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  • गिरिडीह: धूमधाम से मनाया गया लोहड़ी और मकर संक्रांति

    गिरिडीह: झारखंड के नगर विकास मंत्री और सदर विधायक सुदीव्य कुमार सोनू की ओर से होटल उत्सव उपवन में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।  इस मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं के अलावा कई गणमान्य लोग शामिल हुये ।  मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने इस खास अवसर पर झामुमो के साथियों के साथ ही पूरे राज्य वासियों व देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

    गुरुद्वारा ग्राउंड में लोहड़ी का रंगारंग उत्सव। 

    इधर सोमवार देर शाम सिख समाज ने गुरुद्वारा ग्राउंड परिसर में लोहड़ी पर्व को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया। पारंपरिक भंगड़ा और गिद्दा की प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बना दिया। ढोल की थाप पर सिख समुदाय के लोगों ने जमकर नृत्य किया, वहीं पंजाबी गीतों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।

    गिरिडीह गुरुद्वारा के मुख्य प्रधान सेवक गुणवंत सिंह मोंगिया ने सबसे पहले पवित्र लोहड़ी प्रज्वलित की। इसके बाद सिख समुदाय के सदस्यों ने अग्नि की परिक्रमा करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

    मकर संक्रांति पर मिलन समारोह का आयोजन। 

    गिरिडीह में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में कई स्थानों पर मिलन समारोह आयोजित किए गए। भाजपा नेता और गिरिडीह बार एसोसिएशन के सचिव चुन्नुकांत ने अपने आवासीय कार्यालय में दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पारंपरिक मकर संक्रांति का आयोजन किया। इस मौके पर चुन्नुकांत ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह पर्व केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि इसका संबंध विज्ञान, कृषि और सामाजिक जीवन से भी है। यह दिन शुभ कार्यों की शुरुआत और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है।”

    इंजीनियर विनय सिंह के कार्यालय में भी पर्व की धूम।

    सेवानिवृत्त इंजीनियर विनय सिंह के बोड़ो कार्यालय परिसर में भी मकर संक्रांति के मौके पर भव्य मिलन समारोह आयोजित हुआ। यहां भी पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पर्व मनाया गया। विनय सिंह ने इस अवसर पर कहा, “मकर संक्रांति हमारे सामाजिक जीवन में मेल-जोल और परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

    इस कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुरेश साहू, जिला महामंत्री महेंद्र वर्मा, नवीन सिन्हा, रंजीत राय, प्रमोद सिंह, और कई अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।

    उत्सवों ने दिया सामाजिक एकता का संदेश।

    गिरिडीह में आयोजित इन दोनों प्रमुख पर्वों ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक जुड़ाव और समर्पण को मजबूत किया जा सकता है। लोहड़ी और मकर संक्रांति के माध्यम से गिरिडीह के लोगों ने मिलन, खुशहाली और समृद्धि का संदेश पूरे जिले में फैलाया।

  • लंगटा समाधि स्थल: आस्था और एकता का अभूतपूर्व संगम

    गिरिडीह: खरगडीहा स्थित लंगटा बाबा के समाधि स्थल पर इस बार भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पौष पूर्णिमा के मौके पर हर साल की तरह इस वर्ष भी समाधि पर्व मनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ ने भाईचारे और समरसता की मिसाल पेश की। अहले सुबह तीन बजे जमुआ थाना प्रभारी मणिकांत कुमार ने बाबा की समाधि पर पहली चादरपोशी कर आयोजन का शुभारंभ किया। इसके बाद आम श्रद्धालुओं ने चादरपोशी शुरू की, जो दिनभर जारी रही।

    लंगटा बाबा: पीड़ित मानवता के उद्धारक संत
    कहा जाता है कि 1870 में देवघर जाते समय नागा साधुओं का एक दल खरगडीहा के पुलिस थाना परिसर में रुका। सभी साधु अगले दिन रवाना हो गए, लेकिन एक साधु नग्न अवस्था में धूनी रमाए वहीं बैठे रहे। यही साधु बाद में लंगटा बाबा के रूप में विख्यात हुए। 1910 की पौष पूर्णिमा को बाबा ने महासमाधि ले ली। बाबा के जीवन में अनेक चमत्कार और लीलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने न केवल लोगों की समस्याएं दूर कीं, बल्कि अमीर-गरीब, जाति-धर्म से परे सभी को समान रूप से सम्मान दिया।

    भाईचारे की मिसाल
    लंगटा बाबा के समाधि पर्व पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की बराबर भागीदारी होती है। परंपरा के अनुसार, सुबह हिंदू धर्मावलंबियों ने चादरपोशी की और दोपहर बाद मुस्लिम समुदाय ने अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस आयोजन में झारखंड, बिहार सहित अन्य प्रदेशों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। बाबा के प्रति आस्था का आलम ऐसा है कि उनकी समाधि पर सिर झुकाने वालों में हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होते हैं।

    विशेष व्यवस्थाएं और चुनौतियां
    मेले में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे, लेकिन भारी भीड़ के कारण व्यवस्थाएं नाकाफी रहीं। समाधिस्थल तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात किया गया था, और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी समाधिस्थल पर श्रद्धा निवेदित की।

    समाज को जोड़ने का संदेश
    लंगटा बाबा का समाधि पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। उनकी शिक्षाएं और साधना आज भी लोगों को प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश देती हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, बाबा के दरबार में मन्नत मांगने से हर समस्या का समाधान होता है।

    लंगटा बाबा का समाधि स्थल हर वर्ष यह याद दिलाता है कि सच्ची आस्था और इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती। यही वजह है कि बाबा के प्रति आस्था अडिग है और उनका समाधि पर्व एकता और मानवता का जश्न बन चुका है।

     

  • गुरू गोबिंद सिंह जी के 358वें प्रकाश पर्व पर उमड़ी आस्था की बयार

    GIRIDIH :  358वें प्रकाश पर्व के अवसर पर सिख धर्म के दसवें गुरू, खालसा पंथ के संस्थापक, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारों में सुबह से ही शबद-कीर्तन की गूंज सुनाई दी और लंगर की सेवा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

    गिरिडीह के गुरुद्वारा में इस मौके पर विशेष दीवान सजाया गया। आकर्षक फूलों और रोशनी से सजे गुरुद्वारे में देहरादून के प्रसिद्ध रागी जत्था भाई हरप्रीत सिंह और उनकी टीम ने अपनी भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कीर्तन के माध्यम से संदेश दिया कि जीवन में सुख-शांति पाने के लिए हमें जाति-पाति का भेद मिटाकर एकता की ओर अग्रसर होना चाहिए।

    गुरुद्वारा के प्रधान मुख्य सेवक डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया और सचिव सम्मी सलूजा ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती को लेकर 4 जनवरी को अखंड पाठ आरंभ किया गया था, जिसका समापन प्रकाश पर्व पर हुआ। 31 दिसंबर से 5 जनवरी तक प्रभात फेरियां निकाली गईं।

    डॉ. मोंगिया ने गुरु गोबिंद सिंह जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे केवल सिख धर्म के गुरु ही नहीं थे, बल्कि एक महान दार्शनिक, प्रख्यात कवि, निडर योद्धा और संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में सिखों के नेतृत्व का भार संभाला और समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर खालसा पंथ की स्थापना की।

    इस आयोजन की विशेषता रही कि लंगर की पूरी व्यवस्था झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू द्वारा की गई थी। उनकी धर्मपत्नी श्वेता शर्मा ने अपनी पुत्री के साथ माथा टेका और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। लंगर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

    मौके पर डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, राजेंद्र सिंह, गुरविंदर सिंह समेत समाज के कई गणमान्य सदस्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस आयोजन ने सभी को एकता, प्रेम और सेवा की भावना से जोड़ते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी के उपदेशों की याद दिलाई।

  • गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व कल , प्रभात फेरी जारी

    गिरिडीह : सिखों के दसवें गुरु और खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व को लेकर गिरिडीह में भक्तिमय उत्सव का दौर जारी है। रविवार को प्रभात फेरी के पांचवें दिन गिरिडीह के पंजाबी मोहल्ला गुरुद्वारा से प्रभात फेरी का आयोजन हुआ। यह फेरी शहर के विभिन्न मार्गों – मकतपुर, कालीबाड़ी चौक, मुस्लिम बाजार, बड़ा चौक होते हुए मुख्य गुरुद्वारा स्टेशन रोड तक पहुंची।

    इस दौरान सिख समुदाय के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। भक्तगण भजन-कीर्तन करते हुए पूरे माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर रहे थे। गिरती हुई ठंड और ठिठुरन भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी।

    मुख्य गुरुद्वारा पहुंचने पर प्रभात फेरी का स्वागत पुष्प वर्षा और निशान साहब पर माल्यार्पण के साथ किया गया। इसके बाद स्थानीय रागी जत्थों द्वारा शब्द-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए जलपान की भी विशेष व्यवस्था की गई थी।

    गुरुद्वारा प्रबंधन का विशेष योगदान।
    इस आयोजन पर श्री गुरु सिंह सभा गिरिडीह के प्रधान डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया ने बताया कि प्रकाश पर्व को लेकर गुरुद्वारे में अखंड पाठ लगातार जारी है। पांच दिनों तक प्रभात फेरी के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। सोमवार को मुख्य गुरुद्वारे में सुबह से ही शब्द-कीर्तन और लंगर का आयोजन होगा। उन्होंने गिरिडीह वासियों से गुरुद्वारे में आकर गुरुवाणी का श्रवण करने की अपील की।

    इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया, सचिव सरदार नरेंद्र सिंह सम्मी, डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, सरदार चरणजीत सिंह सलूजा, सरदार देवेंद्र सिंह, सरदार कुंवरजीत सिंह, सरदार भूपेंद्र सिंह, सरदार गुरु भेज सिंह कालरा, सतविंदर सिंह सलूजा, सरदार परमजीत सिंह और सरदार अजिंदर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।

     

  • नया साल, नई शुरुआत: गुरुद्वारे में सिख समाज का भजन-कीर्तन और लंगर आयोजन!

    गिरिडीह:  सिख समाज ने नए साल 2025 का स्वागत भक्ति और समर्पण के साथ किया। पंजाबी मुहल्ला स्थित गुरुद्वारे में रात 11 बजे से लेकर 12:30 बजे तक शब्द कीर्तन, भजन और गुरु सिमरन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर सिख समुदाय के लोग एकजुट होकर प्रभु और गुरु को याद करते हुए सबके सुख और समृद्धि की कामना करते नजर आए।

    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि साल के अंतिम क्षणों में, जहां एक तरफ दुनिया पार्टियों और शोर-शराबे में व्यस्त थी, वहीं सिख समाज भक्ति और साधना में डूबा हुआ था। जैसे ही घड़ी की सुई ने रात 12 बजकर एक नया दिन दिखाया, पूरे गुरुद्वारे में “वाहेगुरु” के जयकारे गूंज उठे।

    इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में सिख समाज के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भी भाग लिया, जिनमें डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया, सरदार नरेंद्र सिंह शमी, डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, भूपेंद्र सिंह दुआ, तेजेंदर सिंह  डिम्पल  और अन्य गणमान्य शामिल रहे।

    गौरतलब है कि हर साल गिरिडीह का सिख समाज इस तरह के जागरण का आयोजन करता रहा है। यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में शांति और एकता का संदेश भी फैलाती है।

    इस बार का कार्यक्रम भी एक प्रेरणादायक संदेश के साथ खत्म हुआ— गुरु का नाम लो और नई शुरुआत करो!”

  • सम्मेद शिखर: भव्य स्मृति महोत्सव की धूम

    पारसनाथ [गिरिडीह ] : धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना मधुबन का सम्मेद शिखर ।  आचार्य विमल सागर महाराज के समाधि स्थल पर इन दिनों भव्य स्मृति महोत्सव की धूम है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालु बाबा की भक्ति में मग्न हैं। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं, और श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। बता दे कि मधुबन का सम्मेद शिखर जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है ।

    समाधि स्थल पर श्रद्धा का सैलाब। 
    यहां 29 दिसंबर 1994 को साधना करते हुए आचार्य विमल सागर महाराज ने समाधि को प्राप्त किया था। उनकी स्मृति में भक्तों ने भव्य और आकर्षक समाधि स्थल बनाया है, जहां बाबा की प्रतिमा विराजमान है। इस समाधि स्थल को फूलों, पत्तियों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

    तीन दिन का विशेष धार्मिक आयोजन। 
    स्मृति महोत्सव शुक्रवार से शुरू हुआ। इस दौरान साधु-संतों के सान्निध्य में बाबा की प्रतिमा का अभिषेक और धार्मिक विधियों का आयोजन किया गया। महाआरती और भजन संध्या, जिसमें स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया।

    भक्तिभावना में लीन श्रद्धालु।
    देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालु बाबा की भक्ति में डूबे हुए हैं। समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का आना-जाना दिनभर जारी रहा। बाबा के प्रति श्रद्धा और आस्था का यह माहौल, हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है।

    मधुबन में उत्सव जैसा माहौल। 
    स्मृति महोत्सव ने मधुबन को पूरी तरह भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया है। हर कोना रोशनी और सजावट से जगमगा रहा है।

    आचार्य विमल सागर महाराज के प्रति यह अटूट आस्था और श्रद्धा, उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सम्मेद शिखर की यह पवित्र धरा, श्रद्धालुओं को भक्ति और शांति का अनमोल अनुभव दे रही है।

  • क्रिसमस : हर किसी के दिल में प्रेम, शांति और आनंद भरने का पर्व

    गिरिडीह के स्टीवेंसन मेमोरियल चर्च पचंबा में आज वो रंग और उल्लास देखने को मिला, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बात हो रही है प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिवस, यानीकी। यहां का नज़ारा ऐसा था मानो पूरा मसीही समुदाय एकजुट होकर प्रभु के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर रहा हो। चर्च पूरी तरह से सजा-धजा हुआ, हर कोने में खुशियों की चमक और भक्तों की आवाज़ से गूंज रहा था।

    अब ज़रा सोचिए, जब बाइबल के वचनों से चर्च गूंजे और रेव्ह सन्नी दास जैसे प्रेसबिटर इंचार्ज उन वचनों को अपने शब्दों में समझाएं, तो दिलों में कैसा सुकून और आनंद भर जाता होगा। उन्होंने बताया कि बाइबल हमें सिखाती है, ‘प्रभु में सदा आनंदित रहो।’ और इस क्रिसमस पर यही संदेश हर किसी के दिल में बस गया।
    सामूहिक आराधना में देश और विदेश से श्रद्धालु शामिल हुए। यूपी, झारखंड, ओडिशा, बिहार, और यहां तक कि अमेरिका से भी लोग इस खास मौके पर पहुंचे। बच्चों और महिलाओं ने खास गीत पेश किए, और जब एलेक्स और उनकी टीम ने क्रिसमस गीतों पर परफॉर्म किया, तो पूरा चर्च झूम उठा।
    बात सिर्फ धर्म की नहीं, प्यार और एकता की भी है। चर्च में सिर्फ ईसाई धर्मावलंबी ही नहीं, बल्कि अन्य समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। सबने मिलकर एक-दूसरे को बधाई दी और क्रिसमस केक का आनंद लिया।
    आखिर में चर्च प्रार्थना के बाद, युवाओं और बच्चों ने सेल्फी का भी जमकर लुत्फ उठाया।
    तो ये था गिरिडीह का क्रिसमस, जहां हर चेहरा खुशियों से दमक रहा था। प्रभु यीशु मसीह के संदेश ने यहां मौजूद हर किसी के दिल में प्रेम, शांति और आनंद भर दिया।
    क्रिसमस सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि ये मौका है अपने दिल में प्यार जगाने का, दूसरों को अपनाने का और प्रभु यीशु की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का।

  • ‘मांझी थान और जाहेर थान सिर्फ पूजा स्थल नहीं हैं, यह पहचान हैं-मराण्डी

    गिरिडीह : झारखंड की मिट्टी में बसे एक ऐसे सांस्कृतिक विरासत की बात बताते हैं , जो सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक पूरे समाज की पहचान है। संथाल समाज की आत्मा, उनकी परंपरा, और उनकी जड़ों का प्रतीक—मांझी थान और जाहेर थान।  और इस चर्चा के केंद्र में हैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी।”

    आज बाबूलाल मरांडी अपने गांव कोदईबांक में पहुंचे। गांव के मुहाने पर मांझीथान के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। यह महज एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस समाज के प्रति एक संवेदनशील दृष्टिकोण था, जो अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए संघर्षरत है।

    “बाबूलाल मरांडी ने कहा,। अगर ये समाप्त हो गए, तो समझिए, हमारी पहचान भी समाप्त हो जाएगी।’”

    संथाल समाज की परंपरा में मांझी थान और जाहेर थान का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं है। यह उनके इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। मांझी थान उस धरती से जुड़ाव का प्रतीक है, जहां यह समाज अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ बसता है।

    “बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कहा, ‘हम तभी तक संथाल हैं, जब तक जाहेर थान और मांझी थान की पूजा करते हैं। यह हमारी पहचान है, हमारी जड़ें हैं।’”

    बाबूलाल मरांडी ने अपने इस कदम से एक बड़ी बात कही। यह केवल आस्था का सवाल नहीं, बल्कि एक समुदाय की सांस्कृतिक आत्मा को बचाने की पहल है।

     

  • झारखंड: काशी और उज्जैन की तरह देवघर में बैद्यनाथ कॉरिडोर का निर्माण, हेमंत सरकार ने 900 करोड़ की बड़ी योजना को मंजूरी दी।

    झारखंड न्यूज़: देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, झारखंड के देवघर में स्थित है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से यहां दर्शन के लिए आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार ने देवघर को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। सत्ता में आने के बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने इसे वाराणसी के काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल मंदिर की तरह एक भव्य कॉरिडोर में बदलने की योजना बनाई है।

    मुख्य बिंदु:

    • झारखंड सरकार का बड़ा निर्णय: देवघर का आधुनिक विकास।
    • काशी और उज्जैन की तर्ज पर: बाबा बैद्यनाथ धाम में कॉरिडोर निर्माण।
    • लागत: परियोजना पर 900 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    कॉरिडोर निर्माण की योजना

    हेमंत सरकार ने बाबा बैद्यनाथ धाम को आधुनिक स्वरूप देने के लिए हरी झंडी दे दी है। देवघर में 30 एकड़ से अधिक भूमि का चयन कर लिया गया है। योजना के तहत, काशी और उज्जैन जैसे धार्मिक स्थलों के मॉडल पर एक भव्य कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने के बाद जमीन पर काम जल्द ही शुरू होगा।

    900 करोड़ का बजट

    कॉरिडोर के निर्माण पर अनुमानित 900 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत, काशी की तर्ज पर स्थानीय दुकानों और मकानों को हटाया जाएगा, और प्रभावित जमीन मालिकों को करीब 300 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित क्षेत्र में निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा।

  • श्री गुरु नानक देव जी के 555वे प्रकाश दिवस पर विशाल शोभा यात्रा

    Report- Dimple

    सिखों के प्रथम गुरू श्री गुरु नानक देव जी महाराज के 555 वे प्रकाश दिवस को लेकर गुरुवार को सिख समाज द्वारा गिरिडीह मे विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। स्टेशन रोड मुख्य गुरुद्वारा से शुरू होकर निकली यह शोभा यात्रा शहर के बड़ा चौक कालीबाड़ी चौक कचहरी चौक मकतपुर होते हुए पुनः मुख्य गुरुद्वारे में जाकर समाप्त हुई। इसे लेकर शोभा यात्रा को भरपूर आकर्षक ढंग से सजाया गया था। वहीं गुरु महाराज की पालकी को भी काफी आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया था । इस शोभा यात्रा के आगे आगे पंज प्यारे अपनी परंपरागत वेशभूषा में आगे की चल रहे थे तथा इसके उपरांत निशान साहब लिए हाथ में सिख श्रद्धालु चल रहे थे तथा उनके पीछे पालकी साहब तथा के पीछे महिलाओं का कीर्तन जतथा चल रहा था जो बराबर पूरे शोभा यात्रा के दौरान शब्द कीर्तन कर रहा था। इसे लेकर पूरा माहौल भक्ति मय हो चला। था। वहीं जहां जहां से यह शोभा यात्रा गुजर रही थी। उसके आगे आगे सिख महिला श्रद्धालुओं द्वारा रास्ते को साफ किया जा रहा था। इस मौके पर गुरु सिंह सभा गिरिडीह के प्रधान डॉक्टर गुणवंत सिंह मोंगिया ने बताया कि प्रकाश पर्व को लेकर एक हफ्ता पूर्व से ही कार्यक्रम किया जा रहे हैं। जिसमे अखंड पाठ प्रभात फेरी का आयोजन किया गया था तथा आज यह शोभा यात्रा निकाली गई है तथा कल गुरुद्वारा में कीर्तन दरबार का आयोजन है तथा इसके उपरांत लंगर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने तमाम गिरिडीह वासियो को गुरु नानक देव जी की जन्मदिन की बधाइयां दी। तथा लोगों को गुरुद्वारा आकर आने का निमंत्रण दिया। इस पूरे इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरु सिंह सभा गिरिडीह के सचिव नरेंद्र सिंह शम्मी डॉ अमरजीत सिंह सलूजा चरणजीत सिंह सलूजा। त्रिलोचन सिंह सलूजा। परमजीत सिंह दुआ सरदार देवेंद्र सिंह सरदार भूपेंद्र सिंह दुआ सरदार गुरभेज सिंह कालरा सरदार अजेंद्र सिंह चावला आदि मेम्बर का सराहनीय सहयोग रहा।