मुद्दा

    बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
    आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।

    बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.

    इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।

    एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।

     

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया

    शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की  गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।

    इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।

    • जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।

    • आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।

    • जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।

    • प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।

    सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष का बयान.

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।

    अनुपूरक बजट पेश.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।

    गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

    श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.

    सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • उपराष्ट्रपति चुनाव : झामुमो ने खोला पत्ता, इंडिया गठबंधन उम्मीदवार को देगा समर्थन

    जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी हैंइंडिया गठबंधन के उम्मीदवार.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में सक्रिय हलचल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) के उम्मीदवार और पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करेगी। यह घोषणा झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को प्रेस से बातचीत में की।

    झामुमो का रुख और तर्क.

    प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो की राजनीति हमेशा से संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित रही है। इसी सोच और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के साथ खड़ी होगी।

    उम्मीदवारों की तस्वीर.

    • इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) → पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
    • एनडीए (NDA) → बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को चुनावी मैदान में उतारा है।

    झामुमो के समर्थन का महत्व.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में झामुमो का समर्थन इंडिया गठबंधन के लिए बेहद अहम है।

    1. झारखंड की राजनीति में झामुमो की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है।
    2. वर्तमान में झामुमो राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का मुख्य घटक है।
    3. पार्टी का समर्थन न केवल संख्या बल बल्कि राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस प्रकार, झामुमो का यह कदम झारखंड के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इंडिया गठबंधन की एकजुटता और रणनीति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। वहीं यह चुनाव अब दो धुरंधर उम्मीदवारों — बी. सुदर्शन रेड्डी और सी. पी. राधाकृष्णन — के बीच सीधी टक्कर का रूप ले चुका है।