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कांग्रेस विधायक दल के नेता के लिए 3 नाम,किसकी खुलेगी किस्मत
रांची:झारखंड में 9 दिसबंर से 12 दिसंबर तक विधानसभा का सत्र बुलाया गया है। इससे पहले सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गया है। सीएम आवास में आज सभी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी विधायक दल की बैठक बुलाई है। वहीं विधानसभा सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस को भी विधायक दल का नेता मिल सकता है।झारखंड में कांग्रेस की राजनीति का केंद्र इन दिनों विधायक दल के नेता का चयन बन गया है। झारखंड विधानसभा सत्र की शुरुआत से पहले प्रदेश कांग्रेस इस अहम पद के लिए अपने नेता की घोषणा कर सकती है। पार्टी ने पहले ही विधायक दल की बैठक कर केंद्रीय नेतृत्व को यह अधिकार सौंप दिया है कि वह नेता का चयन करे। -
राज्यसभा की सीट नंबर 222 और नोटों की गड्डी: सियासी गरिमा पर सवाल ?
NEW DELHI : संसद के शीतकालीन सत्र में हंगामे की गूंज पहले ही तेज थी, लेकिन गुरुवार को राज्यसभा में ऐसा वाकया हुआ जिसने सदन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी कि राज्यसभा की सीट नंबर 222 से 500 रुपये के नोटों की गड्डी बरामद हुई है। सीट, जो वर्तमान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है, अब सियासत के तूफान के केंद्र में है। -
झारखंड: कौन मंत्री बनेगा ? काँग्रेस मे सियासी गहमागहमी
परवेज़ आलम की रिपोर्ट …..
झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में कांग्रेस की सियासी गहमागहमी चरम पर है। सोमवार को दिल्ली मे प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राहुल गांधी से मुलाकात की। चर्चाओं का बाजार गर्म है—कौन मंत्री बनेगा और किसे इंतजार करना पड़ेगा? अब कांग्रेस आलाकमान के पास झारखंड से आए संभावित नामों की सूची है। सूत्रों की मानें, तो शाम तक चार नामों पर मुहर लगने की संभावना है।
कांग्रेस का मंत्रिमंडल—सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर।
झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका खींचा जा रहा है। कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि प्रमंडल और सामाजिक समीकरणों को केंद्र में रखा गया है। हर प्रमंडल से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, जातीय समीकरण को साधते हुए आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, और अगड़ी जाति को बराबर तरजीह मिलेगी।
गुलाम अहमद मीर कहते हैं, “कैबिनेट विस्तार की तिथि तय करना मुख्यमंत्री का अधिकार है। कांग्रेस पूरी तरह तैयार है। जैसे ही तारीख तय होगी, हम अपनी सूची सौंप देंगे।” वहीं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का भी यही कहना है कि विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा।
दिल्ली में फैसले की घड़ी।
झारखंड कांग्रेस की टीम ने आलाकमान से मुलाकात की है । मीर और कमलेश ने मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, और केसी वेणुगोपाल से एक-एक कर भेंट की। इस दौरान विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन का ब्यौरा दिया गया। 16 सीटों पर कांग्रेस की जीत और 14 सीटों पर हार के कारणों की रिपोर्ट भी सौंपी गई।
इंडिया गठबंधन की जीत और कांग्रेस की उम्मीदें।
झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने बहुमत हासिल किया। झामुमो के खाते में 34 सीटें आईं, जबकि कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की। अब कांग्रेस ने 4:1 के फॉर्मूले के तहत चार विधायकों पर एक मंत्री पद की मांग रखी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शपथ तो ले ली है, लेकिन कांग्रेस की नजर अब मंत्री पद पर है। -
हेमंत सोरेन के कैबिनेट विस्तार की डेट तय, नए चेहरों को मिलेगी जगह !
परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……झारखंड में हेमंत सोरेन की नई सरकार के गठन के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें खत्म होती दिख रही हैं। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कैबिनेट शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले तैयार हो जाएगा। कांग्रेस कोटे से मंत्रियों के नाम तय करने का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। -
संगठन में ऊपर से नीचे तक बदलाव की जरूरत:खड़गे
नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट…..
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक ने पार्टी के अंदर एक बड़ा मंथन छेड़ दिया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के तीखे और सटीक बयानों ने नेताओं को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया। इस बैठक में प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खड़गे ने अपनी बात को पांच मुख्य बिंदुओं में समेटा और पार्टी को अनुशासन, बदलाव, और रणनीति में सुधार की नसीहत दी।
खड़गे की 5 बड़ी बातें
1. संगठन में ऊपर से नीचे तक बदलाव की जरूरत
खड़गे ने कहा, “राज्य चुनावों में उम्मीद से कम प्रदर्शन हमारे लिए चुनौती है। पार्टी नेताओं में एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें नुकसान पहुंचा रही है।”
उन्होंने सख्त अनुशासन की मांग करते हुए कहा कि पार्टी को “जमीनी स्तर से लेकर AICC तक बदलाव लाने होंगे।”2. माहौल पक्ष में होना, जीत की गारंटी नहीं
खड़गे ने साफ कहा कि चुनाव का माहौल कांग्रेस के पक्ष में दिखता है, लेकिन सिर्फ इससे जीत तय नहीं होती। “हमें टाइम बाउंड रणनीति बनानी होगी और मतदाता सूचियों की जांच जैसे काम चुनाव से एक साल पहले ही पूरे करने होंगे,” उन्होंने जोड़ा।3. चुनाव रणनीति में सुधार की दरकार
महाराष्ट्र के नतीजों को लेकर खड़गे ने कहा, “MVA के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद विधानसभा के परिणाम चौंकाने वाले हैं। हमें अपनी रणनीति में सुधार करना होगा।”
उन्होंने जोर दिया कि “दुष्प्रचार और गलत सूचना का मुकाबला करने के ठोस तरीके विकसित करने होंगे।”4. सत्ता में आना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस का सत्ता में आना न केवल पार्टी के लिए, बल्कि देश के एजेंडे को लागू करने के लिए भी जरूरी है। उन्होंने विधानसभा चुनाव के खराब प्रदर्शन को लेकर चेताया कि “हमें कड़े कदम उठाने होंगे।”5. मणिपुर से संभल तक गंभीर मुद्दे
खड़गे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि “मणिपुर से लेकर संभल तक कई गंभीर मुद्दे हैं। बीजेपी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है। हमें इन विभाजनकारी ताकतों को हर हाल में हराना होगा।”महाराष्ट्र चुनाव पर कांग्रेस का ऐतराज
कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।कांग्रेस ने इन मुद्दों को उठाया:
वोटर्स की हेराफेरी:
कांग्रेस ने दावा किया कि “जुलाई से नवंबर 2024 के बीच महाराष्ट्र में 47 लाख नए वोटर्स जोड़े गए।” इनमें से अधिकांश 50 विधानसभा सीटों पर जोड़े गए, जहां 47 सीटें सत्ताधारी गठबंधन ने जीतीं।वोटिंग प्रतिशत में संदिग्ध बढ़ोतरी:
“21 नवंबर को शाम 5 बजे तक वोटिंग प्रतिशत 58.22% था, जो रात 11:30 बजे 65.02% हो गया।” कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक घंटे में 76 लाख वोट कैसे डाले गए?खड़गे का संदेश:
खड़गे के इन बयानों और कांग्रेस की आपत्ति से एक बात साफ है—पार्टी अब न तो अनुशासनहीनता बर्दाश्त करेगी, न ही रणनीति में ढील। -
दशकों बाद संसद में गांधी परिवार की त्रिमूर्ति!
परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….
केरल के वायनाड से 52 वर्षीय प्रियंका गांधी वाड्रा की ऐतिहासिक जीत ने लोकसभा में एक नई कहानी लिख दी। दशकों बाद पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य साथ नजर आ रहे हैं। लेकिन प्रियंका का संसद में पदार्पण सिर्फ जीत तक सीमित नहीं था; ये एक राजनीतिक और सांस्कृतिक बयान भी था।
साड़ी, संविधान और इंदिरा की छवि—
प्रियंका जब सफेद साड़ी पर गोल्डन बॉर्डर में संसद भवन पहुंचीं, तो हर निगाह उन पर टिक गई। उनका लुक वायरल हो गया, और लोगों को उनमें देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की झलक नजर आई। चलने का अंदाज, शपथ के दौरान संविधान की किताब थामे हुए उनका संजीदा अंदाज, हर बात इंदिरा की याद दिला गई।
वाड्रा का जवाब, प्रियंका का समय—
इस चर्चा को हवा तब मिली, जब प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने एक इंटरव्यू में इस तुलना पर सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “प्रियंका भले ही इंदिरा गांधी जैसी दिखती हैं, लेकिन वह अपने समय के हिसाब से राजनीति कर रही हैं। तब और अब की राजनीति में बहुत फर्क है।”
‘दूसरी इंदिरा गांधी’ के नारे—
ये तुलना नई नहीं है। कांग्रेस के मंचों पर दूसरी इंदिरा गांधी के नारे लगते रहे हैं। 2019 में दिल्ली में आयोजित प्रियंका के पहले रोड शो में ये नारा पहली बार गूंजा था—
“प्रियंका नहीं आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है!” उस रोड शो में प्रियंका ने अपनी शैली से समर्थकों का दिल जीत लिया था, और आज वायनाड की जीत के बाद उनके समर्थकों का ये विश्वास और भी मजबूत हो गया है। लोकसभा में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अब प्रियंका गांधी वाड्रा का एक साथ होना कांग्रेस के लिए एक संघर्ष और उम्मीद का प्रतीक है। दशकों बाद, गांधी परिवार की यह त्रिमूर्ति भारतीय राजनीति के मंच पर एक नई कहानी लिखने को तैयार है। -
हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
परवेज आलम की रिपोर्ट…..
झारखंड की राजनीति ने रच दिया इतिहास। 2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोरहाबादी के मैदान में ऐसा नज़ारा था, जो शायद दशकों तक याद किया जाएगा।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शाम चार बजे हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हेमंत अब झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री हैं। तीन बार पहले भी इस कुर्सी पर विराजमान हो चुके अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन के बाद, हेमंत का यह चौथा कार्यकाल एक नई कहानी लिखने को तैयार है।
इंडिया गठबंधन की चमक और शपथ का मंच—
जिस तरह से मोरहाबादी के मंच पर इंडिया गठबंधन के नेता जुटे, वो किसी शक्ति प्रदर्शन से कम नहीं था। राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, और यहां तक कि तमिलनाडु से उदयनिधि स्टालिन तक… हर किसी की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया। शिबू सोरेन, जो खुद दिशोम गुरु कहे जाते हैं, अपने बेटे की इस चौथी पारी के गवाह बने।
नतीजों का संदेश—
2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर साबित कर दिया कि झारखंड की जनता का भरोसा उनके साथ है। झामुमो ने 34 सीटों पर कब्जा जमाया, जो इसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। कांग्रेस को 16, आरजेडी को 4, और भाकपा-माले को 2 सीटें मिलीं।
सुरक्षा और उत्सव—
मोरहाबादी मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन माहौल में जोश और जश्न का संगम दिखा। हजारों समर्थकों ने अपने नेता का स्वागत किया। झारखंड का भविष्य नई उम्मीदों से भर चुका है, और इंडिया गठबंधन के लिए यह एक बड़ी जीत का प्रतीक है।
मोरहाबादी के मंच से झारखंड के हर कोने तक एक संदेश गया—यह जीत सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि झारखंड के सपनों को नई दिशा देने की शुरुआत है। हेमंत सोरेन की चौथी पारी कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस शपथ ग्रहण ने झारखंड की राजनीति को एक नई उड़ान जरूर दी है।
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झारखंड की राजनीति में नया पेंच: कांग्रेस की ‘चार विधायकों पर एक मंत्री’
परवेज़ आलम की रिपोर्ट……झारखंड की सत्ता की गोटियां बिछ रही हैं और कांग्रेस ने पुराना पत्ता फेंका है—चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला। 2019 में इस फॉर्मूले ने कांग्रेस को चार मंत्री पद दिलवाए थे, जब उसके पास 16 विधायक थे। हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में तब जेएमएम के 30 विधायक थे, और पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत सात मंत्री पद अपने हिस्से किए थे। आरजेडी को एक मंत्री पद मिला था।