द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क
गिरिडीह : केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए संविधान संशोधन बिल ने झारखंड की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। इसी कड़ी में रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गिरिडीह शहर के टावर चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार का पुतला दहन किया।
इस बिल में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी मामले में 30 दिन तक जेल में रहता है तो उसे स्वतः अपने पद से हट जाना होगा। झामुमो ने इसे लोकतंत्र और जनता के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि यह कानून विपक्षी दलों को कमजोर करने और उनकी आवाज़ दबाने की साजिश है।
प्रदर्शन का माहौल.
टावर चौक का माहौल विरोधी नारों से गूंज उठा। “केंद्र सरकार होश में आओ”, “लोकतंत्र की हत्या बंद करो” और “झारखंड विरोधी बिल वापस लो” जैसे नारे लगातार लगाए जा रहे थे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, युवा और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वे सब एक स्वर में केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने और तानाशाही थोपने का आरोप लगाते रहे।
नेताओं के तीखे आरोप,
प्रदर्शन के दौरान झामुमो नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार इस बिल के जरिये खासतौर पर झारखंड की सत्तारूढ़ सरकार को निशाना बना रही है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में चुने हुए प्रतिनिधि जनता की आवाज़ होते हैं, लेकिन इस कानून के जरिए उन्हें डराने-धमकाने और बेअसर करने की कोशिश हो रही है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि यह बिल वापस नहीं लिया गया तो राज्यभर में और भी बड़े आंदोलन होंगे।
जमुआ, बेंगाबाद और डुमरी से भी जुटे कार्यकर्ता
गिरिडीह के साथ-साथ जमुआ, बेंगाबाद और डुमरी क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने साफ कहा कि आने वाले दिनों में पूरे राज्य में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि जनता को बताया जा सके कि केंद्र सरकार किस तरह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है।
विरोध की आहट और आगामी रणनीति.
झामुमो नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन की धार और तेज की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे इस कानून का विरोध करें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करें।
नेता और कार्यकर्ता मौजूद.
पुतला दहन और विरोध कार्यक्रम में महालाल सोरेन, केदार हाज़रा, अजीत कुमार पप्पू, शहनवाज अंसारी, दिलीप मंडल, प्रणव वर्मा, कोलेश्वर सोरेन, नुनूराम किस्कू, दिलीप रजक, विजय सिंह, राकेश रॉकी, हलधर राय, चाँद रशीद, चांदमल मरांडी, प्रधान मुर्मू, सुमित कुमार, राकेश रंजन, ओम प्रकाश वर्मा, भैरव वर्मा, अभय सिंह, शिवम आजाद, मो. मज़ीद, इम्तियाज़ अख़री, नारायण यादव, मो. हसनैन, मो. आबिद, अशोक राम, किसुन सोरेन, अनवर अंसारी, राकेश सिंह टुनन्ना, लोकनाथ सहाय, बाबूराम हाँसदा, मो. अकील सोनू, महावीर मुर्मू, बिरजू मरांडी, दीपक पांडेय, विवेक सिन्हा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इस गरमाए माहौल के बीच झामुमो ने साफ चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन बिल को वापस नहीं लिया, तो जनता के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
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संविधान संशोधन बिल के विरोध में झामुमो का गरजता प्रदर्शन, गिरिडीह टावर चौक पर पुतला दहन.
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एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क
रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।
सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.
बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.
जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।
अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.
बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

सुरक्षा और धमकी का मुद्दा
बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.
इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।
एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।
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झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया
शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।
सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।
इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।
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जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।
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आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।
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जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।
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प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।
सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

विधानसभा अध्यक्ष का बयान.
विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।
अनुपूरक बजट पेश.
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।
गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.
सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।
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उपराष्ट्रपति चुनाव : झामुमो ने खोला पत्ता, इंडिया गठबंधन उम्मीदवार को देगा समर्थन
जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी हैंइंडिया गठबंधन के उम्मीदवार.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क
रांची : आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में सक्रिय हलचल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) के उम्मीदवार और पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करेगी। यह घोषणा झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को प्रेस से बातचीत में की।
झामुमो का रुख और तर्क.
प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो की राजनीति हमेशा से संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित रही है। इसी सोच और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के साथ खड़ी होगी।

उम्मीदवारों की तस्वीर.
- इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) → पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
- एनडीए (NDA) → बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को चुनावी मैदान में उतारा है।
झामुमो के समर्थन का महत्व.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में झामुमो का समर्थन इंडिया गठबंधन के लिए बेहद अहम है।
- झारखंड की राजनीति में झामुमो की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है।
- वर्तमान में झामुमो राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का मुख्य घटक है।
- पार्टी का समर्थन न केवल संख्या बल बल्कि राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रकार, झामुमो का यह कदम झारखंड के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इंडिया गठबंधन की एकजुटता और रणनीति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। वहीं यह चुनाव अब दो धुरंधर उम्मीदवारों — बी. सुदर्शन रेड्डी और सी. पी. राधाकृष्णन — के बीच सीधी टक्कर का रूप ले चुका है।
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झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 22 से 28 अगस्त तक
शिबू सोरेन के निधन के बाद दोबारा तय हुआ कार्यक्रम.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क
रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र, जो दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के प्रणेता शिबू सोरेन के निधन के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, अब नए कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित होगा। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
इस संबंध में निर्णय विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रस्ताव पर लिया। नए कार्यक्रम के अनुसार सत्र में चार कार्य दिवस होंगे। हालांकि सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर सत्र की अवधि 28 अगस्त के बाद भी बढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
मानसून सत्र का संशोधित कार्यक्रम
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22 अगस्त (शुक्रवार): 4 अगस्त को निर्धारित कार्य पूरे किए जाएंगे, प्रश्नकाल को छोड़कर। इस दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश होगा। साथ ही शोक प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे।
- 25 अगस्त (सोमवार): प्रश्नकाल, अनुपूरक बजट पर सामान्य चर्चा, मतदान और विनियोग विधेयक का पारण किया जाएगा।
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26 अगस्त (मंगलवार): प्रश्नकाल, राजकीय विधेयकों की प्रस्तुति और अन्य शासकीय कार्य होंगे।
- 28 अगस्त (गुरुवार): प्रश्नकाल और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा, लेकिन केवल उन प्रस्तावों पर जिनकी सूचना 23 जुलाई तक दी गई है।

क्यों हुआ था स्थगित?
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र मूल रूप से 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक निर्धारित था। लेकिन 4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के जननायक शिबू सोरेन के निधन के कारण पूरे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाद में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यह आग्रह किया था कि शेष बचे महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः अनुपूरक सत्र आयोजित किया जाए।इस प्रकार, अब यह अनुपूरक सत्र न केवल राज्य के वित्तीय कार्यों को पूरा करने का अवसर बनेगा बल्कि गुरुजी शिबू सोरेन के योगदान को याद करने और उनके निधन पर शोक प्रस्ताव पारित करने का भी मंच होगा।

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झारखंड: डीजीपी अनुराग गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम राहत
बाबूलाल मारंडी की याचिका खारिज.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क
नई दिल्ली/रांची : झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

बाबूलाल मरांडी की याचिका.
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक अवमानना याचिका दायर कर गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती दी थी। मरांडी का तर्क था कि यह नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुप्ता को पद देने के लिए UPSC द्वारा सुझाए गए पैनल में शामिल अधिकारी को अनुचित तरीके से हटा दिया गया।
राज्य सरकार का पक्ष.

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि डीजीपी की नियुक्ति राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है और अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार का उल्लंघन या अवमानना नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला.
सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मरांडी की अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि गुप्ता की नियुक्ति में अवमानना जैसी कोई स्थिति नहीं बनी है। इस निर्णय से अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली और उनकी नियुक्ति को अदालत की वैधानिक मान्यता प्राप्त हो गई।
नियुक्ति पर उठे सवाल.
अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल को 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाले थे। राज्य सरकार ने उनकी सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन सूत्रों के अनुसार केंद्र ने इसे ठुकरा दिया। इसके बावजूद झारखंड सरकार ने उन्हें डीजीपी नियुक्त कर दिया। इससे पहले भी उनकी “एड-हॉक नियुक्ति” को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत की “अवमानना याचिका” और “जनहित याचिका (PIL)” का इस्तेमाल राजनीतिक संघर्ष सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा:
“राजनीतिक लड़ाइयाँ जनता के सामने लड़ी जानी चाहिए। अगर किसी नियुक्ति पर आपत्ति है, तो इसके लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का दरवाज़ा खटखटाइए। लेकिन अदालत की अवमानना का सहारा लेकर राजनीतिक स्कोर सेटल करना उचित नहीं है।”PIL पर कोर्ट का रुख
कोर्ट ने साफ कहा कि—
“PIL का उद्देश्य यह है कि लोकहित में कोई भी नागरिक अदालत तक पहुँच सके, लेकिन इसे व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों को साधने का औज़ार नहीं बनाया जा सकता।” -
शिबू सोरेन के संस्कार भोज की तैयारियां पूरी, देशभर से लाखों लोगों और दिग्गज नेताओं की होगी मौजूदगी
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
रामगढ़/नेमरा: झारखंड की राजनीति के आधारस्तंभ, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में आज आयोजित होने वाले संस्कार भोज की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गुरुजी की स्मृति में होने वाले इस आयोजन को ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसमें देशभर से चार से पाँच लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है।बाबा रामदेव, सांसद पप्पू यादव श्राद्ध भोज में शामिल होने उनके नेमरा गांव पहुंच चुके हैं।

विशाल स्तर की तैयारियां.
- आयोजन स्थल तक आसान पहुँच के लिए गोला चौक से नेमरा तक 25 किलोमीटर लंबी नई सड़क का निर्माण कराया गया है।
- इस मार्ग के दोनों ओर गुरुजी के बड़े-बड़े कटआउट और पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे पूरा इलाका श्रद्धा और सम्मान के माहौल से भर गया है।
- सड़क किनारे 4000 स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और बिजली बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए 200 से अधिक जनरेटर लगाए गए हैं।
- कार्यक्रम स्थल के लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघर तैयार किए गए हैं। हर पंडाल में हजारों लोग एक साथ बैठकर भोजन कर सकेंगे।

भोजन और व्यंजन व्यवस्था.
श्राद्ध भोज को लेकर भोजन की भी भव्य तैयारी की गई है।
- 300 से अधिक चूल्हों पर 12 से अधिक प्रकार के व्यंजन पकाए जाएंगे।
- पंडालों को शिबू सोरेन की तस्वीरों से सजाया गया है, ताकि लोग भोजन के साथ-साथ गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
- प्रत्येक पंडाल में एसी और कूलर की व्यवस्था है ताकि गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिले।
- विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा।

वीआईपी और सुरक्षा व्यवस्था.
इस बड़े आयोजन में कई राष्ट्रीय नेता, केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- चार हेलीपैड बनाए गए हैं, जिनमें से तीन गुरुजी के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर है।
- विशेष अतिथियों और वीआईपी मेहमानों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था की गई है।
- आम श्रद्धालुओं के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडालों तक पहुंचाएंगे।
- शिबू सोरेन के आवास के 300 मीटर के दायरे को प्रशासन ने बैरिकेड कर दिया है। यहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व.
नेमरा को आयोजन के दौरान छावनी में तब्दील किया जाएगा।
- सुरक्षा की जिम्मेदारी 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और
- 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक संभालेंगे।
- पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी किए हैं।
कौन होंगे विशेष अतिथि?
संस्कार भोज में कई बड़े नेताओं की उपस्थिति लगभग तय है।
- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- योगगुरु बाबा रामदेव
- तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी
- वरिष्ठ नेता आर.के. आनंद
- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ
- उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय कुमार गोंड
- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
- पश्चिम बंगाल और पंजाब के मुख्यमंत्री अथवा उनके प्रतिनिधि
इसके अलावा देशभर से तमाम दिग्गज नेताओं, मंत्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

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मंत्री रामदास सोरेन के निधन पर झारखंड सरकार ने घोषित किया राजकीय शोक
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए 16 अगस्त, शुक्रवार को पूरे राज्य में राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकार के आदेश के मुताबिक इस दिन पूरे राज्यभर के सभी सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और उन सभी भवनों पर, जहां नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, तिरंगा अधमस्तूल (आधे झुके) रहेगा।
इसके अलावा, शोक की अवधि में कोई भी सरकारी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम या औपचारिक आयोजन नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय राज्य सरकार ने मंत्री रामदास सोरेन के योगदान और उनके सम्मान में लिया है।
गौरतलब है कि 15 अगस्त की देर रात रामदास सोरेन का दिल्ली के इंद्रप्रस्थ स्थित अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले दो हफ्तों से गंभीर रूप से बीमार थे।
- 2 अगस्त की सुबह करीब 4:30 बजे वे जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास के बाथरूम में गिर पड़े।
- तत्काल उन्हें टाटा मोटर्स अस्पताल ले जाया गया, जहां सीटी स्कैन में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई।
- हालत नाजुक देख उन्हें उसी दिन एयरलिफ्ट कर दिल्ली अपोलो अस्पताल ले जाया गया।
दिल्ली पहुंचने के बाद से ही उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। उनकी स्थिति को देखते हुए दिल्ली के डॉक्टरों के साथ-साथ मुंबई और चेन्नई से भी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई थी। इतना ही नहीं, अमेरिका के चिकित्सकों से भी लगातार सलाह ली जा रही थी।
इसके बावजूद डॉक्टर उनकी स्थिति को स्थिर नहीं कर पाए। गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टर सर्जरी का निर्णय भी नहीं ले पाए। अंततः 15 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजनीतिक और सामाजिक जीवन.
रामदास सोरेन झारखंड सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और निबंधन विभाग के मंत्री थे। वे झारखंड की राजनीति में एक सक्रिय और महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते थे। उनकी सादगी और कार्यशैली के कारण वे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच विशेष पहचान रखते थे।
उनके निधन से न केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति को गहरी क्षति पहुंची है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है ।

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शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी
वीआईपी के लिए बने चार हेलीपैड, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
परवेज़ आलम
For The News Post4u.
रामगढ़, नेमरा : झारखंड की राजनीति के पुरोधा और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज की तैयारियां इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में करीब चार से पांच लाख लोग शामिल होंगे, जिसके लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघरों की व्यवस्था की गई है।

वीआईपी के लिए विशेष इंतज़ाम.
देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और विशिष्ट मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। वीआईपी आवागमन को ध्यान में रखते हुए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं — जिनमें से तीन शिबू सोरेन के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर बनाया गया है। 16 अगस्त को होने वाले संस्कार भोज के दिन, विशेष अतिथियों के लिए अलग पार्किंग की सुविधा भी होगी।
स्थानीय आमंत्रण झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटियों के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शिबू सोरेन के पैतृक आवास के 300 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

ग्रामीणों और मेहमानों के लिए व्यवस्था.
श्राद्ध भोज के लिए तैयार पांच पंडालों में बैठकर भोजन करने की सुविधा होगी। सभी पंडालों के पास ही बड़े-बड़े रसोई घर बनाए गए हैं। विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा। कार्यक्रम स्थल तक केवल वीआईपी वाहन ही पहुंचेंगे; आम लोगों के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडाल तक लाएंगे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम.
कार्यक्रम के दौरान नेमरा को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी कर दिए हैं।

गांव में आम आदमी की तरह सीएम सोरेन.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे पिता के श्राद्ध कर्म में एक आम ग्रामीण की तरह हिस्सा ले रहे हैं। संथाल समाज और गांव के लोगों के साथ बैठकों में वे हर विधि-विधान की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, साथ ही भोज के मेन्यू से लेकर मेहमानों की सेवा तक पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।
पिता की विरासत को जीते हुए हेमंत सोरेन गांव की गलियों और खेत-खलिहानों में घूमते हैं, किसानों से बात करते हैं और जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा पर चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा और अधिकारों की रक्षा का संकल्प है — एक सीख जो उन्हें सीधे पिता से मिली है।

जल, जंगल और ज़मीन: पहचान और संकल्प
सीएम ने स्पष्ट कहा कि जल, जंगल और ज़मीन झारखंड की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वे मानते हैं कि यह केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा, समृद्ध झारखंड देने का वादा है।

विरासत का विस्तार.
गांव की मिट्टी, उसकी खुशबू और हरियाली की ठंडक में हेमंत सोरेन आज भी अपने पिता की परछाईं की तरह दिखते हैं। जनसेवा, सादगी और संघर्ष की वही परंपरा, जिसे दिशोम गुरु ने दशकों तक निभाया, अब मुख्यमंत्री अपने कामों के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं।

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नेमरा गांव में 10 दिन तक रहेंगे मुख्यमंत्री, श्राद्धकर्म की सभी धार्मिक विधियों में निभाएंगे भागीदारी
परवेज़ आलम.
The News Post4u.
नेमरा / रामगढ़ : झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद अब उनके पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता के अंतिम संस्कार से जुड़ी हर धार्मिक प्रक्रिया में पूर्ण रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। वे आगामी दस दिनों तक अपने पैतृक गांव नेमरा में ही रहेंगे और वहीं से राज्य के कार्यों का संचालन भी करेंगे।

बीते मंगलवार को शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी । परिवार के सूत्रों के मुताबिक, गुरुजी का श्राद्धकर्म 10 दिनों तक चलेगा, और इस अवधि में हेमंत सोरेन पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ हर विधि-विधान में सम्मिलित रहेंगे।
नेमरा में अपने पिता की स्मृतियों के बीच रहना हेमंत सोरेन के लिए एक भावनात्मक अनुभव होगा। वे परिवार के साथ समय बिताते हुए, अपने पिता के संघर्षों और योगदान को आत्मसात करने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यह न केवल एक बेटे की जिम्मेदारी है, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक वारिस की भावनात्मक यात्रा भी है जो अपने पिता की विरासत को संभाल रहा है।
प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय.
मुख्यमंत्री के नेमरा प्रवास को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। नेमरा गांव में सड़क, बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं को दूर करने के लिए तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों की उपस्थिति से गांव की बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा था। खासकर मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाने और संकरी सड़कों पर घंटों जाम लगने से लोगों को खासी परेशानी हुई।
इस जाम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव तक फंस गए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के बीच सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई थीं।

नेमरा में फिर जुटेगी भीड़.
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गुरुजी के श्राद्धकर्म के अंतिम दिन एक बार फिर नेमरा में भारी जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। लाखों लोग अंतिम बार उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करने और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए वहां पहुँच सकते हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि गुरुजी की लोकप्रियता केवल एक नेता के रूप में नहीं थी, बल्कि एक जननायक और प्रेरणा स्रोत के रूप में थी। यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई में न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु उमड़े थे, और अब उनके श्राद्ध में भी यही दृश्य दोहराया जा सकता है।