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  • हेमंत सोरेन 2.0 सरकार का पहला बजट पेश , हेमंत सोरेन अपने आत्मबल से लबरेज दिखे

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

    झारखंड विधानसभा में जब वित्त मंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, तो कागज़ पर यह एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज़ लगा। लेकिन जब इस बजट की तह में उतरते हैं, तो सवाल उठते हैं कि क्या यह वास्तव में झारखंड की जनता के सपनों और उम्मीदों का बजट है या फिर आंकड़ों की बाजीगरी मात्र?

    बजट का आकार बड़ा, लेकिन क्या प्रभाव भी बड़ा?

    झारखंड सरकार ने इस बार का बजट 1,45,400 करोड़ रुपये का रखा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% अधिक है। सरकार ने यह भी दावा किया कि राजस्व व्यय में 20.48% की वृद्धि हुई है और पूंजीगत व्यय में 7.81% की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन असली सवाल यह है कि इस बढ़े हुए बजट का लाभ किसे मिलेगा?

    सरकार ने दावा किया कि सामाजिक क्षेत्र के लिए 62,840 करोड़ रुपये और आर्थिक क्षेत्र के लिए 44,675 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लेकिन यह पैसा किन योजनाओं में और किस तरह खर्च होगा, इसकी ठोस रूपरेखा बजट भाषण में नदारद रही।

    क्या बजट सिर्फ सरकारी आश्वासन है?

    राज्य की अर्थव्यवस्था को 2030 तक 10 ट्रिलियन रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इसके लिए ठोस रणनीति क्या होगी? बजट में इसका जवाब नहीं मिलता।

    मंईयां सम्मान योजना के तहत 18 से 50 साल की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया गया है। इसके लिए 13,363 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। लेकिन दो महीने तक राशि रुकी रही, और अब सरकार होली के पहले एकमुश्त 7500 रुपये देने का वादा कर रही है। सवाल यह है कि अगर बजट में धनराशि पहले से आवंटित थी, तो यह देरी क्यों हुई?

    मंईयां सम्मान योजना

    झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार की सत्ता में वापसी के बाद पेश पहले बजट में मंईयां सम्मान का असर दिखा. मंईयां सम्मान देने वाले विभाग का बजट एक झटके में लगभग डबल हो गया. 11 से अधिक विभागों के बजट में कटौती करते हुए सरकार ने एक विभाग का बजट 95 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शिक्षा और कल्याण विभाग को छोड़ सभी विभागों के बजट पर कैंची चला दी है. वर्ष 2025-26 के बजट में सबसे बड़ा फायदा कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग को हुआ है. इस मद में सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में कुल बजट की राशि का 8.96 फीसदी का प्रावधान किया था. वर्ष 2025-26 के बजट में इसमें बंपर बढ़ोतरी करते हुए 17.47 प्रतिशत कर दिया है. यह पिछले बजट की तुलना में करीब 95 प्रतिशत अधिक है. शिक्षा विभाग के बजट में 0.69 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है. ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने की वजह से सरकार ने पेंशन मद में बजट में 0.22 प्रतिशत की वृद्धि की गयी

    रोजगार और आर्थिक विकास: सिर्फ़ दावे या कोई ठोस योजना?

    झारखंड में बेरोजगारी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस बजट में युवाओं के लिए कितनी नौकरियां सृजित होंगी? इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने यह तो बताया कि आर्थिक विकास दर 7.5% रहेगी, लेकिन इस विकास दर का आम जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया।

    कृषि क्षेत्र और छोटे व्यापारियों के लिए बजट में क्या ठोस योजनाएं हैं? राज्य में लाखों किसान सूखे और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके लिए सिर्फ़ कर्ज़माफी के दावे हैं, स्थायी समाधान नहीं।

    बजट में कर्ज़ और घाटे का गणित

    सरकार ने दावा किया कि राजकोषीय घाटा 1.1% तक सीमित रखा गया है और ऋण-जीडीपी अनुपात को 27.3% पर लाने का लक्ष्य है। लेकिन यह आंकड़े तब तक बेकार हैं जब तक कि राज्य के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए कोई ठोस रणनीति न बने। सरकार का अनुमान है कि 2025-26 में 61,056 करोड़ रुपये राजस्व आएगा, लेकिन यह कैसे आएगा, इसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया।

    क्या यह जनता का बजट है?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार का यह पहला बजट कई मायनों में प्रतीकात्मक है। यह बजट राज्य की राजनीतिक मजबूरियों को दर्शाता है। इसमें विकास के दावे हैं, लेकिन योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठते हैं।

    झारखंड जैसे राज्य, जहां के संसाधनों का बड़ा हिस्सा बाहरी कंपनियों और राज्यों को जाता है, वहाँ यह बजट आत्मनिर्भरता का संदेश नहीं देता। रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और राज्य की जनता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में कोई ठोस पहल नहीं दिखती।

    क्या यह बजट जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप है?

    झारखंड का यह बजट आंकड़ों और दावों से भरा पड़ा है, लेकिन जब हम इसकी गहराई में जाते हैं, तो यह कहीं न कहीं खोखला नज़र आता है। बजट भाषण में ‘स्वाभिमान’, ‘स्वावलंबन’ और ‘विकास’ जैसे शब्दों की भरमार थी, लेकिन क्या यह सिर्फ़ भाषण तक सीमित रह जाएगा, या ज़मीनी हकीकत में भी बदलाव लाएगा? यह देखना अभी बाकी है।

  • इनर व्हील क्लब गिरिडीह सनशाइन ने सर्वाइकल कैंसर जागरूकता के लिए भव्य कार रैली का आयोजन किया

    गिरिडीह: इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक भव्य कार रैली का आयोजन किया। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह “अपराजिता” के तहत किया गया और डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन अलकनंदा बक्सी द्वारा दिए गए लक्ष्य के अनुरूप था।

    कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन

    रैली की शुरुआत पूर्व डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन पूनम सहाय द्वारा गुब्बारे उड़ाकर की गई। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वाइकल कैंसर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और जागरूकता फैलाने की शपथ ली। आयोजन में शामिल सभी कारों को विभिन्न प्रकार के संदेशों और पोस्टरों से सजाया गया था, जिससे कैंसर से बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान क्लब की सदस्यों ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है, लेकिन समय रहते इसका पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है।

     

    रैली में उत्साहपूर्वक शामिल हुए क्लब के सदस्य

    रविवार की सुबह आयोजित इस विशेष रैली में 20 कारों ने भाग लिया, जिनमें क्लब की 40 से अधिक महिलाएँ शामिल हुईं। इस रैली का मुख्य उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाना और इसके रोकथाम के उपायों के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाना था। गिरिडीह की मुख्य सड़कों से गुज़रती हुई इन सजी-धजी गाड़ियों ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। कारों पर लगाए गए स्लोगन और बैनर लोगों के लिए प्रेरणादायक संदेश दे रहे थे। इनमें से कुछ प्रमुख संदेश थे:

    • “सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है, जागरूकता ही सुरक्षा है!”
    • “नियमित जांच कराएं, स्वस्थ जीवन अपनाएं!”
    • “टीकाकरण से करें बचाव, सर्वाइकल कैंसर को भगाएं दूर!”

    सर्वश्रेष्ठ कारों को किया गया सम्मानित

    इस रैली के दौरान सबसे सुंदर और संदेशपरक तरीके से सजाई गई कारों को सम्मानित किया गया।

    • सर्वश्रेष्ठ कार: सचिन राखी झुनझुनवाला की कार को पहला स्थान प्राप्त हुआ।
    • द्वितीय स्थान: पूनम सहाय की कार को दूसरा स्थान मिला।
    • तृतीय स्थान: आईपीपी सुमन गौरीसरिया की कार तीसरे स्थान पर रही।

    इन विजेताओं को आगामी 8 मार्च को विशेष पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस तरह के आयोजनों से समाज में जागरूकता फैलाने में कितनी मदद मिलती है।

    जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने का प्रयास

    इस अभियान के तहत इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर टीकाकरण के महत्व के बारे में जानकारी दी। क्लब की अध्यक्ष सोनाली तरवे ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि लोगों को सही जानकारी देना भी है, ताकि वे समय पर इस बीमारी से बचाव के लिए कदम उठा सकें।”

    क्लब सचिव राखी झुनझुनवाला ने बताया कि क्लब की सदस्य समय-समय पर विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को इस विषय पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुँच सके।

    कार्यक्रम में क्लब के सभी पदाधिकारी रहे सक्रिय

    इस कार्यक्रम को सफल बनाने में क्लब की कई प्रमुख सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। क्लब सचिव राखी झुनझुनवाला, आईपीपी सुमन गौरीसरिया, कोषाध्यक्ष स्मृति आनंद, आईएसओ सुनीता शर्मा, और संपादक दीप्ति सिन्हा ने मिलकर इस आयोजन को प्रभावशाली बनाया।

    कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी महिलाओं को जानकारी दी और बताया कि कैंसर से बचने के लिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना कितना ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को अगर बार-बार असामान्य रक्तस्राव, पीठ दर्द, पेशाब में जलन, या असहजता महसूस हो रही हो तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    सर्वाइकल कैंसर क्या  है?

    सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन रोके जाने योग्य कैंसर है, जो गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय  और योनि  को जोड़ने वाला निचला हिस्सा होता है।

    सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण

    सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण है। HPV एक सामान्य वायरस है, जो मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। हालांकि, यह संक्रमण आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह कैंसर में परिवर्तित हो सकता है।

    सर्वाइकल कैंसर: एक गंभीर मुद्दा

    सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण के कारण होता है। यह एक धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर है, जिसे यदि प्रारंभिक अवस्था में पहचान लिया जाए तो सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित उपाय अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है:

    1. HPV टीकाकरण: यह 9 से 26 वर्ष की आयु की लड़कियों और महिलाओं के लिए अत्यधिक प्रभावी होता है।
    2. नियमित पैप स्मीयर टेस्ट: यह जांच सर्वाइकल कैंसर के प्रारंभिक संकेतों का पता लगाने में मदद करती है।
    3. सुरक्षित यौन संबंध: जागरूकता और सुरक्षा उपाय अपनाने से इस वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है।
    4. स्वस्थ जीवनशैली: धूम्रपान से बचाव, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।

    इनर व्हील क्लब का सामाजिक योगदान

    इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन हमेशा से सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित रहा है। यह क्लब न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर काम करता है, बल्कि समाज के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सक्रिय रहता है। क्लब की सदस्याओं का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।

    इनर व्हील क्लब ने इस जागरूकता अभियान के तहत कुछ प्रमुख संकल्प लिए:

    • महिलाओं को मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए स्थानीय अस्पतालों से संपर्क करना।
    • स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवा लड़कियों को HPV वैक्सीन के महत्व के बारे में जागरूक करना।
    • कैंसर सर्वाइकल के अलावा अन्य प्रकार के कैंसर जैसे स्तन कैंसर पर भी जागरूकता अभियान चलाना।
    • समाज में स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी कार्य करना।

    इस आयोजन की सफलता ने साबित कर दिया कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर किसी समस्या के समाधान की दिशा में कार्य करें, तो एक बड़े बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। इस रैली ने न केवल गिरिडीह में बल्कि आसपास के इलाकों में भी सर्वाइकल कैंसर जागरूकता की एक नई लहर पैदा की है।

  • बिना नेता प्रतिपक्ष के पारित होगा झारखंड विधान सभा का बजट !

    भाजपा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की खोज जारी, पर कब खत्म होगा इंतजार?

    – परवेज़ आलम

    झारखंड में विधानसभा चुनाव को बीते तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन क्या मजाल कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर कोई फैसला ले पाई हो! बजट सत्र की गूंज विधानसभा में गूंजने लगी है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल के नेता का नाम अब तक सस्पेंस बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब सत्ता पक्ष अपनी जिम्मेदारियों में जुटा हुआ है, तो विपक्ष का यह ढुलमुल रवैया किस ओर इशारा करता है?

    बिना नेता प्रतिपक्ष के बजट ! यह कैसी राजनीति?

    3 मार्च को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में बजट पेश करने वाले हैं। लेकिन यह बजट इतिहास में इस बात के लिए भी दर्ज होगा कि जब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा, तो वहां विपक्ष का कोई मुखिया मौजूद नहीं होगा! यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीर चूक मानी जा रही है। यह महज संयोग नहीं, बल्कि भाजपा के आंतरिक असंतुलन का संकेत भी देता है।

    विधानसभा अध्यक्ष की नाराजगी, लेकिन भाजपा बेफिक्र!

    झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जता दी है। उनका साफ कहना है कि विपक्ष में नेता का होना अनिवार्य है, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। लेकिन क्या भाजपा इस बात को गंभीरता से ले रही है? या फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए झारखंड की राजनीतिक तस्वीर फिलहाल किसी प्राथमिकता में नहीं है?

    दिल्ली में अटकी फाइल, इंतजार में रांची!

    नेता प्रतिपक्ष का चयन आखिर क्यों नहीं हो पा रहा? सूत्रों की मानें तो भाजपा की केंद्रीय कमेटी अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। पार्टी के कई बड़े नेता झारखंड आ चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ कयास और अटकलों का दौर चलता है, नतीजा कुछ नहीं निकलता।

    कौन होगा अगला नेता प्रतिपक्ष? संभावित नामों की सूची लंबी!

    अगर झारखंड की राजनीति के गलियारों में सुगबुगाहट सुनी जाए, तो भाजपा के भीतर कई नामों की चर्चा है।

    1. बाबू लाल मराण्डी :पूर्व मुख्य मंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष,विधायी कार्यों का लंबा अनुभव
    2. सीपी सिंह: रांची विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कद्दावर नेता।
    3. नीरा यादव: कोडरमा विधायक, महिला चेहरा।
    4. नवीन जायसवाल: हटिया विधायक, ओबीसी समाज से आते हैं और भाजपा की सामाजिक संतुलन नीति के तहत इनका नाम भी चर्चा में है।

    लेकिन असल सवाल यह है कि चर्चा कब खत्म होगी और भाजपा अपने नेता के नाम पर अंतिम मुहर कब लगाएगी?

    प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी खाली, कब मिलेगा नया अध्यक्ष?

    झारखंड भाजपा सिर्फ नेता प्रतिपक्ष की ही नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष की भी तलाश में है। रघुवर दास के ओड़ीसा के राज्यपाल से इस्तीफे के बाद से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि इन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद कि जिम्मेवारी मिल सकती है पर आलाकमान कोई निर्णय लेने कि स्थिति मे फिलवक्त नहीं दिखती । पार्टी संगठन के स्तर पर सांगठनिक चुनाव अभी जारी है और जिला स्तर पर इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आएगा। लेकिन तब तक कार्यकर्ताओं को सिर्फ इंतजार ही करना होगा।

    क्या भाजपा की रणनीति झारखंड में कमजोर पड़ रही है?

    झारखंड में भाजपा को एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है, लेकिन पार्टी का यह ढुलमुल रवैया न केवल कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस पैदा कर रहा है, बल्कि इसका राजनीतिक नुकसान भी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। अगर भाजपा जल्द ही नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं करती, तो यह उसकी साख पर सवाल खड़े करने वाला साबित हो सकता है।

    आखिर कब खत्म होगा यह इंतजार?

    झारखंड में भाजपा का राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर कब खत्म होगा? भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कब नींद से जागेगा? और क्या झारखंड में विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए भाजपा सच में गंभीर है? ये तमाम सवाल भाजपा के लिए जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही झारखंड की जनता के लिए भी। क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता के साथ एक मजबूत विपक्ष भी जरूरी होता है।

  • जेल ब्रेक: सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, 6 कक्षपाल निलंबित

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम

    …….तो आखिर वही हुआ जिसका डर था। एक और जेल ब्रेक, एक और सुरक्षा में सेंध, और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए! रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से फरार PLFI उग्रवादी समीर तिर्की का 24 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस जेल से कैदी इतने आराम से फरार कैसे हो जाते हैं?

    तीन लेयर की सुरक्षा में आखिर सेंध कैसे?

    बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। तीन परतों की सुरक्षा व्यवस्था होने का ढोल पीटा जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि इन दावों के बीच से ही समीर तिर्की चकमा देकर निकल गया! सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि जेल प्रशासन की नाक के नीचे आखिर यह हुआ कैसे? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर कुछ और?

    जेल प्रशासन की घोर लापरवाही, 6 कक्षपाल निलंबित

    हर बार की तरह इस बार भी लापरवाही का ठीकरा जेल प्रशासन पर फूटा है। जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने आनन-फानन में छह कक्षपालों को निलंबित कर दिया है। इनमें बीचा मुण्डा, सतन नायक, सोमन लोहार, राकेश कुमार सिंह, रामजीत महतो और गोपाल सिंह के नाम शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इनकी लापरवाही के चलते समीर तिर्की फरार हो सका। लेकिन क्या सिर्फ इन छह लोगों की गलती है, या फिर इसमें कोई अंदरूनी मिलीभगत भी है?

    जेलर और अधीक्षक का पद खाली, फिर कौन जिम्मेदार?

    अब ज़रा इस जेल की व्यवस्था पर गौर कीजिए। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न तो स्थायी अधीक्षक है और न ही स्थायी जेलर। मतलब यह कि जो लोग वहां तैनात हैं, वे केवल प्रभार में काम कर रहे हैं। तो फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या यह पूरा तंत्र ही ध्वस्त हो चुका है?

    कैदी निकला, कैमरे देखते रहे!

    कैदी के फरार होने का CCTV फुटेज भी सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि समीर तिर्की जेल के मुख्य गेट की ओर बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब मुख्य गेट पर 10 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, तो फिर समीर कैसे बच निकला? कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने जानबूझकर इसे अनदेखा किया? क्या यह एक सुनियोजित जेल ब्रेक था?

    समीर तिर्की: कौन है यह फरार कैदी?

    गुमला का रहने वाला समीर तिर्की कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह पहले पहाड़ी चिता नामक उग्रवादी संगठन से जुड़ा था, फिर जोनल कमांडर परमेश्वर गोप और एरिया कमांडर बसंत तिर्की के साथ कई वारदातों को अंजाम दिया। 2013 में अपहरण और हत्या के मामले में उसे पकड़ा गया था, और 2022 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

    प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली!

    24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। तमाम संभावित ठिकानों पर छापेमारी हो रही है, लेकिन नतीजा शून्य! रांची के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लेकर गुमला स्थित उसके घर तक, हर जगह तलाशी ली जा रही है, मगर कोई सुराग नहीं।

    जेल प्रशासन पर बड़े सवाल

    1. कैसे तीन लेयर की सुरक्षा में सेंध लगी?
    2. कैमरों के सामने कैदी बाहर निकलता रहा, कोई कुछ क्यों नहीं बोला?
    3. स्थायी अधीक्षक और जेलर की पोस्टिंग क्यों नहीं हुई?
    4. क्या यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है?

    इन सवालों के जवाब किसके पास हैं? या फिर यह भी किसी और जेल ब्रेक की तरह धीरे-धीरे भुला दिया जाएगा? प्रशासन मौन है, सरकार मौन है, लेकिन यह मामला मौन नहीं रहेगा।

  • स्कॉलर B.Ed कॉलेज में पांच दिवसीय लेक्चर सीरीज का आयोजन: छात्रों के बौद्धिक विकास पर जोर

    रिपोर्ट -चन्दन पांडेय

    गिरिडीह: शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि सोचने, समझने और आत्मविश्लेषण की क्षमता विकसित करना भी है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्कॉलर B.Ed कॉलेज, बनहत्ती में 1 मार्च से 5 मार्च 2025 तक पांच दिवसीय लेक्चर सीरीज का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों के बौद्धिक विकास, सकारात्मक चिंतन एवं सृजनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करना था।

    कार्यक्रम की भव्य शुरुआत

    कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला एवं डीएलएड प्रभारी डॉ. हरदीप कौर द्वारा मुख्य अतिथि गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह के प्राचार्य डॉ. अनुज कुमार एवं मुख्य वक्ता डॉ. मृत्युंजय प्रसाद (प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी) को पुष्पगुच्छ एवं सॉल भेंट कर स्वागत करने से हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

    शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रेरणादायक विचार

    प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला ने अपने स्वागत भाषण में अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार इस संस्थान को नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा सिर्फ जानकारी अर्जित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज को सशक्त बनाने में होना चाहिए।

    मुख्य अतिथि डॉ. अनुज कुमार ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, “आप भावी शिक्षक हैं, और समाज में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। आपको निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे आप शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन ला सकें।”

    मुख्य वक्ता डॉ. मृत्युंजय प्रसाद ने अपने व्याख्यान में सकारात्मक शिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “अगर शिक्षण में सकारात्मकता नहीं है, तो ऐसा शिक्षण किसी काम का नहीं। सकारात्मक शिक्षण राष्ट्र को ऊर्जा प्रदान करता है।” संस्कृत की पंक्तियों का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि जब हम साथ-साथ खेलेंगे, खाएंगे और पढ़ेंगे, तभी हमारा देश सशक्त बनेगा।

    लेक्चर सीरीज के विषय

    इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के तहत विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की गई:

    1. सकारात्मक शिक्षण वातावरण बनाए रखना और छात्र व्यवहार प्रबंधन की रणनीतियाँ
    2. भाषा विकास के सिद्धांत और प्रभावी भाषा कौशल को बढ़ावा देना
    3. बाल विकास के चरण: संज्ञानात्मक, सामाजिक विकास और भावनात्मक पहलू
    4. प्रभावी पाठ योजना बनाना और उद्देश्यों को विषय वस्तु के साथ संरेखित करना
    5. 21वीं सदी के लिए प्रभावी शिक्षण रणनीतियाँ

    आयोजन समिति और सहभागिता

    इस कार्यक्रम के समन्वयक आशीष राज, डॉ. संतोष कुमार चौधरी एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। मंच संचालन की जिम्मेदारी आशीष राज और डॉ. संतोष कुमार चौधरी ने संभाली, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संतोष कुमार चौधरी द्वारा किया गया।

    इस अवसर पर डॉ. सुधांशु शेखर जमैयार, रंजीत कुमार, स्मिता कुमारी समेत अन्य सहायक प्राध्यापकगण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में प्रशिक्षु छात्रों ने भाग लिया और अपने शैक्षिक विकास के लिए इस अवसर का लाभ उठाया।

    इस पांच दिवसीय लेक्चर सीरीज से  छात्रों को न केवल शिक्षण क्षेत्र की गहरी समझ प्रदान  करेगा , बल्कि उन्हें शिक्षण के आधुनिक और प्रभावी तरीकों से भी अवगत कराया जाएगा । यह पहल भविष्य के शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक साबित होगी और शिक्षा के क्षेत्र में एक नए परिवर्तन की नींव रखेगी

     

  • विधानसभा: लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर ! सीएम ने विधायकों को दिलाई लोकतांत्रिक मूल्यों की शपथ

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

    झारखंड विधानसभा के सभागार में जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माइक संभाला, तो उनका संदेश बिल्कुल स्पष्ट था— “विधानसभा भवन लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है!” और यह मंदिर किसी धर्म, जाति या व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं का पवित्र स्थल है।

    शनिवार को नव-निर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की इस पवित्रता को रेखांकित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “इस सदन में भले ही पक्ष और विपक्ष के विचार अलग हों, लेकिन यह लोकतांत्रिक व्यवस्था सबको साथ लेकर चलने के लिए है।”

    जनप्रतिनिधियों की पाठशाला!

    अब जरा समझिए, यह प्रशिक्षण सत्र कोई साधारण औपचारिकता नहीं थी।
    बजट सत्र से पहले विधायकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्मरण कराना था। यानी, उन्हें सिखाया गया कि कैसे प्रश्नकाल में सरकार से जवाब मांगा जाए, शून्यकाल में जनहित के मुद्दे उठाए जाएं, विधायिका की कार्यवाही को प्रभावी बनाया जाए, और सबसे जरूरी— लोकतंत्र की ताकत को समझा जाए। छठी झारखंड विधान सभा के सदस्यों के प्रशिक्षण को ध्यान में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

    बात सिर्फ विधायकों की नहीं, लोकतंत्र की गरिमा की भी!

    हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा,
    👉 “सीखने की कोई उम्र नहीं होती।”
    👉 “जो भी इस सदन में आते हैं, वे सीखते भी हैं और जनता की आकांक्षाओं को पटल पर रखते भी हैं।”
    👉 “सदन की कार्यवाही में सभी सदस्यों को साथ लेकर राज्य को समृद्ध और विकसित बनाने के लिए आगे बढ़ना जरूरी है।”

    यानी, यह सिर्फ सत्ता की कुर्सी का सवाल नहीं, जनता के प्रति जवाबदेही का संकल्प है।

    मुख्यमंत्री, राज्यसभा के उपसभापति, संसदीय कार्य मंत्री और अन्य गणमान्य

    सिर्फ भाषण नहीं, एक मजबूत संदेश!

    यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प था।
    झारखंड विधानसभा के प्रबोधन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधानसभाध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो, संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्रीगण और कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में विधायकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्मरण कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बजट सत्र के दौरान विधायकों को सदन की कार्यवाही को बेहतर ढंग से समझने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देने के लिए तैयार करना था।

    कार्यक्रम में विधायकों की भूमिका, प्रश्नकाल का महत्व, शून्यकाल, व्यवधान, विधि निर्माण, बजट और वित्तीय मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, नए और अनुभवी विधायकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया गया।

     

    सवाल यह है कि क्या यह सत्र महज औपचारिकता था या विधायकों ने वास्तव में कुछ सीखा?
    क्योंकि लोकतंत्र का यह मंदिर तभी पवित्र रहेगा, जब इसमें जनता की आवाज गूंजेगी, न कि सत्ता का अहंकार!

    तो अगली बार जब विधानसभा की कार्यवाही में हंगामा हो, तो याद रखिएगा— यहां सिर्फ कुर्सियों की नहीं, लोकतंत्र की परीक्षा होती है!

     

  •  मैट्रिक की हिंदी और विज्ञान परीक्षा रद्द , जैक ने नए शेड्यूल का किया ऐलान

    झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने मैट्रिक परीक्षा के दो अहम विषय—हिंदी और विज्ञान—की रद्द परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान कर दिया है ।  गौरतलब है कि  सोशल मीडिया पर पेपर लीक की खबर  सुर्खियां बनी थी और बाद मे जैक ने इन दोनों विषयों  की  परीक्षा रद्द कर दी  ।

    जैक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 18 फरवरी 2025 को आयोजित हिंदी (कोर्स A और B) और 20 फरवरी 2025 को हुई विज्ञान की परीक्षा को अमान्य घोषित कर दिया गया है। यानी इन परीक्षाओं को दोबारा आयोजित किया जाएगा।

    नया परीक्षा शेड्यूल जारी

    अगर आप भी उन छात्रों में शामिल हैं जिन्होंने यह परीक्षा दी थी, तो नए डेट्स नोट कर लीजिए—
    📌 हिंदी A और हिंदी B की पुनर्परीक्षा: 7 मार्च 2025 (शुक्रवार)
    📌 विज्ञान की पुनर्परीक्षा: 8 मार्च 2025 (शनिवार)

    अब छात्रों को दोबारा अपनी तैयारी करनी होगी, लेकिन सवाल यही है—बार-बार परीक्षा रद्द होने से छात्रों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?

  • झारखंड: बदलते वक़्त की नई तस्वीर

    गुजरात के कच्छ उत्सव की तरह झारखंड मे होगा  ‘नेतरहाट उत्सव’

    परवेज़ आलम की खास रपट

    झारखंड—एक ऐसी धरती, जो खनिजों की दौलत और अपार संभावनाओं से भरी हुई है। लेकिन क्या यह हिंदुस्तान के पर्यटन नक्शे पर उतना दमकता है, जितना इसे दमकना चाहिए? जवाब है—नहीं! मगर यह बदलने जा रहा है।

    झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर

    साल 2000 में बिहार से अलग होकर एक नया राज्य बना झारखंड। तब इसे हेल्थ रिसॉर्ट के तौर पर जाना जाता था। बंगाल के नामचीन चेहरे गर्मियों में यहीं सुकून पाते थे। यही वह जगह है जहां सर जेसी बोस ने ‘क्रेस्कोग्राफ मशीन’ बनाई और साबित किया कि पेड़ों में भी जीवन होता है। मशहूर गणितज्ञ पीसी महलनोबिस ने यहां भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की। और गोमो रेलवे स्टेशन—जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों को चकमा देकर विदा ली थी—अब ‘सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन’ कहलाता है।

    बदलाव की नई बयार

    पिछले चार महीनों में झारखंड सरकार ने कई नए कदम उठाए हैं। जमशेदपुर में स्काईडाइविंग शो हुआ , मेक माय ट्रिप के साथ साझेदारी हो चुकी है, चार ग्लास के शानदार पुल को मंजूरी मिल गई है, माइन टूरिज्म, नाइट सफारी और जंगल सफारी जैसी योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इन बदलावों को लेकर पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने विचार साझा किए ।

    पर्यटन मंत्री की रणनीति

    जब पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पद संभाला, तो देखा कि पर्यटन का 70% बजट धार्मिक स्थलों पर खर्च हो रहा है, जबकि बाकी पर्यटन क्षेत्र उपेक्षित हैं। उनका मकसद संतुलन बनाना है। साथ ही, एक और बड़ी समस्या यह थी कि झारखंड के ज्यादातर पर्यटन स्थल जंगलों में हैं, लेकिन पर्यटन और वन विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही थीं।

    इको-टूरिज्म को बढ़ावा

    सरकार ने जेईटीए (Jharkhand Eco-tourism Amenities) को पुनर्जीवित किया, जिसे 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया था। अब यह झारखंड के पर्यटन स्थलों में इको-टूरिज्म की नई तस्वीर पेश करेगा। साथ ही, संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFMC) में महिलाओं की भागीदारी 33% से बढ़ाकर 50% करने का फैसला लिया गया है।

    स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग

    पर्यटन और आतिथ्य उद्योग को मजबूत करने के लिए होटल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। स्थानीय युवाओं को पेशेवर ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि झारखंड के पर्यटन स्थलों पर बेहतरीन सेवा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, होमस्टे कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बजट ट्रैवलर्स के लिए भी राज्य को आकर्षक बनाया जा सके।

    राजस्व मॉडल और नई योजनाएं

    इको-टूरिज्म से होने वाली आय का 60% जेईटीए को मिलेगा और 40% जेएफएमसी को, ताकि स्थानीय समुदायों को रोजगार मिल सके। इसके अलावा, झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केरल और ओडिशा के सफल मॉडल्स को अपनाया जा रहा है।

    नेतरहाट फेस्टिवल: झारखंड की पहचान

    गुजरात के कच्छ उत्सव से प्रेरित होकर झारखंड सरकार ‘नेतरहाट उत्सव’ शुरू कर रही है, जो 15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा। इसमें 80% स्थानीय खानपान होगा, और झारखंड की संस्कृति को दुनिया के सामने लाने का मौका मिलेगा।

    झारखंड का नया सफर

    बदलाव की यह लहर केवल झारखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए भी एक नया आयाम साबित होगी। पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की इस मुहिम में झारखंड खुद को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

     

  • रिश्वत लेते दारोगा रंगे हाथ गिरफ्तार !

    एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची में कोतवाली थाना के दारोगा ऋषिकांत को 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। दारोगा पर आरोप था कि वे एक व्यक्ति का जब्त मोबाइल छुड़ाने के बदले घूस मांग रहे थे।

    क्या है पूरा मामला?

    रांची के कोतवाली थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसका एक महंगा मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। केस की जांच कर रहे दारोगा ऋषिकांत ने पीड़ित से मोबाइल वापस देने के लिए 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

    पीड़ित के भाई को यह नागवार गुजरा और उसने सीधा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलते ही हरकत में आई एसीबी

    पीड़ित की शिकायत पर एसीबी ने तुरंत मामले की जांच शुरू की। जब दारोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए, तो ACB ने जाल बिछाया।

    शिकायतकर्ता को ACB द्वारा पहले से निशान लगाए गए 5,000 रुपये के साथ दारोगा के पास भेजा गया। जैसे ही दारोगा ने पैसे लिए, वहां पहले से घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

    अब होगी बड़ी कार्रवाई!

    फिलहाल एसीबी की टीम दारोगा से सघन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं।

  • गिरिडीह: वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, 15 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद!

    गिरिडीह पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ वाहन चोर जिले में सक्रिय हैं। इस इनपुट के आधार पर पुलिस अधीक्षक डॉक्टर बिमल कुमार  के निर्देश पर पचम्बा थाना क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इसी दौरान शाम करीब 4:50 बजे बनखंजो पुल के पास एक संदिग्ध बाइक सवार को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस को देखते ही वह बाइक छोड़कर भागने लगा, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने तुरंत पीछा कर उसे धर दबोचा।

    गिरफ्तार चोर का खुलासा!

    पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अभिषेक कुमार वर्णवाल उर्फ गोलू (24) बताया, जो गिरिडीह जिले के शास्त्रीनगर में रह रहा था। जब पुलिस ने बाइक के वैध कागजात मांगे, तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। सख्ती से पूछने पर उसने कबूल किया कि यह बाइक 18 फरवरी 2025 को भंडारीडीह से चोरी की गई थी। इतना ही नहीं, उसने ये भी माना कि गिरिडीह के पचम्बा, नगर, मुफ्फसिल और अन्य थाना क्षेत्रों से कई और मोटरसाइकिलें चोरी की गई हैं।

    घर की पार्किंग से मिलीं 5 बाइक!

    अभिषेक ने बताया कि उसने चोरी की बाइक अपने शास्त्रीनगर स्थित घर में छिपा रखी हैं। पुलिस ने उसके बताए ठिकाने पर छापेमारी की, जहां 5 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गईं।

    और भी चौंकाने वाला खुलासा!

    अभिषेक ने पुलिस को बताया कि कुछ चोरी की बाइक चंद्रमंडी थाना क्षेत्र के ग्राम सिमरा निवासी लाला पासवान उर्फ लखन पासवान के पास हैं, जबकि कुछ बाइकों को चंद्रमंडी के ग्राम बाम्दा के जंगल में छिपाया गया है।

    जंगल और साथी के घर से मिलीं और मोटरसाइकिलें

    पुलिस ने तुरंत दोनों जगह छापेमारी की और 9 और बाइक बरामद कर लीं—
    ✅ लाला पासवान के घर से 5 बाइक
    ✅ सुनसान जंगल से 4 बाइक

    कुल 15 चोरी की बाइक बरामद, जांच जारी!

    अब तक कुल 15 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की जा चुकी हैं, और बाकी चोरी की गाड़ियों की तलाश में छापेमारी जारी है।

    अभिषेक कुमार वर्णवाल उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर लिया गया है, और उसके खिलाफ पचम्बा थाना में कांड संख्या 26/25, दिनांक 27.02.2025 को धारा 303(2)/317(5)/210(a)/336(3) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।