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  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी, 13 से 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी

    – मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में 13 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    छह जिलों में येलो अलर्ट.

    IMD के अनुसार, 13 जुलाई को गुमला, खूंटी, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश की आशंका है। इन जिलों के निवासियों को निचले इलाकों में जलभराव और वज्रपात से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

    झारखंड के मध्य और पूर्वी जिलों पर असर.

    14 जुलाई को गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में येलो अलर्ट लागू रहेगा। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है।

    उत्तर-पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना

    मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 15 जुलाई को देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहेबगंज में भारी बारिश हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा गया है।

    औसत से 69% अधिक वर्षा

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, “1 जून से 12 जुलाई के बीच राज्य में 499.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 296.4 मिमी होती है। यह सामान्य से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है।”

    इन जिलों में रिकॉर्डतोड़ बारिश

    • पूर्वी सिंहभूम: सामान्य से 157% अधिक वर्षा
    • रांची: सामान्य से 150% अधिक बारिश
    • सरायकेला-खरसावां: 130% ज्यादा वर्षा

    इन पांच जिलों में बारिश में कमी.

    हालांकि झारखंड के देवघर, गढ़वा, गोड्डा, साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में अब तक 21% से 29% तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे वहां खेती और जलस्तर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    IMD की लोगों को सलाह.

    • बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें
    • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
    • यात्रा करने से पहले मौसम अपडेट चेक करें

    मौसम विभाग की मानें तो झारखंड में अगले तीन दिन मूसलधार बारिश और तेज हवाओं के साथ चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे मजबूत उपाय है।

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।

  • गिरिडीह : कांग्रेस के नए कार्यालय “राजीव भवन” का भव्य उद्घाटन

    *भारी बारिश भी नहीं रोक सकी नेताओं का जोश.

    Edited by: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह, झारखंड: जिला कांग्रेस कमिटी के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब भारी बारिश के बावजूद गिरिडीह में नए जिला कार्यालय “राजीव भवन” का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता एकजुट नजर आए और पूरे आयोजन में जनसंपर्क, संगठन मजबूती और भाजपा पर तीखे प्रहार की झलक दिखी।

    गिरिडीह के केंद्र में स्थित इस नए कार्यालय भवन का उद्घाटन कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कांके विधायक सुरेश बैठा, बोकारो विधायक श्वेता सिंह, पूर्व विधायक जयप्रकाश भाई पटेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से किया।

    के. राजू ने कहा: यह सिर्फ कार्यालय नहीं, जनता की आवाज़ है

    प्रदेश प्रभारी के. राजू ने उद्घाटन के दौरान कहा, राजीव भवन केवल एक राजनीतिक दफ्तर नहीं है, यह जनता की समस्याओं के समाधान का केंद्र बनेगा।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के मिशन पर हैं, और इस कार्यालय के माध्यम से गिरिडीह में लोगों का पार्टी पर विश्वास और गहरा होगा।

    गुरु पूर्णिमा पर शुभारंभ को बताया ‘सांकेतिक पुनर्जागरण’

    प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने इस अवसर को गुरु पूर्णिमा के साथ जोड़ते हुए कहा, आज का दिन कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। गिरिडीह में कांग्रेस की पुरानी विरासत रही है, अब हमें इसे फिर से मजबूत करना है।” उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस हर पंचायत और गांव तक फिर से अपनी पहचान बनाएगी।

    डॉ. इरफान अंसारी का भाजपा पर हमला.

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने भाषण में भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, हम कांग्रेसजन चंदा जमा कर कार्यालय बनाते हैं, जबकि भाजपा सत्ता में रहकर आदिवासियों को जमीन से बेदखल करती है।” उन्होंने नए कार्यालय को जनता से जुड़ा बताते हुए इसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समर्पित करने पर गर्व जताया।

    नेताओं का जमावड़ा, कार्यकर्ताओं में जोश.

    इस कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बालमुचू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, वरिष्ठ नेता उपेंद्र सिंह, अशोक चौधरी, रियाजुल अंसारी, धनंजय सिंह, सतीश केडिया, अनिल सिंहा, संतोष राय समेत कई नेता मौजूद रहे। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम जनता इस मौके पर उपस्थित रही, जिससे कांग्रेस के प्रति जनसमर्थन का साफ संदेश मिला।

    राजनीतिक संदेश साफ – कांग्रेस वापस मैदान में.

    गिरिडीह के इस आयोजन ने साफ संकेत दिया कि कांग्रेस राज्य में एक बार फिर से सक्रिय भूमिका में लौट रही है। “राजीव भवन” केवल एक इमारत नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • देवघर में राजकीय श्रावणी मेले का भव्य उद्घाटन

    EDITED BY: परवेज़ आलम

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    देवघर: गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर देवघर जिले के दुम्मा स्थित झारखंड के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के समावेश के साथ राजकीय श्रावणी मेले का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय, और श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। तीनों मंत्रियों ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर फीता काटा और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच मेले की शुरुआत की।

    श्रद्धालुओं की सुविधा में तकनीक का सहारा.

    उद्घाटन के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन ने इस बार श्रावणी मेले को पहले से बेहतर और सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश की है। श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और यात्रा अनुभव को यादगार बनाने के लिए एआई (AI) आधारित सिस्टम लागू किया गया है। इसमें:

    • AI चैटबॉट: यात्रियों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए।
    • QR कोड सिस्टम: जरूरी जानकारी स्कैन कर तुरंत उपलब्ध कराने के लिए।
    • RFID ट्रैकिंग सिस्टम: छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें ट्रेस और ट्रैक करने की सुविधा।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की योजना.

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि कांवरिया पथ को और सुगम बनाने के लिए सरकार की ओर से विस्तृत योजना बनाई गई है।

    • खिजुरिया से मानसरोवर तट स्थित क्यू कॉम्प्लेक्स तक फूट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण प्रस्तावित है। यह सर्कुलर रोड पार करने में कांवरियों को हो रही असुविधा को दूर करेगा।
    • दुम्मा से खिजुरिया तक के मार्ग को पहले ही सुविधाजनक बना दिया गया है, और अब इसके आगे मंदिर तक की सड़क को भी समर्पित कांवर पथ के रूप में विकसित किया जाएगा।
      इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को आसानी होगी, बल्कि देवघर शहर की यातायात व्यवस्था भी पहले से ज्यादा सुव्यवस्थित हो जाएगी।

    मंत्रियों ने जताया विश्वास और आभार.

    ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से मेले के दौरान वर्षा भी हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ किसानों को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर मेले को सफल बनाएंगे।”
    वहीं, श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन ने समर्पित भाव से मेले की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।

    प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम.

    देवघर के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने जानकारी दी कि इस बार सुरक्षित और सुगम जलार्पण की दिशा में हर संभव उपाय किए गए हैं। प्रशासन ने AI चैटबॉट, रियल टाइम सहायता, पानी और चिकित्सा की सुविधा, तथा यातायात नियंत्रण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।

    उद्घाटन में उमड़ा जनसैलाब.

    पूजन और उद्घाटन समारोह के दौरान दुम्मा प्रवेश द्वार “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और अधिकारियों की उपस्थिति में माहौल भक्तिमय हो गया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड सरकार पारंपरिक भावनाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के सहारे एक समर्पित और सशक्त व्यवस्था देने के लिए तत्पर है।

     

  • जन्मदिन पर दिखे ‘कैप्टन कूल’: फैंस को दिया माही ने खास तोहफा, फार्म हाउस से निकलकर लहराया हाथ

    Edited by – परवेज़ आलम.
    For – The News Post4u.

    भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते सितारे और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी  ने 7 जुलाई को अपने जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा पल रच दिया जिसे रांची कभी नहीं भूलेगा। सोमवार की सुबह, जब रांची हल्की बारिश और बादलों की चादर में लिपटी थी, धोनी अपने सिमलिया स्थित फार्म हाउस से बाहर निकले और अपने चाहने वालों को अपनी झलक देकर जन्मदिन को यादगार बना दिया।

    धोनी इस मौके पर अपनी नई चमचमाती कार में सवार थे। जैसे ही उन्होंने फार्म हाउस का गेट पार किया, वहां पहले से मौजूद सैकड़ों प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। धोनी-धोनी!”  के नारों से इलाका गूंज उठा। माही ने भी अपने खास शांत और सादगीपूर्ण अंदाज़ में कार की स्पीड धीमी की और हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया।

    भीड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपनी आंखों से ‘कैप्टन कूल’ की एक झलक पाने को आतुर था। कुछ लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था – हैप्पी बर्थडे माही, झारखंड की शान, भारत की जान”। वहीं कुछ युवा अपने मोबाइल कैमरों से उस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने में लगे थे।

    सुबह से जुटने लगी थी भीड़, बारिश भी नहीं रोक सकी जोश.

    धोनी के फैंस सुबह से ही उनके फार्म हाउस के बाहर जमा होने लगे थे। किसी ने केक साथ लाया था, तो कोई धोनी के पोस्टर लेकर खड़ा था। फैन क्लब्स ने वहीं सड़क किनारे छोटा-सा मंच बना रखा था जहां संगीत, उत्सव और जोश का माहौल था। बारिश रुक-रुक कर हो रही थी लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

    सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मना जश्न.

    रांची ही नहीं, पूरे देश में माही का जन्मदिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #HappyBirthdayDhoni ट्रेंड करता रहा। फैंस ने जगह-जगह केक काटकर जश्न मनाया और अपने-अपने अंदाज में धोनी के प्रति अपना प्यार जताया।

    एक नजर धोनी की उपलब्धियों पर.
    महेंद्र सिंह धोनी न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तानों में से हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में भारत ने जो इतिहास रचा, वो कभी नहीं मिटाया जा सकता।

    • 2007 में टी20 वर्ल्ड कप.
    • 2011 में वनडे वर्ल्ड कप.
    • 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी.

    इसके अलावा उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को भी नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। आईपीएल में भी धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके नेतृत्व में 5 बार खिताब जीता है, और आज CSK को सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी में गिना जाता है.

    जन्मदिन पर धोनी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनका एक इशारा – भीड़ को देखकर मुस्कुराना, हाथ हिलाना और कार की स्पीड धीमी करना – यही संदेश दे गया कि वह आज भी अपने फैंस को सबसे पहले रखते हैं। उनके लिए यह छोटा-सा लम्हा शायद एक दिन का किस्सा हो, लेकिन उनके फैंस के लिए यह यादगार बन गया।

  • तेलंगाना में बेरहमी से पिता की हत्या: पत्नी और दो बेटों ने मिलकर रची साजिश, झारखंड के गिरिडीह से जुड़ा है मामला

    Edited by: परवेज़ आलम
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    गिरिडीह/सिकंदराबाद/हैदराबाद:
    मानवता को झकझोर देने और दिल दहला देने वाली घटना में झारखंड के गिरिडीह निवासी अशोक यादव की हैदराबाद के पास सुनसान इलाके में बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी और दो बेटों ने मिलकर अंजाम दिया। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी क्रांति देवी, बेटों राजेंद्र यादव  और राजेश यादव के अलावा एक जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है।

    हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और अवैध संबंधों का संदेह.

    मृतक अशोक यादव, झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्बा ओपी क्षेत्र के पड़रिया गांव का रहने वाला था। वह लंबे समय से तेलंगाना के सिकंदराबाद के काजिगुड़ा इलाके में जूस की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, अशोक की शादी क्रांति देवी से हुई थी, लेकिन शुरू से ही उनके वैवाहिक संबंध तनावपूर्ण रहे। हालांकि, उनके दो बेटे और एक बेटी हुए। बेटी की शादी कर दी गई थी, और दोनों बेटों को अशोक ने अपनी दुकान का जिम्मा सौंप दिया था।

    भाई पिंटू यादव ने बताया कि अशोक को अपनी पत्नी क्रांति देवी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंधों का शक था। इसी को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। कई बार गांव में इस मुद्दे पर पंचायत भी हुई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। आरोप है कि क्रांति देवी ने अपने बेटों को पिता के खिलाफ भड़काया और उनके साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रच डाली।

    हत्या की रात्रि और निर्मम वारदात.

    मंगलवार की देर रात, अशोक यादव जब होटल में खाना खाकर घर लौटा और सोने चला गया, तभी उस पर जानलेवा हमला किया गया। पहले उसके सिर पर लोहे के काता (लोहे की छड़) से वार किया गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। फिर क्रांति देवी और दोनों बेटों ने मिलकर गन्ना छीलने वाले धारदार हसुआ  से उसके सिर, जबड़े और गर्दन पर वार कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।

    हत्या के बाद शव को एक अज्ञात वाहन से 40 किलोमीटर दूर हैदराबाद के कुतापेठ-नागोल इलाके में एक सुनसान जगह ले जाकर फेंक दिया गया, ताकि पहचान न हो सके।

    शव की पहचान और गिरफ्तारी.

    घटना की सूचना तब मिली जब एक राहगीर ने कुतापेठ-नागोल इलाके में लावारिस शव पड़ा देखा और इसकी सूचना नागोल पुलिस स्टेशन  को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पहचान की प्रक्रिया शुरू की। बाद में अशोक यादव की पहचान होने के बाद, परिजनों को सूचना दी गई।

    अशोक के भाई पिंटू यादव द्वारा दर्ज कराए गए बयान और आवेदन के आधार पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए पत्नी, दोनों बेटों और जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

    गांव में पसरा मातम, शव का अंतिम संस्कार.

    पोस्टमार्टम के बाद अशोक यादव का शव उनके पैतृक गांव गिरिडीह के पड़रिया  भेजा गया, जहां परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया। पूरे गांव में घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पारिवारिक कलह इस हद तक पहुंच जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था।

    यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक विघटन की तस्वीर है, जिसमें परिवार का विश्वास, संवाद और समझदारी खत्म हो चुकी है। जब घर के अपने ही खून के प्यासे बन जाएं, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी बन जाती है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

  • मोहर्रम और ताजिया की परंपरा: शहादत का प्रतीक, गम और श्रद्धा की मिसाल

    परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    इस्लाम धर्म में मोहर्रम  का महीना एक खास स्थान रखता है। यह इस्लामिक कैलेंडर  का पहला महीना होता है, लेकिन इस महीने की शुरुआत किसी जश्न से नहीं, बल्कि गम और मातम  से होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन  की कर्बला की जंग   में हुई शहादत, जिसे मुस्लिम समुदाय आज भी गहरे दुख के साथ याद करता है।

    मोहर्रम और अशूरा का महत्व.

    मोहर्रम की दसवीं तारीख  को अशूरा कहा जाता है, जो इस महीने का सबसे अहम दिन होता है। इस साल अशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जा रहा है। इसी दिन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों ने यज़ीद की सेना से मुकाबला करते हुए शहादत  दी थी। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए थी। इसलिए मोहर्रम को त्याग और बलिदान का प्रतीक  माना जाता है।

    इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी-ब्याह  या अन्य उत्सव नहीं किए जाते। इसकी जगह मातम, रोजा और दुआ का आयोजन होता है।

    क्या है ताजिया और क्यों निकलता है इसका जुलूस ?

    मोहर्रम के महीने में देशभर में ताजिया का जुलूस  निकाला जाता है, जो अक्सर प्रतीकात्मक रूप से “कर्बला” में जाकर समाप्त होता है। ताजिया  दरअसल एक कलात्मक ढांचा  होता है, जिसे इमाम हुसैन की कब्र (रौज़ा-ए-मुबारक)  का प्रतीक माना जाता है। यह ढांचा बांस, लकड़ी, कागज, स्टील, रंगीन शीशे और कई बार चांदी-सोने की सजावट  से तैयार किया जाता है। इसे घरों, मोहल्लों और इमामबाड़ों में बनाया जाता है, और 10 मोहर्रम को मातमी धुनों और नारे या हुसैनके साथ जुलूस के रूप में निकाला जाता है।

    ताजिया की शुरुआत भारत में कैसे और कब हुई ?

    बहुत कम लोगों को यह पता है कि ताजिया निकालने की परंपरा की शुरुआत भारत  से ही हुई थी। इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं सदी  में बादशाह तैमूरलंग  के समय (801 हिजरी, लगभग 1399 ई.) में भारत में पहला ताजिया तैयार किया गया था। तैमूर शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था और हर साल इमाम हुसैन की कब्र की जियारत (यात्रा) के लिए कर्बला, इराक जाया करता था। लेकिन एक समय वह हृदय रोग से पीड़ित हो गया और लंबी यात्रा करने में असमर्थ हो गया।

    अपने शोक और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए, दरबारियों ने उनके सामने बांस और रंग-बिरंगे कागज  से इमाम हुसैन की मजार की प्रतिकृति  बनाकर पेश की। इस कलाकृति को देख बादशाह बेहद भावुक हो गया और यह परंपरा बन गई। तब से हर साल ताजिया बनाए जाने लगे और यह परंपरा भारत से होते हुए दुनिया भर के शिया मुसलमानों में फैल गई।

    आज ताजिया सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावना है.

    वक्त के साथ ताजिया सिर्फ एक कलात्मक प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और इंसाफ की लड़ाई  की मिसाल बन गया है। रांची ,लखनऊ , भोपाल या कोलकाता—हर शहर में ताजिए का अपना अनूठा स्वरूप होता है, लेकिन भावनाएं एक जैसी होती हैं: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

    मोहर्रम और ताजिए की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, बलिदान और निष्ठा की एक जीवंत कहानी है जो हर साल दुनिया को यह याद दिलाती है कि हक़ के लिए लड़ना और ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, यही इमाम हुसैन की सीख है।

  • पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद के ठिकानों पर ईडी का शिकंजा कसता, कांग्रेस ने कहा- बदले की कार्रवाई

    Edited by: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    रांची/हजारीबाग/बड़कागांव:
    झारखंड की राजनीति एक बार फिर ईडी की दस्तक से गरमा गई है। शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और उनके करीबियों के रांची, हजारीबाग और बड़कागांव  सहित आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन से जुड़े एक पुराने मामले के सिलसिले में की जा रही है, जो कोल ट्रांसपोर्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर से जुड़ी एक विवादित कंपनी से संबंधित है।

    कई ठिकानों पर एक साथ दबिश.

    ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह रांची के किशोरगंज, बड़कागांव और हजारीबाग  में एक साथ कार्रवाई की। रांची में अम्बा प्रसाद के निजी सहायक संजीव कुमार के आवास पर जांच चल रही है। संजीव उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन ईडी की टीम ने जांच जारी रखी। दो वाहनों में पहुंचे अधिकारियों की टीम ने चार लोगों के साथ घर के भीतर तलाशी ली, जबकि छह सशस्त्र सुरक्षाकर्मी बाहर तैनात थे।

    बड़कागांव में पूर्व विधायक के भाई अंकित उर्फ सुमित, चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल, और कथित रूप से उनसे जुड़े बालू कारोबारियों के ठिकानों पर भी ईडी की कार्रवाई हुई। हजारीबाग में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। बड़कागांव में अम्बा प्रसाद के करीबी पंचम कुमार, मनोज दांगी और अन्य सहयोगियों के आवास भी निशाने पर रहे।

    पिछली कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज बने आधार.

    सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2024 में की गई छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम सुराग मिले थे। उस दौरान अम्बा प्रसाद, उनके पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, भाई अंकित राज  समेत कई सहयोगियों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी। उस छापेमारी में 35 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइसेज़, फर्जी बैंक टिकट, हाथ से लिखी रसीदें, और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। माना जा रहा है कि इस बार की कार्रवाई उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच के दायरे में 10 कंपनियां.

    ईडी सूत्रों के अनुसार, अम्बा प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े कम से कम 10 कंपनियां  जांच के दायरे में हैं। ये कंपनियां खनन, भूमि खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। ईडी की टीमें इन सभी संस्थाओं के वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं।

    कांग्रेस ने बताया राजनीति से प्रेरित कार्रवाई.

    ईडी की इस ताजा छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता किशोरनाथ शहदेव  ने इसे चुनावी साजिश करार देते हुए कहा कि अम्बा प्रसाद को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे बिहार चुनावों  में पार्टी की तरफ से प्रभारी (ऑब्जर्वर) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा की सरकार सीबीआई और ईडी को विपक्ष के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि ईडी द्वारा अब तक की गई सभी छापेमारियों में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी बार-बार कार्रवाई कर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है।

    राजनीतिक परिवार, पुराना प्रभाव.

    अम्बा प्रसाद झारखंड की बड़कागांव सीट से 2019 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक  चुनी गई थीं। उनके पिता योगेंद्र साव  और मां निर्मला देवी  भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इस परिवार की इलाके में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है, और अब उनके खिलाफ ईडी की बढ़ती कार्रवाई से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

    अम्बा प्रसाद और उनके परिवार पर प्रवर्तन निदेशालय की नजरें टिकी हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से ईडी ने अभी तक कोई प्रेस बयान नहीं दिया है, लेकिन लगातार हो रही छापेमारियों से संकेत साफ है कि जांच लंबी और गहन हो सकती है। कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रहा है .

  • मुहर्रम को लेकर पुलिस सख्त: डीजे पर पाबंदी, सोशल मीडिया पर खास नजर

    Edited By: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    झारखंड में मोहर्रम पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनका साफ कहना है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सड़क पर हो या सोशल मीडिया पर।

    डीजे बजाने पर सख्त पाबंदी.

    DGP ने स्पष्ट कर दिया है कि मोहर्रम के जुलूस में डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पर्व मातम का होता है, न कि जश्न का। ऐसे में डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जैसा कि पहले रामनवमी के अवसर पर भी किया गया था। अगर किसी ने डीजे का इस्तेमाल किया, तो सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम.

    पुलिस प्रमुख ने सभी जिलों में संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, और वीडियोग्राफी के निर्देश दिए हैं। जुलूस के रूट्स की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मार्ग पर पत्थर या ईंट जैसी चीजें न हों, ताकि किसी तरह के उपद्रव की संभावना को खत्म किया जा सके।

    पुराने उपद्रवियों पर कड़ी नजर.

    DGP ने आदेश दिया है कि पहले से चिन्हित उपद्रवियों पर नजर रखी जाए और उन पर निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने सभी थानों और जिलों को शांति समिति की बैठक आयोजित करने को भी कहा है।

    सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी.

    DGP अनुराग गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई असामाजिक तत्व अफवाह फैलाने की कोशिश करता है, तो तुरंत उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए

    पुलिस बलों के लिए व्यवस्था भी जरूरी.

    सिर्फ सुरक्षा नहीं, पुलिसकर्मियों की सुविधा का भी ख्याल रखा जा रहा है। DGP ने पुलिस बलों के लिए भोजन, आवास और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। साथ ही एंटी-रायट ड्रिल, बॉडी प्रोटेक्टर, और दंगा नियंत्रण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर जिले के एसपी होंगे ज़िम्मेदार.

    DGP ने डायल 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक्टिव मोड में रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो सीधी जिम्मेदारी संबंधित SP की होगी। हर जिले के एसपी को क्षेत्र भ्रमण करने और स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। DGP ने यह भरोसा जताया है कि पूरे झारखंड में मोहर्रम का त्योहार शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न होगा। लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही या उकसावे को लेकर अब प्रशासन कतई माफ करने के मूड में नहीं है। जो नियम तोड़ेगा, उस पर कानून अपना काम करेगा।