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  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: 8 नक्सली ढेर

    एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा मारा गया

    परवेज़ आलम.

    बोकारो/गिरिडीह: झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को सोमवार को बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम है प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का — जो भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़-ओडिशा के नक्सली नेटवर्क का संचालन करता था। इस पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था ।

    मुठभेड़ रविवार रात से शुरू हुई, जब खुफिया सूत्रों से सुरक्षाबलों को नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली। इलाके को घेरते हुए तड़के ऑपरेशन शुरू हुआ, और भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने आठ नक्सलियों को ढेर कर दिया। फरार नक्सलियों की तलाश में इलाके में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा कौन था?

    धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी, माओवादी सर्किट में “विवेक दा”, “करण दा”, “फुचना” और “नागो मांझी” जैसे नामों से जाना जाता था। उसने बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ाव बना लिया था और सालों में वह संगठन का रणनीतिक दिमाग बन गया।

    वह न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली बेल्ट में सक्रिय था। गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के लुगू व झुमरा पहाड़ उसके प्रभाव क्षेत्र थे। सिर्फ गिरिडीह में ही उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

    रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार

    विवेक दा नक्सलियों के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सैन्य रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार था। उसके दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक थे। उसके साथ 50 से ज्यादा प्रशिक्षित नक्सली थे, जिनमें महिला माओवादी भी शामिल थीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में उसे पारसनाथ क्षेत्र की कमान दी गई थी, ताकि वहां पुनः नक्सली गतिविधियों को सक्रिय किया जा सके।

    पत्नी भी थी माओवादी नेता, इलाज के दौरान हुई थी मौत.

    विवेक की पत्नी जया मांझी भी माओवादी संगठन में महिला विंग की प्रमुख सदस्य थी। 25 लाख की इनामी जया को गिरिडीह पुलिस ने जुलाई 2024 में धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था, जहां वह फर्जी नाम से गॉल ब्लैडर कैंसर का इलाज करवा रही थी। इलाज के दौरान 21 सितंबर 2024 को रांची के रिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

    माओवादियों को गहरा झटका.

    इस मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में अरविंद यादव और साहेब राम मांझी भी शामिल थे, जो संगठन के पुराने और प्रभावशाली सदस्य थे। विवेक दा की मौत को सुरक्षाबलों के लिए न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मार गिराया गया है। इससे गिरिडीह-बोकारो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की कमर टूट गई है।

    लुगू और पारसनाथ: नक्सलियों का सुरक्षित अड्डा अब खतरे में.

    लुगू पहाड़ और पारसनाथ लंबे समय से नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऑपरेशनों के चलते माओवादी इन इलाकों से पीछे हटे थे। लेकिन हालिया मुठभेड़ से संकेत मिलता है कि नक्सली दोबारा इन्हीं क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना चाहते थे।

    पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इन इलाकों में सघन अभियान जारी रहेगा ताकि बचे-खुचे माओवादी पूरी तरह खत्म किए जा सकें।

    नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम.

    प्रयाग मांझी की मौत को माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। उसकी रणनीतिक पकड़, राज्य के कई जिलों में असर और नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह झारखंड के नक्सल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए माओवादियों की गिरफ्तारी और संगठन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ज़मीनी स्तर पर ऑपरेशन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

  • रिश्वत लेते दारोगा रंगे हाथ गिरफ्तार !

    एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची में कोतवाली थाना के दारोगा ऋषिकांत को 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। दारोगा पर आरोप था कि वे एक व्यक्ति का जब्त मोबाइल छुड़ाने के बदले घूस मांग रहे थे।

    क्या है पूरा मामला?

    रांची के कोतवाली थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसका एक महंगा मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। केस की जांच कर रहे दारोगा ऋषिकांत ने पीड़ित से मोबाइल वापस देने के लिए 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

    पीड़ित के भाई को यह नागवार गुजरा और उसने सीधा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलते ही हरकत में आई एसीबी

    पीड़ित की शिकायत पर एसीबी ने तुरंत मामले की जांच शुरू की। जब दारोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए, तो ACB ने जाल बिछाया।

    शिकायतकर्ता को ACB द्वारा पहले से निशान लगाए गए 5,000 रुपये के साथ दारोगा के पास भेजा गया। जैसे ही दारोगा ने पैसे लिए, वहां पहले से घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

    अब होगी बड़ी कार्रवाई!

    फिलहाल एसीबी की टीम दारोगा से सघन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं।

  • झारखंड : मैट्रिक पेपर लीक मामला: डीजीपी की बड़ी कार्रवाई,  दोषियों की होगी जल्द गिरफ्तारी

    झारखंड में मैट्रिक परीक्षा के पेपर लीक मामले ने तूल पकड़ लिया है। पूरे राज्य में इसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार को डीजीपी अनुराग गुप्ता ने पुलिस मुख्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उच्च अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में कोडरमा और गढ़वा जिले के जांच अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।

    जांच की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस

    डीजीपी ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) से परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया समझने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर लीक कहां से हुआ। साथ ही बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं, जिससे इस पूरे षड्यंत्र के मुख्य साजिशकर्ता को बेनकाब किया जा सके।

    पुलिस ने तेज की कार्रवाई, डिजिटल उपकरणों की जांच जारी

    बैठक में डीजीपी ने जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए समयबद्ध तरीके से मामले की तह तक पहुंचा जाए। पुलिस दोषियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए कमर कस चुकी है।

    जैक पेपर लीक का अब तक नहीं मिला कोई सुराग!

    हालांकि, पुलिस अब तक पेपर लीक के असली स्रोत तक नहीं पहुंच पाई है। अब तक की जांच में सिर्फ वे लोग पकड़े गए हैं, जिन्होंने लीक प्रश्नपत्र को इंटरनेट मीडिया पर वायरल किया था। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे लगातार पूछताछ जारी है।

    पुलिस वायरल प्रश्नपत्र के बारकोड से उसके स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी है। कोडरमा जिला प्रशासन ने अपनी जांच के बाद JAC को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कहा गया है कि पेपर कोडरमा से लीक नहीं हुआ है।

    संदिग्धों से हो रही पूछताछ, अफवाहों पर न दें ध्यान

    इधर, पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। इस बीच मंगलवार को होने वाली सामाजिक विज्ञान की परीक्षा को लेकर भी अफवाहों का दौर चल रहा है। प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और परीक्षा की तैयारियों पर फोकस करें।

    डीजीपी की बैठक में कौन-कौन थे शामिल?

    इस अहम बैठक में आइजी सीआईडी असीम विक्रांत मिंज, डीआइजी हजारीबाग संजीव कुमार, डीआइजी पलामू वाई.एस. रमेश, गढ़वा और कोडरमा के एसपी भी मौजूद थे। सभी अधिकारियों ने मिलकर यह सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जाए।

    अब देखना यह होगा कि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में कब तक सफलता हासिल करती है और असली गुनहगार कब तक कानून की गिरफ्त में आते हैं।

  • Giridih: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मासिक अपराध सेमिनार आयोजित

    गिरिडीह:

    12 फरवरी 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार में मासिक अपराध सेमिनार  का आयोजन किया गया। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक गिरिडीह ने लंबित मामलों की समीक्षा की और उनके त्वरित निष्पादन के निर्देश दिए।

    इसके साथ ही, अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित एंटी-क्राइम चेकिंग के निर्देश दिए गए। महिला अपराधों की जांच को प्रभावी बनाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं को बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत प्रशिक्षण देने की बात कही गई।

    लंबित वारंट और कुर्की मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर दिया गया। साथ ही, E-Sakshya ऐप में सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों की घटनास्थल और गवाह के बयान को 24 घंटे के भीतर अपलोड करने का निर्देश दिया गया।

    सीएमपीएस के अंतर्गत गवाहों को निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर गवाही देने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, IGOT Karmayogi ऐप के उपयोग की जानकारी साझा की गई।

    डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और नाटकीय प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया।

    अंत में, आगामी शब-ए-बारात पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

  • रांची में नई आपातकालीन मोचन प्रणाली शुरू, एक बटन दबाते ही मिलेगी मदद

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक नई आपातकालीन मोचन प्रणाली की शुरुआत की गई है, जिससे नागरिक किसी भी दुर्घटना या अपराध की सूचना महज एक बटन दबाकर दे सकेंगे। इस पहल की जानकारी एक अधिकारी ने सोमवार को दी।

    महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे ‘आपातकालीन कॉल बॉक्स’

    ‘रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन’ द्वारा शहर के प्रमुख चौराहों पर अत्याधुनिक संचार प्रणाली से लैस ‘आपातकालीन कॉल बॉक्स’ स्थापित किए गए हैं। इन बॉक्सों को पीले रंग में रंगा गया है और इनमें एक प्रमुख लाल बटन लगा हुआ है।

    बिना मोबाइल के सीधे मदद का विकल्प

    एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अब लोग आपात स्थिति में बिना मोबाइल फोन या किसी नंबर को याद किए बिना भी सीधे सरकारी एजेंसियों से संपर्क कर सकते हैं।

    आपातकाल में तुरंत सहायता

    विज्ञप्ति में बताया गया कि यदि कोई दुर्घटना या अपराध घटित होता है, तो व्यक्ति लाल बटन दबाकर सीधे ‘कमांड कंट्रोल सेंटर’ से जुड़ सकता है। इसके बाद, पुलिस और संबंधित एजेंसियां तुरंत सहायता के लिए मौके पर पहुंच जाएंगी। इस सुविधा से रांची के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

    50 महत्वपूर्ण स्थानों पर हुई स्थापना

    इस नई प्रणाली के तहत कांके रिंग रोड, सहजानंद चौक, शनि मंदिर चौक, हमरू चौक, अरगोड़ा चौक और सुजाता चौक सहित कुल 50 प्रमुख चौराहों पर कॉल बॉक्स लगाए गए हैं। इससे शहर के लोग किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन तक अपनी बात सीधे पहुंचा सकेंगे, जिससे अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

  • IPS संजय आनंद लाठकर को मिली नई जिम्मेदार परमाणु ऊर्जा विभाग देंगे योगदान

    1995 बैच के झारखंड कैडर के आईपीएस अधिकारी संजय आनंद लाठकर को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत परमाणु ऊर्जा विभाग में आईजी (सुरक्षा) के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने स्वीकृति दे दी है। यह नियुक्ति उनकी पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी और 30 सितंबर 2028 तक या अगले आदेशों तक, जो भी पहले हो, दो वर्ष के लिए लागू रहेगी। इस दौरान उनका वेतन मैट्रिक्स स्तर 14 से अस्थायी रूप से स्तर 15 तक बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में, संजय लाठकर झारखंड पुलिस में एडीजी (अभियान) के पद पर कार्यरत हैं।

  • डिजिटल अरेस्ट का शिकार होते पढ़े-लिखे लोग, युवती के साथ हुआ 24 घंटे का साइबर टॉर्चर

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……………

    हर दिन मोबाइल पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के तहत डिजिटल अरेस्ट को लेकर जागरूकता कॉलर ट्यून सुनाई देती है। अखबारों और विभिन्न कार्यक्रमों में भी इसके बारे में चर्चा होती रहती है। बावजूद इसके, पढ़े-लिखे लोग भी साइबर अपराधियों के जाल में फंसते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देवघर में सामने आया, जहां पीजी तक पढ़ाई कर चुकी एक युवती को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया गया।

    कैसे हुआ साइबर क्राइम?

    शुक्रवार को देवघर के विलियम्स टाउन इलाके की एक युवती को ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर 24 घंटे तक कैद रखा। अपराधी उसे लगातार मानसिक यातनाएं देते रहे और हर उस निर्देश का पालन करवाया, जो उन्होंने दिया। इस दौरान युवती सोई, खाई, पी और यहां तक कि अपने पिता से बात कराकर बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी साझा कर दी।

    सौभाग्य से, वह ठगी से बच गई, लेकिन जब वह पुलिस थाने शिकायत दर्ज कराने पहुंची, तो उसका डर उसके कांपते हाथों और सहमे हुए चेहरे पर साफ झलक रहा था।

    “तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज है” – एक फोन कॉल जिसने जिंदगी बदल दी!

    घटना 6 फरवरी की है, जब युवती की सामान्य दिनचर्या चल रही थी। तभी अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि “तुम्हारे खिलाफ सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने का केस दर्ज हुआ है!”

    जब युवती ने यह कहकर इनकार किया कि “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया,” तो कॉलर ने उसे एक सीनियर अधिकारी से बात करवाई।

    इसके बाद…

    🔹 फोन पर ही एक ‘फर्जी अरेस्ट वारंट‘ भेज दिया गया।
    🔹 वीडियो कॉल पर युवती को कैद कर लिया गया।
    🔹 कहा गया कि ‘तुम्हारे घर की निगरानी की जा रही है, बाहर मत निकलना!‘
    🔹 डराने के लिए वर्दी में फोटो भी दिखाया गया।
    🔹 “अगर किसी को बताया, तो पूरे परिवार की जान खतरे में पड़ जाएगी” – धमकी दी गई।

    24 घंटे तक साइबर टॉर्चर – पिता तक को झांसे में लिया!

    गुरुवार से शुक्रवार तक युवती पूरी तरह ठगों के जाल में फंसी रही। इस दौरान उसने किसी से संपर्क करने की हिम्मत नहीं की। जब सुबह उसने बड़ी मुश्किल से अपने पिता से बात करने की गुहार लगाई, तो अपराधियों ने पिता को भी अपने जाल में फंसा लिया।

    पिता से एक बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी ले ली गईं। लेकिन इस बीच युवती के भाई को इस घटना की जानकारी हो गई। उसने अपने दोस्त को युवती के घर भेजा, जिसने किसी तरह समझा-बुझाकर युवती को साइबर थाना जाने के लिए तैयार किया।

    अगर युवती समय रहते पुलिस के पास नहीं पहुंचती, तो वह गलत कदम उठा सकती थी।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट?

    👉 डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में मान्य नहीं है।
    👉 यह साइबर क्राइम का नया तरीका है।
    👉 अपराधी सोशल मीडिया प्रोफाइल से जानकारी चुराते हैं और फिर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
    👉 गिरफ्तारी का डर दिखाकर वीडियो कॉल के जरिए ‘घर में नजरबंद‘ कर देते हैं।
    👉 बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन, सीबीआई ऑफिस जैसी तस्वीरें दिखाकर पीड़ित को भ्रमित करते हैं।
    👉 किसी ऐप को डाउनलोड कराकर या डिजिटल फॉर्म भरवाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

    कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?

    ✔️ अज्ञात नंबरों से आए कॉल पर सतर्क रहें।
    ✔️ किसी भी फर्जी अरेस्ट वारंट या केस के नाम पर डरें नहीं।
    ✔️ अगर कोई आपको डराकर बैंक डिटेल्स मांग रहा है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
    ✔️ सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, फोटो और नंबर शेयर न करें।
    ✔️ अगर कोई वीडियो कॉल पर आपको ‘कैद‘ कर रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें।

    डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना ही सुरक्षा है!

    देवघर की यह घटना सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि सबक है कि साइबर ठग कितने शातिर हो सकते हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इन अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सतर्क रहें, जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस की मदद लें!