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  • रांची से लापता नाबालिग बहनें कर्नाटक में मिलीं, पुलिस जल्द करेगी खुलासा

    रांची: झारखंड की राजधानी से रहस्यमय तरीके से लापता हुईं दो नाबालिग बहनों को पुलिस ने कर्नाटक से बरामद कर लिया है। 11 जनवरी की शाम से गायब इन बहनों को बेंगलुरु से वापस रांची लाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने अभी तक अपहरण की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके रांची पहुंचने के बाद सच सामने आने की उम्मीद है।

    गायब होने की कहानी:

    रांची के हिंदपीढ़ी इलाके की रहने वाली ये दोनों बहनें 11 जनवरी को आधार कार्ड ठीक करवाने के लिए निकली थीं। परिजनों के मुताबिक, दोनों मंगल टॉवर से घर लौटने के लिए ऑटो में बैठी थीं। लेकिन रास्ते में उन्हें शक हुआ कि ऑटो चालक किसी और दिशा में जा रहा है। घबराई लड़कियों ने अपने पिता को फोन किया, लेकिन ऑटो चालक ने उनका फोन छीन लिया। इसके बाद परिजनों का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।

    स्पेशल टीम का कमाल।

    परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रांची प्रक्षेत्र के आईजी ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और टेक्निकल सेल की मदद से लड़कियों की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस को जानकारी मिली कि लड़कियां कर्नाटक में हैं। स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों बहनों को बरामद कर लिया गया। दोनों नाबालिग बहनों के गायब होने के बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका था। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी परिजनों से मिलने पहुंचे थे। पुलिस ने भरोसा दिया था कि लड़कियों को जल्द ही ढूंढ लिया जाएगा, और अब यह भरोसा सच में बदल चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि मामला अपहरण का था या फिर कुछ और। दोनों बहनों की रांची वापसी के बाद घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

    झारखंड में लड़कियों  की सुरक्षा को लेकर यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक था, या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह है? जवाबों का इंतजार सभी को है। परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……

  • हार्डकोर नक्सली तालो मरांडी गिरफ्तार,पुलिस की बड़ी कामयाबी

    गिरिडीह:  झारखंड और बिहार की सीमावर्ती इलाके में नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। भेलवाघाटी थाना क्षेत्र में पुलिस ने हार्डकोर नक्सली तालो मरांडी उर्फ सुनील मरांडी को गिरफ्तार कर लिया। भाकपा माओवादी का यह दुर्दांत सदस्य कई नक्सली वारदातों का मुख्य आरोपी है।

    गुप्त सूचना से मिली सफलता।

    गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार को खबर मिली कि तालो मरांडी जंगल के रास्ते अपने रिश्तेदार के घर जा रहा है। सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर तालो मरांडी को गिरफ्तार कर लिया।

    तालो मरांडी पर दर्ज हैं गंभीर मामले.

    गिरफ्तार नक्सली तालो मरांडी बिहार के जमुई जिले के चकाई थाना क्षेत्र के नेहालडीह गांव का रहने वाला है। गिरिडीह एसपी ने बताया कि वह 2020 में भेलवाघाटी थाना क्षेत्र में हुई नक्सली घटनाओं का मुख्य आरोपी है। गुनियाँथर पंचायत में जमीन के अंदर छिपाकर रखे विस्फोटक सामग्री की बरामदगी और निर्माणाधीन पुल के ठेकेदार से लेवी वसूली की घटनाओं में तालो का नाम प्रमुखता से सामने आया था। तालो के खिलाफ झारखंड और बिहार में कुल चार मामले दर्ज हैं। इनमें से एक मामला विस्फोटक बरामदगी का है, जिसमें भेलवाघाटी थाना कांड संख्या 07/20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके अलावा, 2020 में ठेकेदार और सुरक्षा गार्ड से मारपीट व धमकी के मामले में भी वह वांछित था।

    पुलिस टीम की भूमिका।

    इस कार्रवाई में अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार, एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद, और भेलवाघाटी थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही। एसएसबी की 35 बी टीम के सहयोग से इस अभियान को अंजाम दिया गया।

    तालो मरांडी के खिलाफ पुराने केस।

    तालो के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में चकाई थाना क्षेत्र के दो प्रमुख कांड शामिल हैं। इनमें 2018 का मामला (कांड संख्या 91/18) और 2019 का मामला (कांड संख्या 11/19) प्रमुख हैं, जिनमें हत्या, विस्फोटक पदार्थ और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए थे।

    पुलिस की कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा संदेश।

    गिरिडीह पुलिस की यह कामयाबी नक्सलवाद के खिलाफ जारी मुहिम में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह गिरफ्तारी न केवल सीमावर्ती इलाकों में नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ाएगी।

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट..

  • गिरिडीह : सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम,ग्रामीणों से सीधा संवाद

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    गिरिडीह जिले में सरकार और प्रशासन मिलकर वंचित समुदायों के उत्थान की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज पीरटाड़ प्रखंड के नौकोनिया गांव में एक अनोखा सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और सरकारी योजनाओं के लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।

    पारंपरिक स्वागत और कल्याण योजनाओं की जानकारी।
    कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ, जहां उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागतकिया। उपायुक्त ने ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और अपील की कि सभी इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

    मनरेगा कार्ड और ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण।
    कार्यक्रम में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने जरूरतमंदों के बीच मनरेगा जॉब कार्ड वितरित किए। साथ ही, बढ़ती ठंड को देखते हुए गर्म कपड़े और कंबल बांटे गए, ताकि ग्रामीण शीतलहर से बच सकें। उपायुक्त ने ठंड से बचाव के लिए जरूरी एहतियात बरतने की अपील भी की।

    बच्चों के लिए खेल सामग्री और शैक्षणिक सामग्रियां वितरित।
    उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बच्चों को पढ़ाई और खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खेल सामग्री जैसे बैट, बॉल, फुटबॉल और शैक्षणिक सामान—कॉपी, पेन, पेंसिल—साथ ही स्वेटर, जूते और मोजे वितरित किए गए। इस दौरान उपायुक्त ने बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई और रुचियों के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए।

    गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान।
    कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं का गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन किया गया। उपायुक्त ने गर्भवती महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए सात्विक और पौष्टिक भोजन के महत्व पर जोर दिया। महिलाओं को उचित आहार और स्वच्छता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।

    सामुदायिक पुलिसिंग: भरोसे और जुड़ाव की पहल।
    इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने सामुदायिक पुलिसिंग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह कार्यक्रम पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का जरिया है। ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी सुरक्षा और भलाई प्रशासन की प्राथमिकता है।

    अधिकारियों की उपस्थिति।
    कार्यक्रम में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, सीआरपीएफ के पदाधिकारी, और कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सभी ने सामुदायिक जुड़ाव को और सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
    गिरिडीह के सुदूर इलाकों में आयोजित यह सामुदायिक कार्यक्रम सिर्फ योजनाओं के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सरकार और प्रशासन की ओर से जरूरतमंदों तक पहुंचने की एक सकारात्मक पहल थी। नौकोनिया गांव के इस आयोजन ने दिखाया कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव की राह आसान हो जाती है।

     

  • झारखंड पुलिस का नया प्लान:‘फ्रेंड्स एंड एनिमी’ लिस्ट”

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………

     झारखंड पुलिस अब पुरानी फिल्मी स्टाइल में आ गई है! याद है वो डायलॉग? “दोस्ती बड़ी चीज़ है, दुश्मन को माफ़ करना उससे भी बड़ी चीज़ है”। लेकिन यहां मामला उल्टा है। झारखंड पुलिस अब दोस्तों और दुश्मनों की पूरी लिस्ट तैयार करने में जुट गई है।

    दोस्त और दुश्मन का हिसाब किताब

    राज्य के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस नए प्लान की शुरुआत की है। सभी जिलों के एसपी, डीआईजी, और आईजी को आदेश दिया गया है कि हर थाने में दो लिस्ट बनाई जाए।

    • लिस्ट 1: “नो योर फ्रेंड्स” – मतलब, जो लोग पुलिस का साथ देते हैं, उनकी लिस्ट।
    • लिस्ट 2: “नो योर एनिमी” – यानी, उग्रवादी, अपराधी, और वो लोग जो इनका समर्थन करते हैं।

    इन दोनों लिस्टों का दस्तावेजीकरण डीएसपी और एसपी स्तर पर होगा।

    कैसे बनेगी ये लिस्ट?

    पुलिस थानों में दो श्रेणियों की लिस्ट तैयार होगी :

    1. दोस्तों की लिस्ट में वे लोग होंगे जो पुलिस का समर्थन करते हैं।
    2. दुश्मनों की लिस्ट में उग्रवादी, अपराधी, उनके ओवरग्राउंड वर्कर, और उनके मददगार।

    अब होगा क्या?
    जब ये लिस्ट बन जाएगी, तो पुलिस अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी करेगी।

    क्या है प्लान के पीछे का मकसद?

    झारखंड में उग्रवाद और अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस का ये नया कदम लिया गया है। दोस्तों की पहचान से पुलिस को सहयोग मिलेगा, और दुश्मनों की लिस्ट से पुलिस को सीधे ऐक्शन लेने का मौका।

    लोगों का क्या कहना है?

    कुछ लोग कह रहे हैं कि पुलिस अपने दोस्तों की मदद से अपराध पर रोक लगाएगी।

    वहीं, आलोचकों का कहना है कि पुलिस की दोस्ती और दुश्मनी की परिभाषा क्या होगी, ये तो वक्त ही बताएगा।

    अब देखना ये है कि ये “फ्रेंड्स एंड एनिमी लिस्ट” झारखंड पुलिस को अपराध रोकने में कितना मदद करती है। तब तक, गली में सावधान रहिए… क्या पता आप दोस्त की लिस्ट में हों या दुश्मन की!

     

     

  • झारखंड : पुलिस का बड़ा दावा माओवाद और अपराध पर 2024 में कसी नकेल!

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …………

    झारखंड पुलिस ने 2024 की समाप्ति के साथ अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया है। दावा है कि राज्य में नक्सलवाद, अपराध, साइबर क्राइम, और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।

    आईजी (ऑपरेशन) एवी होमकर की मानें तो पुलिस ने माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए 244 माओवादियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एसएसी सदस्य जया दी उर्फ चिंता, 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर शंभू गंझू और सीताराम रजवार जैसे कुख्यात नाम शामिल हैं। इसके अलावा 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 9 मुठभेड़ों में मारे गए, और 123 हथियार बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि सीपीआई (माओवादी) से अलग हुए समूह तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) के कई उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनपर कुल 36 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने 246 किलो विस्फोटक, 13.39 लाख की लेवी के रुपए , और 239 आईईडी भी बरामद करने का दावा किया हैं।

    नक्सलवाद रोकने पर ठोस नीति नहीं ।  

    झारखंड की पहाड़ियों में अब भी नक्सलियों की गतिविधियां खत्म नहीं हुईं। सवाल है कि ये गिरफ्तारियां राज्य के युवाओं को माओवादी संगठन से जुड़ने से कैसे रोकेंगी इस पर  कोई थोड़ प्लानिंग अभी तक नहीं दिखती ।

    साइबर क्राइम और मादक पदार्थों पर नकेल का दावा

    2024 में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े 1295 मामलों में 971 गिरफ्तारियां कीं और 8.18 करोड़ रुपये जब्त किए। “प्रतिबिंब एप” के जरिए 274 मामलों का समाधान और 77 लाख की वसूली ने तकनीकी अभियानों को एक नया आयाम दिया।
    मादक पदार्थों के खिलाफ 1407 किलो अफीम और 4251 किलो गांजा जब्त किया गया। 3975 एकड़ में फैली अफीम की खेती नष्ट की गई।

    अपराध पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों का खेल?

    154 अपराधियों की गिरफ्तारी, 97 संगठित अपराध के मामलों का निपटारा और अलकायदा के 4 आतंकियों की गिरफ्तारी—सुनने में जरूर बड़ा लगता है। लेकिन झारखंड की सड़कों पर बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पुलिस की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

    नया साल, नई चुनौती!

    झारखंड पुलिस ने 2025 के लिए जनता को शुभकामनाएं दी हैं और अपराध व उग्रवाद से मुक्ति का संकल्प दोहराया है। लेकिन क्या यह संकल्प सिर्फ प्रेस बयान तक सीमित रहेगा, या झारखंड सचमुच शांति और सुरक्षा के नए अध्याय की ओर बढ़ेगा? यह सवाल अभी भी बाकी है।

     

     

     

  • पुलिस और प्रशासन में बड़ा उलटफेर: नए साल में नई जिम्मेदारियां!

    RANCHI: 1 जनवरी 2025 से झारखंड के पुलिस विभाग में 6 एसपी अधिकारी डीआइजी रैंक में और 3 डीआइजी अधिकारी आइजी रैंक में प्रमोट हो जाएंगे। विभागीय प्रोन्नति बोर्ड की बैठक में हाल ही में यह बड़े फैसले लिए गए थे।

    कौन कहां जा रहा है?
    आइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    अनूप बिरथरे: डीआइजी रांची से बने आइजी एसटीएफ।
    सुनील भास्कर: डीआइजी हजारीबाग से बने आइजी पलामू।
    मयूर पटेल कन्हैया लाल: डीआइजी जैप से बने आइजी मानवाधिकार।

    डीआइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    चंदन कुमार सिन्हा: एसएसपी रांची, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर रांची में ही बने रहेंगे।
    अजीत पीटर डुंगडुंग: एसपी देवघर, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर वहीं बने रहेंगे।
    प्रियदर्शी आलोक: एसपी एसटीएफ से बने डीआइजी रेल।
    अंबर लकड़ा: जैप-3 गोविंदपुर से प्रमोट होकर बने डीआइजी दुमका।
    अनुरंजन किस्पोट्टा: एसपी सीआइडी से बने डीआइजी विशेष शाखा।
    चंदन कुमार झा: एसपी विशेष शाखा से बने डीआइजी एसआइबी।

    प्रोफार्मा प्रोन्नति में कौन शामिल?

    राकेश बंसल: भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में निदेशक के तौर पर आइजी रैंक।
    जया राय और शिवानी तिवारी: एनआइए और सीबीआइ में एसपी रहते हुए डीआइजी रैंक।
    आईएएस अफसरों का प्रमोशन भी चर्चा में!
    झारखंड में हाल ही में 13 आईएएस अधिकारियों को विशेष सचिव रैंक में प्रमोट किया गया है। इनमें अजय कुमार सिंह और डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी को अपर मुख्य सचिव का दर्जा मिला।

    विशेष सचिव बने अफसर:
    रविशंकर शुक्ला, नेहा अरोड़ा, संदीप सिंह, संजीव कुमार बेसरा, अजयनाथ झा और अन्य।

    इसके अलावा गैर-प्रशासनिक सेवा से भी 7 अफसरों को आईएएस में प्रमोट किया गया है। इस फैसले से झारखंड की प्रशासनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

    तो झारखंड के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे को मिलेंगी नई दिशाएं और जिम्मेदारियां।

  • झारखंड : आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को मिली प्रोन्नति की सौगात

    झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में इस समय प्रोन्नति का दौर चल रहा है। राज्य सरकार ने एक दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों को प्रोन्नति प्रदान की है। इनमें अजय कुमार सिंह और डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी को अपर मुख्य सचिव के रैंक में प्रोन्नति दी गई है। इसके अलावा, 13 अधिकारियों को विशेष सचिव के रैंक में पदोन्नत किया गया है।

    विशेष सचिव के रैंक में शामिल ये अधिकारी. 
    रविशंकर शुक्ला, नेहा अरोड़ा, संदीप सिंह, संजीव कुमार बेसरा, अजयनाथ झा, अक्षय कुमार सिंह, मनमोहन प्रसाद, कुमुद सहाय, रविरंजन, शशि भूषण मेहरा, प्रदीप तिग्गा, पूनम प्रभावती, और मनोहर मरांडी को इस सूची में शामिल किया गया है। फिलहाल सभी अधिकारी अपने वर्तमान पदस्थापना स्थलों पर ही काम करेंगे।

    जनवरी में नई तैनाती की संभावना. 
    नव प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों को जनवरी 2024 में नई जगहों पर तैनात किया जाएगा। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि गैर-प्रशासनिक सेवाओं से भी सात अधिकारियों को आईएएस में प्रोन्नति दी जाएगी, जिसके लिए 21 नाम यूपीएससी को भेजे गए हैं।

    केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटेंगे एमएस भाटिया. 
    झारखंड कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी एडीजी एमएस भाटिया जनवरी में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटने वाले हैं। फिलहाल वे सीआरपीएफ में आइजी एडमिन के रूप में कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने पहले ही उन्हें एडीजी रैंक पर प्रोफार्मा प्रोन्नति प्रदान की थी। उनकी वापसी के बाद डीजी रैंक में प्रोन्नति दी जाएगी।

    डीजी रैंक में कौन-कौन होंगे शामिल?
    राज्य में जनवरी 2024 में डीजी के तीन पद खाली होने जा रहे हैं। इनमें 1989 बैच के अजय कुमार सिंह, 1992 बैच के आरके मल्लिक, और 1993 बैच के मुरारी लाल मीणा के नाम शामिल हैं। संभावना है कि 30 साल की सेवा पूरी कर चुके अधिकारी इन पदों को भरने के लिए चुने जाएंगे। एमएस भाटिया के साथ

    संपत मीणा की भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापसी की संभावना जताई जा रही है। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की प्रोन्नति ने प्रशासनिक हलकों में नई ऊर्जा का संचार किया है। सभी की नजरें अब जनवरी 2024 पर टिकी हैं, जब तैनाती और नई जिम्मेदारियां तय होंगी।

  • खौफनाक हत्या कांड: गिरिडीह में जनता का गुस्सा चरम पर

    गिरिडीह : गिरिडीह के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में एक युवक की निर्मम हत्या ने इलाके में उबाल ला दिया है। धारदार हथियारों से हमला कर दामोदर यादव की हत्या कर दी गई, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है।

    गांव का गुस्सा पुलिस के दरवाजे पर.
    हत्या की खबर के बाद कबरीबाद-चुंजका क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मुफ्फसिल थाना पहुंचे। गुस्से से लाल लोगों ने मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी थे, जो न्याय की मांग कर रहे थे।

    मांग साफ है: आरोपी को फांसी दो।
    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं दी जाती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

    हमले की खौफनाक तस्वीर।
    दामोदर यादव पर 20 से 25 युवकों के झुंड ने कबरीबाद माइंस के पास धारदार हथियारों से हमला किया। इस बर्बर हमले में गंभीर रूप से घायल दामोदर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने घटना के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया। अब तक 11 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, और अन्य की तलाश में छापेमारी जारी है।\

    जयराम महतो की इंट्री । 

    घटना की जानकारी मिलते ही डुमरी के विधायक जय राम महतो भी गिरिडीह पहुंचे और मामले की जानकारी ली और पुलिस प्रशासन से बात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग की ।

    सुरक्षा का दावा, लेकिन सवाल बरकरार। 
    हत्या के बाद मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसडीपीओ जितवाहन उरांव और डीएसपी नीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। हालांकि, घटना ने इलाके में कानून व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

    ग्रामीणों का कहना है, “अगर पुलिस सतर्क होती तो यह घटना नहीं होती। हमें सुरक्षा चाहिए, सिर्फ दावे नहीं।”

    सामाजिक ताने-बाने पर असर। 
    इस निर्मम हत्या ने गिरिडीह के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर जनता का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हुआ है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाओं ने भय और असुरक्षा का माहौल बना दिया है।

    पुलिस प्रशासन पर अब यह दबाव है कि वह दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाए और इलाके में सुरक्षा का भरोसा बहाल करे।

  • मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है और इस पर  हमला कतई बर्दास्त नहीं:मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

    गिरिडीह : झारखंड हाईकोर्ट द्वारा गुरुवार को गिरिडीह नगर निगम के टोल टैक्स वसूली पर रोक के बाद भी शुक्रवार को टोल टैक्स की वसूली की जा रही थी । जब पत्रकार टोल टैक्स की वसूली की खबर बनाने पहुंचे तो टोल टैक्स की वसूली कर रहे कुछ गुंडों ने पत्रकार पर हमला कर दिया जिसमे पत्रकार अमर सिन्हा जख्मी हो गये, जख्मी अवस्था मे उन्हे सदर अस्पताल मे इलाज के लिए लाया गया । घंटना की खबर मिलते ही नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू सदर अस्पताल पहुंचे और घायल पत्रकार का हाल चाल लिया और कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा  स्तम्भ है और इस पर  हमला कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। दोषी को कड़ी सजा मिलेगी और उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा ।

    बता दें कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने गिरिडीह नगर निगम को निर्देश दिया था कि टोल टैक्स की वसूली पर रोक तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। साथ ही, आदेश की प्रति नगर विकास विभाग के मुख्य सचिव, गिरिडीह जिले के उपायुक्त (DC), गिरिडीह नगर निगम के आयुक्त और गिरिडीह के एसडीएम को भी भेज दिया गया था ।

  • झारखंड में IPS अधिकारियों का बड़ा फेरबदल! जनवरी में बदलेंगे कई जिलों के एसपी!

    RANCHI: झारखंड में नए साल की शुरुआत आईपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों और प्रोन्नतियों के साथ होगी। एक जनवरी से नौ आईपीएस अफसरों की प्रोन्नति प्रभावी हो जाएगी, जिसके बाद उनके नए पदस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन बदलावों से राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल होने की संभावना है।

    तीन डीआईजी बनेंगे आईजी, छह एसपी को मिलेगा डीआईजी का रैंक. 
    प्रोन्नति पाने वाले अधिकारियों में रांची के डीआईजी अनूप बिरथरे, हजारीबाग के डीआईजी सुनील भास्कर और जैप के डीआईजी पटेल मयूर कन्हैयालाल शामिल हैं, जिन्हें आईजी रैंक में प्रोन्नति मिली है। ये तीनों 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वहीं, सीनियर एसपी रैंक के छह आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी रैंक में पदोन्नत किया गया है।

    इनमें रांची के एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा, देवघर के एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग, विशेष शाखा के एसपी चंदन कुमार झा, झारखंड जगुआर के एसपी प्रियदर्शी आलोक, सीआईडी के एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा और जैप-3 के कमांडेंट अंबर लकड़ा शामिल हैं।

    केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों को भी प्रोन्नति. 
    केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईपीएस अधिकारियों को भी प्रोफार्मा प्रोन्नति दी गई है। एनआईए की एसपी जया राय और सीबीआई की एसपी शिवानी तिवारी को डीआईजी रैंक में प्रोन्नति दी गई है। ये अधिकारी अपनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटते ही नए पदों पर योगदान करेंगी।

    मुख्य सचिव की बैठक में लगी मुहर. 
    इस बड़े बदलाव पर एक दिन पहले ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक में मुहर लगी। इसी क्रम में 2007 बैच के आईपीएस राकेश बंसल, जो फिलहाल भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में निदेशक के रूप में तैनात हैं, को भी आईजी रैंक में प्रोन्नति दी गई है।

    झारखंड में प्रशासनिक हलचल तेज.
    इन तबादलों और प्रोन्नतियों से राज्य के कई जिलों में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव आएगा। रांची, देवघर, हजारीबाग और अन्य जिलों में नए एसपी और डीआईजी की तैनाती से नीतियों और कानून-व्यवस्था में नए दृष्टिकोण की उम्मीद की जा रही है।

    क्या कहते हैं जानकार?
    इस बदलाव को राज्य में प्रशासनिक सुधार और नई ऊर्जा का संकेत माना जा रहा है। खासकर, उन जिलों में जहां कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। इन तबादलों से झारखंड में एक नई प्रशासनिक दिशा की उम्मीद है।