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  • हेमंत कैबिनेट की आज पहली बैठक,होंगे कई अहम फैसले

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    RANCHI : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण के बाद आज यानि गुरुवार को कैबिनेट की पहली बैठक होगी । इस बैठक में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जा सकता है ताकि विश्वास मत हासिल किया जा सके। हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं  और अब उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस बैठक से कई बड़े फैसले निकलने की उम्मीद है, जो न सिर्फ गठबंधन के चुनावी वादों को हकीकत में बदलने का काम करेंगे, बल्कि झारखंड की जनता को राहत का संदेश भी देंगे।
    भगवान बिरसा और सिदो-कान्हू के नाम पर बड़ा फैसला ?
    झारखंड के सबसे बड़े पुरस्कार का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा-भगवान सिदो-कान्हू पुरस्कार करने का प्रस्ताव आज कैबिनेट में पेश हो सकता है। यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
    रसोई गैस सिलेंडर @450 रुपये: जनता को राहत का तोहफा?
    बैठक में झारखंड के हर जरूरतमंद परिवार को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी मिल सकती है। गठबंधन के चुनावी घोषणापत्र में इसे सात गारंटी में शामिल किया गया था, और अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी हो रही है।
    मंईयां सम्मान योजना में पहले ही बढ़ाई गई राशि
    शपथ ग्रहण से पहले हुई अंतिम कैबिनेट बैठक में मंईयां सम्मान योजना की राशि बढ़ाकर 2500 रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसे दिसंबर से लागू किया जाएगा। नई सरकार इस योजना को और विस्तार देने पर विचार कर रही है।
    1932 के खतियान और सरना कोड पर चर्चा
    कैबिनेट की प्राथमिकता में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद है। इससे राज्य की स्थानीय पहचान और संस्कृति को मजबूती मिलने की संभावना है।
    सात गारंटी: जनता से वादों की दिशा में पहला कदम—
    1. स्थानीयता की गारंटी: 1932 खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लागू करने का वादा।
    2. मंईयां सम्मान की गारंटी: दिसंबर 2024 से 2500 रुपये की सम्मान राशि।
    3. सामाजिक न्याय की गारंटी: एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं।
    4. खाद्य सुरक्षा की गारंटी: गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर और 7 किलो राशन।
    5. रोजगार और स्वास्थ्य की गारंटी: 10 लाख युवाओं को नौकरी और 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा।
    6. शिक्षा की गारंटी: हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज और 500 एकड़ में औद्योगिक पार्क।
    7. किसान कल्याण की गारंटी: धान का एमएसपी 3200 रुपये और लघु वनोपज पर समर्थन मूल्य में 50% वृद्धि।

    झारखंड के लोग इस कैबिनेट बैठक से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं। हेमंत सरकार अगर इन वादों को पूरा करती है, तो यह न सिर्फ जनता का विश्वास जीतने में सफल होगी, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नई इबारत लिखेगी।

  • हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

    परवेज आलम की रिपोर्ट…..

    झारखंड की राजनीति ने रच दिया इतिहास। 2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोरहाबादी के मैदान में ऐसा नज़ारा था, जो शायद दशकों तक याद किया जाएगा।

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शाम चार बजे हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हेमंत अब झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री हैं। तीन बार पहले भी इस कुर्सी पर विराजमान हो चुके अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन के बाद, हेमंत का यह चौथा कार्यकाल एक नई कहानी लिखने को तैयार है।

    इंडिया गठबंधन की चमक और शपथ का मंच—

    जिस तरह से मोरहाबादी के मंच पर इंडिया गठबंधन के नेता जुटे, वो किसी शक्ति प्रदर्शन से कम नहीं था। राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, और यहां तक कि तमिलनाडु से उदयनिधि स्टालिन तक… हर किसी की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया। शिबू सोरेन, जो खुद दिशोम गुरु कहे जाते हैं, अपने बेटे की इस चौथी पारी के गवाह बने।

    नतीजों का संदेश—

    2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर साबित कर दिया कि झारखंड की जनता का भरोसा उनके साथ है। झामुमो ने 34 सीटों पर कब्जा जमाया, जो इसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। कांग्रेस को 16, आरजेडी को 4, और भाकपा-माले को 2 सीटें मिलीं।

    सुरक्षा और उत्सव—

    मोरहाबादी मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन माहौल में जोश और जश्न का संगम दिखा। हजारों समर्थकों ने अपने नेता का स्वागत किया। झारखंड का भविष्य नई उम्मीदों से भर चुका है, और इंडिया गठबंधन के लिए यह एक बड़ी जीत का प्रतीक है।

    मोरहाबादी के मंच से झारखंड के हर कोने तक एक संदेश गया—यह जीत सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि झारखंड के सपनों को नई दिशा देने की शुरुआत है। हेमंत सोरेन की चौथी पारी कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस शपथ ग्रहण ने झारखंड की राजनीति को एक नई उड़ान जरूर दी है।

  • झारखंड की राजनीति में नया पेंच: कांग्रेस की ‘चार विधायकों पर एक मंत्री’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड की सत्ता की गोटियां बिछ रही हैं और कांग्रेस ने पुराना पत्ता फेंका है—चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला। 2019 में इस फॉर्मूले ने कांग्रेस को चार मंत्री पद दिलवाए थे, जब उसके पास 16 विधायक थे। हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में तब जेएमएम के 30 विधायक थे, और पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत सात मंत्री पद अपने हिस्से किए थे। आरजेडी को एक मंत्री पद मिला था।

    अब क्या बदला?
    इस बार कांग्रेस के पास फिर से 16 विधायक हैं, लेकिन पेंच यह है कि इंडिया ब्लॉक के कुल विधायकों की संख्या 56 है। कांग्रेस के फॉर्मूले से 14 मंत्रियों की गुंजाइश बनती है, लेकिन कानून कहता है कि झारखंड विधानसभा (81 सीटें) में मंत्रियों की संख्या 12 से अधिक नहीं हो सकती। इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

    फिर क्यों कर रही है कांग्रेस ये डिमांड?
    साफ है, बार्गेनिंग पावर कमजोर हुई है। 2019 में जेएमएम को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के 11 विधायकों की जरूरत थी। इस बार जेएमएम को केवल सात विधायकों का सहारा चाहिए। ऐसे में कांग्रेस का पुराना फॉर्मूला प्रैक्टिकल तो नहीं, लेकिन दांवपेंच का हिस्सा जरूर है।

    लेफ्ट का खेल और आरजेडी की चुनौती
    इस बार लेफ्ट भी गठबंधन का हिस्सा है। कोयलांचल और संथाल में लेफ्ट का जनाधार मजबूत है, और लोकसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने उसे साथ लाने की पहल की थी। ऐसे में लेफ्ट को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। आरजेडी भी एक मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठा है।

    नंबर गेम और गठबंधन की सियासत
    जेएमएम की स्थिति मजबूत है। कांग्रेस को दरकिनार कर भी गठबंधन 40 के आंकड़े पर पहुंच रहा है, जो बहुमत से महज एक कम है। ऐसे में कांग्रेस का दबाव बनाना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार उसकी बात कितनी सुनी जाएगी, यह कहना मुश्किल है।

    क्या होगा आगे?
    हेमंत सोरेन की सरकार के लिए मंत्रीमंडल का संतुलन साधना बड़ी चुनौती है। क्या कांग्रेस अपने फॉर्मूले पर अड़ी रहेगी? क्या लेफ्ट को मंत्री पद मिलेगा? और आरजेडी कहां खड़ा होगा? जवाब आने वाले दिनों में झारखंड की सियासत तय करेगी।

     

  • हेमंत सोरेन: नेमरा की मिट्टी, कल्पवृक्ष की छांव और बचपन की यादें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो 28 नवंबर को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। नेमरा, जो न सिर्फ उनके बचपन का गवाह है, बल्कि उनकी जड़ों और संघर्ष की कहानियों को भी समेटे हुए है। पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव में हेमंत सोरेन के कदम पड़ते ही पुरानी यादें जैसे ताजा हो उठीं।

    गांव का बदलता चेहरा, पर यादों का वही अक्स
    नेमरा में स्थित उनका खपरैल मकान, अब आंशिक रूप से दो मंजिला हो गया है। आंगन में लगा कल्पतरु का वृक्ष पहले से अधिक घना हो चुका है, लेकिन खेतों की पगडंडियां और गांव के गलियारे हेमंत सोरेन के लिए वही बचपन की कहानियां सुनाने लगे। वे बिना चप्पल दौड़ने, गुल्ली-डंडा, फुटबॉल, और बैडमिंटन खेलने की यादों में खो गए।

    गांव में रोशनी, पर सुविधाओं की दरकार
    नेमरा, जहां अब 150 संताल परिवारों के घर हैं, सौर ऊर्जा से जलने वाली स्ट्रीट लाइटों से रोशन है। रामगढ़ ज़िले के गोला प्रखंड मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर यह गांव अब पक्की सड़कों से जुड़ चुका है। हालांकि, गांव में अब भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाला एक स्कूल, डॉक्टरों की कमी वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, और कमजोर मोबाइल कनेक्टिविटी यहां की वास्तविकता को बयां करते हैं।

    शहीद सोबरन सोरेन को श्रद्धांजलि
    हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ शहीद सोबरन सोरेन के 67वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “दादा की शहादत इसी पहाड़ की तराई में हुई थी। वह हमारे दिलों में आज भी जिंदा हैं।”

    गांववालों को दिया शपथ ग्रहण का न्योता
    नेमरा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान हेमंत सोरेन ने गांव के लोगों का धन्यवाद किया और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा, “सरकार का गठन हो रहा है। इस बार जब नेमरा आया हूं, तो फिलहाल परिसंपत्तियों का वितरण या योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि आप सभी से संवाद के लिए आया हूं।”

    संदेश: मिट्टी से जुड़े रहना ही असली पहचान
    हेमंत सोरेन का यह दौरा न केवल उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि चाहे इंसान कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसकी जड़ें हमेशा उसकी ताकत होती हैं।

     

  • हेमंत के शपथ मे जुटेंगे देश के सियासी सूरमा: रांची में ‘राजनीति का महाकुंभ’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    रांची के आसमान पर सियासी सितारों की जगमगाहट, क्योंकि 28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का शपथ ग्रहण समारोह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीति का महाकुंभ बनने जा रहा है।

    कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने रांची पहुंचेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह विपक्षी एकता का मंच भी बनेगा, जिसमें कई अन्य बड़े नेता अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

    राजनीति के सितारे करेंगे शिरकत
    समारोह में माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंता रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की संभावना है।

    सभी मेहमान बनेंगे राजकीय अतिथि
    शपथ ग्रहण में आने वाले इन नेताओं को राज्य सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। मंत्रिमंडल समन्वय विभाग ने इसके लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अतिथि 28 नवंबर को रांची पहुंचेंगे और उसी दिन कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट जाएंगे।

    दिल्ली से रांची तक न्योते की गूंज
    हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया है। हालांकि, उनकी उपस्थिति को लेकर अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    ‘नई राजनीति’ की झलक का दावा
    रांची में होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सत्ता के हस्तांतरण का मंच नहीं, बल्कि विपक्षी एकता और सियासी रणनीतियों के प्रदर्शन का एक ऐतिहासिक अवसर बन सकता है। क्या झारखंड की धरती से देश की राजनीति को कोई नया संदेश मिलेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

     

  • कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……

    झारखंड की सियासत में इस वक्त हलचलें तेज़ हैं। मंत्रिमंडल के गठन की कवायद के बीच विधायकों की दौड़-भाग अपने चरम पर है। दिल्ली से रांची तक सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    दिल्ली की तरफ़ रुख़ करें तो कांग्रेस के विधायक पहले ही पोजिशनिंग में जुट गए हैं। दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, कुमार जयमंगल और बंधु तिर्की जैसे नाम आलाकमान के दरवाज़े खटखटा रहे हैं। झारखंड में 28 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है, लेकिन उससे पहले यह राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। कांग्रेस, झामुमो और राजद—तीनों ही अपने-अपने विधायकों को संतुलन में लाने की जद्दोजहद में हैं।

    दिल्ली और रांची के बीच सियासी लाइनें खिंच चुकी हैं
    कांग्रेस के चार मंत्री बनना तय है, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय समीकरण की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं। अनुसूचित जाति से राधाकृष्ण किशोर या सुरेश बैठा, अल्पसंख्यक कोटे से इरफान अंसारी, और ओबीसी से ममता देवी या प्रदीप यादव मंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, दीपिका पांडेय सिंह और रामेश्वर उरांव भी अहम दावेदार माने जा रहे हैं।

    झामुमो की बात करें तो संताल-कोल्हान से ज़्यादा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की तैयारी है। दीपक बिरुवा, रामदास सोरेन और महिला कोटे से लुईस मरांडी या सविता महतो की चर्चा जोरों पर है। पिछली सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर की जगह इस बार अनंत प्रताप देव को मौका मिल सकता है।

    राजद और माले के विधायकों की भूमिका पर सस्पेंस बरकरार
    राजद के चार विधायकों में से एक को मंत्री बनने का मौका मिलेगा। सुरेश पासवान और संजय सिंह यादव इस रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, माले से अरूप चटर्जी के मंत्री बनने की संभावना पर भी चर्चाएं हो रही हैं।

    मोरहाबादी मैदान पर तैयारी जोरों पर
    शपथ ग्रहण समारोह को लेकर मोरहाबादी मैदान में तैयारियां ज़ोरों पर हैं। डीसी वरुण रंजन की अगुवाई में अधिकारी समारोह स्थल का जायज़ा ले रहे हैं। सुरक्षा से लेकर वीवीआईपी मेहमानों की आवभगत और ट्रैफिक प्रबंधन तक, हर पहलू पर काम किया जा रहा है।

    लेकिन बड़ा सवाल वही है—ये लामबंदी और जोड़तोड़ का खेल सत्ता के कौन-कौन से दरवाज़े खोलता है? झारखंड की सियासत में यह तय है कि हर सीट और हर मंत्री पद के पीछे की रणनीति, 28 नवंबर के बाद नए समीकरणों की इबारत लिखेगी। अब सबकी नज़रें मोरहाबादी पर टिकी हैं।”*

  • भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ हो -केजरीवाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    दिल्ली का सियासी मौसम अचानक से बदलता हुआ नज़र आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद ककेजरीवाल के  आवास पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पहुंचे। दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया, और इस दौरान जो बातें सामने आईं, उसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।

    केजरीवाल ने सोरेन की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा, ‘हेमंत सोरेन ने जिस मजबूती के साथ जेल के तमाम दबावों के बावजूद चुनाव लड़ा और उसमें जीत हासिल की, वह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। मैं उनका और उनकी पत्नी का अपने आवास पर स्वागत करता हूं। 28 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा और उसमें हम सब शामिल होंगे।’

    लेकिन इस बातचीत में सबसे दिलचस्प बात वह भावनात्मक अपील थी, जब केजरीवाल ने कहा, ‘भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ रहें और विकास का जो रास्ता आपने बनाया है, वह और मजबूत हो।’

    दूसरी तरफ, हेमंत सोरेन ने भी इस मौके पर अपने अंदाज में बात की। उन्होंने कहा, ‘झारखंड में नई सरकार का गठन होना है, और इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। दिल्ली आने का मकसद यही था कि हमारे साथियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित कर सकूं। हमने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी इस समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।’

    यह न सिर्फ एक औपचारिक बैठक थी, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक संदेश भी, जिसने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के भविष्य की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। अब सबकी निगाहें 28 नवंबर पर हैं, जहां यह देखना होगा कि इस शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल होता है और इससे क्या संकेत निकलते हैं।*

  • जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    डुमरी विधायक जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे ! चौक गए न  । हेमंत सोरेन सरकार में जयराम महतो का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसा क्यों? क्योंकि उनकी पार्टी जेएलकेएम ने झारखंड चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। 15 से ज़्यादा सीटों पर एनडीए का खेल बिगाड़ने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को हर राजनीतिक दल ने सराहा है। अब सवाल यह है कि हेमंत सोरेन इस फैसले के पीछे क्या रणनीति रख रहे हैं?
    दरअसल, जयराम महतो 15% कुर्मी वोटों के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। अगर वह सरकार में शामिल होते हैं, तो इसका फायदा इंडिया गठबंधन को कुर्मी समुदाय के वोटों के रूप में मिल सकता है।
    चलिए अब झारखंड मंत्रिमंडल की संभावित तस्वीर पर बात करते हैं।
    आपको बता दें, झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। झामुमो के खाते से 5 से 6 मंत्री, कांग्रेस के 3 से  4 मंत्री, और राजद – माले से 1- 1 मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
    झामुमो से किनके नाम  हैं?
    दीपक बिरुवा, हफीजुल हसन, और रामदास सोरेन का नाम चल रहा है। महिला कोटा से कल्पना सोरेन को मंत्री बनाने का दबाव झामुमो पर है। अभी पार्टी के अंदर इस बात का मंथन चल रहा है की कल्पना मुर्मू सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए या नहीं। ज्यादातर विधायकों का दबाव है की कल्पना सोरेन को मंत्रिमंडल में स्थान मिलना चाहिए क्योंकि उनके जबरदस्त परफॉर्मेंस की वजह से ही विधायक बड़ी संख्या में जीत कर आए हैं तो अब सवाल यह है की कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल होती है या नहीं अभी इंतजार करना होगा और अगर कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्री नहीं बनती है तो महिला कोटे से जामा से जीत कर आई लुईस मरांडी और इचागढ़ से जीती सविता महतो में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है

    इधर कांग्रेस से इरफान अंसारी और दीपिका सिंह पांडे का  नाम मंत्री के लिए चल  रहा है। वहीं, प्रदीप यादव, ममता देवी, और जयमंगल सिंह भी रेस में हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर जयराम महतो को जगह मिलती है, तो कांग्रेस को तीन मंत्री और  एक भारी-भरकम मंत्रालय देकर संतुलन साधा जा सकता है ।
    राजद की स्थिति क्या है?
    राजद से सिर्फ 1 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इस दौड़ में सुरेश पासवान और संजय यादव के नाम हैं। लेकिन फाइनल फैसला तेजस्वी यादव करेंगे।
    सीपीआई(माले) का क्या होगा?
    पिछली बार समर्थन देने के बावजूद माले सरकार में शामिल नहीं हुआ था। इस बार, अरुप चटर्जी को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    हेमंत मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन को साधने की भी पूरी कोशिश हो रही है साथ ही प्रमंडलीय स्तर पर भी प्रतिनिधित्व मिले इसके भी कोशिश हो  रही है लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्री में जयराम महतो की क्या भूमिका होगी क्या इंडिया ब्लॉक जयराम महतो को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर सहमत है या सिर्फ हेमंत सोरेन ही चाहते हैं कि जयराम महतो मंत्रिमंडल में शामिल हो । क्या होगा मामला यह अभी देखना दिलचस्प होगा।