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  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।

  • कांग्रेस ने सीपी सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की, कहा- “मानसिक कुंठा के शिकार हैं विधायक”

    रांची ब्यूरो।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीपी सिंह के मुसलमानों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने झारखंड की सियासत में तूफान ला दिया है। कांग्रेस ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल समाज को बांटने वाला बल्कि राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सीपी सिंह की विधान सभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

    प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सीपी सिंह मानसिक कुंठा के शिकार हो गए हैं। भाजपा में वे न तो प्रदेश अध्यक्ष बन पाए, न ही विधायक दल के नेता। यही कारण है कि वे निराशा में ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जो समाज को गहरे तक बांट सकती है।”

    शहजादा अनवर ने भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, “क्या भाजपा अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं जैसे शहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, जफर इस्लाम और यहां तक कि बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान को भी ‘जिहादी’ समझती है? जो मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाई, क्या वे भी भाजपा की नजर में जिहादी थे?”

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पाल मुजनी, प्रवक्ता सोन शांति, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एम तौसीफ और गजेंद्र सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस बीच कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर सीपी सिंह के बयान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह बयान सत्य पाए जाते हैं, तो विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाए। शमशेर आलम ने कहा, “एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होकर सीपी सिंह ने समाज को उस दिशा में धकेलने का काम किया है, जहां न केवल सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरे देश की एकता भी खतरे में पड़ सकती है।”

    कांग्रेस का कहना है कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों को सख्त संदेश दिया जा सके।

  • मंत्री हफीजुल हसन ने दी सफाई , भाजपा बर्खास्तगी की मांग पर अड़ी  

    झारखंड की सियासी फिजा इन दिनों एक बयान से राजनीति गरमाई हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन का एक कथित बयान— “शरीयत संविधान से ऊपर है” — राजनीतिक हलकों में बीते चार दिनों से हलचल मचा रखा  है। विपक्षी दल भाजपा ने इस बयान को लेकर मंत्री पर सीधा हमला बोला है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।

    लेकिन क्या मंत्री ने सचमुच ऐसा कहा था? या फिर बयान को संदर्भ से काट कर, अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार परोसा गया? राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं, लेकिन जब बात संविधान और धार्मिक मूल्यों की हो, तो सावधानी और संवेदनशीलता दोनों की जरूरत होती है।

    भाजपा का हमला: ‘संविधान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कथन को भारतीय संविधान का अपमान बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि हसन का यह बयान सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा है और झारखंड जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह की सोच की कोई जगह नहीं हो सकती। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से साफ शब्दों में मांग की कि हसन को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

    मंत्री की सफाई: ‘बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’

    इस पूरे विवाद के बीच मंत्री हफीजुल हसन ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी और कहा कि उनका बयान गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “मैं बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान को सर्वोपरि मानता हूं। मेरी राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, समावेशिता और बराबरी के सिद्धांतों पर आधारित रही है। मैं ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करता जो देश के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध हो।”

    हसन ने आगे जोड़ा, “संविधान ही हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मेरा विश्वास उसी संविधान पर है, जिसने हमें यह आजादी और अधिकार दिए हैं।”

    भाजपा नेताओं पर पलटवार: ‘नफरत की राजनीति बंद हो’

    हसन ने अपनी सफाई में भाजपा नेताओं पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “देश के कई केंद्रीय मंत्री मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ बातें करते आए हैं— किसी ने ‘गोली मारो’ के नारे लगवाए, तो किसी ने देश छोड़ने की धमकी दी। क्या वह संविधान की रक्षा है या संविधान से खिलवाड़?”

    उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म को लेकर प्रेम होना स्वाभाविक है, लेकिन यह प्रेम दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं बन जाना चाहिए। “हम सबको अपने-अपने धर्म से लगाव हो सकता है, लेकिन उस लगाव में दूसरों के धर्म का अपमान न हो, यही संविधान की आत्मा है,” उन्होंने कहा।

    “संवैधानिक मूल्यों से नहीं हटूंगा”: हसन का संकल्प.

    बयान के अंत में हसन ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेंगे। “मैं झारखंड के हर समुदाय के लिए न्याय, समानता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। संविधान मेरी राजनीति की धुरी है और वही मेरी सोच की दिशा तय करता है।”

    यह विवाद केवल एक बयान का नहीं है। यह एक बड़े विमर्श का हिस्सा है—धर्म और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का। जब राजनीतिक दल इस संतुलन को अपने-अपने नजरिए से तोड़ते-मरोड़ते हैं, तो सवाल उठता है: क्या वाकई चिंता संविधान की है या उसका इस्तेमाल सियासी लाभ के लिए हो रहा है?

     

  • जेल की सलाख़ें से निकल कर हेमंत सोरेन मज़बूत नेता बन कर उभरे

    हेमंत सोरेन के जीवन पर एक नज़र.

    परवेज़ आलम

    रांची, झारखंड : “क्या एक नेता का जेल जाना, उसकी छवि को तोड़ता है या निखारता है? क्या संघर्ष की आग में तपकर ही असली नेता बनता है? और क्या झारखंड अब एक नए नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, या पुराने नामों का ही नया संस्करण देख रहा है?”

    ये सवाल तब ज़्यादा ज़रूरी हो जाते हैं, जब एक नेता जेल से बाहर आते ही न सिर्फ़ फिर से मुख्यमंत्री बनता है, बल्कि अब पूरे संगठन की कमान भी संभाल लेता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हेमंत सोरेन की, जो अब झारखंड मुक्ति मोर्चा के नए केंद्रीय अध्यक्ष हैं। एक दौर में छात्र मोर्चा से राजनीति की शुरुआत करने वाला नौजवान, आज पार्टी का सर्वोच्च चेहरा बन चुका है।

    “हेमंत नहीं रुके, थमे नहीं, झुके नहीं…”

    जेल गए, लेकिन लड़ाई नहीं छोड़ी। 5 महीने के राजनीतिक वनवास के बाद जब हेमंत बाहर आए, तो सिर्फ़ एक नेता नहीं, एक प्रतीक बनकर उभरे — सत्ता के दमन के ख़िलाफ़, अपने अधिकारों के लिए लड़ते झारखंडी स्वाभिमान के प्रतीक।

    हेमंत सोरेन की कहानी कोई सामान्य राजनीतिक यात्रा नहीं है। यह कहानी है नेमरा के एक किसान परिवार से उठे उस बेटे की, जिसने राजनीतिक विरोधियों से लेकर सत्ता तक, सबका सामना किया।

    और अब, 2025 की गर्मियों में — शिबू सोरेन के 38 साल लंबे अध्यक्षीय कार्यकाल का अंत कर, बेटे हेमंत ने वह कुर्सी संभाल ली है, जो कभी उनके पिता के लिए भी संघर्षों की तपिश में गढ़ी गई थी।

    जनता का सवाल — “जेल से नेतृत्व तक, क्या यही लोकतंत्र की परिभाषा है?”

    झारखंड की जनता जानना चाहती है — क्या खनन घोटाले में जेल जाना, राजनीतिक साज़िश थी या सच्चाई?

    लेकिन सच्चाई ये है कि हेमंत जब जेल से बाहर आए, तो पार्टी और ज़्यादा संगठित दिखी। कल्पना सोरेन, उनकी पत्नी, सामने आईं — एक नेता के रूप में, एक रणनीतिकार के रूप में। ये कोई साधारण वापसी नहीं थी, ये एक जोड़ी की ताक़त थी — जिसने सत्ता को फिर से अपनी मुट्ठी में किया।

    संघर्ष की जड़ें — नेमरा से बरहेट तक का रास्ता आसान नहीं था

    नेमरा गांव का एक बच्चा, जो सरकारी स्कूल में पढ़ा, पटना में इंटर तक पहुंचा, और बीआईटी मेसरा जैसे संस्थान में दाखिला लेकर भी राजनीति की पुकार पर पढ़ाई छोड़ दी — आज उसी का नाम झारखंड की हर पंचायत में गूंज रहा है।

    2005 में जब पहली बार चुनाव लड़े, तो हार मिली। खुद के ही दल के सीनियर नेता ने हराया। लेकिन यही वो समय था जब हेमंत ने सीखा — राजनीति में सबसे ज़रूरी चीज़ क्या है? धैर्य।

    2009 में भाई दुर्गा सोरेन की मौत ने हेमंत को परिवार और राजनीति — दोनों का उत्तराधिकारी बना दिया।

    सियासत का सवाल — “क्या JMM अब हेमंत की पार्टी है?”

    जब दिशोम गुरु यानी शिबू सोरेन ने हेमंत के नाम का प्रस्ताव रखा, तो हज़ारों कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया — “हेमंत ही भविष्य है!”

    JMM की केंद्रीय समिति में अब 289 सदस्य हैं। लेकिन सवाल ये भी है — क्या ये सिर्फ़ एक खानदान की विरासत है, या जनआंदोलन की नई शक्ल?

    झारखंड की जनता का सवाल — “कितना बदलेगा हेमंत का झारखंड?”

    2019 में उन्होंने भाजपा को सत्ता से बेदखल किया, 2024 में जेल से आकर फिर मुख्यमंत्री बने। अब पार्टी की कमान भी उन्हीं के हाथ में है। लेकिन क्या इससे झारखंड की ज़मीन पर बदलाव आएगा?

    क्या आदिवासियों की ज़मीन बचेगी? क्या युवाओं को रोज़गार मिलेगा? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नई नीति बनेगी?

    या फिर, ये भी वही राजनीति निकलेगी — चेहरे बदलते रहेंगे, हालात वही रहेंगे?

     

  • हेमंत सोरेन बने झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष, शिबू सोरेन ने सौंपी विरासत

    परवेज़ आलम.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। 2025 में हुए पार्टी के 13वें महाधिवेशन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सर्वसम्मति से झामुमो का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह निर्णय पार्टी के लिए एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, जहां 38 वर्षों तक अध्यक्ष रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने पुत्र को पार्टी की बागडोर सौंपी।

    महाधिवेशन का आयोजन रांची के खेलगांव में हुआ, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और प्रतिनिधि मौजूद थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता नलिन सोरेन ने शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक के रूप में प्रस्तावित किया, जिसका समर्थन मथुरा महतो ने किया। इसके बाद शिबू सोरेन ने मंच से हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष घोषित किया। घोषणा के तुरंत बाद, मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियों और नारों से नए अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।

    पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की घोषणा. 

    महाधिवेशन में झामुमो की नई केंद्रीय समिति की भी घोषणा की गई, जिसमें कुल 284 सदस्य शामिल किए गए। जिलावार रूप से साहिबगंज, दुमका और रांची सहित विभिन्न जिलों से सदस्यों को चुना गया। प्रमुख नामों में खुद हेमंत सोरेन, पंकज मिश्रा, शिबू सोरेन, नलिन सोरेन, बसंत सोरेन, मधु मंसूरी और महुआ माजी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

    हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा. 

    हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्ष, धैर्य और रणनीतिक दूरदर्शिता से भरा रहा है। 2003 में छात्र मोर्चा से शुरुआत करने वाले हेमंत पहली बार 2009 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष दुमका से विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज की। 2010 में वे उपमुख्यमंत्री बने और 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने पार्टी को शानदार सफलता दिलाई, जिसके कारण वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री बने।

    हालांकि उनका सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2024 में उन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया, जिससे उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वे फिर से चुनावी मैदान में उतरे और झामुमो के नेतृत्व में INDIA गठबंधन को रिकॉर्ड 56 सीटें दिलाकर सत्ता में वापसी की।

    कल्पना सोरेन की भूमिका. 

    इस कठिन दौर में हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब हेमंत जेल में थे, तब कल्पना ने पार्टी के लिए स्टार प्रचारक के रूप में प्रचार किया। उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं को संगठित किया, बल्कि महिला मतदाताओं में भी झामुमो के लिए समर्थन जुटाया। उनके समर्पण और संगठन क्षमता ने हेमंत को जेल से बाहर आने के बाद एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने में मदद की।

    झामुमो का भविष्य: राष्ट्रीय विस्तार की योजना. 

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत सोरेन ने पार्टी के विस्तार की योजनाओं की घोषणा की। उनका लक्ष्य झारखंड के बाहर, विशेषकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में झामुमो को मजबूत करना है। उनका मानना है कि झामुमो सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जिसे राष्ट्रीय मंच पर ले जाने की जिम्मेदारी अब उनकी है।

    नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव. 

    शिबू सोरेन ने 1972 में झामुमो की स्थापना की थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और झारखंड राज्य की मांग को लेकर ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। अब यह विरासत हेमंत सोरेन के हाथों में है, जो इसे आधुनिक दौर की राजनीति में नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    हेमंत सोरेन का नेतृत्व केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि वैचारिक रूप से भी पार्टी को नई दिशा देगा। उन्होंने अपने पहले दो कार्यकालों में जनहितकारी योजनाएं लागू की, जैसे “अबुआ आवास योजना”, महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और आरक्षण नीति में बदलाव। इन पहलों ने उन्हें जनता के बीच एक जननेता के रूप में स्थापित किया।

    हेमंत सोरेन का केंद्रीय अध्यक्ष बनना न केवल झामुमो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि झारखंड की राजनीति में स्थिरता और निरंतरता का संकेत भी है। शिबू सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हेमंत एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—पार्टी की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर झामुमो को मजबूती प्रदान करना।

  • भोगनाडीह में गूंजा वीर सिदो-कान्हू का जयघोष, शामिल हुये सीएम

    रांची : साहिबगंज जिले के ऐतिहासिक गांव भोगनाडीह की फिज़ाओं में एक बार फिर शहीद सिदो-कान्हू के बलिदान की गूंज सुनाई दी। वीरता, संघर्ष और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक अमर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  शुक्रवार  को उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने भावुक होकर क्रांतिकारियों के योगदान को नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने इस शुभ अवसर पर कई विकास योजनाओं का उद्घाटन भी किया, जिससे क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने सिदो-कान्हू के वंशजों से मिलकर उन्हें सम्मानित किया और कहा, “यह धरती सिर्फ शहीदों की नहीं, बल्कि हमारी पहचान की भी है। सिदो-कान्हू जैसे महानायक हमें न सिर्फ इतिहास की याद दिलाते हैं, बल्कि वर्तमान को दिशा भी देते हैं।”

    धरोहर का प्रतीक बने सिदो-कान्हू

    इतिहासकार बताते हैं कि 11 अप्रैल 1815 को सिदो मुर्मू का जन्म भोगनाडीह की पावन भूमि पर हुआ था। उनके छोटे भाई कान्हू मुर्मू के साथ मिलकर उन्होंने 1855 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया — एक ऐसा संघर्ष जो आज भी आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक बना हुआ है।

    हर वर्ष 11 अप्रैल को मनाई जाने वाली यह जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी अध्याय की पुनः स्मृति होती है। इस दिन को ‘छठीहार महा’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होकर वीरों के संघर्ष को श्रद्धांजलि देते हैं।

    देश-विदेश से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    भोगनाडीह में मनाया जाने वाला यह पर्व सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम से लेकर पड़ोसी देश नेपाल से भी संताल समाज के लोग यहाँ पहुंचते हैं। क्रांति की इस भूमि – पंचकठिया में परिक्रमा करते हैं और मांझी थान व जाहेर थान में पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों को स्मरण करते हैं।

    पूरे इलाके में गुरुवार रात से ही श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक गीतों की मिठास और हजारों लोगों की उपस्थिति ने इस पर्व को एक सांस्कृतिक महासंगम बना दिया।

     

  • खेलगांव बनेगा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का केंद्र- मंत्री सुदिव्य कुमार

    झारखंड की खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के खेल मंत्री सुदिव्य कुमार ने शुक्रवार को झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSSPS) के संचालन, खेलगांव के अपग्रेडेशन और प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने बैठक में दो टूक कहा कि खेलगांव केवल झारखंड की ही नहीं, बल्कि देश की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे विश्वस्तरीय मानकों पर बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि खेलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्थायी आयोजन स्थल बनाया जाए। आगामी 2025 सैफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तैयारियों के संदर्भ में उन्होने मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम का निरीक्षण कर मौजूदा अवसंरचना और सुविधाओं का मूल्यांकन भी किया। बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता है। मसलन, राज्य सरकार अतिथि प्रतिभागियों, दर्शकों एवं मेजबान प्रतिभागियों को उच्चकोटि का अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सपना है कि झारखंड में एक ऐसा खेल विश्वविद्यालय स्थापित हो, जो न केवल राज्य के युवाओं को बल्कि देश और विदेश के छात्रों को खेल शिक्षा के विभिन्न कोर्सों में अध्ययन का अवसर दे।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस दिशा में शुरुआती गति अपेक्षित नहीं रही है, जिसपर चिंता व्यक्त की गई।

    बैठक में मंत्री ने CCL के CMD से विशेष रूप से आग्रह किया कि कोल इंडिया लिमिटेड और CCL मिलकर इस दिशा में ठोस और त्वरित पहल करें, ताकि खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस पर CCL प्रमुख ने आश्वस्त किया कि खेलगांव के जीर्णोद्धार और खेल अधोसंरचना सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, और कोल इंडिया से समन्वय स्थापित कर जल्द ही कार्य योजना प्रस्तुत की जाएगी।

    JUIDCO के साथ परियोजना समीक्षा बैठक: शहरी विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश.

    शुक्रवार को ही  मंत्री सुदिव्य कुमार ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी () के अधिकारियों के साथ एक अलग बैठक की, जिसमें शहरी क्षेत्रों में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें स्मार्ट सिटी, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण, ड्रेनेज व्यवस्था और शहरी आवास योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल थीं।

    मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आम शहरी नागरिकों को शीघ्र सुविधा मिल सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी कार्य मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विकासपरक दृष्टिकोण के अनुरूप हों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

    सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है – एक सशक्त, स्मार्ट और खेल-प्रेरित झारखंड का निर्माण।

  • झारखंड की सियासत में बड़ा उलटफेर,ताला मरांडी ने छोड़ी भाजपा,जेएमएम मे शामिल

    परवेज़ आलम. 

    झारखंड की सियासत में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और 44 वर्षों बाद एक बार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में वापसी की।

    ताला मरांडी ने अपना इस्तीफा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को भेजा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि “मैं भाजपा का एक समर्पित सदस्य रहा हूं, पार्टी द्वारा दिए गए सभी अवसरों के लिए आभार प्रकट करता हूं। किंतु वर्तमान परिस्थितियों, व्यक्तिगत कारणों और वैचारिक मतभेदों के कारण मैंने यह निर्णय गहन विचार के बाद लिया है। इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं है।”

    हेमंत सोरेन की मौजूदगी में हुए शामिल। 

    भाजपा से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद ताला मरांडी ने भोगनाडीह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झामुमो की सदस्यता ग्रहण की। हेमंत सोरेन ने उन्हें पार्टी का पारंपरिक पट्टा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा, विधायक कल्पना सोरेन, हेमलाल मुर्मू, धनंजय सोरेन और मोहम्मद ताजुद्दीन जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    राजनीतिक सफर: झामुमो से शुरू, कांग्रेस और भाजपा के रास्तों से फिर लौटे घर.

    करीब 63 वर्षीय ताला मरांडी की राजनीतिक यात्रा काफी लंबी रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989-90 में एक झामुमो कार्यकर्ता के रूप में की थी। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए और 1995 व 2000 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके।

    साल 2003 में भाजपा में शामिल होने के बाद 2005 में पहली बार बोरियो विधानसभा सीट से विधायक बने। उन्होंने झामुमो के कद्दावर नेता लोबिन हेम्ब्रम को हराया। 2014 में उन्होंने एक बार फिर लोबिन को हराकर सीट पर कब्जा जमाया और पार्टी ने उन्हें 2016 में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि, कुछ महीनों बाद ही उन्हें पद से हटा दिया गया।

    2019 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने आजसू पार्टी का दामन थामा, लेकिन बोरियो से चुनाव हार गए। 2020 के बाद पुनः भाजपा में लौटे और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजमहल सीट से टिकट दिया, लेकिन वे विजय हांसदा से 1.5 लाख से अधिक मतों से हार गए।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि में बढ़ रही थी नाराजगी. 

    ताला मरांडी की नाराजगी की झलक 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले ही दिखाई देने लगी थी। पार्टी ने बोरियो सीट से एक बार फिर लोबिन हेम्ब्रम को टिकट दे दिया, जिससे वे बेहद असंतुष्ट थे। वहीं उनके बेटों ने पहले ही झामुमो की सदस्यता ले ली थी, जिससे यह संकेत मिल गया था कि परिवार का झुकाव अब झामुमो की ओर है। भाजपा से मोहभंग और लगातार उपेक्षा के चलते अब ताला मरांडी ने झामुमो की ओर वापसी कर ली है, जिसे वह “घर वापसी” कह रहे हैं।

    राजनीति में नई करवट या पुरानी राह की वापसी?

    ताला मरांडी की झामुमो में वापसी महज एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक सांकेतिक बदलाव की शुरुआत भी हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी यह घर वापसी झामुमो के लिए कोई बड़ा सियासी लाभ लेकर आएगी या फिर यह सिर्फ एक व्यक्तिगत यात्रा की पूर्णता भर है।

     

  • जमशेदपुर: सैनिक की पिटाई पर DGP का कडा ऐक्शन, पूरा थाना सस्पेंड

    सैनिक और उनके भाई की पिटाई और जेल भेजने के मामले में एक्शन ,

    जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र में 14 मार्च को बागबेड़ा डीबी रोड निवासी सैनिक सूरज राय और उनके चचेरे भाई विजय राय के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घटना को लेकर पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद अब पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुये थाना आठ पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित कर दिया है ।

    एसएसपी ने की कार्रवाई

    इस गंभीर मामले में जांच के बाद जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) किशोर कौशल ने शुक्रवार को जुगसलाई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार दास सहित कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पांच दारोगा – दीपक कुमार महतो, तापेश्वर बैठा, शैलेंद्र कुमार नायक, कुमार सुमित, मंटू कुमार – और दो कांस्टेबल – शैलेश कुमार सिंह और शंकर कुमार – शामिल हैं।

    सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से गोलमुरी पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

    आईजी ने की थी जांच, रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी गई

    घटना के बाद मामला राज्य पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। डीजीपी के निर्देश पर रांची प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अखिलेश कुमार झा ने जमशेदपुर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के बाद उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी, जिसके आधार पर उक्त निलंबन की कार्रवाई की गई।

    पूर्व सैनिकों का आंदोलन, रक्षा मंत्रालय तक पहुंचा मामला

    घटना के बाद पूर्व सैनिकों में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने इस कृत्य को सैनिक के सम्मान का अपमान बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जुगसलाई थाना और उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। पूर्व सैनिकों का आरोप था कि सैनिक की गिरफ्तारी के बाद सेना की स्थानीय यूनिट या जम्मू यूनिट को नियमानुसार कोई सूचना नहीं दी गई, जो रक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मामला रक्षा मंत्रालय और आर्मी मुख्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद आर्मी के अधिकारी रांची से जमशेदपुर पहुंचे और मामले की जानकारी ली।

    घटना की असलियत आई सामने: निजी चालक के विवाद से शुरू हुआ मामला

    आईजी द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरज राय और विजय राय के साथ-साथ नीरज रजक नामक एक युवक की भी बिना किसी ठोस कारण के पिटाई की गई थी। दरअसल, घटना की शुरुआत थाना के निजी चालक अभिषेक उर्फ छोटू बिल्ला के बस्ती के एक युवक से हुए विवाद से हुई थी। यह युवक विजय राय का दोस्त था।

    इस विवाद की सूचना मिलने पर चालक ने अपने नजदीकी संबंधों का लाभ उठाते हुए जुगसलाई थाना प्रभारी को पूरे घटनाक्रम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और सूरज राय व विजय राय को थाने बुलवाया गया। थाने में चालक और सूरज राय के बीच बहस हुई, जिसके बाद सूरज, विजय और नीरज के साथ मारपीट की गई और आनन-फानन में सूरज व विजय को जेल भेज दिया गया।

    एक और विवाद: होली के दिन की घटना भी जुड़ी

    जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना से पहले कपाली ओपी के पुलिसकर्मी सोनू कुमार होली के दिन अपनी पत्नी के साथ बागबेड़ा एमई स्कूल रोड होते हुए नया बस्ती पुल से गुजर रहे थे, जहां कुछ युवक शराब पी रहे थे। सोनू कुमार की गाड़ी को रास्ते में रोक दिया गया, जिसकी सूचना उन्होंने जुगसलाई थाना प्रभारी को दी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद निजी चालक ने मौके पर पहुंचकर नीरज रजक के साथ मारपीट की।

    न्याय की ओर बढ़ता कदम

    इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा की गई मनमानी और नियमों की अवहेलना सामने आने के बाद जबरदस्त जनदबाव बना। विरोध के बाद सूरज राय और विजय राय को अदालत से जमानत मिल गई। अब पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून के रखवालों को भी नियमों का पालन करना होगा।

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कल करेंगे राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्घाटन

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार को विधानसभा के कांफ्रेंस हॉल में राज्यकर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत करेंगे। इस योजना के तहत लाभार्थियों और उनके आश्रितों को हर साल 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाएगा। विशेष रूप से, दिव्यांग आश्रितों को आजीवन इस योजना का लाभ मिलेगा।

    गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए लाभार्थियों को अतिरिक्त 5 लाख रुपये की सुविधा दी जाएगी, जिससे कुल बीमा कवरेज 10 लाख रुपये तक हो जाएगा। यदि चिकित्सा खर्च बीमा राशि से अधिक होता है, तो इसका भुगतान कॉरपस फंड के माध्यम से किया जाएगा।

    इसके अलावा, विशेष परिस्थितियों में राज्यकर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को गंभीर दुर्घटना या मरणासन्न स्थिति में उन्नत चिकित्सा संस्थानों में रेफर किए जाने पर एयर एंबुलेंस और हवाई यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।