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  • झारखंड में राशन व्यवस्था पर ओटीपी की नई शर्त: तकनीक के जाल में उलझे भूख से जूझते लोग

    By The News Post4U

    चाईबासा/लातेहार – झारखंड के ग्रामीण इलाकों में राशन जैसी बुनियादी जरूरत को हासिल करना अब सिर्फ पात्रता या ज़रूरत की बात नहीं रही। अब इसके लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और उस पर आने वाला ओटीपी यानी ‘वन टाइम पासवर्ड’ जरूरी हो गया है। यह सुनने में एक तकनीकी प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन ज़मीन पर इसके नतीजे भूख, अपमान और असहायता के रूप में सामने आ रहे हैं।

    लातेहार जिले की हमीदा बीबी (39) की कहानी इस व्यवस्था की जमीनी सच्चाई बयां करती है। हमीदा जुलाई 2024 में अपने दो नाबालिग बेटों का नाम राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए जन सेवा केंद्र गई थीं। लेकिन वहां ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी दर्ज करना होगा। हमीदा ने फोन चेक किया, लेकिन कोई संदेश नहीं आया। कुछ देर बाद पता चला – उनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक ही नहीं है।

    बदलते नियम, बिना सूचना.

    यह समस्या अकेली हमीदा की नहीं है। झारखंड की नई पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) गाइडलाइन के तहत अब राशन कार्ड में किसी भी तरह का बदलाव — जैसे सदस्य जोड़ना या हटाना, नाम या उम्र में सुधार — बिना ओटीपी के नहीं हो सकता। पहले तक केवल मुखिया का आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर काफी था, लेकिन अब ओटीपी के बिना सिस्टम आगे नहीं बढ़ता।

    राज्य के अधिकारी दावा करते हैं कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन गांव की महिलाओं और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह बदलाव एक नई दीवार बनकर खड़ा हो गया है।

    “मुखिया हैं, पर मोबाइल नहीं तो कुछ नहीं कर सकते”

    झारखंड के कई हिस्सों में महिलाएं ही घर की मुखिया हैं — यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की एक प्रगतिशील पहल का हिस्सा है। लेकिन जब आधार से जुड़ा मोबाइल ही नहीं है, तो ये महिलाएं सिस्टम में अदृश्य हो जाती हैं।

    सरयू ब्लॉक के चोरहा पंचायत की एक महिला ने बताया कि वह अपनी सास की मृत्यु के बाद घर की मुखिया बनीं, लेकिन महीनों की कोशिश के बाद भी राशन कार्ड में अपना नाम नहीं जुड़वा सकीं। “कई बार प्रखंड और जिला मुख्यालय गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला,” उन्होंने कहा, “अब तो हार मान ली है।”

    तकनीक बनी बाधा, ना कि समाधान.

    आधार और मोबाइल से जुड़ी यह नई अनिवार्यता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक ऐसी तकनीकी बाधा बन गई है, जिसे पार करना कई बार असंभव होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार झारखंड में 10% घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। और जिनके पास मोबाइल है भी, वहां अक्सर नंबर निष्क्रिय होते हैं, या किसी पुरुष रिश्तेदार के नाम पर होते हैं।

    2023 में NSSO के सर्वे के अनुसार, देश में 10 में से 7 गैर-मोबाइल उपयोगकर्ता महिलाएं हैं। ऐसे में ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण की बाध्यता महिलाओं को अपने ही अधिकारों से वंचित कर रही है।

    बिचौलियों का खेल, बढ़ती जेब पर चोट.

    जहां सिस्टम जटिल है, वहां बिचौलियों की आमद तय मानी जाती है। बरहेट जैसे इलाकों में लोगों से आधार या राशन अपडेट कराने के लिए ₹500 से लेकर ₹1,600 तक वसूले गए। यह वे सेवाएं हैं जो सामान्यतः मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए थीं।

    कई लोगों को अपने दस्तावेज अपडेट कराने के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता है, जिससे ना सिर्फ परिवहन खर्च बढ़ता है, बल्कि उस दिन की मजदूरी भी चली जाती है।

    क्या राज्य अपने हकदारों को पहचानता है?

    राशन, सब्सिडी और जन-कल्याण की योजनाएं कोई उपकार नहीं हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ये नागरिकों का कानूनी अधिकार हैं — और इसमें सबसे अहम पात्र हैं महिलाएं और गरीब। लेकिन आधार-ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे तकनीकी बदलावों ने इन हकदारों को सिस्टम से दूर धकेलना शुरू कर दिया है।

    संवेदनशील समाधान की ज़रूरत.

    डिजिटलीकरण अपने आप में समस्या नहीं है — समस्या है उसका एकमुश्त और बिना तैयारी के लागू किया जाना। झारखंड सरकार को चाहिए कि वो:

    • वैकल्पिक प्रक्रिया लागू करे जहां ओटीपी की अनिवार्यता न हो।
    • मोबाइल-आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाए।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आधार केंद्र स्थापित करे।
    • जन-जागरूकता के माध्यम से पात्र लोगों को बदलावों की जानकारी दे।
    • और सबसे जरूरी, महिलाओं की डिजिटल पहुंच को प्राथमिकता के साथ मजबूत किया जाए।

    जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि तकनीकी बदलावों का लाभ समाज के सबसे वंचित हिस्से तक पहुंचे — तब तक डिजिटलीकरण भूख, अपमान और असमानता का दूसरा नाम ही बना रहेगा।

    *लेखक लिबटेक इंडिया से जुड़े हैं, जो कोलेबरेटिव रिसर्च एंड डिसेमिनेशन (CORD) का एक केंद्र है।

  • झारखंड सरकार का यूरोपीय दौरा: प्रवासी भारतीयों से संवाद

    विशेष संवाददाता.

    झारखंड में निवेश को लेकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के दो प्रमुख देशों——के दौरे पर है। इस कूटनीतिक और आर्थिक यात्रा का मकसद है: झारखंड को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाना।

    इस यात्रा के दौरान न केवल राज्य की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया, बल्कि कुछ अहम समझौते और प्रस्तावों की नींव भी रखी गई।

    खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: फुटबॉल कोचिंग के लिए RCD Espanyol का प्रस्ताव.

    स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, विश्वप्रसिद्ध RCD Espanyol फुटबॉल क्लब ने झारखंड सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया। क्लब ने झारखंड में खेल—विशेषकर फुटबॉल—के विकास के लिए सहयोग की इच्छा जताई है। इसमें खासकर फुटबॉल कोचों के प्रशिक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की पेशकश की गई है।

    यह प्रस्ताव बार्सिलोना के विकसित खेल पारिस्थितिकी तंत्र और झारखंड में युवाओं की खेल प्रतिभा को जोड़ने का सेतु बन सकता है। आने वाले समय में यह साझेदारी झारखंड को भारतीय खेल मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।

    व्यापक क्षेत्रों में चर्चा: स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, बायो-फार्मा और अधिक.

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा में कई विविध क्षेत्रों पर संवाद हुआ। इसमें स्टार्टअप मेंटरशिप, क्लीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता, सप्लाई चेन, बायो-फार्मास्यूटिकल्स, खेल विपणन, क्रिकेट टीम ओनरशिप, डीप-टेक बी2बी मार्केटिंग, लीगल, डेंटल साइंस और मेडटेक जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।

    प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में नवाचार आधारित एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने हेतु वैश्विक विशेषज्ञों और कंपनियों से मार्गदर्शन और निवेश का अनुरोध किया ।

    झारखंड में गीगा फैक्ट्री? टेसला ग्रुप A.S. से CM की महत्वपूर्ण बैठक.

    इस यूरोपीय दौरे का सबसे आकर्षक पड़ाव रहा टेसला ग्रुप A.S. (चेकोस्लोवाकिया) के CEO और सह-संस्थापक डुशान लिचार्डस के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात। बातचीत के दौरान टेसला ग्रुप ने झारखंड में एक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए बैटरी भंडारण उत्पादों के असेंबली पर केंद्रित होगी।

    यह प्रस्ताव न केवल झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है, बल्कि इससे राज्य के तकनीकी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।

    प्रवासी भारतीयों से संवाद: संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास.

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने बार्सिलोना में बसे प्रवासी भारतीय व्यवसायियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस संवाद का उद्देश्य था—झारखंड की विकास गाथा से उन्हें जोड़ना और विदेशी धरती पर बसे भारतीय मस्तिष्क को अपनी धरती से जोड़ना।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्पेनिश कंपनियों और निवेशकों के साथ सतत संवाद और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस कड़ी में भविष्य में और बैठकें तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड सरकार की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेश और विकास की ओर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यूरोपीय धरती पर झारखंड की आवाज़ अब सुनाई देने लगी है—चाहे वह खेल हो, तकनीक हो, या उद्योग। आने वाला समय बताएगा कि इन बैठकों का परिणाम धरातल पर किस तरह उतरता है, लेकिन शुरुआत आशाजनक है।

     

  • जेल ब्रेक: सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, 6 कक्षपाल निलंबित

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम

    …….तो आखिर वही हुआ जिसका डर था। एक और जेल ब्रेक, एक और सुरक्षा में सेंध, और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए! रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से फरार PLFI उग्रवादी समीर तिर्की का 24 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस जेल से कैदी इतने आराम से फरार कैसे हो जाते हैं?

    तीन लेयर की सुरक्षा में आखिर सेंध कैसे?

    बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। तीन परतों की सुरक्षा व्यवस्था होने का ढोल पीटा जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि इन दावों के बीच से ही समीर तिर्की चकमा देकर निकल गया! सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि जेल प्रशासन की नाक के नीचे आखिर यह हुआ कैसे? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर कुछ और?

    जेल प्रशासन की घोर लापरवाही, 6 कक्षपाल निलंबित

    हर बार की तरह इस बार भी लापरवाही का ठीकरा जेल प्रशासन पर फूटा है। जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने आनन-फानन में छह कक्षपालों को निलंबित कर दिया है। इनमें बीचा मुण्डा, सतन नायक, सोमन लोहार, राकेश कुमार सिंह, रामजीत महतो और गोपाल सिंह के नाम शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इनकी लापरवाही के चलते समीर तिर्की फरार हो सका। लेकिन क्या सिर्फ इन छह लोगों की गलती है, या फिर इसमें कोई अंदरूनी मिलीभगत भी है?

    जेलर और अधीक्षक का पद खाली, फिर कौन जिम्मेदार?

    अब ज़रा इस जेल की व्यवस्था पर गौर कीजिए। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न तो स्थायी अधीक्षक है और न ही स्थायी जेलर। मतलब यह कि जो लोग वहां तैनात हैं, वे केवल प्रभार में काम कर रहे हैं। तो फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या यह पूरा तंत्र ही ध्वस्त हो चुका है?

    कैदी निकला, कैमरे देखते रहे!

    कैदी के फरार होने का CCTV फुटेज भी सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि समीर तिर्की जेल के मुख्य गेट की ओर बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब मुख्य गेट पर 10 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, तो फिर समीर कैसे बच निकला? कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने जानबूझकर इसे अनदेखा किया? क्या यह एक सुनियोजित जेल ब्रेक था?

    समीर तिर्की: कौन है यह फरार कैदी?

    गुमला का रहने वाला समीर तिर्की कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह पहले पहाड़ी चिता नामक उग्रवादी संगठन से जुड़ा था, फिर जोनल कमांडर परमेश्वर गोप और एरिया कमांडर बसंत तिर्की के साथ कई वारदातों को अंजाम दिया। 2013 में अपहरण और हत्या के मामले में उसे पकड़ा गया था, और 2022 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

    प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली!

    24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। तमाम संभावित ठिकानों पर छापेमारी हो रही है, लेकिन नतीजा शून्य! रांची के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लेकर गुमला स्थित उसके घर तक, हर जगह तलाशी ली जा रही है, मगर कोई सुराग नहीं।

    जेल प्रशासन पर बड़े सवाल

    1. कैसे तीन लेयर की सुरक्षा में सेंध लगी?
    2. कैमरों के सामने कैदी बाहर निकलता रहा, कोई कुछ क्यों नहीं बोला?
    3. स्थायी अधीक्षक और जेलर की पोस्टिंग क्यों नहीं हुई?
    4. क्या यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है?

    इन सवालों के जवाब किसके पास हैं? या फिर यह भी किसी और जेल ब्रेक की तरह धीरे-धीरे भुला दिया जाएगा? प्रशासन मौन है, सरकार मौन है, लेकिन यह मामला मौन नहीं रहेगा।

  • अनुराग गुप्ता बने झारखंड के रेगुलर DGP, सरकार की मुहर!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड को आखिरकार अपना नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है! वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को राज्य सरकार ने रेगुलर डीजीपी के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति दो साल के लिए होगी।

    प्रभारी डीजीपी थे,अब रेगुलर डीजीपी नियुक्त।
    1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता पहले से ही झारखंड के प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें इस पद से हटा दिया था और अजय कुमार सिंह को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया था। लेकिन, 28 नवंबर 2024 को सरकार ने दोबारा उन्हें प्रभारी डीजीपी बना दिया था और अब, सरकार ने उनकी स्थायी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है।

    कब से शुरू होगा कार्यकाल?
    सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि उनके दो साल के कार्यकाल की गिनती कब से होगी। बस इतना कहा गया है कि यह नियुक्ति ‘महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025’ के नियम 10(1) के तहत की गई है, जिसके अनुसार कार्यकाल दो साल का होगा।

    कई अहम जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं।
    अनुराग गुप्ता के करियर की बात करें, तो उन्होंने गढ़वा, गिरिडीह और हजारीबाग में एसपी के रूप में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वे रांची के एसएसपी भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे सीआईडी और एसीबी के डीजी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

    एक मजबूत प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पहचान।
    साल 2022 में उन्हें डीजी रैंक में प्रमोट कर डीजी ट्रेनिंग का पद सौंपा गया था। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को उन्हें झारखंड का प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया था। अब, उनकी स्थायी नियुक्ति के साथ झारखंड को एक अनुभवी और तेजतर्रार डीजीपी मिल गया है, जिनसे राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।

  • झारखंड : 5 लाख का कैशलेस इलाज, 10 लाख गंभीर बीमारियों के लिए, जानिए किसको मिलेगा

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को  रांची में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य कर्मियों और पेंशनरों के लिए बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत, राज्य कर्मियों और उनके आश्रितों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।

    1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख पेंशनरों को होगा फायदा।
    कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बैठक के बाद बताया कि इस योजना के तहत राज्य के 1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ मिलेगा। योजना में शामिल होने वाले कर्मियों के वेतन से हर महीने 500 रुपये काटे जाएंगे, जबकि पेंशनभोगियों को सालाना 6,000 रुपये जमा करने होंगे। योजना का कवरेज इतना ही नहीं रुकता। इसमें अखिल भारतीय सेवाओं के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, विधानसभा के पूर्व सदस्य, और राज्य के विभिन्न बोर्ड-निगमों के कर्मी भी अपनी इच्छा से जुड़ सकते हैं।

    टाटा एआईजी से हुआ करार।
    इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ करार किया है। 150 करोड़ रुपये आकस्मिकता निधि से और 50 करोड़ रुपये बफर स्टॉक के रूप में आरोग्य सोसायटी के ट्रस्ट में रखे जाएंगे।

    हालांकि, यह योजना पिछले साल 31 जुलाई 2023 को घोषित की गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका। अब, संशोधन के बाद, यह योजना कर्मियों और पेंशनरों के लिए वरदान साबित होगी।

    दुमका से उड़ान सेवा का रास्ता साफ।
    कैबिनेट ने दुमका हवाई अड्डे से उड़ान सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंडियन एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ संचार, नेविगेशन और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सेवाओं के लिए एमओयू के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है। इसके बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ के तहत दुमका हवाई अड्डे से नियमित उड़ानें शुरू होंगी।

    हॉस्पिटलों में नए पद और शिक्षा क्षेत्र में सुधार।
    राज्य के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में सीनियर मैनेजर, फाइनेंस मैनेजर, और आईटी एग्जीक्यूटिव जैसे नए पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा, मिडिल स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा के लिए ज्ञानोदय योजना के तहत 94.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

    सरकार के कदमों से उम्मीदें बढ़ीं।
    झारखंड सरकार के ये निर्णय न केवल स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को मजबूत करेंगे बल्कि राज्य के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

  • आज होगी कैबिनेट बैठक, स्वास्थ्य बीमा योजना के नए प्रस्ताव पर होगी चर्चा

    झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक आज, स्वास्थ्य बीमा योजना में संशोधन पर होगा विचार

     

    पेंशनरों और उनके परिवारों को होगा लाभ
    सरकार पहले ही राज्यकर्मियों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का निर्णय ले चुकी थी। अब इस योजना में जरूरी सुधार कर इसे दोबारा पेश किया जा रहा है। यह योजना झारखंड के करीब 1.5 लाख पेंशनरों और उनके परिवारों को भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदान करेगी।

    योजना के तहत कर्मचारियों को प्रति वर्ष 6000 रुपये प्रीमियम देना होगा, और प्रत्येक लाभार्थी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलेगा। इसके लिए झारखंड सरकार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ करार किया है। अगर इलाज का खर्च 5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो अतिरिक्त भुगतान बफर स्टॉक से किया जाएगा।

    सरकार ने इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए 150 करोड़ रुपये की आकस्मिक निधि तय की है। इसमें 100 करोड़ रुपये योजना के संचालन पर खर्च होंगे, जबकि 50 करोड़ रुपये आरोग्य सोसाइटी के बफर स्टॉक में सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त खर्च को पूरा किया जा सके।

    अब तक 2 लाख कर्मचारियों ने कराया निबंधन
    मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब तक करीब 2 लाख राज्यकर्मियों और पेंशनरों ने निबंधन करवाया है। सरकार का प्रयास है कि इस योजना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि सभी सरकारी कर्मचारी और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

  • 2025 : नई उम्मीदों का झारखंड, मिलेगी विकास की बड़ी सौगात

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड की ज़मीन पर विकास का नया सूरज उगने वाला है। नए साल में इस राज्य को न सिर्फ रोज़गार की नई रोशनी मिलेगी, बल्कि बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक का कायाकल्प होने जा रहा है।

    1 लाख से ज्यादा नौकरियां, झारखंड के युवाओं के लिए सुनहरा मौका!
    सरकार ने ठान लिया है—2025 वो साल होगा जब झारखंड के हर घर में रोज़गार का सपना सच होगा। एक लाख से ज़्यादा सरकारी पदों पर नियुक्तियां होंगी। शिक्षकों के 60,000 पद, प्रधानाध्यापकों के 15,000, पुलिस में 10,000 और भाषा शिक्षकों के 10,000 पद भरे जाएंगे। तैयारी ज़ोरों पर है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव—कोडरमा में मेडिकल कॉलेज, ICT लैब्स का जाल!
    कोडरमा और रांची में नए मेडिकल कॉलेज बनने जा रहे हैं। रांची में 1,000 बिस्तरों का अस्पताल बनेगा, जो RIMS का बोझ हल्का करेगा। साथ ही, 1,317 स्कूलों में ICT लैब्स तैयार हो रही हैं, ताकि झारखंड के बच्चों को डिजिटल युग से जोड़ा जा सके।

    दामोदर साफ़ होगा, किसानों को सिंचाई का तोहफा
    518 करोड़ की लागत से दामोदर नदी को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। वहीं, रानेश्वर-मसलिया सिंचाई परियोजना से 55,000 एकड़ जमीन को पानी मिलेगा। झारखंड के किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं।

    पर्यटन में भी धमाल—धुर्वा और गेतलसूद डैम में वाटर स्पोर्ट्स
    2025 में एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स शुरू होने वाला है। पर्यटन विभाग ने इसकी तैयारियां तेज़ कर दी हैं।

    झारखंड मेफ्लाईओवर का जाल !
    रातू रोड और सिरमटोली में बन रहे फ्लाईओवर शहर को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाएंगे। सिरमटोली एलिवेटेड कॉरिडोर तो फरवरी में ही तैयार हो जाएगा।

    नए बंगले, स्मार्ट मीटर और पेंशनरों को इलाज की सुविधा
    मंत्रियों और विधायकों को स्मार्ट सिटी में नए बंगले मिलेंगे। पेंशनर्स और उनके परिजनों को असीमित इलाज की सुविधा दी जाएगी।

    बोकारो में नई उड़ान, स्टील प्लांट का विस्तार!
    बोकारो हवाई अड्डे से 2025 में उड़ान शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा, 15,000 करोड़ के निवेश से स्टील प्लांट का विस्तार होगा, जिससे उत्पादन क्षमता 7.15 MTPA तक बढ़ जाएगी।

    साहेबगंज का मल्टी-मॉडल टर्मिनल—सपना पूरा होने को तैयार!
    साहेबगंज में गंगा किनारे बना मल्टी-मॉडल टर्मिनल अब सिर्फ महीनों की दूरी पर है। 6,500 करोड़ की इस परियोजना से झारखंड और बिहार में औद्योगिक विकास का नया इतिहास लिखा जाएगा। यहां से 30 लाख टन माल ढुलाई होगी और भारत-नेपाल व्यापार को रफ्तार मिलेगी।

    आख़िरी बात!
    झारखंड 2025 में विकास का वो चेहरा दिखाएगा, जिसकी तस्वीर आज तक धुंधली थी। यह नया झारखंड होगा—रोज़गार से लबरेज़, शिक्षा से रोशन, और बुनियादी ढांचे से मजबूत। विकास का सफर बस शुरू होने को  है!

  • हजारीबाग: एसडीओ की पत्नी अनिता की मौत,FIR

    हजारीबाग : हजारीबाग सदर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अशोक कुमार की पत्नी अनिता कुमारी की मौत हो गई है। अनिता करीब 65% तक जल चुकी थीं, और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दर्दनाक घटना ने परिवार और प्रशासन, दोनों को हिला कर रख दिया है।

    एफआईआर में एसडीओ समेत परिवार के चार लोग नामजद. 
    अनिता के भाई राजू कुमार गुप्ता ने लोहसिंघना थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। एफआईआर में एसडीओ अशोक कुमार, उनके पिता दुर्योधन साव, छोटे भाई शिवनंदन कुमार, और उनकी पत्नी रिंकू देवी को आरोपी बनाया गया है।

    राजू का आरोप है कि उनकी बहन अनिता ने कई बार कहा था कि उनके पति का किसी और महिला से अवैध संबंध है। यही वजह दोनों के बीच लगातार विवाद का कारण बनती थी। एक बार दोनों परिवारों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई थी। उस वक्त एसडीओ ने कथित तौर पर कहा था, “आगे से शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।”

    ‘कहां जाना है जाओ, मैं एसडीओ हूं!’
    राजू के मुताबिक, इस घटना से पहले भी एसडीओ और उनके परिवार की ओर से धमकियां दी गई थीं। अशोक कुमार ने कथित तौर पर कहा था, “जहां जाना है जाओ, कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं अनुमंडल पदाधिकारी हूं। तुम सबको बर्बाद कर दूंगा।”

    सुबह की घटना, भाई ने फोन पर दी सूचना. 
    राजू ने बताया कि 26 दिसंबर की सुबह 8:45 बजे एसडीओ के भाई शिवनंदन का फोन आया। उन्होंने केवल इतना कहा कि अनिता जल गई है और फोन काट दिया। इसके बाद राजू ने दोबारा कॉल किया, तो पता चला कि अनिता को हजारीबाग के अस्पताल से बोकारो के बीजीएच रेफर किया जा रहा है। घटना कब और कैसे हुई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।जब परिवार बोकारो पहुंचा, तो अनिता को बुरी तरह झुलसा हुआ पाया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल भेजा गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    एसडीओ का पक्ष: ‘खुद पर तेल डालकर लगाई आग. ‘
    एसडीओ अशोक कुमार ने इस पूरे मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा, “गुरुवार की सुबह मेरी पत्नी मॉर्निंग वॉक के लिए तैयार हो रही थीं। घर में रंग-रोगन का काम चल रहा है। मैंने उन्हें बाहर जाने से रोका, तो वह नाराज हो गईं। फिर गुस्से में खुद पर तेल डालकर आग लगा ली।”एसडीओ का दावा है कि उन्हें बचाने की कोशिश में उनके हाथ भी जल गए।

    मौत पर उठ रहे सवाल.
    इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह वास्तव में आत्महत्या का मामला है, जैसा कि एसडीओ दावा कर रहे हैं? या फिर यह घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का परिणाम है? पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

    हजारीबाग की यह घटना बताती है कि परिवार और समाज के बीच अधिकार और जिम्मेदारी का संतुलन कितना अहम है।

  • गुजरात में झारखंड की मासूम पर हैवानियत,मौत : क्या इंसाफ सिर्फ नारों में सिमट गया है?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट …..

    गुजरात से लेकर झारखंड तक दिल दहला देने वाली कहानी:
    गुजरात के भरूच में 10 साल की मासूम बच्ची के साथ जो हुआ, वह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक विफलता का प्रमाण है। झारखंड से मजदूरी के लिए गए परिवार की इस बच्ची ने वडोदरा के अस्पताल में सात दिनों तक संघर्ष किया। लेकिन जब सिस्टम ने जवाब दे दिया, तो मासूम की सांसे भी थम गईं।  डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित किया, तो यह मौत केवल उसके शरीर की नहीं थी, बल्कि इंसानियत और न्याय की भी मौत थी।
    झारखंड सरकार की कोशिशें:
    रांची में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस घटना पर दुःख जताया। उन्होंने कहा, “यह समय मुश्किल है, लेकिन राज्य सरकार बच्ची के परिवार के साथ खड़ी है। हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय मिले।”
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बच्ची के इलाज के लिए हर संभव मदद की बात कही थी, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
    कैसे हुआ यह अपराध?
    भरूच के झगड़िया इलाके में 36 साल के एक मजदूर ने इस मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची के निजी अंगों को लोहे की रॉड से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। माता-पिता जब काम पर गए थे, तब यह घिनौना कृत्य हुआ। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
    न्याय का वादा, लेकिन देरी क्यों?
    दीपिका पांडेय सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह प्रक्रिया तेज होगी या फिर यह मामला भी लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहेगा?
    गुजरात में गरमाई राजनीति:
    इस घटना ने राजनीति को भी हवा दे दी है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर निशाना साधा है। सवाल उठ रहे हैं कि बंगाल की घटनाओं पर आवाज उठाने वाली भाजपा, गुजरात में हुई इस बर्बरता पर चुप क्यों है? कांग्रेस नेता अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने इसे मानवीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि गुजरात कांग्रेस के प्रतिनिधि और झारखंड सरकार की ओर से पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुख साझा करना चाहते हैं, आर्थिक सहायता देना चाहते हैं और बच्ची का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना चाहते हैं। मैं गुजरात सरकार और प्रशासन से अपील करती हूं कि वे हमारे प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने दें। तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रमुख इसुदान गढ़वी ने सीएम से पूछा है कि क्या वे गुजरात की निर्भया के लिए धरने पर बैठेंगे। कोलकाता रेप में लेडी डॉक्टर को इंसाफ दिलाने के लिए भूपेंद्र पटेल अहमदाबाद में धरने पर बैठे थे।
    क्या सिस्टम से भरोसा टूट रहा है?
    मामला सिर्फ इस बच्ची का नहीं है। यह सवाल उठता है कि मजदूर परिवारों की बेटियां, जो अपने सपनों के साथ बड़े शहरों की चौखट तक पहुंचती हैं, क्या उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं है?
    पुलिस की कार्यवाही और समाज की जिम्मेदारी:
    आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन क्या यह गिरफ्तारी इस बच्ची के लिए इंसाफ का रास्ता साफ करेगी? या फिर यह घटना भी आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएगी?
    मेरा सवाल:
    क्या आज हम अपनी बेटियों से यह कह सकते हैं कि वे सुरक्षित हैं? और अगर नहीं, तो क्यों?

    क्योंकि जब तक हमारी बेटियां डर के साये में जीती रहेंगी, तब तक विकास और प्रगति के दावे खोखले ही रहेंगे।

  • झारखंड सरकार का कर्मचारियों के लिए नए साल का तोहफा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए नई सौगात का ऐलान किया गया। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। अब यह भत्ता 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू होगी।

    पेंशनभोगियों को भी राहत। 
    केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में भी तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार का यह कदम महंगाई के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में राहत भरा है।

    मेरू योजना के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय को मिला 99.56 करोड़। 
    बैठक में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के लिए 99.56 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस राशि का उपयोग मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (MERU) योजना के तहत किया जाएगा।

    कैग रिपोर्ट और अन्य अहम फैसले। 
    कैबिनेट ने आगामी विधानसभा सत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को पेश करने की स्वीकृति दी। यह रिपोर्ट राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रबंधन स्थिति पर केंद्रित होगी।

    डॉ. तुलसी महतो को प्रोन्नति। 
    झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में रिम्स के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. तुलसी महतो को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने का निर्णय भी लिया गया।

    अन्य प्रमुख फैसले:

    1. झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के सत्रावसान को मंजूरी।
    2. राज्यपाल के अभिभाषण को घटनोत्तर स्वीकृति।
    3. खनन पदाधिकारियों को सेवा शर्तों में छूट।
    4. कैग की वित्तीय वर्ष 2023-24 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने की अनुमति।

    तीसरी कैबिनेट बैठक, दस अहम फैसले। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी सरकार की यह तीसरी कैबिनेट बैठक थी, जिसमें कुलपर सहमति दी गई। राज्य सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र को राहत और प्रगति दोनों मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का यह कदम विकास और जनकल्याण की दिशा में एक और बड़ा प्रयास माना जा रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेनने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुये सभी झारखंडवासियों कोनए साल की बधाई भी दी ।