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  • माहुरी वैश्य समाज में एकजुटता की मिसाल, चुनाव से पहले ही बनी नई कार्यकारिणी – 1 मार्च का मतदान स्थगित

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह में माहुरी वैश्य मंडल के सत्र 2026-28 के लिए चल रही सांगठनिक चुनाव प्रक्रिया बुधवार  शाम 5 बजे प्रधान कार्यालय में एक अहम मोड़ पर पहुंची। समाज हित को सर्वोपरि मानते हुए 01 मार्च 2026 को प्रस्तावित मतदान को आधिकारिक रूप से स्थगित कर दिया गया।

    समाज पहले, पद बाद में.

    चुनावी सरगर्मी के बीच मनीष कुमार और सुदीप गुप्ता ने बड़ा निर्णय लेते हुए अपना नाम वापस ले लिया। दोनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज की एकता, अखंडता और भाईचारा किसी भी पद से बड़ा है।

    उनका यह कदम केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि एक संदेश था— कि समाज की मजबूती टकराव से नहीं, सहमति से बनती है। प्रधान कार्यालय में मौजूद सदस्यों ने इस फैसले का स्वागत तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किया।

    अब कौन संभालेगा कमान?

    केंद्रीय अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा के बाद सत्र 2026-28 के लिए निम्नलिखित पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए—

    • अध्यक्ष: अरुण कुमार गुप्ता

    • सचिव: अजय कुमार गुप्ता

    • उपाध्यक्ष: अशोक कुमार गुप्ता

    • कोषाध्यक्ष: प्रभात तरवे

    • संगठन मंत्री: आलोक कुमार

    एक स्वर में कहा गया—
    “आज प्रधान कार्यालय में सर्वसम्मति से लिया गया यह निर्णय समाज की एकजुटता का प्रतीक है। हम सभी मिलकर माहुरी वैश्य समाज के उत्थान के लिए कार्य करेंगे।”

    क्यों स्थगित हुआ मतदान?

    नामांकन वापसी के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर एक-एक प्रत्याशी ही शेष रह गए। ऐसे में 01 मार्च को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो गई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गई।

    वरिष्ठों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह.

    इस मौके पर माहुरी वैश्य महामंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश राम सेठ, सचिव उमा शंकर चरण पहाड़ी, संगठन मंत्री प्रदीप कुमार, धर्म संचार मंत्री कंचन देवी सह मंदिर प्रभार मनीष गुप्ता समेत कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

    उनकी उपस्थिति ने इस निर्णय को और भी मजबूत संदेश दिया— कि समाज जब एकजुट होता है, तो चुनाव प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग का माध्यम बन जाता है।

  • गिरिडीह में चुनावी हिंसा : शहर की सियासत में अपराधियों की  एंट्री, सवालों के घेरे में शिवम आज़ाद

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह:  झारखंड के कई जिलों की तरह गिरिडीह भी चुनावी तनाव और छिटपुट हिंसा का इतिहास देखता रहा है, लेकिन अब तक यह धारणा बनी हुई थी कि ऐसी घटनाएँ मुख्यतः नक्सल प्रभाव वाले ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहती थी । गिरिडीह शहर को अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित माना जाता था। लेकिन 2026 के नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 18 में हुई फायरिंग की घटना ने इस धारणा को तोड़ दिया है। मतदान के बीच चली गोलियों में दो लोग घायल हो गए। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शहरी राजनीति के बदलते चरित्र का संकेत बनकर उभरी है।

    विवादों के केंद्र में शिवम आज़ाद.

    इस पूरे घटनाक्रम में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है शिवम श्रीवास्तव उर्फ शिवम आज़ाद । वे गिरिडीह नगर निगम के पूर्व वार्ड पार्षद रह चुके हैं। उनकी मां सरिता श्रीवास्तव भी वार्ड 18 से पार्षद रह चुकी हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में थीं।

    स्थानीय स्तर पर शिवम का नाम लंबे समय से विवादों से जुड़ता रहा है। बस स्टैंड क्षेत्र में उनके कारोबार की चर्चा होती रही है। ठेकेदारी से लेकर अन्य गतिविधियों में उनकी सक्रियता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न हिंदी अखबारों में उनके खिलाफ शराब कारोबार में कथित संलिप्तता, तड़ीपार होने के बाद गिरफ्तारी और अन्य मामलों का जिक्र सामने आता रहा है। सूत्रों का कहना है कि उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हैं, जिनमें सीसी एक्ट और अंतरराज्यीय शराब तस्करी से जुड़े आरोप भी शामिल रहे हैं। हालांकि सभी मामले अदालतों मे लंबित हैं।

    राजनीतिक सफर: भाजपा से झामुमो तक.

    शिवम आज़ाद की राजनीतिक यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही। वे पहले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया।

    स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे विवादित चेहरों का सत्तारूढ़ या प्रभावशाली दलों से जुड़ाव प्रशासनिक सख्ती को प्रभावित करता रहा है। चुनाव के दौरान आमतौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर नजर रखी जाती है, हथियारों की जांच होती है और आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाती है। ऐसे में वार्ड 18 की घटना ने पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रशासन पर उठते सवाल.

    फायरिंग की घटना के बाद टाउन थाना प्रभारी ज्ञान रंजन  को निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलफ़ आरोप है है कि इनहोने शिवम आज़ाद को संरक्षण दे रखा था । लेकिन घटना के 24 घंटे बाद तक किसी की गिरफ्तारी न होने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन न केवल हिंसा को रोकने में विफल रहा, बल्कि कार्रवाई में भी तेज़ी नहीं दिख रही है। गौरतलब है कि गिरिडीह का शहरी इलाका अब तक चुनावी गोलीबारी से लगभग अछूता माना जाता था। ऐसे में यह घटना कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

    झामुमो की त्वरित कार्रवाई.

    घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तत्काल कदम उठाते हुए शिवम आज़ाद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। साथ ही केंद्रीय कमेटी को उनके निलंबन के लिए पत्र भेजा गया है। राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संदेश स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं। हालांकि अंतिम परीक्षा प्रशासनिक कार्रवाई की होगी।

    पहले भी रहे हैं विवाद.

    शिवम आज़ाद का नाम पूर्व में मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। दिसंबर माह में भी एक मारपीट प्रकरण में उनका नाम चर्चा में आया था।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से मामलों का सामना करने के बावजूद उनका प्रभाव बना रहना राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

    वीडियो में पलटवार.

    इसी बीच शिवम आज़ाद ने एक वीडियो जारी कर ट्रांसपोर्टर राजू खान पर चुनावी हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। अब यह सिर्फ गोलीबारी का मामला नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप की जंग बन चुका है।

    नजर जिला प्रशासन पर.

    अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर है।

    • क्या फायरिंग के आरोपियों की गिरफ्तारी होगी?
    • और क्या भविष्य में शहरी इलाकों में चुनावी हिंसा रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी?

    गिरिडीह, जिसे अब तक शहर के स्तर पर अपेक्षाकृत शांत माना जाता था, वहां हुई यह घटना आने वाले दिनों में न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि प्रशासन की साख को भी प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह है कि यह घटना एक अपवाद साबित होती है या फिर शहर की चुनावी राजनीति के नए और खतरनाक दौर की शुरुआत।

  • झारखंड बजट… गिरिडीह को मेडिकल कॉलेज, डेयरी प्लांट और स्टेडियम की सौगात, विपक्ष का हमला—“ये बजट नहीं, बड़ा ढोल है !”

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश किया ।  कुल 1, 58, 560 करोड़ के बजट में महिलाओं की बल्ले-बल्ले है। इसमें गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है।

    JMM ज़िला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    वहीं भाजपा नेता सुरेश साव ने बजट पर सवाल उठाते हुये कहा कि सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन बजट में नई नौकरियों की ठोस व्यवस्था नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने की बात कही गई, पर कृषि क्षेत्र के लिए ठोस संरचनात्मक सुधार का अभाव है। महिलाओं के नाम पर योजनाओं की घोषणा तो है, लेकिन उनके स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण का कोई स्पष्ट मॉडल नहीं है। झारखंड की जनता को आंकड़ों का जाल नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य में वास्तविक परिवर्तन चाहिए। यह बजट इन बुनियादी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। भाजपा नेता सुरेश साव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरने वाला व्यापारियों, कारोबारियों और दुकानदारों पर मंदी की मार और गहरा गयी है।

    गिरिडीह सदर अस्पताल  मेडिकल कॉलेज के रूप में होगा विकसित – संजय सिंह

    झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मे गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है। जेएमएम जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    झामुमो के जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने अबुआ बजट को महिलाओं के लिए विकासोन्मुखी बजट बताया। उन्होंने कहा कि अबुआ बजट में सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं लेकर आई है। मंईयां योजना के लिए 14000 करोड़ रू का प्रावधान किया गया है। महिला किसानों के लिए महिला किसान खुशहाली योजना लाई गई है। वहीं झारखंड में 5  बालिका आवासीय विद्यालय बनेंगे। इन योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा

    लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट पूरी तरह निराशाजनक, जनविरोधी और विकास विरोधी प्रतीत होता है। राज्य की जनता को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का ठोस समाधान सामने आएगा, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट केवल हवा-हवाई घोषणाओं और आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है।

    जमुआ से भाजपा विधायक मंजु कुमारी ने कहा है कि झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत इस बजट में न तो युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कोई प्रभावी पहल नजर आती है। राज्य के लाखों युवा रोजगार की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन बजट में उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसान, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनके लिए भी यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खेती-किसानी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए ठोस प्रावधानों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए भी केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावी योजनाओं की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर देने के लिए भी कोई नई और ठोस पहल नहीं दिखाई देती। यह बजट स्पष्ट रूप से सरकार की दिशाहीन सोच और योजनाओं के अभाव को दर्शाता है।

  • लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने पूरे शबाब पर

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह में आज  है… सुबह के ठीक सात बजते ही मतदान शुरू हुआ और उसके साथ ही सड़कों से लेकर गलियों तक एक अलग ही ऊर्जा दिखाई दी।

    नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 के तहत Giridih नगर निगम, बड़की सरैया और धनवार नगर पंचायत में सुबह-सुबह ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं। ऐसा लग रहा था मानो शहर का हर मतदाता अपने अधिकार को लेकर पूरी तरह सजग हो चुका है। युवा हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या पहली बार वोट डालने वाले मतदाता — हर चेहरा लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी को लेकर उत्साहित दिखा।

    VVIP ने दिया संदेश

    सुबह के वक्त ही कई VVIP और प्रमुख प्रत्याशियों ने मतदान कर आम जनता को प्रेरित किया।
    नगर विकास मंत्री Sudivya Kumar Sonu अपनी पत्नी के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और मतदान कर लोगों से अपील की कि वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
    वहीं भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र चौधरी भी अपनी पत्नी के साथ बूथ पहुंचे और मताधिकार का प्रयोग किया।
    मेयर पद की प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने भी सुबह-सुबह अपने निर्धारित बूथ पर मतदान कर लोकतंत्र में आस्था जताई।

    सभी नेताओं का एक ही संदेश था — “घर से निकलें, वोट करें, क्योंकि यही आपका अधिकार और आपकी ताकत है।”

    दोपहर में तनाव

    हालांकि लोकतंत्र के इस शांतिपूर्ण माहौल के बीच दोपहर तक वार्ड नंबर 27 और वार्ड 18 में प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई। प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई ताकि मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    प्रशासन पूरी तरह सतर्क

    मतदान शुरू होते ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त Ramnivas Yadav ने जिला कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया।
    सीसीटीवी मॉनिटरिंग, हेल्पलाइन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की उन्होंने खुद समीक्षा की।

    डीसी ने साफ कहा —

    “पारदर्शिता और निष्पक्षता हमारी पहली प्राथमिकता है। मतदाता निर्भीक होकर मतदान करें।”

    प्रशासन की ओर से सभी मतदान केंद्रों पर दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैंप और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डीसी ने कई बूथों का दौरा कर सुरक्षा और निष्पक्षता का जायजा लिया। इस दौरान उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी तेज कुमार हांसदा, जिला नजारत उप समाहर्ता आशुतोष ठाकुर और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अंजना भारती समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    लोकतंत्र का जश्न जारी

    गिरिडीह की गलियों में आज सिर्फ एक चर्चा है — वोट की।
    लोगों का उत्साह बता रहा है कि शहर अपने भविष्य को लेकर गंभीर है। अब नजरें शाम तक के मतदान प्रतिशत और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं।

    लोकतंत्र का यह उत्सव तभी सफल होगा जब हर मतदाता अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
    तो सवाल यही है — क्या आपने वोट डाला?

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  • नगर निगम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू,शहर की सियासत चरम पर

    परवेज़ आलम.

     The News Post4U.

    गिरिडीह नगर निगम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं… और शहर की सियासत अपने चरम पर है। आपके शहर की सरकार कौन चलाएगा ? किसके हाथ होगी मेयर की कुर्सी? और कौन जीतेगा इस बार की “हॉट सीट”?

    चहुकोनिया मुकाबला… लेकिन असली टक्कर दो के बीच !

    कागज़ पर मुकाबला चार कोनों का दिख रहा है… लेकिन ज़मीन पर असली लड़ाई सिमटती दिख रही है दो चेहरों के बीच— भाजपा समर्थित उम्मीदवार डॉ शैलेन्द्र चौधरीऔर जेएमएम समर्थित प्रत्याशी प्रमिला मेहरा। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है…

    भाजपा के दो बागी चेहरे—नागेश्वर दास और प्रकाश दास—अब जेएमएम के पाले में जा चुके हैं। और भाजपा के ही बागी कामेश्वर पासवान… पार्टी के लिए गले की हड्डी बने हुए हैं। यानी…
    मुकाबला सिर्फ विरोधियों से नहीं, अपनों से भी है!

     कुल 16 उम्मीदवार मैदान में.

    मेयर पद के लिए 16 उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बड़े राजनीतिक समर्थन साफ दिख रहे हैं—

    • प्रमिला मेहरा को झामुमो का समर्थन
    • डॉ शैलेन्द्र चौधरी को भाजपा का समर्थन
    • समीर राज चौधरी को कांग्रेस का समर्थन

    पिछले चुनाव में समीर राज चौधरी 20,595 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार सवाल ये है—क्या वे उस वोट बैंक को फिर से समेट पाएंगे?

    बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर.

    यह चुनाव सिर्फ स्थानीय नहीं है… यह प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है। झारखंड सरकार में मंत्री और नगर विकास विभाग संभाल रहे सुदीव्य कुमार सोनू—गिरिडीह उनके ही क्षेत्र में आता है। उनकी साख भी इस चुनाव से जुड़ी है।

    दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी— साथ ही भाजपा के कई दिग्गज नेता—यहां आकर मोर्चा संभाल चुके हैं। यह लड़ाई मेयर की कुर्सी से आगे बढ़कर राजनीतिक संदेश की लड़ाई बन चुकी है।

    आंकड़ों की बात करें तो…

    गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र 36 वार्डों में बंटा है। कुल 137 बूथ हैं।
    कुल मतदाता—1 लाख 50 हजार 992. महिला मतदाता—75,725
    पुरुष मतदाता—75,266 और एक किन्नर मतदाता भी इस लोकतंत्र का हिस्सा है। अब सवाल—किसका गणित बैठेगा?

    गैर-दलीय चुनाव… लेकिन पूरी तरह दलीय रणनीति.

    कागज़ पर यह “गैर-दलीय” चुनाव है। लेकिन ज़मीन पर? पूरी तरह दलीय! राज्य के 48 शहरी निकायों में यही तस्वीर है। 23 फरवरी को मतदान होगा… और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।

    सत्तारूढ़ गठबंधन के दो चेहरे—
    झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस— यहां आमने-सामने हैं और तीसरे कोने पर मजबूती से खड़ी है भारतीय जनता पार्टी। यानी सीधी त्रिकोणीय जंग.

    सवाल आपके लिए…

    क्या वोट विकास पर पड़ेगा? या जातीय समीकरण पर? क्या मुस्लिम वोट निर्णायक होंगे?
    क्या हिंदू वोट गोलबंद होंगे ? क्या बागी उम्मीदवार खेल बिगाड़ देंगे? और सबसे बड़ा सवाल—
    क्या यह चुनाव 2029 की बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों का ट्रेलर है?

    आख़िर में .

    सभी प्रत्याशी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। जनसंपर्क, बैठकें, रणनीति, समीकरण… सब अपने चरम पर हैं । लेकिन अंत में फैसला आपके हाथ में है । 23 फरवरी को आप तय करेंगे—
    गिरिडीह की कमान किसे सौंपी जाए। चुनाव भले “गैर-दलीय” हो… लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” हो चुकी है।

  • लोकतंत्र का महापर्व: कड़ी सुरक्षा और पुख्ता इंतज़ाम के बीच मतदान कर्मी हुए रवाना

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह, 22 फरवरी :नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए  गिरिडीह जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में दिखा। सुबह होते ही डिस्पैच सेंटर परिसर लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियों का साक्षी बन गया। मतदान कर्मियों की चहल-पहल, आवश्यक सामग्रियों की जांच और अधिकारियों की सतर्क निगाहें—हर दृश्य यह बता रहा था कि इस बार प्रशासन कोई चूक नहीं चाहता।

    जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त (नगरपालिका) रामनिवास यादव स्वयं डिस्पैच सेंटर पहुंचे और पूरी व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू—सामग्री वितरण, सुरक्षा, वाहन प्रबंधन और संचार व्यवस्था—की विस्तार से समीक्षा की।

    सुबह से ही निर्धारित काउंटरों पर मतदान दलों को मतपत्र, मतपेटी, मतदाता पंजी, सील, प्रपत्र और अन्य आवश्यक सामग्री क्रमबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई गई। हर दल को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सामग्री प्राप्त करने के बाद उसकी सावधानीपूर्वक जांच करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर तुरंत संबंधित कोषांग को सूचित करें।

    उपायुक्त ने सख्त शब्दों में कहा कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा—“स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

    मतदान दलों को समय पर उनके मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए वाहन व्यवस्था की समुचित तैयारी की गई है। सुरक्षा बलों की तैनाती और नियंत्रण कक्ष की सक्रियता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निरीक्षण के दौरान सामग्री कोषांग, वाहन कोषांग और कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया।

    प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, शौचालय और विद्युत जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहें। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    मतदान कर्मियों का उत्साहवर्धन करते हुए उपायुक्त ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता में उनकी भूमिका सबसे अहम है। “निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, ताकि हर मतदाता निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके,” उन्होंने कहा।

    पूरे आयोजन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था अनुशासित और सुव्यवस्थित दिखाई दी। तय समयानुसार सभी मतदान दल अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।

    गिरिडीह में अब इंतजार है उस क्षण का, जब मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र की इस प्रक्रिया को नई दिशा देंगे। लोकतंत्र का यह उत्सव अब अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ चुका है।

  • जाति-धर्म की राजनीति से शहर का विकास नहीं – सुदिव्य कुमार सोनू

    मंत्री का  भाजपा पर तीखा हमला, प्रमिला मेहरा के समर्थन में जुटी भीड़.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव की सरगर्मी के बीच माथाडीह फुटबॉल मैदान गुरुवार को राजनीतिक बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया। मंच पर थे झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, और निशाने पर थी भारतीय जनता पार्टी।

    मिलन समारोह में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए मंत्री सोनू ने बिना नाम लिए भाजपा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “बांटने और बंटवारे की राजनीति करने वाली पार्टी के लोग आज हम पर समाज को बांटने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि शुरुआत से ही उन्होंने जाति और धर्म के नाम पर समाज में विभाजन की रेखाएं खींची हैं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, और अब जाति के आधार पर विभाजन की राजनीति हो रही है। नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब दलित के बजाय अमीर दलित को समर्थन देना इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि वर्गीय समीकरण देखे जा रहे हैं।
    “अगर समाज को नहीं बांटना था, तो टिकट देने में अमीर-गरीब का पैमाना कैसे आ गया ?” – यह सवाल पूछते हुए मंत्री ने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर देश को पहले भी नुकसान हुआ है और यह राजनीति अब अपने अंतिम चरण में है।

    उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा को समर्थन दें और गिरिडीह के विकास के लिए एकजुट होकर मतदान करें।

    “गिरिडीह की बेटी और बहू” – संजय सिंह.

    झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने मेयर पद के लिए प्रमिला मेहरा को समर्थन दिया है क्योंकि वे गिरिडीह की बेटी और बहू हैं, और सामाजिक-राजनीतिक जीवन में उनका लंबा अनुभव रहा है।

    उन्होंने मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा कि चुनाव मैदान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन पर फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप है। “ऐसे उम्मीदवारों से सावधान रहिए और सोच-समझकर अपना मत दीजिए,”

    “आपका एक वोट बदल सकता है शहर की तस्वीर” – प्रमिला मेहरा॰

    मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने अपने संबोधन में भावुक अपील की। उन्होंने कहा,
    “आप सभी अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। चुनाव के दिन सोच-समझकर फैसला लें। अगर आप गिरिडीह की तस्वीर बदलना चाहते हैं, तो मुझे अपना आशीर्वाद और समर्थन दें।”

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि जनता का समर्थन मिला, तो शहर के बुनियादी मुद्दों—पेयजल, सफाई, सड़क और प्रकाश व्यवस्था—पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा।

    भाजपा छोड़ झामुमो में वापसी.

    सभा के दौरान एक और राजनीतिक संदेश गया, जब नागेश्वर दास ने भाजपा छोड़कर अपने समर्थकों के साथ पुनः झामुमो का दामन थाम लिया। पार्टी नेताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। नागेश्वर दास ने मंच से प्रमिला मेहरा को  समर्थन की घोषणा की।

    सभा को झामुमो जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी, सुनील यादव, जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा, जिला सह सचिव दिलीप रजक सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया।

    कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष राकी सिंह, विकास सिन्हा, रामजी यादव, सुनील पासवान, मंगल सिंह, प्रवीण राय, महबूब आलम तुफान, मो. इम्तियाज, अजीत कुमार सिन्हा, राकेश कुमार सिंह, मोनू सिंह, मेहताब मिर्जा, विशाल मंडल, सुनील दास, रामचंद्र दास, कमल दास, सुखदेव दास, चंचला देवी, हरि मरांडी, अमजद अंसारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

    राजनीतिक तापमान चढ़ा.

    माथाडीह का यह मिलन समारोह साफ संकेत दे गया कि नगर निगम चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है। जाति, धर्म और सामाजिक समीकरणों की बहस के बीच चुनावी लड़ाई और तीखी होती जा रही है।

    अब देखना यह है कि जनता विकास के वादों को प्राथमिकता देती है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की इस आंधी में कोई नया समीकरण उभरता है।

  • “हर घर तक पहुंचेगा पानी” — शैलेन्द्र चौधरी ने पेयजल संकट को बनाया चुनाव का मुख्य मुद्दा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निगम क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी के बीच मेयर प्रत्याशी डॉ. शैलेन्द्र चौधरी का जनसंपर्क अभियान अब सीधे जनता की सबसे बड़ी जरूरत—पानी—पर केंद्रित हो गया है।

    तिरंगा चौक, वृंदावन अपार्टमेंट, महावीर गली, धोबिया गली, दर्जी मोहल्ला, टुंडी रोड सहित कई इलाकों में घर-घर पहुंचकर उन्होंने लोगों से संवाद किया। दरवाजे खुले, समस्याएं सामने आईं और बातचीत में एक मुद्दा सबसे ऊपर रहा—पेयजल संकट।

    “नीचे की मंजिल तक नहीं पहुंचता पानी”

    स्थानीय लोगों ने बताया कि कई मोहल्लों में हालात इतने खराब हैं कि नीचे की मंजिलों तक भी पानी नहीं पहुंच पाता। कहीं प्रेशर इतना कम है कि मोटर के बिना काम नहीं चलता।
    इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है—पानी भरने के लिए अतिरिक्त मेहनत, रोज की जद्दोजहद और अनिश्चितता।

    ठोस समाधान का वादा.

    डॉ. शैलेन्द्र चौधरी ने भरोसा दिलाया कि मेयर बनने के बाद इन इलाकों में जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा।

    • नई ओवरहेड पानी टंकी का निर्माण
    • पुरानी पाइपलाइन की जांच और मरम्मत
    • जरूरत पड़ने पर नई पाइपलाइन बिछाने की योजना
    • हर घर तक पर्याप्त दबाव के साथ जलापूर्ति सुनिश्चित करना

    उन्होंने स्पष्ट कहा, “पानी सुविधा नहीं, बुनियादी अधिकार है। इसके लिए लोगों को संघर्ष नहीं करना चाहिए।”

    दो समय नियमित जलापूर्ति का आश्वासन.

    चुनावी घोषणा में एक और बड़ा वादा किया गया—नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन दो बार नियमित जलापूर्ति, सुबह और शाम। ताकि नागरिकों को पानी के लिए भागदौड़ न करनी पड़े और दैनिक जरूरतें सुचारु रूप से पूरी हो सकें।

    विकास और जवाबदेही की बात.

    जनसंपर्क के दौरान लोगों का समर्थन उत्साहजनक दिखा। डॉ. चौधरी ने कहा कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता चाहती है।
    उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे नगर के सर्वांगीण विकास के इस संकल्प में सहभागी बनें और एक संवेदनशील, कर्मठ एवं जवाबदेह नेतृत्व को समर्थन दें।

    चुनाव की इस तपिश में पानी का मुद्दा अब केंद्र में है। सवाल यह है—क्या इस बार नगर की प्यास सच में बुझेगी?

     

  • “हर वार्ड में लाइब्रेरी, हर गली में सीसीटीवी” — प्रमिला मेहरा का जनसंपर्क अभियान तेज

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निगम क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज है। महापौर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा इन दिनों वार्ड-वार्ड, गली-गली घूमकर लोगों से आशीर्वाद मांग रही हैं। उनके जनसंपर्क अभियान में स्थानीय मुद्दों की साफ झलक दिख रही है—पढ़ाई, सुरक्षा और खेलकूद को लेकर बड़े वादे किए जा रहे हैं।

    जनसंपर्क के दौरान प्रमिला मेहरा ने कहा, “अगर जनता का आशीर्वाद मिला तो हर वार्ड में विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी खोली जाएगी। आज बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर-दूर तक निजी लाइब्रेरी जाना पड़ता है। खासकर बेटियों को इससे ज्यादा परेशानी होती है। मैं मेयर बनी तो यह सुविधा उनके अपने वार्ड में ही उपलब्ध कराऊंगी।”

    उन्होंने शिक्षा को नगर विकास की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि एक सशक्त शहर की नींव पढ़े-लिखे युवाओं से ही मजबूत होती है।

    सुरक्षा पर फोकस.

    प्रमिला मेहरा ने शहरी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि हर गली, हर चौक-चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि अपराध पर नियंत्रण हो और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।

    खेल और युवाओं के लिए योजना.

    उन्होंने घोषणा की कि हर वार्ड में खेल मैदान विकसित किया जाएगा, ताकि बच्चों और युवाओं को खेलकूद की सुविधाएं मिल सकें और वे स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ें।

    वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों को प्राथमिकता.

    प्रमिला मेहरा ने कहा कि मेयर बनने पर वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद परिवारों के कार्यों को प्राथमिकता के साथ निश्चित समय सीमा में पूरा किया जाएगा।

    हर वार्ड में बनेगी कमेटी, लगेगा जनता दरबार.

    उन्होंने यह भी ऐलान किया कि हर वार्ड में वार्ड कमेटी का गठन कर उसे सशक्त बनाया जाएगा। योजनाओं के चयन में वार्ड कमेटी की सीधी भागीदारी होगी।
    साथ ही, जनता की समस्याओं के समाधान के लिए हर महीने हर वार्ड में जनता दरबार लगाया जाएगा।

    जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। मौके पर राकेश कुमार राकी, शाहनवाज अंसारी, मो तुफान, सोनू एजाज, अल्कामा, मो वसीम राजा, डना बाबू, मो शेरू, मो नैयर, सतार अंसारी, सुशील शर्मा, मो पलटन, मो गांधी, मो चांद, मो पप्पु, गीता शर्मा, प्रमिला कुमारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

    इसके अलावा राकेश कुमार रॉकी, हरिमोहन कंधवे, प्रमोद कंधवे, विनय खेतान, बंटी केडिया, संतु कंधवे, गोपाल बगेड़िया, टिंकू सिंह, योगेन्द्र सिंह, सोनू कुमार, किशोर दास सहित कई स्थानीय लोग भी अभियान में सक्रिय दिखे।

    चुनाव की इस सरगर्मी के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन वादों को कितना समर्थन देती है और नगर निगम की बागडोर किसके हाथों में सौंपती है।

  • गिरिडीह : महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने की पहल, ‘नारी अदालत’ को और सशक्त बनाने की तैयारी

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान को लेकर जिला प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने अपने कार्यालय कक्ष में ‘नारी अदालत’ से संबंधित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें इसकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि महिलाओं को घरेलू और सामाजिक विवादों में शीघ्र, पारदर्शी और संवेदनशील न्याय मिल सके। पिछले माह प्राप्त मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिन प्रकरणों का निष्पादन हो चुका है, उनकी जानकारी साझा की गई, वहीं लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने पर बल दिया गया।

    उपायुक्त ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाएं अक्सर छोटे-छोटे लेकिन गंभीर प्रभाव वाले मामलों—जैसे उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद, पारिवारिक कलह या अधिकारों की कटौती—का सामना करती हैं। ऐसे मामलों में उन्हें त्वरित और सुलभ वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध कराना ही ‘नारी अदालत’ की मूल भावना है।

    उन्होंने निर्देश दिया कि हर शिकायत का पंजीकरण पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए, दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए और पीड़ित महिला की गरिमा एवं सुरक्षा सर्वोपरि रखी जाए।

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ग्राम स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस मंच की जानकारी प्राप्त कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर इसका लाभ उठा सकें। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।

    उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि ‘नारी अदालत’ केवल एक मंच नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का माध्यम है। इसे और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि प्रत्येक पीड़ित महिला को समय पर न्याय मिल सके और समाज में सकारात्मक संदेश जाए।

    बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी गिरिडीह, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।