Tag: jharkhand news

  • एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।

    सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.

    बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.

    जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।

    अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.

    बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

    सुरक्षा और धमकी का मुद्दा

    बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
    आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।

    बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.

    इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।

    एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।

     

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया

    शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की  गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।

    इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।

    • जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।

    • आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।

    • जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।

    • प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।

    सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष का बयान.

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।

    अनुपूरक बजट पेश.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।

    गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

    श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.

    सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 22 से 28 अगस्त तक

    शिबू सोरेन के निधन के बाद दोबारा तय हुआ कार्यक्रम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र, जो दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के प्रणेता शिबू सोरेन के निधन के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, अब नए कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित होगा। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

    इस संबंध में निर्णय विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रस्ताव पर लिया। नए कार्यक्रम के अनुसार सत्र में चार कार्य दिवस होंगे। हालांकि सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर सत्र की अवधि 28 अगस्त के बाद भी बढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    मानसून सत्र का संशोधित कार्यक्रम

    • 22 अगस्त (शुक्रवार): 4 अगस्त को निर्धारित कार्य पूरे किए जाएंगे, प्रश्नकाल को छोड़कर। इस दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश होगा। साथ ही शोक प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे।

    • 25 अगस्त (सोमवार): प्रश्नकाल, अनुपूरक बजट पर सामान्य चर्चा, मतदान और विनियोग विधेयक का पारण किया जाएगा।
    • 26 अगस्त (मंगलवार): प्रश्नकाल, राजकीय विधेयकों की प्रस्तुति और अन्य शासकीय कार्य होंगे।

    • 28 अगस्त (गुरुवार): प्रश्नकाल और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा, लेकिन केवल उन प्रस्तावों पर जिनकी सूचना 23 जुलाई तक दी गई है।

    क्यों हुआ था स्थगित?

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र मूल रूप से 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक निर्धारित था। लेकिन 4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के जननायक शिबू सोरेन के निधन के कारण पूरे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाद में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यह आग्रह किया था कि शेष बचे महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः अनुपूरक सत्र आयोजित किया जाए।

    इस प्रकार, अब यह अनुपूरक सत्र न केवल राज्य के वित्तीय कार्यों को पूरा करने का अवसर बनेगा बल्कि गुरुजी शिबू सोरेन के योगदान को याद करने और उनके निधन पर शोक प्रस्ताव पारित करने का भी मंच होगा।

  • जहरीले सांपों को गले में लपेटकर करते हैं पूजा, नहीं होता जहर का असर

    रांची के बुंडू में सदियों से जारी है अनोखी परंपरा.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची जिले के बुंडू अनुमंडल क्षेत्र में हर साल मनसा पूजा के मौके पर ऐसा अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है, जिसे सुनकर आम इंसान सहम जाए। यहां श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के तहत विषैले सांपों को गले में लपेटते हैं, यहां तक कि उन्हें खुद को डसने तक देते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन ग्रामीणों पर सांप के जहर का कोई असर नहीं होता। श्रद्धालु इसे नागों की देवी और भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा की कृपा मानते हैं।

    कैसे निभाई जाती है परंपरा?

    स्थानीय लोगों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के दौरान जब खेती-बाड़ी का काम पूरा हो जाता है, तब गांववाले जंगलों में जाकर जहरीले सांप पकड़कर लाते हैं। इन्हें करीब एक महीने तक घरों में रखकर उनकी सेवा-देखभाल करते हैं। जब मनसा पूजा का समय आता है, तब ये श्रद्धालु उन्हीं सांपों को हाथों में लेकर, शरीर पर लपेटकर और यहां तक कि उनके डसने तक का सामना करते हैं।

    पूजा समाप्त होने के बाद इन्हीं सांपों को सम्मानपूर्वक दोबारा जंगलों में छोड़ दिया जाता है। इस दौरान ग्रामीण यह मानते हैं कि मां मनसा की शक्ति के कारण सांप उनके मित्र बन जाते हैं और उनके विष का असर नहीं होता।

    सिर्फ सांप नहीं, लोहे की छड़ भी शरीर में भोंकते हैं श्रद्धालु.

    मनसा पूजा केवल सांपों तक सीमित नहीं है। इस अवसर पर भक्त अपने शरीर में लोहे की नुकीली छड़ भोंकते हैं। सामान्य व्यक्ति के लिए यह दृश्य विचलित कर देने वाला हो सकता है, लेकिन भक्तों का विश्वास है कि मां मनसा की कृपा से उन्हें दर्द महसूस नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूजा से सांपदोष दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    पौराणिक मान्यताएं और मां मनसा का महत्व

    हिंदू मान्यता के अनुसार मां मनसा, भगवान शिव की मानस पुत्री और नागों की देवी मानी जाती हैं। उन्हें नागमाता, विष की देवी और कश्यप पुत्री के नाम से भी जाना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि मां मनसा की आराधना करने से सर्पदंश और बिच्छू जैसे विषैले जीव-जंतुओं से सुरक्षा मिलती है।

    झारखंड के कोल्हान क्षेत्र – खासकर पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों – में मनसा पूजा बड़े धूमधाम से आयोजित होती है। वहीं पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती इलाकों में भी यह प्रमुख त्योहारों में गिनी जाती है।

    जांत और झापान : पूजा का खास आकर्षण.

    मनसा पूजा के दौरान दो प्रमुख आयोजन – जांत और झापान – होते हैं।

    • जांत में भक्त मंडली वाद्ययंत्रों के साथ मां मनसा के गुणगान करती है, भजन-कीर्तन होते हैं और देवी की कहानियां गीतों के रूप में सुनाई जाती हैं।
    • झापान में श्रद्धालु जहरीले सांपों के साथ हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यह परंपरा केवल दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि देवी के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।

    बलि और पारंपरिक अनुष्ठान.

    मनसा पूजा के दौरान कई जगहों पर बकरे, बतख और मुर्गे की बलि भी दी जाती है। मंदिरों में मां की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है और चारों ओर मनसा मंगल और जात के गीतों की गूंज सुनाई देती है। पवित्र जलाशयों और नदियों से कलश लाकर मंदिर में स्थापित करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की जाती है।

    इस तरह झारखंड का बुंडू इलाका आज भी अपनी सदियों पुरानी लोकपरंपरा को जीवित रखे हुए है, जहां श्रद्धालु विषैले सांपों के साथ खेलते हुए भी अपनी आस्था को सर्वोपरि मानते हैं।

     

  • झारखंड: सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामला,राजभवन तक पहुँची,सीबीआई जांच पर बढ़ा दबाव

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड में आदिवासी अस्मिता और मानवाधिकारों से जुड़े सूर्या हांसदा उर्फ सूर्य नारायण हांसदा के कथित एनकाउंटर ने पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। इस संवेदनशील मामले में अब जनसंगठन भी मुखर हो उठे हैं। मंगलवार को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के एक शिष्टमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से औपचारिक मुलाकात की और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई।

    संगठन की अगुवाई केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो कर रहे थे। उन्होंने राज्यपाल को विस्तृत घटनाक्रम से अवगत कराते हुए कई दस्तावेजी साक्ष्य भी सौंपे, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया कि सूर्या हांसदा की मौत एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। राज्यपाल ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।

    “सूर्या हांसदा लोकतांत्रिक आवाज थे” – महतो.

    राजभवन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सूर्या हांसदा केवल एक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि आदिवासी समाज और सामाजिक न्याय के लिए उठने वाली एक सशक्त आवाज थे। उन्होंने कई बार संवैधानिक चुनावों में हिस्सा लेकर यह साबित किया कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखते थे।
    महतो ने आरोप लगाया कि –

    “सरकार और प्रशासन ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों और जनविरोधी नीतियों का विरोध करने वाली इस आवाज को दबाने के लिए षड्यंत्रपूर्वक एनकाउंटर का सहारा लिया।”

    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 10 अगस्त को सूर्या हांसदा को गिरफ्तार किया गया था, तो 11 अगस्त को उनकी हत्या जैसी स्थिति कैसे बनी? यह पूरी कार्रवाई प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और आदिवासी समाज में भय का माहौल पैदा करती है।

    ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें.

    राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में JLKM ने तीन प्रमुख मांगें रखी—

    1. पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
    2. जांच में जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आए, उन पर सख्त और त्वरित कार्रवाई हो।
    3. मृतक के परिवार को मुआवजा, सुरक्षा और सरकारी आश्रय मिले ताकि भविष्य में उन्हें किसी असुरक्षा का सामना न करना पड़े।

    महतो ने यह भी घोषणा की कि आने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में डुमरी विधायक जयराम महतो इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएंगे। साथ ही, संगठन ने राज्यव्यापी जनआंदोलन की रूपरेखा भी तैयार कर ली है ताकि न्याय की मांग को जनदबाव का रूप दिया जा सके।

    शिष्टमंडल और राष्ट्रीय आयोग की भूमिका.

    राज्यपाल से मुलाकात करने वाले शिष्टमंडल में देवेंद्रनाथ महतो के अलावा आलोक उरांव, पार्वती कुमारी, जितेंद्र महतो और राजू महतो भी शामिल रहे। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे प्रकरण पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। इसका सीधा अर्थ है कि सूर्या हांसदा का एनकाउंटर न केवल राज्य, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सवालों के घेरे में है।

    अब सबकी नजरें झारखंड सरकार के रुख पर टिकी हैं। क्या सरकार इस मामले को सीबीआई को सौंपेगी या आंतरिक जांच तक ही सीमित रहेगी?
    फिलहाल, आदिवासी समाज और आम जनता की न्याय की उम्मीदें अब राजभवन से जुड़ चुकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल विधानसभा की कार्यवाही में गूंजेगा, बल्कि सड़कों पर भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

     

  • पचम्बा-गिरिडीह फोर लेन सड़क निर्माण का निरीक्षण, उपायुक्त ने दिए सख्त निर्देश

    द न्यूज़ पोस्ट फोर यू डेस्क

    गिरिडीह : पचम्बा-गिरिडीह फोर लेन सड़क निर्माण कार्य का मंगलवार को उपायुक्त रामनिवास यादव ने स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों की वस्तुस्थिति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

    निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने की स्थिति, पेड़ों की कटाई, बिजली के तारों की शिफ्टिंग तथा नालियों की साफ-सफाई जैसी प्रमुख समस्याओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्य की गति तेज करने के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

    उपायुक्त ने कहा कि फोर लेन सड़क का निर्माण जिले के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पूरा होने से लोगों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी और आवागमन भी सुगम होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आमजन को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए।

    उन्होंने मौके पर कार्यपालक अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा कि पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ काम पूरा किया जाए। अधूरे कार्यों को लेकर जो भी अड़चनें सामने आ रही हैं, उन्हें आपसी समन्वय से तत्काल दूर किया जाए ताकि प्रोजेक्ट समय पर खत्म हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सड़क निर्माण के दौरान नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए ताकि धूल से लोगों को कोई असुविधा न हो।

    निरीक्षण के दौरान पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता और अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

  • शिबू सोरेन का दशकर्म संस्कार भोज, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गज हुए शामिल

    दशकर्म संस्कार लाखों की भीड़.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रामगढ़/नेमरा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झामुमो के संस्थापक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के दशकर्म संस्कार भोज में शनिवार को भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुरुजी की स्मृति में आयोजित इस भव्य आयोजन में आम जनता से लेकर देश के कई दिग्गज नेताओं और संत-विद्वानों ने शिरकत की।

    दिग्गज नेताओं की मौजूदगी और श्रद्धांजलि.

    • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशेष रूप से नेमरा पहुंचे। उन्होंने गुरुजी को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ, सांसद पप्पू यादव, योग गुरु बाबा रामदेव और पूर्व राज्यसभा सांसद आर.के. आनंद भी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    भोजन और पंडाल की व्यवस्था.

    भोज के लिए  तीन विशाल पंडाल बनाए गए हैं। एक पंडाल में एक बार में 2500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, यानी करीब 8000 लोग एक साथ भोजन कर सकते हैं। भोजन में दाल, चावल, पूड़ी, आलू-परवल की सब्जी, मिक्स वेज, मछली फ्राई, मटन, दही, पापड़, सलाद, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, बुंदिया जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं। विशेष रूप से गुरुजी की पसंदीदा पकौड़ी भी भोज का हिस्सा है। अनुमान है कि करीब तीन लाख लोगों के भोजन का इंतजाम किया गया है। मिठाई में  रसगुल्ला और गुलाब जामुन तैयार किए गए हैं।

    जनसैलाब और यातायात व्यवस्था.

    शनिवार दोपहर 2 बजे तक नेमरा में 10 हजार से अधिक वाहनों से लोग पहुंचे, जिसके चलते दुधमटिया से नेमरा तक लंबा जाम लग गया। भीड़ प्रबंधन के लिए एक ओर से प्रवेश और दूसरी ओर से निकासी का मार्ग बनाया गया है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑटो और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।

    सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व.

    आयोजन को देखते हुए 5000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। वर्दीधारी पुलिस से लेकर सादे लिबास में खुफिया अधिकारी तक हर जगह मौजूद हैं। विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाए गए हैं।

    श्रद्धांजलि और स्मृति दीर्घा.

    भोज के साथ-साथ नेमरा में एक विशेष प्रदर्शनी और स्मृति दीर्घा भी लगाई गई है। इसमें शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन, आदिवासी समाज के लिए उनके संघर्ष और जनसेवा को दर्शाने वाली दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं। आगंतुक यहां गुरुजी के जीवन संघर्ष को करीब से समझ पा रहे हैं।

         दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त को नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में  हुआ था। 5 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में हुआ था, जहां      मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता को मुखाग्नि दी। तब से हेमंत सोरेन परिवार के साथ  यहीं ठहरे हुए हैं और लगातार श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की देखरेख कर रहे हैं। दिशोम गुरु  सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि एक युग थे। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण की मिसाल है। वे झारखंड की आत्मा और पहचान के प्रतीक बनकर हमेशा याद किए जाएंगे।

  • अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद नेमरा पहुँचकर दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

    The News Post4u.

    रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।

    अखिलेश यादव का भावुक पल.
    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
    मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।

    चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
    इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
    श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता।
    आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
    इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है।
    राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।

    गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
    नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

  • BJP और जयराम महतो की पार्टी से चुनाव लड़ चुका सूर्या हांसदा एनकाउंटर में ढेर

    कई आपराधिक मामलों में था वांटेड.

    The News Post4u.

    रांची/गोड्डा:  झारखंड के गोड्डा जिले में सोमवार तड़के हुई पुलिस मुठभेड़ में पूर्व भाजपा प्रत्याशी और कुख्यात अपराधी सूर्या नारायण हांसदा उर्फ सूर्या हांसदा मारा गया। पुलिस के अनुसार, हांसदा के खिलाफ गोड्डा और साहिबगंज जिलों के विभिन्न थानों में कई संगीन मामले दर्ज थे, जिनमें आगजनी, हमले और अवैध हथियार रखने जैसे अपराध शामिल हैं।

    देवघर से गिरफ्तारी, जंगल में मुठभेड़ में मौत.
    दुमका के जोनल आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि गोड्डा पुलिस ने रविवार को सूर्या हांसदा को देवघर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने अपने छुपाए हथियारों और साथियों के ठिकानों का खुलासा किया। इसी सुराग पर पुलिस दल उसे लालमटिया के घने वन क्षेत्र में लेकर पहुंचा।

    पुलिस का कहना है कि मौके पर हथियार बरामदगी के दौरान हांसदा ने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। इसी बीच, उसके साथियों ने भी पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें सूर्या हांसदा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    राजनीतिक सफर: चार बार चुनावी किस्मत आजमाई, हर बार हार
    सूर्या हांसदा का नाम केवल अपराध जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी चर्चा में रहा है। उसने चार बार विधानसभा चुनाव लड़े—

    • 2024: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से बोरियो सीट पर चुनाव लड़ा, मात्र 2,937 वोट मिले।
    • 2019: भाजपा प्रत्याशी के रूप में बोरियो से चुनाव लड़ा, 59,441 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहा। इस चुनाव में भाजपा ने पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी का टिकट काटकर हांसदा को मौका दिया था।
    • 2014 और 2009: झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) से इसी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार का सामना किया।

    गंभीर अपराधों में लिप्त.
    सूर्या हांसदा का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा रहा है। सबसे चर्चित मामला 9 जनवरी 2020 का है, जब गोड्डा जिले के ठाकुरगंगटी थाना क्षेत्र के बहादुरचक के पास अडानी कंपनी की वाटर पाइपलाइन परियोजना में लगे वाहनों में आग लगा दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस घटना की साजिश हांसदा ने रची थी।

    इसके अलावा, जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, हांसदा कई महीनों से फरार था और उस पर गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी।

  • शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रामगढ़, झारखंड: झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’  शिबू सोरेन को उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। झमाझम बारिश और गम के माहौल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसी के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

    अंतिम यात्रा: पहाड़ों की गोद में उमड़ा जनसैलाब.

    नेमरा गांव, जो पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत और साधारण गांव है, मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ से भर गया। आम जनता से लेकर झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही, झामुमो कार्यकर्ता, राजनेता, नौकरशाह,पत्रकार और परिजन—हर कोई ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

    गांव की गलियों में नारे गूंजते रहे—“शिबू सोरेन अमर रहें”, “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी तेरा नाम रहेगा”।

    बारिश की फुहारों के बीच शाम 6:45 बजे उनका अग्नि संस्कार किया गया। लोग छातों के नीचे भींगते हुए अंतिम विदाई में शामिल होते रहे। मानो आसमान भी इस विदाई में रो रहा हो।

    “गुरुजी को अंतिम जोहार”, “विनम्र श्रद्धांजलि”—ऐसे शब्दों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स रांची से रामगढ़ तक पूरे रास्ते भर लोगों की आंखें नम करते रहे।

    विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई और फिर पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, और परिवार के अन्य सदस्य पार्थिव शरीर के साथ यात्रा में शामिल रहे।

    सादगी में श्रद्धा: संथाली परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार.

    नेमरा गांव पहुंचने के बाद शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार संथाली रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार किया गया। वहीं, उनका दाह संस्कार उसी बड़का नाला श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पूर्वजों की भी अंत्येष्टि होती रही है।

    मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी पुत्र हेमंत सोरेन ने निभाई। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गांव के हर कोने से नारे उठे—“शिबू सोरेन अमर रहें”। बारिश की बूंदें उस वक्त भी थमी नहीं थीं, लेकिन लोगों की श्रद्धा के आगे मौसम भी झुक गया।

    राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति.

    झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के निधन पर 6 अगस्त तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी दफ्तर बंद रखे गए।

    राजकीय सम्मान के तहत उनकी चिता के पास झंडा फहराया गया, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, और शोक ध्वनि के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

    इस दौरान कई राष्ट्रीय नेता नेमरा पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी,तेजस्वी यादव (राजद),संजय सिंह (आप), शताब्दी रॉय (टीएमसी), पप्पू यादव ( सांसद पूर्णिया )

    भारी बारिश के कारण कई नेता हेलिकॉप्टर से नहीं आ सके, और उन्होंने सड़क मार्ग से ही नेमरा गांव पहुंचकर ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम सलामी दी।

    प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था.

    गुरुजी की अंतिम यात्रा के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, तथा कई जिलों के डीसी और एसपी सहित उच्चस्तरीय प्रशासनिक अमला मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन सादगी और अनुशासन के साथ श्रद्धा का वातावरण भी बना रहा।

    आमजन का जुड़ाव.

    गांव की गलियों में, पहाड़ों के बीच, बारिश से भीगते छतरियों के नीचे खड़े आम लोग—हर आंख नम थी। हर दिल गमगीन। लोगों ने बताया—“गुरुजी सिर्फ नेता नहीं थे, वो आंदोलन थे, वो आवाज थे हमारे हक की”। दुकानें, बाजार, स्कूल—हर जगह मातम पसरा रहा। कुछ विद्यालयों में दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

    शिबू सोरेन का जाना, सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है। यह उस संघर्ष का अंत है, जिसने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया।

    उनकी अंतिम यात्रा सिर्फ एक शारीरिक विदाई नहीं थी, बल्कि झारखंड के इतिहास में लिखी गई एक अविस्मरणीय घटना थी। उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की मिसाल था।

    गुरुजी चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा, उनकी आवाज, उनकी पहचान—हमेशा जीवित रहेगी।
    “दिशोम गुरु अमर रहें!”