Blog

  • कल्पना मुर्मू सोरेन होगी JMM की नई कार्यकारी अध्यक्ष !

    झारखंड की राजनीति में नया अध्याय

    झामुमो के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन का उद्घाटन सत्र

    परवेज़ आलम

    झारखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गांडेय से विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नई कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा। यह जानकारी झामुमो के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन के दौरान सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को होगी ।

    झामुमो के महाधिवेशन का दृश्य भावुक करने वाला रहा.

    रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय महाधिवेशन का उद्घाटन 14 अप्रैल को हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन, जो अब 81 वर्ष के हो चुके हैं, व्हीलचेयर पर बैठकर मंच पर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी रूपी सोरेन भी थीं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद अपने माता-पिता को उनके आवास से महाधिवेशन स्थल तक पहुंचाया। इस क्षण की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें हेमंत सोरेन अपने पिता की व्हीलचेयर को संभालते नजर आए।

    एक नई विरासत की शुरुआत.

    .झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन अब सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे पीछे हट रहे हैं। ऐसे में पार्टी की बागडोर अगली पीढ़ी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कल्पना सोरेन का कार्यकारी अध्यक्ष बनना न सिर्फ परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि महिला नेतृत्व को भी एक नई पहचान देने वाला बदलाव माना जा रहा है।

    हेमंत सोरेन का भावनात्मक संदेश.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महाधिवेशन के अवसर पर सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा:

    “झारखंड ही नहीं, पूरे देश-दुनिया के लोग आदरणीय दिशोम गुरुजी को आदर-सम्मान की नजरों से देखते हैं। उनके नेतृत्व और असंख्य क्रांतिकारियों के संघर्ष के बाद हमें अलग राज्य मिला। अब हमें उस आंदोलन की जड़ों को और सींचना है, उसे जन-जन तक पहुंचाना है।”

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भविष्य की दिशा.

    महाधिवेशन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य का गठन असंख्य बलिदानों के बाद हुआ है। उन्होंने याद किया कि कैसे शिबू सोरेन के नेतृत्व में हजारों लोग आंदोलन में शामिल हुए और अपनी जान गंवाई। उन्होंने यह भी कहा कि अलग राज्य बनने के बाद राज्य के विकास पर बहुत कम चर्चा हुई और इसकी कमान ऐसे हाथों में गई जो यहां के लोगों के प्रतिनिधि नहीं थे।

    संगठनात्मक प्रस्ताव और भविष्य की रणनीति.

    इस महाधिवेशन में पूर्व उपमुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी ने पार्टी का राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें जातिगत जनगणना, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, 1932 की स्थानीय नीति और परिसीमन के विरोध को प्रमुखता दी गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अपने संगठन का विस्तार करेगी।

    भाजपा पर निशाना.

    स्टीफन मरांडी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हेमंत सोरेन के खिलाफ साजिशें रचीं, केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया और उन्हें गलत आरोपों में जेल भेजा गया। इसे उन्होंने लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताया।

    वक्फ अधिनियम और आदिवासी अधिकार.

    महाधिवेशन में वक्फ अधिनियम संशोधन के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित किया गया। झामुमो ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया और कहा कि इस कानून को झारखंड में लागू नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, पार्टी ने जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों और मूलवासियों के हक की बात दोहराई।

    लोकसभा चुनाव की तैयारी.

    महाधिवेशन में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि पार्टी अब पंचायत से लेकर लोकसभा तक भाजपा की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। महाधिवेशन के दौरान झामुमो की सांगठनिक रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखा गया।
    कल्पना मुर्मू सोरेन को JMM की कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर झारखंड की राजनीति में एक नई दिशा और नई उम्मीद के तौर पर देखी जा रही है। इससे एक ओर जहां पार्टी की आंतरिक संरचना मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर राज्य की जनता में यह संदेश जाएगा कि झामुमो परिवार संघर्ष की विरासत को अब नई पीढ़ी के नेतृत्व में आगे बढ़ाने को तैयार है।

     

  • झारखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: ऑडिट रिपोर्ट नहीं देने वाली संस्थाओं की जाएगी मान्यता

    विवाद सुलझाने के लिए जिलों के दौरे पर जाएंगी कमेटियां. 

    परवेज़ आलम 

    रांची – झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड नेअपनी संपत्तियों को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उन तमाम संस्थाओं की मान्यता रद्द कर दी जाएगी, जो वक्फ संपत्तियों पर वर्षों से काम तो कर रही हैं, लेकिन अपनी ऑडिट रिपोर्ट या वित्तीय हिसाब-किताब बोर्ड को नहीं सौंप रही हैं। हालांकि, अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित संस्थाओं को चेतावनी पत्र भेजा जाएगा।

    यह निर्णय राज्य के सांसद सरफराज अहमद की अध्यक्षता में राजधानी रांची में आयोजित वक्फ बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि सबसे पहले ऐसी संस्थाओं की सूची तैयार की जाएगी, जो वक्फ बोर्ड की जमीन या संपत्तियों पर कार्यरत हैं। इसके बाद उनसे अब तक का वित्तीय लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट मांगी जाएगी। आदेशों की अवहेलना करने पर संबंधित संस्थाओं की मान्यता समाप्त  कर दी जाएगी।

    विवादों को सुलझाने के लिए दौरे पर जाएगी विशेष कमेटी.

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वक्फ संपत्तियों को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में जो विवाद चल रहे हैं, उन्हें सुलझाने के लिए विशेष कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी 19 अप्रैल को गिरिडीह और 22 अप्रैल को चाईबासा का दौरा करेगी। गिरिडीह में कमेटी के सदस्य पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, ए.के. रसीदी और मोहम्मद फैजी शामिल होंगे।

    वहीं, चाईबासा दौरे में कमेटी में ए.के. रसीदी, मोहम्मद फैजी, महबूब आलम और इबरार अहमद मौजूद रहेंगे। इन दौरों का मकसद संबंधित क्षेत्रों में वक्फ संपत्ति को लेकर चल रहे विवादों को सुलझाना है, ताकि स्थानीय मुस्लिम समु दाय के हित सुरक्षित रह सकें।

    अंजुमन कमेटियों से भी होगी बातचीत.

    बैठक में राजधानी रांची स्थित अंजुमन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। तय हुआ कि इन मामलों को सुलझाने के लिए अंजुमन की विभिन्न कमेटियों से वार्ता की जाएगी। इस दौरान बैठक में पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, सामाजिक कार्यकर्ता इबरार अहमद, मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी, शकील अख्तर, ए.के. रशीदी, मोहम्मद फैजी, सरकार के संयुक्त सचिव आसिफ हसन सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

    “झारखंड में वक्फ कानून लागू नहीं होगा” – डॉ इरफान अंसारी

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वक्फ कानून में संशोधन कर मुस्लिम समुदाय को परेशान करने की साजिश कर रही है। डॉ अंसारी ने कहा, “भाजपा सरकार ने वक्फ संशोधन कानून लाकर मुसलमानों के अधिकारों को छीनने की कोशिश की है। यह कानून जनविरोधी है और इसका झारखंड में किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा।”

    उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कानूनों से मुस्लिम समाज को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है और भाजपा का मकसद जनहित नहीं, बल्कि समुदाय विशेष को निशाना बनाना है।

     

  • गिरिडीह को मिली नई स्वास्थ्य सौगात: मर्सी हॉस्पिटल का भव्य शुभारंभ, एक सपने की हुई पूर्ति

    परवेज़ आलम .

    गिरिडीह : जिलेवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों ही रहा। वर्षों से जिस स्वास्थ्य सुविधा की कमी महसूस की जा रही थी, वह आज पूरी हुई। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह के पहले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल मर्सी हॉस्पिटल का भव्य उद्घाटन किया। समारोह में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे और माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीद.

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में कहा, “मर्सी हॉस्पिटल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि गिरिडीह और आसपास के जिलों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद है। यह अस्पताल वह चिकित्सा सुविधाएं देगा, जो अब तक केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं।”

    मर्सी हॉस्पिटल में मरीजों को वही तकनीक और सेवाएं मिलेंगी जो देश के बड़े मेट्रो शहरों में उपलब्ध हैं। इसका लाभ न केवल गिरिडीह के लोग उठाएंगे, बल्कि कोडरमा, हजारीबाग, धनबाद जैसे आसपास के जिले भी इससे लाभान्वित होंगे।

    एक सपने की कहानी: डॉ. अमित गोंड का संकल्प.

    इस अस्पताल की नींव एक स्वप्न पर रखी गई थी — स्वर्गीय डॉ. अमित गोंड का सपना, जो चाहते थे कि गिरिडीह के लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने इस सपने के लिए जीवन भर मेहनत की, पर दुर्भाग्यवश, उद्घाटन से ठीक पहले उनका असमय निधन हो गया।

    हालांकि, यह सपना वहीं नहीं रुका। डॉ. गोंड के परिवार ने इसे अपना मिशन बना लिया। रंजीत कुमार गौड, सुमित कुमार गोंड, नीरज शाहबादी, विश्वजीत सिंह (गुड्डू सिंह) और साहिल सलूजा ने अस्पताल के कार्य को आगे बढ़ाया और आज यह दिन उनके प्रयासों और दृढ़ निश्चय का प्रतीक बन गया।

    तीन चरणों में होगी सेवाओं की शुरुआत. 

    मर्सी हॉस्पिटल के सीईओ संजीत नायक ने बताया कि अस्पताल को तीन चरणों में पूरी तरह कार्यशील किया जाएगा:

    1. प्रथम चरण में –
      ओपीडी, अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब, डायलिसिस यूनिट, डेंटल विभाग, सीटी स्कैन, टीएमटी जैसी सेवाएं चालू कर दी गई हैं।
    2. द्वितीय चरण में –
      इमरजेंसी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु और व्यस्क आईसीयू, स्त्री रोग विभाग, एंडोस्कोपी एवं सामान्य सर्जरी यूनिट शुरू की जाएंगी।
    3. तृतीय चरण में –
      कार्डियोलॉजी, एंजियोग्राफी, हार्ट कैथ लैब जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे गिरिडीह मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

    समाज का व्यापक समर्थन. 

    इस ऐतिहासिक अवसर पर शहर के तमाम गणमान्य नागरिक निर्मल शाहबादी,अभय शाहबादी,रितेश शाहबादी, वैभव शाहबादी, रमेश प्रभकर, दिलीप झा,सईद अख्तर , अजित कुमार पप्पू ,सरदार चरणजीत सिंह , अधिवक्ता परवेज़ आलम ,चुननु कान्त , दीपक सवर्णकार, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर्स और सैकड़ों की संख्या में आम जनता उपस्थित रही। यह दिन न केवल एक अस्पताल के उद्घाटन का था, बल्कि गिरिडीह के भविष्य की एक नई शुरुआत का प्रतीक भी था।

  • भोगनाडीह में गूंजा वीर सिदो-कान्हू का जयघोष, शामिल हुये सीएम

    रांची : साहिबगंज जिले के ऐतिहासिक गांव भोगनाडीह की फिज़ाओं में एक बार फिर शहीद सिदो-कान्हू के बलिदान की गूंज सुनाई दी। वीरता, संघर्ष और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक अमर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  शुक्रवार  को उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने भावुक होकर क्रांतिकारियों के योगदान को नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने इस शुभ अवसर पर कई विकास योजनाओं का उद्घाटन भी किया, जिससे क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने सिदो-कान्हू के वंशजों से मिलकर उन्हें सम्मानित किया और कहा, “यह धरती सिर्फ शहीदों की नहीं, बल्कि हमारी पहचान की भी है। सिदो-कान्हू जैसे महानायक हमें न सिर्फ इतिहास की याद दिलाते हैं, बल्कि वर्तमान को दिशा भी देते हैं।”

    धरोहर का प्रतीक बने सिदो-कान्हू

    इतिहासकार बताते हैं कि 11 अप्रैल 1815 को सिदो मुर्मू का जन्म भोगनाडीह की पावन भूमि पर हुआ था। उनके छोटे भाई कान्हू मुर्मू के साथ मिलकर उन्होंने 1855 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया — एक ऐसा संघर्ष जो आज भी आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक बना हुआ है।

    हर वर्ष 11 अप्रैल को मनाई जाने वाली यह जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी अध्याय की पुनः स्मृति होती है। इस दिन को ‘छठीहार महा’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होकर वीरों के संघर्ष को श्रद्धांजलि देते हैं।

    देश-विदेश से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    भोगनाडीह में मनाया जाने वाला यह पर्व सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम से लेकर पड़ोसी देश नेपाल से भी संताल समाज के लोग यहाँ पहुंचते हैं। क्रांति की इस भूमि – पंचकठिया में परिक्रमा करते हैं और मांझी थान व जाहेर थान में पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों को स्मरण करते हैं।

    पूरे इलाके में गुरुवार रात से ही श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक गीतों की मिठास और हजारों लोगों की उपस्थिति ने इस पर्व को एक सांस्कृतिक महासंगम बना दिया।

     

  • खेलगांव बनेगा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का केंद्र- मंत्री सुदिव्य कुमार

    झारखंड की खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के खेल मंत्री सुदिव्य कुमार ने शुक्रवार को झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSSPS) के संचालन, खेलगांव के अपग्रेडेशन और प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने बैठक में दो टूक कहा कि खेलगांव केवल झारखंड की ही नहीं, बल्कि देश की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे विश्वस्तरीय मानकों पर बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि खेलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्थायी आयोजन स्थल बनाया जाए। आगामी 2025 सैफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तैयारियों के संदर्भ में उन्होने मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम का निरीक्षण कर मौजूदा अवसंरचना और सुविधाओं का मूल्यांकन भी किया। बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता है। मसलन, राज्य सरकार अतिथि प्रतिभागियों, दर्शकों एवं मेजबान प्रतिभागियों को उच्चकोटि का अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सपना है कि झारखंड में एक ऐसा खेल विश्वविद्यालय स्थापित हो, जो न केवल राज्य के युवाओं को बल्कि देश और विदेश के छात्रों को खेल शिक्षा के विभिन्न कोर्सों में अध्ययन का अवसर दे।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस दिशा में शुरुआती गति अपेक्षित नहीं रही है, जिसपर चिंता व्यक्त की गई।

    बैठक में मंत्री ने CCL के CMD से विशेष रूप से आग्रह किया कि कोल इंडिया लिमिटेड और CCL मिलकर इस दिशा में ठोस और त्वरित पहल करें, ताकि खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस पर CCL प्रमुख ने आश्वस्त किया कि खेलगांव के जीर्णोद्धार और खेल अधोसंरचना सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, और कोल इंडिया से समन्वय स्थापित कर जल्द ही कार्य योजना प्रस्तुत की जाएगी।

    JUIDCO के साथ परियोजना समीक्षा बैठक: शहरी विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश.

    शुक्रवार को ही  मंत्री सुदिव्य कुमार ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी () के अधिकारियों के साथ एक अलग बैठक की, जिसमें शहरी क्षेत्रों में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें स्मार्ट सिटी, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण, ड्रेनेज व्यवस्था और शहरी आवास योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल थीं।

    मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आम शहरी नागरिकों को शीघ्र सुविधा मिल सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी कार्य मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विकासपरक दृष्टिकोण के अनुरूप हों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

    सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है – एक सशक्त, स्मार्ट और खेल-प्रेरित झारखंड का निर्माण।

  • झारखंड की सियासत में बड़ा उलटफेर,ताला मरांडी ने छोड़ी भाजपा,जेएमएम मे शामिल

    परवेज़ आलम. 

    झारखंड की सियासत में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और 44 वर्षों बाद एक बार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में वापसी की।

    ताला मरांडी ने अपना इस्तीफा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को भेजा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि “मैं भाजपा का एक समर्पित सदस्य रहा हूं, पार्टी द्वारा दिए गए सभी अवसरों के लिए आभार प्रकट करता हूं। किंतु वर्तमान परिस्थितियों, व्यक्तिगत कारणों और वैचारिक मतभेदों के कारण मैंने यह निर्णय गहन विचार के बाद लिया है। इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं है।”

    हेमंत सोरेन की मौजूदगी में हुए शामिल। 

    भाजपा से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद ताला मरांडी ने भोगनाडीह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झामुमो की सदस्यता ग्रहण की। हेमंत सोरेन ने उन्हें पार्टी का पारंपरिक पट्टा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा, विधायक कल्पना सोरेन, हेमलाल मुर्मू, धनंजय सोरेन और मोहम्मद ताजुद्दीन जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    राजनीतिक सफर: झामुमो से शुरू, कांग्रेस और भाजपा के रास्तों से फिर लौटे घर.

    करीब 63 वर्षीय ताला मरांडी की राजनीतिक यात्रा काफी लंबी रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989-90 में एक झामुमो कार्यकर्ता के रूप में की थी। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए और 1995 व 2000 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके।

    साल 2003 में भाजपा में शामिल होने के बाद 2005 में पहली बार बोरियो विधानसभा सीट से विधायक बने। उन्होंने झामुमो के कद्दावर नेता लोबिन हेम्ब्रम को हराया। 2014 में उन्होंने एक बार फिर लोबिन को हराकर सीट पर कब्जा जमाया और पार्टी ने उन्हें 2016 में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि, कुछ महीनों बाद ही उन्हें पद से हटा दिया गया।

    2019 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने आजसू पार्टी का दामन थामा, लेकिन बोरियो से चुनाव हार गए। 2020 के बाद पुनः भाजपा में लौटे और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजमहल सीट से टिकट दिया, लेकिन वे विजय हांसदा से 1.5 लाख से अधिक मतों से हार गए।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि में बढ़ रही थी नाराजगी. 

    ताला मरांडी की नाराजगी की झलक 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले ही दिखाई देने लगी थी। पार्टी ने बोरियो सीट से एक बार फिर लोबिन हेम्ब्रम को टिकट दे दिया, जिससे वे बेहद असंतुष्ट थे। वहीं उनके बेटों ने पहले ही झामुमो की सदस्यता ले ली थी, जिससे यह संकेत मिल गया था कि परिवार का झुकाव अब झामुमो की ओर है। भाजपा से मोहभंग और लगातार उपेक्षा के चलते अब ताला मरांडी ने झामुमो की ओर वापसी कर ली है, जिसे वह “घर वापसी” कह रहे हैं।

    राजनीति में नई करवट या पुरानी राह की वापसी?

    ताला मरांडी की झामुमो में वापसी महज एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक सांकेतिक बदलाव की शुरुआत भी हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी यह घर वापसी झामुमो के लिए कोई बड़ा सियासी लाभ लेकर आएगी या फिर यह सिर्फ एक व्यक्तिगत यात्रा की पूर्णता भर है।

     

  • भगवान महावीर की जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा

    परवेज़ आलम

    गिरिडीह: अहिंसा, त्याग और करुणा का संदेश देने वाले 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की 2624वीं जयंती गुरुवार को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इसी क्रम में झारखंड के गिरिडीह और सरिया शहरों में भी जैन समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धा और आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

    सरिया में निकली भक्ति की गंगा

    सरिया के स्टेशन रोड से शुरू हुई शोभायात्रा में भगवान महावीर की सजीव झांकी दो विशेष वाहनों पर सजाई गई थी। रथों में विराजमान भगवान की मूर्ति को फूलों, रंग-बिरंगे कपड़ों और झूमरों से सजाया गया था। साथ ही बच्चों की टोली हाथों में जयकारों की तख्तियां लिए उत्साहपूर्वक नारे लगाते हुए चल रही थी — “जिओ और जीने दो”, “अहिंसा परमो धर्मः”।

    सरिया जैन समाज की अगुवाई में निकली इस शोभायात्रा में प्रमुख रूप से राजेश जैन, डिंपल जैन, संदीप जैन, विक्की जैन, अजित जैन, मोना जैन और संतोष जैन जैसे समाजसेवी शामिल रहे।

    गिरिडीह में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    वहीं गिरिडीह के बड़ा चौक से निकली शोभायात्रा में हजारों की संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमती रहीं, तो पुरुषों की टोली जयकारों के साथ आगे बढ़ती रही। एक विशेष आकर्षण रहा भगवान महावीर का घोड़े पर सुसज्जित रथ, जिसमें अष्टधातु की मूर्ति को नगर भ्रमण कराया गया।

    हर गली में बिखरी भक्ति की रोशनी

    शहर की गलियों से गुजरते हुए शोभायात्रा ने मानो पूरा गिरिडीह को भक्ति के रंग में रंग दिया। मंदिर से निकलते ही रथ की आरती की गई और भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दो घोड़ों पर सवार युवक शोभायात्रा का प्रहरी स्वरूप में नेतृत्व करते नजर आए।

    समापन पर जलाभिषेक और भंडारे का आयोजन

    शोभायात्रा के बाद मंदिर प्रांगण में भगवान महावीर स्वामी का जलाभिषेक कर विशेष पूजा अर्चना की गई। दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन हुआ और देर शाम तक आरती व अन्य धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।

    इस मौके पर महिला जैन समाज की सदस्य राजश्री जैन ने कहा, “भगवान महावीर का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब पूरा विश्व हिंसा और संघर्ष से गुजर रहा है, तब ‘जिओ और जीने दो’ का विचार हर घर तक पहुंचना चाहिए।”

    शोभायात्रा में शामिल हुए कई प्रमुख श्रद्धालु

    इस आयोजन में अशोक जैन, अंकित जैन, अजय जैन, पद्म जैन, विजय सेठी, अमित जैन, राजन जैन, अविनाश सेठी, सार्थक जैन और विनीता जैन समेत जैन समाज के अनेक गणमान्य श्रद्धालु शामिल हुए।

  • गांडेय की तस्वीर बदलने की पहल — विधायक कल्पना सोरेन ने किया विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    गिरिडीह (गांडेय) : गांडेय विधानसभा क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत करते हुए स्थानीय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने बुधवार को कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में चलंत चिकित्सा वाहन सेवा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का सशक्तिकरण और पेयजल आपूर्ति की नई परियोजनाएं शामिल हैं। ये सभी योजनाएं जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं और इनका उद्देश्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर विधायक का स्वागत स्थानीय जनता और झामुमो पार्टी के नेताओं द्वारा गर्मजोशी से किया गया। फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ के साथ उनका अभिनंदन हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे।

    जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने कहा,

    “गांव-गांव तक विकास पहुँचाना और जनसेवा को मजबूती देना ही मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
    उन्होंने आगे कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना ही उनके कार्यकाल का मुख्य उद्देश्य है।

    निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का भी उद्घाटन

    इसी दिन गांडेय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विजय शंकर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का उद्घाटन भी विधायक कल्पना सोरेन ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर इस शिविर का शुभारंभ किया।शंकर नेत्रालय एवं ओल्ड जेवरियंस एलुमनाई ट्रस्ट के सहयोग से 9 दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी शिविर की शुरुआत की गई, जहां हज़ारों ज़रूरतमंदों को मिलेगा मुफ़्त जाँच और ऑपरेशन का लाभ

    विधायक ने कहा:

    “गांडेय में पहली बार इस प्रकार का शिविर आयोजित किया गया है। इससे आम लोगों, विशेषकर गरीब और वंचित तबके को काफी लाभ मिलेगा।”
    उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और ज्यादा से ज्यादा लोग इस चिकित्सा सुविधा से जुड़ें।

    इस अवसर पर डीडीसी स्मृति कुमारी, सिविल सर्जन एस.पी. मिश्रा, बैरिस्टर फरदीन अहमद, , पूर्व विधायक केदार हाजरा, झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ,सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • रामनवमी को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की हाईलेवल बैठक, अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    परवेज़ आलम 

    रामनवमी पर्व के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को अपने आवासीय कार्यालय में राज्य की विधि-व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने या अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामनवमी का उत्सव पूरे राज्य में आपसी प्रेम, सौहार्द और शांति के साथ संपन्न हो। इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव गृह विभाग वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, एडीजी ऑपरेशन संजय आनंद राव लाटकर, आईजी ऑपरेशन एवी होमकर, आईजी स्पेशल ब्रांच प्रभात कुमार और जिलों के डीसी, एसएसपी, एसपी उपस्थित रहे.

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चौकसी के निर्देश

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि रामनवमी के दौरान शोभायात्रा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं, इसलिए कुछ क्षेत्रों में यह समय संवेदनशील हो जाता है। ऐसे चिन्हित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही सभी अखाड़ा समितियों को हाईकोर्ट द्वारा डीजे बजाने को लेकर दिए गए आदेश की प्रति अवश्य उपलब्ध कराई जाए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई अखाड़ा समिति हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी, इसकी जानकारी पहले से उन्हें दे दी जाए। शोभायात्रा के दौरान CCTV और ड्रोन कैमरे से निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    बाइक रैली पर पूरी तरह रोक

    सीएम सोरेन ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्राओं के साथ बाइक रैलियों की परंपरा शुरू हो गई है, जिसे किसी भी हाल में अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी बाइक रैलियां आम जनता की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, इसलिए इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

    कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश

    मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा और निर्देश दिए कि जुलूस या शोभायात्रा के दौरान कहीं भी किसी तरह की अशांति दिखे तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस मुख्यालय और कंट्रोल रूम को दी जाए। छोटी घटनाओं पर भी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए म्यूजिक सिस्टम कुछ देर के लिए बंद कराया जाए।

    हजारीबाग और गिरिडीह में विशेष सुरक्षा व्यवस्था

    हाल ही में दो समुदायों के बीच हुई झड़प को देखते हुए हजारीबाग और गिरिडीह जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने 25 डीएसपी रैंक के अधिकारियों की विशेष रूप से तैनाती की है जो 8 अप्रैल तक सुरक्षा की कमान संभालें रहेंगे ।

    हजारीबाग के लिए नियुक्त 20 डीएसपी में शामिल हैं:

    हीरालाल रवि, मजरुल होदा, संजय कुमार (1), सुनील कुमार रजवार, संदीप गुप्ता, दिलीप खलखो, सतीश झा, कुलदीप टोपनो, भूपेंद्र राउत, विजय रंजन कुमार, संजय कुमार (2), रोहित रजवार, मनोज राय, राजीव कुमार, रविंद्र सिंह, राजकुमार यादव, पूनम मिंज, अजय केसरी, राजेंद्र दुबे, मनीष चंद्रलाल।

    गिरिडीह के लिए नियुक्त 5 डीएसपी:

    तालो सोरेन, अनूप केरकेट्टा, बेनेडिक्ट मरांडी, कपिंद्र उरांव, प्रमोद सिंह।

    गिरिडीह में फ्लैग मार्च निकाला गया

    रामनवमी से पहले गिरिडीह में सुरक्षा का जायजा लेने के लिए एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में शुक्रवार को फ्लैग मार्च निकाला गया। यह मार्च शहर के बड़ा चौक, मुस्लिम बाजार, मौलाना आजाद चौक, कालीबाड़ी, मकतपुर चौक, कचहरी रोड, टावर चौक होते हुए कंट्रोल रूम तक पहुंचा। इस दौरान स्थानीय लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है और किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

    330 लोगों को दिया गया नोटिस

    रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गिरिडीह ज़िले  के विभिन्न हिस्सों में 330 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। इनसे कहा गया है कि अगर किसी तरह की गड़बड़ी में उनकी संलिप्तता पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • जमशेदपुर: सैनिक की पिटाई पर DGP का कडा ऐक्शन, पूरा थाना सस्पेंड

    सैनिक और उनके भाई की पिटाई और जेल भेजने के मामले में एक्शन ,

    जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र में 14 मार्च को बागबेड़ा डीबी रोड निवासी सैनिक सूरज राय और उनके चचेरे भाई विजय राय के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घटना को लेकर पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद अब पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुये थाना आठ पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित कर दिया है ।

    एसएसपी ने की कार्रवाई

    इस गंभीर मामले में जांच के बाद जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) किशोर कौशल ने शुक्रवार को जुगसलाई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार दास सहित कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पांच दारोगा – दीपक कुमार महतो, तापेश्वर बैठा, शैलेंद्र कुमार नायक, कुमार सुमित, मंटू कुमार – और दो कांस्टेबल – शैलेश कुमार सिंह और शंकर कुमार – शामिल हैं।

    सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से गोलमुरी पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

    आईजी ने की थी जांच, रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी गई

    घटना के बाद मामला राज्य पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। डीजीपी के निर्देश पर रांची प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अखिलेश कुमार झा ने जमशेदपुर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के बाद उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी, जिसके आधार पर उक्त निलंबन की कार्रवाई की गई।

    पूर्व सैनिकों का आंदोलन, रक्षा मंत्रालय तक पहुंचा मामला

    घटना के बाद पूर्व सैनिकों में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने इस कृत्य को सैनिक के सम्मान का अपमान बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जुगसलाई थाना और उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। पूर्व सैनिकों का आरोप था कि सैनिक की गिरफ्तारी के बाद सेना की स्थानीय यूनिट या जम्मू यूनिट को नियमानुसार कोई सूचना नहीं दी गई, जो रक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मामला रक्षा मंत्रालय और आर्मी मुख्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद आर्मी के अधिकारी रांची से जमशेदपुर पहुंचे और मामले की जानकारी ली।

    घटना की असलियत आई सामने: निजी चालक के विवाद से शुरू हुआ मामला

    आईजी द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरज राय और विजय राय के साथ-साथ नीरज रजक नामक एक युवक की भी बिना किसी ठोस कारण के पिटाई की गई थी। दरअसल, घटना की शुरुआत थाना के निजी चालक अभिषेक उर्फ छोटू बिल्ला के बस्ती के एक युवक से हुए विवाद से हुई थी। यह युवक विजय राय का दोस्त था।

    इस विवाद की सूचना मिलने पर चालक ने अपने नजदीकी संबंधों का लाभ उठाते हुए जुगसलाई थाना प्रभारी को पूरे घटनाक्रम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और सूरज राय व विजय राय को थाने बुलवाया गया। थाने में चालक और सूरज राय के बीच बहस हुई, जिसके बाद सूरज, विजय और नीरज के साथ मारपीट की गई और आनन-फानन में सूरज व विजय को जेल भेज दिया गया।

    एक और विवाद: होली के दिन की घटना भी जुड़ी

    जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना से पहले कपाली ओपी के पुलिसकर्मी सोनू कुमार होली के दिन अपनी पत्नी के साथ बागबेड़ा एमई स्कूल रोड होते हुए नया बस्ती पुल से गुजर रहे थे, जहां कुछ युवक शराब पी रहे थे। सोनू कुमार की गाड़ी को रास्ते में रोक दिया गया, जिसकी सूचना उन्होंने जुगसलाई थाना प्रभारी को दी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद निजी चालक ने मौके पर पहुंचकर नीरज रजक के साथ मारपीट की।

    न्याय की ओर बढ़ता कदम

    इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा की गई मनमानी और नियमों की अवहेलना सामने आने के बाद जबरदस्त जनदबाव बना। विरोध के बाद सूरज राय और विजय राय को अदालत से जमानत मिल गई। अब पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून के रखवालों को भी नियमों का पालन करना होगा।